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राज्यपाल पटेल बोले—सत्य और पर्यावरण संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा, सत्य बोलना, धर्माचरण और पर्यावरण संरक्षण हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने आचरण में संस्कार, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को आत्मसात करें। राज्यपाल एवं कुलाधिपति  पटेल शुक्रवार को वसंत पंचमी के अवसर पर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने समारोह में विद्यार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि, स्वर्ण पदक तथा विभिन्न उपाधियाँ प्रदान की। दीक्षांत समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार भी मौजूद थे। उपाधियाँ, समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक राज्यपाल  पटेल ने कहा कि समारोह में प्रदान की गई उपाधियाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक है। विद्यार्थी जीवन में नए अवसरों और चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर सीखते रहें। आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि अपने ज्ञान, कौशल, शोध और नवाचार के माध्यम से देश को निरंतर आगे बढ़ाएँ। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय या विश्वविद्यालयों से नहीं, बल्कि परिवार और समाज से भी व्यक्ति जीवन मूल्यों की शिक्षा प्राप्त करता है। आज के विद्यार्थी ही कल के विकसित भारत की नींव हैं। शिक्षा का लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना भी होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक, कौशल आधारित और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने में नई शिक्षा नीति की सराहनीय भूमिका है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ते समय माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, तपस्या और मार्गदर्शन को कभी न भूलें। उनका सम्मान करना ही सच्ची सफलता की पहचान है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षक का व्यक्तित्व विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उनमें ज्ञान, कौशल और चरित्र का संचार करता है। शिक्षक के कार्य की तभी सच्ची सार्थकता है जब समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचे। राज्यपाल  पटेल ने दीक्षांत समारोह में 19 विद्यार्थियों को पीएचडी, 46 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और लगभग 200 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की। माँ सरस्वती और महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। स्मारिका “दीक्षावाणी” का लोकार्पण और विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थी शोध और नवाचार के माध्यम से प्रदेश और देश की प्रगति में योगदान दें। सारस्वत अतिथि एवं म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. खेम सिंह डहेरिया ने कहा कि कठोर अनुशासन, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता जीवन में सफलता के आधार हैं। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उपाधि धारकों को शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।  

प्रमुख सचिव निहारिका बारिक ने गरियाबंद में की समीक्षा बैठक

रायपुर.गरियाबंद  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव  निहारिका बारिक ने शुक्रवार को गरियाबंद के जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले में संचालित प्रमुख शासकीय योजनाओं, विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं तथा सेवा प्रदाय तंत्र की समग्र प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मनरेगा आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा, एनआरएलएम के प्रबंध संचालक  अश्विनी देवांगन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के उप सचिव  सच्चिदानंद आलोक, जिला पंचायत सीईओ  प्रखर चंद्राकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव   बारिक ने ग्रामीण विकास से संबंधित प्रमुख योजनाओं—प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), पंचायत एवं ग्रामीण अधोसंरचना विकास, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवाओं तथा राज्यपाल द्वारा गोद लिए गए ग्राम बिजली की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिक योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र हितग्राहियों तक पारदर्शी, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पहुँचना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागों के मध्य बेहतर समन्वय, कार्यों की नियमित निगरानी तथा लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृति, निर्माण प्रगति एवं भुगतान की स्थिति की सतत निगरानी करने के निर्देश देते हुए उन्होंने लक्ष्य के अनुरूप समय पर आवास पूर्ण कराने पर बल दिया। मनरेगा अंतर्गत सृजित श्रम दिवसों, सामुदायिक एवं व्यक्तिगत लाभ के कार्यों, जल संरक्षण एवं संवर्धन गतिविधियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने पूर्ण पारदर्शिता एवं सटीक अभिलेख संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत शौचालय निर्माण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन गतिविधियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जल जीवन मिशन के अंतर्गत घरेलू नल कनेक्शन की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्धता, मोटर-पंप एवं पाइपलाइन मरम्मत कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही ग्रामीण सड़क निर्माण, पुल-पुलियों के रखरखाव, यातायात सुविधा विस्तार एवं पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित कार्यों की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव   बारिक ने कहा कि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सर्वोपरि है, तथा दिए गए निर्देशों के पालन की सतत समीक्षा की जाएगी।

रायपुर साहित्य उत्सव: ओपन माइक ने प्रतिभाओं को बनाया केंद्र बिंदु

रायपुर. रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्म  स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे जी को समर्पित ओपन माइक मंच पर पहले दिन चार सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 75 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। इस मंच पर कविता, कहानी, गायन, वादन, सामूहिक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसी विविध विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। ओपन माइक सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह विशेष मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सुसज्जित किया गया था, जहाँ बाँसुरी, गिटार और वायलिन वादन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। नन्ही नृत्यांगनाओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं सरगुजा से लेकर बस्तर तक के युवा कवियों और ग़ज़लकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष   अमरजीत सिंह छाबड़ा, महंत कॉलेज के प्राचार्य   देवाशीष महंत तथा संयुक्त संचालक, जनसंपर्क  मती इस्मत जहाँ दानी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ओपन माइक सत्र ने न केवल नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति युवाओं के उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा को भी प्रभावी रूप से उजागर किया।

तेल की गुणवत्ता पर कड़ी नजर, खराब खाद्य सामग्री का निस्तारण

अंबिकापुर कलेक्टर  अजीत वसंत के आदेश एवं अपर कलेक्टर  सुनील नायक के निर्देशानुसार खाद्य प्रतिष्ठानों में उपयोग हो रहे खाद्य तेल की गुणवत्ता एवं स्वच्छता की जांच हेतु खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा शहर में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के दौरान भारत माता चौक स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में तेल रिफ्रेक्टोमीटर के माध्यम से खाद्य तेल के घनत्व की जांच की गई, जिसमें तेल का घनत्व 35 मानक पाया गया, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। टीम द्वारा मौके पर ही लगभग 22 लीटर हानिकारक तेल को नष्ट कराया गया। साथ ही उसी तेल से बनाए गए लगभग 250 नग समोसे भी तत्काल नष्ट कराए गए। इसके अतिरिक्त होटल परिसर में काकरोच पाए जाने पर होटल संचालक को नोटिस जारी किया गया। इसके पश्चात् खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम अभिहित अधिकारी के नेतृत्व में टीम द्वारा रिंग रोड स्थित होटल आरजू का निरीक्षण किया गया, जहां शाकाहारी एवं मांसाहारी खाद्य पदार्थों का पृथक भंडारण नहीं पाया गया। निरीक्षण में काबुली चना, पनीर एवं हरी चटनी को एक ही डीप फ्रीजर में चिकन एवं मटन के साथ भंडारित किया जाना पाया गया। साथ ही होटल की रसोई में बड़ी संख्या में काकरोच पाए गए, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। उक्त गंभीर लापरवाही को देखते हुए दोनों होटल संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। अग्रिम कार्रवाई के तहत संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में संबंधित फर्मों के लाइसेंस निलंबन की कार्यवाही की जाएगी।खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं नियमों के पालन के निर्देश दिए हैं।  

जंगल में घातक ऑपरेशन: झारखंड में सुरक्षाबलों की कार्रवाई, 21 नक्सली मारे गए

चाईबासा झारखंड के सारंडा जंगल में छिपे नक्सलियों पर मौत बरस पड़ी है। 36 घंटे से जारी मुठभेड़ में अब तक 21 नक्सली मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। गुरुवार को 15 की मौत की पुष्टि के बाद शुक्रवार को 6 और शव बरामद किए गए हैं। सिर पर 2 करोड़ से ज्यादा इनाम वाला खूंखार नक्सली अनल यहां 25 लड़ाकों संग घिर गया था। अनल समेत 21 मारे जा चुके हैं।   झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में सारंडा के घने जंगलों में दो दर्जन नक्सलियों के साथ पतिराम मांझी उर्फ​अनल दा को घेर लिया गया था। सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में इन्हें घेर लिया। नक्सलियों की ओर से फायरिंग के बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई से खलबली मचा दी। 2.35 करोड़ रुपये के इनाम वाला अनल दा भी मारा गया। उस पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये, ओडिशा सरकार ने 1.2 करोड़ रुपये और नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अनल दा का मारा जाना क्यों इतनी बड़ी चोट अनल दा माओवादियों के मिलिट्री कमीशन का प्रमुख भी था। हाल के सालों में कोल्हान के सारंडा जंगली क्षेत्र में माओवादियों की ओर से सुरक्षाबलों पर किए गए बड़े हमलों में अनल की भूमिका अहम थी। मारे गए नक्सलियों में 25 लाख का इनामी सैक कमांडर अनमोल उर्फ सुशांत भी है। अनमोल पर ओडिशा में भी 65 लाख का इनाम था। अब तक ढेर किए गए नक्सलियों में एक दर्जन से ज्यादा की पहचान कर ली गई है। मारे गए नक्सलियों में कई महिलाएं भी हैं। भारी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद आईजी अभियान माइकल राज एस ने बताया कि चाईबासा के किरीबुरु के बीहड़ कुमड़ी और होंजोदिरी गांव के बीच गुरुवार सुबह करीब छह बजे शुरू हुई मुठभेड़ के बाद सर्च अभियान के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए हैं। हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से नक्सलियों की तलाश की जा रही है। आईजी अभियान ने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन से माओवादी संगठन की कमर टूट गई है।  

रिवायत : ग़ज़लों की खुशनुमा महफ़िल 25 जनवरी को सजेगी

 रिवायती ग़ज़लें सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि रूह की आवाज़ होती हैं: सुश्री श्रुति प्रभला बिलासपुर रिवायत का अर्थ है परंपरा और रीति-रिवाज़। शताब्दियों पूर्व लिखी गई रिवायती ग़ज़लें आज भी ऐसी प्रतीत होती हैं, मानो वे हमारे ही जीवन की आपबीती हों। इन ग़ज़लों को सुनते हुए ऐसा महसूस होता है कि हर शेर श्रोता के दिल के बेहद करीब है। साहित्यिक दृष्टि से कठिन होने के बावजूद रिवायती ग़ज़लें भावपूर्ण और अर्थवान होती हैं। उर्दू भाषा से सामान्य परिचय रखने वाला श्रोता भी इनमें निहित जज़्बातों को गहराई से समझ सकता है। ऐसी ही रिवायती ग़ज़लों की एक विशेष संध्या “रिवायत” 25 जनवरी 2026, रविवार को शाम 6.30 बजे लखीराम ऑडिटोरियम, बिलासपुर में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में बिलासपुर की प्रसिद्ध शास्त्रीय, भजन एवं ग़ज़ल गायिका श्रुति प्रभला अपनी सुमधुर गायकी प्रस्तुत करेंगी। शुक्रवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार-वार्ता में श्रुति प्रभला ने कहा कि रिवायती ग़ज़लें केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति होती हैं। उन्होंने बताया कि आम तौर पर प्रचलित ग़ज़लें गीतनुमा होती हैं, जो सरल भाषा में लिखी जाती हैं, जबकि रिवायती ग़ज़लें गहरे भाव और गंभीर अनुभूति से उपजी होती हैं। इन ग़ज़लों के जज़्बात केवल सुनने से नहीं, बल्कि दिल से महसूस करने पर समझ में आते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने एक शेर पढ़ा “अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए, तिरी फ़ुर्क़त के सदमे कम न होंगे” श्रुति ने कहा कि उर्दू ज़ुबान में रची गई ग़ज़ल का हर शेर श्रोता की आत्मकथा बनकर उभरता है। उन्होंने आगे कहा “मसर्रतों की तलाश में है मगर यह दिल जानता नहीं, अगर ग़म-ए-ज़िंदगी न हो तो ज़िंदगी में मज़ा नहीं। मूलतः शास्त्रीय गायिका श्रुति प्रभला भजन गायन में भी समान रूप से दक्ष हैं, फिर भी ग़ज़लों के प्रति उनका विशेष झुकाव है। इस पर उन्होंने कहा, भजन मैं गाती हूँ, लेकिन ग़ज़ल मेरे गले से बे-साख़्ता निकलती है। मैं स्वयं को ग़ज़लों के बेहद करीब पाती हूँ। श्रुति प्रभला, संगीत रिसर्च अकादमी, कोलकाता के गुरु एवं आगरा संगीत घराने के उस्ताद वसीम अहमद खान की शिष्या हैं। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से मास्टर ऑफ़ परफ़ॉर्मिंग आर्ट्स की उपाधि प्राप्त की है। अपने संगीत-प्रशिक्षण काल में श्रुति देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी गायकी की छाप छोड़ चुकी हैं। वे अंतरराष्ट्रीय गायन प्रतियोगिता “द वॉयस ऑफ़ वर्ल्ड” की विजेता रह चुकी हैं। इसके अतिरिक्त इस्कॉन नेल्लोर द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय भजन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान व गोल्ड मेडल, पेंड्रा में स्व. माधवराव सप्रे स्मृति महोत्सव में कबीर गायन के लिए मुख्यमंत्री सम्मान एवं नव्या सम्मान से भी उन्हें नवाज़ा गया है। उन्होंने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के युवा बसंत महोत्सव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्योत्सव सहित अनेक मंचों पर शास्त्रीय, ग़ज़ल एवं कबीर गायन की ओजस्वी प्रस्तुतियाँ दी हैं। श्रुति ने एनटीपीसी, सीपत का आधिकारिक गीत भी गाया है तथा ऑल इंडिया रेडियो के लिए विशेष ग़ज़ल कार्यक्रम प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम “रिवायत” में अहमद फ़राज़, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, बहज़ाद लखनवी, मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल जैसे महान शायरों की रचनाएँ प्रस्तुत की जाएँगी। साथ ही वर्तमान दौर की प्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका डॉ. राधिका चोपड़ा की गाई हुई कुछ ग़ज़लें भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। श्रुति ने बताया कि डॉ. राधिका चोपड़ा ग़ज़ल गायन के क्षेत्र में उनकी गुरु समान हैं। ग़ज़लें केवल प्रेम और विरह तक सीमित नहीं होतीं—इस प्रश्न पर श्रुति ने दार्शनिक अंदाज़ में कहा कि मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन प्रेम से ही जुड़ा है। प्रेम केवल प्रेमी-प्रेमिका तक सीमित नहीं, बल्कि माता-पिता, परिवार, समाज और ईश्वर से जुड़ा भाव भी है। रिवायती ग़ज़लें जीवन की पूरी यात्रा प्यार, पीड़ा, सम्मान और स्मृतियों को उजागर करती हैं। ये ग़ज़लें दिल की डायरी की तरह होती हैं, जहाँ हर शेर एक एहसास और एक अनकहा सच समेटे रहता है। इसी कड़ी में श्रुति प्रभला ने ग़ज़लों के शौकीन सभी श्रोताओं से 25 जनवरी 2026, रविवार शाम 6.30 बजे लखीराम ऑडिटोरियम में आयोजित “रिवायत” कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की।

निहारिका बारीक: ग्रामीण सशक्तिकरण में जीरामजी योजना की भूमिका

रायपुर. विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम – निहारिका बारीक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव  ईटीवी भारत निहारिका बारीक ने गरियाबंद जिले में स्थित राज्यपाल  ईटीवी भारत रामेन डेका जी के गोद ग्राम बिजली (मड़वाडीह) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राम में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं, आजीविका गतिविधियों एवं मूलभूत सुविधाओं की प्रगति का गहन अवलोकन किया। इस अवसर पर कलेक्टर  ईटीवी भारत बी.एस. उईके, प्रधानमंत्री आवास मिशन के डायरेक्टर  ईटीवी भारत तारण प्रकाश सिन्हा, एसबीएम एवं एनआरएलएम डायरेक्टर  ईटीवी भारत अश्वनी देवांगन, संयुक्त सचिव  ईटीवी भारत एस. आलोक, जिला पंचायत सीईओ  ईटीवी भारत प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रमुख सचिव  ईटीवी भारत बारीक ने ग्राम पंचायत बिजली (मड़वाडीह) में ग्रामीणों एवं महिला स्व-सहायता समूहों से संवाद करते हुए समूहों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विकसित भारत जी राम जी योजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि पूर्व में यह योजना 100 दिनों की कार्य अवधि तक सीमित थी, जिसे बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों की आजीविका को वैधानिक संरक्षण मिलने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मजदूरी भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा किसी भी स्थिति में कार्य समाप्ति के 15 दिवस के भीतर किया जाना अनिवार्य है। स्व-सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा के दौरान प्रमुख सचिव ने ग्राम मड़वाडीह की  ईटीवी भारतमती मिथलेश्वरी ध्रुव से संवाद किया। उन्होंने बताया कि डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर 1200 फीट की सेंट्रिंग प्लेट खरीदी गई है, जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक साथ लगभग चार आवासों में निर्माण कार्य किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मात्र चार माह में लगभग 30 लाख रुपये की आय अर्जित की गई है, जो कुल व्यय का लगभग एक-चौथाई है। प्रमुख सचिव ने जिले में लखपति दीदियों की संख्या में हो रही निरंतर वृद्धि को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत बताया। निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने जल जीवन मिशन अंतर्गत घर-घर जल आपूर्ति की स्थिति की भी जानकारी ली। इसके साथ ही जय फणीश्वर एग्रो महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा “त्रिवेणी” ब्रांड नाम से हल्दी एवं मिर्च की पैकिंग एवं विपणन गतिविधियों का अवलोकन किया। समूह द्वारा अब तक 50 किलोग्राम से अधिक उत्पाद का विक्रय कर आय अर्जित की जा चुकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि धान के स्थान पर मिर्च एवं हल्दी जैसी नकदी फसलों की खेती कर कच्चे माल का स्वयं उत्पादन कर अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। महिला समूहों द्वारा दोना-पत्तल निर्माण मशीन, मशरूम उत्पादन हेतु शेड निर्माण तथा मूंगफली दाना पृथक्करण मशीन की मांग रखी गई, जिस पर प्रमुख सचिव ने कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ को संबंधित योजनाओं के अंतर्गत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव  ईटीवी भारत बारीक ने आंगनबाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण किया, जहां उन्होंने गर्म भोजन व्यवस्था, रसोई की स्वच्छता, बच्चों की उपस्थिति तथा कुपोषण की स्थिति की जानकारी ली। इसके साथ ही ग्राम में पूर्ण आवास निर्माण की प्रगति का अवलोकन करते हुए हितग्राही  ईटीवी भारत रामेश्वर पटेल के आवास का निरीक्षण किया। ग्राम में कचरा प्रबंधन व्यवस्था के अंतर्गत नियमित सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं सफाई कर्मियों के मजदूरी भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की गई। साथ ही ग्राम पंचायत में संचालित डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से हो रहे दैनिक लेन-देन एवं ग्रामीण स्तर पर डिजिटल सेवाओं के विस्तार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसके पश्चात प्रमुख सचिव ने ग्राम श्यामनगर में संचालित आजीविका केंद्र का निरीक्षण किया, जहां उगता सूरज, जय ठाकुर देव एवं जय महामाया स्व-सहायता समूह द्वारा सिलयारी पत्तों की सिलाई कर पारंपरिक दोना-पत्तल निर्माण कर आय अर्जित की जा रही है। इस कार्य की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाएं परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं और किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। इस अवसर पर ग्राम पंचायत बिजली की सरपंच  ईटीवी भारतमती पद्मा निषाद, ग्राम श्यामनगर के सरपंच, स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

युवराज केस में उलझी कहानी: मौके पर मौजूद थे लोग, फिर मदद क्यों नहीं मिली? पुलिस के जवाब पर शक गहरा

नई नोएडा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है। 27 साल के युवराज 16 जनवरी 2026 की रात अपनी कार से घर लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण उनकी एसयूवी निर्माणाधीन साइट के पास एक गहरे पानी भरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज कार की छत पर चढ़ गए और फोन की फ्लैशलाइट जलाकर मदद मांगते रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन किया और 'पापा, मुझे बचा लो' कहकर गुहार लगाई। करीब दो घंटे तक वो जिंदगी की लड़ाई लड़ते रहे, लेकिन बचाव में देरी के कारण उनकी मौत हो गई। इस मामले में अब पुलिस का स्पष्टीकरण आया है। पुलिस ने बताया है कि रेस्क्यू के दौरान उनके पास क्या-क्या संसाधन थे। लेकिन अब सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतने संसाधनों के साथ भी क्यों हाथ बंधे रहे?   हादसे के बाद क्या हुआ? पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। नोएडा पुलिस ने बताया कि डायल 112 पर सूचना मिलते ही पीआरवी न्यूनतम समय में पहुंच गई। टीमों ने लाइफ बाय रिंग, रबर बोट, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च लाइट, लाइफ-सेविंग रोप और एक्सटेंशन लैडर जैसे उपकरणों से रेस्क्यू की कोशिश की। लेकिन घना कोहरा और कम विजिबिलिटी ने काम मुश्किल कर दिया। युवराज को निकालने में देर हुई और कार को बाहर निकालने में चार दिन लग गए। पुलिस के जवाब से सवाल और बढ़े पुलिस का दावा है कि संसाधन पूरे थे और प्रयास किए गए। नोएडा पुलिस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के अंतर्गत हुयी घटना के सम्बन्ध में सूचना, डायल 112 पर प्राप्त होते ही घना कोहरा और न्यूनतम विजिबिलिटी होने के बाद भी पीआरवी न्यूनतम प्रतिक्रिया समय में घटना स्थल पर पहुंची। साथ ही स्थानीय पुलिस, फायर सर्विस/रेस्क्यू टेंडर मौके पर पहुंचे। सभी प्रकार के उपकरण लाइफ बॉय रिंग, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च एंड रेस्क्यू लाइट, एयर-फिल्ड रबर बोट, हाइड्रा, लाइफ-सेविंग रोप, ड्रैगन टॉर्च, रेस्क्यू फायर टेंडर और एक्सटेंशन लैडर की मदद से रेस्क्यू के प्रयास किए गए थे।   अब और उठ रहे सवाल नोएडा पुलिस के इस दावे के बाद सवाल और भी ज्यादा हो गए हैं। आखिर इतने उपकरण और टीमें होने के बावजूद युवराज को क्यों नहीं बचाया जा सका? वायरल वीडियो में दिखता है कि रेस्क्यू टीम के जवान दिशा-निर्देश दे रहे थे, लेकिन कोई पानी में नहीं उतरा। एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट मोनिंदर सिंह ने पानी में उतरकर कोशिश की, लेकिन अकेले क्या कर पाता? अब कुछ रिपोर्ट्स में मोनिंदर पर पुलिस दबाव का आरोप लगा है कि उन्होंने बयान बदला। जांच और कार्रवाई तेज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उच्च स्तरीय एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट किया। पुलिस ने निर्माण साइट की लापरवाही के लिए लोटस ग्रीन के दो बिल्डरों रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को गिरफ्तार किया। नोएडा अथॉरिटी से रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान शामिल है। रिपोर्ट 24 जनवरी को सरकार को सौंपी जाएगी। एनजीटी ने भी स्वतः संज्ञान लिया और कई अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सोशल मीडिया पर गुस्सा यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि निर्माण साइट पर बैरिकेडिंग नहीं थी, सुरक्षा मानक टूटे गए। नोएडा जैसे 'स्मार्ट सिटी' में खुले गड्ढे और नाले मौत का जाल बने हुए हैं। युवराज के पिता का कहना है कि अगर समय पर मदद मिलती, तो बेटा बच जाता।  

महिला पत्रकारों ने अध्ययन भ्रमण में जताया मुख्यमंत्री का आभार

रायपुर. पहली बार छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों के दल ने किया अध्ययन भ्रमण, खुशियों भरी मुस्कान के साथ जताया मुख्यमंत्री का आभार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गुजरात के अध्ययन भ्रमण से लौटे महिला पत्रकारों के दल ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिला पत्रकार अपने साहस से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत कर रही हैं। मैं उन सभी महिलाओं के साहस को नमन करता हूं जो पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में रह कर समाज में सकारात्मक योगदान दे रही हैं।  मुख्यमंत्री को महिला पत्रकारों के दल ने गुजराती अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर पहली बार छत्तीसगढ़ से महिला पत्रकारों के दल को अन्य राज्य के अध्ययन भ्रमण पर भेजने के लिए उनका आभार जताया। महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि विगत वर्ष महिला दिवस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष महिला पत्रकारों को भी अध्ययन भ्रमण पर भेजे जाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्हें बहुत खुशी है कि मुख्यमंत्री ने उन सभी की इस इच्छा को पूरा किया।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं से चर्चा के दौरान कहा कि इस अध्ययन भ्रमण के दौरान आप सभी ने गुजरात विधानसभा, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, राजकोट, पोरबंदर सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को समझा है। आने वाले समय में ये अनुभव आपकी कलम को और भी समृद्ध करेगा, जिसका लाभ पत्रकारिता जगत के साथ ही आपके पाठकों भी मिलेगा।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का यह तीसरा वर्ष है। इस वर्ष को हम महतारी गौरव वर्ष के रूप में मना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों से उनके अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप संजोने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह ना सिर्फ आपके लिए इस भ्रमण को हमेशा के लिए यादगार बनाएगा बल्कि अन्य लोग भी आपकी किताब को पढ़कर गुजरात के बारे में अपनी जानकारी बढ़ा सकेंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात एक समृद्ध और मॉडल राज्य है। गुजरात की एक खासियत यह भी है कि वहां सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अमूल सहकारिता का एक जीवंत उदाहरण है, जिसमें मुख्यतः महिलाएं शामिल है। छत्तीसगढ़ में भी हम सहकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी देश के सहकारिता मंत्री भी हैं। उनके मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के लिए बहुत कार्य हो रहा है। सहकारिता इस बात का प्रतीक है कि मिलकर करने से बड़ा काम भी आसान होता है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हम सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर रहे हैं। मंत्रालय में अब ई-फाइल प्रणाली लागू है। मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला पत्रकारों से अपनी गुजरात यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि गुजरात का सीएम डैशबोर्ड देश का सबसे एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम है जिसके माध्यम से एक जगह बैठकर ही पूरे प्रदेश पर नजर रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के विकास की नींव रखी थी, हम गुजरात जैसी व्यवस्थाओं को यहां भी लागू कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री से महिला पत्रकारों ने गुजरात अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को साझा किया। सुश्री निशा द्विवेदी ने कहा कि इस टूर के माध्यम से उन्हें गुजरात के समृद्ध इतिहास और संस्कृति से रुबरू होने का अवसर मिला। सुश्री दामिनी बंजारे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके 8 वर्षों के पत्रकारिता के करियर में पहली बार है जब महिलाओं का दल अध्ययन भ्रमण पर गया है। कोरिया की सुश्री नूरजहां ने बताया कि यह पहली बार है जब महिलाओं को इस रूप में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महिला पत्रकारों को ये मौका मिलता रहेगा।  मुख्यमंत्री को महासमुंद की पत्रकार सुश्री उत्तरा विदानी ने बताया कि गुजरात विधानसभा के भ्रमण में बहुत अच्छा लगा। वहां की खास बात यह देखने को मिली कि बच्चों सहित आमजन को विधानसभा की कार्यवाही को सुगमता से देखने का अवसर दिया जाता है। दुर्ग की पत्रकार सुश्री कोमल धनेसर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में 25 वर्षों में यह पहला अवसर है जब महिला पत्रकारों को ऐसा मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जब हम भ्रमण पर निकले थे तो बहुत सारे अनजाने चेहरे थे और लौटे हैं तो नए दोस्त और नई बॉन्डिंग के साथ।  रायपुर की पत्रकार सुश्री नेहा श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को बताया कि हम सभी पत्रकार अलग- अलग संस्थानों में काम करते हैं। व्यस्तता की वजह से हमारी बात नहीं हो पाती। ये टूर रूटीन से अलग एक अनुभव रहा जिसमें नये दोस्त बने। सुश्री रचना नितेश ने मुख्यमंत्री को बताया कि ये अनुभव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध करने वाला था। उन्होंने कहा कि एक खास बात ये रही कि हमारे दल में महिला पत्रकारों की 3 पीढ़ियां शामिल थीं। हमें बहुत कुछ सीखने को मिला।  बस्तर की पत्रकार सुश्री प्रियंका जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान बस्तर से है। टूर पर जाते समय नए माहौल की वजह से मन में कई आशंकाएं थीं। मगर बाद में यह अनुभव बहुत सुखद रहा। कोरबा की सुश्री राजश्री गुप्ते ने बताया कि 8 दिनों के इस टूर में ऐसा लगा कि हमने अपने बचपन को फिर से जी लिया है।  मुख्यमंत्री श्री साय को महिला पत्रकारों ने बताया कि कई लोगों की यह पहली हवाई यात्रा भी थी। जिस पर मुख्यमंत्री ने बड़ी आत्मीयता से पत्रकारों से कहा कि जो पहली बार हवाई यात्रा करते हैं उन्हें पार्टी देनी पड़ती है। मुख्यमंत्री की बात सुनकर पूरे सभागार में हंसी गूंज उठी।  महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री श्री साय से एक रोचक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गुजरात भ्रमण के दौरान उनका इंटरेक्शन कुछ फ्रेंच पर्यटकों से हुआ। यह जानने पर की महिला पत्रकार छत्तीसगढ़ से हैं, फ्रेंच पर्यटक ने कहा- ओह सीएम विष्णुदेव छत्तीसगढ़ ! ये सुनकर उन्हें बहुत गर्व हुआ कि छत्तीसगढ़ राज्य को विदेशी नागरिक भी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नाम से पहचान रहे हैं।  महिला पत्रकारों ने जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का भी आभार जताया जिन्होंने आठ दिवसीय इस अध्ययन भ्रमण में उनका पूरा ख्याल रखा। इस अवसर पर  आयुक्त जनसंपर्क डॉ रवि … Read more

अजय बरलोटा ने सौ बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा डोनेशन कर रचा सेवा का कीर्तिमान

रायपुर मानव सेवा की मिशाल पेश करते हुए रायपुर के युवा व्यवसायी अजय बारलोटा द्वारा 100 बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा डोनेशन कर एक अनुकरणीय कीर्तिमान स्थापित किया। इस उपलब्धि ने न केवल जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान दिया, बल्कि समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है। अजय ने रायपुर में  समय समय पर आयोजित रक्तदान शिविरों एवं आपातकालीन परिस्थितियों में स्वेच्छा से रक्त एवं प्लाज़्मा दान किया। विशेषकर कोरोना काल में भी प्लाज़्मा डोनेशन के माध्यम से कई गंभीर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज 100 रक्तदान के अवसर पर चिकित्सकों एवं सामाजिक संगठनों ने रक्तदाता अजय बरलोटा के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है, और एक यूनिट रक्त किसी के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकती है। अजय ने युवाओं से आगे आकर नियमित रक्तदान करने की अपील की। रक्तदाता अजय ने कहा कि जब तक शरीर स्वस्थ है, तब तक वह इस सेवा कार्य को निरंतर जारी रखेंगे और अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे। आज 100 बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा दान कर अजय से रायपुर शहरवासियों के साथ साथ जैन समाज  को भी गौरवानवित महसूस किए। एवं अजय बारलोटा के उज्ज्वल भविष्य की कमान की।