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CM ने PM से मांगी 60 हजार करोड़ की सहायता, भेजा आधिकारिक पत्र

पंजाब  पंजाब में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने राज्य को गहरे संकट में डाल दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल 60,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी करने की मांग की। मान ने दावा किया कि यह राशि राज्य के कोष से संबंधित है, जो केंद्र सरकार के पास फंसी हुई है। दशकों की सबसे विनाशकारी बाढ़ पंजाब इस समय दशकों में आई सबसे भयावह बाढ़ आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। भारी बारिश और नदियों के उफान ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई, सैकड़ों गांव प्रभावित हुए और लाखों लोग बेघर हो गए। बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें सड़कें, पुल और बिजली व्यवस्था शामिल हैं।   मुख्यमंत्री का पत्र: केंद्र पर गंभीर आरोप मुख्यमंत्री मान ने अपने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब के हक की राशि को रोक रखा है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति और कमजोर हुई है। उन्होंने इस राशि को तुरंत जारी करने की मांग की ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्य तेज किए जा सकें। मान ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की उदासीनता के कारण राज्य को इस आपदा से निपटने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राहत कार्यों में तेजी की जरूरत पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू किए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण कार्य धीमा पड़ रहा है। एनडीआरएफ और सेना की टीमें बचाव कार्यों में जुटी हैं, लेकिन प्रभावित लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि तत्काल बड़े पैमाने पर सहायता की जरूरत है।

राजस्थान में सियासी पारा चढ़ा: मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने दिए टकराव के संकेत

जयपुर राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर साफ कर दिया है कि सदन का माहौल गरम रहने वाला है। कांग्रेस ने इस सत्र को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिलेगा। बजट सत्र में भी कांग्रेस ने सरकार पर लगातार हमले किए थे और कई बार कांग्रेस विधायकों और स्पीकर के बीच तनातनी की स्थिति बनी थी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के तीखे तेवर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष चाहते हैं कि सत्र लंबा चले, लेकिन सरकार जल्दबाजी में इसे कुछ दिनों में समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन में सरकार की जवाबदेही तय करेगा, क्योंकि यह सरकार पौने दो साल में ही असफल और अलोकप्रिय साबित हो चुकी है। जूली ने भाजपा सरकार के "अलोकतांत्रिक रवैये" की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिलों में कांग्रेस के निर्वाचित प्रधानों, प्रमुखों और चेयरमैनों को चुन-चुनकर हटाया जा रहा है। यहां तक कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में सभी निर्वाचित प्रधानों को हटाकर भाजपा नेताओं को बिठा दिया गया है। यही वजह है कि सरकार पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनाव भी नहीं करवा रही है और हाईकोर्ट से स्टे लेकर बच रही है। मुख्यमंत्री सिर्फ भाजपा के नहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री केवल एक पार्टी के नहीं होते। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय मई 2020 में मुख्यमंत्री ने सभी 200 विधायकों और 25 सांसदों की बैठक बुलाकर उनकी बातें सुनी थीं। जूली के अनुसार मौजूदा सरकार विपक्ष की आवाज को दरकिनार कर केवल भाजपा विधायकों, सांसदों और यहां तक कि हारे हुए प्रत्याशियों से ही बातचीत कर रही है।

आज 10 ट्रेनें हरियाणा होकर नहीं चलेंगी, पंजाब में बाढ़ के कारण लिया गया फैसला

हरियाणा हरियाणा से होकर गुजरने वाली 10 ट्रेनें आज रद्द रहेंगी। पंजाब में आई बाढ़ को देखते हुए उत्तर रेलवे ने ये फैसला लिया है। ये ट्रेनें जम्मू से चलकर हरियाणा और पंजाब होते हुए राजस्थान और गुजरात तक जाती हैं। ट्रेनें रद्द होने से गुरुग्राम, रेवाड़ी, हिसार, सिरसा सहित जम्मू, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार, जम्मू मंडल में हो रही भारी वर्षा के कारण कठुआ–माधोपुर पंजाब स्टेशनों के बीच स्थित ब्रिज संख्या 17 पर तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे रेल यातायात बाधित हुआ है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुधार होने पर सेवाएं बहाल की जाएंगी। 1 सितंबर को रद्द की गई रेल सेवाएं      14661 – बाड़मेर-जम्मूतवी     14662 – जम्मूतवी-बाड़मेर     14803 – भगत की कोठी-जम्मूतवी     14804 – जम्मूतवी-भगत की कोठी     12413 – अजमेर-जम्मूतवी     12414 – जम्मूतवी-अजमेर     19224 – जम्मूतवी-साबरमती     19223 – साबरमती-जम्मूतवी     19108 – उधमपुर-भावनगर टर्मिनस (एमसीटीएम)     19028 – जम्मूतवी-बांद्रा टर्मिनस  

सामान्य वर्ग के छात्रों को राहत, विदेश में पढ़ाई के लिए सरकार देगी 35 लाख की स्कॉलरशिप

भोपाल मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने अनारक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना-2025 की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए सरकार वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगी। यह मदद 40 हजार अमेरिकी डालर वार्षिक की होगी। मौजूदा दर से यह रकम लगभग 35 लाख रुपये होती है। इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 19 सितंबर है। योजना के अनुसार, यह छात्रावृत्ति केवल स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर की पढ़ाई के लिए मिलेगी। उम्मीदवार का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना और न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक होना अनिवार्य है। यह छात्रवृत्ति 20 विद्यार्थियों को दी जानी है। चयनित विद्यार्थियों को वास्तविक व्यय या अधिकतम वार्षिक 38 हजार अमेरिकी डालर के साथ दो हजार अमेरिकी डॉलर (किताबें, आवश्यक उपकरण, टंकण, शोध प्रबंध की बाइंडिंग एवं अन्य कार्य के लिए) कुल 40 हजार अमेरिकी डालर दिए जाते हैं। यह योजना 2018-19 से लागू है। अभी तक 24 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इन शर्तों का पूरा होना जरूरी     आवेदनकर्ता की सभी स्रोत से वार्षिक आय आठ लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।     स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश के लिए आवेदनकर्ता की उम्र अधिकतम 25 वर्ष तथा शोध उपाधि के लिए अधिकतम उम्र 35 वर्ष होना चाहिए।     संबंधित विदेशी विश्वविद्यालय से अध्ययन का प्रस्ताव होना चाहिए।     किसी परिवार से एक ही व्यक्ति को एक ही बार इस छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा। दो बार मिलता है मौका इस छात्रवृत्ति के लिए चयन का प्रतिवर्ष दो बार मौका दिया जाता है। जनवरी से जून सत्र के लिए 10 छात्रवृत्ति और जुलाई से दिसंबर सत्र के लिए 10 छात्रवृत्ति मंजूर होती हैं। चयनित विद्यार्थी को दो वर्ष की अवधि के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी।  

गणपति विसर्जन मार्ग पर मेट्रो का असर, ट्रैफिक पुलिस ने उठाया मुद्दा

भोपाल राजधानी में इस बार गणपति विसर्जन के उत्सव में मेट्रो परियोजना की बैरिकेडिंग ने समस्या खड़ी कर दी है। हर साल की तरह इस बार भी शहर भर के गणेश भक्त अपने-अपने गली-मोहल्लों में सजी झांकियों से गणपति की मूर्तियों को प्रेमपुरा घाट तक विसर्जन के लिए लेकर जाएंगे। लेकिन इस बार मेट्रो परियोजना के कारण डिपो चौराहे से भदभदा चौराहे तक लगभग 1.8 किलोमीटर लंबी सड़क पर बैरिकेडिंग लगने से रास्ता अत्यधिक संकरा हो गया है, जिससे विसर्जन के दौरान परेशानी खड़ी हो सकती है। 1.8 किमी लंबा है रास्ता मेट्रो की बैरिकेडिंग के कारण करीब 80 फीट चौड़ा रास्ता महज 30 फीट रह गया है। समस्या को भांपकर ट्रैफिक पुलिस ने मेट्रो परियोजना के एमडी को पत्र लिख बैरिकेडेिंग के क्षेेत्र को कम करने का आवेदन दिया है ताकि रास्ता चौड़ा हो सके। हालांकि अब तक मेट्रो एमडी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। प्रेमपुरा घाट जाने के लिए डिपो चौराहे से भदभदा चौराहे तक करीब 1.8 किमी के रास्ते पर मेट्रो बैरिकेडिंग हुई है। सड़क की चौड़ाई करीब 80 फीट है, लेकिन मेट्रो की वजह से दोनों ओर का रास्ता कुछ स्थानों पर सिमटकर 15 फीट तक रह गया है, जिससे न केवल सामान्य यातायात में रुकावट आ रही है, बल्कि गणेश मूर्तियों के विसर्जन के समय होने वाले जुलूस में शामिल झांकियों और डीजे के वाहनों को निकलने में भी दिक्कत होगी। प्रेमपुरा घाट पर होगा 650 से अधिक मूर्तियों का विसर्जन गणेश विसर्जन के दौरान भारी संख्या में लोग एक साथ सड़क पर होते हैं और इस संकीर्ण मार्ग पर भीड़ और वाहनों के दबाव को संभालना पुलिस के लिए चुनौती बन सकता है। बता दें भोपाल में इस बार एक हजार से ज्यादा गणेश पंडाल सजे हैं, जिनमें सबसे विशाल करीब 150 मूर्तियों का चल समारोह निकाला जाएगा, जिनका विसर्जन छोटे तालाब के रानीकमलापति घाट पर होगा। वहीं हथाईखेड़ा डैम और बैरागढ़ के विसर्जन कुंड में आसपास के क्षेत्रों की 200 से अधिक मूर्तियां विसर्जित की जाती हैं। इसके अलावा शहर का सबसे बड़ा विसर्जन स्थल प्रेमपुरा घाट है, जहां 650 से गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। प्रेमपुरा घाट पर विसर्जन के लिए पुराने शहर से जुलूस निकलेगा जो कि रेतघाट, पालीटेक्निक चौराहे से डिपो चौराहे तक पहुंचेगा। वहां से भदभदा चौराहे तक के करीब 1.8 किमी के रास्ते में बैरिकेडिंग है , जो समस्या बनी है। दो महीने की अनुमति लेकर छह महीने पहले लगी थी मेट्रो की बैरिकेडिंग एसीपी ट्रैफिक अजय वाजपेयी ने बताया कि मेट्रो रेल कार्पोरेशन की ओर से करीब छह महीने पहले मेट्रो निर्माण से पहले मिट्टी की जांच के लिए दो महीने की अनुमति ली गई थी। इसके बाद अवधि समाप्त होने के बाद दो बार और अनुमति दी गई है। एस. कृष्णा चैतन्य, एमडी मप्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बताया विसर्जन का मार्ग मेट्रो बैरिकेडिंग के कारण काफी संकरा हो गया है। जुलूस में बड़ी मूर्तियां भी शामिल होती हैं, ऐसे में जिन स्थानों पर रास्ता बेहद संकीर्ण हो गया है वहां मूर्तियां फंसने की आशंका है। इसको लेकर मेट्रो एमडी को पत्र लिखकर मांग की है कि रास्ते से या तो बेरिकेड्स हटाए जाएं या फिर उन्हें समेटें, जिससे मार्ग पर रास्ता मिल सके। अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अंतरविभागीय मामला है, अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकालेंगे। 

वाहन रजिस्ट्रेशन के डेटाबेस में वाहन स्वामी सारथी पोर्टल पर जाकर स्वयं कर सकते हैं अपडेट

भोपाल  परिवहन विभाग द्वारा मोबाइल नम्बर अपडेट करने के लिये इन दिनों विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। वाहन स्वामी अथवा डीलर नेशनल इन्फार्मेशन सेंटर (एनआईसी) के वाहन सारथी पोर्टल पर जाकर स्वयं ही आसानी से मोबाइल नम्बर अपडेट कर सकते हैं। प्रदेश में वाहन के पंजीयन और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करते वक्त आवेदक को अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करना अनिवार्य होता है। कई बार वाहन स्वामी की जगह डीलर अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करा देते हैं। वाहन स्वामी और डीलर द्वारा सही मोबाइल नम्बर दर्ज कराने के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा मोबाइल नम्बर कुछ वर्षों बाद परिवर्तित कर देने के कारण डेटाबेस में संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं रह पाता है। परिवहन विभाग ने जानकारी दी है कि वाहन सारथी पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से मोबाइल नम्बर अपडेट करने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। आधार में दर्ज आवेदक और उसके अभिभावक के नाम का वाहन पंजीयन और ड्रायविंग लायसेंस के डेटाबेस में दर्ज नाम से शत-प्रतिशत मिलान होने पर डेटाबेस में मोबाइल नम्बर तत्काल अपडेट हो जाता है। आधार पंजीयन और ड्राइविंग लायसेंस के डेटाबेस में दर्ज नाम में भिन्नता पाई जाती है, तो आवेदक को पोर्टल पर अपना कोई दूसरा परिचय पत्र जैसे आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और पासपोर्ट अपलोड करना पड़ता है। आरटीओ कार्यालय द्वारा दर्ज दस्तावेज और आधार से आवेदक और उसके अभिभावक के नाम का पंजीयन और ड्राइविंग लायसेंस में दर्ज नाम का सत्यापन किया जाता है। अप्रूवल के बाद मोबाइल नंबर डेटाबेस में अपडेट हो जाता है। अपडेड प्रक्रिया को विस्तृत रूप से स्क्रीन शॉट के माध्यम से समझाने के लिए मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के पोर्टल के होमपेज पर लिंक उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में वाहन रजिस्ट्रेशन एवं ड्राइविंग लायसेंस संबंधी समस्त सेवाओं के लिये ऑनलाइन आवेदन लिये जा रहे है। डेटाबेस रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त कर आवेदक को अपना सत्यापन कराना होता है। मोबाइल नंबर डेटाबेस पर उपलब्ध न होने पर कई बार आवेदक इन सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं। संबंधित वाहन के विरूद्ध अन्य प्रणालियों से चालान जारी होने पर डेटाबेस पर सही नंबर न होने के कारण कई बार वाहन स्वामियों को चालान के संबंध में जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती है। चालान का भुगतान लंबित होने पर ऐसे व्यक्तियों को परिवहन विभाग की सेवाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। न्यायालयीन कार्रवाई की जाने पर उन्हें कोर्ट से समन भी आ सकते हैं। इन कारणों से मोबाइल नंबर अपडेट होना आवश्यक है। मोबाइल अपडेशन की विस्तृत प्रक्रिया मध्यप्रदेश परिवहन पोर्टल के यूआरएल transport.mp.gov.in पर उपलब्ध है।  

नायब सरकार का बड़ा कदम: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शहीदों के नाम की जाएगी सम्मानित

चंडीगढ़ देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले जवानों के सम्मान के लिए नायब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा विभाग (स्कूल) प्रदेश के 75 स्कूलों का नामकरण जांबाज जवानों के नाम करेगा। बता दें कि हरियाणा में 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक राज्यव्यापी सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। इस पाक्षिक कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सेवा की भावना को बढ़ावा देना और विकासात्मक पहलों को एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना है। यह स्कूल नए होंगे जो केवल गांव के नाम पर चल रहे हैं। पहले से स्कूल बलिदानियों के नाम उन्हें इसमें नहीं रखा जाना है। नामकरण के लिए लिस्ट शिक्षा विभाग की परामर्श जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से तैयार कर शासन को भेजी जानी है। यह कार्य दस दिन के अंदर पूरा किया जाना है। आयोजन आरंभ होने से पहले ही स्कूलों का नामकरण बलिदानी के नाम पर करना है। इसके लिए शनिवार को प्रदेश के मुख्य सचिव ने अनुराग रस्तोगी ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस अभियान के तहत प्रदेशभर में प्रतिदिन कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी हर रोज मुख्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि सभी जिलों में मंत्री इस तरह के कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। पूर्व सैनिकों की सक्रिय भागीदारी के साथ प्रदेशभर में प्लास्टिक मुक्त अभियान और व्यापक स्वच्छता अभियान शुरू चलेगा बता दें कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस है और दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महत्मा गांधी की जयंती है। शिक्षा विभाग स्कूलों और कॉलेजों में निबंध लेखन, वाद-विवाद, चित्रकला, रंगोली और नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिताएं होंगी। 

चप्पे-चप्पे पर नजर, रेलवे ने अगले तीन हफ्तों के लिए भीड़ प्रबंधन योजना बनाई

जबलपुर महाकुंभ के दौरान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन में भगदड़ की घटना के बाद रेलवे ने भीड़ प्रबंधन की सतत अग्रिम योजना पर काम शुरू कर दिया है। अब मंडल स्तर पर प्रत्येक तीन माह में कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके लिए रेल मंडल अगले तीन सप्ताह तक त्योहार, मेला और वीकेंड पर नजर रख रहे है। उन्हें ध्यान में रखकर स्टेशन एवं ट्रेन में भीड़ का अनुमान लगाया जा रहा है। यात्रियों की अतिरिक्त संख्या की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाने के उपाय तय किए जा रहे है। इस अचानक उमड़ने वाली भीड़ नियंत्रण की रिपोर्ट को प्रत्येक रेल मंडल के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। जिसे रेलवे बोर्ड को भी प्रेषित करना होगा। ताकि यात्री दबाव बढ़ने से स्टेशन पर अराजकता की स्थिति निर्मित होने से रोका जा सकें। अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष ट्रेन, यात्री विश्राम स्थल के विस्तार सहित अन्य वैकल्पिक सुविधाओं को पहले ही सुनिश्चित कर लिया जाए। आवश्यकता होने पर बोर्ड की ओर से अतिरिक्त ट्रेन कोच, रैक एवं मानव श्रम उपलब्ध कराया जाएगा।   स्थानीय मेला, आयोजन का मांगा ब्योरा रेलवे बोर्ड की ओर से अभी तक कुंभ जैसे बड़े आयोजन और दीपावली को लेकर अलग से तैयारी की जाती थी। जिसका दायरा बढ़ाते हुए अब स्थानीय स्तर पर होने वाले मेला और आयोजन में यात्री सुविधाओं को बोर्ड ने अपने अंतर्गत ले लिया है। प्रत्येक मंडल से भीड़ नियंत्रण को लेकर तीन सप्ताह की अग्रिम योजना प्रेषित करने का निर्देश दिया है। जिसमें मंडल को अपने क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटक स्थल के साथ ही तीज, त्योहार, मेला, प्रस्तावित धार्मिक व अन्य आयोजन एवं वीकेंड पर बढ़ने यात्री दबाव का अनुमान बताना है। भीड़ की संभावना पर स्टेशन की व्यवस्था और ट्रेनों के सुगम परिचालन की कार्ययोजना प्रेषित करना है। कुंभ के दौरान अपनाए गए प्रबंधन को अपेक्षाकृत छोटे स्तर पर लागू करना है। यात्री दबाव पर करने है यह उपाय व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना, सेंट्रल वॉर रूम बनाना। भीड़ रोकने स्टेशन के बाहर अस्थाई यात्री विश्राम स्थल का निर्माण। ट्रेन आने के आधा घंटा पूर्व कन्फर्म टिकट पर यात्री को प्लेटफॉर्म में प्रवेश। प्रवेश-निर्गम के अलग-अलग मार्ग। प्लेटफॉर्म टिकट विक्रय पर रोक। वीकेंड, त्योहार पर प्रतीक्षा सूची लंबी होने पर ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ना। आवश्यकतानुसार स्थानीय स्तर पर मेला, त्योहार स्पेशल ट्रेन चलाना। स्टेशन के बाहर ट्रेनों के आने-जाने का समय बताने वाले बड़े डिस्प्ले बोर्ड। फुट ओवर ब्रिज, रैंप पर यात्रियों को रुकने न देना, भीड़ को चलायमान रखना। प्रमुख जंक्शन और स्टेशन चिह्नित पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत प्रदेश में अधिक यात्री दबाव वाले 12 प्रमुख स्टेशन है। जिस पर त्योहार एवं किसी विशेष अवसर पर भीड़ बढ़ती है। जबलपुर और भोपाल रेल मंडल आने वाले संबंधित स्टेशनों में इटारसी, कटनी, बीना और सतना प्रमुख रेल जंक्शन है। जबलपुर जंक्शन, भोपाल जंक्शन, रानी कमलापति स्टेशन, मैहर और सागर को भी अवसर विशेष पर संबंधित रेल मंडल के भीड़ वाले स्टेशनों की सूची में शामिल किया है।  नवरात्र पर शारदा देवी दर्शन के लिए मैहर, हरे माधव परार्मा सत्संग समिति की ओर से माधव शाह बाबा के बर्शी मेले के दौरान कटनी और तब्लीग इज्तिमा के समय भोपाल रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पश्चिम मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव के अनुसार विशेष अवसरों पर भीड़ के लिए अग्रिम कार्य योजना बनाई जा रही है। ताकि यात्रियों असुविधा न हो।

किसानों के लिए खुशखबरी! MP में तीन जगह बनेंगे Oil Seed Hub, बढ़ेगी पैदावार

ग्वालियर प्रदेश में खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब प्रदेश के तीन जिले ऑयल सीड हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रदेश के तीन कृषि विज्ञान केन्द्रों में यह सीड हब स्थापित किए जाएंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने इसके लिए साढ़े सात करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। ये हब अलीराजपुर, शिवपुरी और ग्वालियर में शुरू किए जाएंगे। फसलों के बीज तैयार किए जाएंगे सीड हब के जरिए किसानों को तिलहन फसलों के उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। यहां मूंगफली, सरसों, तिल और सोयाबीन जैसी प्रमुख तिलहन फसलों के बीज तैयार किए जाएंगे। यह कदम किसानों को बेहतर पैदावार के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई का भी जरिया बनेगा। मूंगफली का बढ़ रहा रकबा पिछले कुछ वर्षों में मालवा क्षेत्र के अलावा चंबल के शिवपुरी इलाके में भी किसानों ने मूंगफली की खेती शुरू कर दी है। यहां मूंगफली का रकबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मांग के अनुरूप बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे। किसानों को मिलेगा फायदा ऐसे में नई किस्मों की मूंगफली बीज उत्पादन की दिशा में यह सीड हब किसानों की बड़ी जरूरत पूरी करेगा। अलीराजपुर में तिल सीड हब और ग्वालियर में सोयाबीन, सरसों, तिल और मूंगफली सीड हब बनेगा। सीड हब से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज मिलेंगे। इससे उनकी उपज बढ़ेगी और आय में भी इजाफा होगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल प्रदेश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आयल सीड हब बनाने के लिए राशि मंजूरी कर दी है। यह हब किसानों के लिए फायदेमंद साबित होंगे। उन्हें बाजार से बीज नहीं खरीदना पड़ेगा इससे उनकी लागत कम होगी।   

गरीब बच्चों की शिक्षा खतरे में, ग्वालियर के प्राइवेट स्कूलों को दो साल से नहीं मिला फंड

ग्वालियर आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिया जाता है। इन छात्रों की फीस शासन की ओर से स्कूलों को दी जाती है। जिले के प्राइवेट स्कूलों को आरटीई की फीस प्रतिपूर्ति दो साल से नहीं मिली है। प्राइवेट स्कूलों का शासन के पास करीब 20 करोड़ की राशि अटकी हुई है। ऐसे में आगामी समय में आरटीई के तहत स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों पर असर पड़ सकता है। आरटीई के तहत हर प्राइवेट स्कूल को अपने स्कूल की पहली कक्षा में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब व वंचित वर्ग के छात्रों काे प्रवेश देना होता है। इन छात्रों की फीस शासन स्तर से सीधे स्कूलों को दी जाती है। सत्र 2023-24 की प्रक्रिया पूरी, खातों में नहीं पहुंची राशि जिला शिक्षा केंद्र से सत्र 2023-24 की आरटीई फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 796 प्रपोजल बनाए गए और भुगतान के लिए राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल भेजे गए हैं। इन प्रपोजल की राशि करीब 11 करोड़ है। लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से इस सत्र की फीस प्रतिपूर्ति स्कूलों के खातों में नहीं पहुंची है। सत्र 2024-25 के भुगतान के लिए प्रकिया धीमी आरटीई के तहत 2024.25 के लिए फीस की प्रतिपूर्ति के लिए प्रक्रिया तो चल रही है, लेकिन अभी तक प्रपोजल सत्यापित नहीं हो पाए हैं। इस साल के लिए भी करीब 10 करोड़ की राशि प्राइवेट स्कूलों को मिलना है। प्रस्तावों का सत्यापन करने के लिए नोडल अफसरों की नियुक्ति न होने की वजह से प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। जबकि अब सत्र 2025-26 भी शुरू हो चुका है।   किस तरह होती है प्रक्रिया? राज्य सरकार निजी स्कूलों को उस बच्चे की फीस का भुगतान करती है जो आरटीई के तहत प्रवेश लेता है। यह राशि या तो स्कूल द्वारा ली जाने वाली वास्तविक फीस होती है या सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे होने वाला खर्च होता है, जो भी कम हो, वही स्कूल को दिया जाता है। इसके लिए स्कूलों को अपने यहां पढ़ने वाले बच्चाें की फीस प्राप्त करने के लिए प्रपोजल बनाकर जिला शिक्षा कार्यालय देना होता है। प्रपोजल आने के बाद नोडल अधिकारी या दूसरे शब्दों में क्षेत्र के बीआरसी इन प्रपोजलों का सत्यापन करते हैं। सत्यापन होने के बाद ही प्रपोजल राज्य शिक्षा केंद्र भेजे जाते हैं। लेकिन वर्तमान में स्कूलों के प्रपोजलों का सत्यापन ही नहीं हो पा रहा है। क्या कहते हैं स्कूल संचालक? प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकरन सिंह भदौरिया का कहना है कि सरकार निजी स्कूलों से मान्यता या अन्य किसी चीज के लिए फीस जमा कराना हो तो करा लेती है और उसके लिए समय भी नहीं देती है। लेकिन जब स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति आदि देने की बात आती है तो ध्यान नहीं देती है। समय पर फीस प्रतिपूर्ति न होने से स्कूलों को आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसका असर छात्रों की पढ़ाई की व्यवस्था पर भी पड़ता है। पंकज पाठक, एपीसी, जिला शिक्षा केंद्र, ग्वालियर ने बताया सत्र 2023-24 की प्रतिपूर्ति के लिए 796 प्रपोजल राज्य शिक्षा केंद्र को भेजे गए हैं। भुगतान राज्य शिक्षा केंद्र से ही स्कूलों के खातों में होना है। सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है।