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रीवा एयरपोर्ट की बाउंड्रीवॉल पहली बारिश में धराशायी, गुणवत्ता पर उठे सवाल

रीवा मध्य प्रदेश  के रीवा में 24 घंटे की मूसलाधार बारिश में नवनिर्मित एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल धराशायी हो गई. इस एयरपोर्ट के निर्माण में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. 15 फरवरी 2023 को शिलान्यास के बाद एयरपोर्ट लगभग डेढ़ साल में बनकर तैयार हुआ था. वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने 20 अक्टूबर 24 को वर्चुअल लोकार्पण भी किया था. इस एयरपोर्ट को बनाने में करीब पांच गांवों की 323 एकड़ जमीन को 99 साल की खातिर भारतीय विमान प्राधिकरण को दिया गया है. राज्य में भोपाल, जबलपुर, खजुराहो, इंदौर और ग्वालियर के बाद रीवा 6वां एयरपोर्ट है, जिसे डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने लाइसेंस दिया है. यह जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूर बना है. बताया जा रहा है कि मूलाधार बारिश की वजह से एयरपोर्ट एरिया की जमीन अचानक धंस गई. जिससे दीवार का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया.    एयरपोर्ट में रनवे की कुल लंबाई 2300 मीटर है. एयरपोर्ट से दो फ्लाइट का संचालन हो रहा है. पहली फ्लाइट भोपाल वाया खजुराहो होते हुए रीवा पहुंचती है. इसके बाद यह सिंगरौली को रवाना होती है. वहीं दूसरी फ्लाइट रीवा से जबलपुर होते हुए भोपाल से कनेक्ट है. अभी 19 सीटर विमान का ही संचालन होता है. हालांकि, इसे बढ़ाकर 72 सीटर विमानों के संचालन के लिए योजना है. इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से रीवा को बड़ी सौगात देते हुए वर्चुअली एयरपोर्ट का लोकार्पण किया था. अथॉरिटी के अनुसार रीवा एयरपोर्ट को अगले 50 सालों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. वहीं, इसको लेकर एयरपोर्ट अथार्टी के मैनेजर नवनीत चौधरी का बयान आया है. चौधरी ने बताया कि ज्यादा पानी गिरने से आसपास के इलाके का पानी बाउंड्री वॉल से टकराया. जिससे बाउंड्री पानी के दबाव को नहीं रोक पाई. रनवे पूरी तरह से ठीक है. उसे कोई क्षति नहीं हुई है. फ्लाइट बराबर उड़ रही है. नवनीत की दलील है कि बाउंड्री हवा के वेग और लोगों को रोकने के लिए बनाई जाती है. पानी को रोकने के लिए नहीं यह पर्याप्त नहीं है. अब इस बाउंड्री को नए तरीके से डिजाइन किया जाएगा.

उप अभियंता भर्ती परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल करते हुए एक परीक्षार्थी पकड़ी गई, एफआईआर दर्ज

छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की कड़ी निगरानी में परीक्षा आयोजन, नकल प्रकरण में पुलिस द्वारा वैधानिक कार्यवाही जारी रायपुर, छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल, रायपुर द्वारा आयोजित उप अभियंता (सिविल) एवं उप अभियंता (विद्युत/यांत्रिकी) भर्ती परीक्षा के अंतर्गत परीक्षा केन्द्र क्र. 1309 – शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सरकंडा, बिलासपुर (छ.ग.) में एक गंभीर नकल प्रकरण प्रकाश में आया।  कक्ष क्रमांक 07 में परीक्षार्थी रोल नंबर 13091014 – कु. अन्नु सूर्या, पिता – कलेश्वर राम द्वारा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर त्वरित संज्ञान लेते हुए परीक्षा कक्ष में तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उक्त परीक्षार्थी के अंतःवस्त्र में हिडन कैमरा व कान से माइक्रो स्पीकर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण छिपाकर रखे गए पाए गए, जिन्हें तत्काल जब्त किया गया। परीक्षा केन्द्र परिसर के बाहर नकल में सहायता करने हेतु उपस्थित कु. अनुराधा बाई के पास से वॉकी-टॉकी, टैबलेट, ब्लूटूथ डिवाइस और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। यह स्पष्ट रूप से एक संगठित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नकल करने का प्रयास था। प्रशासन द्वारा नियमानुसार तत्काल नकल प्रकरण तैयार कर छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) को प्रेषित कर दिया गया है। साथ ही, थाना सरकंडा पुलिस को सूचित कर एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। संबंधित व्यक्तियों पर उचित कानूनी कार्यवाही की जा रही है। व्यावसायिक परीक्षा मंडल एवं जिला प्रशासन द्वारा इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। परीक्षा की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु ऐसी घटनाओं पर "जीरो टॉलरेंस नीति" अपनाई गई है। भविष्य में भी किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

बैंकिंग का नया चेहरा: गाँव की सखी, सबकी सहायक

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम चरईडाड़ निवासी जीनत परवीन, वर्ष 2019 से बैंक सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। जीनत परवीन बताती हैं कि योजना से जुड़ने से पहले वे एक साधारण गृहिणी थीं।  राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत जब उन्हें बैंक सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, तो उन्होंने इसे पूरी लगन और निष्ठा से अपनाया। आज वे छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से जुड़ी बैंकिंग सेवाएं अपने गाँव और आसपास के ग्रामीणों तक पहुँचा रही हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को खाता खोलने, पैसा जमा-निकासी, आधार लिंक, सामाजिक सुरक्षा पेंशन भुगतान और अन्य बैंकिंग सेवाओं में सहायता प्रदान कर रही हैं। उनकी मासिक बैंकिंग लेनदेन की राशि 35 से 40 लाख तक पहुँचती है, जिससे उन्हें नियमित रूप से अच्छा कमीशन के रूप में अच्छी राशि प्राप्त हो जाती है। यह सेवा न केवल उनके लिए रोज़गार का साधन बनी, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामाजिक पहचान का माध्यम भी बनी है। जीनत परवीन बताती है कि इस आमदनी से उन्होंने अपने कई सपने पूरे किए हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने अपने लिए एक स्कूटी भी खरीदी, जिससे अब वह आसानी से ग्रामीण क्षेत्र में सेवा प्रदान कर रही हैं। वे बताती है कि बैंक सखी बनने के बाद जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और अब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।

श्रावण यात्रा का असर: हाईवे पर भारी वाहन रोक, रामपुर में 14 जुलाई को शिक्षण संस्थान बंद

मुरादाबाद कांवड़ियों की भीड़ बढ़ने पर शनिवार रात से दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर भारी वाहनों के चलने पर रोक लगा दी गई है। अमरोहा-मुरादाबाद और रामपुर में हाईवे पर दिल्ली से लखनऊ वाली लेन कांवड़ियों के आने-जाने के लिए निर्धारित कर दी गई है जबकि लखनऊ से दिल्ली की लेन में कार समेत छोटे वाहन गुजारे जा रहे हैं। हाईवे पर रूट डायवर्जन की यह व्यवस्था सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तक रहेगी। उधर, अमरोहा के एसपी अमित कुमार आनंद, एएसपी अखिलेश भदौरिया और सीओ अंजलि कटारिया ब्रजघाट चौकी पर शनिवार को व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। 11 जुलाई से शुरू हुए सावन माह में पहला सोमवार 14 जुलाई को है। इसके लिए शिवभक्त हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री से गंगा जल लाकर अपने पास के मंदिरों में भगवान भोले का जलाभिषेक करेंगे। बरेली, संभल, चंदौसी, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर के कांवड़िये ब्रजघाट से भी गंगा जल भरने आते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव का जलाभिषेक किया जाता है। इसके चलते शुक्रवार, शनिवार और रविवार को हाईवे पर कांवड़ियों की भीड़ रहती है। शनिवार रात कांवड़ियों की संख्या को बढ़ता देखकर अमरोहा पुलिस ने ट्रक कंटेनर, डीसीएम व निजी बसों को रूट प्लान के तहत डायवर्ट कर दिया। अमरोहा में रूट डायवर्जन होते ही मुरादाबाद और रामपुर में पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया। हाईवे पर दिल्ली से लखनऊ जाने वाली लेन केवल कांवड़ियों और उनके वाहनों के लिए तय कर दी गई है जबकि लखनऊ से दिल्ली की ओर जाने वाली लेन में कार, ऑटो, पिकअप समेत छोटे वाहन चलाए जा रहे हैंं। एसपी यातायात सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि 11 जुलाई से रूट डायवर्जन किया जाना था लेकिन सावन के पहले दिन कांवड़ियों की भीड़ कम थी। शनिवार को कांवड़ियों की भीड़ बढ़ने और अमरोहा में रूट डायवर्जन लागू होने के बाद यहां भी रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है। अब दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को बदले मार्ग से गुजारा जा रहा है। शनिवार रात से डायवर्जन लागू कर दिया गया है। यह प्लान सोमवार की दोपहर दो बजे तक जारी रहेगा। अब दिल्ली से मुरादाबाद लेन को पूरी तरह कांवड़ियों के लिए तय कर दिया है। इस लेन पर किसी भी तरह के वाहन के आने की अनुमति नहीं है। मुरादाबाद से दिल्ली लेन पर दोनों तरफ की कार, पिकअप या अन्य छोटे वाहन चलते रहेंगे। – अखिलेश भदौरिया, एएसपी, अमरोहा इस मार्ग से गुजारे गए भारी वाहन रूट डायवर्जन लागू होने के बाद शनिवार रात मुरादाबाद से दिल्ली की ओर जाने वाली रोडवेज और निजी बसों समेत भारी वाहन मुरादाबाद से बिलारी, संभल, बबराला, नरौरा, डिबाई, बुलंदशहर, सिकंदराबाद होते हुए मेरठ और दिल्ली भेजे गए।  

सपा मुखिया अखिलेश के हर तंज का जवाब दे रहे हैं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद, एक्टिव नजर आए

लखनऊ भारतीय जनता पार्टी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद इन दिनों काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं। वह सपा मुखिया अखिलेश के हर तंज का जवाब दे रहे हैं। साथ ही वह कांग्रेस पर भी पलटवार कर रहे हैं। केशव ने एक बार फिर सपा को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश पर लंबे समय तक राज करने की मंशा से ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’ जैसे शब्दों का सहारा लिया था। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। भाजपा के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’ की नकली व झूठी बैसाखियों का सहारा लेकर कांग्रेस ने लंबे समय देश की सत्ता को अपने शिकंजे में कसने का सपना पाला था। लेकिन कालचक्र ने उसका यह तिलिस्म तोड़ दिया। इसके बावजूद वह अभी भी इन जर्जर बैसाखियों से सत्ता की उम्मीद पाले बैठी है। उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव जहां अक्सर प्रदेश सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुखर हैं तो वहीं उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी उनके आरोपों पर पलटवार करते रहे हैं। साथ ही केशव कांग्रेस की नीतियों पर भी कड़ा रुख अपनाते रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक पर राजनीति काफी मुखर रही है। लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए के नारे को अक्सर केशव परिवारवाद से जोड़ते हुए निशाना साधते दिखाई देते हैं। उन्होंने इमरजेंसी के मामले पर कांग्रेस का भी घेराव किया है। हाल ही में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि कांग्रेस और सपा का असली चेहरा अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। इन दलों की तुष्टिकरण की राजनीति, झूठ से लिपटी धर्मनिरपेक्षता और मजहबी वोट बैंक के लिए राष्ट्रहित से समझौता करने की नीति अब जनता को स्वीकार नहीं है।  

कालिंदी एक्सप्रेस हादसे से बाल-बाल बची, कानपुर में चालक की तत्परता ने टाला बड़ा खतरा

कानपुर कानपुर में शुक्रवार को जमकर बारिश हुई, जहां चौबेपुर के पास रेलवे ट्रैक धंसने की वजह से कालिंदी एक्सप्रेस को रोका दिया गया। इस दौरान ड्राइवर ने बेहद सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। ट्रेन को अचानक से रोका गया तो यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई, जहां कई यात्रियों ने ट्रेन से उतरकर अन्य वाहनों से अपने गंतव्य तक जाने का फैसला किया। इसके बाद रेलवे की सेक्टर टीम मौके पर पहुंची और ट्रेन को बेहद धीमी गति से गुजारा गया।   कानपुर में जारी है बारिश का प्रकोप कानपुर के कई इलाकों में शुक्रवार को जोरदार बारिश हुई, जिसकी वजह से कई जगहों पर पेड़ टूट गए। इसके अलावा बारादेवी में दो जर्जर मकान ढह गए, जिसमें एक बुजुर्ग महिला घायल हो गईं। बाद में लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने मकान में रह रहे बाकी लोगों को बाहर निकाला। इसके अलावा नौबस्ता में करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई। मृतक का नाम केशव तिवारी है जो कि संजय गांधी नगर का रहने वाला है। बारिश ने खोली नगर निगम की पोल कानपुर में हुई लगातार बारिश की वजह से कुछ ही घंटों में कई सड़कें जलमग्न हो गईं, जिसकी वजह से कई जगहों पर जाम की स्थिति बन गई। सुबह दस बजे तक हुई बारिश से जगह-जगह जलभराव और सड़क धंस गईं, जिसके पूरे नगर निगम की पोल खोल कर रख दी है। जिन इलाकों की सड़कों पर पानी भर गया, उनमें गांधीनगर, किदवई नगर, घंटाघर और गोविंदनगर शामिल हैं। कई स्कूलों में छुट्टी घोषित हालात ऐसे हो गए कि इसकी वजह से कई स्कूलों में छु्ट्टी घोषित कर दी गई है। शहर के जूही खलवा पुल भरने से बैरियर लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया, जिसके चलते लोगों को घूमकर आना पड़ा। दासू कुआं से नौबस्ता बसंत विहार जाने वाली रोड में एक से दो फीट तक पानी भर गया, जहां लोगों को निकलने के लिए जूझना पड़ा। 

धर्म नहीं, आस्था है बड़ी: मुस्लिम भाई की 151 किलो की कांवड़ यात्रा बनी चर्चा का विषय

कासगंज 11 जुलाई से सावन का पवित्र महीना शुरू हो गया है। वहीं भगवान भोले के प्रति आस्था में लोग कांवड़ यात्रा के लिए खुद को रोक नहीं पाते हैं। कहा जाता है जब इश्वर के प्रति आस्था हो तो इंसान जाति और धर्म नहीं देखता है। इस बीच एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां दो मुस्लिम भाइयों की भगवान भोले के प्रति आस्था जागी और वो खुद को कांवड़ ले जाने से रोक नहीं पाए। साजिद खान और सन्नी खान अपने जत्थे के साथ गंगा घाट पर पहुंचे और भागीरथ बनकर 151 किलो गंगा जल की कांवड़ लेकर गंतव्य को निकल पड़े। दोनों कहते हैं कि माता और पिता की इच्छा थी कि कांवड़ लेकर आएं और भगवान शिव का अभिषेक करें। शिव बहुत दयालु हैं, हमने सुन रखा है। हम सनातनी पहले मुस्लिम बाद में हैं।   दोनों ने उठाई 151 किलो की कांवड़ आगरा जिले के थाना बाह क्षेत्र के गांव कृषा के रहने वाले 25 वर्षीय साजिद खान और उनके दोस्त 22 वर्षीय सनी खान 151 किलो की कांवड़ लेकर बटेश्वर जा रहे हैं। वे वहां 14 जुलाई को भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। दोनों दोस्त कांवड़ यात्रा पर पहली बार आए हैं, लेकिन बहुत उत्साहित हैं। कह रहे हैं कि अपने गांव के तमाम लोगों को कई वर्षों से कांवड़ ले जाते हुए देख रहे थे।   माता-पिता की इच्छा कर रहे हैं पूरी भगवान शिव की महिमा के बारे में सुन रखा है। इस बार अपने माता-पिता के समक्ष इच्छा प्रकट की कि हम भी कांवड़ लेकर आएंगे, तो वे तत्काल तैयार हो गए और इसके बाद अपने 10 सदस्यीय जत्थे के साथ सोरों के लहरा घाट पर आ गए, जहां से कांवड़ यात्रा शुरू कर दी। बोले कि थोड़ा ब्रेक लेकर चलना पड़ता है क्योंकि 151 किलो का वजन बहुत होता है, लेकिन गंतव्य तक पहुंचेंगे और भोले भंडारी का गंगाजल से अभिषेक करेंगे। यह भी बोले कि पुरोहितजी ने पूरे विधि-विधान, पूजा-अर्चना के साथ हमें गंगा घाट से विदा किया है। जमीन पर कांवड़ नहीं रखेंगे। कांवड़ ले जाकर मिलेगा सुकून पूछा कि थकान हो रही है तो बोले कि थकान कैसी, जो कांवड़ लेकर जाता है उसमें अपने आप ताकत आ जाती है। साफ पूछा गया कि आप मुस्लिम हैं और कांवड़ लेकर जा रहे हैं, तो बीच में ही साजिद बोले, पहले तो हम सनातनी हैं, मुस्लिम बाद में। सवाल आस्था का है तो भगवान शिव भी हमारे आराध्य हैं। इन कांवड़ यात्रियों का जोश, जज्बा और जुनून देखते ही बनता है।

छत्तीसगढ़ की शान: सुखदेव ने अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स में दिलाया भारत को गोल्ड

  रायपुर, छत्तीसगढ़ की प्रतिभाएं आज विभिन्न खेलों के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य को गौरवान्वित कर रही हैं।  राज्य शासन द्वारा खिलाड़ियों को खेल प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना तथा प्रोत्साहन राशि सहित आवश्यक संसाधन प्रदान कर हर संभव सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन देश एवं विदेश में कर सकें।       महासमुंद जिले के लिए खेल जगत से एक और गर्व की खबर आई है। फॉर्चून फाउंडेशन समाजसेवी संस्था द्वारा संचालित फॉर्चून नेत्रहीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमापटपर, बागबाहरा खुर्द के पूर्व छात्र सुखदेव ने 7वीं ओपन पैरा एथलेटिक्स इंटरनेशनल चौंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। कांतिराव एथलेटिक्स स्टेडियम, बेंगलुरु (कर्नाटक) में 11 से 12 जुलाई तक आयोजित इस चौंपियनशिप में सुखदेव ने 1500 मीटर दौड़ को महज 4.36 मिनट में पूरा कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।      गौरतलब है कि नेत्रहीन सुखदेव ने फॉर्चून फाउंडेशन करमापटपर, बागबाहरा खुर्द में रहकर प्रशिक्षक श्री निरंजन साहू के मार्गदर्शन में निरंतर अभ्यास करते हुए यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में सुखदेव भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) बेंगलुरु में नियमित अभ्यास कर रहे हैं। इससे पहले भी सुखदेव खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025, नई दिल्ली में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक तथा 23वीं राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चौंपियनशिप चेन्नई में भी 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। सुखदेव जैसे होनहार पैरा खिलाड़ी प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।          छत्तीसगढ़ सरकार खेल एवं खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और विशेष रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।  सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर खिलाड़ी को उचित मंच और अवसर मिले, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकें।     सुखदेव की इस उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह, सीईओ जिला पंचायत श्री एस. आलोक, उप संचालक समाज कल्याण संगीता सिंह, खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी मनोज धृतलहरे, जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे सहित प्रशिक्षक निरंजन साहू एवं पैरा स्पोर्ट्स संघ के पदाधिकारियों ने भी उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।      सुखदेव की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती और छत्तीसगढ़ की मिट्टी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यह उपलब्धि निःसंदेह जिले के अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करेगी।

देवनारायण मंदिर विवाद: जनआक्रोश चरम पर, विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना

अलवर उमरैण में देवनारायण भगवान के प्राचीन मंदिर को वन विभाग द्वारा तोड़े जाने की घटना के बाद गुर्जर समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है। समाज के लोगों ने इसे उनकी धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार बताया है और मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर चेतावनी दी है। शनिवार शाम हुई इस घटना के बाद रविवार को उमरैण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। लोगों ने प्रशासन और सरकार पर देवस्थानों को लेकर संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग पर मनमानी करने और धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ का गंभीर आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौके पर पहुंचे और स्थानीय निवासियों से मुलाकात की। यह इलाका उनके निर्वाचन क्षेत्र में आता है। उन्होंने भाजपा सरकार पर मंदिरों को लेकर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां संतों ने वर्षों तक तपस्या की, उन स्थलों को नष्ट करना निंदनीय है। यह सरकार मंदिरों की हिमायत का दावा करती है, लेकिन हकीकत में उन्हें तोड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर की केवल मरम्मत हो रही थी लेकिन वन विभाग ने बिना किसी सूचना के उसे ढहा दिया। अब वही अधिकारी अपनी जेब से पुनर्निर्माण कराएं, वरना व्यापक आंदोलन होगा। स्थानीय समाजसेवी भविंदर पटेल ने सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि यह हमारी आस्था पर हमला है। समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। हम सब मिलकर रणनीति बना रहे हैं और जल्द ही निर्णायक कदम उठाएंगे। यदि भाजपा इस मुद्दे पर चुप रही, तो पार्टी को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने वन विभाग की कार्रवाई को मनमाना करार देते हुए इसे आस्था पर चोट बताया।

GST संरचना से जूझ रहा दवा व्यापार, इनपुट पर टैक्स कटौती की मांग

इंदौर दवाओं के निर्माण के लिए जो कच्चा माल खरीदना पड़ रहा है, उस पर (टैक्स) की दर ज्यादा है जबकि तैयार दवाओं की बिक्री पर जीएसटी की दर कम है। दवा निर्माताओं के संगठन ने मांग उठाई है कि कच्चे माल और दवा के बीच जीएसटी के अलग-अलग रेट का भेद खत्म किया जाना चाहिए। साथ ही दवा बनाने के मटैरियल और तैयार दवा दोनों पर जीएसटी की दर घटाकर पांच प्रतिशत के स्लैब में लाना चाहिए। यह मांग ठीक ऐसे समय उठाई गई है जब आने वाले दिनों में जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक होने जा रही है। इसमें जीएसटी की स्लैब व अन्य प्रविधानों में आठ वर्षों में सबसे बड़े बदलाव की उम्मीद है। बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन मप्र ने सरकार को पत्र लिखकर दवाओं के कच्चे माल और तैयार दवाओं दोनों पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत करने की मांग की है। एसोसिएशन ने इस संबंध में पत्र लिखा है और मांग की है कि प्रदेश की ओर से जीएसटी काउंसिल को इस बारे में प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए। बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव जयप्रकाश मूलचंदानी कहते हैं कि वर्तमान में दवा बनाने के कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है।   ब्रिक्री पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है इस मटैरियल से जो दवा तैयार होती है, उसकी बिक्री पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। टैक्स की दर का यह अंतर व्यापार में व्यावहारिक परेशानी पैदा कर रहा है। टैक्स के रूप में दवा कारोबारियों का छह प्रतिशत जीएसटी विभाग के पास जमा रहता है। जबकि निर्माण लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं के लिए दवाएं महंगी हो जाती हैं। एसोसिएशन ने मांग रखी है कि दवाओं और कच्चे माल दोनों पर ही जीएसटी की दर पांच प्रतिशत की जानी चाहिए। इनवर्टेड ड्यूटी के अलग नियम कर सलाहकार आरएस गोयल के अनुसार जीएसटी कर प्रणाली में कई वस्तुओं में कच्चे माल पर अधिक व तैयार उत्पाद पर कम टैक्स लागू है। इसके लिए एक इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर लागू होता है। इसमें सरकार ने प्रविधान किया है कि कच्चे माल पर अधिक टैक्स देकर तैयार माल कम टैक्स पर बेचा जाता है तो जो टैक्स का अंतर होता है, उसका रिफंड दिया जाए। व्यापारी को अधिकार होता है कि वह रिफंड हासिल करे। दवाओं के मामले में भी रिफंड का यह नियम लागू है। हालांकि रिफंड लेने के लिए कागजी कार्रवाई तो करना ही होगी। काउंसिल व्यापारियों को राहत देने के लिए कागजी कार्रवाई का बोझ कम कर प्रक्रिया को आसान बना सकती है।