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हीरा तो पन्ना में मिलता है, लेकिन मप्र के डायमंड तो दुबई में भी मिल रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश आपको बुला रहा है, बेहिचक निवेश करें, हम भी आपको रिटर्न गिफ्ट देने में कोई कमी नहीं रखेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव म.प्र. ने निवेशकों के लिए 18 पारदर्शी नीतियां लागू की, हमारी नीतियों का भरपूर लाभ उठाएं हीरा तो पन्ना में मिलता है, लेकिन मप्र के डायमंड तो दुबई में भी मिल रहे हैं दुबई में प्रवासी भारतीयों के फ्रैंड्स आफ एमपी इंटरनेशनल समूह से किया आत्मीय संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब देश का सर्वाधिक प्रगतिशील प्रदेश बन गया है। निवेशकों के लिए हमारी सरकार ने सभी द्वार खोल दिए हैं। हमने मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए 18 प्रकार की पारदर्शी औद्योगिक नीतियां लागू की हैं। हमारी सभी औद्योगिक नीतियां बेहद साफ सुथरी हैं। मध्यप्रदेश में आने वाले निवेशकों को किसी भी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। आईए मध्यप्रदेश आपको बुला रहा है, हम पर भरोसा करें, मध्यप्रदेश में निवेश करें, हम भी आपको रिटर्न गिफ्ट देने में कोई कमी नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को दुबई में प्रवासी भारतीयों के फ्रेंड्स ऑफ एमपी इंटरनेशनल समूह के साथ आत्मीय संवाद कर रहे थे। उन्होंने निवेशकों से कहा कि यदि आप मध्यप्रदेश के लोगों को रोजगार देने वाला कोई बड़ा उद्योग लगाते हैं तो हमारी सरकार अगले 10 साल तक प्रति लेबर 5 हजार रुपए की सहायता राशि भी मुहैया कराएगी। यदि मेडिकल एजुकेशन या मेडिकल कॉलेज जैसा बड़ा कोई निवेश करना चाहते हैं तो, हमारी सरकार आपको मात्र एक रूपए में जमीन देगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर कदम पर निवेशकों के साथ है। मध्यप्रदेश को अपना दूसरा घर बनाइये और यहां निवेश जरूर कीजिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि दुबई मध्यप्रदेश के लोगों के लिए एक तरह से दूसरी मां के समान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित पारदर्शी नीतियां लागू की हैं। उद्योगपतियों को निवेश करने और इंडस्ट्री शुरू करने के लिए सिंगल विंडो फैसिलिटी प्रदान की जा रही है। उद्योगपतियों को बिजली के बिलों में छूट दी जा रही है। प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और जीआईएस के माध्यम से लगभग 30 लाख करोड़ रूपये का निवेश मिला है। मध्यप्रदेश निवेशकों को आमंत्रित कर रहा है आप लोग आइए और सभी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित कर प्रगति करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि व्यापारी अपनी युक्ति बुद्धि से उद्यमशीलता को बढ़ाते हैं। प्रदेश के पन्ना में हीरा मिलता है। मध्यप्रदेश के हीरे दुबई में भी मिल रहे हैं। उद्योगपति एक मौसम विज्ञानी की तरह हवा का रुख समझ लेते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है, जिन्होंने भारत ही नहीं, दूसरे देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भी कठिन समय में हर संभव मदद की है। विकास का रास्ता भारत से होकर ही गुजरता है। कई देश भारत के साथ आजाद हुए। आज भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के गरीब और जरूरतमंदों को 4 करोड़ पक्के मकान बनाकर दिए हैं और 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्क राशन बांटा जा रहा है। यह संख्या करीब 100 देशों की आबादी के बराबर है।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय लोग दूध में शक्कर की तरह घुल मिल जाते हैं, जो दुनियाभर में मिठास घोल रहे हैं। दुबई में निर्मित स्वामीनारायण मंदिर में सभी संप्रदायों की झलक नजर आती है। भारतीय संस्कृति में सभी का सम्मान है, जो विश्व कल्याण की भावना से ओतप्रोत है। कोविड काल में दूसरे देशों को मेडीसिन भेजकर भारत ने वसुधैब कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ किया है। यूएई में रहने वाले मध्यप्रदेश के प्रवासी आज कई लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। नरेश भावनानी ने मंदसौर से आकर अपने पुरुषार्थ के बल पर यूएई में टेक्सटाइल सेक्टर का बड़ा उद्योग स्थापित किया है।   जितेंद्र वैद्य ने बाबा महाकाल के उद्घोष के साथ संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामान्य परिवार से आते हैं, जिन्होंने हमेशा मानव सेवा को सर्वोपरि रखा। अपने छात्र जीवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कई जनहितैषी आंदोलनों में हिस्सा लिया। छात्र जीवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉलेज के सीनियर्स का सम्मान करते हुए उनके लिए छात्र संघ चुनाव में दावेदारी छोड़ दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में प्रदेश के धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। अब उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ आने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में विकास की नई इबारत लिख दी है। प्रदेश के हर वर्ग को शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। यूएई में भारतीय महावाणिज्यदूत सतीश सिवान ने कहा कि यूएई में 44 लाख प्रवासी भारतीय निवास करते हैं। मध्य प्रदेश न केवल भारत का हृदय प्रदेश है, बल्कि यह यूएई में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए भी हार्ट के समान है। अपर मुख्य सचिव, नगरीय प्रशासन एवं आवास संजय दुबे ने कहा कि दुबई में हुए आत्मीय स्वागत से हम अभिभूत हैं। वर्तमान में राज्य सरकार 13 देशों के साथ मिलकर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा दे रही है। आप सभी यहां मध्य प्रदेश के हृदय के रूप में उपस्थित हैं। मध्य प्रदेश हर सेक्टर के निवेशक को निवेश के लिए आकर्षित कर रहा है। मध्यप्रदेश आर्थिक प्रगति और कृषि समेत अन्य क्षेत्रों में प्रथम स्थान पर है। मध्यप्रदेश वनों से समृद्ध है, जहां बिग कैट फैमिली के सभी वन्यप्राणी मौजूद हैं। प्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है। प्रदेश रोड, रेल और एयर नेटर्वक से जुड़ा है।    प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला राज्य है। यह पिछले 10 साल से अग्रणी बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फोकस प्रदेश के औद्योगिक विकास पर है। वे प्रदेश के समग्र विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विजन के अनुरूप सरकार ने रीजनल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की और निवेशकों को अवसर उपलब्ध कराए। प्रदेश सरकार ने 18 नई नीतियां लागू की हैं, जो देश में सर्वश्रेष्ठ हैं। भोपाल में फरवरी 2025 में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में लगभग 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दुबई में भारत के कॉन्सुल जनरल से मुलाकात

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई प्रवास के दौरान रविवार को दुबई स्थित भारत सरकार के कॉन्सुल जनरल श्री सतीश कुमार सिवन ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 19 जुलाई तक दुबई और स्पेन के दौरे पर रहेंगे। इस विदेश यात्रा का प्रमुख उद्देश्य मध्यप्रदेश में वैश्विक निवेश को आकर्षित करना, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण सुनिश्चित करना और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर तैयार करना है। मुख्यमंत्री की यह विदेश यात्रा प्रदेश को वैश्विक मंच पर एक निवेश-अनुकूल और उभरते हुए औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ श्री सिवन निवेशक संवाद में शामिल हुए।  

कबीरधाम में पहले सोमवार को निकलेगी भोरमदेव पदयात्रा, डिप्टी सीएम और हजारों भक्त होंगे शामिल

कबीरधाम भगवान शिव की भक्ति में डूबा कबीरधाम जिला सावन मास के पहले सोमवार को ऐतिहासिक भोरमदेव पदयात्रा के लिए तैयार है। यह सदियों पुरानी परंपरा कवर्धा के बुढ़ा महादेव मंदिर से भोरमदेव मंदिर तक 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा के रूप में 2008 से अनवरत जारी है। इस बार पदयात्रा में कवर्धा विधायक व डिप्टी सीएम विजय शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, आमजन और पूर्व में कबीरधाम जिले में कलेक्टर रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिले के लोगों से इस भक्तिमय आयोजन में शामिल होकर शिव भक्ति का आनंद लेने की अपील की है। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। पदयात्रा सुबह 7 बजे बुढ़ा महादेव मंदिर से शुरू होगी और भोरमदेव मंदिर पर भगवान शिव का जलाभिषेक कर समाप्त होगी। यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधा के लिए चलित एम्बुलेंस, स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था, पेयजल, विश्राम स्थल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भोरमदेव मंदिर परिसर में कांवरियों के ठहरने के लिए भवन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, गर्भगृह में भगवान शिव के लाइव दर्शन के लिए एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। सावन के प्रत्येक सोमवार को मंदिर में निःशुल्क भंडारा और प्रसादी का वितरण होगा। यात्रा के दौरान डीजे साउंड सिस्टम भक्ति भजनों से माहौल को और आध्यात्मिक बनाएगा। जिला प्रशासन ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष रोड मैप तैयार किया है, ताकि उन्हें किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े। कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन और डिप्टी सीएम विजय शर्मा की मंशा के अनुरूप यह आयोजन भव्य और व्यवस्थित होगा। यह पदयात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत उदाहरण है।

भोपाल को जल्द मिलेगी वंदे भारत ट्रेन, बिहार-यूपी के लिए शुरू होगी सेवा

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बिहार के पाटलिपुत्र और यूपी के लखनऊ तक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के रैक अगस्त महीने में मिल सकते हैं। रैक पहुंचते ही ट्रायल शुरु हो जाएंगे। माना जा रहा है कि दोनों राज्यों के वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन सितंबर के आखिरी हफ्ते या फिर अक्टूबर की शुरुआत में हो सकता है। रेल मंत्रालय के आदेश का इंतजार भोपाल से पटना के लिए वीकली ट्रेन छोड़कर कोई और ट्रेन रोजाना नहीं चलती। इसी तरह भोपाल से लखनऊ के लिए चलने वाली ट्रेनें भी वीकली हैं। जिसमें अच्छी-खासी भीड़ रहती हैं। इसी कारण से यात्रियों को टिकट मिलने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इन सब पहलुओं को देखते हुए रेल मंत्रालय ने तकरीबन तीन साल पहले भोपाल से पाटलिपुत्र और लखनऊ के लिए वंदे भारत ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। रेल मंत्रालय की हरी झंडी मिलते ही ट्रेन का संचालन शुरु हो जाएगा। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सिटिंग कोच बेगलुरू में बनाए जाते हैं। स्लीपर कोच चेन्नई में बनते हैं। पहले सिटिंग कोच का रैक भोपाल आएगा। उसके बाद स्लीपर कोच वाले रैक आएंगे। 

ऑनलाइन आवेदन और भुगतान के बाद 7 से 15 दिन में मिलेगा पासपोर्ट

इंदौर यदि आप नौकरी, पढ़ाई, घूमने या किसी जरूरी काम से विदेश जाना चाहते हैं, तो सबसे पहला और जरूरी दस्तावेज है पासपोर्ट। मध्यप्रदेश सहित देशभर में अब पासपोर्ट बनवाना पहले की तुलना में आसान हो गया है, लेकिन इसके लिए सही जानकारी और दस्तावेजों का होना जरूरी है। पासपोर्ट बनवाने के लिए आपको ऑनलाइन आवेदन से लेकर अपाइंटमेंट बुकिंग, दस्तावेज सत्यापन और पुलिस वेरिफिकेशन तक की प्रक्रिया को पूरा करना होता है। अब तय नियमों और जरूरी शर्तों का पूरा कर बगैर एजेंट के भी खुद ही पासपोर्ट बनवा सकते हैं। 15 से 30 दिन में पासपोर्ट जारी हो जाता है। यदि आपको जल्दी पासपोर्ट चाहिए, तो तत्काल सेवा का विकल्प भी मौजूद है, जिसमे कुछ अतिरिक्त शुल्क देकर पासपोर्ट तीन से सात दिन में आपके पते पर पहुंच जाता है। पासपोर्ट सेवा केंद्र पर बुक करना होगा अपॉइंटमेंट पासपोर्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, फीस और पुलिस वेरिफिकेशन से लेकर अपाइटमेंट प्रक्रिया की जानकारी होने पर आप घर बैठे भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले passportindia.gov.in वेबसाइट पर जाकर खुद को रजिस्टर करना होगा। लॉगिन के बाद आप फ्रेस फासपोर्ट या री-इश्यू के लिए ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं। इसके बाद आपको अपने नजदीकी पासपोर्ट सेवा केंद्र को चुनकर अपॉइंटमेंट बुक करना होगा। अपाइंटमेंट वाले दिन और समय पर आपको पासपोर्ट कार्यालय पहुंचकर दस्तावेज वेरिफिकेशन और फोटो करवाना होगा। इसके बाद पुलिस वेरिफिकेशन होगा। इस पूरी प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद आपके दिए गए पते पर पासपोर्ट डाक से पहुंच जाएगा। कितनी बार ले सकते हैं अपाइंटमेंट एक बार में एक ही अपाइंटमेंट लिया जा सकता है। यदि आप निर्धारित तारीख पर नहीं पहुंचते हैं, तो अपाइंटमेंट निरस्त माना जाता है। इसके बाद आपको दोबारा स्लाट बुक कर अपाइंटमेंट बुक करना होता है। एक बार जमा की गई फीस में आप तीन बार अपाइंटमेंट बुक कर सकते हैं। इसके बाद फिर से पूरी प्रक्रिया और फीस जमा करना होगी। जरूरी दस्तावेज पहचान का प्रमाण :- आधार कार्ड (ब्लू टिक वाला), पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र (कलर वाला), ड्राइविंग लाइसेंस, विवाह प्रमाण पत्र (यदि विवाहित हैं और नाम में बदलाव हुआ है) पते का प्रमाण :- आधार कार्ड (ब्लू टिक वाला), बैंक पासबुक (बीते तीन माह की एंट्री), रेंट एग्रीमेंट (यदि किराए पर रहते हैं), राशि कार्ड, सरकारी जाब कार्ड, जन्म का प्रमाण :- जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं या 12वीं की मार्कसीट, पैन कार्ड फीस कितनी लगेगी     नियमित पासपोर्ट :- 1500 रुपये (36 पेज, वैधता 10 वर्ष)     नियमित पासपोर्ट :- 2000 रुपये (60 पेज, वैधता 10 वर्ष)     तत्काल पासपोर्ट :- 3500 रुपये (36 पेज, वैधता 10 वर्ष)     तत्काल पासपोर्ट :- 4000 रुपये (60 पेज, वैधता 10 वर्ष) पुलिस वेरिफिकेशन कैसे होता है पासपोर्ट आवेदन के बाद अपाइटमेंट लेकर दस्तावेज वेरिफिकेशन होता है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया होती है। आवेदक के स्थानीय थाने से पुलिसकर्मी आपके पते पर आते हैं और सत्यापन करते हैं कि आप वहां वास्तव में रहते हैं या नहीं। इस दौरान पुलिसकर्मी आपके मूल दस्तावेज और उनकी कापी भी देखेंगे। सत्यापन रिपोर्ट पुलिस द्वारा ऑनलाइन भेजी जाती है, जो पासपोर्ट कार्यालय को जाती है। तत्काल पासपोर्ट की प्रक्रिया आवेदक यदि जल्दी पासपोर्ट चाहता है, तो वह तत्काल योजना के तहत आवेदन कर सकता है। इसमें ऑनलाइन आवेदन के दौरान ही तत्काल सेवा को चुनना होता है और निर्धारित 1500 रुपये ही फीस ऑनलाइन जमा की जाती है। तत्काल सेवा की शेष राशि अपाइंटमेंट के समय दस्तावेज वेरिफिकेशन के समय जमा करना होगी है। यह राशि ऑनलाइन और नकद दोनों तरह से जमा की जा सकती है। इसमें पुलिस वेरिफिकशन पासपोर्ट जारी होने के पहले और बाद में किसी भी समय हो सकता है। इन बातों का भी रखें ख्याल – अपाइंटमेंट तारीख पर तय समय से पहले पासपोर्ट कार्यालय पहुंचे। – सभी दस्तावेज के ओरिजनल और फोटोकापी दोनों साथ रखें। – तत्काल सेवा चुनी है तो शेष राशि नकद में भी साथ रखें। – अपाइंटमेंट के दौरान दस्तावेज की जांच और बायोमेट्रिक और फोटोग्राफ लिए जाते हैं।

पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, UP के 11 ऐतिहासिक स्थलों का होगा कायाकल्प

लखनऊ उत्तर प्रदेश में खंडहर में तब्दील हो रहे राज्य के ऐतिहासिक धरोहरों को नया जीवन देने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। पर्यटन विभाग प्रदेश के 11 पुराने किलों और भवनों को चमकाने की तैयारी में है। विभाग ने एजेंसियों के माध्यम से इसके लिए अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) आमंत्रित किया है। ये काम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत होगा, जहां एजेंसी इन जगहों को डिजाइन करेगी, बनाएगी, पैसे लगाएगी, चलाएगी और बाद में सरकार को सौंप देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू होने जा रही इस पहल से न सिर्फ इन ऐतिहासिक किलों और भवनों का इतिहास बचेगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन बढ़ेगा और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा। पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इन 11 विरासत स्थलों में ललितपुर का तालबेहट किला, बांदा का रनगढ़ और भुरागढ़ किला, गोंडा की वजीरगंज बारादरी, लखनऊ का आलमबाग भवन, गुलिस्तान-ए-एरम और दर्शन विलास, कानपुर की टिकैत राय बारादरी, महोबा का मस्तानी महल और सेनापति महल, झांसी का तहरौली किला और मथुरा का सीताराम महल (कोटवान किला) शामिल हैं। ये सभी जगहें अपनी खास वास्तुकला और इतिहास की कहानियों के लिए मशहूर हैं। इनका पुनरोद्धार करके इन्हें होटल, सांस्कृतिक केंद्र या संग्रहालय में बदला जाएगा, ताकि पर्यटक यहां ठहर सकें और इतिहास को करीब से महसूस कर सकें। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में ये योजना खास तौर पर फायदेमंद होगी, जहां पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। पर्यटन विभाग के मुताबिक, ये परियोजना न सिर्फ इन पुरानी इमारतों को नया रूप देगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी। मुख्यमंत्री ने पहले ही इको-टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। उनकी ये कोशिशें यूपी को देश और दुनिया में पर्यटन का एक चहेता डेस्टिनेशन बना रही हैं। अयोध्या, काशी, और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ राज्य के अन्य प्राचीन मंदिरों और तीर्थ स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। 2024 में 65 करोड़ पर्यटकों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थलों का दौरा किया, जो इन पहलों की सफलता को दर्शाता है।   

डीएवीवी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू, CUET-UG काउंसलिंग के लिए आज से फॉर्म भरें

इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में सीयूईटी-यूजी की काउंसलिंग को लेकर प्रक्रिया शुरू होगी। आज से विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। पंजीयन के लिए आठ दिन का समय दिया गया है। आवेदन प्राप्त होने के बाद विद्यार्थियों को च्वाइंस फिलिंग करना होगा। यह अगस्त पहले सप्ताह में रखी गई है। फिर विद्यार्थियों की मेरिट और रैंक बनाई जाएगी। उसके आधार पर आनलाइन काउंसलिंग में विद्यार्थियों को सीटें आवंटित होंगी। बता दें कि जुलाई पहले सप्ताह में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने सीयूईटी पीजी का परिणाम घोषित किया है। करीब 13 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। यह डेटा एनटीए की तरफ से विश्वविद्यालय को तीन दिन पहले मिल गया है। अधिकारियों के मुताबिक 13 लाख विद्यार्थियों की जानकारी और स्कोर कार्ड मिल गया है, जिसमें एक लाख बीस हजार विद्यार्थियों ने डीएवीवी में दिलचस्पी दिखाई है। सीयूईटी काउंसलिंग में आवेदन करने वाले विद्यार्थियों की मेरिट बनाई जाएगी। यह सूची जुलाई अंतिम सप्ताह तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी की जाएगी।   30 कोर्स की 1470 सीटें विश्वविद्यालय के आइएमस, आइआइपीएस, ईएमआरसी, इकानोमिक्स, स्कूल ऑफ लाइफ साइंस सहित दस विभागों से संचालित 30 पाठ्यक्रम है। बी.काम, बी.ए, बी.फार्मा, बी.सी.ए, बी.ए.एलएलबी, एमबीए-एमटेक इंटीग्रेटेड कोर्स शामिल है। इनकी 1470 से अधिक सीटों पर विद्यार्थियोंं को प्रवेश दिया जाएगा।   काउंसिलिंग 14 से 21 जुलाई तक अगस्त दूसरे सप्ताह में काउंसिलिंग 14 से 21 जुलाई तक आवेदन की प्रक्रिया की जाएगी। इसके बाद विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की मेरिट और रैंक बनाएगी। यह प्रक्रिया भी सात दिन के भीतर पूरी की जाएगी। उसके बाद विश्वविद्यालय ने आनलाइन काउंसलिंग का पहला चरण करवाएगा। संभवत: अगस्त दूसरे सप्ताह में काउंसिलिंग होगी। डीएवीवी के सीयूईटी समन्वयक, डॉ. राजेश शर्मा अगले दो दिन में जारी होगा शेड्यूल एनटीए की तरफ से विद्यार्थियों का डाटा मिलने के बाद काउंसिलिंग के लिए सोमवार से पंजीयन शुरू किए जाएंगे। अगले दो दिनों के भीतर काउंसिलिंग का पूरा शेड्यूल जारी किया जाएगा।

आईआईटी इंदौर का कमाल: पांच छात्रों को मिला करोड़ों का ऑफर

इंदौर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर से बैचलर ऑफ टेक्नोलाजी (बीटेक) करने वाले पांच छात्रों को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक के सालाना पैकेज पर नौकरियां मिली हैं। संस्थान के इतिहास में यह पहला मौका है, जब बैच के इतने सारे विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ रुपये का पैकेज मिला है। इन्हें आईटी सेक्टर की कंपनियों ने जाब ऑफर किए हैं। खास बात यह है कि पिछले साल आईटी सेक्टर की स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद आईआईटी के विद्यार्थियों को अच्छे पैकेज पर कंपनियों ने रखा है। संस्थान के मुताबिक बीते साल सिर्फ एक विद्यार्थी यहां तक पहुंचा था, जबकि इस बार न्यूनतम पैकेज में भी बढ़ोतरी हुई है। एक दिसंबर 2024 से संस्थान में प्लेसमेंट का दौर शुरू हुआ है। कंपनियों का कैंपस में आना अभी जारी है। प्लेसमेंट सीजन में 150 से ज्यादा प्रमुख टेक कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) ने हिस्सा लिया है। निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने बताया संस्थान में आने वाली कंपनियों की संख्या में वृद्धि हुई है।   इन क्षेत्रों की कंपनियों ने दिए जॉब कोर इंजीनियरिंग फर्म के अलावा आइटी, आटोमोबाइल, ऊर्जा और पर्यावरण, परामर्श, फिनटेक, बैंकिंग, सेमीकंडक्टर, कंस्ट्रक्शन से कंपनियों ने अधिक जॉब ऑफर दिए हैं। पैकेज में 18 फीसद की वृद्धि बीटेक करने वाले विद्यार्थियों को 500 आफर मिले, जिसमें अभी तक 88 प्रतिशत छात्रों को नौकरियां मिल गई हैं। पिछले वर्ष की तुलना में जाब आफर में उच्चतम सैलरी पैकेज में 18 फीसद की वृद्धि हुई है। पहली बार पांच विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ की नौकरियां मिली हैं। औसत सैलरी में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। यह 27 लाख रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच गई। क्यूएस रैंकिंग सुधारने में लगेंगे पांच साल विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ के जाब आफर जरूर मिले हैं लेकिन आईआईटी इंदौर की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में संस्थान को 556वां स्थान मिला है, जबकि वर्ष 2023 में यह 396वें स्थान पर था। बीते चार साल में रैंकिंग में 160 स्थानों की गिरावट आई है। आईआईटी इंदौर ने 34 देशों के साथ 118 एमओयू किए हैं और यहां तीन हजार से अधिक विद्यार्थी तथा 220 फैकल्टी सदस्य हैं, लेकिन इसके बावजूद यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया है। निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने माना है कि समस्या की पहचान हो चुकी है और सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि रिसर्च आउटपुट, पेटेंट और इनोवेशन पर अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संस्थान ने नई रणनीतियों पर काम शुरू किया है, जिसका असर दिखने में दो से पांच साल का समय लग सकता है। रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना, वैश्विक साझेदारी और छात्र विनिमय कार्यक्रम बढ़ाना इन प्रयासों का हिस्सा है।

राहत की बजाय संकट बनी मेट्रो! भोपाल में लोग परेशान इन 3 वजहों से

भोपाल पुराने शहर के सबसे व्यवस्त मार्गों में से एक बैरसिया पर करोंद चौराहा से सिंधी कालोनी तक मेट्रो की आरेंज लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। मेट्रो का काम करने के लिए कंपनी ने सड़क के बीचों-बीच बेरिकेड्स लगाए हैं, जिनकी वजह से सड़कों की चौड़ाई मुश्किल से 10 फिट की रह गई है। वहीं पसरा अतिक्रमण लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस वजह से हर दिन इस मार्ग पर घंटों तक लंबा जाम लग रहा है तो वहीं वर्षा के दौरान कीचड़, गड्ढे, जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके बाद भी मेट्रो प्रबंधन, नगर निगम, पुलिस, प्रशासन व्यवस्थाएं नहीं बना पा रहा है।   मेट्रो के लिए खड़े किए जा रहे हैं पिलर बैरसिया रोड पर मेट्रो की आरेंज रेल लाइन के पिलर खड़े किए जा रहे हैं। जिसके लिए यहां पर बेरिकेड्स लगाकर गड्ढों की खोदाई करने के साथ ही पिलर तक खड़े करने का काम चल रहा है। इस काम के शुरू होते ही कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नगर निगम, प्रशासन, पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों की चौड़ाई यदि कम हो गई है तो अतिरिक्त पट्टी बनाई जाए। सड़क किनारे व फुटपाथ पर पसरे ठेले, दुकानों के अवैध अतिक्रमण को प्रमुखता से हटाया जाए। जिससे वाहनों को आवागमन में समस्या न हो और जाम की स्थिति निर्मित न हो। कलेक्टर के निर्देश पर भी नहीं हुई कोई व्यवस्था कलेक्टर के निर्देश पर भी जिम्मेदार अधिकारी कोई व्यवस्था नहीं बना पाए हैं। नतीजतन इस मार्ग से हर दिन गुजरने वाले एक लाख से अधिक वाहन चालकों को जाम की समस्या से रूबरू होना पड़ रहा है। सड़क खोदाई कर मरम्मत तक नहीं की मेट्रो रेल लाइन के कार्य के दौरान करोंद से लेकर सिंधी कालोनी तक सड़क की खोदाई की गई थी लेकिन इसकी दोबारा से मरम्मत नहीं की गई है। वर्षा के दौरान उखड़ी सड़क पर जलभराव की स्थिति बनती है, गड्ढों से वाहनों को गुजरने में समय लगता है।ऐसे में यह लापरवाही भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती है। अतिक्रमण की बनी परेशानी बीच रास्ते में खड़े रहते हैं ई रिक्शा करोंद चौराहा, डीआइजी बंगला, काजी कैंप और सिंधी कालोनी क्षेत्र में मुख्य सड़क पर जगह कम बची है। इसके बाद भी यहां पर ई रिक्शा, ऑटो और आपे चालक अपना कब्जा जमाए रहते हैं। करोंद चौराहा के चारों तरफ इनका अतिक्रमण है, जिससे दो व चार पहिया वाहनों को निकलने के लिए जगह ही नहीं बचती है। फुटपाथ पर दुकान व ठेले वालों का कब्जा सड़क पर जाम की स्थिति निर्मित न हो इसके लिए अतिरिक्त पट्टी बनाई जानी थी लेकिन कुछ ही जगह बनाई गई थी। यह भी सफल नहीं हुई, क्योंकि करोंद चौराहा से लेकर सिंधी कालोनी तक फुटपाथ पर अवैध दुकानदारों व ठेले वालों ने अपना कब्जा जमा रखा है। वर्षा में उखड़ चुकी है सड़क इन पर पुलिस, प्रशासन, नगर निगम अमले द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। सामांनतर रोड भी खस्ता हाल बैरसिया रोड पर यदि जाम लगता है तो लोग छोला फ्लाईओवर समानांतर रोड से होकर आवागमन कर सकते हैं लेकिन यह भी खस्ता हाल हो गई है। वर्षा में सड़क उखड़ चुकी है तो वहीं दुकानदारों, ठेले वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। करोंद मंडी मार्ग होने से इस पर भी जाम लग जाता है। लोग बोले सुबह-शाम रहती है आफत लांबाखेड़ा रहवासी विवेक गौर कहा कहना है कि करोंद चौराहा तक दो पहिया वाहन लेकर जाने से पहले भी सोचना पड़ता है। हालात यह हैं कि इतना लंबा जाम लग जाता है कि जेल रोड तक पहुंचने में ही आधे से एक घंटे तक लग जाते हैं। वहीं करोंद में एडवोकेट कृष्णा शर्मा ने कहा कि मेट्रो का कार्य तेजी से किया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार लोगों ने न तो सड़कें चौड़ी की और न ही इन पर पसरा अतिक्रमण हटाया है। यही कारण है कि आमजन हर दिन परेशान हो रहे हैं।  

उज्जैन का सुपर लीग श्रेणी में सम्मानित होना गर्व का विषय

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार में मध्यप्रदेश एक बार फिर से गौरवान्वित होगा। उन्होंने बताया कि आगामी 17 जुलाई को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा मध्यप्रदेश के आठ शहरों को स्वच्छता की विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने इस उपलब्धि पर सभी स्वच्छता कर्मी, नगरीय निकायों के महापौर, अध्यक्ष, पार्षद, अधिकारी और कर्मचारियों सहित नागरिकों को बधाई दी है। सुपर स्वच्छ लीग श्रेणी में इंदौर आठवीं बार होगा सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंदौर शहर को स्वच्छता के लिए सुपर स्वच्छ श्रेणी लीग में आठवीं बार सम्मानित किया जाएगा। इंदौर पूर्व में सात बार देश के स्वच्छतम शहर का पुरस्कार प्राप्त कर चुका है। विगत वर्षों में श्रेष्ठ प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर स्वच्छ लीग पुरस्कार इस वर्ष इंदौर को दिया जाएगा। उज्जैन को 3 से 10 लाख जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में स्वच्छ लीग पुरस्कार प्राप्त होगा, जो गर्व का विषय है। इसी प्रकार 20 हजार से कम आबादी वाले नगरों की श्रेणी में बुधनी नगर को भी सम्मानित किया जाएगा। देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी के रूप में सम्मानित होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल प्राकृतिक सुंदरता के अलावा स्वच्छता के क्षेत्र में भी आदर्श बना है और इस आधार पर देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी के रूप में सम्मानित होगा। विभिन्न श्रेणियों में ग्वालियर, देवास, शाहगंज और जबलपुर भी पुरस्कृत किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के इस मापदंड के आधार पर अपने घर, मोहल्ले, कॉलोनी और नगर को स्वच्छ रखें और इस आदर्श जीवन शैली को दुनिया के बीच प्रदर्शित करने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को नई दिल्ली से दुबई रवाना होने से पहले यह संदेश प्रदेशवासियों के नाम जारी किया।