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इंटरनेशनल टेरर लिंक! दिल्ली में बम के बाद सामने आई चीन-तुर्की-पाकिस्तान की नई साजिश

नई दिल्ली  पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के इशारे पर दिल्ली में अंजाम दिए गए बम धमाके के 10 दिन बाद ही अब 'बंदूक' वाली एक साजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े हथियार तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार पाकिस्तान, चीन और तुर्की से जुड़े हुए हैं। पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ बताया गया है, जो तरह-तरह से भारत में खून-खराबे और तबाही की साजिश रचने में व्यस्त रहता है। दिल्ली पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान मनदीप, दलविंदर, रोहन और अजय के रूप में हुई है। इनके कब्जे से चीन और तुर्की में बने 10 अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 92 जिंदा कारतूस की बरामदगी हुई है। बरामद पिस्टल्स में तुर्की में निर्मित PX-5.7 और चीन में निर्मित PX-3 शामिल हैं। ये पिस्टल बेहद खतरनाक हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर स्पेशल फोर्स में होता है। खंगाला जा रहा पूरा नेटवर्क गिरोह का सीधा संबंध आईएसआई से मिला है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है। पता लगाया जा रहा है कि इस तरह के कितने पिस्टल पहले आ चुके हैं और नई खेप किन लोगों तक पहुंचना था। ड्रोन से पंजाब भेजते थे हथियार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तुर्की और चीन में निर्मित इन बंदूकों को भारत भेजने का काम आईएसआई की ओर से किया जा रहा था। यह भी पता चला है कि हथियारों को पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते दिल्ली तक पहुंचाया जा रहा था। तस्करी से जुड़े गुर्गे ड्रोन के जरिए पंजाब में सीमा पार गिराते थे। यहां से इन पिस्टल को दिल्ली लाया गया था। पिस्टल की सप्लाई दिल्ली और आसपास के इलाकों में अपराधियों को होनी थी।

ओडीओपी व डिजिटलीकरण के समन्वय से नए व्यापारिक मॉडल के प्रादुर्भाव का गढ़ बना उत्तर प्रदेश

यूपी की नई आर्थिक सोच को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम बना 'भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025' ओडीओपी व डिजिटलीकरण के समन्वय से नए व्यापारिक मॉडल के प्रादुर्भाव का गढ़ बना उत्तर प्रदेश युवा व महिला उद्यमिता तथा निवेशक साझेदारी से भविष्य की अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती लखनऊ  भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश अपनी आर्थिक क्षमता व अवसरों की नई उड़ान को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ की थीम पर केंद्रित इस मेले में उत्तर प्रदेश ने न केवल अपने पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक स्वरूप में पेश किया, बल्कि नए स्टार्टअप, नवाचार व डिजिटल इकोसिस्टम की ताकत को भी दुनिया के समक्ष सशक्त रूप से प्रदर्शित किया है। योगी सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना को इस आयोजन में सबसे बड़े फोकस के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसके तहत 343 विशेष स्टॉल स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश से 2,750 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया है, जो मेले में राज्य की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी में से एक है। इस प्रकार, भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025 में उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि वह न सिर्फ अपनी पारंपरिक विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहा है, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और निवेशकों के साथ नए युग की आर्थिक क्रांति के नेतृत्व की दिशा में तेजी से अग्रसर है। राष्ट्रीय व वैश्विक पटल पर नए अवसर हो रहे सृजित मेले में युवा उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूपी सरकार के सहयोग से 150 से अधिक युवा स्टार्ट-अप्स और महिला उद्यमियों को अपनी नवोन्मेषी पहल, डिज़ाइन और तकनीकी उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर मिल रहा है। उनके लिए विशेष बिजनेस वर्कशॉप, नेटवर्किंग सेशन और निवेशक मंच आयोजित किए गए हैं, जहां वे प्रत्यक्ष तौर पर विदेशी व देशी खरीदारों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक परिवर्तन और आत्मनिर्भर भारत के मजबूत स्वरूप के तौर पर रेखांकित किया गया है। आगरा का पेठा, भदोही की कार्पेट, बनारसी साड़ियाँ, मेरठ का खेल सामान, कानपुर का चमड़ा, फिरोजाबाद का ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी जैसे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के मुख्य आकर्षण के रूप में उभर रहे हैं। इन उत्पादों के निर्माण, विकास व वाणिज्यिक प्रबंधन में युवाओं तथा महिलाओं की अग्रिम भूमिका उन्हें इस वृहद आयोजन के माध्यम से सीधे तौर पर राष्ट्रीय व वैश्विक पटल से जोड़कर उनके उत्पादों के लिए नए अवसर सृजित कर रही है। मेले के दौरान पारंपरिक शिल्प को आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ प्रस्तुत कर राज्य ने विश्व बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को और अधिक कुशल, सक्षम व प्रतिस्पर्धी राज्य के तौर पर स्थापित किया है। भविष्य की अर्थव्यवस्था के मजबूत रोडमैप की दिखी झलक सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन में विकसित हो रही राज्य की नई आर्थिक सोच इस मेले में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जहां पारंपरिक हस्तशिल्प को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डिजिटलीकरण से जोड़ने के प्रयासों को व्यापक सफलता मिली है। प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की ग्राम से ग्लोबल बाजार तक पहुंच को सहज और सार्थक बनाया गया है, जिसका प्रमाण मेले में भी देखने को मिला है। मेले में कई विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के साथ बी2बी मीटिंग्स का आयोजन हो रहा है, जिनका उद्देश्य ओडीओपी सहित प्रदेश के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है। महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ साझेदार राज्य की भूमिका में भाग लेकर उत्तर प्रदेश ने इस भव्य आयोजन में खुद को वैश्विक व्यापार केंद्र तथा एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। साथ ही शिक्षा, कौशल विकास और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्राथमिकता में रखते हुए नई परियोजनाओं, निवेश समझौतों तथा लॉजिस्टिक्स हब आधारित आर्थिक ढांचे को भविष्य की सतत विकास यात्रा के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

मां और दूसरे पति ने मिलकर की बेटे की हत्या, कोर्ट ने सुनाई आजीवन सजा

दुर्ग दुर्ग में अपने ही 4 साल के बच्चे की हत्या मामले में उसकी मां और सौतेले पिता को कठोर सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी है. साथ ही 1000 रुपए अर्थ दंड भी लगाया है. वहीं जुर्माना न भरने पर 8 महीने अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. दरअसल, पूरा मामला 2 साल पुराना है. आरोपी गायत्री को पहले पति से जगदीप सिंह (4 साल) का बेटा था. जगदीप का सौतेला पिता मनप्रीत उसके साथ आए दिन मारपीट करता था और गायत्री भी उसे मारती थी. इसी दौरान 31 जनवरी 2023 की रात दोनों ने जब जगदीप सिंह को खूब पीटा. अंदरूनी चोट आने से 4 साल का जगदीप बेहोश हो गया, जिसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई. दंपति ने चुपचाप उसका अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन पुलिस को इस बात की भनक लग गई. पुलिस ने मौके पर पहुंच गई और मासूम का पोस्टमार्टम कराया. पोस्टमार्टम में जानकारी सामने आई कि अत्यधिक मारपीट होने की वजह से मासूम की मौत हो गई. जिसके बाद पुलिस ने पति पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. अब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

पटना में शिक्षक को गोलियों से भुना, इलाज के दौरान PMCH में दम तोड़ा

वैशाली बिहार के सोनपुर में शुक्रवार की शाम एक शिक्षक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना पहलेजा थाना क्षेत्र के खरिक बाजार के पास हुई, जहां प्राथमिक विद्यालय गंगाजल में पदस्थापित 45 वर्षीय शिक्षक सनोज कुमार को बाइक सवार दो अपराधियों ने सिर में गोली मारकर फरार हो गए। शिक्षक सनोज कुमार स्कूल से अपनी बाइक पर घर लौट रहे थे और घर से कुछ ही दूरी पर थे कि पीछे से आए दो अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोली चलाई। गोली सिर के पीछे लगी और वह सड़क पर गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें गंभीर हालत में पटना PMCH ले जाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दिनदहाड़े बाजार के पास हुई इस वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही सारण एसपी डॉ. कुमार आशीष, ग्रामीण एसपी संजय कुमार और सोनपुर एसडीपीओ प्रीतीश कुमार मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसडीपीओ ने बताया कि मौके से एक खोखा बरामद किया गया है और प्रारंभिक जांच में हत्या की वजह पैसों के लेनदेन का विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गोली शिक्षक के सिर के पीछे से दागी गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। फिलहाल परिजनों द्वारा कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के पिता ने बताया कि सनोज कुमार का लगभग तीन लाख रुपये के लेनदेन को लेकर एक ग्रामीण से विवाद चल रहा था और इसी विवाद को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। परिवार में घटना के बाद कोहराम मचा हुआ है, वहीं पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।  

कतर्नियाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य में बोट सफारी की क्षमता दोगुनी करने का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट, थारू-थाली और चंदन चौकी शिल्पग्राम को किया जाएगा विकसित  कतर्नियाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य में बोट सफारी की क्षमता दोगुनी करने का प्रस्ताव दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अनुभव-थारू संस्कृति योजना के क्रियान्वयन का प्रस्ताव       लखनऊ  उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड की हालिया बैठक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे क्षेत्रों को इको टूरिज्म का हब बनाने के उद्देश्य से थारू जनजाति की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय व्यंजनों और वन्यजीव सफारी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के प्रस्ताव पेश किए गये। इसके साथ ही पर्यटकों को विशेष अनुभव के लिए 'अनुभव – थारू संस्कृति' योजना के तहत शिल्पग्राम को विकसित करने व  व थारू-थाली का विशेष प्रचार करने का प्रस्ताव भी पेश किया गया है। यूपी इको टूरिज्म की इन पहलों से न केवल पर्यटकों को अनोखा अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के आर्थिक उत्थान व समावेशी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।   कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य में नदी सफारी की क्षमता होगी दोगुनी उत्तर प्रदेश, नेपाल सीमा क्षेत्र में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य में गेरुआ नदी पर बोट या नदी सफारी का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में वन विभाग द्वारा गेरूआ नदी में दो बोटों का संचालन किया जा रहा है। नदी सफारी के लिए पर्यटकों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने दो अतिरिक्त बोटों के संचालन की योजना पेश की है।इससे वन्यजीव अभ्यारण्य में नदी सफारी की क्षमता दोगुनी हो जाएगी और पर्यटकों को अधिक सुविधा मिलेगी। बोर्ड ने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर इन बोटों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से लैस करने पर जोर दिया है, ताकि नदी तट पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।  'अनुभव – थारू संस्कृति' व थारू-थाली योजना के संचालन से बढ़ेगा स्थानीय पर्यटन  यूपी इको टूरिज्म विकास बोर्ड दुधवा राष्ट्रीय उद्यान व कतर्निया घाट के तराई क्षेत्र में रहने वाली थारू जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने वाली 'अनुभव – थारू संस्कृति' योजना का भी प्रस्ताव भी पेश किया है। जो न केवल इन अभ्यारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले पर्यटकों को एक विशेष अनुभव प्रदान करेगा साथ ही थारू समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान व समावेशी विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी क्रम में बोर्ड 'थारू थाली' को सक्रिय रूप से प्रचारित कर रहा है। यह थाली, थारू जनजाति के पारंपरिक व्यंजनों से युक्त है, जो स्थानीय जड़ी-बूटियों, अनाज और मसालों से तैयार की जाती है। क्षेत्र के होटलों और रिसॉर्ट्स संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने मेन्यू में थारू थाली को अनिवार्य रूप से शामिल करें। साथ ही टूरिज्म बोर्ड ने ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की भी योजना बनाई है, जहां थारू समुदाय के युवाओं व महिलाओं को खान-पान और आतिथ्य कला सिखाई जाएगी। जिससे न केवल प्रदेश में जनजातिय सांस्कृतिक संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा बल्कि समुदाय के लोगों को आय व रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।  चंदन चौकी शिल्पग्राम के पुनर्विकास का रखा गया प्रस्ताव समीक्षा बैठक में एक अन्य प्रस्ताव चंदन चौकी शिल्पग्राम के विकास के लिए भी पेश किया गया है। जनजातीय विकास विभाग द्वारा निर्मित यह शिल्पग्राम पूरी तरह तैयार है, लेकिन वर्तमान में बंद पड़ा है। दुधवा क्षेत्र में स्थित यह केंद्र थारू और अन्य जनजातीय संस्कृति के कौशल व कला के प्रदर्शन स्थल के रूप में पुनः विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। यहां हस्तशिल्प प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। बोर्ड ने सुझाव दिया कि जनजातीय विकास विभाग की सहमति से पर्यटन विभाग, इकोटूरिज्म बोर्ड या पर्यटन निगम इसे निजी निवेश के माध्यम से संचालित करेगा। इससे पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ेंगी और इको-टूरिज्म को नया आयाम मिलेगा। इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से सीएम योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश को इको टूरिज्म का हब बनाने की कार्ययोजना को बल मिलेगा साथ ही राजस्व वृद्धि व जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ थारू जनजाति के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

आनंदपुर साहिब गुरुघर के अनुभव के साथ तैयार होगा PM मोदी का समागम स्थल

कुरुक्षेत्र गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर व इंदबड़ी की करीब 170 एकड़ धरा पर गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी समागम बेहद खास रहेगा। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के चलते यहां विशेष तैयारी की जा रही है। संगत को यहां पहुंचते ही पंजाब के रूपनगर स्थित और सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माने जाने वाले आनंदपुर साहिब गुरुघर का अनुभव होगा। इसकी थीम पर ही समागम की तैयारी की जा रही है, पूरे समागम स्थल को गुरुघर का रूप दिया जाएगा। आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर जी और श्री गुरु गोविंद सिंह जी रहे थे और यहीं सन् 1699 में गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब है, जो सिख धर्म के पांच तख्तों में से तीसरा है। ऐसे में इस समागम स्थल को भी उसी तर्ज पर सजाया जाएगा। एचएसजीएमसी प्रधान जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि यहां संगत को पूरी तरह से गुरुघर का अहसास होगा। समागम स्थल के लिए वॉटरबॉडी से गुजरेगी संगत वाहनों की आवाजाही नेशनल हाईवे 152 डी की ओर से रखी जाएगी और यहां पहुंचते ही इंदबड़ी की ओर पार्किंग होगी। पार्किंग के साथ ही प्रवेश द्वार होगा। इसके बाद संगत विशेष तौर पर तैयार की जा रही वॉटर बॉडी से गुजरते हुए समागम स्थल में प्रवेश करेगी। इसी समागम स्थल के दोनों ओर लंगर हॉल होंगे। वहीं, समागम के मुख्य पंडाल के करीब 150 मीटर दूरी पर ही तीन हेलिपेड का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। इन हेलिपेड को मुख्य पंडाल, पिहोवा रोड और ज्योतिसर गांव की सड़क से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए तीनों ओर सड़क तैयार की जाएगी। यही नहीं इंदबड़ी जाने वाली सड़क से लेकर मुख्य पंडाल तक भी एक सड़क तैयार की जाएगी। प्रदर्शनी में बयां होगा पूरा संघर्ष मुख्य पंडाल के साथ ही 30 बाई 60 मीटर एरिया में प्रदर्शनी तैयार की जा रही है जिसका 50 फीसदी से ज्यादा कार्य पूरा किया जा चुका है। इसमें श्री गुरु तेग बहादुर जी व उनके परिवार के पूरे जीवन व संघर्ष को चित्रों के जरिये दर्शाया जाएगा। यही नहीं पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी में पूरा विवरण भी दर्ज होगा। 100 से ज्यादा हट कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा से लेकर अन्य कर्मियों के लिए 100 से ज्यादा हट तैयार की गई हैं। वहीं, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और बिजली सप्लाई रूम तैयार किए जा रहे हैं।

अब संपत्तियों की होगी ड्रोन आधारित जांच, रडार तकनीक बनाएगी 3D इमेज

 रायपुर  नगर निगम जल्द ही राजधानी की सभी संपत्तियों का व्यापक और तकनीकी आधारित नया सर्वे शुरू करने जा रहा है. निगम सूत्रों के अनुसार, इस माह के अंत तक सर्वे प्रक्रिया का शुभारंभ किया जाएगा. इसके लिए नगर निगम एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध की अंतिम तैयारी में है. वर्क ऑर्डर जारी होते ही कंपनी घर-घर जाकर संपत्तियों का सर्वे करेगी. उद्देश्य उन संपत्तियों को टैक्स दायरे में शामिल करना है जो अब तक निगम के रिकॉर्ड से बाहर हैं, साथ ही पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल और सटीक रूप में अपडेट करना है. पिछला सर्वे 2017-18 में हुआ था… नगर निगम द्वारा अंतिम बार सर्वे वर्ष 2017-18 में विश्व बैंक की सहायता से जीआईएस तकनीक पर आधारित कराया गया था. उस समय करीब 3.52 लाख संपत्तियों को निगम के रिकॉर्ड में शामिल किया गया था. लेकिन इसके बाद शहर का तेजी से विस्तार हुआ और बड़ी संख्या में नए आवासीय, व्यावसायिक भवन, मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट और प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स विकसित हुए. निगम का अनुमान है कि पिछले सर्वे के बाद से लगभग 50 से 60 हजार नई संपत्तियां रिकॉर्ड में नहीं जुड़ीं. अब 62 करोड़ आएगा खर्च पहले योजना थी कि सर्वे ड्रोन तकनीक से किया जाए, लेकिन निगम कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस बार रडार सर्वे जिसमें 3डी इमेज के जरिए सर्वे किया जाएगा. रडार तकनीक से सटीक त्रि-आयामी (3डी) मानचित्र तैयार होगा, जिसमें प्रत्येक भवन की ऊंचाई, फ्लोर, कंस्ट्रक्शन टाइप और वास्तविक भू-आकृति स्पष्ट रूप से दर्ज होगी. इस हाई-रेजोल्यूशन मैपिंग से भविष्य में सिवरेज नेटवर्क, पेयजल लाइन, सड़क निर्माण और नगरीय ढांचे की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी. कुल परियोजना लागत पहले अनुमानित 60 करोड़ थी, लेकिन रडार तकनीक अपनाने से लगभग 2 करोड़ ज्यादा लगेंगे. प्रोजेक्ट के लिए 10 कंपनियों ने दिया प्रेजेंटेशन इस परियोजना के लिए नगर निगम ने 10 अलग-अलग कंपनियों से तकनीकी प्रस्तुतीकरण लिए थे. इनमें ड्रोन, रडार और सैटेलाइट आधारित सर्वे की अलग-अलग तकनीकों की तुलना की गई. पिछली त्रुटियों को ध्यान में रखते हुए निगम ने इस बार दोहरी पद्धति अपनाने का निर्णय लिया है. पिछले सर्वे में मिलीं थीं कई बड़ी गड़बड़ियां 2017-18 के सर्वे में लगभग 80 हजार संपत्तियों में माप, वर्गीकरण और स्वामित्व दर्ज करने में त्रुटियां पाई गई थीं. लगभग 1.5 लाख संपत्तियों में पूरा डेटा उपलब्ध नहीं था. करीब 40 हजार संपत्तियों में मालिक बदलने के बाद भी रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ. कई मामलों में निगम के पास न तो मोबाइल नंबर थे और न ही वर्तमान पता. डोर-टू-डोर सत्यापन और दावा-आपत्ति प्रणाली रडार सर्वे के बाद दूसरे चरण में निगम की टीम घर-घर जाकर डेटा सत्यापन करेगी. प्रत्येक संपत्ति मालिक को फोटो और विवरण सहित एक डिमांड नोटिस दिया जाएगा. यदि मालिक को डेटा में कोई त्रुटि लगती है, तो वह 7 दिनों के भीतर निगम में दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकेगा. इसके लिए अलग सेल बनाई जाएगी. ऐसे समझें खर्च और लाभ     रडार सर्वे की लागत: लगभग 80-90 करोड़ रूपए     रडार सर्वे की लागत लगभग 150 रूपए प्रति संपत्ति     अनुमानित नई संपत्तिया: 50,000- 60,000     संभावित वार्षिक अतिरिक्त राजस्व लगभग 100 करोड़ रूपए  

मुख्यमंत्री का जिलाधिकारियों को निर्देश, घुसपैठियों को चिन्हित करें, बनाए जाएं अस्थायी डिटेंशन सेंटर

मुख्यमंत्री का निर्देश, अवैध घुसपैठ पर होगी सख्त कार्रवाई   मुख्यमंत्री का जिलाधिकारियों को निर्देश, घुसपैठियों को चिन्हित करें, बनाए जाएं अस्थायी डिटेंशन सेंटर   डिटेंशन सेंटर में रखे घुसपैठियों को भेजा जाएगा वापस- मुख्यमंत्री योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को अवैध घुसपैठ पर त्वरित और सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिला प्रशासन अपने क्षेत्र में रहने वाले अवैध घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित करे और नियमानुसार कार्रवाई शुरू करे।   मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि घुसपैठियों को रखने के लिए प्रत्येक जनपद में अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाए जाएं। इन केंद्रों में विदेशी नागरिकता के अवैध व्यक्तियों को रखा जाएगा और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक वहीं आवास सुनिश्चित किया जाएगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि डिटेंशन सेंटर में रखे गए अवैध घुसपैठियों को तय प्रक्रिया के तहत उनके मूल देश भेजा जाएगा।

पराली प्रबंधन में बड़ा बदलाव: ईंट-भट्ठों को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति, उल्लंघन पर सख्त कदम

हिसार  खेतों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए अब इसका उपयोग ईंट-भट्ठों में ईंधन के तौर पर किया जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देश पर कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पराली के निपटान की नई योजना तैयार की है। इसके तहत हर जिले की पराली वहीं उपयोग की जाएगी और प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च भी नहीं आएगा। साथ ही ईंट भट्ठों में कोयले की खपत भी कम होगी। प्रदेश के करीब 2480 ईंट-भट्ठों पर यह आदेश लागू होंगे। पराली के निपटान को लेकर सीपीसीबी ने ईंट भट्ठों में इसके उपयोग का प्रस्ताव दिया था, जिसे प्रदेश सरकार ने मंजूरी देकर लागू कर दिया है। इसी वर्ष से ईंट भट्ठों में 20 प्रतिशत पराली जलाना अनिवार्य कर दिया गया है। पराली को सीधे जलाने की बजाय इसे कंप्रेस कर पैलेट और ब्लॉक बनाया जाएगा। जिला स्तर पर नामित एजेंसियां पराली को इकट्ठा कर पैलेट तैयार करेंगी। यह पैलेट कोयले की तरह ही ऊर्जा देंगे और भट्ठा संचालकों के लिए सस्ता विकल्प साबित होंगे। इस संबंध में ईंट भट्ठा मालिकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। निगरानी सख्त, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई सीपीसीबी की ओर से इन आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण किए जाएंगे। निरीक्षण में यह जांचा जाएगा कि भट्ठा मालिक किस प्रकार का ईंधन और कितनी मात्रा में उपयोग कर रहे हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से जांच करेंगे। मानकों का पालन न करने पर संबंधित ईंट भट्ठे का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा। थर्मल में लागू हो चुके आदेश इससे पहले प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट में पराली पैलेट्स जलाने के आदेशाें को लागू किया जा चुका है। इसमें पहले चरण में 10 प्रतिशत तक पराली का उपयोग किया जा रहा है। दूसरे चरण में इसे 20 प्रतिशत तक किया जाएगा। हिसार खेदड़ थर्मल पावर प्लांट में 2024 से इस नियम को लागू किया जा चुका है। पिछले चार साल से हिसार में धान का एरिया लगातार बढ़ रहा है। इस बार जिले में धान का रकबा 3 लाख 30 हजार एकड़ था। पराली जलाने का लक्ष्य नवंबर 2025 से 20 प्रतिशत नवंबर 2026 से 30 प्रतिशत नवंबर 2027 से 40 प्रतिशत नवंबर 2028 से 50 प्रतिशत अधिकारी के अनुसार हिसार जिले में 8 एजेंसी पैलेट बनाने काम कर रही हैं। अन्य जिलों में भी पैलेट्स तैयार किए जा रहे हैं। कृषि अवशेषों से बने पैलेट प्रयोग ईंट-भट्ठों में करने के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यालय से मिले निर्देशों की पालना कराई जाएगी। इस बारे में जिला स्तर से रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी। -अमित शेखावत, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी, हिसार।

पुष्पा नेताम ने खेत में काटी धान, मंत्री परिवार की भागीदारी से किसानों में जोश

बलरामपुर रामानुजगंज कृषि मंत्री राम विचार नेताम की पत्नी एवं जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष पुष्पा नेताम इन दिनों अपने गृह ग्राम सनवाल में धान कटाई के कार्य में पूरी तल्लीनता से जुटी हुई हैं। अक्सर रायपुर में मंत्री पति के साथ रहने वाली पुष्पा नेताम खेती के मौसम में पूरी तरह ग्रामीण जीवन में रम जाती हैं। इन दिनों वे गांव की महिलाओं के साथ खेतों में हाथ से धान काटते हुए दिखाई देती हैं, जिसे देखकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। ग्रामीणों के अनुसार पुष्पा नेताम हर साल बुवाई से लेकर कटाई तक खेतों में सक्रिय रूप से मौजूद रहती हैं। खेती-किसानी से उनका जुड़ाव परिवार की पारंपरिक परंपरा का हिस्सा है। यही वजह है कि वे अपनी व्यस्त राजनीतिक दिनचर्या से समय निकालकर भी धान कटाई में हाथ बंटाती हैं। उधर, कृषि मंत्री राम विचार नेताम भी अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद खेतों से जुड़ाव बनाए रखते हैं। रामानुजगंज विधानसभा के हालिया प्रवास के दौरान वे स्वयं धान काटने वाली मशीन चलाते हुए देखे गए, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुए। ग्रामीणों ने बताया कि मंत्री नेताम जब भी मौका मिलता है, खेतों का रुख जरूर करते हैं, क्योंकि खेती को लेकर उनकी रुचि बचपन से रही है। मंत्री नेताम का कहना है कि “खेती से हमारा संबंध सिर्फ आज का नहीं, बल्कि पीढ़ियों से रहा है। धान बुवाई और कटाई का समय हमारे लिए खास होता है। मेरी श्रीमती हमेशा इस दौरान खेतों में मौजूद रहती हैं, और मैं भी समय मिलते ही खेतों की ओर खिंचा चला जाता हूँ।” सनवाल गांव में इन दिनों धान कटाई जोर पर है और मंत्री दंपति का श्रमदान ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बन गया है। यह नज़ारा न केवल किसानों में उत्साह भर रहा है, बल्कि राजनीति में जमीन से जुड़े रहने का एक अनोखा उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है।