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एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत मखाना अवयवों की योजना को स्वीकृति

किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उन्नत प्रभेद ‘स्वर्ण वैदेही’ और ‘सबौर मखाना-1’ का होगा बीज उत्पादन : विजय कुमार सिन्हा पटना, उप मुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत मखाना अवयवों की योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना का क्रियान्वयन वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2026-27 तक किया जाएगा। इसके लिए कुल 16 करोड़ 99 लाख 11 हजार 930 रुपये की स्वीकृत दी गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 11 करोड़ 53 लाख 49 हजार 430 रुपये की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति दी गई है जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 5 करोड़ 45 लाख 62 हजार 500 रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। माननीय उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के 16 जिलों यथा कटिहार, पूर्णियाँ, दरभंगा, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण एवं मुजफ्फरपुर में मखाना की खेती का क्षेत्र विस्तार करना है। इसके तहत किसानों को उन्नत प्रभेदों का बीज उपलब्ध कराया जाएगा, परंपरागत उपकरण किट दी जाएगी तथा बीज उत्पादन और वितरण को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। श्री सिन्हा ने कहा कि मखाना की खेती दिसंबर माह से शुरू होकर अगस्त के अंतिम सप्ताह में पूरी होती है। इसी कारण योजना का कार्यान्वयन दो वित्तीय वर्षों में किया जाएगा। योजना अंतर्गत डीबीटी पंजीकृत नए किसानों का चयन किया जाएगा, जो पहली बार खेत प्रणाली से मखाना की खेती करेंगे। मखाना खेती की इकाई लागत 0.97 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जिसमें बीज, इनपुट और हार्वेस्टिंग की लागत शामिल है। इसमें किसानों को 75 प्रतिशत यानी 72,750 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायतानुदान दो किस्तों में प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजना में मखाना के उन्नत प्रभेद स्वर्ण वैदेही एवं सबौर मखाना-1 का बीज उत्पादन कराया जाएगा। बीज वितरण की व्यवस्था गठित समिति की अनुशंसा पर एफ.पी.सी. एवं प्रगतिशील कृषकों से बीज प्राप्त कर चयनित किसानों तक पहुंचाने की होगी। प्रत्येक किसान को न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) तथा अधिकतम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) तक का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, किसानों को परंपरागत उपकरण जैसे औका/गाँज, कारा, खैंचि, चटाई, अफरा, थापी आदि उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए प्रति किट 22,100 रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है, जिसमें से 75 प्रतिशत यानी 16,575 रुपये प्रति किट का अनुदान दिया जाएगा। माननीय उप मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में महिला सहभागिता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही योजना से लाभान्वित किसानों में 30 प्रतिशत महिला कृषकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना बिहार के 16 जिलों में मखाना खेती को नई दिशा देने, उन्नत बीज उत्पादन एवं वितरण और उपकरण किट उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके क्रियान्वयन से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी और सभी वर्गों की संतुलित हिस्सेदारी सुनिश्चित होगी। यह पहल बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी और राज्य को मखाना उत्पादन में अग्रणी बनाएगी।

किसानों की भलाई और कृषि विकास पर ध्यान देंगे शिवराज, अध्यक्ष पद की दौड़ से अलग

भोपाल   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हैं। चौहान ने कहा कि उनका पूरा ध्यान किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को नई ऊँचाई पर ले जाने पर है। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान गोष्ठी के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा—“मेरा एक ही लक्ष्य है कि कृषि उत्पादन कैसे बढ़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे कृषि और ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी दी है। इस समय कृषि मेरे रोम-रोम में है और किसान मेरी सांसों में।” लोगों की सेवा करना मेरे लिए ईश्वर की पूजा है भाजपा अध्यक्ष के मुद्दे पर इसी तरह के एक सवाल का फिर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं फिर से कहूंगा कि न तो मैंने कभी इसके बारे में सोचा है, न ही किसी ने मुझे बताया है। मैं इसके बारे में सोच भी नहीं सकता। इस बार उन्होंने अपने पहले के बयान को दोहराया और कहा कि लोगों की सेवा करना मेरे लिए ईश्वर की पूजा है और मैं अपनी अंतिम सांस तक यही पूजा करता रहना चाहता हूं। चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे बता दें कि विदिशा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद चुने जाने से पहले, 66 वर्षीय केंद्रीय मंत्री चौहान, जो एक प्रमुख ओबीसी नेता हैं, रिकॉर्ड चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें ज़मीनी स्तर से जुड़े राजनेता के रूप में देखा जाता है। 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता मध्य प्रदेश में नवंबर 2023 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को शानदार जीत दिलाने के बाद, उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और विदिशा सीट से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता भी। कार्यकाल बढ़ा दिया गया बाद में, पिछले साल नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के तीसरे कार्यकाल में वे कैबिनेट मंत्री बने। गौरतलब है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का तीन साल का कार्यकाल लगभग दो साल पहले समाप्त हो गया था और उसके बाद उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।   क्या कहा मीडिया ने उनसे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ कथित मुलाकात और भाजपा अध्यक्ष पद की संभावना को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा—“न मैंने इसके बारे में कभी सोचा, न किसी ने मुझसे कहा। मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकता। लोगों की सेवा करना ही मेरे लिए ईश्वर की पूजा है और मैं अंतिम सांस तक यही करता रहूंगा।” चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे 66 वर्षीय शिवराज सिंह चौहान को जमीनी नेता और प्रभावशाली ओबीसी चेहरा माना जाता है। नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी जीत दिलाने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और विदिशा से 2024 का लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में वे कैबिनेट मंत्री बने।   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (26 अगस्त, 2025) को भाजपा के अगले अध्यक्ष बनने की संभावनाओं पर पूछे गए सवालों को टाल दिया और कहा कि उनका पूरा ध्यान कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने पर है। पिछले सप्ताहांत नई दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ उनकी कथित मुलाकात के बारे में मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे जाने पर, जिससे उनके भाजपा अध्यक्ष पद के दावेदार होने की अटकलों को बल मिला, श्री चौहान ने सवालों को टाल दिया और कहा कि वह अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों को संभालने में व्यस्त हैं। "मैं एक बात कहना चाहता हूँ – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालयों का कार्यभार सौंपा है। इस समय, कृषि मेरे रोम-रोम में है और किसान मेरी साँसों में हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा, "एक पक्षी की आंख की तरह, मेरा एक ही लक्ष्य है – कृषि उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, किसानों की आय कैसे बढ़ाई जाए, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कैसे किया जाए, और अधिक लखपति दीदी कैसे बनाई जाएं।" लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सदस्य होती हैं, जिनकी वार्षिक घरेलू आय 1 लाख रुपये से अधिक होती है। जब पत्रकारों ने अगले भाजपा अध्यक्ष के मुद्दे पर और सवाल पूछे, तो श्री चौहान ने कहा, "न तो मैंने कभी इसके बारे में सोचा है, न ही किसी ने मुझे बताया है। मैं इसके बारे में सोच भी नहीं सकता। मैं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री हूँ। मैं इस काम को पूजा की तरह कर रहा हूँ। किसानों की सेवा मेरे लिए ईश्वर की पूजा है, और मैं यह पूजा करते रहना चाहता हूँ।" 66 वर्षीय श्री चौहान, एक प्रमुख ओबीसी नेता, रिकॉर्ड चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें ज़मीनी स्तर से जुड़े राजनेता के रूप में देखा जाता है। नवंबर 2023 में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को शानदार जीत दिलाने के बाद, उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और 2024 का लोकसभा चुनाव विदिशा से लड़ा और जीता। बाद में वे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल में शामिल हुए। वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का तीन साल का कार्यकाल करीब दो साल पहले समाप्त हो गया था। उसके बाद उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।    

बिहार सरकार ने पीडीएस डीलरों के कमीशन में किया जबरदस्‍त बढ़ोतरी

50 हजार पीडीएस डीलरों को बिहार सरकार की बड़ी सौगात! 52 फीसद कमीशन बढ़ाया   बिहार के 50 हजार PDS डीलरों की बल्‍ले बल्‍ले! नीतीश सरकार ने किया कमीशन में 52 फीसद का इजाफा पटना, बिहार सरकार ने पीडीएस दुकानदारों की एक पुरानी मांग को मान लिया है। लंबे समय से बिहार के पीडीएस डीलर कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। जिसे सरकार ने मान लिया है। सरकार का यह निर्णय न सिर्फ डीलरों के लिए राहत की खबर है बल्कि लाभुक उपभोक्ताओं तक भी बेहतर सेवा सुनिश्चित करने वाला कदम साबित होगा। 258.40 रुपये मिलेगा कमीशन राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए डीलर कमीशन की राशि में 52 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। अब राज्य के सभी पीडीएस डीलरों को प्रति क्विंटल खाद्यान्न पर 258.40 रुपये कमीशन मिलेगा। पहले यह राशि 211.40 रुपये प्रति क्विंटल थी। यह नई व्यवस्था सितंबर 2025 से प्रभावी होगी। क्या था पहले और अब कितना मिलेगा अब तक डीलरों को केन्द्रांश और राज्यांश मिलाकर 90 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाता था। बाद में इसे बढ़ाकर 211.40 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसमें और 47 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिसके बाद दर 258.40 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। 50 हजार डीलरों को फायदा बिहार सरकार की ओर से जनवितरण प्रणाली (PDS) को लगातार सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। इस फैसले से राज्यभर में काम कर रहे करीब 50 हजार पीडीएस डीलरों को सीधा लाभ होगा। सरकार का मानना है कि इससे खाद्यान्न वितरण प्रणाली और बेहतर होगी और उपभोक्ताओं तक समय पर अनाज पहुंच सकेगा। मंत्री लेशी सिंह ने जताया आभार खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट की ओर से लिए गए इस फैसले का स्‍वागत किया है। उन्‍होंने कहा, ये फैसला न केवल पीडीएस ऑपरेटरों के हित में है, बल्कि पीडीएस प्रणाली को और मजबूती देने वाला भी है। पीडीएस डीलर कमीशन की बढ़ोतरी की मांग लंबे समय से कर रहे थे।

सरकारी स्कूल में मचा हड़कंप! 10 फीट लंबा मगरमच्छ मिला, बच्चों में दहशत

चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड क्षेत्र के सुवानियां गांव के राजकीय विद्यालय में मंगलवार दोपहर करीब 10 फीट लंबा मगरमच्छ घुस आया। सूचना मिलने पर वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हालांकि स्कूल परिसर में दो से तीन फीट ऊंची घास होने के कारण अभियान में काफी दिक्कत आई। करीब दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ा गया और बस्सी बांध में छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि उस समय स्कूल में छुट्टी हो चुकी थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी के अनुसार सुवानियां गांव के पास से बहने वाली बेड़च नदी से यह मगरमच्छ गांव तक पहुंच गया था। दोपहर बाद ग्रामीणों ने इसे स्कूल में देखा तो तुरंत सरपंच गोपाललाल गाडरी ने उपवन संरक्षक राहुल झांझड़िया को सूचना दी। निर्देश पर नाथू सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम और वन्यजीव प्रेमी मौके पर पहुंचे। संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया तो पता चला कि मगरमच्छ स्कूल भवन की बजाय मैदान की तरफ घास में छिपा बैठा है। रेस्क्यू टीम के सदस्य दीवार पर चढ़कर निगरानी कर रहे थे, तभी मगरमच्छ दिखाई दिया। टीम को देखते ही वह हमला करने की स्थिति में आ गया। बड़ी सावधानी से उसे पकड़ा गया और देर शाम बस्सी बांध में छोड़ा गया। वन्यजीव प्रेमी मनीष तिवारी ने बताया कि मगरमच्छ घास में फंस जाने के कारण बाहर नहीं निकल पाया। यदि वह छिपा रह जाता तो अगले दिन बच्चों या स्टाफ के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बेड़च नदी से मगरमच्छ निकलकर सुवानियां गांव में आ चुके हैं। करीब एक माह पहले यहां से दो मगरमच्छ रेस्क्यू किए गए थे।

नशे के खिलाफ पुलिस का प्रहार, 7 महीने में 155 तस्करों को भेजा जेल

दुर्ग दुर्ग पुलिस ने नशा तस्करों के चेन को तोड़ते हुए अब तक 71 मामले में केस दर्ज कर कुल 155 नशा तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा है. इसमें 21 महिलाएं भी शामिल है जो नशा बेचते हुए पकड़ायी है. पुलिस ने सबसे ज्यादा कार्रवाई सूखा नशा गांजे पर कार्रवाई की है. वहीं हेरोइन, ब्राउन शुगर, टेबलेट और सिरप भी जब्त की है. दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल के मुताबिक पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी को रोकते हुए नशे के सौदागरों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. अभियान के तहत 1 जनवरी से 31 जुलाई तक जिले में नशा तस्करों के खिलाफ 71 मामले दर्ज करते हुए 155 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है. उन्होंने बताया कि नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की है. मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में दुर्ग पुलिस की कार्रवाई अच्छी खासी रही. एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष मात्र 7 महीनों में बीते वर्ष की गिरफ्तारियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. एसएसपी विजय अग्रवाल के नेतृत्व में पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान चलाया, जिसमें ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई है. श्री अग्रवाल के मुताबिक जिले के साथ-साथ बाहरी राज्यों के नशा कारोबारियों और तस्करों पर भी पुलिस नजर बनाए हुए है. पुलिस थानों सहित क्राइम ब्रांच की टीम को भी इस दिशा में सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश हैं.

‘शैतान’ शब्द को लेकर कांग्रेस का बवाल, CM बोले- मैंने किया था कर्नल शैतान सिंह का जिक्र

हरियाणा हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। लेकिन जैसे-जैसे कार्यवाही आगे बढ़ी, सत्ता पक्ष और कांग्रेस विधायकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। झज्जर से कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले सदन में 'शैतान' शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री ने यह शब्द किसके लिए कहा था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जवाब में कहा कि उन्होंने 'कर्नल शैतान सिंह' का जिक्र किया था, जो देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है और देश के वीरों का अपमान कर रहा है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री जी, आप मेरे लिए बाप समान हैं, लेकिन अगर 'शैतान' मेरी औलाद होगी तो मैं क्या करूंगा?" मुख्यमंत्री सैनी ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष झूठे आरोप लगा रहा है और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा, "मैंने कोई अभद्र भाषा नहीं बोली, बल्कि विपक्ष ने ही मर्यादाएं तोड़ी हैं।" हुड्डा ने भी नाराजगी जताते हुए कहा, "आप पांच-छह और गाली दे दीजिए।" कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि मुख्यमंत्री अपने शब्दों को वापस लें। हालांकि, स्पीकर ने कहा कि यह विषय यहीं समाप्त माना जाए।

फर्जी वोटरों की होगी पहचान! कांग्रेस ने सभी जिलाध्यक्षों को दिया मतदाता सूची जांचने का आदेश

रायपुर वोट चोरी को लेकर कांग्रेस लगातार आंदोलन कर रही है. अब छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस फर्जी वोटरों को ढूंढेगी. प्रदेश में मतदाता सूची के परीक्षण के लिए कांग्रेस ने आदेश जारी कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी जिलाध्यक्षों को पत्र लिखकर हर विधानसभा की मतदाता सूची का परीक्षण कर चार बिंदुओं में जानकारी पीसीसी में जमा करने कहा गया है. कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के 2023 विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची में हेराफेरी का संदेह जताया है. इसके चलते अब कांग्रेसी प्रदेशभर में अभियान चलाकर फर्जी वोटरों की पहचान करेगी.

CM सैनी का बयान: क्यों हटाए गए लाखों परिवार BPL लिस्ट से

हरियाणा  हरियाणा विधानसभा में बीपीएल कार्ड के मुद्दे पर भी काफी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान गरीब परिवारों को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर बीपीएल लिस्ट में नाम डाले और चुनाव के तुरंत बाद लाखों परिवारों को बाहर कर दिया। कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला ने सरकार से पूछा कि पहली जनवरी, 2024 से 31 जुलाई, 2025 के बीच कितने नए बीपीएल कार्ड बने और कितने काटे गए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बीपीएल कार्ड बंद करने का आधार क्या रखा गया। सरकार की ओर से सदन में जवाब देते हुए विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि इस अवधि में लाखों परिवार बाहर हुए हैं तो करीब उतने ही बीपीएल कैटेगरी में शामिल भी हुए हैं। पंवार ने सदन में आंकड़े रखते हुए कहा कि इस अवधि में 8,73,507 परिवार जोड़े गए। वहीं 9,68,506 परिवार बाहर किए गए। 31 मार्च, 2025 को बीपीएल परिवारों की संख्या 52 लाख 37 हजार 671 थी जो अब छंटनी के बाद घटकर 41 लाख 93 हजार 669 रह गई है। यह आंकड़ा 22 अगस्त तक का है। केहरवाला ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों में फायदा लेने के लिए भाजपा ने बीपीएल परिवारों की संख्या बढ़ाई। नतीजों के बाद फिर से कम कर दिए।   विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने गुपचुप सर्वे करवाकर गरीब परिवारों को योजनाओं से वंचित कर दिया। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि विपक्ष ने चुनाव के दौरान बीपीएल के नाम पर जनता को गुमराह किया। सरकार ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई, पोर्टल पर लोगों ने खुद अपनी आय घोषित की। उन्होंने कहा कि जो परिवार सालाना 1.80 लाख रुपये से ज्यादा कमाते थे, वे स्वेच्छा से बीपीएल लिस्ट से बाहर हो गए।

ट्रंप के टैरिफ से पानीपत की टेक्सटाइल पर संकट, हरियाणा को भारी नुकसान

पानीपत ट्रंप के पचास प्रतिशत टैरिफ का असर  अंबाला की साइंस इंडस्ट्री और पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ने लगा है। पानीपत से अमेरिका में 12 हजार करोड़ का निर्यात होता है। क्रिसमिस सीजन पर 1,500 करोड़ का निर्यात होता है। ऐसे में अमेरिकी ग्राहक उद्यमियों से छूट मांग रहे हैं। लगभग 30 प्रतिशत आर्डर अटक गए हैं।  उद्यमी बोले- अब बड़ा नुकसान होना तय है, नई मंडी तलाशनी होगी। वहीं, अंबाला में करीब चार मिलियन डालर का साइंस उपरकणों का एक्सपोर्ट अमेरिका के कई हिस्सों में होता है, इससे कई ऑर्डर रद हो गए हैं। 1500 करोड़ के आर्डर तैयार, आनाकानी कर रहे पानीपत के उद्यमी लगभग 1500 करोड़ के क्रिसमिस के आर्डर तैयार करके बैठे हैं। अब अमेरिकन इनको लेने में आनाकानी कर रहे हैं। इस सीजन में अमेरिका में सबसे अधिक कुशन कवर, बाथमैट, तौलिये, सोफे कवर, परदे व दरियां जाती है। अब अमेरिका से आर्डर मिलने की संभावना न के बराबर है। अमेरिकन इन आर्डर को बांग्लादेश, पाकिस्तान व वियतनाम में शिफ्ट कर सकते हैं।

अब बिहार की खेतों में भी लहलहाएंगे अंजीर, किसान उठा रहे दोगुना लाभ

* प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए तक का अनुदान पा सकते हैं किसान * वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए है कर सकते हैं किसान आवेदन * योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन  * बिहार में अंजीर की खेती को बढ़ावा दे रही है राज्य सरकार   पटना बागवानी फसलें किसानों को आर्थिक लाभ दिलाने में मददगार साबित होती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने 2025-2026 और 2026-2027 के लिए अंजीर फल विकास योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत अंजीर की खेती करने वाले किसानों को भारी अनुदान दिया जा रहा है। सरकार इस अनुदान से जहां एक ओर राज्य में अंजीर की खेती को बढ़ावा दे रही है वहीं दूसरी ओर किसानों की आय को बढ़ाने की भी कोशिश कर रही है।       अंजीर फल विकास योजना के तहत इसकी खेती पर वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए प्रति हेक्टेयर 1.25 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसकी खेती करने वाले किसानों को सरकार उनकी लागत का 40 प्रतिशत अर्थात 50 हजार रुपए का अनुदान देगी। 2025-26 में यह कुल अनुदान का  60 प्रतिशत यानि कि 30 हजार रुपए और 2026-27 में 40% अर्थात 20 हजार रुपए किसानों को मिलेगा। ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन  अंजीर फल विकास योजना का लाभ लेने के लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय की वेबसाइट http://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा। किसान अनुदान से संबंधित विशेष जानकारी के लिए जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। इन 32 जिलों के किसान उठा सकते हैं लाभ अंजीर फल विकास योजना के तहत बिहार के 32 जिलों में चलाई जा रही हैं। जिसमें अरवल, भोजपुर, बक्सर, गोपालगंज, जहानाबाद, लखीसराय, मधेपुरा, सारण, शिवहर, सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, अररिया, औरंगाबाद, बेगुसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चम्पारण, जमुई, खगड़िया, किशनगंज, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पटना, गया, रोहतास, पूर्णिया, समस्तीपुर, वैशाली और पश्चिम चम्पारण शामिल है।        कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यह योजना न सिर्फ बिहार के किसानों को आर्थिक लाभ दिलाने में मददगार साबित होगी बल्कि इससे बिहार में अंजीर फल के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही आर्थिक लाभ के लिए खाद्यान्न फसलों पर किसानों की निर्भरता कम होगी।