samacharsecretary.com

नीतीश सरकार की ‘डोरस्टेप’ से बुर्जुग अब घर बैठे करेंगे जमीन की रजिस्ट्री

पटना. बिहार में बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए जमीन रजिस्ट्री अब बोझ नहीं, सुविधा बनने जा रही है. बिहार सरकार ने जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा शुरू करने का फैसला किया है. 1 अप्रैल से ई-निबंधन पोर्टल में बदलाव के साथ यह नई व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग मात्र ₹400 शुल्क देकर घर से ही जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे. क्यों जरूरी था यह बदलाव? अब तक जमीन रजिस्ट्री के लिए लोगों को रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे. बुजुर्ग, बीमार या चलने-फिरने में असमर्थ लोगों के लिए यह प्रक्रिया बेहद कठिन थी. कई मामलों में रजिस्ट्रार या नियुक्त कर्मियों की उपलब्धता पर प्रक्रिया निर्भर रहती थी, जिससे देरी और असुविधा होती थी. सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उम्रदराज लोगों को जमीन रजिस्ट्री के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कैसे मिलेगी घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा नई व्यवस्था के तहत ई-निबंधन पोर्टल के सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जा रहा है. पात्र आवेदक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करेंगे, जिसके बाद तय तारीख पर निबंधन कार्यालय से अधिकृत अधिकारी आवेदक के घर पहुंचेंगे. वहीं पर फोटो, बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के बाद रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके लिए मात्र ₹400 का नाममात्र शुल्क लिया जाएगा. किसे मिलेगा इस योजना का लाभ यह सुविधा खासतौर पर 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए शुरू की जा रही है. इसके साथ ही ऐसे लोग जो शारीरिक रूप से असमर्थ हैं या जिनके पास देखभाल के लिए कोई परिजन नहीं हैं, उन्हें भी इस व्यवस्था से बड़ी राहत मिलेगी. आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों की संख्या करीब 48 लाख से ज्यादा है, ऐसे में यह कदम लाखों परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा. सरकार का कहना है कि यह पहल “डिजिटल ईज ऑफ लिविंग” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. जमीन रजिस्ट्री जैसी जटिल प्रक्रिया को सरल बनाकर आम नागरिकों का समय, पैसा और श्रम बचाने की कोशिश की जा रही है. रजिस्ट्री पूरी होने के बाद दस्तावेज डिजिटल रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी. फरवरी में पूरा होगा सिस्टम अपडेट ई-निबंधन पोर्टल के तकनीकी अपडेट का काम फरवरी में पूरा कर लिया जाएगा, ताकि 1 अप्रैल से यह सुविधा राज्यभर में सुचारू रूप से लागू हो सके. सभी निबंधन कार्यालयों को इसके लिए आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

राज्य में दो साल में ही बने 8 लाख से अधिक मकान, 17 लाख 60 हजार आवास हुए पूर्ण, बस्तर संभाग में लंबित विकास योजनाओं को पूर्ण करने बनेगी विशेष रणनीति

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण की गति अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल,मोर गांव मोर पानी महाअभियान जल सरंक्षण में महत्वपूर्ण योगदान रोजगार एवं स्वाबलंबी युक्त ग्राम पंचायत बनाना हमारी सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण के लागू होने से गांवों में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ेगी। इसके लिए हमने बजट में लगभग डेढ़ गुणा अधिक स्वीकृति प्रदान की है। उक्त बाते केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री   शिवराज सिंह चौहान ने कही।   चौहान ने छत्तीसगढ़ में तेजी से बन रहे आवास निर्माण की गति की प्रशंसा करते हुए अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बताया। उन्होंने आवास निर्माण के साथ ही गांव गांव में चलाएं गए मोर गांव मोर पानी महाअभियान की भी सराहना करते हुए जल सरंक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने की बात कही। उन्होंने प्रदेश में और अधिक लखपति दीदी के माध्यम से महिलाओं को अधिक से अधिक स्वसहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने एवं मजदूरी भुगतान किसी भी स्थिति में लंबित नहीं करने के निर्देश प्रदेश के अधिकारियों को दिए है। इसके साथ ही बस्तर संभाग में लंबित परियोजना को पूर्ण करने के लिए विशेष रणनीति बनाने के निर्देश उच्च अधिकारियों दिए हैं। उन्होंने कहा बस्तर लंबे अरसे से विकास से दूर रहा है। प्रधानमंत्री   नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम बस्तर के समग्र विकास के लिए आगे बढ़कर कार्य करेंगे।  इस दौरान   चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजिविका मिशन बिहान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएमजनमन एवं आरसीपीएलडब्ल्यूईए योजनाओं का विस्तृत समीक्षा किए। उन्होंने प्रदेश में एनआरएलएम में रिक्त पदों शीघ्र भर्ती कराने के निर्देश प्रदेश के अधिकारियों को दिए हैं। केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज मंत्रालय महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। इस दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री   विजय शर्मा एवं कृषि मंत्री   रामविचार नेताम उपस्थित रहें। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य में  प्रधानमंत्री आवास के लिए 24.58 लाख को स्वीकृति मिली है। जिसमें से 17.60 लाख आवास का निर्माण पूर्ण हो चुके है। इसके साथ ही पीएमजनमन के तहत 33,246 स्वीकृत में 18,373 पूर्ण, विशेष परियोजना आत्मसमर्पित नक्सली के 3416 मकान स्वीकृत किए गए है। अभी सरकार गठन के बाद ही दो सालों में ही 8.41 आवास निर्माण पूर्ण किए है जो पूरे देश में अव्वल है। लखपति दीदी के माध्यम से अब तक प्रदेश में 8000 से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनीं है। इसके साथ ही 5000 से अधिक राज्य में मिस्त्री को प्रशिक्षण, डेढ़ लाख से अधिक आवासों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इसके साथ ही प्रदेश में हो रहे नवाचार, क्यूआर कोड, दीदी के गोठ, छत्तीस कला की जानकारी दी गई।  इस बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग  मती निहारिका बारिक सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित दिल्ली से आए विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

आईईडी ब्लास्ट में घायल जवानों से अस्पताल में की मुलाकात

रायपुर. चिकित्सकों से उपचार की जानकारी लेकर परिजनों से की चर्चाचिकित्सकों से उपचार की जानकारी लेकर परिजनों से की चर्चाचिकित्सकों से उपचार की जानकारी लेकर परिजनों से की चर्चा उपमुख्यमंत्री   विजय शर्मा शनिवार शाम रायपुर के एक निजी अस्पताल पहुँचे, जहाँ उन्होंने बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्रेगुट्टा पहाड़ी में हुए आईईडी ब्लास्ट में घायल पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों से घायलों के उपचार की स्थिति की जानकारी ली तथा जवानों के परिजनों से भी चर्चा की। चिकित्सकों से उपचार की जानकारी लेकर परिजनों से की चर्चा उपमुख्यमंत्री   शर्मा ने घायल जवानों से घटना की जानकारी ली और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि शासन एवं प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है। उन्होंने अस्पताल में उपस्थित अधिकारियों एवं चिकित्सकों को निर्देश दिए कि जवानों के बेहतर एवं समुचित उपचार हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ।  उन्होंने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान में तैनात हमारे जवान अत्यंत साहस और समर्पण के साथ देश-प्रदेश की सुरक्षा में लगे हैं, और उनका त्याग अतुलनीय है। ज्ञात हो कि बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्रेगुट्टा पहाड़ी में 25 जनवरी को एक के बाद एक कुल छह आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट हुए थे। इन विस्फोटों की चपेट में आने से डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के 12 जवान घायल हो गए थे। यह घटना उस समय हुई, जब सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम तेलंगाना सीमा से लगे कर्रेगुट्टा हिल्स क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। घटना के बाद सभी घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया, जहाँ उनका उपचार एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है। इनमें से 6 जवानों को उपचार उपरांत स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि शेष जवानों की स्थिति में भी लगातार सुधार हो रहा है।

बिहार में पछुआ हवाओं से कोहरे और बारिश की दोहरी मार

पटना. राज्य में कोहरे के साथ ठंड का प्रभाव बने रहने की संभावना है। बीते दिनों कुछ स्थानों पर वर्षा और हवा की गति में तेजी आने के कारण तापमान में गिरावट आई है। मौसम में बदलाव आने के साथ पटना सहित 30 जिलों के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पटना के अधिकतम तापमान में तीन डिग्री की गिरावट के साथ 21.3 डिग्री सेल्सियस एवं 25.2 डिग्री सेल्सियस फारबिसगंज का सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया।  16 जिलों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के 16 जिलों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। राज्य के बक्सर, भोजपुर, भभुआ, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, पूर्वी-पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर में घना कोहरे को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। पटना सहित अन्य भागों में पछुआ के कारण सुबह-शाम ठंड का प्रभाव बने होने के साथ आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। तीन फरवरी को दक्षिण पश्चिम भागों के बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद एवं अरवल जिले के कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा की संभावना है।  अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट अगले 24 घंटे के दौरान राज्य के अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट के आसार है। शुक्रवार को भागलपुर (सबौर) में सबसे कम न्यूनतम तापमान 10.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पटना का न्यूनतम तापमान 14.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राज्य का न्यूनतम तापमान 10.0 डिग्री सेल्सियस से 15.9 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। तीन सौ मीटर के साथ गयाजी में सबसे कम दृश्यता दर्ज की गई। शुक्रवार को पटना सहित आसपास इलाकों में पछुआ के कारण ठंड का प्रभाव पूरे दिन बना रहा।

हरियाणा में किसानों को आधार कार्ड से ही मिल जाएगा लोन

पंचकूला. किसानों को कृषि ऋण के लिए अब यहां-वहां धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। जल्द ही ग्रामीण क्रेडिट सिस्टम शुरू होगा, जिसमें किसानों को ऋण से जुड़े दस्तावेजों के लिए बैंकों और राजस्व कार्यालयों में नहीं भटकना पड़ेगा। कृषि ऋण लेने के लिए सिर्फ आधार नंबर की जरूरत होगी, जबकि जमीन से जुड़ी सभी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड से अपने आप मिल जाएगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रदेश सरकार जल्द ही रिजर्व बैंक आफ इंडिया के साथ एक एमओयू साइन करेगी। इस फ्रेमवर्क के तहत कृषि लोन की मंजूरी सीधे डिजिटाइज्ड जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी होगी। इससे वित्तीय संस्थानों और राजस्व प्रशासन के बीच बिना किसी रुकावट के समन्वय पक्का होगा। ‘पटवारी-तहसील-बैंक का जो पुराना सिस्टम था, जिसकी वजह से देरी होती थी, उसे खत्म कर दिया जाएगा। यह प्रोजेक्ट दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में किसान क्रेडिट कार्ड लोन पर ध्यान दिया जाएगा, जो हरियाणा में खेती के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला क्रेडिट साधन है। आधार प्रमाणीकरण के बाद मिलेगा लोन आधार प्रमाणीकरण के बाद जमीन का विवरण अपने आप मिल जाएगा। लोन से जुड़ी एंट्री अपने आप जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएंगी और भुगतान करने पर गिरवी की एंट्रीज तुरंत हटा दी जाएंगी। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय दखल के काम करेगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। दूसरे चरण में इस सिस्टम को बढ़ाकर सभी तरह के कृषि और ग्रामीण लोन को शामिल किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में एक यूनिफाइड डिजिटल क्रेडिट इकोसिस्टम बनेगा। इस पहल से सभी स्टेकहोल्डर्स को काफी फायदे होंगे। धोखाधड़ी से जुड़े जोखिम कम होंगे किसानों का समय बचेगा, उन्हें तेजी से क्रेडिट मिलेगा और लोन स्टेटस और जमीन के रिकॉर्ड की रियल-टाइम ट्रैकिंग से पूरी पारदर्शिता मिलेगी। बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों को रियल टाइम में वेरिफाइड जमीन का डेटा मिलेगा, जिससे धोखाधड़ी वाले आवेदनों से जुड़े जोखिम कम होंगे और परिचालन क्षमता (ऑपरेशनल एफिशिएंसी) बेहतर होगी। राजस्व प्रशासन को खुद-ब-खुद अपडेट होने वाले रिकार्ड, कम गलतियों और जमीन के रिकॉर्ड की बेहतर विश्वसनीयता से फायदा होगा।

मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में गिने जाएंगे आवारा कुत्ते

पटना. कुत्ता काटने की घटनाओं और अव्यवस्था को देखते हुए अब नगर निगम ने सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के साथ मिलकर आवारा कुत्तों पर नियंत्रण का फैसला किया है. इस अभियान की औपचारिक शुरुआत IGIMS से कर दी गई है. बुधवार से IGIMS परिसर में आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान शुरू हो गया है. इस पूरे अभियान के नोडल पदाधिकारी संस्थान के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल को बनाया गया है. नगर निगम और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम ने पहले दिन 10 कुत्तों को पकड़कर उनका रेबीज टीकाकरण कराया गया. नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान सिर्फ IGIMS तक सीमित नहीं रहेगा. PMCH, NMCH, पटना एम्स सहित राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और जिला अस्पतालों में आवारा कुत्तों की गिनती और नियंत्रण की प्रक्रिया शुरू होगी. इसका उद्देश्य अस्पताल परिसरों को सुरक्षित बनाना और मरीजों को डरमुक्त माहौल देना है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी सख्ती कुत्ता काटने के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत नगर निगम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि सभी सरकारी संस्थानों के परिसरों में मौजूद कुत्तों के लिए सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था की जाए. नगर निगम ने साफ कर दिया है कि आवारा कुत्तों का बोझ वह अकेले नहीं उठाएगा. सभी सरकारी और अर्द्ध-सरकारी संस्थानों को अपने परिसरों में मौजूद कुत्तों की गिनती कर रिपोर्ट सौंपनी होगी. इन्हीं आंकड़ों के आधार पर डॉग शेल्टर होम बनाए जाएंगे और संसाधन तय किए जाएंगे. विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान भी दायरे में नगर निगम की सूची में मेडिकल कॉलेजों के अलावा पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, IIT बिहटा समेत कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं. इन सभी को जल्द ही पत्र भेजकर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा जाएगा. आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए यह अभियान पटना में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. अगर यह मॉडल सफल होता है तो आने वाले दिनों में शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल सकती है.

लोकतंत्र से साक्षात्कार: स्कूल के विद्यार्थियों ने देखा लोकभवन

रायपुर. स्कूल के विद्यार्थियों ने देखा लोकभवन स्कूल के विद्यार्थियों ने देखा लोकभवन  राज्यपाल  रमेन डेका की पहल पर लोकभवन की गतिविधियों से जनसामान्य, विशेषकर विद्यार्थियों को जोड़ने के उद्देश्य से लोकभवन का भ्रमण कराया जा रहा है। इसी कड़ी में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रायपुर मठपारा के 50 छात्र-छात्राओं ने अपने शिक्षकों के साथ आज लोकभवन का भ्रमण किया।  विद्यार्थियों ने लोकभवन परिसर स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम, उदंती परिसर, कन्हार परिसर, डिस्पेंसरी उद्यान तथा सचिवालय की विभिन्न शाखाओं का अवलोकन किया। बच्चों ने राज्यपाल से मुलाकात कर सामूहिक फोटोग्राफी कराई।  इस अवसर पर राज्यपाल ने बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हुए उन्हें उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। सभी विद्यार्थियों को पौधे भेंट किए गए और उन्हें घर, स्कूल तथा गांव में पौधारोपण कर उनकी नियमित देखभाल करने का संदेश दिया गया।

जलेबी की मिठास और सांस्कृतिक झलक: फरीदाबाद में सूरजकुंड मेला शुरू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शामिल

फरीदाबाद  गोहाना की जलेबी की मिठास के साथ सूरजकुंड में 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव शुरू हो गया है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को 'लोकल से ग्लोबल- आत्मनिर्भर भारत' थीम पर आधारित इस मेले का उद्घाटन किया। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और राज्य के विरासत एवं पर्यटन मंत्री अरविंद कुमार शर्मा भी मौजूद थे। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के फरीदाबाद के सूरजकुंड पहुंचने पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने दीप प्रज्वलित करते हुए महोत्सव की शुरुआत की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सूरजकुंड अंतरराष्‍ट्रीय शिल्प मेला पर आधारित एक ऐप को भी लॉन्च किया। बाद में उपराष्ट्रपति समेत मंच पर उपस्थित अतिथियों को गोहाना की जलेबी खिलाई गई। सूरजकुंड मेले के उद्घाटन के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध लोक कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों ने प्रस्तुति दी। यह मेला 15 फरवरी तक चलेगा। यह आयोजन हरियाणा पर्यटन निगम और केंद्रीय पर्यटन, वस्त्र, संस्कृति और विदेश मंत्रालयों की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। सीएम नायब सिंह सैनी ने उद्घाटन समारोह में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी कला और शिल्प के उस महाकुंभ में साक्षी बनने जा रहे हैं, जिनकी न सिर्फ भारत, बल्कि पूरे विश्व में एक विशेष पहचान है। मैं इस मेले के भव्य उद्घाटन समारोह में अभिनंदन करता हूं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूरजकुंड मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम है। यहां हम उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, जो पिछले 38 वर्षों में कला और संस्कृति को जीवंत रखे हुए है। 39वें कार्यक्रम की थीम 'लोकल टू ग्लोबल' देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सपने का प्रतिबिंब है, जिसमें भारत के हर कोने में बैठे हुए हुनरमंद हाथ को वैश्विक बाजार से जोड़ना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर का अर्थ सिर्फ आर्थिक स्वतंत्रता नहीं है, इसमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना, अपनी विरासत को सहेजना और उसे दुनिया के सामने पेश करना भी शामिल है। सूरजकुंड मेला इसी आत्मनिर्भरता का जीता-जागता प्रमाण है।

किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों के कल्याण के लिए मिशन मोड में करें काम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन किसान रथ निकालें, उड़द और मूंगफली के अधिकाधिक उत्पादन को दें प्रोत्साहन कृषि वर्ष की गतिविधियों की करें नियमित मॉनिटरिंग मंडियों का करें भ्रमण, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर दें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के लिए सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को वीसी से दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं रोक, किसानों को जागरूक किया जाए कि वे खेत का भूसा गौशालाओं में पहुंचाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करें समन्वित प्रयास – पशुपालकों के लिए तैयार हो रहा एक ऐप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना पर करें अमल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं। फरवरी में डिण्डोरी में होगा कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम, मार्च में होगा राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत … Read more

मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा

सीएम योगी से मिले ‘गोदान’ फिल्म के निर्माता-निर्देशक, ट्रेलर लांच मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा गोरक्षा के संकल्प, भारतीय संस्कृति और पंचगव्य विज्ञान को बड़े पर्दे पर लाएगी ‘गोदान’ पंचगव्य से पंच परिवर्तन व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है फिल्म, 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होगी लखनऊ गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व और पंचगव्य आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर फिल्म का ट्रेलर लांच किया गया। फिल्म के निर्माता व निर्देशक ने स्पष्ट किया कि देश में गो-रक्षा को लेकर सबसे व्यापक, ठोस और जमीनी स्तर पर कार्य उत्तर प्रदेश में हुआ है, और इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन और प्रतिबद्ध नेतृत्व है। इन्हीं बातों ने उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के लिए प्रेरित किया। सीएम योगी के सत्ता संभालते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर शुरु हुआ ताबड़तोड़ एक्शन योगी आदित्यनाथ के सीएम बनते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरु हुआ और बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी की गई। गोवंश के प्रति मुख्यमंत्री के स्नेह और गो संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता का इसी बात से पता चलता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में साढ़े सात हजार से ज्यादा गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा चुके हैं। गो सेवा और उनके संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन किया गया है। हर जनपद के डीएम व एसएसपी इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया विनोद चौधरी द्वारा निर्मित व निर्देशित ‘गोदान’ फिल्म 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का समग्र दस्तावेज है। निर्माता ने मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया। गोरक्षा को लेकर सीएम योगी के अभूतपूर्व कार्य बने प्रेरणा फिल्म निर्माता विनोद चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान कहा कि आज देश में गो-रक्षा के क्षेत्र में जो ठोस कार्य दिख रहा है, उसका सबसे बड़ा केंद्र उत्तर प्रदेश है। प्रदेश में गोशालाओं का विस्तार, निराश्रित गोवंश की व्यवस्था, तस्करी पर सख्ती और गो संरक्षण को शासन की प्राथमिकता बनाना, ये सभी कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संभव हो पाए हैं। निर्माता विनोद चौधरी ने कहा कि जो दायित्व सामान्यतः समाज और हर नागरिक का होना चाहिए, उसे मुख्यमंत्री स्वयं उदाहरण बनकर निभा रहे हैं। गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा है, जो वैदिक काल से हमारे जीवन का आधार रही है। समुद्र मंथन से कामधेनु की प्राप्ति की कथा से लेकर आज तक गाय भारतीय सभ्यता की पोषक रही है। नई पीढ़ी को गाय के महत्व से जोड़ने का प्रयास विनोद चौधरी ने कहा कि नई युवा पीढ़ी धीरे-धीरे गाय के महत्व को भूलती जा रही है। दूध देने तक गाय को रखा जाता है और उसके बाद उसे छोड़ दिया जाता है, फिर यह कहा जाता है कि इसकी जिम्मेदारी सरकार निभाए। जबकि यह केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी नागरिकों का नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है कि गोमाता का पालन-पोषण करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाय हमारी माता है। जो लोग गाय को केवल पशु कहते हैं, वे स्वयं पशुता की मानसिकता में जी रहे हैं। जैसे मां हमें पोषण देती है, वैसे ही गाय संपूर्ण मानव समाज का पोषण करती है।   पंचगव्य से पंच परिवर्तन का संदेश फिल्म ‘गोदान’ में पंचगव्य से पंच परिवर्तन को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि पंचगव्य किस प्रकार मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। निर्माता के अनुसार, गाय पर हाथ फेरने मात्र से मानसिक शांति मिलती है, रक्तचाप संतुलित होता है और अनेक बीमारियों पर इसका प्रभाव पड़ता है। फिल्म में यह संदेश वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए फिल्म निर्माता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने की अपेक्षा भी व्यक्त की। उनका कहना था कि यह फिल्म किसी एक जाति, धर्म या वर्ग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए है। विशेषकर युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। स्कूल के बच्चों, परिवारों और समाज के हर वर्ग तक इसका संदेश पहुंचना चाहिए। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान विनोद चौधरी (निर्माता), शांतनु शुक्ला (प्रचार-प्रसार प्रमुख), डॉ. कपिल त्यागी (सीएमडी, यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा) और नवल किशोर उपस्थित रहे। प्रदेश में गो सेवा-संरक्षण के अभूतपूर्व प्रबंध गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि धरती, कृषि, प्रकृति और मानव जीवन, सभी के लिए गोमाता  सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। प्रदेश में गोसेवा और संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। गोमाता पर बनी यह फिल्म हर युवा, बच्चे और बुजुर्ग को सपरिवार देखनी चाहिए।