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खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जनवितरण प्रणाली की खाली पड़ी दुकानों को भरने की कवायद की शुरू

पटना, आज दिनांक 27.08.2025 को प्रधान सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग श्री पंकज कुमार की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा बैठक की गई। आज की समीक्षा बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिला आपूर्ति पदाधिकारी, एवं जिला प्रबंधक BSFC वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। आज की समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि लक्षित जनवितरण प्रणाली दुकानों की रिक्तियों को नियमानुसार कार्रवाई करते हुए यथाशीघ्र भरा जाए। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का भी निदेश प्रधान सचिव ने दिया। प्रधान सचिव ने CMR चावल से संबंधित भुगतान को भी 15 सितंबर से पहले पूर्ण करने का निर्देश दिया। अगस्त माह के खाद्यान्न वितरण में तेजी लाने का निर्देश देते हुए प्रधान सचिव ने इसे 31 अगस्त से पहले माह अगस्त का वितरण पूरा करने का निर्देश दिया। प्रधान सचिव ने सभी पदाधिकारियों को सार्वजनिक जनवितरण प्रणाली के विक्रेताओं को जल्द से जल्द उनके लंबित मार्जिन मनी का भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक जनवितरण प्रणाली के विक्रेताओं के हितों में लिए गये निर्णय से भी सभी पदाधिकारियों को अवगत कराया गया। सार्वजनिक जनवितरण प्रणाली की दुकानों में सोमवार को साप्ताहिक बंदी के साथ-साथ प्रमुख त्योहारों के अवसर पर सार्वजनिक जनवितरण प्रणाली की दुकानों को बंद रखने की अनुमति दी गई है। अब राज्य सरकार ने पहल करते हुए राज्य मद से डीलर मार्जिन में रू० 47/- प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, जो सितंबर माह से लागू होगी। राज्य सरकार की इस पहल से राज्य के लगभग 50 हजार जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत कार्यरत डीलरों को प्रोत्साहन मिलेगा। आज की समीक्षा बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सचिव मो० नैय्यर इकबाल, विशेष सचिव श्री उपेन्द्र कुमार, संयुक्त सचिव श्री रवीन्द्र कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री विनोद तिवारी, विशेष कार्य पदाधिकारी सुश्री सृष्टि प्रिया के साथ बिहार राज्य खाद्य असैनिक आपूर्ति निगम के पदाधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री जी ने हादसे में कालकवलित हुए उत्तरप्रदेश के निवासी समस्त मृतक परिजनों को आर्थिक सहायता करने के दिये निर्देश

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जम्मू कश्मीर के वैष्णो देवी यात्रा में हुए प्राकृतिक आपदा की चपेट में आये मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री जी ने कालकवलित हुए उत्तरप्रदेश के निवासी समस्त मृतक परिजनों को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता के दिये निर्देश। मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों को मृतकों के शव उनके घर पहुंचाए जाने की व्यवस्था करने के भी दिये निर्देश।

गंगा के विस्तृत प्रवाह वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश नमामि गंगे कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा

नई दिल्ली/लखनऊ,  नदियाँ और जल संसाधन सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इनका पुनर्जीवन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की अग्रणी पहलों ने इसे वैश्विक जल संवाद में एक प्रमुख आवाज बना दिया है। इस वर्ष स्टॉकहोम वर्ल्ड वॉटर वीक में इसकी भागीदारी भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है, जो जल संबंधी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम योगदान दे रही है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल वॉटर इंस्टीट्यूट (SIWI) द्वारा वर्ष 1991 से आयोजित यह प्रतिष्ठित आयोजन अब वैश्विक नीति निर्धारकों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सबसे प्रभावशाली मंच बन चुका है। गंगा के विस्तृत प्रवाह वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश नमामि गंगे कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा है। वाराणसी में रिवरफ्रंट विकास, कानपुर में सीवेज शोधन संयंत्रों की स्थापना तथा छोटे एवं मझौले नगरों में सामुदायिक भागीदारी आधारित पहलें इस अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का केंद्र बिंदु बना "नदी शहरों की पुनर्कल्पना: जलवायु-संवेदी और बेसिन-केंद्रित शहरी विकास", जिसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) और जर्मन विकास सहयोग (GIZ) ने मिलकर नेतृत्व किया। इस सत्र में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की चुनौतियों के बीच, नदी-केंद्रित विकास ही शहरों को टिकाऊ और सुरक्षित बना सकता है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नमामि गंगे मिशन ने भारत में नदियों के पुनरुद्धार के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव की नींव रखी है। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत अब तक 40 हजार करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जा चुका है, जो गंगा और उसकी सहायक नदियों को उनके प्राचीन रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे मिशन एक जीवित उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि जब आधुनिक तकनीक और नवाचार का संगम होता है, तो नदियों को पुनः जीवनदायिनी बनाने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि मिशन के अंतर्गत की गई पहलें, जैसे हाइब्रिड एनीटी मॉडल आधारित एसटीपी, सोलर पावर्ड ट्रीटमेंट प्लांट और मृदा जैव प्रौद्योगिकी, वैश्विक मानकों को स्थापित करने में योगदान दे रही हैं। श्री मित्तल ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कार्यक्रम को एक विशाल जन आंदोलन में बदला गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। वैश्विक सहयोगों की अहमियत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व बैंक, जीआईजेड, सी-गंगा, नीदरलैंड्स और डेनमार्क का सहयोग नदी विज्ञान, जल सुरक्षा और प्रबंधन में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की समस्याओं का हल केवल नदी-बेसिनों के संरक्षण और प्रबंधन में ही छुपा है। इस संदर्भ में भारत की 'नमामि गंगे' पहल को आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे अन्य देशों के लिए अनुकरणीय माना गया। प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती, आर्द्रभूमि संरक्षण और जलवायु-स्मार्ट शहरी विकास जैसे कदमों ने इस मिशन को वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब शहरों को केवल उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि नदी-बेसिनों के सक्रिय संरक्षक के रूप में कार्य करना होगा। जलवायु परिवर्तन के दौर में नदियों का संरक्षण अनिवार्य बन चुका है और इसके लिए नदी-केंद्रित शहरी विकास को अपनाना होगा। सत्र के समापन में यह महत्वपूर्ण संदेश सामने आया – जब शहर मिलकर काम करेंगे और सीमा पार सोचेंगे, तो नदियों को बचाया जा सकता है और उन्हें समृद्ध भी किया जा सकता है। यही स्थिरता और समृद्धि का वास्तविक आधार होगा, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करेगा।

18.46 करोड़ रुपये की लागत से न्यायिक भवनों में लगेंगे सीसीटीवी : सम्राट चौधरी

नीतीश सरकार न्यायिक ढांचे को मज़बूत करने के लिए लगातार कर रही है काम पटना, बिहार के उपमुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने बताया कि न्यायिक भवनों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के संचालन और रखरखाव के लिए 18 करोड़ 46 लाख 44 हजार 472 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति सीसीटीवी कैमरों और दूसरे उपकरणों के संचालन, वार्षिक रख-रखाव (मैन पावर भी शामिल) के लिए दिया गया है। स्वीकृत राशि का प्रयोग वित्तीय वर्ष 2025-26  में 1 मार्च 2025 से 28 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। चौधरी ने कहा- इस कदम से न्यायिक भवनों में सुरक्षा और पारदर्शिता और अधिक सुदृढ़ होगी। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार न्यायालयों में कार्यरत जजों और कर्मचारियों को बेहतर कार्यपरिसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का मानना है कि न्यायिक क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को यदि समुचित संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और बेहतर कार्य परिवेश उपलब्ध कराया जाए तो आम लोगों को समयबद्ध और प्रभावी न्याय दिलाया जा सकेगा। हाल में ही सरकार ने अनुमंडलीय न्यायालय पीरो में 20 जज क्वार्टर और छह मंजिला ट्रांजिट-कम-गेस्ट हाउस (G+6) के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की थी। और अब न्यायिक भवनों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के संचालन और रखरखाव के लिए 18 करोड़ 46 लाख 44 हजार 472 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

बर्थडे पर अखिलेश का गिफ्ट, 100 रुपए लेते ही लाल हो गईं इकरा हसन के गाल

लखनऊ शामली से सपा सांसद इकरा हसन कल यानि 26 अगस्‍त को जन्‍मदिन था, जिसको लखनऊ के एक 5 स्टार होटल में बनाया गया। इस दौरान अखिलेश यादव भी वहां पहुंचे और उनको ऐसा बर्थडे गिफ्ट दिए कि इकरा हसन हैरान हो गईं। दरअसल, अखिलेश यादव ने 100 रूपये का गिफ्ट दिया था, जिसे लेते हुए वह काफी शर्मा रही थी। बता दें कि उनके जन्मदिन के मौके पर डिंपल यादव और जया बच्चन ने मिलकर केक कटवाया था। जन्मदिन के मौके पर अखिलेश यादव के परिवार के साथ मछली शहर से सासंद और रिंकू सिंह की होने वाली पत्नी प्रिया सरोज भी वहां पर मौजूद थीं। जैसे ही केक सामने आया, सभी सांसद एक स्वर में इकरा हसन को हैप्पी बर्थडे विश करने लगे। वहां मौजूद सांसदों ने तालियां बजाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। इसी बीच, अखिलेश यादव ने 100 रुपए का नोट निकाला और इकरा को जन्मदिन पर गिफ्ट किया। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे।   इकरा ने शेयर कीं तस्‍वीरें आपको बता दें कि जन्‍मदिन की तस्‍वीरें अपने X अकाउंट पर शेयर करते हुए इकरा हसन ने सभी का आभार जताया है। उन्‍होंने लिखा- 'मेरे जन्मदिवस के अवसर पर लखनऊ में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अखिलेश यादव एवं पार्टी के सभी सम्मानित सांसदों एवं नेताओं द्वारा जो स्नेह, आशीर्वाद और प्यार मुझे मिला, उसके लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। आपका यह विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, जो मुझे समाज और जनता की सेवा के लिए और अधिक समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद यूं ही बना रहे, मैं खुदा से यही कामना करती हूं।'

पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम, जनता तक पहुंचेगी हरियाणा विधानसभा की हर जानकारी

चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने सदन की कार्यवाही के सीधे प्रसारण की प्रथा जारी रखकर संसदीय प्रणाली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इस कदम से जनता अपने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली और उठाए गए जनहित के मुद्दों के बारे में सीधे और पारदर्शी जानकारी प्राप्त कर सकेगी। उन्होंने मंगलवार को सदन में स्पष्ट किया कि प्रतिबंध लगाने की चर्चा अधूरी जानकारी पर आधारित है  कुछ रोकथाम का प्रावधान संविधान के अनुछेद 361-ए में है, जिसे ध्यान में रखते हुए और कार्यवाही से हटाए गए नकारात्मक शब्दों से बचाव के लिए नियम बनाए गए हैं। हरियाणा विधानसभा सचिवालय ने मीडिया संस्थानों को लाइव कवरेज हेतु नई गाइड लाइन भेजी हैं। इन गाइड लाइन के अनुसार, केवल सैटेलाइट टीवी चैनल ही लाइव प्रसारण कर सकते हैं, जिनकी अनुमति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दी जाएगी। प्रसारण के दौरान हरियाणा विधानसभा का लोगो और चैनल का वॉटरमार्क अनिवार्य होगा। किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) पर इसे साझा नहीं किया जा सकेगा। सचिवालय ने कहा कि कार्यवाही से हटाए गए अंश या शब्द किसी भी मीडिया या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रयोग नहीं किए जा सकते। उल्लंघन करने वाले चैनलों को लाइव कवरेज से प्रतिबंधित किया जा सकता है। हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि सीधा प्रसारण हरियाणा विधानसभा की 15वीं सत्र का ऐतिहासिक कदम है, जो पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनता तक सही जानकारी पहुंचाने की संसदीय प्रथा को मजबूत करता है।

एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत मखाना अवयवों की योजना को स्वीकृति

किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उन्नत प्रभेद ‘स्वर्ण वैदेही’ और ‘सबौर मखाना-1’ का होगा बीज उत्पादन : विजय कुमार सिन्हा पटना, उप मुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत मखाना अवयवों की योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना का क्रियान्वयन वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2026-27 तक किया जाएगा। इसके लिए कुल 16 करोड़ 99 लाख 11 हजार 930 रुपये की स्वीकृत दी गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 11 करोड़ 53 लाख 49 हजार 430 रुपये की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति दी गई है जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 5 करोड़ 45 लाख 62 हजार 500 रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। माननीय उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के 16 जिलों यथा कटिहार, पूर्णियाँ, दरभंगा, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण एवं मुजफ्फरपुर में मखाना की खेती का क्षेत्र विस्तार करना है। इसके तहत किसानों को उन्नत प्रभेदों का बीज उपलब्ध कराया जाएगा, परंपरागत उपकरण किट दी जाएगी तथा बीज उत्पादन और वितरण को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। श्री सिन्हा ने कहा कि मखाना की खेती दिसंबर माह से शुरू होकर अगस्त के अंतिम सप्ताह में पूरी होती है। इसी कारण योजना का कार्यान्वयन दो वित्तीय वर्षों में किया जाएगा। योजना अंतर्गत डीबीटी पंजीकृत नए किसानों का चयन किया जाएगा, जो पहली बार खेत प्रणाली से मखाना की खेती करेंगे। मखाना खेती की इकाई लागत 0.97 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जिसमें बीज, इनपुट और हार्वेस्टिंग की लागत शामिल है। इसमें किसानों को 75 प्रतिशत यानी 72,750 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायतानुदान दो किस्तों में प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजना में मखाना के उन्नत प्रभेद स्वर्ण वैदेही एवं सबौर मखाना-1 का बीज उत्पादन कराया जाएगा। बीज वितरण की व्यवस्था गठित समिति की अनुशंसा पर एफ.पी.सी. एवं प्रगतिशील कृषकों से बीज प्राप्त कर चयनित किसानों तक पहुंचाने की होगी। प्रत्येक किसान को न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) तथा अधिकतम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) तक का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, किसानों को परंपरागत उपकरण जैसे औका/गाँज, कारा, खैंचि, चटाई, अफरा, थापी आदि उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए प्रति किट 22,100 रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है, जिसमें से 75 प्रतिशत यानी 16,575 रुपये प्रति किट का अनुदान दिया जाएगा। माननीय उप मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में महिला सहभागिता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही योजना से लाभान्वित किसानों में 30 प्रतिशत महिला कृषकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना बिहार के 16 जिलों में मखाना खेती को नई दिशा देने, उन्नत बीज उत्पादन एवं वितरण और उपकरण किट उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके क्रियान्वयन से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी और सभी वर्गों की संतुलित हिस्सेदारी सुनिश्चित होगी। यह पहल बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी और राज्य को मखाना उत्पादन में अग्रणी बनाएगी।

किसानों की भलाई और कृषि विकास पर ध्यान देंगे शिवराज, अध्यक्ष पद की दौड़ से अलग

भोपाल   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हैं। चौहान ने कहा कि उनका पूरा ध्यान किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को नई ऊँचाई पर ले जाने पर है। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान गोष्ठी के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा—“मेरा एक ही लक्ष्य है कि कृषि उत्पादन कैसे बढ़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे कृषि और ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी दी है। इस समय कृषि मेरे रोम-रोम में है और किसान मेरी सांसों में।” लोगों की सेवा करना मेरे लिए ईश्वर की पूजा है भाजपा अध्यक्ष के मुद्दे पर इसी तरह के एक सवाल का फिर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं फिर से कहूंगा कि न तो मैंने कभी इसके बारे में सोचा है, न ही किसी ने मुझे बताया है। मैं इसके बारे में सोच भी नहीं सकता। इस बार उन्होंने अपने पहले के बयान को दोहराया और कहा कि लोगों की सेवा करना मेरे लिए ईश्वर की पूजा है और मैं अपनी अंतिम सांस तक यही पूजा करता रहना चाहता हूं। चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे बता दें कि विदिशा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद चुने जाने से पहले, 66 वर्षीय केंद्रीय मंत्री चौहान, जो एक प्रमुख ओबीसी नेता हैं, रिकॉर्ड चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें ज़मीनी स्तर से जुड़े राजनेता के रूप में देखा जाता है। 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता मध्य प्रदेश में नवंबर 2023 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को शानदार जीत दिलाने के बाद, उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और विदिशा सीट से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता भी। कार्यकाल बढ़ा दिया गया बाद में, पिछले साल नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के तीसरे कार्यकाल में वे कैबिनेट मंत्री बने। गौरतलब है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का तीन साल का कार्यकाल लगभग दो साल पहले समाप्त हो गया था और उसके बाद उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।   क्या कहा मीडिया ने उनसे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ कथित मुलाकात और भाजपा अध्यक्ष पद की संभावना को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा—“न मैंने इसके बारे में कभी सोचा, न किसी ने मुझसे कहा। मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकता। लोगों की सेवा करना ही मेरे लिए ईश्वर की पूजा है और मैं अंतिम सांस तक यही करता रहूंगा।” चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे 66 वर्षीय शिवराज सिंह चौहान को जमीनी नेता और प्रभावशाली ओबीसी चेहरा माना जाता है। नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी जीत दिलाने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और विदिशा से 2024 का लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में वे कैबिनेट मंत्री बने।   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (26 अगस्त, 2025) को भाजपा के अगले अध्यक्ष बनने की संभावनाओं पर पूछे गए सवालों को टाल दिया और कहा कि उनका पूरा ध्यान कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने पर है। पिछले सप्ताहांत नई दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ उनकी कथित मुलाकात के बारे में मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे जाने पर, जिससे उनके भाजपा अध्यक्ष पद के दावेदार होने की अटकलों को बल मिला, श्री चौहान ने सवालों को टाल दिया और कहा कि वह अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों को संभालने में व्यस्त हैं। "मैं एक बात कहना चाहता हूँ – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालयों का कार्यभार सौंपा है। इस समय, कृषि मेरे रोम-रोम में है और किसान मेरी साँसों में हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा, "एक पक्षी की आंख की तरह, मेरा एक ही लक्ष्य है – कृषि उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, किसानों की आय कैसे बढ़ाई जाए, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कैसे किया जाए, और अधिक लखपति दीदी कैसे बनाई जाएं।" लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सदस्य होती हैं, जिनकी वार्षिक घरेलू आय 1 लाख रुपये से अधिक होती है। जब पत्रकारों ने अगले भाजपा अध्यक्ष के मुद्दे पर और सवाल पूछे, तो श्री चौहान ने कहा, "न तो मैंने कभी इसके बारे में सोचा है, न ही किसी ने मुझे बताया है। मैं इसके बारे में सोच भी नहीं सकता। मैं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री हूँ। मैं इस काम को पूजा की तरह कर रहा हूँ। किसानों की सेवा मेरे लिए ईश्वर की पूजा है, और मैं यह पूजा करते रहना चाहता हूँ।" 66 वर्षीय श्री चौहान, एक प्रमुख ओबीसी नेता, रिकॉर्ड चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें ज़मीनी स्तर से जुड़े राजनेता के रूप में देखा जाता है। नवंबर 2023 में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को शानदार जीत दिलाने के बाद, उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और 2024 का लोकसभा चुनाव विदिशा से लड़ा और जीता। बाद में वे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल में शामिल हुए। वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का तीन साल का कार्यकाल करीब दो साल पहले समाप्त हो गया था। उसके बाद उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।    

बिहार सरकार ने पीडीएस डीलरों के कमीशन में किया जबरदस्‍त बढ़ोतरी

50 हजार पीडीएस डीलरों को बिहार सरकार की बड़ी सौगात! 52 फीसद कमीशन बढ़ाया   बिहार के 50 हजार PDS डीलरों की बल्‍ले बल्‍ले! नीतीश सरकार ने किया कमीशन में 52 फीसद का इजाफा पटना, बिहार सरकार ने पीडीएस दुकानदारों की एक पुरानी मांग को मान लिया है। लंबे समय से बिहार के पीडीएस डीलर कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। जिसे सरकार ने मान लिया है। सरकार का यह निर्णय न सिर्फ डीलरों के लिए राहत की खबर है बल्कि लाभुक उपभोक्ताओं तक भी बेहतर सेवा सुनिश्चित करने वाला कदम साबित होगा। 258.40 रुपये मिलेगा कमीशन राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए डीलर कमीशन की राशि में 52 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। अब राज्य के सभी पीडीएस डीलरों को प्रति क्विंटल खाद्यान्न पर 258.40 रुपये कमीशन मिलेगा। पहले यह राशि 211.40 रुपये प्रति क्विंटल थी। यह नई व्यवस्था सितंबर 2025 से प्रभावी होगी। क्या था पहले और अब कितना मिलेगा अब तक डीलरों को केन्द्रांश और राज्यांश मिलाकर 90 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाता था। बाद में इसे बढ़ाकर 211.40 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसमें और 47 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिसके बाद दर 258.40 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। 50 हजार डीलरों को फायदा बिहार सरकार की ओर से जनवितरण प्रणाली (PDS) को लगातार सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। इस फैसले से राज्यभर में काम कर रहे करीब 50 हजार पीडीएस डीलरों को सीधा लाभ होगा। सरकार का मानना है कि इससे खाद्यान्न वितरण प्रणाली और बेहतर होगी और उपभोक्ताओं तक समय पर अनाज पहुंच सकेगा। मंत्री लेशी सिंह ने जताया आभार खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट की ओर से लिए गए इस फैसले का स्‍वागत किया है। उन्‍होंने कहा, ये फैसला न केवल पीडीएस ऑपरेटरों के हित में है, बल्कि पीडीएस प्रणाली को और मजबूती देने वाला भी है। पीडीएस डीलर कमीशन की बढ़ोतरी की मांग लंबे समय से कर रहे थे।

सरकारी स्कूल में मचा हड़कंप! 10 फीट लंबा मगरमच्छ मिला, बच्चों में दहशत

चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड क्षेत्र के सुवानियां गांव के राजकीय विद्यालय में मंगलवार दोपहर करीब 10 फीट लंबा मगरमच्छ घुस आया। सूचना मिलने पर वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हालांकि स्कूल परिसर में दो से तीन फीट ऊंची घास होने के कारण अभियान में काफी दिक्कत आई। करीब दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ा गया और बस्सी बांध में छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि उस समय स्कूल में छुट्टी हो चुकी थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी के अनुसार सुवानियां गांव के पास से बहने वाली बेड़च नदी से यह मगरमच्छ गांव तक पहुंच गया था। दोपहर बाद ग्रामीणों ने इसे स्कूल में देखा तो तुरंत सरपंच गोपाललाल गाडरी ने उपवन संरक्षक राहुल झांझड़िया को सूचना दी। निर्देश पर नाथू सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम और वन्यजीव प्रेमी मौके पर पहुंचे। संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया तो पता चला कि मगरमच्छ स्कूल भवन की बजाय मैदान की तरफ घास में छिपा बैठा है। रेस्क्यू टीम के सदस्य दीवार पर चढ़कर निगरानी कर रहे थे, तभी मगरमच्छ दिखाई दिया। टीम को देखते ही वह हमला करने की स्थिति में आ गया। बड़ी सावधानी से उसे पकड़ा गया और देर शाम बस्सी बांध में छोड़ा गया। वन्यजीव प्रेमी मनीष तिवारी ने बताया कि मगरमच्छ घास में फंस जाने के कारण बाहर नहीं निकल पाया। यदि वह छिपा रह जाता तो अगले दिन बच्चों या स्टाफ के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बेड़च नदी से मगरमच्छ निकलकर सुवानियां गांव में आ चुके हैं। करीब एक माह पहले यहां से दो मगरमच्छ रेस्क्यू किए गए थे।