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टीईटी परीक्षा अब अनिवार्य, पास न करने पर दो साल में खत्म होगी नौकरी

बांदा परिषदीय विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें दो वर्ष के अंदर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य कर दिया है।  शिक्षक जिन्होंने आरटीई अधिनियम लागू होने के पहले से नौकरी कर रहे हैं और सेवानिवृत्त होने से पांच वर्ष से अधिक का समय बचा है। उन्हें यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने पर उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। जिले के 4765 शिक्षक 1725 परिषदीय विद्यालयों में 1,62,399 बच्चों के अध्ययन-अध्यापन में कार्यरत हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले के बाद उन शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।  ऐसे शिक्षक जिन्होंने आरटीई अधिनियम एक अप्रैल 2010 के लागू होने से पूर्व नियुक्ति मिली थी, उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा पास होगी।  दरअसल आरटीई (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम लागू होने में शिक्षकों की योग्यता को लेकर भी संशोधन हुआ था। जिसमें शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया था।  इसमें वर्ष 2010 के बाद जितनी भी नियुक्तियां हुईं, सभी अर्हता के तहत टीईटी परीक्षा पास की थी। लेकिन जाे शिक्षक 2010 के पहले नियुक्ति पाकर स्कूलों में तैनात हैं, उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टीईटी परीक्षा पास करना होगा।  इनके लिए दो वर्ष का समय भी दिया गया है। यदि दो वर्ष में टीईटी की परीक्षा नहीं पास कर पाते हैं तो ऐसे शिक्षकों की नौकरी जा सकती है। यानी सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए काेई भी शिक्षक बच्चों के भविष्य को नहीं सवारेंगा। पहले उसे उस योग्य बनना होगा। अभी नहीं तैयार किया डाटा बेसिक शिक्षा विभाग के पास टीईटी योग्यता व बिना टीईटी योग्यता धारी शिक्षकों का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। नियुक्ति में भी जिनकी वर्ष 2010 से पहले हुई थी और जिनके सेवानिवृत्त के पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, ऐसा भी डाटा नहीं है।  सामान्यत: पूरे जिले भर के शिक्षकों का डाटा तो है। पूरे जिले में 4765 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें अनुमान है कि करीब एक हजार से 1500 के बीच ऐसे शिक्षकों की संख्या होगी। इन शिक्षकों को नौकरी बचाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा दो वर्ष के अंदर पास करनी होगी। स्थिति स्पष्ट के लिए करना होगा इंतजार यदि शिक्षक नियुक्तियों की बात की जाए तो वर्ष 2006 से लेकर 2008 तक ज्यादा हुईं। इसमें कुछ ऐसी भी भर्ती तो आरटीई अधिनियम आने के पहले हुई, लेकिन नियुक्ति आइटीई लागू होने के बाद मिली।  हालांकि, यह बात तो स्पष्ट है कि जिन शिक्षकों के पास शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें यह परीक्षा पास कर प्रमाण पत्र हासिल करना होगा। देश की सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद शिक्षक संघ भी पशोपेश की स्थिति में है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर शिक्षकों के फोन शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के पास आते रहे, जिसको लेकर वह भी कुछ बोलने से बचते रहे। पदाधिकारियों ने फैसले के विधिवत अध्ययन के बाद शिक्षक हित में हर संवभ प्रयास करने का भरोसा देते रहे।  

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: नागरिक आपूर्ति निगम में लागू होगा नया वेतनमान

भोपाल राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारियों को भी चतुर्थ समयमान वेतनमान मिलेगा। गृह भाड़ा भत्ता सरकार द्वारा घोषित दरों के अनुसार दिया जाएगा। सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर स्वजन को अनुग्रह राशि अब अधिकतम सवा लाख रुपये तक दी जाएगी। निगम में सेवा पदोन्नति नियम-2025 का भी प्रविधान किया जाएगा। यह निर्णय मंगलवार को मंत्रालय में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुई निगम के संचालक मंडल की बैठक में लिया गया। विभागीय मंत्री ने बताया कि भंडार गृहों की निगरानी के लिए एप बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे भंडारित अनाज की मात्रा, गुणवत्ता, आदि का सत्यापन किया जा सकेगा। अधिकारी भंडार गृह का निरीक्षण करने का फोटो ऐप में अपलोड करेंगे। जियो टैगिंग भी रहेगी। बैठक में धान का उपार्जन शुरू होने के पहले सभी भंडार गृहों का रखरखाव सुनिश्चित करने, रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को समय-सीमा में पूरा करने और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का परीक्षण गंभीरता से करने के निर्देश दिए गए। उपार्जन में सक्रिय योगदान करने वालों को प्रोत्साहन राशि उपार्जन कार्य में सक्रिय योगदान के आधार पर निगम के अधिकारी और कर्मचारियों को एक माह का मूल वेतन प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाएगा। जो महाप्रबंधक थर्ड पार्टी इन्सपेक्शन की कार्रवाई समय पर नहीं कर रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। खाद्य भवन के निर्माण समय-सीमा में पूरा कराया जाए।

ऐसे थे योगी के गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ

ऐसे थे योगी के गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ लखनऊ। अस्पृश्यता के उस दौर में अगर किसी प्रमुख संप्रदाय का संत, अपने संप्रदाय का समाज का अगुआ और उत्तर भारत की प्रमुख पीठ का पीठाधीश्वर अपने ही समाज के तमाम लोगों के विरोध के बावजूद किसी चांडाल (डोम) के घर भोजन करता है तो उससे पवित्र कोई हो ही नहीं सकता। बात हो रही है गोरखपुर स्थित नाथपंथ का हेडक्वार्टर मानी जाने वाली गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की। फरवरी 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम जिले के तिरुनेलवेली में सामूहिक धर्मांतरण की एक घटना हुई थी। अवेद्यनाथ इस घटना से बेहद आहत थे। दक्षिण भारत की तरह इसका विस्तार उत्तर भारत में न हो, इसके लिए उन्होंने काशी के डोमराजा के घर संत समाज के साथ भोजन किया था। मकसद था बहुसंख्यक समाज के दलित तबके को सामाजिक समरसता का संदेश देना। फिर तो यही उनके जीवन का मिशन बन गया। बिना किसी भेदभाव के सामूहिक भोज का जो सिलसिला उन्होंने शुरू किया वह अब भी उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की अगुआई में जारी है।  ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ मूलतः संत थे। वे सबके थे और सबको स्वीकार्य भी थे।  मीनाक्षीपुरम की घटना ही उनके सक्रिय राजनीति में आने की वजह बनी। सितंबर में उनकी पुण्यतिथि पड़ती है इसीलिए हर सितंबर गोरक्षपीठ के लिए खास होता है। सितंबर में ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के गुरु और योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पड़ने वाली पुण्य तिथि इसे और खास बना देती है। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में साप्ताहिक पुण्यतिथि समारोह का आयोजन होता है। इस साल ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं और राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि है। इसके उपलक्ष्य में आयोजनों का सिलसिला 4 से 11 सितंबर तक चलेगा। श्रद्धांजलि समारोह के उद्घाटन और समापन के अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। यह आयोजन खुद में भारतीय परंपरा के गुरु और शिष्य के बेमिसाल रिश्ते की मिसाल भी है। उनका ब्रह्मलीन होना एक संत की इच्छा मृत्यु थी ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का ब्रह्मलीन होना एक सामान्य घटना नहीं थी। पूरे संदर्भ को देखें तो यह एक संत की इच्छा मृत्यु जैसी थी। अपने गुरुदेव के ब्रह्मलीन होने के बाद एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने इसकी चर्चा भी की थी। योगी के मुताबिक, मेरे गुरुदेव की इच्छा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर मंदिर में ही ब्रह्मलीन होने की थी। और हुआ भी यही। उल्लेखनीय है कि गोरखनाथ मंदिर में करीब छह दशक से हर साल सितंबर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि सप्ताह समारोह का आयोजन होता रहा है। 2014 में इसी कार्यक्रम के समापन समारोह के बाद उसी दिन फ्लाइट से योगी आदित्यनाथ शाम को दिल्ली और फिर गुड़गांव स्थित मेदांता में इलाज के लिए भर्ती अपने गुरुदेव अवेद्यनाथ का हाल चाल लेने गए। वहां उनके कान में पुण्यतिथि के कार्यक्रम के समापन के बाबत जानकारी दी। वह कुछ देर वहां रहे। चिकित्सकों से बात किए। सेहत रोज जैसी ही स्थिर थी। लिहाजा योगी अपने दिल्ली स्थित सांसद के रूप में मिले सरकारी आवास पर लौट आए। रात करीब 10 बजे उनके पास मेदांता से फोन आया कि उनके गुरुदेव की सेहत बिगड़ गई है। पहुंचे तो देखा, वेंटीलेटर में जीवन का कोई लक्षण नहीं हैं। चिकित्सकों के कहने के बावजूद वे मानने को तैयार नहीं थे। वहीं महामृत्युंजय का जाप शुरू किया। करीब आधे घंटे बाद वेंटीलेटर पर जीवन के लक्षण लौट आए। योगी को अहसास हो गया कि गुरुदेव की विदाई का समय आ गया है। उन्होंने धीरे से उनके कान में कहा, कल आपको गोरखपुर ले चलूंगा। यह सुनकर उनकी आंखों के कोर पर आंसू ढलक आए। योगीजी ने उसे साफ किया और लाने की तैयारी में लग गए। दूसरे दिन एयर एंबुलेंस से गोरखपुर लाने के बाद  उनके कान में कहा, आप मंदिर में आ चुके हैं। बड़े महाराज के चेहरे पर तसल्ली का भाव आया। इसके करीब घंटे भर के भीतर उनका शरीर शांत हो गया। बड़े महाराज का अंतिम 10 वर्ष का जीवन चमत्कार था  विज्ञान के इस युग में संभव है आप यकीन न करें। पर बात मुकम्मल सच है। 10 साल पहले (12 सितंबर 2014 ) गोरक्षपीठ के महंत अवेद्यनाथ का ब्रह्मलीन होना सामान्य नहीं, बल्कि इच्छा मृत्यु जैसी घटना थी। चिकित्सकों के मुताबिक उनकी मौत तो 2001 में तभी हो जानी चाहिए थी, जब वे पैंक्रियाज के कैंसर से पीड़ित थे। उम्र और ऑपरेशन के बाद ऐसे मामलों में लोगों के बचने की संभावना सिर्फ 5 फीसद होती है। इसी का हवाला देकर उस समय दिल्ली के एक नामी डाक्टर ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया था। बाद में ऑपरेशन के लिए तैयार हुए तो यह भी कहा कि ऑपरेशन सफल रहा तो भी बची जिंदगी मुश्किल से 3 वर्ष की होगी। पर बड़े महाराजजी उसके बाद 14 वर्ष तक जीवित रहे। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर अक्सर पीठ के उत्तराधिकारी (अब पीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ से फोन पर बड़े महाराज का हाल-चाल पूछते थे। यह बताने पर कि उनका स्वास्थ्य बेहतर है, हैरत भी जताते थे। बकौल योगी, यह गुरुदेव के योग का ही चमत्कार था। राम मंदिर आंदोलन के प्राण थे ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महंत अवेद्यनाथ सितंबर 12, 2014 में ब्रह्मलीन हुए। तब अपने शोक संदेश में राम मंदिर आंदोलन के शिखरतम लोगों में शुमार विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक स्वर्गीय अशोक सिंघल ने कहा था, "वह श्री रामजन्म भूमि के प्राण थे। सबको साथ लेकर चलने की उनमें विलक्षण प्रतिभा थी। उसीके परिणाम स्वरूप श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के साथ सभी संप्रदायों, दार्शनिक परम्पराओं के संत जुड़ते चले गए।" इससे साबित होता है कि उनका कद और संत समाज में उनकी स्वीकार्यता क्या थी। वाकई वह राम मंदिर आंदोलन के प्राण थे। राम मंदिर उनके प्राणों में बसता था। अयोध्या में रामलला की जन्म भूमि पर भव्य राम मंदिर बने यह उनका सपना था। ऐसा सपना जो उनके दिलो दिमाग पर ताउम्र अमिट रूप से चस्पा हो गया था। वह चाह रहे थे कि उनके जीते जी वहां भव्य राम मंदिर बन जाए। पर दैव की मर्जी के आगे किसकी चलती? गीता … Read more

सीएम भजनलाल शर्मा का ऐलान: 18 सितंबर से गांव चलो अभियान, राजस्व प्रकरण होंगे निस्तारित

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार गुड गवर्नेन्स के मानकों पर खरा उतरते हुए आमजन के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारी उनकी नियमित मॉनिटरिंग करें। साथ ही, संबंधित विभागों से समन्वय कर भूमि आवंटन, डीपीआर, टेंडर प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए, जिससे विकास कार्यों का लाभ लोगों को समय पर मिल सके। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री कार्यालय में राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग, तकनीक एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से काश्तकारों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में नवाचार कर रहा है। इसी क्रम में किसानों को स्वयं फसल गिरदावरी की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए एग्रीस्टेक मोबाईल ऐप विकसित किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए इस ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। गांव चलो अभियान से ग्रामीणों तक सुलभ होंगी सरकारी सेवाएं शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 18 सितम्बर से प्रदेशभर में सप्ताह में तीन दिन ‘गांव चलो अभियान’ संचालित किया जाएगा, जिसमें ग्रामीणों तक सरकारी सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अभियान के तहत ग्रामीणों के सीमाज्ञान, सहमति विभाजन, नामांतरण आदि लंबित प्रकरणों को निस्तारित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यक्ति अभियान के लाभों से वंचित ना रहे। पुराने भवनों की मरम्मत करें, गुणवत्ता का रखें ध्यान मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी गत दो वर्ष के बजट में घोषित भवन निर्माण के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए तय समय में पूरा करें। साथ ही नियमित निगरानी कर इनकी गुणवत्ता पर भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने भवनों का भी आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण एवं मरम्मत की जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके। शर्मा ने कहा कि जैसलमेर जिले के सामान्य आवंटन के लंबित आवेदनपत्रों के निस्तारण के लिए योजना बनाई जाए, साथ ही 15 दिन का अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों को निस्तारित किया जाए। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए वर्तमान नियमों में यथासंभव संशोधन कर नियमों के सरलीकरण के निर्देश भी दिए। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि फार्मर रजिस्ट्री योजना के माध्यम से किसानों के आधार नम्बर को राजस्व रिकॉर्ड के साथ मेपिंग का कार्य समस्त जिलों में प्रारम्भ कर दिया गया है। अब तक 87 प्रतिशत किसानों की फार्मर आईडी जनरेट की जा चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य के 48 हजार 463 गांवों की जिओ रेफरेंस शीट फाइल भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड कर 4.49 करोड़ यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नम्बर (ULPIN) जारी किए जा चुके हैं। बैठक में राजस्व न्यायालयों के लिए रेवेन्यू कोर्ट मॉर्डनाइजेशन सिस्टम, राजस्व इकाइयों का पुर्नगठन, पूर्णकालिक सरकारी अधिवक्ताओं को रिटेनर शुल्क, उपनिवेशन क्षेत्र में भूमि आवंटन की दर में परिवर्तन, ग्राम दान एवं भूदान अधिनियम सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राजस्व मंत्री हेमन्त मीणा एवं मुख्य सचिव सुधांश पंत सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

सरकार ने खर्च किए करोड़ों, मंत्रियों की कोठियों की मरम्मत के लिए मिली हरी झंडी

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने मंत्रियों की सरकारी कोठियों के रखरखाव के लिए एक बार फिर से 5 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। यह मौजूदा कार्यकाल में दूसरी बार है जब इस तरह की राशि को मंजूरी दी गई है। इससे पहले नवंबर 2024 में विधानसभा सत्र के दौरान 15 करोड़ रुपये मरम्मत कार्यों के लिए स्वीकृत किए गए थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यभार संभालने के बाद अधिकांश मंत्रियों को कोठियां अलॉट कर दी गई थीं। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कोठी लेने से इंकार किया था, जबकि मंत्री विपुल गोयल को हाल ही में सेक्टर-16 में आवास मिला है, जहां फिलहाल मरम्मत जारी है। नवंबर 2024 में स्वीकृत बजट से अधिकांश कोठियों की मरम्मत का काम कई महीनों तक चलता रहा। अब कुछ मंत्रियों द्वारा अतिरिक्त राशि की मांग के बाद विधानसभा ने फिर से 5 करोड़ की स्वीकृति दी है। मनोहर लाल के कार्यकाल में खर्च हुए थे 21 करोड़ रूपये गौरतलब है कि विपक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध नहीं किया। यह परंपरा पहले भी रही है कि हर साल मरम्मत के लिए बजट पारित होता है। आंकड़ों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दूसरे कार्यकाल (2019-2024) में कुल 21 करोड़ रुपये कोठियों के रखरखाव पर खर्च किए गए थे। उस दौरान कई मंत्रियों के आवासों की मरम्मत 3 से 4 बार हुई थी, जिनमें करोड़ों रुपये खर्च हुए थे।

मेट्रो विस्तार का बड़ा प्लान: दिल्ली-NCR में 18 नए कॉरिडोर, जुड़ेंगे 5 शहर

नई दिल्ली  दिल्ली और एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। जल्द ही मेट्रो नेटवर्क का दायरा और भी व्यापक होने जा रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शहर और उससे जुड़े इलाकों में 18 नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह परियोजना सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। दो चरणों में होगा मेट्रो विस्तार इस महापरियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है: फेज-5A के तहत 3 कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है। फेज-5B में बाकी 15 कॉरिडोर को शामिल किया गया है, जिसकी प्रक्रिया प्रगति पर है। इस पूरे विस्तार को केंद्र सरकार के नेशनल मोबिलिटी प्लान के तहत आर्थिक सहायता से क्रियान्वित किया जा रहा है। दिल्ली-NCR के 5 बड़े शहर होंगे जुड़ाव का हिस्सा नई योजना के तहत गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और बहादुरगढ़ जैसे एनसीआर के प्रमुख शहरों को भी सीधे दिल्ली मेट्रो से जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद में सबसे ज्यादा-5 नए मेट्रो रूट्स की योजना बनाई गई है, जो निम्नलिखित हैं: -वैशाली से मोहन नगर -नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से साहिबाबाद -मयूर विहार फेज-3 से लोनी बॉर्डर -नया बस अड्डा से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन -गोकुलपुरी से अर्थला -इसके अलावा कुछ अन्य प्रस्तावित रूट्स: -द्वारका सेक्टर-21 से उद्योग विहार, गुरुग्राम -तुगलकाबाद से नोएडा सेक्टर-142 -राजा नाहर सिंह से पलवल -बहादुरगढ़ से असुधा कुल नेटवर्क में 400+ किमी का इजाफा DMRC के मुताबिक, इन 18 प्रस्तावित रूट्स को मिलाकर करीब 404 किलोमीटर का नया नेटवर्क तैयार किया जाएगा। योजना के अनुसार, मेट्रो स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वो घर से सिर्फ 500 मीटर दूरी पर हों, जिससे आम जनता की सुविधा में जबरदस्त सुधार आएगा।    कहां तक पहुंचा फेज-4? वर्तमान में फेज-4 के तहत 6 कॉरिडोर में से 3 पर काम तेजी से चल रहा है: तुगलकाबाद से एयरोसिटी इंद्रप्रस्थ से आरके आश्रम मौजपुर से मजलिस पार्क तीनों मिलाकर कुल 65.15 किलोमीटर लंबे होंगे। साथ ही, इन रूट्स पर आधुनिक तकनीक से अंडरग्राउंड और एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जैसे: इंद्रप्रस्थ से आरके आश्रम: 9.5 किमी लंबा, 8 भूमिगत स्टेशन एयरोसिटी से टर्मिनल: 2.3 किमी, 1 स्टेशन तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज: 4 किमी, 3 एलिवेटेड स्टेशन क्या मिलेगा फायदा? दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम में भारी कमी यात्रियों को घर से मेट्रो तक आसान एक्सेस रोजगार के हजारों नए अवसर रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर  

पर्यटकों के लिए खुशखबरी! कान्हा टाइगर रिजर्व में सफारी के झंझट होंगे आसान

मंडला   दुनियाभर में बाघों के आशियाने के लिए मशहूर और मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व कान्हा नेशनल पार्क में अब पर्यटकों की एंट्री के लिए एक और गेट तैयार. बारिश के बाद 01 अक्टूबर से फिर से नेशनल पार्क शुरू होगा तो पर्यटकों को ये सुविधा मिलेगी. अभी एकमात्र गेट से ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता था. दूसरा गेट ज्यादा सुविधाजनक है. नेशनल पार्क के इस फैसले से स्थानीय लोगों के साथ ही, जिप्सी सफारी संचालकों, गाइड और होम स्टे संचालकों में खुशी की लहर है. अब पर्यटक कान्हा की सुंदर वादियों समेत वन्य जीवों खासकर टाइगर्स का दीदार इस गेट से भी कर सकेंगे. इससे यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. अब खटिया गेट के साथ ही सरही गेट भी खुला रहेगा गौरतलब है कान्हा नेशनल पार्क में अभी तक तक खटिया गेट से ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता था. लेकिन अब सरही गेट से भी पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सकता है. प्रबंधन के इस फैसले से खुश होकर होम स्टे संचालकों के साथ सफारी करवाने वाले व गाइड ने एक साथ मिलकर नेशनल पार्क के फील्ड मैनेजर को धन्यावाद पत्र सौंपा. इन संचालकों का कहना है कि वर्ष 2008 से सरही गेट की शुरुआत हुई थी लेकिन टिकट और अन्य ऑनलाइन बुकिंग खटिया गेट से की जाती थी, जिससे हमारा रोजगार प्रभावित हो रहा था. दूसरे गेट से एंट्री की परमिशन मिलते ही खुशी की लहर गाइड के साथ ही जिप्सी संचालकों, होम स्टे संचालकों का कहना है कि वे लोग तभी से आर्थिक रूप से परेशान थे. सरही होमस्टे के संचालक दीपक यादव ने बताया "अब कान्हा नेशनल पार्क के ऑनलाइन पोर्टल में सरही गेट को भी शामिल किया गया. इससे लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही जंगल की सुरक्षा भी होगी." कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया "कुछ समय से मांग हो रही थी सरही गेट के वाहन भी दूसरे गेट जैसे खटिया गेट से ही जाते थे. सरही गेट के गाइड औऱ जनप्रतिनिधियों की मांग थी कि जो वाहन इस गेट के हैं, उनका प्रवेश इसी गेट से किया जाए. इसे अनुमति दे दी गई है."  दुनिया में क्यों मशहूर है कान्हा टाइगर रिजर्व गौरतलब है कि बाघों के दीदार और इनकी आबादी के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में पहला स्थान रखता है. कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है. कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, गौर, सांभर, बार्किंग डीयर सहित कई अन्य शाकाहारी जानवरों की संख्या सबसे ज्यादा है. इस बात को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दर्शाया गया था. रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि कान्हा टाइगर रिजर्व की जैवविविधता सबसे बेहतर है. इसके साथ ही कान्हा टाइगर पूरी दुनिया में बाघों के लिए विख्यात है. यहां देश के साथ ही विदेश से भी लोग बाघों का दीदार करने आते हैं. यहां जंगल सफारी का अलग ही क्रेज है. 2074 वर्ग किमी में फैला है कान्हा टाइगर रिजर्व कान्हा नेशनल टाइगर रिजर्व का कोर और बफर एरिया का विस्तार 2074.31 वर्ग किलोमीटर तक है. यहां बाघों के अलावा बाराहसिंघा, सांभर, चीतल, गौर, बार्किंग डीयर, लंगूर, जंगली सूअर समेत कई वन्य प्राणियों की संख्या अधिक है. चूंकि यहां शाकाहारी जानवरों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए मांसाहारी जानवरों के लिए खासकर बाघों के लिए ये नेशनल पार्क सबसे उपयुक्त माना गया है. यहां के वन्य प्राणियों खासकर बाघों का दीदार करने के लिए फिल्मी सितारे और अन्य सेलिब्रिटी लगातार आते रहते हैं. मशहूर किक्रेटर महेंद्र सिंह धोनी और अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा जैसे कई नामचीन लोग यहां का दौरा कर चुके हैं. कान्हा टाइगर रिजर्व में कुल 3 गेट, अब 2 गेट से एंट्री कान्हा नेशनल पार्क में मुख्य रूप से तीन एंट्री गेट हैं. मैन गेट खटिया है. इसके साथ ही मुक्की और सरही गेट हैं. खटिया गेट जबलपुर से आने वालों के लिए सुविधाजनक है, जबकि मुक्की गेट रायपुर और नागपुर से आने वालों के लिए बेहतर है. अभी तक खटिया गेट से ही लोगों को एंट्री मिलती थी लेकिन अब सरही गेट से 01 अक्टूबर से पर्यटकर प्रवेश कर सकेंगे. सरही गेट शुरू होने से विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों को घूमकर खटिया गेट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैसे पहुंचें कान्हा नेशनल चाइगर पार्क गौरतलब है कि ये नेशनल पार्क अन्य टाइगर रिजर्व की तरह ही 1 अक्टूबर से 30 जून तक खुला रहता है. बारिश के मौसम में ये बंद रहता है. ये टाइगर रिजर्व मंडला और बालाघाट जिलों में स्थित है. कान्हा नेशनल पार्क जबलपुर, खजुराहो, नागपुर, मुक्की और रायपुर से सड़क के माध्यम से सीधा जुड़ा हुआ है. दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 2 से आगरा, राष्ट्रीय राजमार्ग 3 से ब्यावरा, राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से भोपाल के रास्ते जबलपुर पहुंचा जा सकता है. राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से मांडला जिला रोड से कान्हा पहुंचा जा सकता है. 

व्यावहारिक प्रशिक्षण से कार्यकुशलता में आएगा निखार, गांव में मिलेगा रोजगार- कलेक्टर

अम्बिकापुर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार निर्मित करने की दिशा में सरगुजा जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। अंबिकापुर के दरिमा ग्राम पंचायत में जिला प्रशासन एवं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के संयुक्त तत्वावधान में 30 दिवसीय राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में 16 महिलाओं को रानी मिस्त्री तथा 19 पुरुषों को राजमिस्त्री का हुनर सिखाया गया। कुल 35 प्रतिभागियों ने व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान अर्जित किया। आयोजित समापन समारोह में कलेक्टर श्री विलास भोसकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार, अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री विकास यादव, सेंट्रल बैंक के रिजनल हेड श्री रणधीर सिंह, आरसेटी डायरेक्टर श्री श्याम किशोर गुप्ता, जनपद पंचायत सीईओ श्री राजेश सेंगर, साक्षर भारत जिला परियोजना अधिकारी श्री गिरीश गुप्ता और प्रशिक्षण समन्वयक सुश्री तमना निशा मौजूद रहीं। समापन समारोह में कलेक्टर श्री भोसकर ने प्रशिक्षार्थियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके अनुभव और सीखी गई तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण से कार्यकुशलता बेहतर होती है। इससे न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि काम की गुणवत्ता और गति भी सुधरती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आपके पंचायत में सर्वाधिक आवास स्वीकृत हुए हैं। इन्हें समय पर पूरा करना अब आपकी जिम्मेदारी है। यह प्रशिक्षण आपको केवल श्रमिक नहीं, बल्कि कुशल मिस्त्री बनाता है। इस प्रशिक्षण से गांव में ही पर्याप्त काम और सम्मानजनक आमदनी का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षणार्थियों ने बताया कि पहले वे सामान्य मजदूरी करते थे, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने नाप-जोख, ईंट की चिनाई, प्लास्टरिंग, लेवलिंग, लेआउट और भवन निर्माण की नई तकनीकें सीखीं। अब वे आत्मविश्वास के साथ स्वयं को कुशल राजमिस्त्री कह सकते हैं। समापन कार्यक्रम के अवसर पर सभी प्रतिभागियों को राजमिस्त्री के टूल किट भी वितरित किए गए। इनमें भवन निर्माण कार्य हेतु आवश्यक औजार शामिल थे। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण अब अपने सीखे हुए कौशल का उपयोग स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों में करेंगे। इससे न केवल उन्हें रोजगार मिलेगा, बल्कि गांव की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। जिला प्रशासन की इस पहल ग्रामीण आत्मनिर्भर और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

12,000+ जानवर काटने के मामले सामने, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी वैक्सीन की चेतावनी

भोपाल  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह एडवाइजरी जारी की है। दूसरी ओर, भोपाल में साल 2025 के शुरुआती 6 माह में 13 हजार से अधिक लोगों को 9 तरह के जानवरों ने काटा है।यह उन लोगों की संख्या है जो एनिमल बाइट के बाद इलाज के लिए जेपी अस्पताल या हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे। इनके अलावा एक बड़ी संख्या उन मरीजों की भी है, जो रिपोर्टेड नहीं हुए यानी इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में गए। जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कहा- रेबीज 100% रोकी जा सकने वाली बीमारी है। कई लोग काटने को हल्के में लेते हैं और वैक्सीन नहीं लगवाते। यही लापरवाही मौत का कारण बन सकती है। अस्पताल में पर्याप्त संख्या में एंटी रेबीज वैक्सीन मौजूद है। सबसे ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले साल 2025 में जून माह तक जेपी और हमीदिया अस्पतालों में कुल 12,078 पुरुष और 9,286 महिलाएं एनिमल बाइट का शिकार बनीं। इनमें से सबसे ज्यादा मामले कुत्तों के काटने के सामने आए। अकेले कुत्तों के काटने के 10,848 पुरुष और 8,497 महिलाएं रिपोर्ट हुईं, यानी कुल मिलाकर 19 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि रेबीज संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा कुत्तों से ही है। बंदर, चमगादड़ और अन्य जानवर भी बने खतरा कुत्ते और बिल्लियों के बाद भी कई अन्य जानवर इंसानों को काटने के मामलों में सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बंदरों के काटने के 213 केस दर्ज हुए, जबकि चूहों के काटने के 249 मामले सामने आए। इसके अलावा चमगादड़ (10 केस), गिलहरी (16 केस) और खरगोश (5 केस) के मामले भी रिपोर्ट हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बाइट कम संख्या में भले हों, लेकिन संक्रमण का खतरा इनमें भी उतना ही गंभीर रहता है। रेबीज मौतों का 36% हिस्सा अकेले भारत से WHO के अनुसार, रेबीज एक टीके से रोकी जा सकने वाली वायरल बीमारी है, जो दुनिया के 150 से अधिक देशों और क्षेत्रों में पाई जाती है। भारत रेबीज से प्रभावित देशों में शामिल है। विश्व भर में होने वाली रेबीज मौतों का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से सामने आता है। भारत में रेबीज का वास्तविक बोझ पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 18,000 से 20,000 मौतें इस बीमारी के कारण होती हैं। रिपोर्टेड मामलों और मौतों में से 30 से 60% पीड़ित बच्चे (15 वर्ष से कम आयु) होते हैं। अक्सर बच्चों को काटे जाने की घटनाएं नजरअंदाज या रिपोर्ट नहीं की जातीं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। 2024 में डॉग बाइट के 37 लाख केस, 54 मौतें जुलाई माह में लोकसभा में एक लिखित उत्तर में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने जानकारी दी कि कुत्तों के काटने और संदिग्ध मानव रेबीज से हुई मौतों का आंकड़ा राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किया जाता है। यह आंकड़े राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) संकलित करता है। एनसीडीसी के आंकड़ों के मुताबिक- वर्ष 2024 में कुल 37,17,336 कुत्तों के काटने के मामले सामने आए, जबकि संदिग्ध मानव रेबीज से कुल 54 मौतें दर्ज की गईं। 3 माह तक वायरस रह सकता है निष्क्रिय रेबीज किसी व्यक्ति के शरीर में 1 से 3 महीने तक निष्क्रिय रह सकता है। इसका सबसे पहला संकेत है बुखार का आना है। फिर घबराहट होना, पानी निगलने में दिक्कत होना, लिक्विड के सेवन से डर लगना, तेज सिरदर्द, घबराहट होना, बुरे सपने और अत्यधिक लार आना शामिल हैं। एंटी रेबीज वैक्सीन वायल की खपत बढ़ी राजधानी में साल 2020 से 21 में 5 हजार 523 एंटी रेबीज वैक्सीन वायल की खपत हुई थी। जो साल 2021 से 22 में बढ़कर 7415 और साल 2022 से 23 में 10446 हो गई। इसके अलावा साल 2020 से 21 में केवल 5 वायल रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की खपत हुई थी। जो 2021 से 22 में बढ़कर 51 और साल 2023 से 24 में 65 वायल तक पहुंच गई है।

शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश

नई बजटिंग प्रणाली से होगा मध्यप्रदेश का सर्वांगीण विकास- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश निवेश एवं सर्वांगीण विकास पर होगा फोक्स- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिकीकरण और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार का फोकस केवल आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि रोज़गार सृजन, आधारभूत संरचना निर्माण और सामाजिक न्याय पर भी है। इसी दिशा में सरकार ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये बजट को अगले 5 वर्ष में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इससे हर क्षेत्र में निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही बढ़ते बजट   प्रावधान में विभागों के बजट पर अनुशासन लगाने की महत्वपूर्ण पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में अब राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास की ठोस रणनीति तैयार करते हुए शून्य आधारित बजटिंग (Zero Based Budgeting) और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह पहल “विकसित मध्यप्रदेश 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में ठोस आधार बनेगी और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श साबित होगी। देवड़ा ने कहा “शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट से न केवल प्रदेश की योजनाओं का ठोस मूल्यांकन होगा, बल्कि प्रत्येक खर्च का सीधा संबंध समाज की आवश्यकताओं और राज्य की प्राथमिकताओं से जोड़ा जा सकेगा। यह कदम मध्यप्रदेश को विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश 2047 की दिशा में सबसे मजबूत आधार प्रदान करेगा।” महत्वपूर्ण है यह पहल अब तक अधिकांश राज्यों में पारंपरिक बजटिंग पद्धति लागू होती रही है, जिसमें पिछले वर्षों का व्यय आधार बनते थे। इसके विपरीत 'जीरो बेस्ड बजटिंग' में हर योजना को शून्य से शुरू कर उसकी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी। इससे अप्रभावी योजनाएँ स्वतः समाप्त होंगी और संसाधनों का इष्टतम उपयोग संभव होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस प्रणाली को अपनाया है, जहाँ इससे गुड गवर्नेंस और फाइनेंशियल डिसिप्लिन को मजबूती मिली है। अब मध्यप्रदेश इस दिशा में भारत में अग्रणी राज्य बनकर अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल पेश कर रहा है। रोलिंग बजट से लगातार “फॉरवर्ड लुकिंग” दृष्टि रोलिंग बजट पद्धति से 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट बनेगा और हर वर्ष इसकी समीक्षा कर नए अनुमानों को जोड़ा जाएगा। इससे योजनाएँ हमेशा आगे की ओर देखने वाली होगी और अल्पकालिक दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल कॉर्पोरेट जगत में पहले से सफल साबित हो चुका है, और राज्य शासन में इसे लागू करना नीतिगत दूरदर्शिता का प्रतीक है। वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16% और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23% बजट सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही वेतन, पेंशन , भत्तों की गणना में पारदर्शिता हेतु नई गाइडलाइन लागू होंगी। इसके अतिरिक्त ऑफ-बजट व्यय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तीय प्रभाव को भी अब राज्य बजट में समाविष्ट किया जाएगा। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन के साथ जनहित में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व देश के अन्य राज्यों में अभी भी पारंपरिक बजटिंग पद्धति पर निर्भरता बनी हुई है। मध्यप्रदेश का यह निर्णय वित्तीय सुधारों की दिशा में गेम-चेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में केंद्र और अन्य राज्य भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।