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नवीनतम सीटी एंजियोग्राफी सुविधा से लैस हुआ अम्बेडकर अस्पताल

रायपुर. अम्बेडकर अस्पताल में सीटी एंजियोग्राफी की अत्याधुनिक सुविधा शुरू पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में अब सीटी एंजियोग्राफी की अत्याधुनिक जांच सुविधा शुरू हो गई है। इसके अंतर्गत सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी, ब्रेन (सेरेब्रल), एब्डोमिनल, पेरिफेरल एवं पल्मोनरी एंजियोग्राफी जांच की जा रही है, जो नॉन इंवेसिव (Non-invasive) पद्धति पर आधारित है। विगत सप्ताह 29 मरीजों की विभिन्न बीमारियों में सीटी एंजियो जाँच हुई जिससे समय रहते उन्हें उचित उपचार मिला।  स्वास्थ्य मंत्री  ईटीवी भारत श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री  ईटीवी भारत विष्णुदेव साय की अगुवाई में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। आम नागरिकों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और दूरदराज़ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस सुविधा के प्रारंभ होने से हृदय, मस्तिष्क, पेट, हाथ-पैर एवं फेफड़ों से संबंधित गंभीर रोगों के शीघ्र, सटीक एवं विश्वसनीय निदान में मदद मिल रही है।   उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले मरीजों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों के लिए सभी जांचें निःशुल्क हैं। वहीं एपीएल श्रेणी के मरीजों के लिए ओपीडी में सीटी स्कैन ₹1000 एवं एमआरआई ₹2000 की दर से उपलब्ध है, जबकि भर्ती एपीएल मरीजों को ये जांच सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं।  रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक पात्रे ने बताया कि विभाग में उपलब्ध आधुनिक सीटी स्कैन मशीन एवं प्रेशर इंजेक्टर की सहायता से सभी जांच सेवाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि सीटी एंजियोग्राफी की प्रक्रिया कम समय में पूरी हो जाती है, मरीज को असुविधा नहीं होती। इसमें पारंपरिक एंजियोग्राफी की तुलना में रिकवरी टाइम भी कम होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी में कैथेटराइजेशन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह पारंपरिक एंजियोग्राफी की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक जांच है। सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी के माध्यम से हृदय की कोरोनरी धमनियों में होने वाले संकुचन एवं ब्लॉकेज का उच्च गुणवत्ता की विस्तृत (Detailed) 3D इमेजिंग के साथ आकलन किया जाता है। वहीं ब्रेन एंजियोग्राफी से मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों जैसे स्ट्रोक, एन्यूरिज्म एवं धमनी-शिरापरक विकृति (एवीएम) की सटीक जांच संभव हो पाती है। इस जांच में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज जांच के बाद सामान्य दिनचर्या में शीघ्र लौट सकता है।  उल्लेखनीय है कि सीटी एंजियोग्राफी एक आधुनिक जांच पद्धति है, जिसमें आयोडीन-आधारित कंट्रास्ट डाई की सहायता से शरीर की रक्त वाहिकाओं की स्पष्ट त्रि-आयामी (3D) तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं। पूरी जांच प्रक्रिया सामान्यतः 15 से 20 मिनट में पूर्ण हो जाती है।

गांव में प्रेशर IED विस्फोट, एक ग्रामीण गंभीर रूप से जख्मी

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों द्वारा जंगल में लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया. यह घटना उसूर ब्लॉक के इल्मीडी थाना क्षेत्र अंतर्गत लंकापल्ली के जंगलों में गुरुवार दोपहर की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार राजू मोडियाम पिता मुन्नी मोडियाम (उम्र 30 वर्ष) जंगल की ओर लकड़ी लाने गया हुआ था. इसी दौरान उसका पैर जमीन में प्लांट किए गए प्रेशर IED पर पड़ गया, जिससे जोरदार धमाका हुआ. विस्फोट में राजू के दाहिने पैर में गंभीर चोट आई. घटना के बाद साथ गए ग्रामीणों ने तत्काल घायल राजू को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया. फिलहाल जिला अस्पताल में उसका उपचार जारी है. घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और इलाके में सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया गया है. नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए IED की चपेट में निर्दोष ग्रामीण आने से क्षेत्र में दहशत का माहौल है.

नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से भेंट की

रायपुर. रायपुर के नवनियुक्त प्रथम पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा से की सौजन्य भेंट रायपुर के नवनियुक्त प्रथम पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने आज उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा से नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राजधानी रायपुर की कानून-व्यवस्था, शहरी सुरक्षा की चुनौतियों तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने नागरिक सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन एवं प्रशासनिक समन्वय को प्रभावी बनाने जैसे बिंदुओं पर भी विचार-विमर्श किया।        उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि राजधानी रायपुर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नागरिकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। नवनियुक्त कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने राजधानी की सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त की।

प्रशासनिक सर्जरी: पंजाब पुलिस के 4 अधिकारियों का ट्रांसफर, जानें किसे कहां भेजा गया

पंजाब पुलिस विभाग के सब-डिवीजन सुलतानपुर लोधी के अंतर्गत आने वाले चार पुलिस थानों के सभी एस.एच.ओ. अचानक बदल दिए गए हैं। एक साथ सभी एस.एच.ओ. के स्थानांतरण से पुलिस विभाग में हैरानी का माहौल है। जानकारी के अनुसार, जिला कपूरथला के एस.एस.पी. गौरव तूर के आदेश पर थाना फत्तूढींगा के एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह को थाना सुलतानपुर लोधी का नया एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया है। थाना तलवंडी चौधरी के एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर निर्मल सिंह को थाना कबीरपुर का एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया, थाना साइबर कपूरथला की एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर अमनदीप कौर को थाना फत्तूढींगा का एस.एच.ओ. बनाया गया, और पुलिस लाइन से इंस्पेक्टर अनिल कुमार को थाना तलवंडी चौधरी का एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया। इसके अलावा, थाना सुलतानपुर लोधी की पहली एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर सोनमदीप कौर को थाना सदर फगवाड़ा का एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहित्य उत्सव को बताया समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

रायपुर . साहित्य आशा, साहस और सामाजिक चेतना जागृत करने का सबसे सशक्त माध्यम : उप सभापति श्री हरिवंश राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु श्री देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया। उप सभापति श्री हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं।  उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है। उपसभापति श्री हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।  मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं। मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया। उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा। आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।  कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 : वाचिक परम्परा में साहित्य पर हुई सार्थक परिचर्चा

वाचिक परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह समकालीन साहित्य और समाज को समझने की एक सशक्त कुंजी रायपुर रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि से अनादि तक” थीम पर आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में लाला जगदलपुरी मण्डप में द्वितीय सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में “वाचिक परम्परा में साहित्य” विषय पर गहन, विचारोत्तेजक एवं सार्थक परिचर्चा संपन्न हुई, जिसमें भारतीय साहित्य की मौखिक परम्पराओं की ऐतिहासिक भूमिका और समकालीन प्रासंगिकता पर व्यापक विमर्श किया गया। इस परिचर्चा में प्रख्यात साहित्यकार रुद्रनारायण पाणिग्रही, शिव कुमार पांडे, डॉ. जयमती तथा सुधीर पाठक ने अपने विचार साझा किए। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र मिश्र ने की। वक्ताओं ने अपने संबोधन में वाचिक परम्परा की विविध विधाओं और उनके साहित्यिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. महेन्द्र मिश्र ने कहा कि वाचिक परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह समकालीन साहित्य और समाज को समझने की एक सशक्त कुंजी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में वाचिक परम्पराओं का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और नई पीढ़ी तक उनका संवेदनशील हस्तांतरण आज की एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। वक्ताओं ने वाचिक परम्परा को भारतीय साहित्य की मूल धारा बताते हुए कहा कि लोकगीत, लोककथाएँ, कहावतें, मिथक और जनश्रुतियाँ सदियों से समाज की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करती आई हैं। उन्होंने कहा कि लिखित साहित्य के उद्भव से पूर्व वाचिक परम्परा ही ज्ञान, इतिहास, जीवन मूल्यों और सामाजिक अनुभवों के संप्रेषण का प्रमुख माध्यम रही है, जिसने पीढ़ी दर पीढ़ी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा है।

श्री रमेन डेका और श्री विष्णुदेव साय ने 10वीं-12वीं परीक्षा के टॉपर छात्रों को किया सम्मानित

रायपुर. प्रशस्ति पत्र और डेढ़-डेढ़ लाख की सम्मान राशि से 239 विद्यार्थी सम्मानित राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 10वीं एवं 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। ये 2024 एवं 2025 के टॉप 10 मेधावी और विशेष पिछडी जनजाति के टॉप 01 विद्यार्थी है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।   लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित इस प्रतिभा सम्मान समारोह में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।  प्रशस्ति पत्र और डेढ़-डेढ़ लाख की सम्मान राशि से 239 विद्यार्थी सम्मानित इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाएं हमारे जीवन के लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रथम सीढ़ी है। आपने एक पड़ाव पार किया है अब अगले पड़ाव की ओर जा रहे है। जहां एक ओर इस सफलता की प्रेरणा आपको नवीन ऊर्जा के साथ प्रगति का रास्ता प्रशस्त करती है और वहीं यह सम्मान अन्य विद्यार्थियों को मेहनत, लगन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।  राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपार संभावनाओं का प्रदेश है। ‘‘धान का कटोरा‘‘ कहा जाने वाला हमारा राज्य अब शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति बहुत उन्नत है। हमें अपने राज्य की सनातन संस्कृति पर गर्व का भाव होना चाहिए।  श्री डेका ने कहा कि विद्यार्थी आईआईटी, नीट की परीक्षा देकर इंजीनियरिंग और मेडिकल मे जाना चाहते है लेकिन सभी को सफलता नहीं मिलती है। इसके लिए निराश होने की जरूरत नहीं हैं। नए-नए विषय है जहां आप कैरियर की ऊची उड़ान भर सकते है। धैर्य के साथ आगे बढ़े। गिरना बडी बात नहीं है गिर कर खड़े होना महत्वपूर्ण है। सपना बड़ा होना चाहिए। सपनें को पूरा करने के लिए साधना और अभ्यास करना होता है। उन्होंने मौलिकता और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के बच्चें शिक्षा में आगे बढ़ रहे है, यह बहुत सराहनीय है।    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी हमारे देश एवं प्रदेश के भविष्य हो। आप लोगों के कंधे पर देश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आज जो सफलता आप सभी छात्रों को मिली है निश्चित ही इस सफलता के पीछे आपके शिक्षक गुरुओं एवं माता पिता के आशीर्वाद है। उनके आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं है। इस दौरान उन्होंने सभी प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन और बसंत पंचमी पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा हम सब पर सदैव मां सरस्वती का आशीर्वाद बना रहें। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने बताया कि सत्र 2024 एवं 2025 के 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के 239 मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप मेडल, प्रशस्ति पत्र और प्रत्येक विद्यार्थी को डेढ़-डेढ़ लाख की राशि सीधे उनके खाते में दी गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दिए इस प्रोत्साहन सेे शिक्षा के प्रति उनका रूझान बढ़ेगा और दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में वर्ष 2024 के 110 और वर्ष 2025 के 129  टापर विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल प्रदान किया गया साथ ही विशेष पिछड़ी जनजाति के विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया। स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती रेणु जी. पिल्ले ने दिया एवं आभार प्रदर्शन सचिव श्रीमती पुष्पा साहू ने किया।  इस अवसर पर विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री आशाराम नेताम, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

शिवराज ने निभाया वादा: दिव्यांग दोस्त को दी मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, अब बहुदिव्यांगों की करेंगे तलाश

विदिशा केन्द्रीय कृषि मंत्री और विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) एक ओर जहां जनसेवा से जुड़े अपने कदमों को लेकर चर्चा में हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने संसदीय बहस और विपक्ष के रुख पर भी टिप्पणी की है. शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर सुर्खियों में हैं. उन्होंने दिव्यांग पन्नालाल को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भेंट कर न सिर्फ अपना वादा निभाया, बल्कि उनके आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में एक अहम कदम भी बढ़ाया. शिवराज बोले: जो भाई बहन परेशान हैं उनकी मदद करनी चाहिए पन्नालाल को मोटराइज्ड साइकिल भेंट करने के पहले शिवराज ने कहा मैं मानता हूं हम सब एक परिवार हैं परिवार के वो भाई-बहन जो पीछे रह गए, कोई कष्ट परेशानी है तो मदद करनी चाहिए। चार-पांच दिन पहले मैं विदिशा गया था तो मैंने पन्नालाल को देखा था वे खजूर हाथ में उठाकर मेरी गाड़ी तरफ दौड़ पडे़ थे। मैं उनके पास गया, तब मन में यह भाव पैदा हुआ कि गरीबी और परिस्थितियों के कारण कई साथी जिंदगी कष्ट में गुजारते हैं। क्या है मामला? कुछ दिन पहले विदिशा प्रवास के दौरान शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात पन्नालाल से हुई थी. बातचीत के दौरान पन्नालाल ने चलने-फिरने और दैनिक कार्यों में होने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया था. उसी समय शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था. अपने वादे को निभाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने आज पन्नालाल को अपने निवास पर उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भेंट की. इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, पन्नालाल बेहतर जीवन जिएं, आत्मनिर्भर बनें और उन्हें किसी प्रकार का कष्ट न हो यही ईश्वर से प्रार्थना है. पन्नालाल से दोस्ती हुई तो उन्होंने मोटराइज्ड साइकिल मांगी थी शिवराज ने कहा- पन्नालाल से मैंने दोस्ती कर ली। दोस्ती के बाद उन्होंने एक ही बात कही कि चलने फिरने में दिक्कत होती है तो मुझे एक मोटराइज्ड साइकिल दे दो। दोस्त के लिए तो करना ही पड़ता है। ट्रेन से गंजबासौदा पहुंचे शिवराज अपने संसदीय क्षेत्र के गंजबासौदा ट्रेन से पहुंचे। सफर के दौरान उन्होंनें यात्रियों से चर्चा की। बच्चों और युवाओं के साथ सेल्फी निकलवाई। वीबी – जी राम जी पर राहुल को घेरा शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद़्दे पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि "गजब के ज्ञानी हैं राहुल जी! वीबी – जी राम जी पर दोनों सदनों में देर रात तक घंटों चर्चा हुई. पक्ष और विपक्ष ने हर पहलू पर गंभीर बहस की. देश देख रहा था, सुन रहा था. लेकिन उस समय नेता प्रतिपक्ष विदेश भ्रमण में व्यस्त थे. अब अधिनियम पर कांग्रेस संग्राम का नाटक कर रही है, जबकि स्वयं नेता प्रतिपक्ष को अभी तक बिल का नाम तक ज्ञात नहीं. सुना है, कल एक दिन के मज़दूर भी बने थे राहुल जी; गमछा कोई और पहना रहा था, और कुदाल कैसे उठानी है, यह खड़गे जी समझा रहे थे. धन्य हैं आप राहुल जी, और धन्य है आपकी 'प्रखर बुद्धि'! आपके इसी अद्भुत ज्ञान के सहारे कांग्रेस का परम कल्याण सुनिश्चित है."

नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बड़ी जीत, धमतरी में 9 इनामी नक्सलियों ने IG के समक्ष डाले हथियार

धमतरी जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को आज एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। आईजी अमरेश मिश्रा और धमतरी एसपी सूरज सिंह परिहार के समक्ष आज एक साथ 9 सक्रिय हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 05 महिला और 04 पुरुष नक्सली शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से सीतानदी क्षेत्र सहित नगरी, मैनपुर और गोबरा इलाकों में सक्रिय थे और कई घटनाओं में शामिल रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली प्रतिबंधित संगठन ओडिशा स्टेट कमेटी के धमतरी–गरियाबंद–नुआपाड़ा डिवीजन से जुड़े हुए थे और संगठन में डीवीसीएम, एसीएम, एसडीके एरिया कमेटी कमांडर एवं डिप्टी कमांडर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। इन सभी नक्सलियों पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने बड़ी संख्या में हथियार और सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी। इन नक्सलियों ने किया सरेंडर     ज्योति उर्फ जैनी उर्फ रेखा डीव्हीसीएम सीतानदी एरिया कमेटी सचिव, 08 लाख के इनामी     उषा उर्फ बालम्मा डीव्हीसीएम टेक्निकल (डीजीएन), 08 लाख के इनामी     रामदास मरकाम उर्फ आयता उर्फ हिमांशु, पूर्व गोबरा एलोएस कमांडर / वर्तमान नगरी एसीएम, 05 लाख के इनामी     रोनी उर्फ उमा सीतानदी एरिया कमेटी कमांडर, 05 लाख के इनामी     निरंजन उर्फ पोदिया सीनापाली एससीएम टेक्निकल (डीजीएन), 05 लाख के इनामी     सिंधु उर्फ सोमड़ी एसीएम, 05 लाख के इनामी     रीना उर्फ चिरो एसीएम सीनापाली एरिया कमेटी / एलजीएस, 05 लाख के इनामी     अमीला उर्फ सन्नी एसीएम / मैनपुर एलजीएस, 05 लाख के इनामी     लक्ष्मी पूनेम उर्फ आरती उषा की बॉडी गार्ड, 01 लाख के ईनामी नक्सलियों ने सौंपा ये हथियार     इंसास राइफल – 02     एसएलआर राइफल – 02     कार्बाइन – 01     भरमार बंदूक – 01     कुल राउंड – 67     मैगजीन – 11     वॉकी-टॉकी (रेडियो सेट) – 01     अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री पुलिस दबाव और पुनर्वास नीति का दिखा असर धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों, बढ़ते दबाव और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा और विनाश का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। पुलिस द्वारा दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांवों में पोस्टर, बैनर, पाम्फलेट, आत्मसमर्पित नक्सलियों की अपील और सिविक एक्शन कार्यक्रमों के जरिए लगातार संदेश पहुंचाया जा रहा था। युवाओं को जोड़ने के लिए खेल प्रतियोगिताएं भी कराई गईं, जिसका सकारात्मक असर दिखा। खोखली विचारधारा से हुआ मोहभंग आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि संगठन की खोखली विचारधारा, जंगलों में लगातार कठिन जीवन, शासन की पुनर्वास सुविधाएं और पहले आत्मसमर्पण कर चुके साथियों के सुरक्षित व खुशहाल जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। नगरी एरिया कमेटी, सीतानदी एरिया कमेटी, मैनपुर एलजीएस और गोबरा एलओएस के इन सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण में धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य बलों और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई और रणनीति की अहम भूमिका रही। आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा, जिले को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में अभियान लगातार जारी रहेगा। अन्य सक्रिय माओवादियों से भी आत्मसमर्पण की अपील की जा रही है।

भोजशाला: 2034 तक मंदिर निर्माण और सरस्वती मूर्ति की लंदन से वापसी का ऐलान

धार  वसंत पंचमी के मौके पर राजा भोज वसंतोत्सव समिति ने शुक्रवार को यहां एक धर्मसभा का आयोजन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2034 में भोजशाला के निर्माण को एक हजार साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच भोजशाला का मुकदमा हमें जीतना है और यहां मां सरस्वती के भव्य मंदिर का निर्माण करना है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि लंदन के एक म्यूजियम में मां सरस्वती की मूर्ति है। उसे देश में वापस लाना है। भोजशाला मामले में जो याचिका लगी है उसका मुकदमा जीतना है।  मथुरा, काशी और धार में बने भव्य मंदिर : आलोक कुमार आलोक कुमार ने कहा कि भोजशाला में 992 साल पहले मंदिर बना था। 2034 में जब इसके एक हजार साल जब पूरे होंगे तब इसका निर्माण भी राम मंदिर की तर्ज पर होना चाहिए। यहां मां सरस्वती की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि मथुरा काशी और धार में भव्य मंदिर बने। देश के केंद्र में स्थित धार को ज्ञान का केंद्र बनाना है। सभी ये संकल्प लें।  मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई विहिप प्रमुख ने कहा कि मुगलकाल में इस मंदिर को तोड़ा गया। हिंदुओं को अपमानित किया गया। देश की तीन हजार कब्रों में कुछ नहीं है। वे खाली हैं। धार में भी ऐसा ही है। मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई। उनकी मौत के 200 साल बाद भोजशाला में उनकी कब्र होने की बात कही गई। इस भोजशाला की लड़ाई हिंदू समाज की है। इसे सभी को मिलकर लड़ना है। आलोक कुमार ने कहा कि जो भी इस देश में रहते हैं, उन्हें देश का सम्मान करना चाहिए। कुछ लोगों को वंदे मातरम बोलने में हिचकिचाहट होती है। देश के लिए कई क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम बोलकर फांसी के फंदे को चूमा। हिंदू धर्म सभी धर्मों का सम्मान करता है। शांति में विश्वास रखता है। यह हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं। जिन्हें भोजशाला से ज्यादा प्रेम वो हिंदू धर्म अपना लें : अवधेशानंद गिरि स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि भोजशाला की पावन भूमि हिंदुओं की भूमि है। यहां का मंदिर और परिसर भी हमारा है। यहां पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। राजा भोज ने यहां भोजशाला का निर्माण कराया था, ये कभी भी मुगलों की भूमि नहीं हो सकती। जिसे भोजशाला से ज्यादा प्रेम है तो वे हिंदू धर्म अपना लें और हर मंगलवार पूजा करने आ जाएं। देश के मुस्लिम कोई अरब से नहीं आए हैं, उनके पूर्वजों का धर्मांतरण किया गया है। वे भी हमारे भाई हैं। उन्होंने कहा कि 2014 को देश सही मायने में आजाद हुआ है। उसने पहले हिंदुओं को दबाया जाता रहा है। जो सनातन की बात करेगा, वही अब देश पर राज करेगा। हमने जो हिंदू राष्ट्र का सपना देखा है वो पूरा होने जा रहा है।