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मुख्यमंत्री ने प्रवासी राजस्थानी दिवस के लिए किया प्रवासी राजस्थानियों को आमंत्रित

जयपुर, मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी जहां भी जाते हैं वहां अपनी संस्कृति, विचार और राजस्थानी मिट्टी की खुशबू बिखेरते हैं। दुनियाभर में प्रवासी राजस्थानी अपने काम के साथ सामाजिक सरोकार के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अनेक अभूतपूर्व निर्णय लिए हैं। उन्होंने प्रवासी राजस्थानियों से अपील करते हुए कहा कि राज्य में उपलब्ध असीमित अवसरों में निवेश कर वे प्रदेश के विकास में साझेदार बनें जिससे एक नए तथा विकसित राजस्थान का निर्माण हो। श्री शर्मा शुक्रवार को हैदराबाद में प्रवासी राजस्थानी मीट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले साल दिसंबर में राज्य सरकार द्वारा राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को प्रवासी राजस्थानी दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में इस साल 10 दिसंबर को जयपुर में प्रथम प्रवासी राजस्थानी दिवस का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रवासी राजस्थानियों को इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रण दिया।  शर्मा ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी दिवस की श्रृंखला की शुरूआत आज हैदराबाद से की गई है। आगे भी देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह की मीट आयोजित की जाएगी जिससे देश और दुनिया में मौजूद प्रवासी राजस्थानी समुदाय के साथ संबंधों को मजबूती मिले। प्रवासी राजस्थानियों के लिए बनेगा विशेष विभाग- मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी दिवस के दौरान शिक्षा, पर्यटन, उद्योग, स्वास्थ्य और जल संचयन जैसे क्षेत्रों के लिए विभिन्न सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार हर साल प्रवासी राजस्थानी सम्मान देगी और विभिन्न अवसरों पर भी सराहनीय कार्य करने वाले प्रवासियों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों के व्यावसायिक और सामाजिक प्रयासों में सहयोग के लिए एक विशेष विभाग का गठन किया जाएगा। प्रवासी राजस्थानियों के लिए हर जिले में बना सिंगल प्वॉइंट कॉन्टेक्ट- श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने राजस्थान फाउंडेशन को सुदृढ़ किया है। इसके तहत पिछले एक साल में 14 नए चैप्टर खोले गए हैं तथा पूर्व के 12 चैप्टर्स में भी अध्यक्षों को मनोनीत कर सभी 26 चैप्टर्स को क्रियाशील किया गया है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के न्यूयॉर्क, लंदन, रियाद जैसे कई बड़े शहरों में राजस्थान फाउंडेशन के चैप्टर सुचारु रूप से चल रहे हैं और इनके जरिए प्रवासी समुदाय राज्य सरकार के साथ राजस्थान की विकास यात्रा के साझेदार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों के परिवारजन के लिए प्रदेश के हर जिले में सिंगल प्वॉइंट कॉन्टेक्ट बनाया गया है तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक जिले में अतिरिक्त जिला कलक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। राजस्थान में निवेश की अपार संभावनाएं- श्री शर्मा ने कहा कि राजस्थान आज विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है। राइजिंग समिट के दौरान 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए गए। अब तक लगभग 7 लाख करोड़ रुपये के एमओयू धरातल पर उतर भी चुके हैं। हम राजस्थान को 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य देश में मौजूदा हाईवेज का तीसरा एवं रेलवे का पांचवां सबसे बड़ा नेटवर्क है। राजस्थान में सात प्रमुख हवाई अड्डे हैं और दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा हमारे प्रदेश से गुजरता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए 20 से ज्यादा नई नीतियां बनाई गई हैं। साथ ही, कई नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए जा रहे हैं। पचपदरा के रिफाइनरी भी इसी वर्ष शुरू होने जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1 हजार 232 निवेशकों को भूमि उपलब्ध करवाई गई है तथा 17 गीगावाट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 34 हजार हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है जो निवेश को धरातल पर उतारने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है।       ऊर्जा-पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में राज्य सरकार ले रही अभूतपूर्व निर्णय- मुख्यमंत्री ने कहा कि कल 25 सितंबर को ही यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के माही-बांसवाड़ा में 2 हजार 800 मेगावाट क्षमता की 42 हजार करोड़ रुपए लागत वाली न्यूक्लियर पावर परियोजना का शिलान्यास किया है। बैटरी स्टोरेज, पंप स्टारेज, रूफटॉप सोलर, पीएम कुसुम के तहत विकेंद्रीकृत सोलर प्रोजेक्ट सहित ऊर्जा के हर क्षेत्र में राज्य ने एक नई पहल की है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में प्रतिवर्ष करोड़ों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। राजस्थान का हर कोना, अपनी समृद्ध धरोहर, प्रकृति, संस्कृति और विविधताओं का दर्शन करवाता है। पर्यटन निवेश में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने भूमि आवंटन हेतु न्यूनतम निवेश को 100 करोड़ रुपये से घटाकर 50 करोड़ रुपये कर दिया है। इस संशोधन से हेरिटेज, वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के साथ-साथ घरेलू निवेशकों को भागीदारी का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमने रिप्स-2024 में स्टैंडर्ड सर्विसेज पैकेज के तहत इन्सेंटिव के लिए पर्यटन में निवेश की न्यूनतम सीमा 50 करोड़ रुपये से घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दी है। श्री शर्मा ने प्रदेश में खनन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान खनिज नीति तथा राजस्थान एम-सैंड पॉलिसी लॉन्च की है। साथ ही, खनिजों के ब्लॉकों की नीलामी में अभूतपूर्व तेजी आई है। उन्होंने कहा कि जयपुर और जोधपुर में अत्याधुनिक टियर-4 डाटा सेंटर स्थापित किए गए हैं तथा शीघ्र ही नई सेमीकंडक्टर पॉलिसी भी आने वाली है। प्रदेश में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, वस्त्र, चिकित्सा उपकरण, रक्षा उपकरण, खाद्य प्रसंस्करण सहित सभी क्षेत्रों में निवेश के लिए बेहतरीन अवसर हैं। कार्यक्रम में प्रवासी राजस्थानियों द्वारा अपने अनुभव भी साझा किए गए। मुख्यमंत्री ने इस दौरान सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रवासी राजस्थानियों को सम्मानित किया तथा राजस्थानी फाउंडेशन चैप्टर मेंबरशिप की भी लॉन्चिंग की। इससे पहले कार्यक्रम में प्रवासी राजस्थानियों पर एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। इस अवसर पर उद्योग राज्यमंत्री के के बिश्नोई, श्रम विभाग के शासन सचिव  पी. रमेश, राजस्थान फाउंडेशन की आयुक्त श्रीमती मनीषा अरोड़ा, प्रवासी समुदाय से ऑल इंडिया मारवाड़ी युवा मंच के नेशनल प्रेसिडेंट  सुरेश एम जैन, हैदराबाद चैप्टर प्रेसिडेंट  पवन बंसल, सीआईआई तेलंगाना के पूर्व चेयरमैन  साई डी प्रसाद सहित बड़ी … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 57 हजार ग्राम प्रधानों और सदस्यों से वर्चुअल संवाद

  आज उत्तर प्रदेश सुशासन, बेहतर कानून-व्यवस्था, स्थिरता और शांति का पर्याय बन चुका है: मुख्यमंत्री विकसित यूपी अभियान के बारे में ग्राम प्रधानों को किया जागरूक, कहा; पंचायत की खुली बैठक में करें चर्चा, हर प्रदेशवासी का सुझाव अमूल्य प्रत्येक जनपद के तीन और प्रदेश स्तर पर 05 सर्वोत्तम सुझावों को पुरस्कृत किया जाएगा अगले 04 वर्षों में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक प्रदेश होगा: मुख्यमंत्री लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' की परिकल्पना को साकार करने में गांवों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। अगर गांव समृद्ध और आत्मनिर्भर होंगे, तो प्रदेश भी आत्मनिर्भर बनेगा और जब प्रदेश आत्मनिर्भर होगा तो विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश का संकल्प पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता। मुख्यमंत्री शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के 57 हजार ग्राम प्रधानों और सदस्यों से संवाद कर रहे थे। यह संवाद नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने ग्राम प्रधानों को विकसित यूपी@2047 के संकल्पों से परिचित कराते हुए उनसे इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। इस दौरान ग्राम प्रधानों को विकसित यूपी@2047 अभियान के बारे में जानकारी देने वाली एक वीडियो फ़िल्म भी दिखाई गई और क्यूआर कोड तथा पोर्टल के माध्यम से सुझाव देने के तरीके से अवगत भी कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। जब देश की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होंगे, तब भारत को विश्व की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करना हम सबका साझा लक्ष्य है। इस महान लक्ष्य की प्राप्ति में ग्राम पंचायतों और ग्राम प्रधानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आजादी के अमृतकाल के लिए प्रधानमंत्री जी ने 'पंच प्रण' लिए हैं, हर नागरिक इनको अपने जीवन मे उतारे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का स्पष्ट संदेश है कि यदि गांव सशक्त होंगे तो भारत सशक्त होगा और यदि भारत सशक्त होगा तो विश्व मंच पर उसका नेतृत्व सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पिछड़ेपन और अव्यवस्था के बोझ तले दबा हुआ था। किसान कठिन परिस्थितियों में परिश्रम करते थे, लेकिन सिंचाई, तकनीक और विपणन की सुविधाएँ सीमित थीं। बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें अधूरी थीं। युवाओं के पास रोजगार के अवसर नहीं थे। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और भेदभाव सरकारी व्यवस्थाओं में गहराई तक जकड़े हुए थे। पलायन की पीड़ा आम परिवारों को झेलनी पड़ती थी और गरीबी के कारण बच्चों की असमय मौतें होती थीं। लेकिन बीते आठ वर्षों में प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। प्रधानमंत्री जी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र ने उत्तर प्रदेश की दिशा और दशा को नई पहचान दी है। आज उत्तर प्रदेश सुशासन, बेहतर कानून-व्यवस्था, स्थिरता और शांति का पर्याय बन चुका है। 07 वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 35 लाख करोड़ रुपए हो रही है। प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपये से बढ़कर 01 लाख 20 हजार रुपये हो गई है। इन 08 वर्षों में 'नए भारत के नए उत्तर प्रदेश' का निर्माण हुआ है और अब अगले 04 वर्षों में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक प्रदेश होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तय किया गया है। इसमें तीन प्रमुख थीम रखी गई हैं; अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति। अर्थ शक्ति के अंतर्गत कृषि, उद्योग, निवेश और पर्यटन को नई गति दी जाएगी। सृजन शक्ति के तहत आधुनिक बुनियादी ढाँचा और हरित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं जीवन शक्ति का लक्ष्य एक स्वस्थ, शिक्षित, सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण है। इसके तहत 12 सेक्टर निर्धारित किये गए हैं। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति में ग्राम प्रधानों की भूमिका सबसे अहम है क्योंकि लोकतंत्र की प्रथम पंक्ति के प्रतिनिधि होने के नाते वे ही इस महाअभियान के सच्चे शिल्पकार और अग्रिम सेनानी हैं। उन्होंने कहा कि आपके सुझावों के आधार पर एक विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा, जो अगले 22 वर्षों में विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा और रोडमैप तय करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों से आह्वान किया कि वे अपनी पंचायत की बैठकों में विकसित उत्तर प्रदेश के इस अभियान पर चर्चा करें, गांव-गांव, वार्ड-वार्ड और मोहल्लों में लोगों को जोड़ें और समर्थ पोर्टल पर अधिक से अधिक सुझाव दिलाएँ। ग्राम प्रधानों को भेजे गए पत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे पंचायत की खुली बैठक में जरूर पढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद के तीन और प्रदेश स्तर पर 05 सर्वोत्तम सुझावों को पुरस्कृत किया जाएगा। आने वाली पीढियां आपके सुझावों पर गर्व करेगी। उन्होंने कहा कि जब करोड़ों लोगों की ऊर्जा इस यात्रा से जुड़ेगी, तब विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना एक विराट जन-आंदोलन के रूप में साकार होगा। उन्होंने ग्राम प्रधानों से आग्रह किया कि वे ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की राह पर आगे बढ़ें और विकसित भारत 2047 के स्वप्न को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएँ।  

स्वदेशी उत्पादों को अपनाना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शुक्रवार को उप नगर ग्वालियर के घासमंडी से कपूर बाबा तक के बाजार में कारोबार करने वाले छोटे-मझौले कारोबारियों से संवाद करते हुए स्वदेशी अपनाने तथा जीएसटी की नई दरों के बारे में चर्चा की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने दुकानदारों एवं स्थानीय नागरिकों से बातचीत कर उन्हें स्वदेशी उत्पादों के उपयोग के लाभों और कर प्रणाली में हाल ही में लागू की गई नई दरों के संबंध में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने चुनरी तथा अन्य किराने की सामग्री भी खरीदी। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना न केवल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों, लघु उद्योगों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करें और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करें। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि दरों में किए गए संशोधन का उद्देश्य आम जनता की सुविधा और व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल कर प्रणाली के माध्यम से प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता और लोगों की सक्रिय भागीदारी से ही स्वदेशी अपनाओ अभियान को व्यापक सफलता मिलेगी और देश, राज्य तथा ग्वालियर शहर की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” का मंत्र अपनाकर “मेक इन इंडिया” उत्पादों को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का आग्रह किया। रक्तदान शिविर में हुए शामिल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर संत रविदास मंडल द्वारा कोणार्क हॉस्पिटल, शिंदे की छावनी, ग्वालियर में आयोजित रक्तदान शिविर में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल जीवन बचाने का कार्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और मानवता की सेवा है। उन्होंने आव्हान किया कि हम सभी इस नेक पहल में आगे आएं और इस जीवनदायिनी सेवा का हिस्सा बनें।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया “मेक-इन-सिलिकॉन” पोस्टर और वेबसाइट का शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में “मेक-इन-सिलिकॉन: राष्ट्रीय सिंपोजियम ऑन एनेबलिंग इंडिजिनस सेमीकंडक्टर इन्फ्रास्ट्रक्चर” के पोस्टर और आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया। यह संगोष्ठी भारत में सेमीकंडक्टर मिशन को नई दिशा देने और देश में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की पहल है। ट्रिपल आईटी-नया रायपुर के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश व्यास  ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी 7–8 नवम्बर 2025 को ट्रिपल आईटी-नया रायपुर में आयोजित होगी। इसमें देशभर के विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल होंगे। संगोष्ठी का उद्देश्य भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर व्यवस्था को मज़बूत बनाने के लिए ठोस रणनीति बनाना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों को मिलकर नवाचार करना होगा और नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उनके अनुसार, स्वदेशी सेमीकंडक्टर अधोसंरचना ही भारत की डिजिटल और आर्थिक मजबूती की नींव है। यह आयोजन भारत सरकार के “सेमीकंडक्टर इंडिया मिशन” और छत्तीसगढ़ सरकार की तकनीकी आत्मनिर्भरता की सोच के अनुरूप है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेंगे। इस अवसर पर संयोजक डॉ. मनोज मजूमदार, डॉ. दीपिका गुप्ता और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित थे।  

दशहरा गिफ्ट: यूपी के लाखों छात्रों के खाते में पहुंचे ₹89.96 करोड़, सीएम योगी ने किया ट्रांसफर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने 26 सितंबर, शुक्रवार को 3. 96 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति का तोहफा दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टूडेंट्स से अपील की है कि वह इस छात्रवृत्ति का उपयोग अपनी पढ़ाई लिखाई के लिए करें. सीएम ने कहा कि हम लोगों ने 2025-26 में वंचित वर्गों को ₹2,825 करोड़ की छात्रवृत्ति अब तक वितरित की है. राजधानी लखनऊ में आयोजित वितरण कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए कम्प्यूटर प्रशिक्षण की व्यवस्था को भी ₹11 करोड़ से बढ़ाकर ₹35 करोड़ किया है सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा की एक बड़ी भूमिका है. आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में वंचितों को स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था के साथ जोड़कर उत्तम और बेहतरीन शिक्षा के माध्यम से उनके विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है. शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आज लखनऊ में छात्रवृत्ति वितरण समारोह के अंतर्गत 3 लाख 96 हजार से अधिक विद्यार्थियों को ₹89. 96 करोड़ की धनराशि का हस्तांतरण किया. सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय शुभकामनाएं! सीएम ने छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में एक संबोधन के दौरान कहा कि हमें बंटना नहीं है, हम एकजुट रहकर बेहतर शिक्षा के लिए हर छात्र को स्कूल तक पहुँचाना है. याद रखना इन विभाजनकारी ताकतों ने देश को गुलाम बनाया था. अब नए भारत के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जो काम चल रहा है. उस आत्मनिर्भर विकसित भारत के लिए जो अभियान चल रहा है उसके लिए ये फिर से बाधक बन रही हैं. सीएम ने कहा कि कुछ ताकतें समाज को बांटने का काम कर रही हैं. हमारा प्रयास होना चाहिए. हमको बंटना नही है. हमे एकजुट होकर बेहतर शिक्षा के लिए हर छात्र को स्कूल पहुंचाना है. हर वंचित को स्कूली शिक्षा के साथ जोड़ना है. आज सरकार हर कार्य कर रही है. समाज कल्याण विभाग द्वारा अनेक कार्य हो रहे हैं. पहले हजारों बच्चे इससे वंचित रह जाते थे – सीएम योगी सीएम ने दावा किया कि पहले स्कॉलरशिप में भेद भाव होता था. मार्च अप्रैल तक आती थी. अब यह सितंबर महीने में ही मिलने जा रही है. आज सीधे छात्रों के खाते में छात्रवृत्ति जाती है. पहले हजारों बच्चे इससे वंचित रह जाते थे. उन्होंने कहा कि यह वर्ष शताब्दी संकल्प वर्ष चल रहा है. शताब्दी वर्ष में हम 2047 के संकल्प अभियान को लेकर चल रहे हैं. विकसित भारत का विकसित उत्तरप्रदेश की नींव अभी से रखनी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार छात्रवृत्ति योजना में वृद्धि कर रही है. तकनीकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से वेरिफिकेशन, डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरण हो रहा है. सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है. अल्पसंख्यक छात्रों को भी उच्च सुविधा दी जा रही है. सीएम ने कहा कि बाबा साहेब कहते थे कि जब तक हम अच्छी शिक्षा नही लेंगे. कोई सरकार कल्याण नही कर सकती. सरकार पर आश्रित नही रहकर सरकार की बेहतर सुविधाओ को उपयोग करते हुए आगे बढ़ना होगा. वो सभी महापुरुष जिन्होने अपनी प्रतिभा से समाज को दिशा दी वो किसी के मोहताज थे. उन्होंने अपने प्रतिभा से समाज का मार्गदर्शन किया.  

मध्यप्रदेश को रेलवे में बड़ी सौगात: 2500 करोड़ की लागत से तैयार हो रही तीसरी लाइन

भोपाल  मध्य प्रदेश में रेलवे ढांचे को मजबूती देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया है। इटारसी–आमला सेक्शन (Itarsi–Amla Third Line) पर तीसरी रेल लाइन का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। करीब 130 किलोमीटर लंबे इस रूट पर मिट्टी का बेस तैयार होने के बाद अब अन्य निर्माण कार्य शुरू हो गए हैं। हालांकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी की वजह से नर्मदापुरम और बैतूल जिले में यह प्रोजेक्ट लेट से शुरू हो पाया। किसानों की जमीन अधिग्रहित तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए बैतूल जिले के 3 तहसीलों के लगभग 40 गांव प्रभावित हुए हैं। यहां करीब 290 किसानों की 16 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन अधिग्रहित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि लाइन पूरी तरह तैयार होने के बाद इस रूट पर ट्रेन संचालन और सुगम हो जाएगा। घाट सेक्शन बना चुनौती यह पूरा रेल मार्ग घाट सेक्शन से होकर गुजरता है। ऐसे में अभी ट्रेनों के संचालन में कई दिक्कतें आती हैं। इसी कारण परियोजना में चार स्थानों पर सुरंग भी बनाई जाएगी, जिनकी कुल लंबाई 1.40 किलोमीटर होगी। प्रोजेक्ट का दायरा इटारसी से नागपुर तक 267 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर तीसरी लाइन बिछाई जाएगी। इस पूरे ट्रैक पर 27 रेलवे स्टेशन और 361 पुल-पुलिया शामिल होंगे। पीपलढ़ाना और मरामझिरी इलाके में अंडरपास का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। क्यों जरूरी है तीसरी लाइन? अभी नागपुर–इटारसी सेक्शन में केवल दो लाइनें हैं। इन पर एक साथ यात्री और मालगाड़ियां चलाई जाती हैं। कई बार यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देने के लिए मालगाड़ियों को घंटों तक रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन के बाद दोनों तरह की ट्रेनों का संचालन बिना बाधा के हो सकेगा और यात्रियों को समय पर ट्रेनें मिलेंगी। लागत और प्रगति पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 2525 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। भोपाल–इटारसी सेक्शन पर तीसरी लाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब इटारसी–नागपुर सेक्शन पर समानांतर लाइन बिछाने का कार्य तेजी से चल रहा है। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद न सिर्फ यात्रियों को समय की बचत होगी, बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही भी ज्यादा प्रभावी ढंग से हो पाएगी।

विकसित यूपी@2047 संवाद शृंखला में ग्राम प्रधानों के अनुभवों ने दिखाई नये उत्तर प्रदेश की तस्वीर

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश के गाँव अब सिर्फ बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे, बल्कि बदलाव की जीती-जागती मिसाल बन गए हैं। विकसित यूपी@2047 संवाद शृंखला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुए वर्चुअल संवाद में ग्राम प्रधानों ने बताया कि बीते आठ वर्षों में जिस विकास को उन्होंने देखा, वह कभी सिर्फ एक सपना था। आज वही सपना हकीकत बनकर गाँव-गाँव में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भर रहा है। श्रावस्ती जिले के इकौना विकास खंड की ग्राम पंचायत टड़वा महंत के प्रधान शिवकुमार राजभर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के अभियान से पूरा गांव जुड़ गया है। उन्होंने उत्साहित होकर बताया कि मुख्यमंत्री जी अगले दिन उनके गांव आ रहे हैं और हर घर में उल्लास का माहौल है। इसी उत्साह की झलक कौशांबी जिले में भी दिखी। मंझनपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत उखैया खास की प्रधान सीमा निर्मल ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। उन्होंने कहा कि पंचायत की बैठकों का संचालन वह स्वयं करती हैं और बीसी सखी गांव-गांव जाकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं। बरेली जिले की बिथरी चैनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भरतौल की प्रधान प्रवेश ने कहा कि उनके गांव में सबसे पहले मॉडल राशन की दुकान खोली गई थी। आज भरतौल मॉडल ग्राम के रूप में जाना जाता है और गांव की महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार काम कर रही हैं। इसके बाद अलीगढ़ जिले की गोंडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत तलेसरा के प्रधान गजेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को अपने गांव की ऐतिहासिक विरासत से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उनके गांव से 13 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जुड़े हैं और उनकी स्मृति में स्टेडियम व अमृत सरोवर बने हैं। साथ ही ग्राम सचिवालय, बैंक्वेट हॉल और स्कूल में स्मार्ट क्लास जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मौजूद हैं। अयोध्या जिले के सोहावल विकास खंड की ग्राम पंचायत सनाहा की प्रधान रीना पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा संचालित सभी योजनाएं उनके गांव में लागू हैं। उन्होंने विशेष रूप से कूड़ा निस्तारण व्यवस्था का उल्लेख किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने इसे विकसित यूपी की ठोस नींव बताया। बाँदा जिले के बड़ोखर खुर्द ब्लॉक की ग्राम पंचायत दुरेड़ी के प्रधान देवीदयाल सिंह ने गर्व से बताया कि उनकी पंचायत को मुख्यमंत्री पंचायत पुरस्कार योजना के तहत 36 लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। उन्होंने उत्साहपूर्वक विकसित यूपी के तीन आयाम 'अर्थ शक्ति, जीवन शक्ति और सृजन शक्ति' के बारे में भी मुख्यमंत्री को बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि पंचायत के सभी आठ विद्यालयों में स्मार्ट क्लास चल रहे हैं। शाहजहाँपुर जिले की भवालखेड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान जय प्रकाश ने कहा कि उनके गांव को दो बार मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार मिला है। उन्होंने गांव में स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियों की जानकारी दी और कहा कि इन समूहों ने गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। ग्राम प्रधान ने जोर देते हुए मुख्यमंत्री को बताया कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने उनके गांव के विकास में बड़ा योगदान किया है। रामपुर जिले के चमरौआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत कोयला के प्रधान भूकन लाल ने बताया कि उनकी पंचायत की आबादी 7700 है और हर परिवार तक विकास पहुंचाने के लिए योजनाएं लागू की जा रही हैं। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, इंटर कॉलेज, बैंक, डाकखाना और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने कूड़ा संग्रहण और निस्तारण व्यवस्था की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी। इन सभी संवादों ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के गांव अब आत्मनिर्भरता, स्वच्छता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की नई कहानियां लिख रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों की सक्रियता और जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि यही प्रयास विकसित यूपी @2047 के लक्ष्य को पूरा करने की वास्तविक शक्ति हैं।

मिग-21 का गौरवपूर्ण अंत, एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने भरी आखिरी उड़ान

    चंडीगढ़ भारतीय वायुसेना में शामिल पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21 का आज चंडीगढ़ एयरबेस पर भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस जेट में आखिरी उड़ान एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने भरी। अब यह ऐतिहासिक विमान आसमान के बजाय म्यूजियम में स्थायी रूप से रखा जाएगा। इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मिग-21 विमान ने 62 वर्षों तक भारत और रूस के बीच गहरे सैन्य सहयोग को दर्शाया है। उन्होंने बताया कि यह जेट 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल संघर्ष, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर तक भारत की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। मिग-21 की पहली लैंडिंग 1963 में चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर हुई थी और उसी वर्ष अम्बाला में इसकी पहली स्क्वॉड्रन भी बनी थी। इसका निकनेम 'पैंथर' या 'तेंदुआ' था।  25 अगस्त 2025 को बीकानेर से भरी थी आखिरी उड़ान  रूसी मूल के इस विमान ने 25 अगस्त को राजस्थान के बीकानेर स्थित वायुसैनिक अड्डे से अपनी आखिरी उड़ान भरी। छह दशकों तक भारतीय वायुसेना का अभिन्न हिस्सा रहे मिग-21 का ‘बाइसन संस्करण’ आधुनिक तकनीक से लैस था। मिग-21 के हादसों का काला इतिहास: ‘उड़ता ताबूत’ के नाम से विख्यात मिग-21 के आखिरी वर्षों में हुए 300 से अधिक हादसों में 170 से अधिक भारतीय पायलट और 40 नागरिक मारे गए। इसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ यानी ‘उड़ता ताबूत’ भी कहा गया। 1966 से 1984 के बीच बने 840 विमानों में से आधे से अधिक हादसों में खो गए। पिछले चार वर्षों में भी सात मिग-21 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कई पायलटों की जान गई। प्रमुख दुर्घटनाएं     5 जनवरी 2021, सूरतगढ़ (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित     17 मार्च 2021, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) – ग्रुप कैप्टन की मौत     20 मई 2021, मोगा (पंजाब) – पायलट की मृत्यु     25 अगस्त 2021, बाड़मेर (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित     25 दिसंबर 2021, राजस्थान – पायलट की मृत्यु     28 जुलाई 2022, बाड़मेर (राजस्थान) – दो पायलटों की मौत     8 मई 2023, हनुमानगढ़ (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित मिग-21 की विदाई भारतीय वायुसेना के एक युग के समापन का प्रतीक है और यह विमान हमेशा वीरता, साहस और देशभक्ति का प्रतीक बना रहेगा।

तन, मन, धन और सबसे ऊपर वन : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

सेवा पखवाड़े के तहत शाहपुरा मण्डल में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने किया पौधरोपण प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मां के नाम से एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भोपाल के शाहपुरा मण्डल में सेवा पखवाड़े के तहत आयोजित एक पेड़ मां के नाम पौधरोपण में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जिस पार्क में हम पौधरोपण कर रहे हैं, इस पार्क में हमें टेंट लगाने की कोई जरूरत महसूस नहीं हो रही हैं, क्योंकि इस परिसर के चारों ओर बड़े-बड़े वृक्ष लगे हैं। यदि यह वृक्ष नहीं होते तो यहां टेंट लगाना हमारी मजबूरी होती। वृक्षों की घनी छाया के नीचे हम बैठकर चर्चा कर रहे हैं, यह पौधरोपण की ताकत है। इसीलिए कहा गया है कि तन, मन, धन और सबसे ऊपर वन। उन्होंने आहवान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मां के नाम से एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 2 अक्टूरबर तक प्रदेश में सेवा पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने शाहपुरा मण्डल स्थित पार्क में पौधरोपण किया। पौधरोपण कर स्थानीय नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आहवान एक पेड़ मां के नाम पर पौधारोपण पर आज पूरा देश बड़े ही उत्साह के साथ पेड़ लगा रहा है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि स्वदेशी अपनाने का जो अभियान चल रहा है, इसका लक्ष्य है कि एक दिन भारत विश्व गुरू बने। सेवा पखवाड़ा के तहत जितने भी अभियान चल रहे हैं उन सभी अभियानों को हम सभी को मिलकर सफल बनाना है। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिक एवं अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।  

वंदे भारत एक्सप्रेस का हरियाणा को तोहफा, अब महेंद्रगढ़ स्टेशन पर भी रुकेगी ट्रेन

 महेंद्रगढ़   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर इस ट्रेन को बीकानेर से रवाना किया। यह वंदे भारत एक्सप्रेस बीकानेर से दिल्ली तक 448 किलोमीटर की दूरी मात्र 6 घंटे 15 मिनट में तय करेगी। वंदे भारत एक्सप्रेस हरियाणा के महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी, जिससे हरियाणा के लोगों के लिए दिल्ली और राजस्थान जाना और भी आसान हो जाएगा। इसके अलावा, यह ट्रेन हरियाणा से राजस्थान के प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों तक सीधी, तेज और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराएगी। महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस का जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर, लोहारू से ट्रेन में सवार होकर आए महेंद्रगढ़-भिवानी लोकसभा क्षेत्र से सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह ने स्टेशन पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया। हरियाणा में महेंद्रगढ़ सहित कुल चार रेलवे स्टेशनों पर इस ट्रेन के ठहराव की मंजूरी दी गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस नई सुविधा से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। खासकर दिल्ली और बीकानेर तक छात्रों और कारोबारियों की आवाजाही तेज और सुगम होगी। महेंद्रगढ़ स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में कई राज्यों से छात्र अध्ययन करते हैं, जिन्हें अब यात्रा में बड़ी सुविधा मिलेगी। वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 608 सीटों की व्यवस्था वंदे भारत एक्सप्रेस पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस है। सभी कोच वातानुकूलित हैं और इनमें इलेक्ट्रिक आउटलेट, रीडिंग लाइट, सीसीटीवी कैमरे, स्वचालित दरवाजे, बायो-वैक्यूम शौचालय, सेंसर आधारित पानी के नल और यात्री सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ट्रेन में दो टीटी, दो क्रू मेंबर और एक गार्ड यात्रियों की सेवा के लिए तैनात रहेंगे। 608 सीटों में से 52 सीटें एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए और बाकी चेयर कार कोच में 44 से 78 सीटें होंगी।