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अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह के लिए काशी से विशेष प्रतिनिधिमंडल रवाना, आयोजन की तैयारियाँ अंतिम चरण में

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री रामलला मंदिर में ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। देश भर से रामभक्त एवं गणमान्य व्यक्ति इस आयोजन में शामिल होंगे, जिसमें काशी से सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर, अपना घर आश्रम के डॉ. के. निरंजन, डोमराजा परिवार के सिकंदर चौधरी, सुनील चौधरी, पवन चौधरी सहित कई लोग इस समारोह में शामिल होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर ने  कहा कि काशी की पावन धरती से अयोध्या पहुंचकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनना जीवन का एक अद्भुत क्षण होगा। डोमराजा परिवार के सुनील चौधरी ने कहा कि प्रभु श्रीराम में अटूट आस्था रखने वाले समाज के हर वर्ग के लोगों को आमंत्रित किया गया है। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। श्री रामलला मंदिर में ध्वजारोहण समारोह में काशी तथा आसपास के जिलों से भी कई लोगों को आमंत्रण भेजा गया है। काशी से सभी आमंत्रितजन 24 नवंबर को बस द्वारा अयोध्या के लिए रवाना होंगे। सभी के ठहरने की व्यवस्था कारसेवकपुरम में की गई है। काशी प्रांत के भदोही, मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी, कौशांबी, प्रयागराज सहित कई जिलों से लोग अयोध्या पहुंचेंगे। 25 नवंबर को ही राम मंदिर में क्यों हो रहा भव्य कार्यक्रम? जानें इसके पीछे की बड़ी वजह प्रभु राम की नगरी अयोध्या में 25 नवंबर को एक ऐतिहासिक कार्य होने जा रहा है, जिसके लिए खास तैयारियां चल रही हैं. अयोध्या में यह पहली बार होगा, जब राम जन्मभूमि परिसर में बने भव्य राम मंदिर में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना 25 नवंबर दिन मंगलवार को करेंगे. हर राम भक्त के मन में यह सवाल है कि आखिर 25 नवंबर को ऐसा क्या है कि इसी दिन यह शुभ घड़ी आई है. इस दिन का क्या महत्व है. 22, 23 अथवा 24 तारीख क्यों नहीं रखा गया.  दरअसल 25 नवंबर का दिन बेहद खास है. धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन विवाह पंचमी है और इसी दिन त्रेतायुग में प्रभु राम और माता जानकी का विवाह हुआ था. इस दिन किया गया कार्य शुभ माना जाता है. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि 25 नवंबर का दिन मंगलवार पढ़ रहा है और इस दिन चंद्रमा भी मकर राशि में विद्यमान है. पंडित जी ने दी खास जानकारी उन्होंने बताया कि मंगलवार दिन होने की वजह से हनुमान जी महाराज की भी विशेष कृपा इस दिन पर रहेगी. ऐसी स्थिति में इस दिन कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है. जिस समय प्रधानमंत्री मोदी दोपहर 11:45 से लेकर 12:29 के बीच राम मंदिर के शिखर पर ध्वज की स्थापना करेंगे, वह मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त है और भगवान राम का जन्म भी दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में ही हुआ था. यही वजह है कि यह दिन बेहद खास और ऐतिहासिक दिन है. ज्योतिषाचार्य ने इस शुभ दिन को ऐसे ही नहीं चुना. इसके लिए बहुत अध्ययन किया गया, जिसके बाद इस दिन को सर्वोत्तम दिन माना गया. 25 नवंबर को मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसे पूरे भारत में विवाह पंचमी के रूप में जाना जाता है. इस पावन तिथि पर त्रेतायुग में भगवान श्री राम और माता जानकी का विवाह भी हुआ था. ध्वज स्थापना अनुष्ठान में वेद सूक्तों के साथ ध्वज का पूजन व दिव्य औषधियों से स्नान के उपरांत समस्त देवों का आह्वान कर उनकी आधान किया जाएगा। इसके उपरांत निर्धारित मुहूर्त में ध्वज आरोहण के लिए मुख्य यजमान को सौंपा जाएगा। अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के प्रभारी व पुरातत्ववेत्ता डा संजीव कुमार सिंह बताते हैं कि ध्वज स्थापना से पूर्व श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के द्वारा बनाई गयी परिकल्पना समिति ने विभिन्न शास्त्रों का सम्यक अध्ययन कर एक वीडियो प्रजन्टेशन तैयार किया था। इस प्रजन्टेशन को लेकर अलग-अलग संतों एवं विद्वानों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप से ध्वज की परिकल्पना को साकार रुप दिया गया। उन्होंने ध्वज के प्रतीक चिह्नों को लेकर बताया कि कोविदार का वृक्ष त्रेतायुग के राजवंश का प्रतीक है। इसके अलावा भगवान राम सूर्यवंशी हैं और सूर्य भी ऊर्जा -प्रकाश व गति का सूचक है जो जीवन को जीवंतता प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि राम मंदिर का ध्वज विजय के साथ धार्मिकता-आध्यात्मिकता और सहनशीलता का प्रतीक है जो कि सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे भवन्तु निरामया का संदेश सम्पूर्ण विश्व को देखा। 5 साल में विशालकाय मंदिर तैयार ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 5 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण पूरा हो गया है. 5 अगस्त साल 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के लिए शिलान्यास किया था. उसी के साथ मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ हुआ था. 5 वर्ष में एक विशालकाय मंदिर बनकर तैयार हो गया है. उन्होंने कहा कि 25 नवंबर दिन मंगलवार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की शुभ विवाह के शुभ अवसर पर मंदिर के शिखर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धर्म ध्वज की स्थापना करेंगे. यह अत्यंत शुभता का समय है. संपूर्ण सनातनियों के लिए यह अवसर मंगलकारी है, जीवन में ऐसा अवसर अब कभी नहीं आएगा.

राज्य के 15 अफसरों को IAS–IPS में प्रमोशन, पांच पुलिस अफसरों का चयन IPS अवॉर्ड के लिए

भोपाल मध्यप्रदेश में राजधानी दिल्ली में हुई डीपीसी (Departmental Promotion Committee) की अहम बैठक में राज्य सेवा के 1997-98 बैच के 15 अधिकारियों के प्रमोशन पर विचार किया गया। इसमें राज्य पुलिस सेवा के पांच अफसरों को IPS अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दो वरिष्ठ अफसर अटके जांच के कारण वरिष्ठता सूची में शीर्ष पर आए सीताराम ससत्या और अमृत मीणा के नाम पर प्रारंभिक स्तर पर पेच फंस गया, क्योंकि दोनों पर विभागीय जांच लंबित है। सूत्रों के अनुसार, अमृत मीणा को प्रोविजनल IPS बनाया गया है — यानी दो माह बाद होने वाली अगली डीपीसी तक उन्हें क्लीनचिट लेनी होगी, वरना प्रमोशन स्वतः निरस्त माना जाएगा। वहीं सीताराम ससत्या को प्रोविजनल सूची में भी स्थान नहीं मिला। पहले नोटिफिकेशन निरस्त, अब दोबारा डीपीसी इससे पहले 12 सितंबर को डीपीसी हुई थी, लेकिन नोटिफिकेशन जारी न होने और तकनीकी कारणों से प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद 21 नवंबर को दोबारा डीपीसी की गई, जिसमें प्रमोशन को लेकर अंतिम विचार हुआ। इन अधिकारियों को मिला IPS अवॉर्ड सूत्रों के मुताबिक इस डीपीसी में निम्न अफसरों का नाम IPS अवॉर्ड सूची में शामिल किया गया है: अमृत मीणा (प्रोविजनल) विक्रांत मुराब सुरेंद्र कुमार जैन आशीष खरे राजेश रघुवंशी हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। डीपीसी में शामिल प्रमुख अधिकारी डीपीसी की बैठक में MP मुख्य सचिव अनुराग जैन, एसीएस होम शिव शेखर शुक्ला, डीजीपी कैलाश मकवाना शामिल हुए।

माघ मेला शुरू, संगम तट पर आस्था का महापर्व; पवित्र स्नान तिथियों की जानकारी

 प्रयागराज संगम तट पर हर वर्ष लगने वाला माघ मेला बेहद खास है. आध्यात्मिक मेलों में से एक माना जाने वाला माघ मेला पूरे एक माह तक चलता है. यह मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है. इसे तप, साधना, संयम और जागरण का महापर्व कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि हर वर्ष मकर संक्रांति से लेकर पूरा माघ महीना लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आकर स्नान, पूजा और साधना में लीन रहते हैं.  पुराणों में संगम को देवभूमि और पुण्यस्थल बताया गया है, जबकि अक्षयवट, सरस्वती कूप और त्रिवेणी क्षेत्र को प्राचीन काल से तपस्थली माना गया है. इतिहासकारों के अनुसार यह मेला कई हजार वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है. समय के साथ इसकी भव्यता में लगातार बढ़ोतरी हुई है. आइए जानते हैं 2026 में माघ मेला की शुरुआत कब होगी, यह कितने दिनों तक चलेगा और इस दौरान पवित्र स्नान की तिथियां क्या रहेंगी. माघ मेला 2026 कब से कब तक  पंचांग के मुताबिक, माघ मेला की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलेगी. यानी माघ मेला 3 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक चलेगा. इस दौरान 6 प्रमुख माघ स्नान किए जाएंगे, जिसमें मौनी अमावस्या के स्नान को सबसे प्रमुख स्नान माना जाता है.  पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी 2026 मेला का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान से होता है. इसी दिन कल्पवास भी प्रारंभ होता है. श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर अपने आध्यात्मिक तप की शुरुआत करते हैं.  मकर संक्रांति – 14 जनवरी 2026 मकर संक्रांति को सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है. इसे अत्यंत पुण्यदायी स्नान तिथि माना गया है. इसी दिन दूसरा शाही माघ स्नान होता है.  लाखों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाते हैं.  मौनी अमावस्या – 18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या माघ मेला का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व माना जाता है.  मौन साधना, दान और संगम स्नान इस दिन विशेष फलदायी होते हैं.  यह दिन तीसरे प्रमुख स्नान के रूप में मनाया जाएगा.  वसंत पंचमी – 23 जनवरी 2026 बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक वसंत पंचमी को चौथा प्रमुख स्नान आयोजित होगा.  यह दिन सरस्वती पूजा और नए उत्साह का प्रतीक माना जाता है.  माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी 2026 यह तारीख कल्पवासियों के लिए विशेष महत्व रखती है. माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान और दान को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मेला का पांचवां बड़ा स्नान है.  महाशिवरात्रि – 15 फ़रवरी 2026 माघ मेला का समापन महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अंतिम स्नान के साथ होगा. भगवान शिव के ध्यान, उपवास और पूजा के साथ संगम स्नान करने का विशेष महत्व है.

लिव-इन में रहने वालों को संरक्षण देना राज्य का दायित्व: हाईकोर्ट का बड़ा बयान

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसला देते हुए कहा कि लिव-इन में रहने वाले दो वयस्कों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है, भले ही उनमें से एक साथी शादीशुदा ही क्यों न हो। अदालत ने यह साफ किया कि संविधान का अनुच्छेद-21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है और यह अधिकार किसी भी रिश्ते की नैतिक या सामाजिक स्वीकार्यता पर निर्भर नहीं करता। निर्णय उस याचिका पर आया जिसमें एक महिला और एक पुरुष ने अपने परिवारों और परिचितों से खतरा महसूस होने का दावा करते हुए सुरक्षा की मांग की थी। महिला पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा भी है, जबकि पुरुष अविवाहित है। दोनों ने बताया कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं लेकिन स्वजन से उन्हें खतरा है।   मेवात निवासी याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि पुलिस उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई करे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को अपनी नैतिक राय थोपने का अधिकार नहीं है और न ही सामाजिक असहमति किसी व्यक्ति के बुनियादी अधिकारों को कमजोर कर सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि दो वयस्कों के बीच संबंध यदि सहमति से है तो उसे केवल इसलिए असुरक्षित नहीं माना जा सकता कि उनमें से एक शादीशुदा है। अदालत ने जोर दिया कि जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा अदालतों और प्रशासन दोनों का मूल दायित्व है। हाई कोर्ट ने संबंधित जिला पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई शिकायत का मूल्यांकन करें और यदि खतरे की आशंका सही पाई जाए, तो तुरंत आवश्यक सुरक्षा प्रदान करें। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा देने का यह आदेश किसी भी पक्ष को आपराधिक या सिविल कार्यवाही से छूट नहीं देता। यदि कानून के उल्लंघन का कोई मुद्दा सामने आता है, तो संबंधित पक्ष सामान्य कानूनी उपाय अपना सकते हैं।  

UP SIR में राहत: पुरानी मतदाता सूची में नाम गायब तो भी बनेगा वोटर कार्ड, जानें जरूरी कागज़ात

महराजगंज जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की रफ्तार तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे इस महत्त्वपूर्ण अभियान के तहत जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं। लाखों मतदाताओं के घरों तक फार्म पहुंचाए जा चुके हैं, और बीएलओ द्वारा लगातार फॉर्म भरवाने व सिस्टम पर अपलोड करने की प्रक्रिया की निगरानी भी की जा रही है। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा अभियान की लगातार मॉनिटर कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फॉर्म वितरण, संकलन और अपलोडिंग की प्रक्रिया में कहीं भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जिले में कुल 19 लाख 92 हजार 459 मतदाताओं के लिए प्रत्येक बूथ पर बीएलओ की तैनाती के साथ सुपरवाइजरों की अलग टीम भी सक्रिय है। इनकी जिम्मेदारी है, कि बीएलओ से समय-समय पर अपडेट लेकर उसे नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाएं, ताकि जिले की प्रगति नियमित रूप से दर्ज होती रहे।   इसके लिए अलग से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो फॉर्म अपलोडिंग की स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं। अभियान के दौरान यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई व्यक्ति दो अलग-अलग स्थानों पर फार्म जमा करता है, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। अपर जिलाधिकारी डा. प्रशांत कुमार ने बताया कि एसआइआर को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, कि इसमें लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 2003 की मतदाता सूची में नाम नहीं है तो भी रहें बेफिक्र महराजगंज में एसआईआर अभियान को लेकर जिले में कई मतदाताओं के मन में संशय बना हुआ है, विशेष रूप से उन लोगों में जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है। लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि 2003 की सूची में नाम न होने से किसी मतदाता का नाम स्वतः नहीं कटेगा। वर्तमान में सभी पात्र मतदाताओं से एसआईआर फार्म भरे जा रहे हैं। जिनका नाम 2003 की सूची में नहीं था, वे मात्र फॉर्म भरकर जमा करें। आगे सूची के अनंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा, जिसके जवाब में उन्हें 13 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा। इन दस्तावेजों के आधार पर ही उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखा जाएगा। जिले के सभी बीएलओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नाम हटाने या संशोधन की प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी तरीके से की जाए। किसी पात्र मतदाता का नाम न कटे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और सक्रिय होकर फार्म भरें ताकि अंतिम मतदाता सूची तैयार करते समय किसी भी पात्र नागरिक का नाम छूटने न पाए। एसआईआर प्रक्रिया में नाम बरकरार रखने के लिए नोटिस मिलने पर 13 में से कोई एक दस्तावेज देना होगा     आधार कार्ड     पासपोर्ट     पैन कार्ड     ड्राइविंग लाइसेंस     राशन कार्ड     बैंक/डाकघर की पासबुक     मनरेगा जाब कार्ड     किसान पासबुक /किसान क्रेडिट कार्ड     सरकारी पेंशन बुक /पेंशन आईडी     छात्र पहचान पत्र (मान्यता प्राप्त संस्थान)     बीमा पालिसी दस्तावेज     सरकारी विभाग /यूनियन द्वारा जारी आईडी कार्ड     जन्म प्रमाणपत्र /आयु प्रमाणपत्र  

यूरिया–डीएपी के बढ़ते दामों से मची हाहाकार, गया जिले में खाद की किल्लत बढ़ी

गयाजी जिले में रबी फसल की बोआई का सीजन जोर पर है और इसी के साथ किसानों की आवश्यकताएं भी बढ़ गई हैं। कृषि विभाग ने दावा किया है कि बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसानों को सरकारी दुकानों और अधिकृत केंद्रों पर बीज सरलता से उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान भी विभाग की इस व्यवस्था से संतुष्ट दिख रहे हैं। उर्वरक को लेकर किसानों की परेशानी लेकिन दूसरी ओर उर्वरक को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। जिले में यूरिया और डीएपी का पर्याप्त भंडारण होने के बावजूद बाजार में इनकी कीमतें नियंत्रित स्तर से अधिक वसूली जा रही हैं। किसानों का आरोप है कि विक्रेता मनमाने दाम पर उर्वरक बेच रहे हैं। जिसके कारण बोआई लागत बढ़ गई है। शहर के किरानी घाट स्थित एक उर्वरक विक्रेता ने पुष्टि करते हुए बताया कि वर्तमान में यूरिया 360 रुपये प्रति बोरा और डीएपी 16 सौ रुपये प्रति बोरा बेचा जा रहा है। वहीं फतेहपुर एवं टनकुप्पा प्रखंड में कुल 73 निबंधित उर्वरक और बीज दुकानें हैं, लेकिन इनमें से कई दुकानों को एफएमएस आईडी नहीं मिलने के कारण संचालन अस्थायी रूप से बाधित है।  फतेहपुर में 47 में से 30 दुकानें सक्रिय फतेहपुर में 47 में से 30 दुकानें सक्रिय हैं, जबकि टनकुप्पा में 26 दुकानों से उर्वरक और प्रमाणित बीजों की बिक्री जारी है। रबी फसल के मौसम में किसानों को डीएपी के बाद यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। सरकारी दर के अनुसार डीएपी का मूल्य 1350 रुपये प्रति बोरी निर्धारित है, लेकिन किसानों का आरोप है कि बाजार में यह 15 सौ से 16 सौ रुपये तक में बेचा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां उर्वरक के साथ फास्फेट, जिंक, पोटाश जैसी पौष्टिक किट देती हैं, जिसे जोड़कर मूल्य बढ़ जाता है। किसान विनय यादव और महेंद्र यादव ने बताया कि फतेहपुर प्रखंड में बिस्कोमान का गोदाम नहीं होने से उन्हें खुदरा दुकानों से ही उर्वरक खरीदना पड़ता है। जबकि टनकुप्पा में बिस्कोमान का एक गोदाम है।  जहां किसानों को सरकारी दर पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। किसानों का कहना है कि सरकारी गोदाम फतेहपुर में भी खोला जाए, ताकि किसानों का आर्थिक बोझ कम हो सके।  सरकार द्वारा यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरा  उधर, प्रखंड कृषि पदाधिकारी टनकुप्पा सोमेश्वर मेहता और फतेहपुर बीएओ दिलीप रजक ने बताया कि विभागीय आदेश के अनुसार दुकानों की समय-समय पर जांच की जाती है। यदि किसी दुकानदार द्वारा अधिक दर पर उर्वरक बेचने की शिकायत मिलती है तो जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  वहीं गुरुआ प्रखंड क्षेत्र के गुरुआ, सगाही और भरौधा बाजार में स्थित करीब दो दर्जन उर्वरक दुकानों पर किसानों से मनमाने दाम वसूलने का आरोप लगा है। सरकार द्वारा यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरा तथा डीएपी 1350 से 1550 रुपये प्रति बैग निर्धारित है। लेकिन दुकानदार किसानों को यूरिया 350 रुपये और डीएपी 17 सौ रुपये प्रति बोरा में बेच रहे हैं। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसान रामनरेश सिंह और ललन सिंह ने बताया कि गुरुआ क्षेत्र के लगभग सभी दुकानदार अधिक कीमत लेकर ही खाद बिक्री किया जा रहा है।  इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी अमित भारती ने कहा कि यदि जांच में कालाबाजारी की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों से अपील की कि वे निर्धारित मूल्य से अधिक भुगतान की स्थिति में इसकी सूचना विभाग को दें।  

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा- भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग

भोपाल  भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग था। हमारे पूर्वजों ने खेलों को हजारों वर्षों पूर्व स्थापित किया था और अतीत के उन कालखंडों में हम खेलों के क्षेत्र में अग्रणी थे। खेल के परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टि व्यापक थी। भारतीय दृष्टि में खेल, केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शारीरिक और बौद्धिक विकास के माध्यम होते थे। मनुष्य के समग्र विकास की दृष्टि से भारत में खेल खेले जाते थे। यह बात उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने शनिवार को भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान भवन में क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति द्वारा आयोजित "खेल सृष्टि-भारतीय दृष्टि" विषय पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ कर कही। मंत्री श्री परमार ने संगोष्ठी में "भारतीय दर्शन में खेलों के पुरातन इतिहास एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में खेलों में भारतीय दृष्टि के महत्व" के आलोक में अपने विचार व्यक्त किए। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि विश्व एक परिवार है। "वसुधैव कुटुंबकम्" का दृष्टिकोण विश्व को भारत की देन है। कोविड के संकटकाल में भारत ने आत्मानुशासन का पालन करते हुए, विश्व के विभिन्न देशों को निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध करवाकर इसी दृष्टिकोण का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि खेल के मैदानों से सेवा का संकल्प पूरा होगा। खेल से शरीर और मन स्वस्थ होता है और स्वस्थ मन से खिलाड़ी समाज में सेवा का संकल्प पूरा करेंगे और प्रेरणा का केंद्र बनेंगे। मंत्री श्री परमार ने संवेदना के साथ खेलों को आगे बढ़ाने और वैचारिक प्रवाह को सतत् जारी रखने का आह्वान भी किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में, परंपरागत खेलों का समावेश किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि हर खेल की अपनी अलग दृष्टि होती है। उन्होंने तीरंदाजी का उदाहरण देकर कहा कि इस खेल में एकाग्रता की आवश्यकता होती है। यह तीरंदाजी के खेल की अपनी विशिष्ट दृष्टि है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि समय के सापेक्ष हमने विभिन्न विदेशी खेलों को भी हमने अपनाया है, जो भारतीयता के साथ आत्मसात करने की सीख देता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि क्रीड़ा भारती "क्रीड़ा से निर्माण चरित्र का, चरित्र से निर्माण राष्ट्र का" के विचार को चरितार्थ कर रही है। मंत्री श्री परमार ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए समिति को बधाई भी दी। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में क्रीड़ा भारती श्री अशोक अग्रवाल ने कहा कि खेल से राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव सुदृढ़ होता है। खेलों में भारतीय दृष्टि केंद्रित शुचिता एवं चरित्र निर्माण की आवश्यकता हैं। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी, पारम्परिक एवं ग्रामीण खेलों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना, खिलाड़ियों में खेल भावना, नैतिक आचरण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ खेल संस्कृति का विकास करना एवं खेलों के माध्यम से खिलाड़ी रूपी नागरिकों में भारतीय दृष्टि केंद्रित राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना था। क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति के अध्यक्ष श्री दीपक सचेती, राष्ट्रीय नियामक मंडल सदस्य श्री भीष्म सिंह राजपूत, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन, कुलसचिव डॉ अनिल शर्मा एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आलोक मिश्रा सहित क्रीड़ा भारती के विभिन्न पदाधिकारीगण, खेल विधा से जुड़े विविध विषयविद, प्राध्यापकगण, क्रीड़ा अधिकारी एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित थे।  

GST घोटाले का ताज़ा खुलासा: पंजाब में बड़ा फर्जीवाड़ा, जानिए पूरी कहानी

पंजाब  पंजाब में जीएसटी (GST) चोरी के मामलों पर लगातार शिकंजा कस रहा है, लेकिन टैक्स स्कैम रुकने का नाम नहीं ले रहे। इसी कड़ी में लुधियाना से एक नया मामला सामने आया है, जिसमें करोड़ों रुपए के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम की आशंका जताई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, जीएसटी विभाग ने गांधी मार्केट स्थित नाइनटीन फैशन नाम की फर्म पर संदिग्ध आईटीसी दावे की वजह से निरीक्षण किया। यह कार्रवाई असिस्टेंट कमिश्नर निहारिका खरबंदा के निर्देश पर स्टेट टैक्स ऑफिसर खुशवंत सिंह और इंस्पेक्टर द्वारा की गई। जांच के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस जगह फर्म को रजिस्टर्ड दिखाया गया है, वहां पिछले एक साल से पूरी तरह कोई और दुकानदार व्यापार कर रहा है। वहीं वर्तमान दुकानदार का इस रजिस्टर्ड फर्म से कोई लेना-देना नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्केट एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि फर्म का असली मालिक विभाग के सामने पेश होगा, क्योंकि जांच के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि फर्म के रिटर्न नियमित रूप से फाइल किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक व्यापार गतिविधि उस पते पर होती ही नहीं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पिछले 2 वर्षों के दौरान लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपए का आईटीसी क्लेम किया गया है, जो गंभीर संदेह पैदा करता है। फिलहाल विभाग अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। 

भावी वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण स्थापित करने का कार्य करें प्राध्यापक

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। आने वाले समय में, प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा अग्रणी स्थान पर होगी और इसमें हमारे प्राध्यापकों एवं चिकित्सकों के समर्पण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। मंत्री श्री परमार शनिवार को, भोपाल के मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के सभागृह में, फैकल्टी डेवलपमेंट को लेकर आयोजित एकदिवसीय "फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला" का शुभारम्भ कर, संबोधित कर रहे थे। आयुष मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने, प्रदेश में विश्वस्तरीय आयुर्वेद महाविद्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है और इसके लिए चिकित्सकों और प्राध्यापकों के पद भी सृजित होंगे। मंत्री श्री परमार ने समस्त आयुर्वेद प्राध्यापकों से आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन "वसुधैव कुटुंबकम्" के मंत्र को आयुर्वेद की पैथी के माध्यम से विश्वमंच तक पहुंचाएं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भावी आयुर्वेद चिकित्सकों एवं वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने का कार्य करें। विश्व आयुर्वेद परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. महेश कुमार व्यास ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सही चिकित्सा तभी संभव है जब चिकित्सकों और प्राध्यापकों को सही निर्देशन मिले। प्रमुख वक्ता के रूप में महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंस के बोर्ड ऑफ रिसर्च के सदस्य डॉ. किरण टवलारे ने योग्यता एवं उत्कृष्टता के परिप्रेक्ष्य में, मुख्य मानचित्रण प्रस्तुत किया। आईजीपी आयुर्वेद कॉलेज, नागपुर की प्राध्यापक डॉ. कल्पना टवलारे ने खेती और उद्देश्यों की दक्षता पर प्रकाश डाला। मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह एकदिवसीय कार्यशाला; श्री साईं ग्रामोत्थान समिति, मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन और विश्व आयुर्वेद परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई है। कार्यशाला में विश्व आयुर्वेद परिषद् के संरक्षक वैद्य गोपाल दास मेहता, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. ए एस यादव, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्य डॉ. मनीषा राठी, फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद के प्राचार्य डॉ. श्रीकांत पटेल, मानसरोवर समूह के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सचिन जैन सहित देश भर से पधारे 300 से अधिक प्राध्यापक उपस्थित थे।  

रामनगरी अयोध्या बनेगी आर्थिक शक्ति, सालाना 4 लाख करोड़ का योगदान तय

लखनऊ अयोध्या में ध्वजारोहण कार्यक्रम से रामनगरी का गौरव विश्व में अपने व्यापक स्वरूप में आलोकित होने लगेगा। श्रीराम मंदिर की ध्वजा पर भगवान सूर्यदेव विराजमान हैं। सूर्यवंशी प्रभु श्रीराम की नगरी में ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद पर्यटन में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। आध्यात्मिकता, प्राचीनता और दैवीय गुणों को समेटे हुए ध्वज की छटा देखने के लिए विश्व से बड़ी संख्या में पर्यटक अयोध्या पहुंचेंगे। इससे अयोध्या के पर्यटन में पहले से ज्यादा उछाल आने वाला है। अयोध्या में जनवरी-जून 2025 के बीच करीब 23 करोड़ पर्यटक आए थे। दिसंबर 2025 तक करीब 50 करोड़ पर्यटकों के शहर पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का पर्यटन 4 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2029 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। अयोध्या का पर्यटन सीएम योगी के इस मिशन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। अयोध्या उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी में अभी 1.5 प्रतिशत योगदान कर रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से अयोध्या की हिस्सेदारी और बढ़ जाएगी। श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। राम मंदिर और उससे जुड़े निर्माण कार्य में अब तक लगभग 2150 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुकाे हैं।यहां के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें, टूर एंड ट्रैवेल्स, पूजा सामग्री और प्रसाद के कारोबार रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 76 से ज्यादा होटल खुल चुके हैं। निजी क्षेत्र की होटल कंपनियां आईएचसीएल, मैरियट, रैडीशन, कामट, और लेमन ट्री बड़ी मात्रा में निवेश कर रही हैं। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 2028 तक उत्तर प्रदेश का पर्यटन सेक्टर 70,000 करोड़ का उद्योग बन जाएगा। इसमें अकेले अयोध्या का योगदान लगभग 25 प्रतिशत होगा। अगर इसी तरह की ग्रोथ पर्यटन क्षेत्र में आगे देखने को मिलती है तो 4 लाख करोड़ राजस्व का टारगेट आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब 1.25 लाख करोड़ रुपए का योगदान किया है। अयोध्या सिर्फ धार्मिक केंद्र न रहकर आर्थिक क्रियाकलापों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। रामनगरी की पर्यटन वृद्धि केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक बहुआयामी आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है। इससे अयोध्या विकास के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी।