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हरविन्द्र कल्याण का बयान: 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

चंडीगढ़  हरियाणा विधान सभा में  राजधानी युवा संसद संस्था के सहयोग से दो दिवसीय ‘हरियाणा युवा संवाद’ का दूसरा संस्करण शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम में 13 राज्यों से 65 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस अवसर राष्ट्रगान का भी वादन हुआ। विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने लंबे समय तक गुलामी के कठिन दौर को झेला है, जिसके दौरान हमारी समृद्ध संस्कृति और मूल्यों को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। यह हमारे संविधान की शक्ति और देशवासियों की एकजुटता का प्रमाण है। संविधान हमें यह सिखाता है कि भारत की असली ताकत यहां के लोग हैं।  हम सभी को मिलकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के विजन को साकार करना है। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां अलग-अलग भाषाएं, परंपराएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन इन सबके बीच एक साझा लक्ष्य है- राष्ट्र और प्रदेश की प्रगति। देश की विभिन्न विधानसभाओं में भले ही राज्यों की भाषाएं अलग हों, लेकिन सभी जनप्रतिनिधियों का उद्देश्य समाज के हर वर्ग के लिए प्रभावी और कल्याणकारी योजनाएं बनाना होता है। जनता की कठिनाइयां दूर करना व उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति असली ध्येय है। कल्याण ने युवाओं को कहा कि आज वे उसी विधान सभा भवन में बैठे हैं, जहां से प्रदेश के अनेक दिग्गज विधायकों और नेताओं ने कानून निर्माण से लेकर हरियाणा के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां उपस्थित युवा भविष्य में जनप्रतिनिधि का अवसर पाकर लोकतांत्रिक परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे और सदन में सक्रिय व सार्थक चर्चाओं में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की विविधता स्वाभाविक है, लेकिन युवाओं को चाहिए कि वे सकारात्मक सोच के साथ समाधान की दिशा में आगे बढ़ें, ताकि समाज और देश को नई दिशा मिल सके। विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि यदि देश को आगे बढ़ाना है तो महिलाओं को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत करना अनिवार्य है। इसी उद्देश्य से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक विधेयक पारित किया गया है। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट के अपने अनुभव साझा करते हुए हरविन्द्र कल्याण ने बताया कि वहां कई देशों के स्पीकर इस बात से हैरान थे कि भारत सैकड़ों भाषाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद इतनी मजबूती से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में विधायक पूजा चौधरी, हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष के सलाहकार राम नारायण यादव, हरियाणा युवा संवाद के सह-संस्थापक जय सैनी और ईशा कपूर ने भी युवाओं को संबोधित करते हुए स्वाधीनता आंदोलन, संविधान सभा के अनुभव, लोकतांत्रिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और युवाओं की भूमिका पर विचार रखे। कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रश्नकाल आयोजित किया गया। इसके बाद दो विशेष सत्र संपन्न हुए। पहले सत्र में ‘हरियाणा का सतत विकास : औद्योगिक विस्तार पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग’ विषय पर गहन चर्चा हुई। दूसरे सत्र में औद्योगिक विस्तार की आवश्यकता, इसके समक्ष चुनौतियां और विजन 2030 की प्राप्ति हेतु आवश्यक कदम के संदर्भ में हरियाणा औद्योगिक नीति-2025 पर विस्तार से चर्चा की गई।

यूपी के प्रशंसक बने मुख्य न्यायाधीश, मुक्त कंठ से यूपी को सराहा, कहा – जिस भी प्रदेश में जाऊंगा, यूपी सरकार का उदाहरण दूंगा

मुख्य न्यायाधीश ने चंदौली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया छह एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास व भूमि पूजन न्याय का मंदिर साबित होगा कोर्ट कॉम्प्लेक्सः मुख्य न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश ने कहा, अन्य राज्य सरकारों व हाईकोर्ट से आह्वान करूंगा कि वहां भी मिलें ऐसी सुविधाएं सीएम से किया अनुरोध, कॉम्प्लेक्स में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदौली देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शनिवार को चंदौली में छह एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। उन्होंने इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार व उच्च न्यायालय को बधाई दी और प्रदेश सरकार के प्रयास को सराहा। उन्होंने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री ने 10 कोर्ट कॉम्प्लेक्स की घोषणा की है। इनमें से छह की स्थापना (शिलान्यास व भूमि पूजन) का कार्य आज शुरू हुआ है। इसके बनने से यूपी सारे भारत में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। ये कॉम्प्लेक्स देश के लिए बेंचमार्क बनेंगे। मैं जिस भी प्रदेश में जाऊंगा, वहां यूपी सरकार का उदाहरण दूंगा। राज्य सरकारों व हाईकोर्ट से आह्वान करूंगा कि वहां भी ऐसी सुविधाएं मिलें।   न्याय का मंदिर साबित होगा कोर्ट कॉम्प्लेक्स मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह क्षेत्र अनेक ऐतिहासिक धार्मिक मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री जी ने उसी इतिहास में नई कड़ी जोड़ी है,  जब यहां न्यायिक मंदिरों की स्थापना की जा रही है। इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स अगले 50 वर्ष तक न्याय परिसर की आवश्यकताओं को सशक्त रूप से पूरा करने में सफल रहेंगे। हर प्रकार की सुविधाओं से युक्त इस कॉम्प्लेक्स में अधिवक्ताओं व आम आदमी के लिए प्रदान की गईं सुविधाएं सराहनीय हैं। कोर्ट कॉम्प्लेक्स न्याय का मंदिर साबित होगा। यहां बैठकर न्यायिक अधिकारी मानवीय मूल्यों का ध्यान रखते हुए फरियादियों को न्याय देंगे। इसमें बार के सदस्यों की भी सक्रिय भूमिका होगी।  मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान में डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशयरी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसमें एक अनुच्छेद है कि हर राज्य के पास अपना हाईकोर्ट होगा और उस हाईकोर्ट के पास मौलिक, मानवीय व अन्य अधिकारों को लागू करने की क्षमता होगी। संविधान निर्माताओं की सोच यही रही कि डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशयरी स्थापित होगी तो लोगों को अपने क्षेत्र में कोर्ट की सुविधाएं मिलेंगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का अनुरोध मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट से कहा कि जनपद न्यायालयों में प्रैक्टिस करने वाली महिलाओं के लिए अलग से बार रूम बनें। उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया कि कॉम्प्लेक्स में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बन जाए। इससे बुजुर्गों, वादकारियों आदि को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी निजात मिल जाएगी।  शिलान्यास व भूमि पूजन कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता तथा वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का आगमन रविवार को

जबलपुर प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी का रविवार 18 जनवरी को एक बजे नोहटा जिला दमोह से जबलपुर आगमन होगा। लोधी नोहटा से सीधे माँ त्रिपुर सुंदरी तिराहा भेडाघाट रोड तेवर स्थित आर्य रिसोर्ट मैरिज गार्डन पहुँचेंगे तथा यहॉं लोधी समाज युवक-युवती परिचय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में शामिल होंगे। वे दोपहर 2 बजे तेवर से कार द्वारा दमोह जिले के ग्राम बड़गुवां प्रस्थान करेंगे।

यूपी में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा, गोरखपुर और संतकबीर नगर में बन रहीं पायलट परियोजनाएं

गोरखपुर व संतकबीर नगर में राप्ती और कुवानो नदी क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन का विकास जल संरक्षण के साथ किसानों को मिलेगा कम लागत में अधिक उत्पादकता का लाभ लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं व जल उपयोग दक्षता का विस्तार करने के उद्देश्य से माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। इस दिशा में विभाग केंद्र सरकार की मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (एमसीएडीडब्लूएम) परियोजना के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर जिलों में माइक्रो इरिगेशन की पायलट परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। ये पायलट परियोजनाएं गोरखपुर में कलपईचा/रामगढ़ ताल व राप्ती नदी क्षेत्र में, जबकि संतकबीर नगर में कुवानो नदी क्षेत्र में बनाई जा रही हैं, जो माइक्रो इरिगेशन की पीपीआईएन (प्रेशराइज्ड पाइप्ड इरिगेशन नेटवर्क) तकनीक के जरिए जल उपयोग की दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि लाएंगी। पायलट परियोजनाओं के सफल संचालन के आधार पर इसका विस्तार प्रदेश के अन्य जनपदों में भी किया जाएगा, जो किसानों के लिए लाभप्रद होने के साथ प्रदेश में कृषि क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित करेगी। गोरखपुर और संतकबीर नगर में हो रहा निर्माण सिंचाई विभाग केंद्रीय परियोजना के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर में कुल छह पायलट परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। इनमें चार परियोजनाओं  के फाइनल डीडीआर तैयार हो चुके हैं, जबकि शेष दो परियोजनाओं के कमांड एरिया को लेकर विचार चल रहा है, जिस पर जल्द ही स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। परियोजनाओं का कुल सीसीए (कल्चरेबल कमांड एरिया) 2149 हेक्टेयर है, जिसमें गोरखपुर के बांसगांव, मलांव व मझगवां, राजधनी, बरगदवां, जंगल गौरी-1 तथा संतकबीर नगर जिले में प्रजापतिपुर क्लस्टर शामिल हैं। इनमें से गोरखपुर के बांसगांव और जंगलगौरी-1 क्लस्टरों के कमांड एरिया को स्वीकृति मिलते ही, फरवरी 2026 के अंत तक सभी क्लस्टरों में परियोजनाओं का संचालन शुरू हो जाएगा। इससे क्षेत्र के हजारों किसान प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित होंगे। उन्हें रबी व खरीफ, दोनों फसलों के उत्पादन में लाभ मिलेगा। जल उपयोग दक्षता में होगी 75 प्रतिशत वृद्धि माइक्रो इरिगेशन की ये परियोजनाएं पीपीआईएन तकनीक के जरिए पानी को जलस्रोत से सीधे खेतों तक पहुंचाती है, जिससे पानी की बर्बादी में कमी आने के साथ जल उपयोग दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। परियोजना के तहत पीपीआईएन के जरिए क्षेत्र के सभी जलस्रोतों का एकीकरण कर उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही किसानों को माइक्रो इरिगेशन के यंत्र, ड्रिप और स्प्रिंकलर के लिए सहायता भी प्रदान की जाएगी। प्रत्येक क्लस्टर में गठित वाटर यूजर सोसाइटी सिंचाई नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगी। इन पायलट परियोजनाओं के सफल संचालन के आधार पर परियोजना का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में भी किया जाना है, जो प्रदेश में माइक्रो इरिगेशन के विकास से पीडीएमसी (पर ड्राप मोर क्रॉप) अवधारणा को सफल बनाएंगी। माइक्रो इरिगेशन की ये परियोजनाएं एक ओर किसानों को कम लागत पर बेहतर उत्पादकता और दीर्घकालिक जल-सुरक्षा प्रदान करेंगी, साथ ही मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रदेश में सतत कृषि के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

बस में मॉडिफिकेशन करने वालों पर परिवहन विभाग करेगा सख्त कार्रवाई

रांची. जिला परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से कांटाटोली स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड पर स्लीपर बसों की विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर सख्ती दिखाई गई और कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए। जांच के क्रम में कुल 21 बसों की जांच की गई। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआइआरटी) द्वारा स्लीपर बसों के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर संबंधित बस संचालकों को नोटिस जारी किया गया। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि चेसिस में एक्सटेंशन लगाकर बनाई गई बस बॉडी को तत्काल संचालन से हटाया जाएगा। सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण अब केवल किसी अप्रूव्ड टेस्ट एजेंसी की मंजूरी के साथ फार्म-22/22ए के आधार पर ही किया जाएगा। हर बस के पंजीकरण के समय लेआउट ड्राइंग अनिवार्य रूप से संलग्न करनी होगी, जिसमें बस के आयाम, दरवाजों की स्थिति, इमरजेंसी एग्जिट और रूफ हैच का स्पष्ट विवरण हो। इसके अलावा बस बॉडी निर्माता की मान्यता की वैधता की भी जांच अनिवार्य की जाएगी। उप परिवहन आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार (दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल) रांची हरविंश पंडित, मोटरयान निरीक्षक रांची विमल किशोर सिंह तथा जिला परिवहन पदाधिकारी रांची अखिलेश कुमार ने संयुक्त रूप से सभी स्लीपर बसों की गहन जांच की। अधिकारियों ने बताया कि स्लीपर कोचों में चालक के केबिन में लगाए गए पार्टीशन दरवाजे को तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ बसों से मौके पर ही पार्टीशन हटाने को कहा गया। इसके अलावा, सभी स्लीपर कोचों के बर्थ में लगे स्लाइडर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अग्नि सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्लीपर बसों में एफडीएसएस (फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम) लगाने के लिए बस आपरेटरों को एक माह का समय दिया गया है। साथ ही सभी बसों में न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के फायर एक्सटिंग्विशर (ग्रीन जोन) की उपलब्धता और कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा गया है। खादगढ़ा बस स्टैंड पर उपस्थित वाहन मालिकों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सीआईआरटी द्वारा जारी सभी सुझावों और निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वाहन स्वामियों ने विभागीय निर्देशों का पालन करने पर सहमति जताई और तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्य सरकार की सड़क सुरक्षा नीतियों के अनुरूप है, जिसमें यात्रियों के जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इंदौर में 2 साल में शुरू हुए 44,000 नए उद्योग, 1.70 लाख को मिला रोजगार

इंदौर  इंदौर जिला वर्तमान में औद्योगिक क्रांति के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान इंदौर में औद्योगिक गतिविधियों में भारी उछाल आया है। महाप्रबंधक स्वप्निल गर्ग ने जानकारी दी है कि जिले में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से हजारों नए उद्यमियों को सहायता प्रदान की गई है। पिछले तीन वर्षों के भीतर इंदौर में पंद्रह नए औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए हैं, जिनमें सात सौ से अधिक नई इकाइयां आकार ले रही हैं। इन नए उद्योगों के माध्यम से लगभग बीस हजार युवाओं के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। औद्योगिक विस्तार और निवेश का प्रमुख केंद्र बन रहा इंदौर गर्ग ने कहा कि इंदौर अपनी बेहतर औद्योगिक संस्कृति, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता और मजबूत कनेक्टिविटी के कारण निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला बनाने के बजाय नौकरी देने वाला उद्यमी बनाना है। इसके लिए प्रदेश में निरंतर उद्योग मित्र नीतियां लागू की जा रही हैं, जिससे निवेश की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हुई है। लॉजिस्टिक और रेलवे नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव आएगा आने वाले तीन से चार वर्षों में इंदौर देश के एक बड़े रेलवे हब के रूप में पहचाना जाएगा। वर्तमान में यहां से संचालित होने वाली ट्रेनों की संख्या सौ से कम है, जिसे बढ़ाकर तीन सौ तक करने की योजना है। छह अलग-अलग दिशाओं में सशक्त रेल कनेक्टिविटी के साथ-साथ सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। इंदौर की सात सौ किलोमीटर की परिधि में देश की साठ प्रतिशत आबादी के आने से लॉजिस्टिक लागत में बड़ी कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य वर्तमान चौदह प्रतिशत की लॉजिस्टिक लागत को घटाकर सात से आठ प्रतिशत तक लाना है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। महिला उद्यमिता में सकारात्मक नतीजे मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान कुल नौ सौ चौंसठ उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। विशेष रूप से महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई विभाग द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप तीन सौ एक महिला उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत कुल तीन सौ इकतालीस इकाइयों को तीन सौ अट्ठाइस करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की जा रही है, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में एक बड़ा कदम है। शत-प्रतिशत उद्योग ग्राम पंचायत वाला जिला बना इंदौर इंदौर जिले ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2024-25 की शुरुआत में जिले की एक सौ नवासी ग्राम पंचायतें उद्योग विहीन थीं। प्रशासन और उद्योग विभाग के समन्वित प्रयासों से इन सभी पंचायतों में सूक्ष्म उद्योग स्थापित किए गए हैं। अब इंदौर की सभी तीन सौ चौंतीस ग्राम पंचायतों में उद्योग संचालित हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर दो हजार से अधिक ग्रामीणों को रोजगार मिला है। उद्यम पंजीयन के क्षेत्र में भी जिले ने रिकॉर्ड बनाया है, जहां पिछले दो वर्षों में कुल चौवालीस हजार पांच सौ एक उद्यमों का पंजीयन हुआ है, जिनसे एक लाख सत्तर हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। जरूरी आंकड़े… 44 हजार 501 उद्यमों का पंजीयन इंदौर जिले में पिछले दो वर्षों के सफल कार्यकाल के दौरान किया गया है। 1 लाख 70 हजार 678 लोगों को निर्माण एवं सेवा क्षेत्र की गतिविधियों के विस्तार से रोजगार प्राप्त हुआ है। 15 नए इंडस्ट्रियल पार्क पिछले तीन वर्षों में इंदौर जिले की सीमाओं के भीतर स्थापित किए गए हैं। 328.50 करोड़ रुपये से अधिक का कुल अनुदान एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत विभिन्न इकाइयों को स्वीकृत हुआ है। 300 तक इंदौर में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है जो वर्तमान में 100 से भी कम है। 60 प्रतिशत देश की आबादी इंदौर के 700 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क दायरे में भविष्य में आ जाएगी। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग के पंचायत प्रतिनिधियों को महाराष्ट्र अध्ययन भ्रमण के लिए किया रवाना

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत बस्तर संभाग के जिला पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के दल को प्रशिक्षण सह अध्ययन भ्रमण के लिए रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों को सकुशल एवं सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दीं तथा दो बसों को हरी झंडी दिखाकर दल को रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस अध्ययन भ्रमण के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को अन्य राज्यों की बेहतर कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) की जानकारी प्राप्त होगी, जिसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह यात्रा बहुउद्देशीय है, जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संवाद, विचार-विमर्श, पंचायत प्रतिनिधियों के दायित्वों, नवाचारों तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों का आदान-प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधियों से कहा कि वे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर की पहचान के रूप में राज्य के पर्यटन, संस्कृति, जनहितैषी एवं विकासमूलक योजनाओं, सुशासन (गुड गवर्नेंस) तथा पारदर्शी शासन व्यवस्था के बारे में भी अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों से जानकारी साझा करें। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी सभी पंचायत प्रतिनिधियों को एक्सपोज़र विज़िट के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस प्रकार के अध्ययन भ्रमण से राज्य की पंचायत राज व्यवस्था को और अधिक सशक्त, प्रगतिशील एवं विकासोन्मुख बनाने में सहायता मिलेगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के जिला पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को महाराष्ट्र राज्य की पंचायत राज व्यवस्था का अध्ययन कराने के लिए 18 जनवरी से 23 जनवरी 2025 तक मुंबई भेजा जा रहा है। प्रथम चरण में कुल 60 पंचायत प्रतिनिधि एवं नोडल अधिकारी इस प्रशिक्षण सह अध्ययन भ्रमण में सम्मिलित हैं। इस दौरान प्रशिक्षण सत्रों के साथ-साथ महाराष्ट्र की उत्कृष्ट पंचायतों का भी भ्रमण कराया जाएगा। आगामी चरणों में राज्य के सभी संभागों के जिला पंचायत प्रतिनिधियों को क्रमवार इस प्रकार के अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाएगा। इस अवसर पर विधायक लता उसेंडी, विधायक मोतीलाल साहू, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की संचालक प्रियंका महोबिया सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

राजस्थान सरकार ने औद्योगिक विकास का तैयार किया वार्षिक रोडमैप

जयपुर. राजस्थान सरकार ने वर्ष 2026 के औद्योगिक विकास के लिए रोडमैप तैयार किया है। सरकार का फोकस बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नए स्तर पर ले जाने पर है, ताकि प्रदेश निवेशकों और उद्यमियों के लिए अधिक आकर्षक बन सके। इसमें जेपीएमआइए (जयपुर-मुंबई इंडस्ट्रियल एरिया) के विकास, डीएमआइसी के तहत दौसा और केबीएनआइआर जैसे दो नए नोड्स, भीलवाड़ा में टेक्सटाइल पार्क तथा किशनगढ़ में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जोन को विकसित करना शामिल है। इसके साथ ही इस वर्ष दौसा-बांदीकुई औद्योगिक क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी गई है। सबसे बड़ा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब बनेगा जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को पूर्ण इंडस्ट्रियल टाउनशिप के रूप में विकसित कर रही है। यह टाउनशिप लगभग 3600 हेक्टेयर भूमि में विकसित की जा रही है। योजना के तहत पहले चरण में 641 हेक्टेयर भूमि पर प्रारंभिक विकास कार्य शुरू कर दिया गया है। इस चरण में करीब 370 करोड़ की लागत से इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट होगा। दूसरे चरण में करीब 1100 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक विकास किया जाएगा। इस औद्योगिक टाउनशिप में राज्य का सबसे बड़ा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब स्थापित करने का प्रस्ताव भी है। इसके जरिए परिवहन और लॉजिस्टिक सुविधाओं को मजबूती मिलेगी तथा उद्योगों की लागत में कमी आएगी। उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी दरों पर भूमि आवंटन शुरू करने की तैयारी कर ली है।

झारखंड में रात की ठण्ड से मिल सकती है राहत

रांची. झारखंड में रांची समेत कई जिलों में सुबह और रात के वक्त कनकनी कायम है। पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में शीतलहर की स्थिति बनी रही। वहीं मौसम विभाग ने शनिवार को भी राज्य के छह जिलों में शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में सिमडेगा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, रामगढ़ और बोकारो शामिल हैं। विभाग ने अगले चार दिनों के दौरान राज्य के न्यूनतम तापमान में पांच डिग्री तक चढ़ने का अनुमान व्यक्त किया है। ऐसे में 20 जनवरी से रात की कनकनी से राहत मिल सकती है। इधर, कई जिलों में बीते 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहा। शुक्रवार को रांची का मैकलुस्कीगंज सबसे ठंडा रहा। वहां के स्थानीय तापमापी यंत्र के अनुसार, न्यूनतम तापमान शून्य दर्ज किया गया। वहीं कांके का तापमान तीन डिग्री रहा। जिलों की बात करें तो खूंटी का न्यूनतम तापमान 2.6 रहा। गुमला का न्यूनतम तापमान शुक्रवार को दो डिग्री वृद्धि के 2.8 दर्ज किया गया। गुरुवार को यहां का पारा 0.8 डिग्री था। इधर, मामूली कमी के साथ रांची का न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री दर्ज किया गया। मेदिनीनगर, कोडरमा, लातेहार, गुमला आदि जिलों के तापमान में एक से दो डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान अब भी नौ डिग्री से नीचे या उसके करीब है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, आनेवाले सात दिनों में आसमान पूरी तरह साफ रह सकता है। इससे दिन में धूप और कड़ी होगी, जिससे कनकनी से राहत मिल सकती है। अधिकतम तापमान में भी वृद्धि का अनुमान है। तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही झारखंड के लोगों को राहत मिल जाएगी।

हरियाणा पुलिस ने की डिजिटल स्ट्राइक, 1,018 आपत्तिजनक लिंक रिपोर्ट किए, 583 लिंक हटाए गए

चंडीगढ़  हरियाणा पुलिस ने सोशल मीडिया पर बढ़ती अवैध और आपत्तिजनक गतिविधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ा डिजिटल अभियान शुरू किया है। यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से की जा रही है। सोशल मीडिया पर अक्सर आपत्तिजनक, राष्ट्र-विरोधी, धर्म-विरोधी और भ्रामक कंटेंट पोस्ट किया जा रहा था, जिससे तनाव और भ्रम फैल रहा था, इसलिए एक समन्वित कार्रवाई जरूरी हो गई थी। इसी उद्देश्य से साइबर हरियाणा टीम ने लगभग एक महीने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लगातार निगरानी शुरू की, और यह अभियान अभी भी जारी है। इस अभियान के तहत, अब तक कुल 1,018 आपत्तिजनक लिंक और प्रोफाइल की रिपोर्ट की गई है, जिनमें से 583 को सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा पहले ही हटा दिया गया है या ब्लॉक कर दिया गया है। बाकी 435 समीक्षा के विभिन्न चरणों में हैं और जल्द ही हटा दिए जाएंगे। ये आंकड़े सोशल मीडिया पर व्यवस्था बनाए रखने में हरियाणा पुलिस की गंभीरता और त्वरित कार्रवाई को साफ तौर पर दिखाते हैं। अभियान के दौरान, साइबर टीम हर रोज ऐसे पोस्ट, वीडियो, लिंक और प्रोफाइल की पहचान कर रही है जिनमें गलत जानकारी, भड़काऊ भाषा या सार्वजनिक शांति भंग करने वाली सामग्री है। जैसे ही ऐसी सामग्री का पता चलता है। आईटी एक्ट की धारा 79(3)(बी) के तहत संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया जाता है, जिसमें तुरंत हटाने का निर्देश दिया जाता है। इस प्रक्रिया के किसी भी चरण में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है। हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए हरियाणा पुलिस ने एक और महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया है। देश भर में संदिग्ध ट्रेडिंग और निवेश ऐप्स और चैनलों के बढ़ते संचालन को नियंत्रित करने के लिए, साइबर हरियाणा ने 12 जनवरी को एक विशेष और सुव्यवस्थित अभियान शुरू किया। इस पहल के तहत, अब तक 28 ऐसे ऐप्स और चैनलों की पहचान की गई है। इनमें से 14 को पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से सफलतापूर्वक हटा दिया गया है, जबकि बाकी 14 सोशल मीडिया इंटरमीडियरी द्वारा अंतिम समीक्षा और हटाने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल नागरिकों के लिए डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और ऑनलाइन घोटालों पर काफी हद तक रोक लगाएगी। आने वाले दिनों में, एक सुरक्षित डिजिटल माहौल पक्का करने के लिए ऐसे धोखेबाज़ ऐप्स के खिलाफ और भी ज्यादा सख्त और असरदार कार्रवाई की जाएगी। अजय सिंघल ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस सोशल मीडिया पर झूठी या भड़काऊ जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ बहुत सख्त है और किसी भी हालत में ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया युवाओं और समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है और एक भी गुमराह करने वाली या भड़काऊ पोस्ट सद्भाव और शांति के लिए सीधा खतरा बन सकती है। डीजीपी ने आगे कहा कि साइबर हरियाणा टीमें लगातार अलर्ट हैं और संवेदनशील या आपत्तिजनक पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, निवेश करने से पहले किसी भी नए ऐप को वेरिफाई करें और बिना वेरिफाई किए संवेदनशील कंटेंट शेयर करने से बचें। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि अगर किसी को कोई संदिग्ध पोस्ट, लिंक या ऐप दिखे, तो उसे तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। एडीजीपी साइबर शिबाश कबीराज ने कहा कि इस अभियान का मुख्य मकसद एक सुरक्षित, जागरूक और भरोसेमंद डिजिटल माहौल बनाना है ताकि सोशल मीडिया का इस्तेमाल ज़िम्मेदारी से किया जा सके। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है, जिसका अगर जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो यह समुदाय को जोड़ने, जानकारी फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने में मदद कर सकता है। इस सोच के साथ, पुलिस नागरिकों को अलर्ट रहने, वेरिफाई की गई जानकारी शेयर करने और संदिग्ध या गुमराह करने वाले कंटेंट को फॉरवर्ड करने से बचने के लिए प्रोत्साहित करती है। पुलिस का मानना ​​है कि जनता के सहयोग और जागरूकता से यह अभियान और भी ज्यादा असरदार होगा, जिससे सभी मिलकर एक सुरक्षित और स्वस्थ डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में मदद करेंगे। डीजीपी ने दोहराया कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कानून लागू करने का चल रहा अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा। उन्होंने फिर से कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषण, गलत जानकारी और ऑनलाइन धोखाधड़ी की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर स्तर पर सख्त, समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी। धोखाधड़ी वाले इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग ऐप्स के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए डीजीपी अजय सिंघल ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों को कम समय में ज्यादा रिटर्न का वादा करके फंसाते हैं, उन्हें अपनी स्कीमों में फंसा लेते हैं और कई लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं। डीजीपी ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध ऐप, लिंक या वेबसाइट के जरिए पैसे ट्रांसफर न करें, और कोई भी फाइनेंशियल फैसला लेने से पहले किसी भी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म की सच्चाई को अच्छी तरह से वेरिफाई करें। उन्होंने आगे अनुरोध किया कि लोग सतर्क रहें और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करें। डीजीपी ने आगे कहा कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में पीड़ितों को तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना चाहिए या साइबर क्राइम की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए, ताकि धोखाधड़ी से ट्रांसफर की गई रकम को समय पर दूसरे बैंक खातों में जाने से रोका जा सके और अपराधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके। –आईएएनएस