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प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर वाराणसी में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ, काशी-वडनगर के बीच हो रही यात्रा

वाराणसी  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विरासत लिखी जाएगी तो उसमें यह भी लिखा जाएगा कि उन्होंने देश को नक्सलवाद से कैसे मुक्ति दिलाई, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 कैसे समाप्त किया, करोड़ों लोगों को गरीबी से कैसे बाहर निकाला, संसद में महिलाओं को बराबर की भागीदारी कैसे दिलाई और नौजवानों के सपनों को कैसे पंख दिए। एक महान नेता लोगों को स्वावलंबी बनाता है और प्रधानमंत्री मोदी ने यही किया है।   प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर वाराणसी में सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि काशी और वडनगर को जोड़ने वाली यात्रा प्रधानमंत्री की जन्मभूमि को कर्मभूमि से जोड़ने की यात्रा है। एक ओर काशी है, जहां से उनके सार्वजनिक जीवन को नई ऊर्जा मिली और दूसरी ओर वडनगर है, जहां उन्हें मां हीराबेन का आशीर्वाद और संस्कार मिले। उन्होंने इसे सेवा, संस्कार और साधना की संगम यात्रा बताया।   पहले सरकारों को कुर्सी बचाने की रहती थी चिंता राजनाथ सिंह ने पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2014 से पहले भारत के हाथ से अवसर निकल जाते थे। पहले की सरकारें सोती रहती थीं या उन्हें अपनी कुर्सी बचाने की चिंता रहती थी। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी चिप निर्माता कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उसे दो बार अनुमति नहीं दी और देश ने रोजगार का बड़ा अवसर खो दिया।   भारत जो बोलता है उसे पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेमीकंडक्टर को बढ़ावा देने की पहल की तो सवाल उठाए गए कि भारत में इसकी इंडस्ट्री कैसे लग सकती है। पीएम मोदी को अभी दशकों तक देश की सेवा करनी है। पहले 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और पिछले 12 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी योग्यता का निर्वाहन कर रहे हैं। 25 वर्षों तक उन्होंने अनवरत जन सेवा का काम किया है। पीएम ने भारत को ऐसे स्थिति में पहुंचाया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आज भारत जो बोलता है उसे पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती है कि भारत बोल क्या रहा है। पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भारत बोलता था उसे जितना गंभीरता से लिया जाना चाहिए था वो नहीं होता था। दो हजार साल पुराना काशी-वडनगर का रिश्ता रक्षा मंत्री ने कहा कि वडनगर और काशी का रिश्ता बहुत पुराना है। करीब दो हजार साल पहले बौद्ध भिक्षुओं ने सारनाथ से वडनगर की यात्रा की थी। उस समय उद्देश्य ज्ञान और अध्यात्म को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना था। आज उसी प्राचीन परंपरा को नए रूप में सेवा यात्रा के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री के द्वारा गुजरात में लिए गए कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि क्रिकेट में टेस्ट मैच की गति से चलने वाले विकास कार्य को उन्होंने वन-डे मैच में बदलने का काम किया।   मोबाइल की टॉर्च जलवाकर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दिलाई रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि वह दुनिया के बड़े नेताओं से मिलते समय उन्हें भारत में बनी वस्तुएं उपहार में देते हैं। उन्होंने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन को वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी से बना पिकॉक ब्रोच दिए जाने का भी जिक्र किया। कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने उपस्थित लोगों से मोबाइल की टॉर्च जलवाकर प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दिलाई।   250 बाइक से वडनगर जाएंगे 500 यात्रीः पंकज चौधरी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि काशी से 250 बाइक पर सवार 500 यात्री गंगाजल लेकर वडनगर जा रहे हैं। इसी तरह 250 बाइक पर 500 यात्री गुजरात की पवित्र नदियों का जल लेकर वडनगर से काशी आ रहे हैं। सात अक्तूबर को वडनगर में बाबा हाटकेश्वर को जल अर्पित किया जाएगा और काशी में बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर यात्रा पूर्ण होगी।   प्रतिदिन 60 से 80 स्थानों पर कार्यक्रम होंगे पंकज चौधरी ने कहा कि हजारों किलोमीटर की यह यात्रा 10 राज्यों के 193 जिलों और 1,159 गांवों से होकर गुजरेगी। उत्तर प्रदेश के 50 जिले यात्रा के मार्ग में आएंगे। प्रतिदिन 60 से 80 स्थानों पर कार्यक्रम होंगे। यात्रा के दौरान वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नशामुक्ति और प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प दिलाया जाएगा। प्रत्येक पड़ाव पर 15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी, स्थानीय नेताओं से संवाद होगा और स्वच्छता कर्मियों का सम्मान किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के निरोगी जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत का मान-सम्मान वैश्विक स्तर पर बढ़ा है। काशी के सांसद के रूप में वह काशी के कोने-कोने को विकसित कर रहे हैं।   नरेंद्र मोदी भारत के सम्मान और गौरव का नामः चिराग पासवान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पूर्व में भी सरकारें रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को देश और विदेश में नई पहचान दिलाने का काम किया है। पिछले 12 वर्षों में उन्होंने हर दिशा में अपनी सोच को स्थापित किया है और आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। नरेंद्र मोदी केवल देश के प्रधानमंत्री का नाम नहीं, भारत के सम्मान और गौरव का नाम है। यदि देश का प्रत्येक युवा उनके व्यक्तित्व का अंश भर भी अपने जीवन में उतार ले तो देश का भविष्य और बेहतर होगा।   काशी की धरती पर खड़ा होना गर्व का क्षणः चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि काशी की धरती पर खड़ा होना उनके लिए गर्व का क्षण है। काशी सबसे प्राचीन नगरी है और नई सोच देती है। वडनगर से काशी तक प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा की यात्रा दिखाई है। आज देश बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है। अन्नदाता मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तकनीक की समझ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही नया और आत्मनिर्भर भारत है। उन्होंने वाराणसी में बड़ी संख्या में लोगों के आने का जिक्र करते हुए यहां बालाजी … Read more

राजनाथ सिंह ने स्वागत में मिला चांदी का मुकुट लौटाया, बोले- इसे गरीब बेटी की पायल के लिए इस्तेमाल करें

 आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने प्रवास के दौरान 'खटीक गर्जना सम्मेलन' में हुए स्वागत के दौरान उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. दरअसल, समाज की ओर से राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया. सम्मान स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्री ने मुकुट अपने पास रखने के बजाय उसे समाज को वापस लौटा दिया. चांदी का मुकुट वापस लौटाते समय उन्होंने कहा कि मैं सब कुछ स्वीकार कर लेता हूं, लेकिन चांदी का यह मुकुट आपके हवाले करता हूं. किसी गरीब मां-बाप की बेटी शादी के बाद विदा हो रही हो और उसके पैरों में चांदी की पायल न हो, तो इस मुकुट को तुड़वाकर उसके लिए पायल बनवाकर दे देना. राजनाथ सिंह की इस बात ने पूरे कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।  'समाज को बांटने की कोशिश में नहीं आएंगे' सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज को भड़काने की कोशिश करते हैं. कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर समाज में दरार पैदा करने का प्रयास किया जाता है।  उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और समाज को बंटने नहीं देंगे. समाज में प्रेम हो, सहयोग हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा. राजनाथ सिंह ने कहा- 'याद रखिए, टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे।  'सनातन और हिंदू धर्म को जाति के चश्मे से देखने वाले मूल भाव नहीं समझते' रक्षा मंत्री ने कहा कि सनातन और हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को समझ नहीं पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था कर्म आधारित है. इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य हो सकता है. उन्होंने कहा कि वह साझा कर्तव्य धर्म की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा करना है।  'खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया' राजनाथ सिंह ने खटीक समाज के इतिहास और योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक अत्याचार सहे, लेकिन अपने धर्म और आस्था को नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया. यह उसके धैर्य, संघर्ष और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  रक्षा मंत्री ने समाज से एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समाज की ताकत उसके एकजुट रहने में है और किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिशों से बचना होगा।  सबका लक्ष्य एक—धर्म और राष्ट्र की रक्षा हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को नहीं समझ पाते हैं। हमारी व्यवस्था कर्म-आधारित है। इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य भी हो सकता है। लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है—धर्म और राष्ट्र की रक्षा करना। खटीक समाज की तारीफ 1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाया जाने लगा, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटीक समाज के कई लोगों ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था। खटीक वो, जो खौफ को भी डरा दे समय चाहे कोई भी रहा हो, चुनौती कैसी भी रही हो और शत्रु कितना भी शक्तिशाली रहा हो, खटीक समाज ने धर्म और देश के स्वाभिमान की रक्षा से कभी पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। ऐसा भी कहा जा सकता है कि खटीक वो है, जो खौफ को भी डरा दे। खटीक वो है, जो खतरे में सबसे आगे खड़ा रहे। खटीक वो है, जो खुद कठिनाई सहकर भी दूसरों की रक्षा करे। यूपी तेजी से विकास कर रहा आज उत्तर प्रदेश भी डबल इंजन की सरकार के साथ तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था। ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं। असुरक्षा का माहौल था। लोग भय में जी रहे थे और आए दिन दंगे होते थे। अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था यूपी उत्तर प्रदेश आज विकास के लिए जाना जा रहा है। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जा रहा है। जो प्रदेश कभी अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था, आज औद्योगिक कॉरिडोर बना रहा है। मेट्रो रेल का नेटवर्क फैला रहा है। अब तो आगरा मेट्रो के विस्तार का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

राजनाथ सिंह के इस्तीफे की अटकलों के बीच सियासी हलचल, क्या अमित शाह को मिलेगी नई जिम्मेदारी?

नई दिल्ली केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इस नई कैबिनेट में अमित शाह गुट के नेताओं को अधिक जगह मिल सकती है। आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले राजनाथ सिंह के कैबिनेट से इस्तीफा देने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा की तरफ से वह अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की नई टीम लगभग तैयार है। कल रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी बैठक की है। अब सबकी नजरें संभावित कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं। यह भी चर्चा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कुछ केंद्रीय मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति बनाने की क्यों अटकलें? 2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। इसी साल उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यह राज्य भाजपा के लिए काफी अहम है। इसलिए बीजेपी देश के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राजनाथ सिंह को आगे कर सकती है। राजनाथ सिंह को बीजेपी के सबसे अनुभवी और सर्वमान्य नेताओं में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और मौजूदा रक्षा मंत्री तक का उनका राजनीतिक सफर उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करता है। लखनऊ सीट से कौन लड़ेगा चुनाव? राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर राजनाथ सिंह राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट खाली हो सकती है। उनके बेटे नीरज सिंह के इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। अमित शाह को भी मिलेगा प्रमोशन? कैबिनेट फेरबदल की संभावना के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ जानकारों का मानना ​​है कि आगामी फेरबदल में उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। अमित शाह अभी सरकार, संगठन और प्रशासनिक फैसलों में बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जाए या नहीं, इससे उनपर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हां, अगर अमित शाह को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो इसे भविष्य के नेतृत्व को लेकर बीजेपी की तरफ से एक अहम राजनीतिक संकेत माना जाएगा।

राजनाथ सिंह का बड़ा दावा, ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान घुटनों पर आया

नई दिल्ली  'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने मात्र चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करने पर मजबूर कर दिया। यह जानकारी शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि भारत की निर्णायक इच्छाशक्ति, आधुनिक सैन्य क्षमता और तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट तालमेल का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत द्वारा अब तक लड़े गए युद्धों और अभियानों की तुलना में ऑपरेशन सिंदूर कई मायनों में अलग और अत्यंत प्रभावशाली रहा। दरअसल देश की सैन्य शक्ति, रणनीतिक क्षमता और सैनिकों के अदम्य साहस का प्रतीक बन चुके ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुक्रवार को एक विशेष अवसर देखने को मिला।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक सैन्य अभियान पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया। नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में भारतीय सेनाओं के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पूरा वातावरण गर्व, सम्मान तथा राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।  इस दौरान रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के सैन्य इतिहास की एक अभूतपूर्व सफलता बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि शुक्रवार को जारी किया गया स्मारक प्रकाशन केवल घटनाओं का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उन सैनिकों की भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों को भी सामने लाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और रणनीतियों से नहीं जीते जाते, बल्कि उनमें नेतृत्व, साहस, मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। यह पुस्तक इन्हीं पहलुओं को बेहद मानवीय और प्रेरणादायक तरीके से प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि जब देश के सैनिक सीमाओं पर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, तब राष्ट्र के नागरिकों का भी दायित्व बनता है कि वे देशहित को सर्वोपरि रखें। रक्षा मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इस प्रकाशन से प्रेरणा लें और ऐसे जिम्मेदार नागरिक बनें जो देश की संप्रभुता और सुरक्षा के महत्व को गहराई से समझ सकें। समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की रणनीतिक योजना, संयुक्त सैन्य समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर पर सैनिकों के साहसिक प्रदर्शन पर अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर तेज, सटीक और बहुआयामी सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। इस अभियान ने न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। स्मारक प्रकाशन को सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को समर्पित एक जीवंत दस्तावेज माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का कार्य करेगा। 

‘भारत ने शुरू किया था लंबा ऑपरेशन…’, राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को इस नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. यह ऑपरेशन लगभग एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी।  इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया. रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीति साफ है – किसी भी हालत में आतंकवादी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपना रुख साबित किया है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिर्फ 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे लंबी तैयारी थी. अगर जरूरत पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार था।  आज की दुनिया तेजी से बदल रही है. कई बड़े देश अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रीय हितों को पहले से ज्यादा जोर-शोर से सामने रख रहे हैं. पुराना नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सिस्टम अब सवालों के घेरे में है. संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।   प्रौद्योगिकी, सप्लाई चेन और डिजिटल टूल्स को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में भारत को इस नई दुनिया में और ज्यादा सतर्कता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और विकास की रणनीति को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालना होगा।  आतंकवाद के तीन आयाम और उसकी जड़ें राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को मानवता पर एक काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ एक विकृत मानसिकता है. यह सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं, बल्कि मानव मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है. आतंकवाद को अक्सर धर्म या किसी हिंसक विचारधारा के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, जो दरअसल आतंकियों को कवर फायर देना है।  रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि आतंकवाद सिर्फ राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, बल्कि इसके तीन आयाम हैं – ऑपरेशनल (संचालन संबंधी), आइडियोलॉजिकल (वैचारिक) और पॉलिटिकल (राजनीतिक). आतंकवाद की असली ताकत उसकी वैचारिक और राजनीतिक जड़ों में है. उन्होंने इसे रावण की नाभि से जोड़कर समझाया कि जब तक इस नाभि यानी वैचारिक और राजनीतिक संरक्षण को नहीं सुखाया जाएगा, आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा. इसलिए आतंकवाद को सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि सभी तीन आयामों में लड़ना जरूरी है।  पाकिस्तान पर सीधा हमला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि वह लगातार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान आजादी के समय एक साथ स्वतंत्र हुए, लेकिन आज भारत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान इंटरनेशनल टेररिज्म (International Terrorism) का केंद्र बन गया है।  उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) में कोई फर्क नहीं करता. पीएम मोदी की नीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का रवैया अपनाया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को परमाणु हमले की धमकियां भी मिलीं, लेकिन भारत उनमें नहीं फंसा और राष्ट्रहित में जो जरूरी था, वह किया।  तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत का प्रदर्शन ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति के नए रूप का उदाहरण बना. इसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने एक साथ, एक योजना के तहत काम किया. रक्षा मंत्री ने कहा कि अब भारत की सैन्य शक्ति साइलो में नहीं चलती, बल्कि संयुक्त और एकीकृत रूप में उभरी है. यह एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की छवि को मजबूत करता है।  भारत ने ऑपरेशन अपनी शर्तों और अपने समय पर शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही समाप्त किया. सिर्फ उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया गया जो हमले के जिम्मेदार थे. ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका गया क्योंकि क्षमता कम थी, बल्कि भारत ने अपनी मर्जी से रोका. जरूरत पड़ने पर ज्यादा कुछ भी किया जा सकता था।  स्वदेशी हथियारों की बढ़ती विश्वसनीयता ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम से लेकर निगरानी प्लेटफॉर्म तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खूब इस्तेमाल हुआ. इससे भारत की सटीकता और घातक क्षमता काफी बढ़ गई. रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन के बाद स्वदेशी हथियारों और रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता दुनिया भर में बढ़ी है।  अब कई देश भारत से हथियार और रक्षा सामग्री खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत का मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स अब शांति काल के साथ युद्ध के समय में भी तेज सप्लाई देने के लिए तैयार है. सर्ज कैपेसिटी और स्टोरेज कैपेसिटी मजबूत हुई है. इससे भारत की डिटरेंस बढ़ी है।  भविष्य की तैयारी: AI और टेक्नोलॉजी रक्षा मंत्री ने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है. GPU क्षमता बना रहा है. फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम चला रहा है. AI को 'Augmented Infantry' यानी बढ़ी हुई पैदल सेना के रूप में देखा जा रहा है. सेना ने AI, मशीन लर्निंग और बिग डेटा का इस्तेमाल करके अपनी क्षमताएं मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है. इससे देश न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित बनेगा, बल्कि शक्तिशाली और समृद्ध भी होगा।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इन बयानों से साफ है कि नया भारत आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ बिना किसी समझौते के खड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ आतंकियों को सबक सिखाया, बल्कि दुनिया को भारत की सैन्य तैयारी, संयुक्त ताकत और स्वदेशी क्षमता का संदेश भी दिया. बदलते विश्व में भारत अपनी सुरक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग और तैयार है।   

West Asia संकट पर मंथन: ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक की कमान संभालेंगे राजनाथ सिंह

नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करने में जुटी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज मंत्रियों के समूह के साथ बैठक कर पेट्रोल, डीजल और खाद की उपलब्धता की समीक्षा करेंगे। सरकार का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखना है।   पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने मंत्रियों का एक विशेष समूह (जीओएम) गठित किया है। इस समूह की एक अहम बैठक आज फिर आयोजित की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार शाम चार बजे इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के ताजा हालातों और भारत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर चर्चा होगी। बैठक में एलपीजी सप्लाई, पेट्रोल डीजल, फर्टिलाइजर्स आदि की सप्लाई को लेकर समीक्षा की जाएगी।   इससे पहले 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस समूह की तीसरी बैठक हुई थी। उस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। उस दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि सरकार देश के भीतर जरूरी सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने विशेष रूप से रसोई गैस, ईंधन और किसानों के लिए खाद की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया था। सरकार का प्रयास है कि देशभर में जरूरी सामानों की सप्लाई सुचारु रहे ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया था कि सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को पहले से ही मजबूत कर रही है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लगातार निगरानी रखना और समय पर सही निर्णय लेना बहुत आवश्यक हो गया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के प्रभाव से देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर स्तर पर तालमेल बिठाकर काम कर रही है। इस समूह की दूसरी बैठक दो अप्रैल को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुई थी। उस बैठक में भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन मंथन हुआ था और खतरों को कम करने की रणनीति बनाई गई थी। रक्षा मंत्री ने तब कहा था कि भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके लिए 24 घंटे निगरानी रखना और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य है कि देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति पर कोई बुरा असर न पड़े। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में सेना के युद्ध स्मारक पर लेज़र, लाइट और साउंड शो का किया उद्घाटन

लखनऊ. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ छावनी स्थित सेना के मध्य कमान के स्मृतिका युद्ध स्मारक में एक अत्याधुनिक लेज़र, लाइट और साउंड शो का उद्घाटन किया। लगभग 30 मिनट का यह हिंदी मल्टीमीडिया शो, उन्नत प्रोजेक्शन, साउंड और लाइटिंग तकनीकों के माध्यम से भारतीय सेना के इतिहास, उसकी ऑपरेशनल उपलब्धियों और राष्ट्र-निर्माण में उसके योगदान को बयां करता है। यह शो भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और विरासत को समर्पित एक श्रद्धांजलि है। इसकी कहानी में भारत के प्रमुख युद्धों और ऑपरेशन्स, सेंट्रल कमांड की ऐतिहासिक भूमिका, अवध क्षेत्र की वीरता और 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना के अनुरूप समकालीन सैन्य आधुनिकीकरण को शामिल किया गया है। यह शो प्रतिदिन शाम के समय स्मृतिका युद्ध स्मारक में आयोजित किया जाएगा और जल्द ही इसे आम जनता के लिए भी खोल दिया जाएगा। इस मल्टीमीडिया प्रस्तुति में भारत के प्रमुख युद्धों का एक समग्र अवलोकन प्रस्तुत किया गया, जिसमें विशेष रूप से 1947-48, 1962, 1965 और 1971 के संघर्षों के प्रमुख ऑपरेशनल पहलुओं के साथ-साथ 'ऑपरेशन मेघदूत' और 'ऑपरेशन विजय' के दौरान दिए गए विशिष्ट योगदानों को रेखांकित किया गया है। भारतीय सशस्त्र बलों के विभिन्न ऑपरेशन्स में मध्य कमान द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को इसमें प्रमुखता से दर्शाया गया है। इसमें अवध क्षेत्र के 'परमवीर चक्र' विजेताओं की असाधारण वीरता को भी उजागर किया गया है, जिसे अवध की गहरी सैन्य परंपराओं और राष्ट्र की रक्षा में उसके विशिष्ट योगदान के संक्षिप्त विवरण के साथ खूबसूरती से पिरोया गया है। इस शो की विषय-वस्तु में उभरते खतरों और युद्ध की बदलती गतिशीलता के जवाब में भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे निरंतर आधुनिकीकरण और रूपांतरण को भी शामिल किया गया है। इसमें भारतीय रक्षा उद्योग की हालिया प्रगति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसका पहला उपयोग 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान प्रदर्शित किया गया था। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के एक ऐसे केंद्र के रूप में उभरने को भी दर्शाया गया है जो 'आत्मनिर्भरता' की पहलों का मुख्य केंद्र बन रहा है; राज्य का आगामी 'रक्षा गलियारा' (Defence Corridor) इसी का एक जीवंत उदाहरण है। आगामी लेज़र, लाइट और साउंड शो के आयोजन और प्रदर्शन को सुगम बनाने के उद्देश्य से, स्मृतिका युद्ध स्मारक परिसर में भी व्यापक स्तर पर उन्नयन (अपग्रेडेशन) का कार्य किया जा रहा है। शो के लिए अत्याधुनिक प्रोजेक्टर और स्पीकर लगाने के अलावा, नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों और युद्ध में जीती गई चीज़ों (वॉर ट्रॉफ़ी) को दिखाने वाले भित्ति चित्र (म्यूरल) भी लगाए गए हैं, और साथ ही एक आधुनिक एम्फीथिएटर भी बनाया गया है। इसके अलावा, तीन खास म्यूरल दीवारें भी बनाई जा रही हैं, जो एक तरफ तो सैन्य इतिहास को प्रमुखता से दिखाएंगी, और दूसरी तरफ लेज़र, लाइट और साउंड शो के लिए एक जीवंत मंच का काम करेंगी। इस पहल को सेना के मध्य कमान के मुख्यालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के साथ मिलकर पूरा किया है। लखनऊ कैंटोनमेंट में स्थित 'स्मृतिका युद्ध स्मारक' (Smritika War Memorial), 1994 से ही भारतीय सशस्त्र बलों के सैनिकों की बहादुरी, बलिदान और अदम्य साहस को समर्पित एक अमर श्रद्धांजलि के रूप में खड़ा है। मुख्यालय मध्य कमान के संरक्षण में स्थापित यह स्मारक, राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने, हमारी सैन्य विरासत को सहेजने और आम लोगों खासकर युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने में एक अहम भूमिका निभाता है। मुख्यालय मध्य कमान द्वारा इस स्थल पर आयोजित किए जाने वाले औपचारिक कार्यक्रम, उन वीर सैनिकों के शौर्यपूर्ण कार्यों को याद करते हैं, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इस अवसर पर जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ (GOC-in-C) मध्य कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, मुख्यालय मध्य कमान के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय सेना और राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे। स्मृतिका युद्ध स्मारक में रोज़ाना होने वाला लेज़र, लाइट और साउंड शो, इस स्मारक के गौरव को बढ़ाने के साथ-साथ, राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने और सैन्य विरासत को एक दिलचस्प और प्रभावशाली तरीके से आधुनिक संदर्भ में सहेजने का एक शक्तिशाली माध्यम भी बनेगा। यह पहल, भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी और बलिदान को एक बड़े जनसमूह के सामने जीवंत रूप से प्रस्तुत करके, सेना और आम नागरिकों के बीच के महत्वपूर्ण जुड़ाव को और भी मज़बूत करेगी। यह स्मारक देश के लिए शहीद हुए वीरों को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी, और 'स्मृतिका युद्ध स्मारक' को हमारी साझा सैन्य विरासत के एक राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में और भी ऊँचा दर्जा प्रदान करेगी। भारत की सैन्य विजयों का एक जीवंत और भावपूर्ण चित्रण प्रस्तुत करके, यह स्मारक हमारे बहादुर योद्धाओं के बलिदान को लगातार सम्मानित करता रहेगा, और साथ ही आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित और प्रेरित भी करेगा।

केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह बोले – किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़, किसानों के विकास के लिए हम हैं प्रतिबद्ध

भोपाल.  केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश की सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों का समान महत्व है। दोनों ही अपनी मिट्टी के प्राण-प्रण से सेवा में तत्पर रहते हैं। किसान हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, हमारी ताकत हैं। इनके बिना हमारे भोजन की थाली अधूरी है। किसानों की मुस्कान ही हमारी पूंजी है। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी बड़े जोखिम का काम है, फिर भी हमारे किसान पूरी मेहनत और लगन से देशवासियों का उदर-पोषण करते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि वे स्वयं एक किसान पुत्र हैं। किसानों की वेदना और उनकी जरूरतों से वाकिफ हैं। किसानों का कल्याण हमारा लक्ष्य है। इनकी बेहतरी के लिए हम संकल्पबद्ध होकर प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देश के किसानों के कल्याण की दिशा में हमारा मजबूत प्रयास है। किसान सम्मान निधि के रूप में हर पात्र किसान के बैंक खाते में 6000 रुपए सीधे ट्रांसफर किये जा रहे हैं, जिससे वे खाद, बीज और खेती-किसानी के अन्य जरूरी समान खरीद सकें। यह किसानों की मेहनत का सम्मान है। अब तक हमारी सरकार हजारों करोड़ रुपए की सहायता किसान भाइयों को दे चुकी है। उन्होंने किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि गांव, गरीब, नारी, युवा और खेती-किसानी की लगातार बेहतरी के लिए हमारे प्रयास आगे भी इसी तरह जारी रहेंगे। केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह शनिवार को रायसेन के दशहरा मैदान में आयोजित "उन्नत कृषि महोत्सव-2026" को संबोधित कर रहे थे। केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा त्रि-दिवसीय कृषि महोत्सव प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत् शुभारंभ किया गया। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं राज्य शासन के कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को मृदा परीक्षण में मदद के लिए स्वॉइल मोबाइल ऐप ई-फॉर्म लान्च किया गया। इस ऐप की मदद से किसान बंधु खुद अपने खेत की मिट्टी की सेहत जांच सकेंगे। कार्यक्रम में नरवाई प्रबंधन, कस्टम हायरिंग एवं अन्य शासकीय योजनाओं के 10 क्षेत्रीय हितग्राही किसानों को मंच से हितलाभ वितरित किए गए। इस दौरान देश में कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास पर केंद्रित आकर्षक लघु फिल्म (एवी) का प्रदर्शन भी किया गया। उन्नत कृषि महोत्सव 13 अप्रैल तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ह्दय प्रदेश को दी एक अलग पहचान केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह ने मध्यप्रदेश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सशक्त एवं कर्मठ नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रायसेन की उर्वर भूमि पर हो रहा यह उन्नत कृषि महोत्सव प्रदेश के किसानों की तकदीर और उनकी माली हालत की तस्वीर बदलने में बेहद सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस कृषि महोत्सव में किसानों को सरकारी योजनाओं के साथ बिचौलियों से मुक्त बाजार सहित वेयर हॉउसिंग और कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के लिए सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देश के हृदय प्रदेश को एक अलग पहचान दी है। मध्यप्रदेश के किसानों की मेहनत और लगन प्रेरणादायी है। प्रदेश की जनता का अतिथि सत्कार दिल जीत लेता है, यह मध्यप्रदेश की खासियत है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए उपहार केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि बीते सालों में केंद्र सरकार ने किसानों के लिए बेमिसाल कार्य किए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक उपहार की तरह है। इसमें प्राकृतिक आपदा से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई अब फसल बीमा के माध्यम से की जा रही है। भारत सरकार ने देश के सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए हैं। इसकी मदद से किसान पता लगा पा रहे हैं कि उनके खेत में कौन सी फसल ली जा सकती है और उन्हें खाद की कितनी मात्रा डालनी है। इससे कृषि की लागत घटी है। भारत सरकार ने गांव-गांव तक सड़कें, नल से जल, बिजली कनेक्शन दिए और गांवों को शहरों से जोड़ा है। देशभर की मंडियां ऑनलाइन होने से किसान अब घर बैठे अपनी उपज बेच सकता है। हमारी सरकार ने फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि किसानों और गांवों के लिए अभी भी बहुत कुछ करना शेष है। किसानों के कल्याण के लिए धन की कमी कभी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि वे देश के रक्षा मंत्री है, लेकिन दिल से एक किसान भी हैं। प्राकृतिक और जैविक खेती के पैदा फसल-सब्जियों से जवानों की सेहत हुई अच्छी केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह ने किसानों के हित में रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए नवाचार की जानकारी देते हुए बताया कि हमने देशभर में मौजूद सेना की छावनियों के आसपास के किसानों से ही प्राकृतिक खेती से पैदा किए गए फल एवं सब्जियां खरीदने का निर्णय लिया है। प्राकृतिक और जैविक खेती से पैदा फल और सब्जियां के उपभोग से जवानों की सेहत भी अच्छी हुई है। हमने इन खाद्य उत्पादों को बाहर से बुलवाना बंद कर दिया है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने श्रीअन्न को भी प्रोत्साहन दिया है। इससे छावनी इलाकों के आसपास के किसानों को श्रीअन्न का समुचित मूल्य मिल रहा है। हमारे प्रयासों से जय जवान, जय किसान का नारा सच्चे अर्थों में चरितार्थ हुआ है। केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था किसानों पर ही टिकी हुई है। किसानों द्वारा उत्पादित अनाज परिवहन और औद्योगिक क्षेत्र को भी गति देता है। किसान केवल अन्न ही नहीं, वह अर्थव्यवस्था, रोजगार और सेवाओं को भी आगे बढ़ाता है। किसानों के बिना अर्थव्यवस्था बेजान है। हमारी सरकार खेती के पेशे को बड़े सम्मान से देखती है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हमारे युवा साथी खेती-किसानी के व्यवसाय से जुड़ें। भारतीय युवा शक्ति की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। खेती को ड्रोन, मोबाइल सेंसर जैसी आधुनिक तकनीक और नवाचारों के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मिट्टी की जांच, मौसम का पूर्वानुमान, फसलों की निगरानी तकनीक से की जा सकती है। खाद्य प्रसंस्करण से भी कच्चे कृषि उत्पादों को प्रोसेस कर लाभ कमाया जा सकता … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आत्मीय अगवानी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शनिवार को भोपाल के स्टेट हैंगर पर आत्मीय अगवानी की। केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह रायसेन में आयोजित कृषि महोत्सव प्रर्दशनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए ट्रांजिट विजिट पर स्टेट हैंगर भोपाल आये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय रक्षा मंत्री सिंह का पुष्प-गुच्छ  एवं शॉल ओढ़ाकर प्रदेश में आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रक्षा मंत्री को   स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। स्टेट हैंगर में अल्प-विश्राम के बाद केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से रायसेन के लिए रवाना हुए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, भोपाल के लोकसभा सांसद आलोक शर्मा, विधायक विष्णु खत्री, महापौर श्रीमती मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भी केंद्रीय मंत्री सिंह को पुष्प-गुच्छ भेंट किए।  

हल्द्वानी में बोले राजनाथ सिंह: पश्चिम एशिया संकट का हल सिर्फ संवाद और कूटनीति

 हल्द्वानी (नैनीताल) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ । इस स्थिति में भारत ने अपना पक्ष मजबूती से रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि यह गंभीर समस्या है। इसका समाधान युद्ध का माध्यम से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिये ही निकलेगा। यही सबसे अच्छा जरिया ही है। इस बारे में जनसभा में इस बारे में लोगों से समर्थन भी मांगा। शनिवार को जन-जन की सरकार चार साल बेमिसाल कार्यक्रम के तहत एमबी इंटर कालेज मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने जिस करिश्माई तरीके से भारत का मस्तक ऊंचा किया है। उसकी सराहना जितनी की जाए, कम है। पहले भारत की बातों को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया जाता था लेकिन आज का भारत की बात को सारी दुनिया कान खोलकर सुनती है। यह गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जिस तरह का संकट चल रहा है। ऐसे में हो सकता है कि यहां पर ऊर्जा व खाद संकट पैदा हो जाए। पूरी दुनिया के प्रभावित होने पर भारत भी प्रभावित हो सकता है। अभी तक पीएम ने अपनी सूझबूझ से उस संकट में भारत को नहीं फंसने दिया है लेकिन भविष्य में क्या होगा। कुछ नहीं कहा जा सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की धरती यह कहना चाहता हूं कि मोदी की ओर से वैश्विक संकट को दूर करने के लिए जो भी उनके द्वारा कोशिश की जा रही है। उत्तराखंडवासियों की ओर से भी उसका समर्थन किया जाना चाहिए।