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नया रायपुर में एनटीपीसी स्थापना दिवस-2025 उत्साहपूर्वक मनाया गया

रायपुर  एनटीपीसी स्थापना दिवस, 7 नवंबर, 2025 को एनटीपीसी नया रायपुर में मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, श्री दिवाकर कौशिक, सीईओ (एनएसपीसीएल) और क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (डब्ल्यूआर-II) ने एनटीपीसी ध्वज फहराया, जिसके बाद सभी ने एनटीपीसी गीत गाया। सभा को संबोधित करते हुए, श्री कौशिक ने पिछले 50 वर्षों के दौरान एनटीपीसी के गौरवशाली इतिहास और देश के विकास में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। “एनटीपीसी भारत की सबसे बड़ी बिजली कंपनी के रूप में उभरी है, जिसका विजन है ‘विश्व की अग्रणी बिजली कंपनी बनना, भारत के विकास को ऊर्जा प्रदान करना’। आज, 84.8 गीगावाट की स्थापित क्षमता और तापीय, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों के विविध पोर्टफोलियो के साथ, एनटीपीसी देश को विश्वसनीय, सस्ती और टिकाऊ बिजली उपलब्ध कराने के लिए समर्पित है। कंपनी हरित भविष्य के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है,” श्री कौशिक ने कहा। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर केंद्रित एनटीपीसी की नई पहलों और उपलब्धियों पर भी बात की। अपने भाषण में, मुख्य अतिथि ने प्रचालन सेवाओं, वाणिज्यिक, एकीकृत साझा सेवा केंद्र (यूएसएससी), स्टेशन इंजीनियरिंग, कॉर्पोरेट संचालन सेवाओं, नई पहलों आदि के क्षेत्र में उपलब्धियों पर भी बात की। श्री कौशिक ने पश्चिमी क्षेत्र-II में एनटीपीसी विद्युत संयंत्रों (कोरबा, सीपत, लारा, गाडरवारा और खरगोन) के प्रदर्शन के साथ-साथ आगे के अवसरों और चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने एनटीपीसी नवा रायपुर के साथ-साथ क्षेत्र के पावर स्टेशनों द्वारा ग्रीन टाउनशिप, राख उपयोग, स्क्रैप निपटान, सुरक्षा, सीएसआर और अन्य पहलों के क्षेत्र में किए गए प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर, गणमान्य व्यक्तियों ने केक काटा और इस अवसर को चिह्नित करने के लिए गुब्बारे उड़ाए। बाद में, सभी एनटीपीसी सीएमडी के संबोधन के लाइव प्रसारण में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री राम भजन मलिक, कार्यकारी निदेशक (राख प्रबंधन और एनआई); श्री नीरज जलोटा, कार्यकारी निदेशक (यूएसएससी); श्री बिद्या नंद झा, कार्यकारी निदेशक (प्रचालन सेवाएँ); अर्पिता महिला समिति के पदाधिकारी; एनटीपीसी के अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

पोलिंग पार्टियों के ठहरने की व्यवस्था बदली, रात में बूथ पर रुकने पर लगी रोक

घाटशिला घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में कुछ ही दिन बचे हैं। घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को मतदान हैं। वहीं, मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है। 11 नवंबर की सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। जानकारी के मुताबिक 10 नवंबर को घाटशिला विस क्षेत्र के 300 बूथों में से 262 बूथों की पोलिंग पार्टियां अपने-अपने बूथों पर ही रुकेगी जबकि बाकी 38 बूथों की पोलिंग पार्टियां रात में इंटरमीडिएट स्ट्रांग रूम (आईएसआर) में रुकेंगी और तड़के मतदान वाले दिन बूथ पर पहुंचेगी क्योंकि ये सभी बूथ नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पड़ते हैं। इसलिए ये बूथ पर न रुक कर इंटरमीडिएट स्ट्रांग रूम में रुकेंगी। वहीं, निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदान से पहले तड़के साढ़े पांच बजे से डेढ़ घंटे तक मॉक पोल कराया जायेगा। मतदान के बाद 300 में से 297 बूथों की पोलिंग पार्टियां उसी रात तक ईवीएम लेकर को-ऑपरेटिव कॉलेज में स्थित स्ट्रांग रूम पहुंच जायेंगी, जबकि शेष तीन बूथों की पोलिंग टीम 12 नवंबर की सुबह वहां पहुंचेगी। बता दें कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन, झामुमो के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से लगभग पांच प्रतिशत अधिक है। 2,56,252 मतदाताओं में से 1,31,180 महिलाएं और 1,25,078 पुरुष मतदाता हैं।  

जेल से लौटे आजम खान की पहली राजनीतिक चाल! अखिलेश से मिलकर बोले– ‘मेरा मुकाबला जंगलराज से’

लखनऊ   समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान ने शुक्रवार को लखनऊ में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली, जिसमें आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम भी मौजूद थे। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में आजम खान ने बिहार विधानसभा चुनाव और अपने निजी अनुभवों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह अब भी 'जिंदा और मजबूत' हैं, लेकिन 'जंगलराज' में नहीं जाना चाहते। 'मैं जंगलराज में नहीं जाना चाहता' – बिहार चुनाव पर आजम का बयान बिहार चुनाव में प्रचार को लेकर पूछे गए सवाल पर आजम खान ने कहा कि जाना चाहता हूं, पर असुरक्षित नहीं जाना चाहता। जंगलराज में नहीं जाना चाहता। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में बादशाह से लेकर वजीर तक कह रहे हैं कि वहां जंगलराज है। जंगल में इंसान नहीं रहते। अगर मैं वहां अकेला चला गया तो शायद लौट न सकूं। मैं जबरदस्ती रेल की पटरी पर सिर नहीं रखूंगा। आजम खान ने यह भी कहा कि लोगों का कहना है बिहार में बदलाव आने वाला है — 'लोग कहते हैं तो ठीक ही कहते होंगे।' 'हमारे समाज का हाल वही है, मेरा वादा अब भी कायम है' आजम खान ने अपने जीवन के हालात बताते हुए कहा कि मेरे घर में कल भी जनरेटर नहीं था, आज भी नहीं है। और जब तक मेरे समाज के हर व्यक्ति के घर में जनरेटर नहीं होगा, मैं अपने घर में नहीं रखूंगा। उन्होंने कहा कि 50 साल की राजनीति के बाद भी वह अपनी सादगी नहीं छोड़ेंगे। मैं बस यह बताने आया था कि आज भी इस धरती पर कुछ लोग जिंदा हैं, जिनकी सहनशक्ति किसी पत्थर या पहाड़ से कम नहीं। 'अगर मैं लिखने बैठ गया तो कोई पढ़ नहीं पाएगा' – जेल के अनुभव पर आजम जेल में बीते समय पर सवाल पूछे जाने पर आजम खान ने कहा कि अगर मुझे वक्त मिला कि मैं कुछ लिख सकूं, तो दावे से कहता हूं — आप पढ़ नहीं पाएंगे। अखिलेश यादव से दूरी के सवाल पर उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब दिल ही कहां रह गया है… कई लोग मुझसे मिलने के बाद रोए हैं। अब हम बिना दिल के काम कर रहे हैं।   'तनखइया' से लेकर 'मुर्गी चोरी' तक का तंज आजम खान ने अपने ऊपर दर्ज मामलों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर तनखइया कहने पर मेरी सदस्यता जा सकती है, अगर मुर्गी चोरी के आरोप में 21 साल की सजा और 30 लाख का जुर्माना हो सकता है, तो दूसरे लोग क्यों माहौल खराब कर रहे हैं?  

फसलों को अब नहीं पड़ेगी प्यास: हरियाणा में शुरू होने जा रहा है खास सिंचाई प्रोग्राम

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार करीब 5,700 करोड़ रुपये की लागत से  ‘वॉटर सिक्योर हरियाणा’ नामक एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इस प्रोजेक्‍ट में करीब 4,000 करोड़ रुपये यानी 500 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद वर्ल्‍ड बैंक से मिलेगी. वर्ल्‍ड बैंक प्रोग्राम फॉर रिजल्ट्स (पीएफओआर) फ्रेमवर्क के तहत इस प्रोजेक्‍ट को आर्थिक मदद मुहैया कराएगा। यह एक छह साल तक चलने वाला कार्यक्रम है जिसकी शुरुआत साल 2026 में शुरू होने की उम्मीद है, जो वर्ष 2032 तक चलेगा. राज्‍य सरकार का कहना है कि यह इंटीग्रेटेड डेटा बेस्‍ड और परफॉर्मेंस ओरियंटेड प्रोग्राम प्रदेश के सिंचाई और वॉटर मैनेजमेंट सिस्‍टम को बदलने में कारगर होगा।   गुरुवार को राज्‍य के अनुराग रस्तोगी ने वर्ल्‍ड बैंक के अधिकारियों के साथ एक मीटिंग की. इस मीटिंग में इस कार्यक्रम को हरियाणा की वॉटर मैनेजमेंट पॉलिसी में एक 'परिवर्तनकारी कदम' बताया।उन्होंने कहा कि इस पहल से साल 2032 तक राज्य को देश का पहला पूरी तरह से जल सुरक्षित प्रदेश बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक मदद मिलेगी। मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्‍ट में सहभागी सिंचाई प्रबंधन (पार्टिसिपेटरी इरिगेशन मैनेजमेंट) का एक खास हिस्‍सा शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने वर्ल्‍ड बैंक टीम से अनुरोध किया कि वह इस सिलसिले में अपने सुझाव  साझा करें।     वर्ल्‍ड बैंक के एक सीनियर ऑफिशियल ने इस पहल को सिर्फ एक सिंचाई परियोजना ही नहीं बल्कि हरियाणा को देश का पहला जल सुरक्षित राज्य बनाने वाला बड़ा कदम बताया है। यह कार्यक्रम 18 जिलों में फैले 14 रणनीतिक सिंचाई क्लस्टरों में सीधे तौर पर लागू किया जाएगा, जो कुल 3,63,546 हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड एरिया (सी सी ए) को कवर करेगा।इसी तर्ज पर बाकी जिलों को नाबार्ड, राज्य बजट या बाकी एजेंसियों के जरिये से शामिल किया जाएगा. हालांकि फिजिकल इंटरफियरेंस खास क्लस्टर्स पर ही केंद्रित रहेंगे, लेकिन योजना और संस्थागत सुधार  के लाभ सभी 22 जिलों तक पहुंचेंगे।   ‘वॉटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम को एक समग्र, बहु विभागीय पहल के रूप में तैयार किया गया है. सरकार का कहना है कि यह एक मॉर्डन इनफ्रास्‍ट्रक्चर, सस्‍टेनेबल कृषि पद्धतियों और समुदाय की भागीदारी को जोड़ता है। इसके तहत 14 रणनीतिक सिंचाई क्लस्टर्स से करीब 1,798 किलोमीटर नहरों का आधुनिकीकरण किया जाएगा. इसमें रियल टाइम डेटा एक्विजिशन सिस्टम (आरटीडीएएस) और सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (एससीएडीए) जैसी आधुनिक ऑटोमेटेड सिस्‍टम शामिल होंगे।दक्षिण हरियाणा के विभिन्न जिलों में लगभग 80 जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जाएगा ताकि भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ किया जा सके। जींद, कैथल और गुरुग्राम के प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जल को फिर से प्रयोग करके करीब 11,500 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाएगी।क्लस्टर बेस्‍ड माइक्रोइरीगेशन सिस्‍टम और जलमार्ग पुनर्वास कार्य वाटर यूजर एसोसिएशनों (डब्ल्यूयूए) की सक्रिय भागीदारी से किए जाएंगे।सिंचाई विभाग और मिकाडा संयुक्त रूप से किसानों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित करेंगे ताकि सामूहिक और स्थायी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

शिक्षकों को अब रोज़ देनी होगी ऑनलाइन उपस्थिति, MP शिक्षा विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश

भोपाल मध्य प्रदेश के तीन लाख से अधिक शिक्षकों व अतिथि शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी पर सख्ती शुरू हो गई है। जबलपुर हाई कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने फिर से सभी जिलों में आदेश कर ऑनलाइन हाजिरी को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों को आदेशित किया गया है कि अगर इस महीने हमारे शिक्षक ऐप से उपस्थिति नहीं लगाई गई तो वेतन में कटौती होगी। प्रदेश के तीन लाख शिक्षकों पर ई-अटेंडेंस की सख्ती शुरू हो गई है। अब नवंबर पेड दिसंबर माह में वेतन शिक्षकों को ई-अटेंडेंस के आधार पर ही मिलेगा। जिन शिक्षकों की ई-अटेंडेंस नहीं लगेगी, उनका वेतन काटा जाएगा। प्रदेश के शिक्षकों की ई-अटेंडेंस प्रणाली को जुलाई से हमारे शिक्षक ऐप के माध्यम से लागू किया है। शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर शिक्षक संगठनों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। इसी को लेकर गेस्ट टीचर को-र्डिनेशन कमेटी ने भी हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। सिंह ने 20 जून 2025 को राज्य सरकार द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत एक जुलाई 2025 से पूरे प्रदेश में शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई थी।   याचिकाकर्ता की ओर हाईकोर्ट में लगी गेस्ट टीचर को-आर्डिनेशन कमेटी ने पीआईएल वापस लेते हुए यह दलील दी गई थी कि ग्रामीण और अंचल क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी में गंभीर कठिनाइयां आ रही हैं। इसके अतिरिक्त कई शिक्षक स्मार्टफोन खरीदने में असमर्थ हैं, जिससे उनके लिए ई-अटेंडेंस दर्ज करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है। विभाग ने आदेशित किया कि ऑनलाइन उपस्थिति नहीं तो वेतन कटौती की जाएगी। बता दें कि प्रदेश के 53 प्रतिशत शिक्षक ही ऑनलाइन हाजिरी लगा रहे हैं। वहीं 51 प्रतिशत प्राचार्य ऑनलाइन हाजिरी लगा रहे हैं। वहीं 90 प्रतिशत से अधिक अतिथि शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इस कारण विभाग ने सख्ती दिखाई है। भोपाल जिले में ई-अटेंडेंस को लेकर जारी हुए आदेश भोपाल जिले के स्कूलों के ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता की सख्ती पर जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने आदेश जारी किए है। जारी आदेश में प्राचायों से कहा गया है कि आपके अपने अधीनस्थ सभी शिक्षकों को ई-अटेंडेंस के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराया जाना सुनिश्चित करें। साथ में प्रतिदिन ई-अटेंडेंस की प्रगति की समीक्षा करें। आगामी माह का वेतन ई-अटेंडेंस के आधार पर ही आहरित किया जाए। शिक्षकों की उपस्थिति के लिए संकुल प्राचार्य एवं संबंधित शिक्षक उत्तरदायी होंगे।

प्रशासन में हड़कंप! पंजाब में ADC सस्पेंड, मामला पहुंचा सरकार तक

मोगा जिले की डिप्टी कमिश्नर पर सख्त एक्शन लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, पंजाब सरकार ने मोगा की एडीसी और नगर कमिश्नर  चारुमिता पर बड़ी कार्रवाई की गई है। जमीन से जुड़े गबन के आरोपों के बाद पंजाब सरकार ने कार्रवाई करते हुए डीसी चारुमिता को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।  सरकारी आदेशों के अनुसार  उप मंडल मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ज.), मोगा और नगर निगम कमिश्नर मोगा को पंजाब सिविल सेवाएं (सजा एवं अपील) नियम 1970 के नियम 4(1) (a) के तहत सरकारी सेवा से सस्पेंड किया गया है। जानकारी के मुताबहिक, सस्पेंड अवधि में अधिकारी को पंजाब सिविल सेवा नियम, भाग I, धारा 1 के नियम 7.2 के प्रावधानों के अनुसार भत्ते प्राप्त होंगे। निलंबन की अवधि के दौरान, अधिकारी का मुख्यालय चंडीगढ़ रहेगा और वह सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना अपना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। 

पहले हफ्ते में ही सर्द हवाओं का कहर, दशक बाद इतनी ठंड

इंदौर हिमालय से आ रही सर्द हवाओं ने पिछले तीन दिनों में आठ डिग्री सेल्सियस तक रात पारा गिराया। यही वजह है कि पिछले दो दिनो से उत्तरी हवाओं के असर से शहरवासियों को अल सुबह व रात में ठंडक का अहसास होने लगा है। गुरूवार की रात इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही है। शुक्रवार को शहर में न्यूनतम तापमान 10.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो पिछले 10 साल में सबसे कम रहा। सामान्यत: नवंबर के आखिरी सप्ताह में न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिलती है। यह पहला मौका है जब नवंबर के पहले सप्ताह में उत्तरी हवाओं ने पारा गिराया है। भोपाल मौसम केंद्र के पास उपलब्ध उपलब्ध आंकड़ों में इंदौर में 25 नवंबर 1938 को सबसे कम 5.6 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम दर्ज किया गया था। इसके अलावा 30 नवंबर 1988 को इंदौर में 7.3 न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया था, जो विगत वर्षो में नवंबर माह में दूसरा सबसे कम तापमान दर्ज हुआ है।     मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इंदौर में अगले एक सप्ताह इसी तरह तापमान में गिरावट बरकरार रहेगी। हिमालय क्षेत्र में इस नवंबर के पहले सप्ताह से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुए हैं। हाल ही में हिमालय क्षेत्र में जो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय था वो काफी मजबूत था। उसके गुजरने के बाद वहां हुई बर्फबारी के असर से उत्तरी व उत्तर पश्चिमी सर्द हवाएं इंदौर सहित पश्चिमी मप्र की ओर आ रही है। इस वजह से इंदौर में दिन के साथ रात के तापमान मे भी गिरावट देखने को मिल रही है। शुक्रवार को इंदौर में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस कम 28.1 डिग्री सेल्सिय दर्ज किया गया। पिछले एक सप्ताह में इस तरह गिरा इंदौर में पारा दिनांक अधिकतम न्यूनतम     1 नवंबर 28.1 19.8     2 नवंबर 30.1 21.6     3 नवंबर 30.0 22.4     4 नवंबर 29.8 20.8     5 नवंबर 30.2 18.2     6 नवंबर 28.3 12.1     7 नवंबर 28.1 10.3 नोट : तापमान डिग्री सेल्सियस में   नवंबर में तापमान व वर्षा उच्चतम अधिकतम तापमान : 5 नवंबर को 1925 को 35 डिग्री सेल्सियस निम्मनम न्यूनतम तापमान : 25 नवंबर 1938 को 5.6 डिग्री सेल्सियस सर्वाधिक कुल मासिक वर्षा : 1946 में 217.4 मिमी

संगीत जगत में शोक की लहर: सुलक्षणा के निधन पर मुख्यमंत्री ने जताया दुख

रायपुर भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री, मधुर स्वर साधिका छत्तीसगढ़ की बेटी सुलक्षणा पंडित के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शोक जताया है। सीएम ने ट्वीट कर कहा, संगीत और अभिनय की उनकी यात्रा की जड़ें छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की उस सांस्कृतिक मिट्टी से जुड़ी थी, जहां संगीत एक परंपरा नहीं एक जीवनधारा है। रायगढ़ की पुरानी बस्ती के रामगुड़ी पारा स्थित अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय में जन्मी सुलक्षणा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायगढ़ के पैलेस रोड स्थित शासकीय बालिका विद्यालय में प्राप्त की। सीएम साय ने कहा, सुलक्षणा के पिता प्रताप नारायण पंडित राजा चक्रधर सिंह के दरबार के प्रसिद्ध तबला वादक थे। उनके परिवार के लिए संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार था और सुलक्षणा जी ने उसी संस्कार को सुरों में ढालकर पूरी दुनिया तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया। सीएम ने कहा, उनकी आवाज में सादगी थी, भाव था और इस मिट्टी की सुगंध थी। छत्तीसगढ़ उनकी इस अमर संगीत यात्रा को नमन करता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दें। बता दें कि सुलक्षणा पंडित 70 के दशक में बॉलीवुड की स्टार थीं। एक्ट्रेस फिल्मों में एक्टिंग के साथ-साथ अपनी बेहतरीन सिंगिंग के लिए भी जानी जाती थीं। उन्होंने सिर्फ 9 साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था। वे 1967 की फिल्म ‘तकदीर’ में लता मंगेशकर के साथ ‘सात समंदर पार से’ गाने से मशहूर हुईं। एक्ट्रेस सुलक्षणा को 1976 में फिल्म संकल्प के गाने ‘तू ही सागर तू ही किनारा’ के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। उन्होंने 1975 में फिल्म उलझन से एक एक्ट्रेस के तौर पर बॉलीवुड में डेब्यू किया था। कहा जाता है कि उस समय एक्ट्रेस सुलक्षणा बॉलीवुड सुपरस्टार संजीव कुमार से प्यार करती थी, लेकिन जब उन्होंने उनका प्रपोजल ठुकरा दिया तो उन्होंने कभी शादी न करने का फैसला किया। उनका आखिरी प्लेबैक गाना फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में था, जो 1996 में रिलीज हुई। इसे उनके भाइयों जतिन और ललित ने कंपोज किया था। 

भारत में टेस्ला की दस्तक: हरियाणा को बड़ा तोहफा, इस जिले को मिला पहला सेंटर

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बृहस्पतिवार को इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माता टेस्ला को राज्य में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि उनकी सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने तथा औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने टेस्ला के प्रतिनिधियों को हरियाणा इलेक्ट्रिक वाहन नीति की एक प्रति भी भेंट की और इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य इस क्षेत्र में तेजी से अग्रणी के रूप में उभर रहा है।  सैनी ने कहा कि हरियाणा में टेस्ला विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने से न केवल कंपनी की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि टेस्ला के इलेक्ट्रिक वाहन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती और सुलभ भी हो जाएंगे।   भारत का पहला एकीकृत टेस्ला सेंटर 27 नवंबर को गुरुग्राम में शुरू होने जा रहा है। यह सेंटर एक ही परिसर में एक्सपीरियंस सेंटर, डिलीवरी हब, सर्विस स्टेशन, ऑफिस स्पेस और सुपरचार्जिंग स्टेशन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा।सीएम ने कहा कि अगर टेस्ला हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करती है, तो इससे न केवल राज्य में औद्योगिक और तकनीकी विकास को गति मिलेगी, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को टेस्ला की गाड़ियां ज्यादा किफायती दामों पर उपलब्ध हो सकेंगी।  

पराली जलाने पर अब नहीं बचेगी ढिलाई, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगी रेड एंट्री

संगरूर/बरनाला धान की पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण रूप से लगाम कसने के लिए, जिला प्रशासन बरनाला हर संभव प्रयास कर रहा है। जिला उपायुक्त (डी.सी.) टी. बेनिथ पिछले एक सप्ताह से रोजाना जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर रहे हैं और पराली जलाने के मामलों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रहे हैं। इसी कड़ी में जब डी.सी. बरनाला टी. बेनिथ गश्त कर रहे थे, तो उन्होंने गांव पक्खो कलां में खेतों में लगी आग देखी। उन्होंने तुरंत फायर इंजन की मदद ली और स्वयं मौके पर जाकर आग बुझाई। इस दौरान, उन्होंने जोर देकर कहा कि जिला बरनाला में किसी भी कीमत पर आग नहीं लगने दी जाएगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।   किसानों पर होगी बड़ी कार्रवाई डी.सी. ने स्पष्ट किया कि जो किसान खेतों में आग लगाएंगे, उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे: * उनकी 'फर्द' (जमीन के रिकॉर्ड/जमाबंदी) में 'लाल एंट्री' (एक प्रकार का प्रतिकूल या नकारात्मक रिकॉर्ड) दर्ज की जाएगी। * उनका चालान काटा जाएगा। * उनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली को आग न लगाएं, बल्कि इसका खेतों में ही उचित प्रबंधन करें, जिससे पर्यावरण को बचाया जा सके। डी.सी. ने कहा कि पराली जलाने पर जीरो टॉलरैंस नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की। उनकी लापरवाही के कारण खेतों में आग लगी, जिसके लिए आज 5 कर्मचारियों को चार्जशीट किया गया है। डी.सी. ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे धान की पराली जलाने के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए जीरो टॉलरैंस नीति का सख्ती से पालन करें। डी.सी. बरनाला ने बताया कि अब तक जिला बरनाला में पराली जलाने के मामलों में 23 पुलिस केस (एफआईआर) दर्ज किए गए हैं। कुल 1.20 लाख रुपए का जुर्माना (चालान) किया गया है। डीसी ने सेखा, झालूर, नंगल, भद्दलवड़, संग्हेड़ा, भोतना, टल्लेवाल, भदौड़, शहना, कोठे गिल, उगोके, ढिलवां, पक्खोके और चीमा सहित कई गांवों का दौरा किया और अधिकारियों व कर्मचारियों से बातचीत कर उन्हें सख्त हिदायतें दीं।