samacharsecretary.com

रेलवे विकास योजना: भागलपुर में एफओबी, ड्रेनेज और रूट रिले सिस्टम से बदलेगा स्टेशन

भागलपुर  भागलपुर रेलवे स्टेशन में बड़े पैमाने पर यार्ड आधुनिकीकरण की शुरुआत हो गई है। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 के विस्तार के साथ ही फुटओवर ब्रिज (एफओबी) की सीढ़ियों को चौड़ा किया जा रहा है। एफओबी की एक सीढ़ी को तोड़कर उसके स्थान पर चौड़ी सीढ़ी का निर्माण किया जाएगा। हालांकि इस काम की शुरुआत अप्रैल में करने की योजना थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों के कारण देरी हुई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि प्लेटफार्म के विस्तार और यार्ड आधुनिकीकरण का कार्य दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के लिए कुल 20 करोड़ रुपये की राशि भी मंजूर की जा चुकी है। मालदा एडीआरएम ने किया निरीक्षण शनिवार को मालदा एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य अधिकारियों की टीम के साथ भागलपुर पहुंचे और निर्माणस्थल का निरीक्षण किया। यह उनके पद संभालने के बाद पहली बार निरीक्षण था। एडीआरएम ने कहा कि यार्ड का आधुनिकीकरण चरणबद्ध तरीके से होगा। प्लेटफार्म संख्या 2 और 3 का विस्तार कर 23 कोच तक लंबाई बढ़ाई जाएगी। स्टेशन का आधुनिकीकरण ट्रेनों की संचालन क्षमता और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाएगा। यह वीडियो भी देखें दो चरणों में होगा काम यार्ड और प्लेटफार्म के विस्तार का काम दो चरणों में पूरा किया जाएगा।     पहले चरण में: लोहिया पुल की ओर वाले एफओबी की सीढ़ियों की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी।     दूसरे चरण में: नाथनगर छोर वाली सीढ़ियों का काम शुरू होगा। इसके साथ ही प्लेटफार्मों को चौड़ा करने का काम भी धीरे-धीरे शुरू किया जाएगा। एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने और प्लेटफार्म विस्तार से यात्रियों की आने-जाने में सुविधा होगी प्लेटफार्म विस्तार से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी वर्तमान में भागलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2, 3, 5 और 6 की लंबाई कम है, जिससे बड़ी ट्रेनों को प्लेटफार्म 1 और 4 पर ही ठहराया जाता है। प्लेटफार्म दो-तीन के विस्तार और एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने के बाद दो नंबर प्लेटफार्म की रेल लाइन को मेन ट्रैक में बदला जाएगा, जिससे ट्रेनें 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकेंगी। वर्तमान में ट्रेनें 30 किमी प्रति घंटे की गति से ही प्लेटफार्म पार कर पाती हैं। प्लेटफार्म का विस्तार करने के लिए स्वीच और प्लेटफार्म बदलने होंगे, जिससे स्टेशन में अधिक जगह मिलेगी और ट्रेनों की संचालन क्षमता बढ़ेगी। रूट रिले सिस्टम से ट्रेन संचालन होगा आसान भविष्य में भागलपुर स्टेशन पर रूट रिले सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत सेंट्रलाइज पैनल से ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद, स्टेशन के पूर्वी और पश्चिमी पैनल की अलग-अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। स्टेशन मास्टर एक ही पैनल से ट्रेन संचालन और शंटिंग का निर्णय ले सकेंगे। पुराने सिस्टम की जगह सिंगलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू होगी। सेंट्रलाइज पैनल के लिए दो मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए कुछ रेलवे क्वार्टर तोड़े जाएंगे। यह व्यवस्था भागलपुर-दुमका रेललाइन के दोहरीकरण से भी जोड़ी जाएगी। यार्ड परिसर में ड्रेनेज और नई लाइनों का विकास यार्ड में ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे बरसात में जल जमाव की समस्या खत्म होगी। इसके अलावा बड़हरवा से भागलपुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। यार्ड के भीतर तीन नए लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेट भी लगाए जाएंगे। सुरक्षा और दुर्घटना रोकने की दृष्टि से यह कार्य अहम माना जा रहा है। इस विकास योजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे, और राशि मंजूर भी हो चुकी है। माड्यूल होल्डिंग और पार्सल बुकिंग कार्यालय का स्थानांतरण मालदा एडीआरएम ने सर्कुलेटिंग एरिया में माड्यूल होल्डिंग एरिया का निरीक्षण किया। इसके लिए रिजर्वेशन टिकट बुकिंग केंद्र के सामने स्थान चिन्हित किया गया है। होल्डिंग एरिया के निर्माण के लिए रेलवे कर्मियों के क्वार्टर तोड़े जाएंगे, और पार्सल बुकिंग कार्यालय को होल्डिंग एरिया के बगल में शिफ्ट किया जाएगा। बुक किए गए पार्सलों को स्टेशन तक पहुंचाने के लिए लिंक रोड का निर्माण किया जाएगा। होल्डिंग एरिया से प्लेटफार्म तक जाने के लिए फुटओवर ब्रिज का निर्माण होगा। एडीआरएम ने कहा कि नक्शा मंजूर होने के बाद ही काम शुरू किया जाएगा। योजना के अनुसार, इस साल छठ पर्व से पहले कार्य शुरू हो पाएगा

गर्मी में यात्रियों को राहत, रेलवे ने चलाई नई स्पेशल ट्रेन सेवा

पटना   रेल यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से खास फैसला लिया गया है. गर्मी के मौसम में स्टेशनों पर उमड़ने वाली भीड़ की संभावना को देखते हुए बनारस और कोलकाता के बीच समर स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी. यह ट्रेन अप्रैल में तीन चक्कर लगाएगी, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी. स्पेशल ट्रेन की क्या होगी टाइमिंग? ट्रेन नंबर- 05048, 14, 21 और 28 अप्रैल को सुबह 10:45 बजे बनारस से रवाना होगी. यह वाराणसी जंक्शन सहित प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी और दोपहर 3:10 बजे छपरा जंक्शन पहुंचेगी. हावड़ा जैसे विभिन्न स्टेशनों से होते हुए, यह अगले दिन सुबह 6:15 बजे कोलकाता पहुंचेगी. इसके बाद वापसी में ट्रेन नंबर- 05047, 15, 22 और 29 अप्रैल को सुबह 8:25 बजे कोलकाता से रवाना होगी और रात 11:20 बजे छपरा जंक्शन पहुंचेगी. यह अगले दिन सुबह 4:15 बजे बनारस पहुंचेगी. इन स्टेशनों पर होगा ट्रेन का स्टॉपेज जानकारी के मुताबिक, यह ट्रेन वाराणसी जंक्शन, औंड़िहार, गाजीपुर सिटी, बलिया, रेवती और सुरेमनपुर होते हुए दोपहर 3:10 बजे छपरा जंक्शन पहुंचेगी. इसके बाद दिघवारा, सोनपुर, हाजीपुर, शाहपुर पटोरी, बरौनी, किऊल, झाझा, जसीडीह, मधुपुर, चित्तरंजन, आसनसोल, दुर्गापुर, बर्द्धमान, बैंडेल और नैहाटी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकते हुए अगले दिन सुबह 6:15 बजे कोलकाता पहुंच जाएगी. ट्रेन में यात्रियों के लिए सुविधाएं यात्रियों की सुविधा के लिए इस स्पेशल ट्रेन में 20 एसी थर्ड इकोनॉमी कोच और दो जनरेटर-सह-सामान वैन होंगे. रेलवे प्रशासन यात्रियों को इस विशेष सेवा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है. इस तरह से रेल यात्रियों के लिए खास तोहफा माना जा रहा है. गर्मी के मौसम में लोग बिहार से बाहर छुट्टियां मनाने जाते हैं. इसकी वजह से ट्रेन में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है. इसी को देखते हुए स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया.

रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव: अब ट्रेन टॉयलेट में नहीं होंगे चेन वाले मग

नई दिल्ली भारतीय रेलवे की ट्रेनों से हर दिन एक बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। एसी क्लास से लेकर नॉन एसी कोच तक में लोग अपने-अपने हिसाब से जाते हैं। वहीं, अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं तो आपने कभी न कभी तो ट्रेन में बने टॉयलेट का भी इस्तेमाल किया होगा? यहां आपने टॉयलेट में चेन से बंधा स्टील का मग तो जरूर देखा होगा? क्योंकि ये काफी पुरानी व्यवस्था है। पर अब इस व्यवस्था को बदला जाएगा यानी अब ट्रेन में बने टॉयलेट में लगे चेन से बंधे मगों को हटाया जाएगा। इसको लेकर रेल मंत्रालय ने एक फैसला लिया है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में। अगली स्लाइड्स में आप इस नए निर्देश के बारे में जान सकते हैं… रेलवे द्वारा क्या फैसला लिया गया है?     रेल मंत्रालय की तरफ से सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया गया है कि ट्रेन के टॉयलेट में जो चेन से बंधा स्टील मग है, उस हटाया जाए     साथ ही टॉयलेट के फर्श के पास जो पानी का नल है उसे भी हटाने के निर्देश मंत्रालय द्वारा दिए गए हैं स्टील मग की जगह अब क्या होगा?     अपने निर्देश में मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि इन मग को हटाकर जेट स्प्रे लगाए जाएंगे     मंत्रालय ने सभी जोनों से कहा है कि वे अपनी चुनी हुई 19 ट्रेनों के एसी कोच में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करें     साथ ही 3 महीने बाद अनुपालन रिपोर्ट और प्रदर्शन संबंधी फीडबैक मांगा गया है क्यों लिया गया ये फैसला?     अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन जब स्पीड में होती है तो मग से पानी भरते समय ये फर्श पर गिर जाता है जिससे टॉयलेट का फर्श गंदा हो जाता है     फिर टॉयलेट का फर्श पूरा गीला हो जाता है और बदबू आने लगती है आदि     टॉयलेट का फर्श साफ रह सके, इसलिए जेट स्प्रे लगाए जाएंगे किन-किन कोच में मिलेगी सुविधा?     फिलहाल जेट स्प्रे एसी कोच में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाए जाएंगे     सबकुछ ठीक रहने पर माना जा रहा है कि जेट स्प्रे फिर बाकी कोचों में भी लगाए जाएंगे  

रेलवे में फिर हुआ कछुआ तस्करी का मामला, आरोपी अब भी फरार

गयाजी पूर्व मध्य रेल के डी.डी.यू. मंडल अंतर्गत रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) पोस्ट गया ने ऑपरेशन विलेप के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 48 अदद जीवित कछुओं को बरामद किया है। यह कार्रवाई गाड़ी संख्या 13010 डाउन (दून एक्सप्रेस) के स्लीपर कोच एस-7 की चेकिंग के दौरान की गई। बरामद सभी कछुओं को बाद में वन विभाग को सुपुर्द कर दिया गया है। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी निरीक्षक बनारसी यादव ने बताया कि चेकिंग के दौरान स्लीपर कोच से जीवित कछुए बरामद किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 24 लाख रुपये आंकी गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में फिलहाल किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। बार-बार केवल कछुओं की बरामदगी होना और तस्करों का हाथ न लगना कई सवाल खड़े करता है। आखिर तस्कर क्यों नहीं पकड़े जा रहे हैं, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। जबकि कछुए स्लीपर कोच से ही बरामद किए गए हैं। इससे पहले भी स्लीपर कोच से करीब 51 लाख रुपये मूल्य के कछुए बरामद किए गए थे, लेकिन उस मामले में भी तस्करों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। इससे पूर्व नेताजी एक्सप्रेस से भी कछुओं की बरामदगी हुई थी, लेकिन उस मामले में भी किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। लगातार स्लीपर कोच से कछुओं की तस्करी के मामलों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि यह किसी शातिर और आदतन गिरोह का काम हो सकता है। जिस तरह से स्लीपर कोच से बार-बार कछुए पकड़े जा रहे हैं, उससे यह स्वाभाविक रूप से कहा जा सकता है कि तस्कर स्वयं कछुओं की निगरानी करते हुए ट्रेन से सफर कर रहा होगा। चूंकि स्लीपर कोच में बिना टिकट यात्रा संभव नहीं है, ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि तस्कर ट्रेन के कोच में ही मौजूद रहते होंगे। इस पूरी कार्रवाई में आरपीएफ, आंतरिक आसूचना शाखा और रेलवे पुलिस के कई अधिकारी और जवान शामिल रहे। इनमें बनारसी यादव, निरीक्षक, आरपीएफ गया; चंदन कुमार, निरीक्षक, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; पवन कुमार, सहायक उप निरीक्षक, आरपीएफ गया; राकेश कुमार सिंह, आरक्षी, आरपीएफ गया; अमित कुमार, आरक्षी, आरपीएफ गया; अनील प्रसाद, आरक्षी, आरपीएफ गया; विपिन कुमार, आरक्षी, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; महेश ठाकुर, प्रधान आरक्षी, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; मुकेश कुमार, उप निरीक्षक, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; राजनीतिक प्रसाद, उप निरीक्षक, रेलवे पुलिस, गया तथा मनोज कुमार, प्रधान सहायक निरीक्षक, रेलवे पुलिस, गया शामिल थे। आरपीएफ के अनुसार बरामद 48 जीवित कछुओं की कुल अनुमानित कीमत 24 लाख रुपये (₹24,00,000) है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और तस्करों की पहचान व गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।  

यात्रियों के लिए अलर्ट: रेलवे ने जारी किए नए एंट्री निर्देश

नई दिल्ली भारतीय रेल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अनारक्षित ट्रेन टिकट के लिए प्रिंटेड कॉपी साथ रखना अनिवार्य करने संबंधी कोई नया नियम जारी नहीं हुआ है। यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के जवाब में दी गई है, जिनमें नियमों में बदलाव का दावा किया गया था। रेलवे के अनुसार, मौजूदा नियम पहले की तरह ही लागू हैं। यात्रियों को ध्यान रखना होगा कि अगर उन्होंने अनारक्षित टिकट बुक किया है और उसका भौतिक प्रिंट प्राप्त किया है, तो यात्रा के दौरान इसे अपने पास रखना आवश्यक है। वहीं, डिजिटल माध्यम से टिकट बुक करने वाले यात्री मोबाइल डिवाइस पर डिजिटल टिकट दिखाकर सत्यापन करा सकते हैं। रेलवे ने दोहराया कि इस संबंध में कोई नया निर्देश जारी नहीं किया गया है और मीडिया में आई जानकारी भ्रामक है। वंदे भारत ट्रेनों में अब मिलेंगे स्थानीय व्यंजन यात्रियों के सफर को और सुखद बनाने के लिए रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन शामिल किए हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को स्थानीय स्वाद और भारत की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराना है। मुख्य व्यंजन इस प्रकार हैं: महाराष्ट्र: कांदा पोहा, मसाला उपमा (22229 CSMT–MAO) आंध्र प्रदेश / दक्षिण भारत: डोंडकाया करम पोड़ी फ्राई, आंध्र कोड़ी कुरा गुजरात: मेथी थेपला (20901 MMCT–GNC), मसाला लौकी (26902 SBIB–VRL) ओडिशा: आलू फूलकोपी (22895 HWH–पुरी) केरल: सफेद चावल, पचकका चेरुपायर मेझुक्कु पेराटी, कडला करी, केरल पराठा, सादा दही, पलाडा पायसम, अप्पम (20633/34 कासरगोड–त्रिवेंद्रम, 20631/32 मंगलुरु–त्रिवेंद्रम) पश्चिम बंगाल: कोषा पनीर, आलू पोटोल भाजा, मुर्गिर झोल (20872 ROU–HWH, 22895 HWH–PURI, 22302 NJP–HWH) बिहार: चंपारण पनीर, चंपारण चिकन (22349 PNBE–RNC, 22348 PNBE–HWH) डोगरी व्यंजन: अंबल कद्दू, जम्मू चना मसाला (26401-02, 26403-04) कश्मीरी व्यंजन: टोमैटो चमन, केसर फिरनी (26401/02, 26403/04 SVDK–SINA)  

सूटकेस का साइज भी मायने रखेगा! रेलवे ने बढ़ाई चेकिंग की शर्तें

  नई दिल्ली IRCTC ने ट्रेनों में सामान ले जाने को लेकर नए नियम बनाए हैं। इन नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री तय सीमा से ज्यादा सामान लेकर यात्रा करता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क (एक्स्ट्रा चार्ज) देना होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इन नियमों की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अब ट्रेन में भी हवाई यात्रा की तरह ज्यादा वजन के सामान पर एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा। कितना सामान ले जा सकते हैं यात्री? रेलवे ने अलग-अलग कोच के लिए सामान की सीमा तय की है: AC थ्री-टियर और चेयर कार: 40 किलो तक सामान फ्री स्लीपर क्लास: 80 किलो तक सेकंड क्लास: 70 किलो तक फर्स्ट क्लास और AC टू-टियर: 50 किलो तक फ्री, ज्यादा से ज्यादा 100 किलो तक AC फर्स्ट क्लास: 70 किलो तक फ्री, शुल्क देकर 150 किलो तक ज्यादा सामान ले जाने पर कितना चार्ज लगेगा? अगर कोई यात्री तय सीमा से ज्यादा सामान लेकर यात्रा करता है, तो उससे बैगेज रेट का 1.5 गुना शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क सिर्फ उसी क्लास की तय अधिकतम सीमा तक ही लागू होगा। सामान के साइज को लेकर नियम यात्री ट्रेन में सिर्फ वही ट्रंक, सूटकेस या बॉक्स ले जा सकते हैं जिनका साइज अधिकतम 100 सेमी × 60 सेमी × 25 सेमी हो। अगर सामान इससे बड़ा है, तो उसे कोच में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे सामान को ब्रेक वैन (SLR) या पार्सल वैन में बुक कराना होगा।

टिकट खरीदने में बदलाव, रेलवे ने तय किया—विंडो टिकट पर OTP जरूरी

नई दिल्ली रेलवे ने दलालों पर लगाम लगाने के लिए विंडो तत्‍काल टिकट बुकिंग पर बड़ा फैसला किया है.अब बुकिंग के दौरान यात्री के पास ओटीपी आएगा, जिसके बाद टिकट बुकिंग होगी. अगले दिन कुछ दिनों में देशभर में चलने वाली सभी ट्रेनों में यह व्‍यवस्‍था लागू होगी. रेलवे के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में सभी ट्रेनों के तत्काल काउंटर टिकटों के लिए ओटीपी आधारित सिस्टम लागू होगा. इसका उद्देश्‍य तत्काल सुविधा का दुरुपयोग और दलालों पर लगाम लगाकर यात्रियों को आसानी से टिकट उपलब्‍ध कराना है. दरअसल, रेलवे ने आम यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए ओटीपी आधारित तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम का प्रस्ताव रखा. सबसे पहले जुलाई 2025 में ऑनलाइन तत्काल टिकटों के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण शुरू किया गया. इसके बाद अक्टूबर 2025 में  सभी जनरल रिजर्वेशन की फर्स्ट-डे बुकिंग के लिए OTP आधारित ऑनलाइन सिस्टम लागू हुआ. दोनों सिस्टम आम यात्रियों द्वारा सफलतापूर्वक अपनाए गए और इससे रिजर्वेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है. पायलट प्रोजेक्‍ट पूरा भारतीय रेलवे ने 17 नवंबर 2025 से इसका पायलट प्रोजेक्‍ट शुरू किया था. अभी केवल 52 ट्रेनों में ओटीपी अनिवार्य किया गया था, जो काफी सफल रहा है. इसी वजह से सभी ट्रेनों में यह व्‍यवस्‍था लागू की जा रही है. जल्‍द ही इसकी डेट का ऐलान किया जाएगा. यह तरह होगी बुकिंग विंडो जाकर रिवर्जेशन कराते समय यात्री रिजर्वेशन फॉर्म में अपना मोबाइल नंबर भरना होगा. अगर वो तत्‍काल टिकट बुक करता है तो उसके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा. विंडो पर बैठा कर्मी आपसे ओटीपी पूछेगा, ओटीपी डालने के बाद ही टिकट कन्फर्म होगा. इस तरह दलालों से मिलेगा छुटकारा इससे दलालों का खेल पूरी तरह बंद हो जाएगा, क्योंकि बिना असली यात्री के मोबाइल के टिकट नहीं बन सकेगा. अगले कुछ दिनों में यह ओटीपी सिस्टम सभी बची हुई ट्रेनों के तत्काल काउंटर टिकटों पर भी लागू हो रहा है. भारतीय रेलवे का मानना है कि यह कदम तत्काल कोटे की टिकटों को वाकई जरूरतमंद यात्रियों तक पहुंचाने में बड़ी मदद करेगा. ऐसे होगा सत्यापन रेलवे ने 17 नवंबर 2025 को रिजर्वेशन काउंटरों से बुक होने वाले तत्काल टिकटों के लिए ओटीपी आधारित प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया. फिलहाल यह व्यवस्था 52 ट्रेनों तक विस्तारित की जा चुकी है. इस सिस्टम के तहत जब यात्री रिजर्वेशन फॉर्म भरकर तत्काल टिकट बुक करते हैं तो उनके द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है. इसमें यात्रियों का टिकट तभी सुनिश्चित हो पाता है जब ओटीपी का सफल सत्यापन हो जाता है. यात्रियों को मिलगी बेहतर सुविधा आने वाले दिनों में यह ओटीपी आधारित तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम सभी शेष ट्रेनों पर लागू कर दिया जाएगा. यह कदम रेलवे टिकटिंग में पारदर्शिता, यात्री सुविधा और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है. अब सभी ट्रेनों में OTP आने वाले कुछ दिनों में, यह OTP आधारित Tatkal टिकट सिस्टम सभी बाकी ट्रेनों के लिए भी लागू कर दिया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य Tatkal सुविधा के दुरुपयोग को रोकना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जरूरतमंद यात्रियों को आसानी से हाई-डिमांड टिकट मिल सकें। रेलवे का कहना है कि टिकट बुकिंग में पारदर्शिता, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। तत्काल टिकट टाइमिंग क्या है भारतीय रेल के ट्रेनों में तत्काल टिकट की बुकिंग यात्रा की तारीख से एक दिन पहले शुरू होती है। ट्रेन के एसी क्लास के लिए सुबह 10:00 बजे और नॉन-एसी क्लास के लिए सुबह 11:00 बजे बुकिंग शुरू होती है। उदाहरण के लिए, यदि आप 12 दिसंबर को यात्रा करना चाहते हैं, तो एसी क्लास के लिए तत्काल बुकिंग 11 दिसंबर को सुबह 10 बजे से और नॉन-एसी क्लास के लिए 11 दिसंबर को सुबह 11 बजे से शुरू होगी।

रेलवे की बड़ी पहल: दुर्ग से बंद पड़ी ट्रेनों को फिर शुरू करने पर मंथन

रायपुर रेलवे एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक दुर्ग से चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस को पिछले दिनों बंद कर दिया गया था, अब उसे फिर से चलाने की तैयारी है. ये ट्रेन कोई और नहीं बल्कि दुर्ग-जगलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस है. विशाल विशाखापट्टनम डिवीजन को दो हिस्से में कर नया रायगढ़ डिवीजन तैयार कर लिया गया है. इस प्रक्रिया के बाद रायगड़ा डिवीजन अपनी आय बढ़ाने नई योजनाओं पर विचार कर रही है. इसके 5 वर्षों से बंद दुर्ग-जगदलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस को नई समय सारणी के साथ जगदलपुर के बजाय किरंदुल से चलाने पर विचार किया जा रहा है. तर्क दिया जा रहा है कि जगदलपुर से किरंदुल के  मध्य रेल दोहरीकरण का कार्य इस वर्ष पूर्ण हो जाएगा. रेलवे के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विशाखापट्टनम से अलग बनाया गया रायगढ़ डिवीजन अपनी आय बढ़ाने हर संभव विचार कर रही है. उसका पूरा ध्यान बस्तर की तरफ है. सूत्रों ने बताया कि हालांकि रायगढ़ डिवीजन का सारा कार्य फिलहाल विशाखापट्टनम से हो रहा है किंतु नया डिवीजन बनाए जाने के बाद इस डिवीजन का अपना रिकॉर्ड अलग होगा इसलिए रायगढ़ डिवीजन का पूरा ध्यान बस्तर की तरफ है. पूरा ध्यान बस्तर की ओर बचेली किरंदुल लौह अयस्क परियोजनाएं अब रायगड़ा डिविजन अंतर्गत आ गई है और यह परियोजनाएं ही इस डिवीजन की आय का मुख्य स्रोत है. रेल सुविधाओं को तरस रहे बस्तरवासियों को यह डिविजन शांत रखना चाहती है. लौह अयस्क की दुलाई से आशातीश राजस्व प्राप्त करने के अलावा रेलवे बस्तर वालों की सुविधाओं का भी ख्याल रखना चाहती है. चूंकि बैलाडीला प्रक्षेत्र से अब दो निजी कंपनियां भी लौह अयस्क उत्खनन करने जा रही है. दोहरीकरण पूर्ण होने का इंतजार सूत्रों ने बताया कि अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से ही नया डिवीजन 5 साल से बंद जगदलपुर-दुर्ग इंटरसिटी एक्सप्रेस को फिर से चालू करने गंभीर से विचार कर रही है. यह तर्क दिया जा रहा है कि बचेली, किरंदुल, भांसी, दंतेवाड़ा गीदम क्षेत्र के लोगों को ट्रेन में यात्रा करने के लिए जगदलपुर स्टेशन आना पड़ता है. दुर्ग एक्सप्रेस को किरंदुल से शुरू करने पर इस एक्सप्रेस को पर्याप्त पैसेंजर मिलेंगे. इस तर्क के साथ ही दुर्ग एक्सप्रेस को नई समय सारणी के साथ किरंदुल से शुरू करने व्यापक चर्चा चल रही है. बताया गया कि कामलूर से बचेली के मध्य करीब 40 किमी रेल दोहरीकरण कार्य 2025 के अंत तक पूर्ण कर लिया जाएगा. इसके पूर्ण होते ही दुर्ग एक्सप्रेस को चलाने गंभीरता की चर्चा हो रही है.

रेलवे का ऐतिहासिक कदम: 40 साल बाद समय पालन और ट्रैक रोकथाम सुनिश्चित

झांसी  उत्‍तर मध्‍य रेलवे के झांसी डिवीजन 40 साल में पहली बार ऐसा काम किया है, जिससे पंच्‍यू‍अलिटी रेट बढ़ेगा यानी आपकी ट्रेन समय पर चलेंगी. इतना ही नहीं सफर के दौरान ट्रैक के बीचोंबीच ट्रेन खड़ी भी नहीं होगी. यहां पर 40 साल पुराने 40 साल पुराने ओएचई वायर को बदलने का काम किया जा रहा है. झांसी रेल डिवीजन द्वारा रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. पुरानी हो चुकी चीजों को बदलने और नए को लगाने काम किया जा रहा है. डिवीजन द्वारा अक्टूबर माह में 33 किलोमीटर ट्रैक पर ज्वाइंटलेस कॉन्टैक्ट वायर लगाए गए हैं. इस वित्तीय साल में अभी तक 94.2 किलोमीटर ट्रैक पर ज्वाइंटलेस कॉन्टैक्ट वायर बदले जा चुके हैं. डिवीजन के विद्युत विभाग द्वारा एनआईसीसीओ मेक ज्वाइंट कॉन्टैक्ट वायर के स्थान पर ज्वाइंटलेस कॉन्टैक्ट वायर लगाए जा रहे हैं. वर्ष 1985-86 में जब रेलट्रैक पर विद्युतीकरण का कार्य शुरु किया गया था, तब पुरानी टेक्नोलॉजी के कारण 1500 मीटर OHE वायर (एक ड्रम) की लंबाई में कई जगहों पर ब्रेज़िंग ज्वाइंट लगाए जाते थे. इस वजह से कई बार OHE वायर टूटने की शिकायत आती थी. इस समस्या को दूर करने के लिए विद्युत विभाग द्वारा बिना किसी ज्वॉइंट वाले(ज्वाइंट लेस) कॉन्टैक्ट वायर लगाए जा रहे हैं. मंडल द्वारा अभी तक 153.6 किलोमीटर ज्वाइंटलेस वायर लगाए जा चुका है. डीआरएम अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि रेलवे आधुनिक हो रहा है. जरूरत के अनुसार आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं. बगैर जॉइंट वाले कॉन्टैक्टवायर ओएचई फेल होने से होने वाले ब्रेक डाउन में कमी आई है. बल्कि उनकी संख्या अब जीरों के बराबर है. ट्रेनों की पंच्‍यूअलिटी में भी बेहतर होगा. इस काम में तेजी लाने के लिए दो टावर वैगन अतिरिक्त लगाए गए हैं, जिससे यह कार्य जल्‍द पूरा किया जा सके.

छठ पूजा के लिए 12000 स्पेशल ट्रेनें? रेलवे का बड़ा फैसला और तैयारी, देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली त्योहारी सीजन के दौरान रेलवे की तैयारी पर, रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक, दिलीप कुमार ने कहा, “भारतीय रेलवे ने इस वर्ष दिवाली और छठ पूजा के अवसर पर 12,000 से अधिक ट्रेनों के संचालन की व्यापक योजना बनाई है. पिछले कुछ दिनों में, हमने जिन ट्रेनों का संचालन किया है, उनके माध्यम से हमने लगभग 1 करोड़ यात्रियों को विशेष ट्रेनों के माध्यम से सुविधा प्रदान की है. इन ट्रेनों को चलाने का मुख्य उद्देश्य बड़ी संख्या में उन लोगों को सुविधा प्रदान करना है जो त्योहारों के दौरान अपने घरों की यात्रा करना चाहते हैं.” पिछले 4 दिनों मं 15 लाख यात्रियों ने यात्रा की रेलवे के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक ने बताया, “पिछले साल, हमने 7,724 विशेष ट्रेनें चलाईं. इस साल हमने 12,000 ट्रेनें चलाने का फैसला किया है… पिछले 4 दिनों में, लगभग 15 लाख यात्रियों ने नई दिल्ली के विभिन्न स्टेशनों का उपयोग करके अपने-अपने गंतव्य तक यात्रा की है.” यात्रियों सुविधाएं बढ़ाई गईं, 12 लाख रेलवे कर्मचारी कर रहे दिन-रात काम रेलवे के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक ने बताया- “हमने सभी प्रमुख स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया बनाए हैं, सभी स्टेशनों पर टिकट काउंटरों की सुविधाओं में वृद्धि की है. सभी रेलवे व्यवस्थाओं की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. 12 लाख रेलवे कर्मचारी दिन-रात अथक परिश्रम कर रहे हैं ताकि यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाया जा सके.” पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में स्पेशल और सामान्य ट्रेनों में कुल 46 कोच जोड़े गए हैं, जिससे प्रतिदिन लगभग 12,000 यात्रियों की क्षमता बढ़ी है कई क्षेत्रों से कोलकाता और बेंगलुरु (SMVT बेंगलुरु) के लिए पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं या नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं। पिछले 4 दिनों मं 15 लाख यात्रियों ने यात्रा की रेलवे के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक ने बताया, “पिछले साल, हमने 7,724 विशेष ट्रेनें चलाईं. इस साल हमने 12,000 ट्रेनें चलाने का फैसला किया है… पिछले 4 दिनों में, लगभग 15 लाख यात्रियों ने नई दिल्ली के विभिन्न स्टेशनों का उपयोग करके अपने-अपने गंतव्य तक यात्रा की है.” लालकुआं से कोलकाता के बीच स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है जो यूपी के कई स्टेशनों जैसे भोजीपुरा, पीलीभीत, लखीमपुर, सीतापुर, गोंडा, बस्ती और गोरखपुर से होकर गुजरती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) भी बेंगलुरु से उत्तरी शहरों, जैसे पटना और हावड़ा तक यात्रियों को सुविधा देने के लिए स्पेशल ट्रेनें चला रहा है और अतिरिक्त कोच जोड़ रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम करने के लिए होल्डिंग एरिया और अतिरिक्त सुरक्षा बल (RPF) भी तैनात किए गए हैं।आरपीएफ और रखरखाव कर्मचारी हाई अलर्ट पर हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल हमने अधिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं। यात्रियों की सहायता के लिए स्टेशनों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। प्रमुख स्टेशनों पर नियंत्रण कक्षों की निगरानी मंडल अधिकारियों द्वारा चौबीसों घंटे की जा रही है