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अयोध्या राम मंदिर: L&T और टाटा कंसल्टेंसी का कार्यकाल बढ़ा, 200 करोड़ से बनेंगी गैलरियां

अयोध्या यूपी के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि में बन रहे भव्य राम मंदिर निर्माण कार्य की धीमी गति को देखते हुए एल एंड टी और टाटा कंसल्टेंसी का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। अब ये दोनों कंपनियां मार्च 2026 तक काम करेंगी। जबकि, पहले इनका कार्यकाल सितंबर 2025 तक तय था। राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर के शिखर पर पताका फहराने की तिथि 25 नवंबर प्रस्तावित है। आज होने वाली भवन निर्माण समिति व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में इस पर औपचारिक मुहर लगाई जाएगी। अब तक मंदिर निर्माण पर करीब 1400 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इनमें से 1100 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में बनने वाले म्यूजियम की 20 गैलरियों पर लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन गैलरियों में रामायण काल से लेकर राम मंदिर आंदोलन तक की झलकियां दिखाने की योजना है। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जा चुके हैं। अब इन्हें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। सुरक्षा इंतजाम इतने पुख्ता होंगे कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।  

जीएसटी में बदलाव से राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति, कारोबारियों और आमजन को मिलेगा लाभ : मुख्यमंत्री साय

रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में राज्य के विभिन्न व्यावसायिक संघों के प्रतिनिधियों ने भेंट कर जीएसटी में किए गए सुधारों के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जीएसटी ने न केवल व्यापार जगत को सशक्त किया है, बल्कि पारदर्शिता और कर संग्रहण में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था भारत को वैश्विक व्यापार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कर व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माने जाने वाला वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राज्य और देश के व्यापार जगत को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। जीएसटी में किए गए हालिया सुधारों से राज्य के उद्योगों और व्यापारियों के साथ-साथ आमजन को भी महत्वपूर्ण राहत मिली है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। यह सुधार भविष्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगा। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित राज्य के विभिन्न व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

महागठबंधन में टकराव: भाकपा ने बढ़ाई सीटों की मांग, बिहार चुनाव में सीट बंटवारे पर संकट

पटना भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा (D Raja) ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में पहले से ज़्यादा सीटों की मांग करेगी। राजा ने पार्टी के पांच दिवसीय राज्य सम्मेलन के पहले दिन पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर बातचीत के दौरान 2020 के मुकाबले ज़्यादा सीटों की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में सभी दल ज़्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं और जनाधार के अनुसार उन्हें भी बढ़ी हुई सीटें मांगने का अधिकार है। भाकपा नेता ने कहा, 'सीट बंटवारे में उनकी पार्टी को आवंटित सीटों की संख्या उचित होनी चाहिए।' डी राजा ने कहा कि बिहार में उनकी पार्टी का जनाधार मज़बूत है और सदस्यों की संख्या के लिहाज़ से पार्टी बिहार में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के राजनैतिक इतिहास पर नजर डालें तो बिहार की पटना लोकसभा सीट से भाकपा के सांसद निर्वाचित होते थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि महागठबंधन के सभी घटक दल सीट बंटवारे के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे और आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में गठबंधन के सभी दलों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा।

पूर्णिया एयरपोर्ट तैयार, पटना, गया, दरभंगा के बाद अब यह होगा बिहार का नया हवाई गेटवे, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

पूर्णिया पूर्णिया के लिए एक बड़ी सौगात के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को बिहार के चौथे एयरपोर्ट का उद्घाटन करने जा रहे हैं। यह एयरपोर्ट दशकों से इस क्षेत्र की जनता की मांग रहा है और अब यह साकार होने जा रहा है। उद्घाटन से पहले, राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 11 सितंबर को पूर्णिया एयरपोर्ट का निरीक्षण करने और अधिकारियों के साथ बैठक करने पूर्णिया पहुंचेंगे। सुरक्षा के मद्देनजर एयरपोर्ट पर अनाधिकृत प्रवेश पर रोक लगाई गई है और मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। पूर्णिया एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका रनवे है, जिसकी लंबाई 9,000 मीटर होगी। यह इसे बिहार का सबसे लंबा रनवे बनाता है। यह एयरपोर्ट एक पूर्व सैन्य हवाई अड्डे पर बनाया गया है और प्रारंभिक चरण में पोर्टा केबिन के आधार पर संचालित होगा। भविष्य में इसे लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से पूरी तरह विकसित किया जाएगा। इस एयरपोर्ट की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 10 साल पहले, 2 नवंबर 2015 को पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में एक चुनावी सभा के दौरान की थी। 15 सितंबर के उद्घाटन की तैयारियों के तहत एयरपोर्ट पर निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और इसे 5 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। पूर्णिया एयरपोर्ट से उड़ान सेवाओं के लिए इंडिगो एयरलाइंस के बाद स्टार एयर ने अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ान की घोषणा की है। उद्घाटन के दिन, 15 सितंबर को, स्टार एयर की पहली उड़ान अहमदाबाद के लिए भरेगी। क्षेत्र के विकास का इंजन बनेगा एयरपोर्ट इस एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल सीमांचल के लोगों को, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी लाभ मिलेगा। नेपाल और पश्चिम बंगाल के लोग भी इसका फायदा उठा सकेंगे। पूर्णिया मेडिकल, ऑटोमोबाइल और शिक्षा का एक हब माना जाता है। एयरपोर्ट से इन क्षेत्रों में तेजी से विकास की संभावना है। उड़ान सेवाओं से व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे इलाके का समग्र विकास होगा। राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहा है, इसलिए इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। सीमांचल क्षेत्र में 24 विधानसभा सीटें हैं। 2020 के चुनाव में, एनडीए को 9, महागठबंधन को 10 और एआईएमआईएम को 5 सीटें मिली थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट जनहित से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है, जिसका लाभ आगामी चुनाव में एनडीए को मिल सकता है।  

इंदौर में चूहों द्वारा नवजात काटने की घटना, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य संस्थानों में प्रभावी उपायों के दिए निर्देश भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में इंदौर में घटित चूहे काटने की घटना पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पूरी कार्यवाही निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं तथ्यों के आधार पर की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को धूमिल करती हैं, दोषी व्यक्तियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिये कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी रोकथाम उपाय तुरंत लागू किए जाएँ। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव, प्रो. एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश लाहोटी, प्रो. डॉ. मनोज जोशी एवं सहायक प्रभारी नर्सिंग अधिकारी श्रीमती कलावती भलावी को उक्त घटना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सहायक अधीक्षक एवं भवन प्रभारी डॉ. मुकेश जायसवाल, प्रभारी नर्सिंग अधिकारी सुप्रवीणा सिंह, नर्सिंग अधिकारी सुआकांक्षा बेंजामिन एवं सुश्वेता चौहान को निलंबित किया गया है। नर्सिंग अधीक्षक श्रीमती मार्गरेट जोसफ को पद से हटाया गया है तथा नर्सिंग अधिकारी श्रीमती प्रेमलता राठौर का स्थानांतरण मानसिक चिकित्सालय में किया गया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अस्पताल परिसरों की स्वच्छता, सुरक्षा और मरीजों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, तथा एम.डी. एम.पी. पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

परंपरागत ऊर्जा के घटते भंडार का सबसे बेहतर विकल्प: इलेक्ट्रिक व्हीकल

परंपरागत ऊर्जा के घटते भंडार का सबसे बेहतर विकल्प इलेक्ट्रिक व्हीकल एसीएस मनु श्रीवास्तव मेनिट के कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल विश्व इलेक्ट्रिक व्हीकल दिवस दुनिया में जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और परंपरागत ऊर्जा के घटते भंडार के बेहतर उपायों में से इलेक्ट्रिक व्हीकल एक है। केन्द्र और राज्यों की सरकारें जनता में इलेक्ट्रिक व्हीकल को लोकप्रिय बनाने के लिये कई तरह की सब्सिडी दे रही है। अनेक मोटर कंपनियां इलेक्ट्रिक व्हीकल में सुधार के लिये निरंतर रिसर्च कर रही हैं। हम सबके सामूहिक प्रयासों से इलेक्ट्रिक व्हीकल को आम जनता का विश्वस्नीय विकल्प बनाया जा सकता है। यह विचार अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने मंगलवार को मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान – मेनिट में ईव्ही वर्कशॉप विद्युत-25 में व्यक्त किये। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कोयला ऊर्जा 6 रूपये प्रति यूनिट और सोलर पॉवर 2 रूपये 15 पैसे प्रति यूनिट आये हैं। यह इस बात को साबित करता है कि हम सबको नवकरणीय ऊर्जा की तरफ तेजी से बढ़ने की आवश्यकता है। सोलर पॉवर की एक विशेषता यह भी है कि इसको स्टोर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सकता है। कार्यक्रम में अपर आयुक्त पारिक्षित झाड़े ने मध्यप्रदेश की नवीन ईव्ही पॉलिसी के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पॉलिसी को आगामी 5 वर्षों के लिये जारी किया गया है। पॉलिसी में उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिये अनेक प्रकार से सब्सिडी दी गई है। समूह चर्चा इेलेक्ट्रिक व्हीकल को जनसामान्य में लोकप्रिय बनाने के लिये विशेषज्ञों ने समूह चर्चा भी की। चर्चा में बताया गया कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत में कमी लाने पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। इसी के साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल को एक चार्जिंग में अधिकतम दूरी तय करने की क्षमता विकसित करने पर भी तेजी से कार्य किये जाने की जरूरत है। समूह चर्चा में यह भी बताया गया कि कार्मशियल व्हीकल को इलेक्ट्रिक व्हीकल के रूप में अधिक से अधिक उपयोग किये जाने पर हम ऊर्जा में काफी बचत कर सकते हैं। चर्चा में सर्वरणधीर सिंह, ऋषि टंडन, चंद्रशेखर भिड़े ने प्रमुख रूप से विचार व्यक्त किये। मेनिट के डायरेक्टर शैलेन्द्र जैन ने विश्व इलेक्ट्रिक व्हीकल दिवस के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के संयोजक छात्र अक्षत अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर विद्यार्थियों के बीच अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस मौके पर इलेक्ट्रिक ऑटो एक्सपो में नवीनतम फोर व्हीलर, टू व्हीलर और कर्मशियल इलेक्ट्रिक व्हीकल का भी प्रदर्शन किया गया।  

स्टॉकयार्ड में पानी भरने से 300 नई मारुति कारें डूबीं, झज्जर में हड़कंप

झज्जर   हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां आई बाढ़ में करीब 300 नई मारुति सुजुकी कारें एक साथ डूब गईं। आमतौर पर बाढ़ में गाड़ियां डूबने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर नई कारों का डूबना काफी असामान्य है।  वायरल हुआ वीडियो न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में साफ दिख रहा है कि मारुति सुजुकी के स्टॉकयार्ड में खड़ी सैकड़ों नई गाड़ियां पानी में डूबी हुई हैं। इन कारों में अल्टो K10, वैगनआर, ब्रेजा और इनविक्टो जैसे मॉडल शामिल हैं। वीडियो में यह भी नजर आता है कि कई कारों के एयरबैग खुल चुके हैं और कई गाड़ियों के ड्राइवर साइड के शीशे भी निकाले गए हैं।   सात दिनों से पानी में डूबी गाड़ियां रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कारें करीब सात दिनों से पानी में फंसी हुई हैं, जिससे उन्हें बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया है। कई गाड़ियों में पानी इतना ऊपर तक भर गया है कि उनके इंजन तक डूब चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन कारों को दोबारा चलने लायक बनाना बेहद कठिन होगा। फैक्ट्रियों और इलाकों पर भी असर स्थानीय फैक्ट्री कर्मचारियों ने बताया कि ये गाड़ियां बहादुरगढ़ के मारुति सुजुकी शो-रूम मालिकों की थीं। रात में जब अचानक पानी आया, तो वॉचमैन को इसकी जानकारी दी गई। लेकिन तब तक गाड़ियां डूब चुकी थीं और कई कारों के अलार्म बजने लगे थे। फिलहाल इलाके में बाढ़ का हाल और बिगड़ रहा है। पानी बढ़ने से लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों में भी असर दिख रहा है। दिल्ली से लगे आधुनिक इंडस्ट्रियल एरिया की कई फैक्ट्रियों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया है और वहां कामकाज बंद करना पड़ा है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का किया भूमि पूजन व शिलान्यास

बस्ती/लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की शिक्षा कैसी होनी चाहिए। आजादी के पांच साल के बाद जब तत्कालीन सरकारें इस दिशा में प्रयास नहीं कर पाईं, तब नाना जी ने गोरखपुर से इस प्रयास को बढ़ाया था। उसके पीछे का ध्येय था कि भारत, भारतीयता, परंपरा,  संस्कृति और मातृभाव से ओतप्रोत ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना आवश्यक है, जो देश को फिर से विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सके। इसकी शुरूआत शिक्षा के मंदिरों से ही होती है। शिक्षण संस्थान केवल अक्षर ज्ञान के माध्यम ही नहीं, बल्कि बालक के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं। शिक्षा यदि संस्कार, मूल्यों-आदर्शों, मातृभूमि, महापुरुषों, राष्ट्रीयता के प्रति समर्पण का भाव पैदा नहीं कर पा रही है तो वह कुशिक्षा और भटकाव है। आजादी के तत्काल बाद उसका समाधान सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का भूमि पूजन, शिलान्यास, पौधरोपण व पुस्तक का विमोचन भी किया। आरएसएस के तत्कालीन प्रचारक नाना जी देशमुख के नेतृत्व में सरस्वती शिशु मंदिर की पहली शाखा गोरखपुर में स्थापित की गई थी। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के मातृभूमि होने का सौभाग्य गोरक्ष प्रांत को प्राप्त है। विद्या भारती के अंतर्गत संचालित हजारों शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र निर्माण के जिस अभियान के साथ जुड़े हैं, उसकी ताकत देश-दुनिया समझती है। शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज का नेतृत्व भी कर रहे और मार्गदर्शन भी सीएम योगी ने कहा कि पाठ्यक्रम सरकार तैयार करती है। सरकार सहयोग करे या न करे। बिना सरकार की सहायता के अपने दम और स्वयंसेवकों के सहयोग से भारतीयता के प्रति अनुराग रखने वाले नागरिकों के माध्यम से सरस्वती शिशु मंदिर ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। गोरखपुर के पक्कीबाग में जब पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित हुआ तो उस समय मात्र पांच छात्र थे, लेकिन आज शिशु मंदिर के 12 हजार विद्यालय हैं। यह संस्थान बच्चों के अंदर भारत व भारतीयता के प्रति नागरिक के रूप में कर्तव्यों का बोध कराने और सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए राष्ट्रीय दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन कर रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज को नेतृत्व भी दे रहे और मार्गदर्शन भी कर रहे हैं।   शिक्षा से होती देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत   सीएम योगी ने कहा कि देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत शिक्षा से होती है। दुनिया में समृद्धि की चर्चा होती है तो पहला पैरामीटर शिक्षा, फिर स्वास्थ्य, उसके बाद कृषि-जल संसाधन, तब कौशल विकास व रोजगार होता है। फिर पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकास की बात होती है। यह पैरामीटर तय करते हैं कि समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। इस मंशा के साथ जब कोई अभियान बढ़ता है तो वह न केवल देशहित, बल्कि मानवता का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आज का कार्यक्रम सुयोग्य नागरिकों को गढ़ने, तलाशने और तराशने का महत्वपूर्ण मंच शुरू करने जा रहा है। इसके माध्यम से भारत के सुयोग्य नागरिक विकसित करने का मंच विकसित हो रहा है। बिना प्लानिंग कार्य करने से चूक जाते हैं सीएम ने कहा कि जब बिना किसी प्लानिंग कार्य करते हैं तो चूक जाते हैं। हर व्यवस्था, प्रबंधन, सरकार, कॉरपोरेट घराना वर्ष भर की योजना बनाता है, फिर लघु, मध्यम व दीर्घ अवधि के कार्यक्रम तय करता है। इसके माध्यम से आगे के लक्ष्यों को प्राप्त करके हम भी सशक्त होंगे और भावी पीढ़ी, संस्थान को भी समर्थ भी बना पाएंगे। सरकार हर साल बजट प्रस्तुत करती है। इसमें विजन होता है कि एक वर्ष, फिर पांच वर्ष, दस वर्ष, 25 वर्ष की योजना क्या होगी। भारत की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष पर पीएम मोदी ने आगामी 25 वर्ष की कार्ययोजना तैयार करने को कहा।  भारत को विकसित बनाने के लिए पंच प्रण को जीवन का हिस्सा बनाने को कहा।   विरासत का करना होगा सम्मान सीएम ने कहा कि विरासत का सम्मान करना होगा। हमारे पूर्वजों (1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी) ने संकल्प लिया था कि एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे। कश्मीर में शेष भारत का कानून लागू करने का शंखनाद किया था। उन्हें बलिदान भी देना पड़ा। 1952 में कांग्रेस ने बाबा साहेब के न चाहने के बावजूद जबरन लागू किया, लेकिन पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी के संकल्प को साकार कर आतंकवाद व भारत विरोधी गतिविधियों-साजिशों को समाप्त करके कश्मीर को भारत के कानून के साथ जोड़ा। 500 वर्ष का इंतजार समाप्त हुआ और अयोध्या में रामललाा के मंदिर का निर्माण हुआ। विपक्षी दल चाहते थे कि यह नहीं होना चाहिए। सीएम ने कहा कि प्रभु श्रीराम आदर्श व भारतीयता के प्रतीक है। जब महर्षि वाल्मिकी ने नारद जी से पूछा कि मुझे कुछ लिखना है, ऐसा कौन सा आदर्श है। तब उन्होंने कहा कि इस धरती पर एक ही चरित्र है, आप श्रीराम पर लिखें। हमें महर्षि वाल्मीकि, प्रभु राम,  श्रीकृष्ण की परंपरा पर गौरव की अनुभूति है। भारत और भारतीयता के लिए जिन महापुरुषों व स्वतंत्र भारत में सीमाओं की रक्षा करते हुए जिन्होंने बलिदान दिया, वे सभी हमारे आदर्श हैं। उनका सम्मान और विरासत का संरक्षण करना हर भारतीय का दायित्व है। विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया, जबकि भारत ने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनाया सीएम ने गुलामी के अंशों को सर्वथा समाप्त करने पर भी चर्चा की। बोले कि गुलामी की मानसिकता देश के अंदर छा गई थी। भारतीय को हेय और विदेशी को संपन्न की दृष्टि से देखे जाने लगा। इस दुष्प्रवृत्ति पर 11 वर्ष में आपने रोक लगाते हुए देखा होगा। जो भारतीय है, वह सर्वश्रेष्ठ है और वह ऐसा इसलिए है, क्योंकि जो विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया है, जबकि भारत ने अपने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनाया था। 400 वर्ष पहले भारत दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था थी। दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 25 फीसदी था। जब देश आजाद हुआ तो भारत का योगदान केवल दो फीसदी रह गया। भारत को लूटा गया। भारत और भारतीयता के मन में यह भाव पैदा किया गया कि भारतीयों को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करने वालों को लोग हतोत्साहित करते थे। … Read more

सीमा पर अलर्ट: नेपाल में प्रदर्शन, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में एसएसबी ने बढ़ाई निगरानी

पीलीभीत /लखीमपुर खीरी नेपाल में प्रदर्शन के कारण बिगड़े हालात को देखते हुए पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सीमा पर चौकसी बढ़ाने के साथ ही आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच की जा रही है। पीलीभीत जिले में अफसरों के निर्देश पर माधोटांडा और हजार थाना पुलिस ने एसएसबी के साथ सीमा क्षेत्र में गश्त तेज कर दी है। सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस के साथ खुफिया तंत्र भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई हो सके। सीमा पर प्रवेश करने वाले और बाहर जाने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है, साथ ही वाहनों की तलाशी भी ली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है। फिलहाल सीमा क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह तैयार है। गौरीफंटा बॉर्डर पर भी सर्तकता बढ़ी लखीमपुर खीरी के पलियाकला में भारत-नेपाल के गौरीफंटा बॉर्डर पर भी सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। यहां पर पुलिस व एसएसबी के जवान चेकिंग कर रहे हैं। नेपाल के धनगढ़ी शहर में चल रहे प्रदर्शन के बीच मंगलवार को बॉर्डर पर भी काफी चौकसी दिखाई दी। सुरक्षा एजेंसियां दलबल के साथ चेकिंग में लगी रही। नेपाल जाने-आने वाले लोगों की चेकिंग की जा रही है।  

अहर्निश प्रासंगिक हैं युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के विचार

  पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा लोक कल्याण को समर्पित रहा महंत दिग्विजयनाथ जी का जीवन गोरखपुर, कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने, विरासत पर गौरव की अनुभूति करने और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने की सनातनी परंपरा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष स्मृतिशेष गुरुजन की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रीयता के सुर गुंजित होते हैं। अवसर होता है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का। इस वर्ष ब्रह्मलीन महंतद्वय की स्मृति में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा 4 सितंबर से और समाज व राष्ट्र को प्रभावित करने वाले समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन के सांगोष्ठिक कार्यक्रम 5 सितंबर से जारी हैं। इस साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत आश्विन कृष्ण तृतीया पर 10 सितंबर (बुधवार) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर तथा आश्विन कृष्ण चतुर्थी पर 11 सितंबर (गुरुवार) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में किया जाएगा। पुण्य स्मरण का यह कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होगा जहां देशभर के प्रमुख संतजन उपस्थित रहेंगे। पुण्यतिथि समारोह में बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की स्मृतियों के जीवंत होने के इस अवसर पर यह जानना भी प्रासंगिक है कि उन्हें युगपुरुष क्यों कहा जाता है। भौतिक विद्यमानता न होने के बावजूद जो व्यक्तित्व अपने कार्यों-विचारों से अपने बाद की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं, सही अर्थों में युगपुरुष होते हैं। कारण, हरेक कालखंड में उनके बताए मार्गों, विचारों और आदर्शों की प्रासंगिकता रहती है। ऐसे ही युगपुरुष हैं ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ। वर्ष 1935 से 1969 तक नाथपंथ के विश्व विख्यात पीठ के कर्ता-धर्ता रहे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को 56वीं पुण्यतिथि है।  पांच दशक से अधिक समय से उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को श्रद्धा भाव से न केवल नमन-स्मरण किया जाता है बल्कि उनपर अमल करने का संकल्प भी लिया जाता है। महंत जी न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा। महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर के नाथपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी की तासीर थी कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह इस पीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया। श्रीराम मंदिर आंदोलन में ब्रह्मलीन महंतश्री की रही महती भूमिका अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका से सभी वाकिफ हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो गया था। रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ ने निर्णायक बनाया तो कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी तब आई जब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा, तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ आप ही स्मरित होंगे। पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति के अमर नायक हैं महंत दिग्विजयनाथ महंत दिग्विजयनाथ का नाम पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति लाने वाले नायक के रूप में अमर है। उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा अंचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम 'महाराणा प्रताप हाई स्कूल' हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केन्द्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इन्टरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतजी की अगुवाई में हुई। शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी संस्था महाराणा प्रताप डिग्री कालेज को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी स्मृति में दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना … Read more