samacharsecretary.com

जंगली हाथियों की ट्रैकिंग होगी आसान, कान्हा में लगाए जाएंगे विदेशी कॉलर आईडी

मंडला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court)को एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन ने अवगत कराया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में रखे गए जंगली हाथी को 15 दिन में छोड़ दिया जाएगा। विदेश से मंगाई गई कॉलर आइडी पहनाई जाएगी। ताकि उसकी ट्रैकिंग की जा सके। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने उक्त जानकारी को रिकार्ड पर ले लिया। साथ ही शहडोल से पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाए गए हाथी की मौत को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन को फटकार लगाई। याचिका रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने दायर की थी। कोर्ट ने मांगा 30 साल का पूरा विवरण एमपी कोर्ट ने निर्देश दिया कि जंगली हाथियों को पकड़ने की प्रक्रिया में वाइल्ड लाइफ एक्ट का पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को नियत की गई। जंगली हाथियों को पकड़ने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया था कि पिछले 30 वर्षों में पकड़े गए हाथियों का पूरा विवरण पेश किया जाए। सरकार की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है। जिसमें से दो हाथियों को विदेश से मंगवाई गई कालर आइडी पहनाकर छोड़ दिया। अब हाथियों की होगी एक पहचान अब तक आपने बाघों के अलग-अलग नाम सुने होंगे, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी बाघों के अलग-अलग नाम रखे गए हैं. उनकी एक अलग आइडेंटिफिकेशन है. उनकी पूरी हिस्ट्री प्रबंधन के पास होती है, और जरूरत पड़ने पर एक ही झटके में ये किस तरह का टाइगर है, इसका व्यवहार कैसा रहता है, कहां-कहां मोमेंट रहता है, सब कुछ जानकारी मिल जाती है. ठीक उसी तरह से अब हाथियों की भी एक अलग पहचान बनाई जा रही है. मध्य प्रदेश में बांधवगढ टाइगर रिजर्व में ही ऐसा पहली बार हो रहा है जहां हाथियों को आईडेंटिफाई किया जा रहा है. उनको एक अलग नाम दिया जा रहा है, जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''हाथियों को नाम देने का काम, उनकी आइडेंटिटी बनाने का काम 25 मई से शुरु कर दिया है और जब तक पूरा नहीं हो जाएगा तब तक यह काम किया जाएगा. ये इसलिए किया जा रहा है कि अब लंबे वक्त से हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में परमानेंट तौर पर निवास कर रहे हैं और वे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ही हो चुके हैं. इसलिए उनका आइडेंटिफिकेशन भी जरूरी है. उनका इतिहास, उनका डाटा तैयार करना ताकि एक क्लिक पर उनके बारे में सब कुछ जाना जा सके. इसी के लिए उनकी एक आईडी जेनरेट की जा रही है, जिससे उनकी एक इंडिविजुअल पहचान हो सकेगी. हम उन्हें एक अलग नाम दे देंगे, एक अलग आईडी दे देंगे. जैसे टाइगर का t1 T2 होता है ठीक इसी तरह से हाथियों का भी एक कोड वर्ड होगा और उनका एक अलग नाम होगा, और उसी नाम से वो जाना जाएगा.'' कैसे होगी पहचान ? बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक बताते हैं कि, ''हाथियों की पहचान करने के लिए उनके जो शरीर में मार्क्स होते हैं, उस आधार पर उनको पहचान दी जाएगी. जैसे किसी हाथी का कान फोल्ड होता है, किसी का कान कटा होता है, कोई तस्कर होता है, किसी का दांत उठा हुआ होता है, किसी का टेढ़ा-मेढ़ा होता है, किसी का टूटा हुआ होता है. इसके अलावा पीठ की पॉजीशन किसी की फ्लैट होती है, किसी का उठा हुआ होता है. किसी के पूंछ में बाल नहीं होते हैं. किसी के पूंछ कटे होते हैं, हर हाथी के कुछ ना कुछ मार्क्स होते हैं. उनकी यूनिक पहचान होती है. इस आधार पर उनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है. क्या होगा फायदा? हाथियों का आईडेंटिफिकेशन कर देने से, उनको एक अलग नाम दे देने से आखिर क्या फायदा होगा. इसे लेकर उपसंचालक बताते हैं कि, ''उनकी एक अलग पहचान हो जाने से हम उन्हें ट्रैक कर पाएंगे. उनके हर मूवमेंट पर नजर रख पाएंगे. साथ ही हमारे पास हर हाथी का डाटा होगा, उसके बारे में पूरी जानकारी होगी. साल भर किस तरह का व्यवहार करता है, कौन सा हाथी कनफ्लिक्ट में शामिल रहता है, कौन शांत रहता है, कौन किस दिशा में किस सीजन में कहां मूवमेंट करता है. कौन सा हाथी हर्ड (झुंड) के साथ ही रहता है, कौन सा हर्ड के बाहर जाता है. किस तरह का व्यवहार होता है ये सब कुछ पता रहेगा तो हाथियों की देखरेख में भी मदद मिलेगी.'' जब बांधवगढ़ के हुए हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथी पिछले कई सालों से छत्तीसगढ़ से होकर संजय गांधी टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर वाले रास्ते से बांधवगढ़ आते जाते रहे हैं. पहले स्थाई तौर पर नहीं रहते थे, आते थे चले जाते थे. लेकिन साल 2018 में जब बांधवगढ टाइगर रिजर्व में 40 हाथियों का एक दल पहुंचा, उसके बाद से यहीं रह गए और फिर वापस नहीं गये. इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता गया और अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ही इन्होंने अपना नया ठिकाना बना लिया है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पहचान बाघों के साथ-साथ हाथियों के लिए भी होने लगी है. बांधवगढ़ में अभी कितने हाथी ? बांधवगढ टाइगर रिजर्व में अभी कितने हाथी हैं इसे लेकर टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''40 से 50 के लगभग हाथी हैं. कुछ महीने पहले 10 साथियों की डेथ हो गई थी और 5 से 10 हाथी ऐसे हैं जिनका मूवमेंट इधर-उधर होता रहता है. कभी आते हैं, कभी चले जाते हैं. लगभग 50 हाथी परमानेंट तौर पर रह रहे हैं. अभी जब इनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है तो यह और अच्छी बात होगी कि इनका एक्चुअल डाटा भी निकल कर सामने आ जाएगा.'' हाथियों को बांधवगढ़ क्यों पसंद आया? आखिर हाथियों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ही क्यों पसंद आया? इसे लेकर कुछ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, ''हाथियों की मेमोरी पावर बहुत ज्यादा होती है और उन्हें पीढ़ियों की चीजें याद रहती हैं, वो अपने रास्ते कभी नहीं भूलते हैं. जब कभी भी उन्हें कहीं पर थोड़ा अनसिक्योर लगता है, जंगल में मानव दखल बढ़ने लगता है, या उनके लिए … Read more

एमपी सरकार की तैयारी: थ्री स्टार टेंट सिटी से पर्यटन महोत्सव में बढ़ेगी रफ्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार विलासितापूर्ण टेंट सिटी के जरिए पर्यटन को रफ्तार देने की तैयारी में है। थ्री स्टार सुविधाओं वाली यह टेंट सिटी पर्यटन महोत्सव के दौरान बसाई जाएगी। इसका आयोजन प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद प्रसिद्ध सात पर्यटन स्थलों पर सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच होगा। पर्यटन मंडल अभी तक हनुवंतिया, गांधीसागर, चंदेरी और कूनो में पर्यटन महोत्सव का आयोजन करता आ रहा है, जहां टेंट सिटी लगाई जाती है। देसी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस साल से ओरछा, मांडू और तामिया में भी इस आयोजन की तैयारी है, जहां टेंट सिटी स्थापित की जाएंगी। यह अस्थायी ढांचा 90 दिनों के लिए खड़ा किया जाएगा। पर्यटन मंडल के कंपनी सचिव अंकित कौरव ने बताया कि इन स्थलों पर टेंट सिटी स्थापित करने और संचालन के लिए निजी कंपनियों के साथ दीर्घकालिक अनुबंध होना है। तैयारी होते ही बुकिंग शुरू हो जाएगी ये अनुबंध अब पांच से दस वर्षों के लिए होंगे। ओरछा, मांडू, तामिया और हनुवंतिया में टेंट सिटी के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। कूनो और गांधी सागर में टेंट सिटी गुजरात स्थित लालूजी एंड संस और चंदेरी में सनसेट रिजर्व द्वारा स्थापित की जाएंगी। टेंट सिटी तैयार होते ही बुकिंग शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि गांधीसागर में सितंबर से ही टेंट सिटी की शुरुआत होगी। चंदेरी और कूनो में इसकी शुरुआत अक्टूबर में होगी। इसके बाद हनुमंतिया, मांडू, तामिया और ओरछा में नवंबर माह से टेंट सिटी लगा दी जाएगी। ओरछा, मांडू, तामिया, हनुवंतिया और चंदेरी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए जाने जाते हैं। वहीं गांधीसागर पिछले कुछ वर्षों में एक जल क्रीड़ा स्थल के रूप में उभरा है, जबकि कूनो वन्यजीव प्रेमियों के लिए मनोरंजक छुट्टियां प्रदान करता है। महोत्सव में इस तरह की गतिविधियां महोत्सव में पैराग्लाइडिंग, हाट एयर बैलूनिंग, रिवर क्रूज, ट्रैकिंग और बोटिंग मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं। झीलों वाले स्थलों पर जल क्रीड़ा की गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। योग और ध्यान सत्र तथा आयुर्वेदिक उपचार की व्यवस्था भी इस महोत्सव का हिस्सा होगी। लोक नृत्य, शास्त्रीय संगीत समारोह और नाटक आगंतुकों को राज्य की कला और संस्कृति से परिचित कराएंगे। आगंतुक स्थानीय हस्तशिल्प वस्तुएं खरीद सकेंगे और स्थानीय व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। एमपी में पर्यटन को गति मिलेगी     तीन नए स्थलों पर भी टेंट सिटी की शुरुआत करने का उद्देश्य इन स्थलों को टूरिज्म सर्किट से जोड़ना है। इससे इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान और प्रदेश में पर्यटन को गति मिलेगी। – विदिशा मुखर्जी, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन मंडल।  

नए कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट से एमपी में निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज प्रभावित

भोपाल  इंश्योरेंस कंपनियों का नया कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट का असर मध्य प्रदेश में दिखेगा। राजधानी भोपाल समेत प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। निजी अस्तपाल संचालकों ने घोषणा की है कि वे एक सितंबर से कैशलेस इलाज बंद कर देंगे। हालांकि,आयुष्मान भारत योजना में मरीजों को इलाज की सुविधा मिलता रहेगी।कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट के तहत एक जैसी सर्जरी के लिए छोटे और बड़े अस्पतालों को समान भुगतान दिया जाएगा।  हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदकर कैशलेस इलाज की उम्मीद लगाए बैठे लाखों लोगों को बड़ा झटका लगा है। भोपाल समेत प्रदेशभर के निजी अस्पतालों ने घोषणा की है कि वे एक सितंबर से कैशलेस इलाज बंद कर देंगे। छोटे-बड़े अस्पतालों को समान भुगतान निजी नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह ने कहा है कि कॉमन इम्पेनलमेंट में एक सर्जरी के लिए छोटे-बड़े अस्पतालों को समान भुगतान का प्रावधान किया गया है। यह कैस संभव है। बड़े अस्पतालों का खर्च ज्यादा होता है। पहले से ही पेमेंट में देरी और क्लेम रिजेक्ट होने की समस्या बनी हुई है। ऐसे में यह नया फ्रेमवर्क घाटे का सौदा है। इस लिए हम इसका विरोध कर रहे हैं।  पूरे प्रदेश में दिखेगा असर डॉ. रणधीर सिंह ने बताया कि राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के सभी बड़े अस्पताल संचालक हमारे साथ है। उन्होने कहा कि कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट देश भर में हो रहा है। उन्होने कहा है कि अगर कंपनियां इसमें बदलाव नहीं करती है तो विरोधा जारी रहेगा। उन्होने कहा कि आयुष्मान भारत योजना में मरीजों को इलाज की सुविधा मिलता रहेगी।  ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? अगर यह फैसला लागू होता है, तो प्रभावित बीमा कंपनियों के ग्राहकों को अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहले अपनी जेब से पैसे चुकाने होंगे। बाद में, वे इंश्योरेंस कंपनी से रीइम्बर्समेंट (पैसे की वापसी) का क्लेम कर सकेंगे। इससे मरीजों को आर्थिक परेशानी और तनाव का सामना करना पड़ सकता है। भारत में मेडिकल महंगाई हर साल 7-8% बढ़ रही है, जिसमें स्टाफ की सैलरी, दवाइयां और अन्य खर्च शामिल हैं। ऐसे में, अस्पतालों का कहना है कि पुराने रिम्बर्समेंट रेट्स पर काम करना मुश्किल है और बीमा कंपनियां टैरिफ घटाने पर जोर दे रही हैं। साथ ही, क्लेम सेटलमेंट में देरी और डिस्चार्ज अप्रूवल में लंबा समय लेने की भी शिकायत है। बीमा कंपनियों और GI काउंसिल की प्रतिक्रिया द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GI काउंसिल) ने AHPI के इस कदम को “अचानक और एकतरफा” बताया है। काउंसिल का कहना है कि इससे नागरिकों में भ्रम और चिंता फैल रही है और हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम में भरोसा कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा कि कैशलेस सुविधा बंद होने से मरीजों को इमरजेंसी में तुरंत इलाज के लिए वित्तीय व्यवस्था करनी पड़ सकती है, जो जान जोखिम में डाल सकता है। क्या है समाधान? GI काउंसिल ने AHPI से अपना फैसला वापस लेने और बीमा कंपनियों के साथ रचनात्मक बातचीत जारी रखने का आग्रह किया है। AHPI और बीमा कंपनियों के बीच बैठकें भी शेड्यूल हैं, जहां इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। सभी की कोशिश है कि ग्राहकों के हितों को नुकसान न पहुंचे। कैशलेस इलाज के लिए IRDAI का लक्ष्य यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण (IRDAI) पूरे देश में 100% कैशलेस क्लेम सेटलमेंट को बढ़ावा दे रहा है। IRDAI चाहता है कि बीमा कंपनियां ग्राहकों के लिए सहज और तेज इलाज की सुविधा सुनिश्चित करें। हालांकि, अस्पतालों पर कोई सीधे नियामक नियंत्रण नहीं है, जिससे यह समस्या और जटिल हो जाती है। एकजुट उद्योग GI काउंसिल ने जोर देकर कहा कि जब कोई बीमाकर्ता अनुचित तरीके से टार्गेट होता है, तो पूरा उद्योग एकजुट हो जाता है, क्योंकि इससे करोड़ों नागरिक प्रभावित होते हैं, जो हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर हैं। उनका लक्ष्य हर भारतीय नागरिक के लिए हेल्थ इंश्योरेंस को एक विश्वसनीय और सस्ती सुरक्षा कवच बनाए रखना है। इंश्योरेंस कंपनियों और प्राइवेट अस्पतालों के बीच जंग! जानें क्या है कारण  जरा सोचिए, आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड लेकर अस्पताल पहुंचे हैं और उम्मीद करते हैं कि इलाज बिना किसी दिक्कत के कैशलेस हो जाएगा। न कोई अडवांस पेमेंट देनी पड़ेगी, नही ढेर सारे पेपर्स भरने होंगे। सुनने में कितना अच्छा लगता है।  कैशलेस इलाज के प्रोसेस को आसान बनाने के लिए एक 'कॉमन इंपैनलमेंट' (साझा पैनल) का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर पर्दे के पीछे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों और प्राइवेट अस्पतालों के बीच ठनी हुई है। बीमा कंपनियों का मानना है कि इससे प्रक्रियाएं आसान होंगी, लोगों को ज्यादा अस्पतालों तक पहुंच मिलेगी और प्रीमियम भी कम रखने में मदद मिलेगी। वहीं, कई अस्पताल कहते हैं कि यह फ्रेमवर्क एकतरफा है। क्यों चिंतित हैं अस्पताल? अस्पतालों का कहना है कि कॉमन इंपैनलमेंट (empanelment) एग्रीमेंट का मौजूदा ड्राफ्ट उनसे ठीक से राय-मशविरा किए बिना तैयार किया गया है। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (FPHNAI) का कहना है कि पैकेज रेट्स, ऑपरेशन से जुड़े नियम और पेमेंट की शर्ते अवास्तविक हैं और बीमा कंपनियों के पक्ष में झुकी हुई हैं। अस्पतालों का कहना है कि बढ़ती मेडिकल महंगाई के बावजूद इलाज की दरों को सालों से अपडेट नहीं किया गया है। इससे उन्हें खर्च में कटौती करनी पड़ती है, जिससे इलाज की क्वॉलिटी पर असर पड़ सकता है। किन अस्पतालों को फायदा? कॉमन इंपैनलमेंट सिस्टम के मोटे-मोटे आइडिया का अस्पताल पूरी तरह से विरोध नहीं कर रहे हैं। छोटे अस्पतालों को इसमें शामिल होने में फायदा दिख रहा है। इससे उनकी पहुंच बढ़ेगी। पर बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल चेन्स स्टैंडर्डाइज्ड प्राइसिंग को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि उनकी ऑपरेशनल कॉस्ट अधिक होती है। वे रीइम्बर्समेंट में देरी और क्लेम रिजेक्शन पर बार-बार होने वाले विवादों की भी शिकायत करते हैं। बीमा कंपनियों का क्या कहना है? इंश्योरेंस कंपनियां तर्क देती हैं कि कॉमन इंपैनलमेंट को सिस्टम आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। हर बीमा कंपनी के साथ अलग-अलग एग्रीमेंट करने की बजाय, सिंगल एग्रीमेंट उन्हें सभी इंश्योरेंस कंपनियों तक पहुंच देगा। इससे मरीजों के लिए बिना किसी अडवांस पेमेंट के इलाज कराना आसान हो जाएगा। मरीजों को कितना फायदा? मरीजों के लिए एक … Read more

राहुल-तेजस्वी पर बरसे सम्राट चौधरी, बोले- लोकतंत्र के दुश्मनों को सबक सिखाएगी जनता

पटना  बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव पर बुधवार को जोरदार निशाना साधते हुए उन्हें लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता दोनों राजकुमारों को सबक सिखाएगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के 'वोटर अधिकार यात्रा' में शामिल होने पर लालू परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार उन लोगों को बिहार बुला रहा है, जिन्होंने बिहार की जनता का अपमान किया और सनातन धर्म का विरोध किया। उन्होंने स्टालिन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग बिहार के लोगों का अपमान करते हैं, सनातन धर्म का विरोध करते हैं। ऐसे नेताओं को राजद संरक्षण दे रहा है, जो बिहार और उसके सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता इस सियासी खेल को समझती है और वह एनडीए के साथ मजबूती से खड़ी है। 'वोटर अधिकार यात्रा' और एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की जनता के लिए एसआईआर कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि विकास, तरक्की और रोजगार उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने एनडीए सरकार के तहत पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को समृद्ध बनाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने 'वोटर अधिकार यात्रा' में रेवंत रेड्डी और स्टालिन के जुड़ने को 'घुसपैठिया' करार दिया। डिप्टी सीएम के अनुसार, घुसपैठिये आए हैं, चले जाएंगे। यह बिहार यहां पर था और रहेगा। चौधरी ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आपातकाल का जिक्र किया, जब निर्दोष लोगों को जेल में डाला गया। लोकतंत्र की हत्या की गई। इसी तरह उन्होंने लालू यादव पर भी सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया। मोहन भागवत के बयान पर उन्होंने कहा कि भारत के निर्माण में सभी का सहयोग है। भारत का मतलब भगवान राम और श्री कृष्ण के वंशजों से है। उन्होंने कहा कि समय के साथ कुछ लोगों ने पूजा पद्धति बदली, लेकिन सभी भारतीय हैं। यह सनातन संस्कृति की एकता को दर्शाता है, जो भारत की मूल पहचान है। पीएम मोदी के पूर्णिया दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि लगभग 40,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की घोषणा की जाएगी। कई परियोजनाओं का जुड़ना अभी बाकी है। पूर्णिया हवाई अड्डे का उद्घाटन किया जाएगा। इससे क्षेत्र में हवाई यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।

राहुल गांधी का आरोप: मुजफ्फरपुर की सभा में कहा, संविधान पर चोट की जा रही है

मुजफ्फरपुर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि गुजरात का मॉडल 'आर्थिक मॉडल' नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वोट चोरी' की शुरुआत गुजरात से हुई और फिर इसे राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी 'वोटर अधिकार यात्रा' के 11वें दिन मुजफ्फरपुर पहुंचे। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा के लोगों ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात के चुनाव में 'वोटी चोरी' की। 'गुजरात मॉडल' वोट चोरी करने का मॉडल है, जिसे ये लोग 2014 में राष्ट्रीय स्तर पर लाए। हम कुछ कहते नहीं थे, क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं थे, लेकिन महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद हमें सबूत मिल गया। मुजफ्फरपुर में 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बिहार में दलितों, अति पिछड़ों, अल्पसंख्यकों यानी गरीबों के वोट काटे गए। जिंदा लोगों को मुर्दा बना दिया गया। वोट काटकर संविधान पर चोट की जा रही है। उन्होंने संविधान को आत्मा बताते हुए कहा कि जो लोग भारत माता की आत्मा पर चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, वे यहां के युवाओं को नहीं समझते हैं। भाजपा 'वोट चोरी' कर चुनाव जीतती है और उसकी मदद चुनाव आयोग करता है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में चुपचाप एक कानून पास कर दिया जाता है। इसके तहत इलेक्शन कमिश्नर चाहे कुछ भी करें, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। अगर चुनाव आयोग अपना काम ईमानदारी से कर रहा है, तो ऐसे कानून की क्या जरूरत है? केंद्र सरकार में किसानों-मजदूरों को पीटकर जेल में डाल दिया जाता है। युवा पेपर लीक के खिलाफ धरना देता है तो उसे लाठियों से पीटकर अंदर कर देते हैं। लेकिन, देश के चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं कर सकता है। इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जब राहुल गांधी चुनाव आयोग की शिकायत करते हैं तो उन्हें शपथ पत्र देने को कहा जाता है। राहुल गांधी राजनीति, मंच के लिए नहीं करते। वे जो कहते हैं, बहुत सोच-समझकर कहते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी वकील हैं, जो भारत के लोगों की लड़ाई लड़ रहे हैं। भारत में लोकतंत्र फलेगा। मताधिकार की चोरी करने वालों से जनता सत्ता छीन लेगी, यह भीड़ इसका संदेश देती है।

बाढ़ग्रस्त इलाकों में पहुंचे CM मान, अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के आदेश

दीनानगर  पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान आज बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे। दीनानगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मकौड़ा पत्तन में रावी नदी में आई बाढ़ के कारण कई गांव पानी से प्रभावित हुए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा किया और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया।   मुख्यमंत्री सबसे पहले बेहरामपुर कस्बे पहुंचे जहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत की और कहा कि सरकार जान-माल की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन आस-पास के गांवों में जलस्तर बढ़ने के कारण वे वहां नहीं पहुंच सके। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि पंजाब सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ है और किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को राहत कार्य तेजी से चलाने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए लोगों को पर्याप्त मुआवजा देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब में बाढ़ की यह स्थिति पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण उत्पन्न हुई है। गंभीर संकट की इस घड़ी में पंजाब सरकार लोगों को राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस काम में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के नेता और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।

महू आर्मी वार कॉलेज में बोले राजनाथ सिंह – जल, थल, वायु सेना का हर जवान सीखेगा ड्रोन तकनीक

इंदौर आत्मनिर्भर भारत ने स्वदेशी प्लेटफार्म पर तेजस, एडवांस आर्टलरी गन सिस्टम, आकाश मिसाइल तैयार किए हैं। यह दूसरे देशों को संदेश है कि भारत में भी विश्वस्तरीय हथियार तैयार हो रहे है। अब हम पांचवी पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट बना रहे हैं और हमारे कदम जेट इंजन के निर्माण की ओर भी बढ़ रहे है। वर्ष 2024 तक हमारा रक्षा उत्पादन 46 हजार 425 करोड़ था। अब यह बढ़कर 1.5 लाख करोड़ करोड़ हो गया है। इसमें 33 हजार करोड़ प्रायवेट सेक्टर का योगदान है। एयर डिफेंस वेपन सिस्टम सुदर्शन चक्र देश के महत्वपूर्ण स्थानों के सुरक्षा कवच के रूप में तैयार होगा। भारतीय वायुसेना भी लंबी दूरी की मिसाइलों से लेकर नेक्स्ट जेनरेशन बियॉन्ड विजुअल रेंज के हथियारों को शामिल करके खुद को लगातार मजबूत कर रही है। ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए काउंटर यूएएस ग्रिड को और मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा, चाहे खरीद हो या नीतिगत बदलाव, हम अपनी सेनाओं को मजबूत करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। ये बातें ये बातें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महू के आर्मी वार कालेज में आयोजित ‘रण संवाद‘ के दूसरे दिन कही। उन्होंने बताया आगामी युद्ध में हाइपरसाेनिक मिसाइल, एआई, साइबर अटैक का अहम रोल होगा। 2027 तक भारत की जल, थल व वायु सेना के हर जवान को ड्रोन तकनीक का अनुभव होगा। विश्व अभी कोल्ड वार के युग है और अभी प्राक्सी वार भी चल रहे है। इस वजह से भारती सैन्य इकायों को तकनीक रुप से मजबूत किया जाएगा। हमें कोई चुनौती देगा तो उसका द्ढता से जवाब देंगे महाभारत के दौरान भी रण संवाद हुआ था। कृष्ण ने युद्ध से पहले शांति का संदेश दिया था लेकिन दुर्योधन ने मना किया। जब महाभारत खत्म हुआ तो युधिष्ठिर और भीष्म के बीच संवाद हुआ था। युद्ध के पूर्व व बाद में इस तरह के संवाद हमेशा होते आए है। शांति के समय युद्ध की तैयारी होती है और युद्ध के माध्यम से शांति पाने का प्रयास किया जाता है। आज के वैश्विक परिवेश में, अक्सर संवाद का टूटना ही शत्रुता और संघर्ष का मूल कारण बनता है। दूसरी ओर, युद्ध के समय भी, संवाद के माध्यमों को बनाए रखना आवश्यक है। महू में हो रहा रण संवाद केवल एक अकादमिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह हमारे सामरिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण को और परिष्कृत करेगा। साइबर, ड्रोन व उपग्रह आधारित होंगे भविष्य के युद्ध राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की कोई निश्चित प्रणाली या कठोर सिद्धांत नहीं है, जिस पर हम आँख बंद करके भरोसा कर सकें। केवल सैनिकों की संख्या या हथियारों के भंडार का आकार अब पर्याप्त नहीं है। साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित हवाई वाहन और उपग्रह-आधारित निगरानी भविष्य के युद्धों को आकार दे रहे हैं। सटीक-निर्देशित हथियार, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और डेटा-संचालित जानकारी अब किसी भी संघर्ष में सफलता की आधारशिला बन गई है। भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे, वो तकनीक, खुफिया, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का मिला-जुला रूप होंगे।" परिस्थितियाँ और चुनौतियां तेजी से बदल रही है। दूसरों के पास इसका जवाब देने और अपनी पसंद के विपरीत शर्तों पर अखाड़े में कदम रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।  

ई-श्रम पोर्टल पर 5 सितम्बर 2025 तक होगा गिग व असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण

भोपाल  गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों तथा अन्य असंगठित श्रमिकों के पंजीयन अभियान के अंतर्गत ई-श्रम पोर्टल www.eshram.gov.in पर अपने मोबाइल के माध्यम से अथवा अपने निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर संपर्क कर पंजीयन किया जा सकता है। नि:शुल्क पंजीयन के लिए आधार नंबर, आधार लिंक्ड मोबाइल नंबर तथा आई.एफ.एस.सी. कोड सहित बचत खाता क्रमांक की आवश्यकता होगी। श्रम विभाग द्वारा इस संबंध में व्यापक अभियान प्रारंभ किया गया है। पंजीयन की प्रक्रिया पाँच सितंबर तक होगी। पंजीयन की प्रक्रिया के अंतर्गत www.eshram.gov.in पर “ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन” पर क्लिक कर उपरोक्तानुसार समस्त जानकारी तथा चाही गई अन्य व्यक्तिगत जानकारी भरे जाने पर ई-श्रम कार्ड का प्रिंट प्राप्त होगा, जो आजीवन सम्पूर्ण भारत में मान्य होगा। पंजीयन से संबंधित किसी भी जानकारी अथवा समस्या के निदान के लिए 0731-2432822 पर संपर्क किया जा सकता है।

हरियाणा में अपराध पर सैलजा का हमला, बोलीं- आंकड़ों की बाजीगरी से नहीं मिलेगा समाधान

चंडीगढ़ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिच, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि कहा कि केंद्र सरकार ने 130वां संविधान संशोधन बिल लाकर एक प्रकार से देश में अघोषित इमरजेंसी लागू की है, और इसके सहारे सरकार लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है। दूसरी ओर हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा 1984 के दंगा पीडितों के परिजनों को 11 साल बाद नौकरी देने की घोषणा केवल पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर की गई है यह एक राजनीतिक चाल है इसके सिवाय कुछ नहीं। मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि 130वां संविधान संशोधन बिल के बाद अब 30 दिन की हिरासत किसी भी एजेंसी के दुरुपयोग से हासिल की जा सकती है। यह बिल लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है। सत्ता पक्ष इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है। ये सरकार ताकत का इस्तेमाल करके जन विरोधी कानून लाने की कोशिश कर रही है, मनमानी तरीके से कानून ला रही है। ये भारतीय संविधान का काला अध्याय है। विपक्ष को बोलने ना देना अधिकारों का हनन है। ये विधेयक न्यायपालिका की स्वतंत्रता खत्म कर देगा। यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे को रौंदता है।  विधेयक देश के कानूनों के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है। यह  विधेयक न्याय के खिलाफ है। हरियाण सरकार द्वारा 1984 के दंगा पीडितों के परिजनों को नौकरी दिए जाने को कुमारी सैलजा ने एक राजनीतिक षणयंत्र करार देते हुए कहा कि पिछले 11 सालों में भाजपा सरकार को सिख दंगा पीड़ितों की याद नहीं आई पर पंजाब में विधानसभा चुनाव को देखकर उसे सब कुछ याद आने लगा। भाजपा पंजाब में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है, जो उसके लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। भाजपा पंजाब में लोकसभा चुनावों में कोई सीट नहीं जीत पाई, जबकि 2022 के विधानसभा चुनावों में केवल दो सीटें जीतने में सफल रही। पंजाब में सैनी समुदाय के सदस्य हरियाणा की तुलना में अधिक संख्या में हैं। उनका होशियारपुर, नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर), जालंधर, रोपड़ (रूपनगर) और गुरदासपुर में 10 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभाव है। ऐसे में भाजपा सरकार का यह फैसला पंजाब में बीजेपी की पैठ बढ़ाने की कोशिश है। पंजाब में सैनी समुदाय की अच्छी खासी आबादी है। बीजेपी उन्हें लुभाने की कोशिश कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का पंजाब के चुनावों पर क्या असर पड़ता है।    सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि हरियाणा में नशा और अपराध तेजी से बढ़ रहे है, जनता दहशत में जी रही है और सरकार इसे बात को मानने के लिए कतई तैयार नहीं है। प्रदेश में हत्या, लूट, रंगदारी, बलात्कार का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम देकर सरेआम घूम रहे है और शासन और पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ रखे हुए बैठे है, लोग न्याय के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे है चीख रहे है पर सरकार बहरी बुनी हुई है। हरियाणा में नशा लगातार बढ़ रहा है और युवा पीढ़ी इसके जाल में फंस रही है। सिरसा जिला में हर दूसरे तीसरे दिन नश में गिरफ्त युवा दम तोड़ रहा है।  सरकार इस पर ठोस कदम उठाने की बजाय जनता को गुमराह करने के लिए यात्राओं और दिखावटी कार्यक्रमों में लगी हुई है। नशा खत्म करने के लिए धरातल पर आकर गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। सांसद ने कहा कि आंकडों की बाजीगरी से अपराध कम होने वाले नहीं है, अपराधियों में जब तक पुलिस का भय पैदा नहीं होगा तब तक अपराध पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता।  

शादी में माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने की मांग, हरियाणा भाजपा विधायक का सुझाव

चंडीगढ़ हरियाणा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक राम कुमार गौतम ने एक ऐसे कानून की मांग की है जिसमें शादी से पहले माता-पिता की अनुमति अनिवार्य हो। सफीदों के विधायक ने मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में शून्यकाल के दौरान कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है। गौतम ने कहा, ‘‘लड़के-लड़कियां भाग जाते हैं…ऐसे मामले सामने आए हैं जहां माता-पिता बाद में आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं। मेरा सरकार से अनुरोध है कि ऐसा कानून बनाया जाए जिसमें शादी से पहले लड़के-लड़कियों के लिए माता-पिता की अनुमति अनिवार्य हो।’’ गौतम 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा में शामिल हो गए थे। इससे पहले वह जननायक जनता पार्टी (जजपा) के सदस्य थे। गौतम ने जमीन की कीमत की दरों (लैंड कलेक्टर रेट) का भी मुद्दा भी उठाया और कहा कि कुछ जगहों पर इन दरों और बाजार दरों में काफी अंतर है। उन्होंने कहा, ‘‘जहां भी बड़ा अंतर है, उसे दूर किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।’’ शून्यकाल में बोलने का समय समाप्त होने पर विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने उन्हें उनकी सीट पर बैठने के लिए कहा। हालांकि, गौतम अपनी बात जारी रखने पर अड़े रहे और अध्यक्ष ने उन्हें रोक दिया। कल्याण ने कहा, ‘‘अगर आप इसके अलावा कुछ और कहना चाहते हैं, तो आप नोटिस दें , मैं उसके अनुसार फैसला करूंगा।’’