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जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता—जानें पूरी सूची

लखनऊ यूपी निर्वाचन आयोग ने बुधवार को बहुप्रतिक्षीत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इसमें कुल 12.58 करोड़ मतदाता हैं। पुनरीक्षण में 29 लाख के नाम बढ़े हैं और 2.03 करोड़ के नाम सूची से काटे गए हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा 36.97 लाख और गौतमबुद्धनगर में सबसे कम 2.09 लाख मतदाता हैं। पहली बार सभी मतदाताओं के स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किए गए हैं। चुनाव में फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की मदद से फर्जी वोटिंग रोकी जाएगी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब फर्जी मतदान करना संभव नहीं होगा। फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से मतदाताओं की फोटो खींचकर उसका तुरंत पूरा ब्योरा चेक किया जाएगा। इससे पहले किस मतदान किया है, तो तुरंत पकड़ा जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग तकनीक के प्रयोग से फर्जी मतदान को रोकेगा। नई सूची में 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी की। वर्ष 2021 की मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे। वर्ष 2025-26 की मतदाता सूची में 12.58 करोड़ मतदाता हैं। नई मतदाता सूची में कुल 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। मृतक व स्थानांतरित इत्यादि 2.03 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। ऐसे में 29.01 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची में बढ़े हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता जौनपुर में सबसे अधिक 36.97 लाख, दूसरे नंबर पर आजमगढ़ में 35.76 लाख व तीसरे नंबर पर प्रयागराज में 34.95 लाख मतदाता हैं। सबसे कम गौतमबुद्धनगर में 2.09 लाख मतदाता हैं। सबसे कम मतदाता वाले जिलों में दूसरे नंबर पर महोबा में 5.88 लाख व तीसरे नंबर पर चित्रकूट में 7 लाख मतदाता हैं। ब्लॉक प्रमुखों का 19 जुलाई को खत्म होगा कार्यकाल ग्राम प्रधानों के बाद जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई व ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। तब तक अगर चुनाव न हुए तो इनका भी कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद इसकी मांग भी तेज हो गई है। ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल थे 12.69 करोड़ वोटर राज्य निर्वाचन आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी, इसमें कुल 12.69 करोड़ मतदाता शामिल थे। इसके बाद मतदाताओं को दावे व आपत्तियों का समय दिया गया और अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किया गया है।

WDFC बना लॉजिस्टिक्स गेमचेंजर: तेज माल परिवहन, कम लागत और नए रोजगार के अवसर

 जयपुर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के माध्यम से देश-प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से फास्ट्रेक पर दौड़ रहा है। इस कॉरिडोर से रेल आधारित लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता में बड़ा सुधार आ रहा है। कॉरिडोर में विशेषकर रेल-पर-ट्रक की सेवा से माल का आवागमन अधिक तेज और सुगम बना है। यह कॉरिडोर राजस्थान में आर्थिक विकास को गति देने एवं रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा सामाजिक बदलाव लाने को तैयार है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से दादरी तक फैले इस वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लम्बाई 1 हजार 506 किमी. एवं लागत 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। कॉरिडोर का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है। यह कॉरिडोर राजस्थान को भारत के उत्तरी एवं पश्चिमी बाजारों तक बेहतर संपर्क प्रदान करता है। कॉरिडोर के अंतर्गत जेएनपीटी से न्यू सफाले (वेतरणा) सेक्शन पर हाल ही में सफलतापूर्वक ट्रायल रन हो चुका है। इसके साथ ही, इस कॉरिडोर का काम पूर्ण हो चुका है। वहीं, कई सेक्शन में माल परिवहन पहले से ही प्रारंभ है। अजमेर में 1.5 मिलियन टन क्षमता का कार्गो टर्मिनल शुरू- यह कॉरिडोर राजस्थान के सीकर, रींगस, फुलेरा, ब्यावर, सिरोही से होकर गुजर रहा है। जिससे इन जिलों के साथ-साथ अन्य स्थानों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। हाल ही में अजमेर के सराधना में नए गतिशक्ति मल्टी मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन हुआ है। इस टर्मिनल में आधुनिक कार्गो हैंडलिंग अवसंरचना, वेयरहाउसिंग सुविधाएं तथा निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उद्योगों एवं व्यापारियों के लिए माल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित एवं किफायती होगा। यह टर्मिनल प्रति माह लगभग 40 रेक (लगभग 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष) कार्गो हैंडल करने में सक्षम होगा, जिसमें मार्बल, ग्रेनाइट, खनिज तथा अन्य वस्तुएं शामिल हैं। यानि किशनगढ़ के मार्बल को कॉरिडोर के उच्च गति माल परिवहन नेटवर्क के माध्यम से जेएनपीटी, पीपावाव एवं मुंद्रा बंदरगाहों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लोकल फॉर ग्लोबल का संकल्प साकार होगा। ट्रेन की लम्बाई लगभग दोगुनी, रफ्तार डेढ़ गुना से अधिक- यह कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ ही माल परिवहन को तेजी से बढ़ाने की दीर्घकालिक पहल है। सामान्य कॉरिडोर की तुलना में 66 प्रतिशत वृद्धि के साथ इस कॉरिडोर की ऊंचाई 7.1 मीटर और 14 प्रतिशत वृद्धि के साथ चौड़ाई 3,660 एमएम रखी गई है। ट्रेन की लम्बाई 1500 मीटर है, जबकि सामान्य कॉरिडोर में 700 मीटर ही होती है। वहीं, डबल कन्टेनर स्टेक और 2.4 प्रतिशत ट्रेन लोड की क्षमता भी इस कॉरिडोर में उपलब्ध है। इस कॉरिडोर में ट्रेन की रफ्तार भी औसतन 25 किमी. से बढ़ाकर 65 किमी. प्रति घण्टे की गई है।  रेल-पर-ट्रक की सुविधा, डीजल की खपत कम- डब्ल्यूडीएफसी की सबसे बड़ी विशेषता रेल-पर-ट्रक (टीओटी) सेवा है। यह रेलवे की दीर्घकालिक माल परिवहन परिवर्तन रणनीति के हिस्सा के रूप में बनाई गई है, जो बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स को सक्षम बनाता है। इस सेवा के तहत माल से लदे ट्रकों को विशेष रूप से संशोधित फ्लैट वैगनों पर समर्पित माल ढुलाई गलियारा के माध्यम से ले जाया जाता है। यह रेल-पर-ट्रक सेवा राजमार्गों की भीड़भाड़ को कम करने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागतों को अनुकूलित करने में मदद करती है। इससे डीजल की खपत घटती है और सड़क अवसंरचना की क्षति में कमी आती है। टीओटी सेवा किसानों और उद्यमियों के लिए लाभकारी है। यह उन्हें अपनी फसलों और उत्पादों का तेजी से परिवहन करने की सुविधा प्रदान करती है। जैसे सीकर के प्याज को खेतों से नजदीकी टीओटी टर्मिनलों तक ले जाया जा सकता है, इसे समर्पित माल ढुलाई गलियारे के माध्यम से तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है, और सड़क मार्ग से दूर के उपभोक्ता केंद्रों तक न्यूनतम रख-रखाव और समय हानि के साथ पहुंचाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसमें पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत दादरी से जीएनपीटी एवं पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत लुधियाना से डंकुनी तक जोड़ा गया है। यह परियोजना देश का लगभग 70 प्रतिशत माल परिवहन करने के उद्देश्य से बनाई गई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ 150 किलोमीटर का प्रभाव क्षेत्र दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र और जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं

12 वर्ष की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएगी सरकार, देशभर में लगेंगे जन कल्याण शिविर

करनाल. एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि सरकार के 12 वर्षों के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने के लिए 20 जून तक जिला में विशेष प्रचार एवं जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से जन कल्याण शिविर, जन प्रतिनिधियों द्वारा अपने लोकसभा एवं विधानसभा में एक दिन व्यतीत करना, प्रदर्शनी, पौधा रोपण, विशेष स्वच्छता अभियान एवं रोजगार मेले आदि शामिल हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारी आपसी तालमेल बनाते हुए जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। एडीसी डा. राहुल रईया ने इस विशेष अभियान के संबंध में अधिकारियों को बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इससे पहले मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों को विशेष प्रचार अभियान से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सांसद प्रत्येक विधानसभा में एक दिन व्यतीत करेंगे। इस दौरान वे पौधारोपण एवं स्वच्छता अभियान में भाग लेंगे। इसी प्रकार केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित भारत संकल्प सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। कृषि विभाग, बागवानी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संयुक्त प्राकृतिक खेती पर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा पशु मेला लगाया जाएगा, जिसमें विभाग की नवीनतम उपलब्धियों, पशुओं के रखरखाव और टीकाकरण की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और विकास कार्यों को आमजन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगा। इस मौके पर एसीयूटी सोहम शैलेंद्र व एआईपीआरओ अनुराग मौजूद रहे।

पंजाब पर कांग्रेस का फोकस बढ़ा, 12 दिन में चौथी बैठक; 117 सीटों के लिए मिशन मोड में पार्टी

चंडीगढ़. पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने भी तैयारी को लेकर रफ्तार पकड़ ली है। पंजाब कांग्रेस की टॉप लीडरशिप के साथ लगातार दिल्ली में मंथन का दौर जारी है। पार्टी आलाकमान ने प्रदेश नेतृत्व को पिछले 12 दिनों में चौथी बार दिल्ली बुलाकर यह संकेत दे दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक स्तर पर गंभीरता से काम शुरू हो चुका है। बुधवार को पंजाब के वरिष्ठ नेताओं को दोपहर बाद फिर से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने का संदेश दिया गया, जिसके बाद कई नेता दिल्ली रवाना हो गए। वीरवार को प्रस्तावित इस अहम बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंद्र सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, परगट सिंह, राणा गुरजीत सिंह, सांसद सुखजिंद्र सिंह रंधावा, सांसद डॉ. अमर सिंह, विजय इंदर सिंगला और अरुणा चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। राजनीतिक परिस्थितियों की समीक्षा होगी पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक का मुख्य एजेंडा पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों की समीक्षा करना, संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा तय करना तथा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप देना रहेगा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संगठनात्मक फैसलों की जानकारी भी नेताओं के साथ साझा कर सकता है। पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि बैठक में राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों की राजनीतिक स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके अलावा संभावित उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को प्रारंभिक स्तर पर आगे बढ़ाने पर भी विचार होगा, ताकि संभावित प्रत्याशियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पर्याप्त समय मिल सके। चुनावों के लिए पहले से तैयार होगी कांग्रेस कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि किसी कारणवश विधानसभा चुनाव निर्धारित समय से पहले घोषित होते हैं तो पहले से तैयार उम्मीदवारों को जनसंपर्क और चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त अवसर मिलेगा। पार्टी की रणनीति संभावित चेहरों को समय रहते सक्रिय कर संगठन विस्तार और जमीनी पकड़ मजबूत करने की है। लगातार हो रही बैठकों को राजनीतिक हलकों में इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान पंजाब में पार्टी की वापसी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक चुनावी रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है।

शासकीय भूमि पर अवैध रिसॉर्ट निर्माण का मामला, शिकायत के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन

धमतरी. धमतरी जिले के ग्राम बरारी में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रिसॉर्ट का निर्माण करने का मामला सामने आया है. शिकायत के बाद कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रुकवा दिया है. दरअसल, ग्राम बरारी में करीब 70 डिसमिल शासकीय भूमि पर लगे पेड़ों की कटाई कर रिसॉर्ट निर्माण की तैयारी की जा रही थी. शिकायत मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल काम रोक दिया गया. आरोपों के घेरे में आए बरारी निवासी खूबलाल ध्रुव का कहना है कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से इस भूमि पर काबिज है, और डुबान प्रभावित होने के कारण यहां निवास कर रहा है. उसका कहना है कि कुछ लोगों की शिकायत के चलते यह मामला सामने आया है. इसके साथ ही उसने कहा कि प्रशासन जो भी वैधानिक कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार्य होगा. हालांकि, इस पूरे मामले में सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन शासकीय है तो उस पर निर्माण कार्य किस आधार पर किया जा रहा था. यही नहीं पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं. फिलहाल, निर्माण कार्य रोक दिया गया है, और प्रशासन जांच में जुटा हुआ है.

NCR प्लान-2041 पर मंथन तेज, करनाल समेत 5 जिलों की सदस्यता पर संकट

पंचकूला वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से पांच जिले जल्द ही बाहर हो सकते हैं। जी हां, हरियाणा सरकार इस बाबत 16 जून को बड़ा फैसला ले सकती है। ये पांच जिले कौन से हैं, सरकार यह फैसला क्यों ले रही है और यह NCR होता है क्या है? आइए इसे पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं। क्या है NCR? राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का संदर्भ दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के जिलों से संबंधित है। दरअसल, 1951 के बाद दिल्ली में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ। जिससे देश की राजधानी में अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रवास करने लगे। दिल्ली पर इस बढ़ती आबादी और भीड़-भाड़ के दबाव को कम करने के लिए NCR की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य के साथ साल 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास एक व्यवस्थित योजना के तहत हो सके। अत: पड़ोसी राज्यों के कुछ शहर और जिलों में इसका विस्तार (100 KM तक) कर दिल्ली जैसी सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके। मौजूदा समय में एनसीआर में तीन राज्यों (हरियाणा, यूपी और राजस्थान) के 24 जिले शामिल हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा जिले (14) हरियाणा के हैं, इन्हीं 14 जिलों के पांच जिलों को बाहर करने के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह बैठक की जाएगी। हरियाणा के इन पांच जिलों में करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल है।। इस बाबत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। सरकार क्यों ले रही यह फैसला? दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा और आवास व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने प्रयास शुरू किए थे। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा राजघाट से 100 किमी के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। NCR से बाहर होने की वजह हरियाणा सरकार का तर्क है कि एनसीआर (NCR) के सख्त नियमों के कारण इन 5 जिलों को फायदे से ज्यादा भारी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली से दूर मौजूद जींद या महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास ठप होने की आशंका है। NGT और GRAP के कड़े नियमों के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होती है। इसके साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापारियों और किसानों का परिवहन बजट बिगड़ जाता है। नए फॉर्मूले में क्या होगा? नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 KM की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।

भ्रष्टाचार मामलों में बढ़ी कार्रवाई, लोकायुक्त ने 272 फाइलों का निपटारा किया

 रांची  पांच साल तक बेपटरी रहा लोकायुक्त झारखंड का कार्यालय अब धीरे-धीरे रेस पकड़ने लगा है। इसी वर्ष 21 अप्रैल 2026 को झारखंड के नव नियुक्त लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता के पदभार ग्रहण के साथ ही इस कार्यालय में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायतें आनी शुरू हो चुकी हैं। गत वर्ष जहां 12 महीने में केवल 157 शिकायतें आईं थीं, इस वर्ष अब तक 161 शिकायतें आईं हैं। लोकायुक्त के पदभार ग्रहण के बाद से अब तक यानी महज डेढ़ महीने में 100 शिकायतें आ चुकी हैं, जिसपर काम भी शुरू हो चुका है। लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने इस डेढ़ महीने के भीतर करीब 1400 लंबित फाइलें देख ली हैं। इनमें से 272 फाइलों को निष्पादित कर दिया, जबकि 250 मामलों में लोकायुक्त ने सुनवाई के लिए आदेश जारी किया है। शिकायतकर्ता को नोटिस गया है और उनकी शिकायतें सुनी जा रही हैं और उसपर आगे की कार्रवाई चल रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकायुक्त कार्यालय में जो शिकायतें आ रही हैं, उनमें सर्वाधिक शिकायतें अंचलों में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध हैं। कई शिकायतों में लोकायुक्त ने एसीबी दिया है जांच का आदेश लोकायुक्त ने कई शिकायतों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जांच का आदेश दिया है। ये शिकायतें लोकसेवकों के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित हैं। लोकायुक्त के यहां जो शिकायतें आईं हैं, उनमें भूमि विवाद, टेंडर आवंटन, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने व सेवांत लाभ नहीं मिलने से संबंधित शिकायतें सर्वाधिक हैं। अंचलों में भ्रष्टाचार पर भी लगातार आ रहीं शिकायतें लोकायुक्त झारखंड के कार्यालय में अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इनमें रसीद निर्गत करने से रोकना, बिना पक्ष जाने दाखिल खारिज रद करने की अनुशंसा करना, दाखिल खारिज के एवज में रिश्वत की मांग करना और नहीं देने पर आवेदन अस्वीकृत करना, बिना किसी ठोस वजह बताए, बिना पक्ष सुने दाखिल खारिज के आवेदन को अस्वीकृत करना आदि शामिल हैं। लोग अपनी-अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में लोकायुक्त कार्यालय से संबंधित अंचलाधिकारियों को उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी होगा।

मध्यप्रदेश की बेटी का कमाल! प्रिया मालवीय ने इंडियन एयरफोर्स में पाई फ्लाइंग ऑफिसर की रैंक

छिंदवाड़ा   मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की बेटी प्रिया मालवीय ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है. एएफसीएटी 2025 परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने ऑल इंडिया 113वीं रैंक हासिल की और चयन की अंतिम सूची में जगह बनाई. अब प्रिया भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में सेवा देंगी और हैदराबाद में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी. एक साधारण परिवार से निकलकर देश सेवा के अपने सपने को साकार करने वाली प्रिया की यह उपलब्धि प्रेरणादायक कहानी बन गई है. खास बात यह है कि वह छिंदवाड़ा जिले की पहली बेटी हैं, जिन्हें फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव मिला है।  पुलिस परिवार से उड़ान तक का सफर प्रिया मालवीय छिंदवाड़ा की निवासी हैं और उनके पिता रवि मालवीय कोतवाली में एएसआई पद पर पदस्थ हैं. बचपन से पिता को वर्दी में देखकर प्रिया के मन में भी देश सेवा का जज्बा पैदा हुआ. उन्होंने अपने इसी सपने को लक्ष्य बनाकर मेहनत शुरू की और आखिरकार उसे हासिल कर लिया।  एएफसीएटी 2025 में शानदार प्रदर्शन प्रिया ने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) 2025 में ऑल इंडिया 113वीं रैंक हासिल की. इस परीक्षा के बाद उन्होंने एसएसबी इंटरव्यू और मेडिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके बाद अंतिम मेरिट सूची में उनका चयन फ्लाइंग ऑफिसर के पद के लिए हुआ।  प्रिया ने अपनी सफलता पर क्या कहा? आपके लिए और.. ऑनलाइन तैयारी से हासिल की सफलता प्रिया ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया. उनके अनुसार, सही रणनीति और नियमित अध्ययन की मदद से उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल किया. उन्होंने कहा कि हर छात्र को अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्टता और मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।  प्रिया ने गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीई की डिग्री प्राप्त की. इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने एयरफोर्स में जाने का लक्ष्य तय किया और एएफसीएटी परीक्षा दी।  प्रिया ने अपनी सफलता को लेकर कहा कि यह उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों का विषय है. उन्होंने अन्य बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपने सपनों को चुनने और पूरा करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं, बस उन्हें अवसर और आत्मविश्वास की जरूरत होती है।  पिता बोले- “बेटी ने जीवन सार्थक कर दिया” प्रिया के पिता रवि मालवीय ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है. उन्होंने कहा कि प्रिया हमेशा पढ़ाई के प्रति गंभीर रही और अपनी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंची है. उनके शब्दों में, “बेटी ने मेरा जीवन सार्थक कर दिया।  जिले की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनीं प्रिया मालवीय को छिंदवाड़ा जिले की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव हासिल हुआ है. उनकी इस उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है और युवा उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं।  अब हैदराबाद में ट्रेनिंग चयन के बाद अब प्रिया मालवीय भारतीय वायुसेना की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जाएंगी. यह प्रशिक्षण उनके करियर का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा, जहां उन्हें वायुसेना की जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा।  प्रेरणा बनी प्रिया की कहानी प्रिया की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत और लगन के बल पर छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. उनकी उपलब्धि न केवल छिंदवाड़ा, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है। 

30 किलो हेरोइन के साथ 6 आरोपी गिरफ्तार, दुबई से संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का खुलासा

अमृतसर. नशा तस्करी के खिलाफ जारी अभियान के तहत अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से 30.045 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई है। जांच के दौरान सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी विदेश में बैठे एक कथित तस्कर के संपर्क में थे, जो दुबई से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क सीमा पार से आने वाली हेरोइन की खेप को पंजाब तक पहुंचाने और फिर विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई करने का काम करता था। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि आरोपी तस्कर के निर्देशों पर तय स्थानों से नशीले पदार्थ प्राप्त करते थे और उन्हें आगे वितरित करते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। बरामद हेरोइन की मात्रा को देखते हुए इसे हाल के समय की बड़ी सफलताओं में शामिल किया जा रहा है।

245 पीड़ितों को नहीं मिला पूरा न्याय, 32 लाख लौटाकर भी गिरफ्त से दूर पोस्टमास्टर

डोंगरगढ़. छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में सामने आए कथित वित्तीय घोटाले का मामला महीनों बाद भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। सैकड़ों खाताधारकों की जमा पूंजी फंसने के बाद दर्ज हुई 245 शिकायतों में से बड़ी संख्या में मामले अब भी लंबित हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, अब तक केवल 32 लाख रुपये के सेटलमेंट को मंजूरी मिली है, जिनमें से भी लगभग 25 लाख रुपये ही प्रभावित खाताधारकों को लौटाए जा सके हैं। फरवरी 2026 में सामने आए इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया था। प्रदर्शन के बाद आयोजित हुआ था शिविर आरोप है कि जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में पदस्थ तत्कालीन पोस्टमास्टर आशीष मांडवी ने खाताधारकों की जमा राशि में अनियमितता करते हुए लाखों रुपये का गबन किया। मामला उजागर होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने डोंगरगढ़ उप डाकघर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद डाक विभाग को विशेष शिकायत शिविर आयोजित करना पड़ा। विभागीय प्रक्रिया के कारण 7 लाख रुपए लंबित डाक विभाग के विशेष शिविर में कुल 245 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच के बाद विभाग ने 32 लाख रुपये के सेटलमेंट को स्वीकृति दी। राजनांदगांव डाक संभाग के हेड पोस्टमास्टर एम.के. शर्मा के अनुसार स्वीकृत राशि में से लगभग 25 लाख रुपये खाताधारकों को वापस किए जा चुके हैं, जबकि शेष 7 लाख रुपये विभागीय प्रक्रिया के कारण लंबित हैं और जल्द जारी किए जाएंगे। प्रभावित खाताधारकों में नाराजगी हालांकि स्थानीय सूत्रों का दावा है कि 245 शिकायतों में से अब तक लगभग 100 मामलों का ही निराकरण हो पाया है। बड़ी संख्या में शिकायतें अभी भी दस्तावेजों के सत्यापन, रिकॉर्ड की कमी और जांच लंबित होने के कारण अटकी हुई हैं। इससे प्रभावित खाताधारकों में नाराजगी बनी हुई है। आरोपी अब भी फरार, पुलिस ने तेज की तलाश मामले का मुख्य आरोपी आशीष मांडवी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस विभाग ने 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने बताया कि आरोपी की लगातार तलाश की जा रही है। उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई है और तकनीकी माध्यमों से भी उसकी लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई- SDOP उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज कराने में डाक विभाग की ओर से हुई देरी के कारण आरोपी को फरार होने का मौका मिल गया, लेकिन अब पुलिस पूरी गंभीरता से जांच कर रही है। एसडीओपी नायक ने कहा, “मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई चल रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।” 245 शिकायतें, सिर्फ 32 लाख का सेटलमेंट पर्याप्त कैसे फिलहाल जटकन्हार पोस्ट ऑफिस फ्रॉड में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 245 शिकायतों के मुकाबले केवल 32 लाख रुपये का सेटलमेंट आखिर पर्याप्त कैसे माना जा सकता है। जब तक सभी शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण नहीं होता और मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता, तब तक प्रभावित खाताधारकों की लड़ाई जारी रहने वाली है।