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बिना इजाजत लगेगा स्मार्ट मीटर! MP सरकार के जवाब से बढ़ा विवाद

भोपाल प्रदेशभर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उठ रहे सवालों और शंकाओं को लेकर सरकार ने विधानसभा में जवाब दिया कि स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ता की सहमति लिया जाना आवश्यक नहीं है। बिजली कंपनियों द्वारा चेक मीटरों को लगाया जा रहा है, अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने 31335 चेक मीटर लगाए हैं। स्मार्ट मीटरों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक कैलाश कुशवाह, राजन मंडलोई, दिलीप परिहार द्वारा लगाए गए प्रश्नों के उत्तर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी दी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भविष्य में स्मार्ट मीटरों की स्थापना के लिए जारी होने वाली निविदाओं में पांच प्रतिशत चेक मीटर लगाए जाने का प्रविधान रखा जाना है।   स्मार्ट मीटरों के संबंध में भी शिकायत प्राप्त होने पर चेक मीटर लगाकर उपभोक्ता की शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने से विद्युत उपभोक्ताओं को विभिन्न लाभ यथा विद्युत खपत एवं जिलों में पारदर्शिता, रियल टाइम खपत की निगरानी, शासन की सब्सिडी योजनाओं का लाभ पात्र उपभोक्ताओं को प्राप्त होगा। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक 20 प्रतिशत की छूट निम्न दाब उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर स्थापित कराए जाने पर दिन के समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। उक्त स्मार्ट मीटरों में नेट मीटरिंग की उपलब्धता होने के दृष्टिगत सोलर का विकल्प लेने वाले उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इसका लाभ प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में बिजली कंपनियों को निजी हाथों में बेचने संबंधी कोई भी कार्रवाई प्रचलन में नहीं है। ऊर्जा विभाग अंतर्गत कार्यरत तीनों बिजली वितरण कंपनियों में से पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ही दो निविदाओं के माध्यम से स्मार्ट मीटर क्रय किए गए है। स्मार्ट मीटरों की स्थापना का कार्य डिजायन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन आपरेट ट्रांसफर माडल पर किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने बताया-पांच नहीं शत प्रतिशत मीटरों की हो रही जांच     ऊर्जा मंत्री ने जानकारी में बताया कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में पांच प्रतिशत मीटर नहीं शत प्रतिशत लगाए जा रहे मीटरों की जांच लैबोरेटरी में कराई जा रही है।     शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना व मध्यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता-2021 के अध्याय-8 "विद्युत मापन तथा बिलिंग" के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पारदर्शी बिलिंग, मीटर रीडिंग प्रणाली में सुधार और सटीक ऊर्जा लेखाकंन के लिए लगाए जा रहे हैं। 

नेताओं की फिजूलखर्ची पर उमा भारती का हमला: बोले—‘काला धन शादियों में किया जाता है खर्च’

टीकमगढ़ नेता अक्सर दो नंबर का पैसा खपाने के लिए शादियों में फिजूलखर्ची करते हैं। आजकल अधिकांश शादियां मैरिज गार्डन में हो रही हैं और इनमें अत्यधिक खर्च किया जा रहा है। बड़े-बड़े उद्योगपति शादियों में करोड़ों रुपये देकर मंच सजाकर डांसर बुलाते हैं। इतने रुपयों में हजारों गरीब बेटियों के विवाह कराए जा सकते हैं। अगर हम सीमित साधनों में काम चलाना शुरू कर दें तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक क्रांति होगी। पहले 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' कहा था, अब 'भ्रष्टाचारी भारत में रहो, लेकिन सुधर जाओ' कहना होगा।' यह बात पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने टीकमगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अगले दस वर्षों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पद पर रहना आवश्यक है। गौरतलब है कि मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी मां के नाम यात्रा निकालने के बाद मीडिया से चर्चा की। जहां पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों की शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची को लेकर बयान दिया। उन्होंने नेताओं से बार-बार आग्रह किया कि वे दिखावा न करें, क्योंकि उनकी इज्जत पहले से ही है।   बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं चर्चा के दौरान उमा भारती ने कहा कि उन्होंने उद्योगपतियों की शादियों में जाना बंद कर दिया है और अपने गार्ड को ऐसे निमंत्रण पत्र स्वीकार न करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि देश में यह प्रतिस्पर्धा आ गई है कि किसके पास ज्यादा सुविधाएं हैं। इससे बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं कि वह कमजोर हैं। यह देखकर माता-पिता प्रतिस्पर्धा करते हैं और बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए भ्रष्टाचार करना शुरू कर देते हैं, जबकि सीमित साधनों में भी काम चलाया जा सकता है। पूर्व सीएम ने ऐसे में नेताओं से शादियों में फिजूलखर्ची बंद करने की सलाह दी है।

जहरीला कफ सिरप! मध्यप्रदेश में बच्चों द्वारा पी गई दवा में 42 फीसदी डीईजी मिला

भोपाल मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के तीन और सैंपल अमानक पाए गए हैं। इनमें डायथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मात्रा 42 प्रतिशत पाई गई है। जबकि निर्धारित मानक के अनुसार, किसी भी कफ सीरप में डीईजी की मात्रा 0.1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। ये तीनों उन बाटल के सैंपल हैं, जो बच्चों द्वारा पीने के बाद बच गए थे। इनके सैंपल की जांच मध्य प्रदेश में विषाक्त कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने राज्य औषधि लैब से कराई है। इससे साफ है कि बच्चों की मौत अधिक डीईजी मिश्रित कोल्ड्रिफ कप सीरप पीने से ही हुई।   दरअसल, अधिक मात्रा में डीईजी का सेवन किडनी फेल कर देता है। बता दें कि इसके पहले तमिलनाडु औषधि प्रशासन की जांच में कोल्ड्रिफ सीरप में डीईजी की मात्रा 48.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश औषधि प्रशासन विभाग की जांच में 46.2 प्रतिशत मिली थी। उल्लेखनीय है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप बैच नंबर एसआर-13 के अतिरिक्त, खांसी का ही सीरप रिलाइफ बैच नंबर एलएसएल 25160 और रेस्पीफ्रेस टीआर-आर 01जीएल 2523 भी अमानक मिला था। इनमें डीईजी की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक थी।   चार दवाएं भी अमानक मिलीं वहीं, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया है कि कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद प्रदेश भर में कफ सीरप के जितने सैंपल लिए गए थे, उनमें इनमें 109 मानक के अनुरूप और तीन अमानक मिले हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के उपयोग में आने वाली चार दवाएं अमानक मिली हैं, जिनमें पेट के उपचार के लिए उपयोग होने वाला हेप्साडिन सीरप, चिटेम-एमडी, फेरस एस्कार्बेट टैबलेट, पेट में कीड़े मारने की अलबेंडाजोल टैबलेट शामिल है। उप मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

पार्किंग की बड़ी सौगात: हरियाणा के इस शहर में तैयार होगी अत्याधुनिक मल्टी-लेवल पार्किंग

हिसार  हरियाणा से अच्छी खबर सामने आ रही है जहां हिसार शहर के सिटी थाना के सामने प्रस्तावित मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाने की योजना 11 साल बाद सिरे चढ़ी। हिसार शहर के नगर निगम आयुक्त नीरज कुमार ने बताया कि मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में हिसार शहर में मल्टी स्टोरी पार्किंग स्थल बनाने की योजना को हरी झंडी दिखा दी गई है। उन्होंने बताया कि यह जमीन जीएलएफ की हैं, जो लगभग 2 एकड़, 1 कनाल और 12 मरले है। जो नगर निगम को लगभग 15 करोड़ रुपए में हस्तांतरित हुई है।  जानें इसकी खासियत     इस पार्किंग स्थल का डिजाइन राष्ट्रीय औद्योगिक संस्थान कुरूक्षेत्र द्वारा तैयार किया गया है।      इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर एजेंसी द्वारा 167 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।      इस पार्किंग स्थल पर एक साथ 850 वाहनों के खड़े होने की सुविधा मिलेगी।      पूरे पार्किंग स्थल को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा जाएगा।     नगर निगम इस जमीन को 99 साल के पट्टे पर एजेंसी को देगी।      पार्किंग स्थल पर 3 बेसमेंट, भू- तल और 3 बहुमंजिला इमारत बनेगी।       ग्राउंड फ्लोर पर 1025 वर्ग मीटर का कम्यूनिटी हॉल बनाया जाएगा।      कम्यूनिटी हॉल के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम के पास होगी, बाकी हिस्से की जिम्मेदारी एजेंसी के पास रहेगी।   

नशे पर बड़ी कार्रवाई: पंजाब में इन कैप्सूल की बिक्री पूरी तरह बैन, आदेश लागू

मानसा  डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट नवजोत कौर ने इंडियन सिविल प्रोटेक्शन कोड के सेक्शन 163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मानसा जिले में 75 mg से ज़्यादा प्रेगाबालिन वाले कैप्सूल की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। उन्होंने कहा कि केमिस्ट दवा देते समय प्रिस्क्रिप्शन स्लिप पर अपनी मुहर लगाएगा और दवा देने की तारीख दर्ज की जाएगी। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने कहा कि सिविल सर्जन मानसा ने उनके ध्यान में लाया है कि 300 mg वाले प्रेगाबालिन कैप्सूल का आम लोग गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और कई लोग इसे नशे (जिसे सिग्नेचर भी कहते हैं) के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने मानसा जिले में इसकी बिक्री पर बैन लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज को आमतौर पर उसकी हालत के हिसाब से रोजाना 25-150 mg प्रेगाबालिन की डोज दी जाती है। यह आदेश 31 जनवरी 2026 तक लागू रहेगा। 

मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा में दिए निर्देश

किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच करें सुनिश्चित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लखपति दीदी के समान लखपति बीघा का लक्ष्य रखते हुए एक बीघा से एक लाख रूपए की कमाई करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया जाए। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें बाजार में अपनी उपज का सीधे लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हो। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं। हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित किया जाए। नरवाई प्रबंधन के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना विकसित की जाए। साथ ही किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतिकरण किया गया और आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि –     प्रदेश दालो, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में प्रथम तथा खाद्यान्न, अनाज एवं गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है।     उर्वरक वितरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 38.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. वितरित किया गया। वर्ष 2025-26 में 29.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 30 नवम्बर तक 19.42 मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का वितरण हुआ।     प्रधानमंत्री फसल बीमा में वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 77 लाख बीमित कृषकों को 961.68 करोड़ रूपए और वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 79 लाख बीमित कृषकों को 1275.86 करोड़ रूपए के दावे का भुगतान किया गया।     मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4,687 करोड़ रूपए, वर्ष 2024-25 में 4,849 करोड़ रूपए और वर्ष 2025-26 में 3,374 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई।     प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड भी प्राप्त हुआ।     मंडी बोर्ड द्वारा एमपी फार्म गेट ऐप से किसान अपने दाम पर, अपने घर, अपने खलिहान और गोदामा से अपनी कृषि उपज बेचने में सक्षम हुआ। इस नवाचार को स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ।     पराली प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 1312, वर्ष 2024-25 में 1757 और वर्ष 2025-26 में 2479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए।     कृषि यंत्रीकरण के अंतर्गत भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल आरंभ हुए।     ई-विकास पोर्टल से उर्वरक वितरण का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया। इसे सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की योजना है। आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना     प्रदेश के सभी 363 नगरपालिका, नगर पंचायतों में साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार लगाए जाएंगे।     पर ड्रॉप मोर क्रॉप – दबाव सिंचाई प्रणाली के तहत वर्ष 2025-26 में 25 हजार, वर्ष 2026-27 में एक लाख और वर्ष 2027-28 में दो लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है।     नरवाई (पराली) प्रबंधन के अंतर्गत पराली जलाने की घटनाओं में वर्ष 2027-28 तक 80 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।     आगामी दो वर्षों में सभी मंडियों का हाईटेक बनाया जाएगा।     तिलहन, दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।     कृषि में अनुसंधान कार्ययोजनाओं को प्रोत्साहन देते हुए प्रयोगशाला से खेत की दूरी को कम किया जाएगा। बैठक में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान हाईटेक नर्सरी, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कृषकों और उद्यमियों की क्षमता संवर्धन के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी दी गई।  

बिना काम किए उठाई रकम! पंचायतों में करोड़ों की अनियमितता, अफसरों की जांच अधर में

बाराबंकी बिना कार्य कराए धनराशि निकाल ली गई, तो बहुत सी पंचायतों में हुए निर्माण में अनियमितताओं की शिकायतें शपथ पत्र प्रस्तुत कर की गईं। जिलाधिकारी के आदेश पर टीमें गठित हुईं, कुछ में जांच भी हुई, कई अधूरी हैं। जुलाई से अब तक 18 ग्राम पंचायतों में लगे घोटाले के आरोपों की जांच में अफसरों की रिपोर्ट का इंतजार है। फतेहपुर के नंदरासी की जांच डीएचओ के नेतृत्व में गठित टीम ने किया था। इस पर कार्रवाई होनी है, लेकिन फाइल जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के स्तर पर लंबित है। इसी तरह से दरियाबाद के कमोली की जांच जिला कृषि अधिकारी ने की थी।  सिरौलीगौसपुर के सैदनपुर की जांच जिला युवक कल्याण अधिकारी, बनीकोडर के सिल्हौर की जांच जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने की थी, लेकिन आज भी यह फाइलें लंबित पड़ी हैं। सिरौलीगौसपुर के मोहम्मदपुर बाहू, बदोसराय व हमीदपुर में जिला युवा कल्याण अधिकारी, त्रिवेदीगंज के बहुता की जांच जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, बनीकोडर के फतेहगंज में उपायुक्त मनरेगा ने जांच की थी, रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है, अब इस पर जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की ओर से रिपोर्ट लगनी है, लेकिन मामले महीनों से लंबित हैं। इन प्रकरणों में डीएम ने रिपोर्ट मांगी है। इन गांवों की जांच अधूरी सूरतगंज बंभनावा की जांच मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, फतेहपुर के नंदनाकला की फाइल जिला उद्यान अधिकारी, बनीकोडर के जरौली की जांच जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, फतेहपुर के गौरी बनियानी की जांच जिला प्रोबेशन अधिकारी को करनी है। सूरतगंज के बतनेरा की जांच सीवीओ, दरियाबाद के तहसीपुर में जिला कृषि रक्षा अधिकारी, सिरौलीगौसपुर के चैला, सूरतगंज के रहटा की जांच सीवीओ को करनी है। यह सभी प्रकरण जुलाई या अगस्त 2025 के हैं। पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन घोटालों के आरोपों की जांच पूरी नहीं हो पाई है।  

धुंध का असर: पंजाब में रेल यातायात प्रभावित, कई ट्रेनें रद्द

कोटकपूरा  आने वाले समय के दौरान पड़ने वाली भारी धुंध की संभावना को लेकर रेलवे विभाग की ओर से कई गाड़ियों को रद्द करने का फैसला लिया गया है। रामकेश मीना स्टेशन मास्टर कोटकपूरा ने बताया कि गाड़ी नंबर- 74981- जो सुबह 4.25 पर कोटकपूरा से फाजिल्का जाती है व गाड़ी नंबर 74986 जो सुबह 4.20 पर कोटकपूरा से बठिंडा जाती है को 01 से रद्द किया गया है। इसी तरह गाड़ी नंबर- 74987 जो रात 9.15 बजे कोटकपूरा से फाजिल्का जाती है व गाड़ी नंबर-74984 जो रात 10 बजे फाजिल्का से चलकर कोटकपूर आती है यह गाड़िया भी रद्द की गई हैं। इसके अलावा अजमेर से अमृतसर जाने वाली गाड़ी नंबर- 19611 भी 1 दिसम्बर से रद्द की गई है। इसके अलावा लालगड़ से गुहाटी जाने वाली गाड़ी नंबर- 15910 सप्ताह में सिरफ एक दिन ही चलेगी। उन्होंने बताया कि एक दिसम्बर से रद्द की गई यह सभी गाड़ी 28 फरवरी 2026 तक धुंध कारण रद्द रहेंगी। 

किसानों की मजबूरी: बाजार में कीमत धड़ाम, खेत में गाएं खा रही केले की फसल

बड़वानी क्षेत्र में केला उत्पादक किसानों को इन दिनों फसल के दाम नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। केले के कम दाम मिलने से गुस्साए किसान फसल को काटकर मवेशियों को केले खिला रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे अपनी फसल को खेत से उखाड़कर फेंकने को मजबूर हैं। दरअसल, नर्मदा पट्टी क्षेत्र में केला उत्पादन बेहतर होता है। यहां पर उत्पादित केला कई राज्यों को भेजा जाता है। इसमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा व दिल्ली शामिल है। वहीं इस बार कम दाम व खराब हालात के कारण किसानों को अपनी फसल नष्ट करनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार यदि केले के दाम नहीं मिलेंगे तो कैसे चलेगा।   दाम तो दूर मजदूरी की लागत भी नहीं निकल पा रही है। ग्राम बगूद के किसान अनिल जाट का कहना है कि केले का भाव थोक में दो रुपये प्रति किलो मिल रहा है जबकि उत्पादन लागत 5 से 6 रुपये प्रति किलो आ रही है। ऐसे में किसानों के सामने फसल को नष्ट करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। किसानों ने उचित दाम दिए जाने की मांग की है।

राजस्थान के जल संसाधनों पर खास फोकस, प्रवासी राजस्थानी दिवस में होगा अहम विमर्श

जयपुर राजस्थान में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता एक महत्वपूर्ण विषय है और इस दिशा में प्रवासी राजस्थानियों का सहयोग प्रदेश को हमेशा मिलता रहा है। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में आगामी 10 दिसंबर को जयपुर में आयोजित होने जा रहे प्रवासी राजस्थानी दिवस के दौरान इस विषय पर सार्थक संवाद के लिए एक विशेष सत्र होगा। “डेवलपमेंट ऑफ सस्टेनेबल वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर इन राजस्थान: ए रेस्पांसिबिलिटी एंड एन ऑपरच्युनिटी" विषय पर आयोजित इस सत्र में जल संसाधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ राजस्थान में जल की पर्याप्त उपलब्धता के लिए व्यावहारिक, स्केलेबल और तकनीकी उपायों पर चर्चा करेंगे। इस चर्चा में इकोलैब इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष खंडेलवाल “अनलॉकिग वाटर सिक्योरिटी ऑर वाटर-एनर्जी- ए आई नेक्सस" विषय पर अपने विचार रखेंगे। वहीं नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूआई) की निदेशक डॉ. देबोलिना कुंडू “वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर इम्प्रूवमेंट”, आयन एक्सचेंज (इंडिया) लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और सीईओ श्री इंद्रनील दत्त “एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इन वेस्ट वाटर ​रिसाइकल, रीयूज़ एंड ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज” विषय पर चर्चा करेंगे। इस सत्र में बायोटेक्नोलॉजी और जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इनमें नेशनल एग्री-फ़ूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट (एनएबीआई) के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्विनी पारीक, “एडवांसिंग प्लांट मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी, स्पेशली इन डेवलपिंग स्ट्रेस-टॉलरेंट क्रॉप्स” पर विचार व्यक्त करेंगे। राजस्थान की दृष्टि से जल संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। इस विषय पर फोकस करते हुए, फेडरेशन ऑफ़ सूरत ट्रेड एंड टेक्सटाइल एसोसिएशन्स (एफओएसटीटीए) के अध्यक्ष कैलाश हकीम, “वाटर कंज़र्वेशन एंड रिसोर्सेज़ मैनेजमेंट” पर विचार व्यक्त करेंगे और जल संरक्षण के लिए उद्योग और समाज की आपसी भागीदारी बढ़ाने पर जोर देंगे। वहीं, रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान (आरजेडीएसएस) के परियोजना प्रमुख भूपेंद्र पालीवाल “वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट” पर अपनी बात रखेंगे। इस विषय पर वैश्विक नजरिया सामने लाने के लिए विओलिया वाटर टेक्नोलॉजीज़ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और इंजीनियरिंग और खरीद के साउथ एशिया और एशिया पैसिफिक लीडर श्री गोपाल मदाभुशी “वाटर रीयूज़ एंड टेक्नोलॉजी एडैप्टेशन” पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। प्रवासी राजस्थानी दिवस के अंतर्गत आयोजित हो रहे इस विशेष सत्र में राजस्थान में जल संरक्षण और जल संसाधनों की उपलब्धता के लिए परंपरागत और नवीन उपायों के इस्तेमाल तथा इस दिशा में जनसमुदाय की जिम्मेदारी पर सार्थक संवाद होगा। इस सत्र का उद्देश्य राजस्थान के लिए सतत् जल आधारभूत ढांचा के मामले में एक ऐसा विजन तैयार करना है, जिसमें अवसर व जिम्मेदारी साथ-साथ हों और जल संसाधन से जुड़ी चुनौतियों को दूर किया जा सके।