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मेडिकल क्षेत्र में नौकरी का मौका, गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में 22 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए आवेदन शुरू

भोपाल  राजधानी के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी) में सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित जीएमसी स्वशासी समिति द्वारा विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी और ब्रांड स्पेशियलिटी विभागों में रिक्त 22 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक अभ्यर्थी 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं। इन विभागों में होंगी नियुक्तियां महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 15 विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें कम्युनिटी मेडिसिन (स्टेटिस्टिक्स), न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा यूनिट, स्पोर्ट्स मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक नियोनेटोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, फार्माकोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, रेडियोडायग्नोसिस, नेफ्रोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन जैसे विभाग शामिल हैं। सातवें वेतनमान का मिलेगा लाभ चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतनमान के वेतन मैट्रिक्स लेवल-11 के अनुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा राज्य शासन द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते एवं सुविधाएं भी नियमानुसार मिलेंगी। तीन वर्ष के सेवा बांड पर होगी नियुक्ति भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित चिकित्सकों की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के सेवा बांड या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, के आधार पर की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाकर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। 

Bihar Social Security Pension: लाभार्थियों के खाते में आए ₹84 करोड़, अब तय तारीख पर होगी भुगतान प्रक्रिया

पटना. सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 77265 लाभुकों के बैंक खाते में भेजे गए 84 करोड़ 99 लाख 24 हजार 625 रुपये भेज दिए गए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लाभुकों को मई माह की पेंशन राशि प्रदान की। यह राशि उन्होंने दिल्ली में बिहार भवन से डीबीटी के जरिए भेजी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर सम्राट बुधवार पूर्वाह्न दिल्ली गए हैं। पहले वे मंगलवार रात को प्रस्थान करने वाले थे, लेकिन कामकाज की व्यस्तता के कारण पटना से निकल नहीं पाए। बुधवार को दिल्ली में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में सम्राट भी सहभागी रहेंगे। बैठक का उपलक्ष्य मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर जन-जन तक उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार है।  पेंशन भुगतान का समय अनियमित उल्लेखनीय है कि बिहार में उल्लेखनीय है कि बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के एक करोड़ 21 लाख चार हजार 939 लाभुक हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रति लाभुक 1100 रुपये दिए जाते हैं। पहले पेंशन भुगतान का समय अनियमित था।  अब हर महीने 10 तारीख को पेंशन का भुगतान इस कारण बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की आर्थिक समस्याओं का  समय से समाधान नहीं हो पा रहा था। अंतत: मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया कि अब प्रत्येक माह की 10 तारीख को लाभुकों के खाते में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भेज दी जाएगी। उस पर अमल शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद तबकों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना हमारी सरकार का दायित्व है। हमने पिछली सरकार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रूपये से बढ़ाकर सीधे 1100 रुपये प्रति माह किया था। हम 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों, सभी विधवाओं एवं निःशक्तजनों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशनों का लाभ देते है।  सभी लाभुकों को यह राशि हर माह निश्चित समय पर प्राप्त हो इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने के सुअवसर पर इन योजनाओं के 94 लाख से अधिक लाभुकों को 1100 रुपये प्रति माह की दर से आज हम लगभग 1100 करोड़ रुपये की राशि उनके खाते में भेज रहे है।  जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहने के लिए संकल्पित उन्होंने कहा कि आगे हर महीने की 10 तारीख को हमारी सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभुकों के खाते में यह राशि अंतरित करती रहेगी। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के लोक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सरकार सभी जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहने के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग जिन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वे लाभ प्राप्त करने के लिए शीघ्र आवेदन करें। साथ ही आधार कार्ड लिंक नहीं होने के कारण पेंशन से वंचित लोग भी जल्द अपना आधार लिंक कराकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ प्राप्त करें। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्थानिक आयुक्त मनोज कुमार उपस्थित थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास, सभी जिलों के जिलाधिकारी एवं लाभार्थीगण जुड़े हुए थे।

Punjab Politics: BJP-अकाली गठबंधन को लेकर केजरीवाल का तंज, पोस्ट के बाद सियासी घमासान तेज

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी व शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक व्यंग्यात्मक ट्वीट में भाजपा को 'ईडी पार्टी' और अकाली दल को 'बेअदबी पार्टी/चिट्टा पार्टी' बताते हुए दोनों दलों के बीच गठबंधन की अटकलों पर निशाना साधा। अरविंद केजरीवाल व आम आदमी पार्टी कई दिनों से भाजपा को 'ईडी पार्टी' कहकर संबोधित कर रही है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दुरुपयोग के आरोप लगाता रहा है। वहीं, पंजाब की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल को 'बेअदबी पार्टी' और 'चिट्टा पार्टी' (नशा/ड्रग्स) कहकर संबोधित किया गया है। यह तंज अकाली दल के पिछले कार्यकाल के दौरान हुए गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों और राज्य में फैले 'चिट्टे' के विवादित मुद्दे को लेकर किया गया है। ट्वीट में केजरीवाल ने क्या कहा- मैंने कल ही कहा था। ईडी पार्टी बेअदबी पार्टी/चिट्टा पार्टी से गठबंधन करने को बेचैन है पर बेअदबी पार्टी/चिट्टा पार्टी घास नहीं डाल रही है। सबसे गजब की बात ये है कि ईडी पार्टी चिट्टा पार्टी के साथ गठबंधन करके चिट्टे के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। तंज में ईडी-चिट्‌टा पार्टी कहा केजरीवाल ने अपने ट्वीट के जरिए कहा कि 'ईडी पार्टी' पंजाब में दोबारा पैर जमाने के लिए 'चिट्टा पार्टी' के साथ गठबंधन करने को लेकर बेहद उतावली और बेचैन है, लेकिन दूसरी तरफ से उसे कोई भाव नहीं मिल रहा। उन्होंने इसे राजनीति का बड़ा विरोधाभास भी बताया। पंजाब में पिछले कुछ समय से भाजपा और अकाली दल के पुराने गठबंधन को फिर से बहाल किए जाने की अटकलें तेज हैं। हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। पंजाब भाजपा अध्यक्ष भी स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। राज्य की राजनीति में हलचल शुरू केजरीवाल के इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह ट्वीट पंजाब की जनता को आगाह करने के लिए है कि किस तरह विरोधी दल राजनीतिक लाभ के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करने को तैयार हैं। पार्टी का आरोप है कि जो दल पहले एक-दूसरे की नीतियों का विरोध करते थे, वे अब सत्ता के लालच में एक मंच पर आने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि पंजाब में ड्रग्स (चिट्टा) और बेअदबी के मुद्दे हमेशा से बेहद संवेदनशील और बड़े चुनावी मुद्दे रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था और प्रचंड बहुमत हासिल किया था। अब एक बार फिर अरविंद केजरीवाल ने इंटरनेट मीडिया के जरिए इन मुद्दों को नया राजनीतिक रंग दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में भाजपा और अकाली दल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

गृह सचिव रमेश कुमार की नई नियुक्ति, अब संभालेंगे सहकारिता एवं रजिस्ट्रार विभाग के आयुक्त का पद

रायपुर. रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने आखिरकार सहकारिता विभाग की सबसे अहम कुर्सी पर नियुक्ति कर दी है। आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां का पद पिछले 10 दिनों से खाली पड़ा था। 31 मई को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी महादेव कांवरे के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था। खाली पद के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहे थे। सहकारी समितियों से जुड़े कई मामलों में निर्णय की गति धीमी पड़ गई थी। अब सरकार ने इस इंतजार को खत्म करते हुए आईएएस रमेश कुमार शर्मा को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी है। कांवरे की वापसी की चर्चा, फैसला नहीं महादेव कांवरे के रिटायरमेंट के साथ ही उनकी वापसी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कांवरे ने संविदा नियुक्ति के लिए शासन को आवेदन भी दिया था। मंत्रालय के गलियारों में यह चर्चा थी कि सरकार अनुभव का हवाला देकर उन्हें दोबारा जिम्मेदारी दे सकती है। कई दिनों तक इसी संभावना पर अटकलें चलती रहीं। लेकिन सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकी। आवेदन पर न हां हुई, न ना। आखिरकार इंतजार बढ़ता गया और विभाग बिना मुखिया के चलता रहा। सरकार ने रमेश शर्मा पर लगाया दांव लंबे इंतजार के बाद सरकार ने नया फैसला लिया। 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रमेश कुमार शर्मा को आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के पद पर पदस्थ कर दिया गया है। आदेश के अनुसार यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। नियुक्ति राज्यपाल के नाम से जारी आदेश के जरिए की गई है। आदेश डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी हुआ है। इससे साफ संकेत है कि सरकार ने फिलहाल संविदा नियुक्ति के बजाय नियमित प्रशासनिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। गृह विभाग के हैं सचिव रमेश शर्मा फिलहाल गृह विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। अब उन्हें सहकारिता विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इसका मतलब यह है कि सरकार ने एक बार फिर भरोसा अनुभवी और सक्रिय अधिकारियों पर जताया है। सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी ऐसे समय में दी गई है जब विभाग कई अहम योजनाओं और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। गृह विभाग में भी शुरू हुई नई चर्चा रमेश शर्मा को नई जिम्मेदारी मिलने के साथ ही गृह विभाग में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी जगह कौन संभालेगा। फिलहाल सरकार ने गृह विभाग में किसी नई पदस्थापना का आदेश जारी नहीं किया है। ऐसे में विभाग के भीतर जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की संभावना बढ़ गई है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि गृह विभाग में पहले से सचिव के रूप में कार्यरत हिमशिखर गुप्ता को अतिरिक्त दायित्व दिया जा सकता है। हिमशिखर गुप्ता के बढ़ सकते हैं अधिकार हिमशिखर गुप्ता इस समय गृह और श्रम विभाग दोनों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यदि रमेश शर्मा के हिस्से का काम भी उन्हें सौंपा जाता है तो उनकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। हालांकि इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है। अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। लेकिन मंत्रालय में चर्चा तेज है कि गृह विभाग के कामकाज की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह सबसे आसान विकल्प हो सकता है। संविदा पर सस्पेंस, सरकार का संकेत साफ पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा संदेश भी दिया है। महादेव कांवरे के संविदा आवेदन पर सरकार ने अब तक निर्णय नहीं लिया है। दूसरी तरफ उनकी कुर्सी पर नए अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है। इससे संकेत मिल रहा है कि फिलहाल सरकार संविदा विस्तार के रास्ते पर आगे बढ़ती नहीं दिख रही। हालांकि आवेदन पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। लेकिन सहकारिता विभाग की कुर्सी पर रमेश शर्मा की ताजपोशी ने साफ कर दिया है कि सरकार अब इंतजार के बजाय व्यवस्था आगे बढ़ाने के मूड में है।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण, CM विष्णु देव साय बोले- देश ने विकास और सुशासन की नई ऊंचाइयां छुईं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति प्रकट किया आभार नक्सल उन्मूलन, अधोसंरचना, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण में केंद्र की भूमिका को सराहा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकल्याणकारी नेतृत्व में संचालित योजनाओं ने छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति प्रदान की है तथा प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री साय ने पत्र में उल्लेख किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की केंद्र सरकार की नीति के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना के तहत ₹2,080.29 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही विशेष अधोसंरचना योजना (SIS), सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE), आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, जंगल वारफेयर प्रशिक्षण और एयर सपोर्ट जैसी पहलों ने सुरक्षा बलों को मजबूत बनाया है तथा राज्य को नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक बढ़त दिलाई।  मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ₹2,377 करोड़ की लागत से 3,222 किलोमीटर लंबी 391 सड़कों तथा 88 वृहद पुलों की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं ने बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकास और सुरक्षा दोनों को मजबूती प्रदान की है। पत्र में मुख्यमंत्री ने वित्तीय सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य को केंद्रीय करों में ₹3,46,806 करोड़ तथा विभिन्न योजनाओं में ₹1,43,328 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत ₹22,021 करोड़ तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में ₹22,600 करोड़ की अतिरिक्त सहायता भी मिली है। मुख्यमंत्री ने सड़क अधोसंरचना विकास को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना कोष (CRIF) के तहत ₹4,468 करोड़ तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए ₹35,766 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे रायपुर-विशाखापट्टनम, बिलासपुर-धनबाद, रायपुर-दुर्ग बायपास तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति मिली है और राज्य की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य के 24.50 लाख पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मनरेगा के तहत पिछले 12 वर्षों में ₹39,123 करोड़ व्यय कर 152 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ₹2,398 करोड़ की सहायता से 36.44 लाख परिवारों को शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के अंतर्गत 13,040 किलोमीटर सड़कों एवं 347 पुलों के निर्माण के लिए ₹7,951 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। वहीं पीएम जनमन के अंतर्गत 2,902 किलोमीटर सड़कों हेतु ₹2,007 करोड़ तथा पीएमजीएसवाई-4 के तहत 2,427 किलोमीटर सड़कों के लिए ₹2,246 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 25.51 लाख किसानों को अब तक ₹10,784 करोड़ की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹5,064 करोड़ की प्रीमियम सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा अन्य केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के 56 लाख राशन कार्डधारी परिवारों के 1.99 करोड़ सदस्यों को प्रति माह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹5,600 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। उज्ज्वला योजना के तहत 39.54 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। खनिज क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 62 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हुई है, जिनसे भविष्य में ₹4.34 लाख करोड़ से अधिक का संभावित राजस्व प्राप्त होगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) एवं पीएमकेकेकेवाई के माध्यम से ₹17,887 करोड़ से अधिक की राशि संकलित कर 81,553 विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने आदिवासी विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा वन अधिकारों की मान्यता को ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 56,569 पीवीटीजी परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4.83 लाख व्यक्तिगत और 48 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत किया गया है तथा 2,264 नए केंद्र स्वीकृत हुए हैं। राज्य के सभी जिलों में संचालित 42 सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहायता और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राज्य में 5,499 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 91 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 28 जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं तथा 23 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों की स्वीकृति प्राप्त हुई है। कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 18,330 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 82,952 हितग्राहियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि स्ट्राइव परियोजना … Read more

मध्य प्रदेश सरकार का अहम निर्णय, अब दो से अधिक बच्चों वाले भी सरकारी नौकरी के लिए होंगे पात्र

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एक बड़े फैसले में सरकारी सेवा नियमों से दो-बच्चों की शर्त को वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रस्तावित मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों में शामिल दो-बच्चों की शर्त के मसौदे को वापस ले लिया गया है और सरकारी पोर्टल से इसे ‘तत्काल’ हटाने का आदेश दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा देर शाम जारी एक रिलीज में कहा गया, ”मुख्यमंत्री ने यह बड़ा फैसला सरकारी कर्मचारियों और सरकारी सेवा की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के हित में यह बड़ा फैसला लिया है।” आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस मामले को देखा और आदेश दिया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के उस प्रस्ताव को वापस लिया जाए जिसमें सरकारी नौकरी के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त रखी गई थी। मोहन यादव ने आधिकारिक पोर्टल से ट्राफ्ट को तुरंत हटाने को कहा है। हालांकि, यह नियम प्रदेश में काफी पुराना है। 2001 में सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रावधान को लागू किया था। इसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सीधी भर्ती या विभागों में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। सीएम ने नया आदेश प्रकाशित करने को कहा मध्य प्रदेश में 2001 में लागू किए गए नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोग सरकारी नौकरी के योग्य नहीं थे। इसके अलावा एमपी सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1965 के तहत दो से अधिक बच्चे होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार माना जाता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अब तक के सबी नियमों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने नया मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है। नए मसौदे के बाद सीएम का ऐक्शन दरअसल, मध्य प्रदेश में सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026 का मसौदा तैयार किया गया था और इस पर आम लोगों से 15 जून तक सुझाव मांगे गए थे। इसमें लाए गए कई नए नियमों के बीच बच्चे वाले पुराने नियम को भी शामिल किया गया था। लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने इसे खत्म करने का आदेश दे दिया है। 2001 में लागू हुआ थआ ‘टू चाइल्ड’ का नियम यह याद किया जा सकता है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा लिए गए एक निर्णय के तहत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक प्रावधान लागू किया था जिसके अनुसार दो से ज्यादा जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा में सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था। 2001 में लागू मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक जीवित बच्चे थे, उन्हें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम, 1961 के तहत सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाता था। इसके अलावा, मध्य प्रदेश सेवा नियम (Conduct), 1965 के तहत दो से ज्यादा बच्चों का होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार (मिसकंडक्ट) माना जाता था। मुख्यमंत्री श्री यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को तुरंत प्रस्तावित नियमों का मसौदा वापस लेने और सरकारी सेवा से अयोग्यता से जुड़े उन सभी प्रावधानों को हटाने का निर्देश दिया है। यह प्रावधान दो से ज्यादा जीवित बच्चों के आधार पर लागू होते थे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए एक संशोधित मसौदा तैयार कर उसे प्रकाशित किया जाए। UCC लागू करने की तैयारी में मोहन सरकार क संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। यादव ने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए धर्मगुरुओं की राय लेगी। मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “मध्य प्रदेश में यूसीसी को लागू किया जाएगा, क्योंकि आज धार्मिक-सामाजिक-पारिवारिक रूप से भिन्न-भिन्न मतों की आवश्यकता नहीं है। आज जरूरत यूसीसी की ओर बढ़ने की है।”  

विदेशी प्रतिनिधियों ने देखा इंदौर का ऐतिहासिक वैभव, BRICS सम्मेलन के दौरान होलकर इतिहास से हुए रूबरू

इंदौर  इंदौर में चल रहे ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भाग लेने आए अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों के लिए बुधवार की सुबह कुछ खास थी। उनके लिए एक बार फिर शहर के ऐतिहासिक स्थलों का इतिहास जीवंत किया गया। राजवाड़ा पैलेस में पुराने समय में लगने वाले दरबार की तरह हरकारों की गूंज सुनाई दी और शास्त्रीय संगीत की स्वर-लहरियां गूंजीं।  ब्रिक्स सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उनके लिए सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। पहले यह वॉक बोलिया सरकार छत्री से होना थी, लेकिन उसके बजाय मेहमान साढ़े छह बजे सीधे राजवाड़ा पहुंचे। यहां उनके लिए गोल मेज लगाई गई थी। गोपाल मंदिर की सुंदरता देख मेहमान हुए मुग्ध इतिहासकार जफर अंसारी ने इंदौर की महारानी देवी अहिल्या के शासनकाल के अलावा होलकरकाल से जुड़े इतिहास के तथ्य बताए। राजवाड़ा में जब दरबार लगता था, तब दूसरे राज्यों के राजाओं को किस तरह हरकारा देकर सम्मानित किया जाता था, इसकी प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद राजवाड़ा पर संगीत और नृत्य की प्रस्तुति भी कलाकारों ने दी। इसके बाद मेहमान गोपाल मंदिर पहुंचे और पहली मंजिल पर लकड़ी के नक्काशीदार भवनों को निहारा। लिया इंदौरी व्यंजनों का स्वाद हेरिटेज वॉक में शामिल मेहमानों के लिए इंदौरी नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। स्टॉल पर रखे गए पोहे, जलेबी के साथ मेहमानों ने चाय-कॉफी का लुत्फ भी लिया। करीब डेढ़ घंटे तक हेरिटेज वॉक में शामिल होने के बाद मेहमान होटल के लिए रवाना हो गए। चखे आम, लोक नृत्यों पर थिरके मेहमान हेरिटेज वाॅक के बाद विदेशी मेहमान ग्रामीण हाट पहुंचे। यहां उन्होंने जैविक खेती के उत्पादों को देखा और स्टाॅल पर आमों का स्वाद भी चखा। इंडोनेशिया से आई रीना सुप्रिहाती ने आदिवासी गीत पर नृत्य भी किया।

चौंकाने वाली रिपोर्ट: यमुनानगर के 592 तालाब बने कचरा घर, 69 जलाशय सूखने की कगार पार

यमुना नगर. जिले में तालाबों और जोहड़ों की बिगड़ती हालत का असर अब भूजल पर साफ दिखाई देने लगा है। जिले के 805 तालाबों में से 592 प्रदूषित हैं, करीब 500 अतिक्रमण की चपेट में हैं। 69 पूरी तरह सूख चुके हैं और 20 से ज्यादा तालाब गायब हो गए। कब्जा कर निर्माण कर लिया गया। इसके कारण वर्षा जल का प्राकृतिक संचयन प्रभावित हो रहा है और सातों ब्लाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लाक को अटल भूजल योजना में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जिले के कई क्षेत्रों में हर वर्ष भूजल स्तर एक से डेढ़ फीट तक गिर रहा है। तालाब और जोहड़ ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की सबसे पुरानी और प्रभावी व्यवस्था माने जाते रहे हैं। बरसात का पानी इनमें एकत्र होकर धीरे-धीरे जमीन में समाता था, जिससे भूजल रिचार्ज होता था। लेकिन अब बड़ी संख्या में तालाब अतिक्रमण, गंदगी, सीवरेज और गाद की समस्या से जूझ रहे हैं। कई तालाबों की जलधारण क्षमता भी काफी घट चुकी है। जिले में करीब 500 तालाब अतिक्रमण की चपेट में जिले में करीब 500 तालाब अतिक्रमण की चपेट में बताए गए हैं। इनमें से 256 तालाब गंभीर रूप से अतिक्रमित श्रेणी में हैं। वहीं 592 तालाब प्रदूषित पाए गए हैं। कई स्थानों पर सीवरेज का पानी तालाबों में पहुंच रहा है, जबकि 69 तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे वर्षा का बड़ा हिस्सा बिना रुके नालों और ड्रेनों के जरिए बाहर निकल जाता है। जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे गोविंद भाटिया का कहना है कि तालाब केवल जलाशय नहीं, बल्कि भूजल रिचार्ज का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब तालाबों में पानी रुकना कम हो जाता है तो उसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले जोहड़ सालभर पानी का स्रोत बने रहते थे, लेकिन अब उनकी स्थिति तेजी से बदल रही है। जगाधरी, रादौर, सरस्वतीनगर, व्यासपुर, छछरौली, साढौरा और प्रतापनगर ब्लाकों के ग्रामीण भी जल संकट को महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण मोहन वर्मा, प्रवीण कुमार व कुशल पाल सिंह का कहना है कि पहले वर्षा का पानी तालाबों और जोहड़ों में जमा होता था, जिससे आसपास के क्षेत्रों में नमी बनी रहती थी। अब पानी तेजी से बह जाता है और गर्मी के दिनों में जल संकट बढ़ जाता है। इसका असर पशुपालकों पर भी पड़ रहा है। जिन तालाबों से कभी पशुओं को पानी मिलता था, वहां अब या तो पानी नहीं है या उसकी गुणवत्ता खराब हो चुकी है। तालाबों के पुनरुद्धार के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत जिले में 42.16 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद 20 परियोजनाएं लंबित हैं। नगर निगम क्षेत्र में 45 तालाबों पर कार्य प्रस्तावित था, लेकिन अब तक दो परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। चार ब्लाकों पर विशेष फोकस भूजल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए अटल भूजल योजना के तहत रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लाक चिन्हित किए गए हैं। इन चारों ब्लाकों की 251 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यहां भूजल का दोहन अधिक और संरक्षण अपेक्षाकृत कम है। जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर गंभीरता से हो काम भूजल विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में पानी लगातार गहराई में जा रहा है। जगाधरी, रादौर, सरस्वतीनगर और बिलासपुर खंडों में वर्ष 2014 से 2018 के बीच भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भी पानी और नीचे खिसका है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 के बाद इन क्षेत्रों में भूजल स्तर एक से सवा मीटर तक और नीचे चला गया है। वर्तमान में व्यासपुर खंड की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां भूजल 25 मीटर की गहराई पर पहुंच चुका है। रादौर में पानी 18 मीटर, सरस्वतीनगर और प्रतापनगर में 15-15 मीटर, जगाधरी में करीब 14.5 मीटर, साढौरा में 11 मीटर और छछरौली में नौ मीटर गहराई पर उपलब्ध है। वैज्ञानिक डाक्टर राजेश गडिया का कहना है कि जिले में हर साल औसतन एक से डेढ़ फीट तक भूजल स्तर नीचे जा रहा है। यदि जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

पंजाब में 2027 चुनाव की तैयारी तेज, कांग्रेस युवा मतदाताओं पर फोकस कर चलाएगी रीरूट कैंपेन

चंडीगढ़. पंजाब में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अभी से चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी इस बार पूरी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में कांग्रेस बुधवार से प्रदेश में एक विशेष जनसंपर्क और संवाद अभियान ‘पंजाब रीरूट अभियान’ शुरू करने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ना, विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करना और पंजाब के भविष्य को लेकर पार्टी की सोच को लोगों तक पहुंचाना है। चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-37 के ला भवन में इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। कार्यक्रम को लेकर पार्टी की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव 2027 में युवाओं की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है और इसी वर्ग तक प्रभावी पहुंच बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। गुटबाजी समाप्त करने की कोशिश पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के भीतर मौजूद गुटबाजी को समाप्त कर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना है। पिछले कुछ वर्षों में आंतरिक मतभेदों ने पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में यह अभियान केवल जनसंपर्क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता को भी मजबूत करने का माध्यम बनेगा। ‘पंजाब रीरूट अभियान’ के तहत युवाओं के अलावा किसानों, कर्मचारियों, व्यापारियों, महिलाओं और अन्य सामाजिक वर्गों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की राय, सुझाव और समस्याओं को जानने की कोशिश की जाएगी। प्रदेश से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर पार्टी का दृष्टिकोण भी साझा किया जाएगा। पहली बार मतदान करने वालों पर फोकस राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं की संख्या काफी महत्वपूर्ण होगी। यही कारण है कि कांग्रेस ने इस वर्ग तक पहुंच बनाने की रणनीति पर विशेष जोर दिया है। पार्टी का लक्ष्य ऐसे मतदाताओं के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करना है जो पिछले चुनाव के बाद मतदाता सूची में शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि यह अभियान आने वाले समय में संगठन को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ चुनावी तैयारियों को भी मजबूती प्रदान करेगा। कांग्रेस का प्रयास है कि प्रदेशभर में लगातार जनसंपर्क गतिविधियां चलाकर लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जाए और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

School Merger के बाद नई पदस्थापना पर नहीं पहुंचे शिक्षक, विभाग ने सेवा से किया पृथक

भिलाई. युक्तियुक्तकरण से प्रभावित 4 सहायक शिक्षक एलबी को नए पदांकित शालाओं में ज्वाइनिंग नहीं करने पर जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने कड़ी कार्रवाई की है। उन्हें तत्काल प्रभाव से पदच्युत कर दिया गया है। इसके पहले उन्हें निलंबित किया गया था। दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय छ.ग. द्वारा युक्तियुक्तकरण के पश्चात नए पदांकित शालाओं में ज्वाइनिंग नहीं करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। इस निर्देश के परिपालन में चार सहायक शिक्षकों पर गाज गिरी है। इन सहायक शिक्षकों में नारायण दास जोशी, जानेश्वर कुमार ठाकुर, प्रदीप देशमुख तथा लक्ष्मी नारायण चंद्राकर शामिल है। बताया जा रहा है कि इन्हें नई पदांकित शाला में ज्वाइनिंग के लिए 5 बार अवसर प्रदान किया गया था। बावजूद इन्होंने ज्वाइनिंग नहीं दी। लिहाजा इन पर कार्रवाई की गई। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से जिले के बड़ी संख्या शिक्षक प्रभावित हुए। अधिकाश शिक्षक कोर्ट का शरण लिए। इसके चलते जिला, संभाग तथा राज्य स्तर पर ऐसे प्रकरणों की सुनवाई हुई। इस सुनवाई में कई शिक्षकों के प्रकरण को मान्य किया गया। इसी आस में चार सहायक शिक्षक भी अपने स्तर पर प्रयासरत रहे कि उनका भी प्रकरण मान्य हो । मगर दांव उल्टा पड़ गया। उनसे नौकरी छीनने की नौबत आ गई। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर (छ.ग.) के पत्र क्रमांक/ युक्ति./ 2026/ 139 नवा रायपुर, दिनांक 28.05.2026 के द्वारा प्राप्त निर्देश के परिपालन में छ.ग. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-10 के उपनियम (नौ) के तहत इन सभी 4 सहायक शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से पदच्युत (डिसमिसल) किए जाने का आदेश जारी किया है।