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स्थापना दिवस पर CM की दो टूक – भ्रष्टाचार पर कठोर रवैया अपनाए पुलिस, किसी का दबाव न झेले

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार एक ऐसी बुराई है जो योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने से रोकती है और समाज में असमानता बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हुए भ्रष्टाचार मुक्त राजस्थान के संकल्प पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। पुलिस बिना किसी के दबाव में आए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे प्रदेश की 8 करोड़ जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने तथा उनकी सभी समस्याओं के समाधान के लिए हर समय उपलब्ध हैं। भजनलाल शर्मा मंगलवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के 68वें स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ निरंतर अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन आवश्यक है। ऐसे में एसीबी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भजनलाल शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचारियों को मौके पर ही रंगे हाथों पकड़ने, गबन, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग आदि के मामलों को उजागर करने जैसे सभी क्षेत्रों में एसीबी ने अपनी दक्षता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। अपने ही एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार करना यह साबित करता है कि एसीबी जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। कानून व्यवस्था को किया जा रहा और अधिक सुदृढ़ भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। हमने एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स का गठन किया। पुलिस में 10 हजार पदों पर भर्ती, नए 8 जिलों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालयों की स्वीकृति, 3 महिला पुलिस बटालियनों की स्थापना जैसे निर्णय सरकार द्वारा लिए गए हैं। साथ ही, पुलिस के रेस्पोन्स टाइम को बेहतर करने के लिए 22 इंटरसेप्टर, 750 मोटर साइकिल तथा पुलिस मोबाइल यूनिट को 500 पुलिस मोबाइल यूनिट वाहन उपलब्ध कराकर 500 कालिका पेट्रोलिंग टीम का गठन भी किया है। पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए उठाए अनेक कदम भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हमने पुलिस आधुनिकीकरण व संबंधित आधारभूत संरचना के लिए पुलिस मॉडर्नाइजेशन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का गठन, सरदार पटेल सेंटर फोर साइबर कंट्रोल रूम की स्थापना, पुलिस दूरसंचार प्रशिक्षण केंद्र को राजस्थान पुलिस तकनीकी प्रशिक्षण अकादमी के रूप में क्रमोन्नत करने जैसे कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में वर्दी भत्ते व मैस भत्ते में बढ़ोतरी, राजस्थान रोडवेज की एक्सप्रेस व सेमी डीलक्स बसों में निशुल्क यात्रा, लांगरी पदों का सृजन तथा उनके मानदेय में 10 प्रतिशत की वृद्धि जैसे निर्णय लेकर विभाग को सक्षम किया जा रहा है। भ्रष्ट कार्मिकों के खिलाफ हो रही कड़ी कार्रवाई मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान हमारी सरकार ने भ्रष्ट कार्मिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत हमने पूर्व अनुमोदन प्रदान करने की प्रक्रिया तेज की है। हाल ही में राज्य सेवा के अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, अभियोजन स्वीकृति एवं 17-ए के विचाराधीन प्रकरणों का त्वरित निस्तारण किया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अनाधिकृत अनुपस्थिति के गंभीर मामलों में सेवारत अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त करने जैसे कठोर निर्णय भी लिए गए हैं। भ्रष्ट सरकारी कर्मियों के विरुद्ध एसीबी के प्रकरणों में त्वरित एवं कठोर कार्यवाही के साथ साथ उनकी पेंशन रोकने जैसी विभागीय कार्यवाही भी प्रभावी रूप से की जा रही है। भजनलाल शर्मा ने कहा कि रिश्वत लेना अपराध है और इस अपराध को रोकने की हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि अगर कहीं भी भ्रष्टाचार होता दिखे, तो बिना किसी डर के सूचित करें। जनता की भागीदारी ही इस लड़ाई को और मजबूत बनाएगी। कार्यक्रम में मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशानुसार शासन-प्रशासन में पारदर्शिता एवं शुचिता के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार ने सुशासन स्थापित करने के लिए तकनीक के अधिक से अधिक उपयोग पर जोर दिया है। ई-फाइलिंग, नियम व प्रक्रियाओं का सरलीकरण, आउटरीच प्रोग्राम जैसे नवाचारों से सिस्टम में जवाबदेहिता को बढ़ावा मिला है। पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने पुलिस को बिना दबाव के कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जिससे कानून व्यवस्था सुदृढ़ हुई है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा प्रकाशित पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक भ्रष्टाचार निदेशक ब्यूरो स्मिता श्रीवास्तव सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

यूपी की नून नदी में फिर उमड़ा जीवन, हरियाली के संग लौटी उम्मीद

लखनऊ/कानपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कानपुर में सूख चुकी नून नदी अब फिर से बहने लगी है। एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया है कि एक समय कानपुर की नून नदी का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो चुका था, यह नक्शे से गायब हो गई थी, गाद से भरी रहती थी, अतिक्रमण की जद में थी लेकिन अब इसकी जलधारा फिर से बहने लगी है। इसमें कहा गया, ‘‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता के कारण ऐसा हुआ है जिन्होंने 'एक जिला-एक नदी' पहल के माध्यम से राज्य की मृतप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने के लिये अभियान शुरू कराया।'' बयान के मुताबिक नून नदी न केवल कानपुर नगर के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक आदर्श बन चुकी है। इसमें कहा गया, ‘‘नून नदी कभी बिल्हौर, शिवराजपुर और चौबेपुर के खेतों को सींचती थी, ग्रामीण संस्कृति का अभिन्न हिस्सा थी लेकिन उपेक्षा की शिकार इस नदी में न तो पानी बचा था, न कोई पहचान रह गई थी। अतिक्रमण और गाद ने जलधारा को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया था।'' मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर नून नदी को 'एक जिला-एक नदी' योजना में शामिल किया गया। कानपुर के जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन के नेतृत्व में इस कार्य को एक सरकारी योजना से अधिक जनभागीदारी अभियान बनाया गया। बयान में कहा गया, ‘‘करीब 48 किलोमीटर लंबी नून नदी का पुराना रास्ता खोजने में राजस्व अभिलेख, ग्रामीणों की यादें, ड्रोन सर्वेक्षण और उपग्रह की तस्वीरों का सहारा लिया गया। मनरेगा योजना के तहत सफाई, खुदाई, गाद निकासी और तटबंध निर्माण का कार्य फरवरी से आरंभ हुआ।'' इसमें कहा गया कि 6,000 श्रमिकों ने 58 ग्राम पंचायतों से मिलकर करीब 23 किलोमीटर की खुदाई और सफाई का कार्य किया तथा इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 57 लाख रुपये खर्च हुए। बयान के अनुसार मुख्यमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप जुलाई के पहले सप्ताह में नदी के दोनों तटों पर 40,000 से अधिक पौधे रोपे गए जिनमें नीम, पीपल, पाकड़, सहजन जैसे वृक्ष प्रमुख हैं।  

मैत्री विद्या निकेतन में अलंकरण और शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न

रिसाली मैत्री विद्या निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रिसाली में सत्र 2025-26 का अलंकरण एवं शपथ ग्रहण समारोह हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस गरिमामय कार्यक्रम की मुख्य अतिथि संस्था की अध्यक्ष श्रीमती राजम सुधाकरन तथा विशिष्ट अतिथि संस्था के प्रबंधक श्री एस. सजीव रहे। समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत में प्रतीक स्वरूप नन्हा वनस्पति भेंट कर किया गया। साक्षात्कार द्वारा चयनित विद्यार्थी पदाधिकारियों को मुख्य मंच पर अलंकृत कर उनके कर्तव्यों का शपथ ग्रहण कराया गया। विद्यालय हेड बॉय ऋषभ प्रधान (कक्षा 12) एवं हेड गर्ल अंकिता कुर्रे (कक्षा 12) को मुख्य अतिथियों द्वारा बैज एवं शैश प्रदान किए गए। वाइस हेड बॉय अनिर्बान मुखर्जी (कक्षा 11) तथा वाइस हेड गर्ल श्रेया कोठारी (कक्षा 12) को भी उनके दायित्व सौंपे गए। विद्यालय की प्रबंधक एवं प्राचार्या डॉ. सजीता थंबी ने सभी पदाधिकारियों को विद्यालय की गरिमा एवं उत्तरदायित्व बनाए रखने की शपथ दिलाई। उप प्राचार्या डॉ. बीना सजीव ने हाउस कैप्टंस को हाउस की जिम्मेदारी निभाने तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। वहीं प्रधान अध्यापिका श्रीमती निशी साजन ने डिसिप्लिन कैप्टंस को विद्यालय अनुशासन को बनाए रखने के लिए शपथ ग्रहण कराया। अपने स्वागत संबोधन में डॉ. सजीता थंबी ने कहा कि विद्यालय की गतिविधियों, अनुशासन एवं विकास की जिम्मेदारी अब नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के कंधों पर है। उन्होंने हाउस कैप्टंस एवं डिसिप्लिन कैप्टंस की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर सभी गणमान्य अतिथियों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। हेड बॉय और हेड गर्ल ने विद्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने विचार साझा किए और दी गई जिम्मेदारियों को निष्ठा एवं समर्पण के साथ निभाने का संकल्प लिया। समारोह का संचालन श्रीलता धावला ने किया। कार्यक्रम में संस्था के गणमान्य अधिकारीगण एवं विद्यालय परिवार के सदस्यगण उपस्थित रहे।

रायपुर : स्वच्छता से स्वावलंबन की मिसाल : राजकुमार की कहानी बनी ग्रामीण विकास का प्रेरणास्रोत

रायपुर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत अण्डा ने एक ऐसी पहल की है, जो स्वच्छता को आजीविका से जोड़कर ग्रामीण विकास की दिशा में एक नया आदर्श प्रस्तुत करती है। यह पहल न केवल एक शौचालय परिसर के निर्माण तक सीमित रही, बल्कि इसके माध्यम से एक ज़रूरतमंद ग्रामीण को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका भी प्रदान की गई। यह कहानी है श्री राजकुमार टंडन की, जो पहले एक ठेले में पान की दुकान चलाते थे। सीमित आमदनी और अस्थिरता से जूझते हुए वे जीवनयापन कर रहे थे। लेकिन ग्राम पंचायत अण्डा की दूरदर्शी सोच और स्वच्छ भारत मिशन के सहयोग से उनकी ज़िंदगी ने एक नया मोड़ लिया। ग्राम पंचायत ने बस स्टैंड और मुख्य सड़क से लगे शौचालय परिसर के भीतर एक कक्ष को दुकान के रूप में विकसित कराया। वर्ष 2024 में 5 लाख रूपए की लागत से यह संपूर्ण परिसर निर्मित हुआ, जिसमें सार्वजनिक सुविधा के साथ एक आजीविका केंद्र की व्यवस्था भी की गई। यह दुकान राजकुमार को निःशुल्क आवंटित की गई। आज राजकुमार इस पक्की दुकान में पान, ठंडा पेय और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बेचते हैं। पहले जहाँ उनकी आय सीमित थी, अब वे प्रत्येक माह लगभग 12  हज़ार की आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने स्वयं एक फ्रिज भी खरीदा है, जो कभी उनके लिए कल्पना से परे था। इसके साथ ही वे परिसर की स्वच्छता और रखरखाव की ज़िम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उनका समर्पण आज उन्हें न केवल आत्मनिर्भर बना चुका है, बल्कि वे गाँव के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गए हैं। राजकुमार ने इस बदलाव के लिए जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत अण्डा का आभार व्यक्त किया है। ग्राम पंचायत अण्डा की यह पहल एक समग्र ग्रामीण विकास मॉडल के रूप में उभर रही है। जहाँ शौचालय केवल स्वच्छता का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वाभिमान और स्वावलंबन का केंद्र बन गया है। यह मॉडल सिद्ध करता है कि यदि सोच दूरदर्शी हो, तो स्वच्छता भी रोज़गार और सम्मान का माध्यम बन सकती है।यह उदाहरण अन्य ग्राम पंचायतों के लिए एक पथप्रदर्शक की भूमिका निभा सकता है।

पुलिस की कथित पिटाई और रिश्वत लेने से आहत युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, पुलिस को ठहराया जिम्मेदार

फर्रुखाबाद यूपी के फर्रुखाबाद पुलिस का रवैया एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल पुलिस की कथित पिटाई और रिश्वत लेने से आहत युवक ने फांसी की लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में युवक ने ससुरालीजनों के साथ ही दो पुलिसकर्मियों को भी जिम्मेदार ठहराया। उधर, इस मामले में ऐक्शन लेते हुए एसपी ने दो सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। ये मामला आदर्श थाना मऊ दरवाजा क्षेत्र का है। पुलिस सूत्रों के अनुसार थाना क्षेत्र के नगला छेदा गुतासी के रहने वाले दिलीप कुमार का अपनी पत्नी नीरज के साथ विवाद हो गया था। जिसकी शिकायत नीरज ने पुलिस से की। इस मामले को लेकर पुलिस ने दिलीप कुमार को पुलिस चौकी बुलाया तो वह अपने पिता राम रहीश के साथ पुलिस चौकी समझौते के लिए पहुंचा। रामरहीश का आरोप है कि सिपाही यशवंत यादव ने उनसे 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की, फिर सिपाही महेश उपाध्याय उसके पुत्र को अंदर ले गए और पिटाई की। बाद में 40 हजार रुपये लेकर समझौता कराया गया।इस घटना से आहत होकर दिलीप कुमार ने सोमवार- मंगलवार की रात में किसी समय फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने उसे आज सुबह फांसी के फंदे पर लटका पाया। उधर, सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल में जुट गई। मृतक के पास से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ। जिसमें उसने अपने ससुर बनवारी, साला राजू, आलूपुर के रहने वाले रजनेश राजपूत, हथियापुर पुलिस चौकी के सिपाही यशवंत यादव और महेश उपाध्याय को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, इस मामले में ऐक्शन लेते हुए पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने तत्काल प्रभाव से दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया। एसपी के इस ऐक्शन से थाने में हड़कंप मच गया।  

राजनांदगांव के नागरिक प्रतिनिधिमंडल ने की मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट

प्रयास विद्यालय, नालंदा परिसर सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से  छत्तीसगढ़ विधानसभा के समिति कक्ष में राजनांदगांव जिले के नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ निरंतर जनहित में कार्य कर रही है।  प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए सभी प्रक्रियाओं को चरणबद्ध रूप से ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को सुगम, सरल और सुलभ सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 24 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय पंचायत दिवस’ के अवसर पर प्रदेश की चयनित ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की शुरुआत की गई है। इन केंद्रों के माध्यम से अब ग्राम पंचायत स्तर पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल ग्रामीणों को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में प्रदेश की अन्य पंचायतों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। राजनांदगांव से आए नागरिक प्रतिनिधिमंडल ने जिले में प्रयास विद्यालय, नालंदा परिसर, एवं अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति धन्यवाद एवं आभार प्रकट किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव जिले में बीते डेढ़ वर्षों के भीतर पेयजल विस्तार, सड़क निर्माण, और अन्य अधोसंरचनात्मक कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के विभिन्न निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनका प्रत्यक्ष लाभ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है। यह जनकल्याण और विकास की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार संतुलित, समावेशी और सतत विकास के सिद्धांतों पर कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ को सतत विकास की  ओर अग्रसर करने के लिए कटिबद्ध है। इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री प्रदीप गांधी, श्री कोमल राजपूत, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारीगण और राजनांदगांव जिले के गणमान्य नागरिकगण उपस्थित थे।

स्वास्थ्य से खिलवाड़! छत्तीसगढ़ में सप्लाई की गई दवाएं पाई गईं अमानक, उपयोग पर रोक

रायपुर प्रदेश में मरीजों की सेहत से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। इस बार अस्थमा, एलर्जी, गठिया और आंतों में सूजन के इलाज में दी जाने वाली प्रेडनिसोलोन टैबलेट (दवा कोड D-427) के एक बैच की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। संभावित खामी सामने आने के बाद दवा निगम ने इसके उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि जब तक अगला आदेश न मिले, तब तक इस टैबलेट का इस्तेमाल और वितरण न किया जाए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रेडनिसोलोन टैबलेट बैच नंबर T-240368 (निर्माण तिथि: 01 जुलाई 2024, समाप्ति तिथि: 30 जून 2026, निर्माता: सनलाइफ साइंसेस) की गुणवत्ता संदिग्ध मानी जा रही है। इस टैबलेट का उपयोग सूजन, एलर्जी, अस्थमा, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है। क्या है खतरा? स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, संदेह है कि यह दवा अमानक गुणवत्ता की हो सकती है। जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन प्राथमिक रूप से यह माना जा रहा है कि दवा में कोई तकनीकी या निर्माण संबंधी खामी हो सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले भी सीजीएमएससी द्वारा खरीदी गई दवाओं और सामग्री में गंभीर खामियां पाई जा चुकी हैं। बीते सप्ताह ही सर्जिकल ब्लेड की गुणवत्ता खराब होने का मामला सामने आया था। अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश रायपुर और बलौदाबाजार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि उनके पास यह दवा मौजूद है, तो उसे अलग सुरक्षित स्थान पर रख दें और किसी मरीज को इसका वितरण न करें। आदेशों के उल्लंघन पर जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। बार-बार दोहराई जा रही लापरवाही यह पहला मामला नहीं है जब सीजीएमएससी द्वारा खरीदी गई दवाएं अमानक पाई गई हों। पिछले एक वर्ष में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेडनिसोलोन जैसी स्टेरॉइड दवा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती है। यदि यह खराब गुणवत्ता की हो, तो इसके दुष्परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। बिना परीक्षण के इस तरह की दवाओं को अस्पतालों तक भेजना सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है।  प्रदेश में मरीजों की सेहत से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। इस बार अस्थमा, एलर्जी, गठिया और आंतों में सूजन के इलाज में दी जाने वाली प्रेडनिसोलोन टैबलेट (दवा कोड D-427) के एक बैच की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।

महासमुंद : एक दिवसीय बैंकर्स प्रशिक्षण सह कार्यशाला सम्पन्न

महासमुंद राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के अंतर्गत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री एस. आलोक के मार्गदर्शन में जिला पंचायत सभाकक्ष में एक दिवसीय बैंकर्स प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 112 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें विभिन्न बैंकों के अधिकारी, ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर, एरिया कोऑर्डिनेटर, एफएल एंड सीआरपी, बीमा सखी, पीआरपी एवं अन्य फील्ड स्टाफ शामिल रहे। कार्यशाला का उद्देश्य बैंकर्स और फील्ड स्टाफ को वित्तीय प्रक्रियाओं की जानकारी देना था, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में और अधिक प्रभावी, समन्वित एवं परिणाम मुखी भूमिका निभा सकें। कार्यशाला में बिहान योजना की अवधारणा और उद्देश्यों की समझ, स्वयं सहायता समूह के क्रेडिट लिंकेज की प्रक्रिया, उद्यम वित्त के अवसर, बीसी सखी मॉडल की संरचना एवं संचालन प्रक्रिया, सरकारी बीमा योजनाओं की जानकारी नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स की समस्या और समाधान के उपाय, कम्युनिटी बेस्ड रिकवरी मैकेनिज्म कमेटी की भूमिका जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही फाइनेंशियल लिटरेसी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उन्हें प्रशिक्षण के माध्यम से वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने, स्व सहायता समूह के सदस्यों को बैंकिंग से जोड़ने और दस्तावेज़ीकरण में सहयोग हेतु सशक्त किया गया। कार्यक्रम में एनआरपी श्री सतपती, डीडीएम नाबार्ड, आरसेटी डायरेक्टर, एनआरएलएम एपीओ, डीपीएम, डीसी श्री दिलीप साहू एवं अन्य एनआरएलएम सहयोगी स्टाफ उपस्थित रहे।

डीजीपी मकवाना ने मुख्यमंत्री के संदेश एवं अभियान के पोस्टर का किया विमोचन 30 जुलाई तक चलेगा राज्य स्तरीय अभियान

नशे से दूरी है जरूरी अभियान का शुभारंभ नशा केवल स्वास्थ्य नहीं सामाजिक ताने-बाने को भी करता है छिन्न-भिन्न : मुख्यमंत्री डॉ. यादव डीजीपी मकवाना ने मुख्यमंत्री के संदेश एवं अभियान के पोस्टर का किया विमोचन 30 जुलाई तक चलेगा राज्य स्तरीय अभियान प्रदेशवासियों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करेगी मध्यप्रदेश पुलिस भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नशा एक सामाजिक बुराई है। जो युवाओं, परिवार और समाज की जड़ों को खोखला बना रही है। नशे की जद में आकर कई परिवार उजड़ जाते हैं। नशा नाश की जड़ है, जो न केवल स्वास्थ्य को खत्म करता है बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में मंगलवार से 30 जुलाई तक प्रारंभ हुए नशामुक्ति अभियान – "नशे से दूरी है जरूरी" के शुभारंभ अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अत्यंत दु:खद है कि युवाओं के बीच नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। युवा देश का भविष्य हैं, उन्हें इस दलदल से बचाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह संकल्पित है। "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान चलाने का उद्देश्य न केवल नशे को रोकना है बल्कि समाज में नई चेतना जागृत करना भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से म.प्र. पुलिस द्वारा संचालित नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने का आहवान किया है। डीजीपी ने किया अभियान का शुभारंभ पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में मंगलवार को वृहद नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ का शुभारंभ किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वीडियो संदेश तथा अभियान के पोस्टर का विमोचन भी किया। विशेष पुलिस महानिदेशक सी.आई.डी. पवन श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स के.पी. वेंकटेश्वर, पुलिस महानिरीक्षक ए.एन.ओ. डॉ. आशीष, पी.एस.ओ.टू. डीजीपी विनीत कपूर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक संजीव कुमार कंचन एवं एसओ टू डीजीपी मलय जैन उपस्थित थे। डीजीपी मकवाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से समाज में नशे की प्रवृत्ति की प्रभावी रोकथाम के लिए यह जनजागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन युवाओं को खोखला कर उनके परिवारों को भी बर्बाद कर रहा है। देश एवं प्रदेश के शीर्षस्थ राजनैतिक नेतृत्व भी इस विकराल समस्या से चितिंत एवं इसके निदान के लिये प्रयासरत है। समाज की ये नैतिक जिम्मेदारी है कि नशे के दुष्प्रभावों से विशेषकर किशोर बच्चों और युवाओं को अवगत कराएँ और नशे से दूर रखें। उन्होंने कहा कि ‘’हमारा है यही संदेश- नशा मुक्त हो मध्यप्रदेश’’। अभियान में उच्च शिक्षा, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, खेल एवं युवा कल्याण, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास और स्कूल शिक्षा विभागों सहित एनजीओ और धार्मिक संस्थान की सक्रिय सहभागिता रहेगी। हर दिन होंगी जागरूकता की गतिविधियां अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में प्रतिदिन विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी जिनमें स्थानीय रेडियो और एफएम चैनलों के माध्यम से प्रसारण, सार्वजनिक स्थलों पर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स का प्रदर्शन और पंपलेट का वितरण शामिल है। प्रिंट मीडिया, बस अड्डों और प्रमुख चौराहों पर डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से वीडियो प्रचार किया जाएगा। सफाई वाहनों पर लगे पीए सिस्टम से नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हैशटैग #नशे_से_दूरी_है_जरूरी, #Say No To Drugs, #NashamuktMP के माध्यम से व्यापक संदेश भी प्रसारित किए जाएंगे। अभियान के दौरान प्रत्येक आयोजन स्थल पर नशामुक्ति से संबंधित ‘सेल्फी पॉइंट’ बनाए जाएंगे जिससे आमजन की भागीदारी को और प्रोत्साहन मिल सके। नारकोटिक्स से संबंधित शिकायतों और परामर्श के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 एवं 14446 और वेबसाइट https://ncbmanas.gov.in का व्यापक प्रचार किया जाएगा। अभियान में प्रचार सामग्री जैसे कैप्स, रिस्ट बैंड्स, बैजेस, पोस्टर और बैनर भी वितरित किए जाएंगे। प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों के छात्रावासों में ‘छात्रावास नशामुक्ति समितियों’ का गठन किया जाएगा। अभियान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था, अखिल भारतीय गायत्री परिवार, आर्ट ऑफ लिविंग, हार्टफुलनेस जैसे सामाजिक व धार्मिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है। सामाजिक न्याय एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्रशिक्षित "मास्टर वॉलंटियर्स" नागरिकों व छात्रों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करेंगे। "कला पथक दल" द्वारा नुक्कड़ नाटक, गीत, संगीत के माध्यम से भी जनजागरूकता फैलाई जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं जैसे Alcoholics Anonymous और Narcotics Anonymous भी इस अभियान में अपना योगदान देंगी। शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "युवा संगम" के अंतर्गत "प्रहरी क्लब"/ "ओजस क्लब" और "उमंग मॉड्यूल" के माध्यम से छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित "Manhit App" के माध्यम से नशा पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मेडिकल और टेक्नीकल कॉलेजों सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सहयोग से पोस्टर, शॉर्ट मूवी और जागरूकता संदेश साझा किए जाएंगे।  

देशभर में नक्सलियों के बुरे दिन, नक्सलियों का कबूलनामा कुल 357 साथी मारे गए

रायपुर  नक्सली संगठनों ने अपने कबूलनामे में माना है कि सुरक्षाबलों के हाथों पिछले एक साल में उनके 357 माओवादी मारे जा चुके हैं. कबूलनामे के मुताबिक सुरक्षाबलों के गोलियों के शिकार हुए नक्सलियों में महिला नक्सली भी शामिल हैं, जिनकी संख्या 136 बताई गई है. नक्सलियों के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त मुहिम से नक्सल संगठनों की हालत खराब है. लगातार नक्सली निशाने पर आ रहे नकस्ली या तो सरेंडर करने को मजबूर हैं या गिरफ्तार हो रहे हैं वरना सुरक्षाबलों के गोलियों के शिकार होकर मारे जा रहे हैं. जहां, 281 नक्सली मारे गए  रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए नक्सलियों में 4 सीसी मेम्बर 15 राज्य कमेटी के नक्सली शामिल बताए जाते हैं. कबूलनामे के मुताबिक एंटी नक्सल ऑपरेशन से नक्सल संगठन को सबसे बड़ा नुकसान दण्डकारण्य में हुआ है, जहां, 281 नक्सली मारे गए हैं. जबकि, कुछ महीने पहले भी नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता ने लेटर जारी किया था। जिसमें डेढ़ साल में 400 से ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने का जिक्र था। इधर, पुलिस के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में सिर्फ बस्तर में ही करीब 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ है। वहीं इस बीच बीजापुर में नक्सलियों ने 2 शिक्षा दूतों की हत्या कर दी है। 15 जुलाई की सुबह पीलूर गांव में के जंगल में लाश बरामद हुई है। एक की पहचान विनोद मडे के तौर पर हुई है। वो शिक्षा दूत था। इन पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया गया है। फिलहाल घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले, बीजापुर में नक्सलियों ने 15 दिनों में मुखबिरी के शक में 6 लोगों की हत्या की थी। जिसमें 4 ग्रामीण और 2 छात्र शामिल हैं। 136 महिला नक्सली भी शामिल दरअसल, नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के नाम से जारी इस बुकलेट में लिखा है कि सालभर में नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर और नक्सल संगठन के महासचिव बसवा राजू समेत सेंट्रल कमेटी के 4 सदस्य, स्टेट कमेटी के 16 सदस्य मारे गए हैं। इन 357 में 136 महिला नक्सली भी मारी गई हैं। सबसे ज्यादा दंडकारण्य में 281 नक्सली ढेर हुए हैं। इन राज्यों में इतने नक्सली मारे गए नक्सलियों के इन आंकड़ों के मुताबिक, 14 बिहार-झारखंड, 23 तेलंगाना, 281 दंडकारण्य, 9 आंध्र-ओडिशा विशेष क्षेत्र/आंध्र प्रदेश, 8 महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी), 20 ओडिशा, 1 पश्चिमी घाट और 1 पंजाब से हैं। उनके 4 साथी खराब स्वास्थ्य और अनुचित उपचार के कारण, 1 दुर्घटना में, 80 फर्जी मुठभेड़ों में और 269 घेराबंदी हमलों में मारे गए। इन कैडर्स के नक्सली ढेर मारे गए नक्सलियों में बसवा राजू समेत राज्य समिति स्तर के 16, जिला समिति के 23, एसी/पीपीसी के 83, पार्टी के 138 सदस्य, PLGA के 17 सदस्य, जन संगठनों के 6 सदस्य और 34 लोग शामिल हैं। 36 लोगों का विवरण उपलब्ध नहीं है। नक्सलियों का कहना है कि अधिकांश कगार युद्ध में मारे गए हैं। घेराबंदी के दौरान कुछ साथी पकड़े गए। जिनकी हत्या की गई। सिर्फ बस्तर में ही मारे गए 420 से ज्यादा नक्सली बस्तर में 1 जनवरी 2024 से जून 2025 तक हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है। पुलिस के मुताबिक इनमें 2024 में 217 नक्सली और पिछले 6 महीने में 200 से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं। वहीं नक्सलियों के अलग-अलग लेटर में जारी आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि नक्सल संगठन भी मारे गए नक्सलियों के स्पष्ट आंकड़े जारी नहीं कर रहा है। पिछले डेढ़ साल में नक्सलियों को बड़ी क्षति पहुंची है। शहीदी सप्ताह मनाएंगे नक्सली अपने मारे गए साथियों की याद में नक्सली 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे। इस दौरान मारे गए साथियों को श्रद्धांजलि देंगे। गांव-गांव में सभा करेंगे। वहीं इस दौरान नक्सली किसी बड़े हमले की भी प्लानिंग करते हैं। नक्सलियों के बुकलेट में लिखा है कि देश में क्रांतिकारी आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के 'कगार' युद्ध को विफल किया जाएगा। जनसमुदाय को वर्ग संघर्ष और गुरिल्ला युद्ध में लामबंद करने की बात लिखी है। 24 पेजों वाला बुकलेट जारी  नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने जारी एक प्रेस नोट में यह कबूल किया है. करीब 24 पेज वाले गोंडी बोली व इंग्लिश भाषा में नक्सलियों ने कबूलनामे का बुकलेट भी जारी किया हैं. कबूलनामे के मुताबिक नक्सली संगठन मारे गए साथियों की याद में 28 जूलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे. पिछले एक साल में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए नक्सलियों में 4 सीसी मेम्बर 15 राज्य कमेटी के नक्सली शामिल बताए जाते हैं. कबूलनामे के मुताबिक एंटी नक्सल ऑपरेशन से नक्सल संगठन को सबसे बड़ा नुकसान दण्डकारण्य में हुआ है, जहां, 281 नक्सली मारे गए हैं. मार्च, 2026 तय है नक्सल उन्मूलन! केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश से नक्सलियों को उखाड़ फेंकने के लिए सुरक्षाबलों को खुली छूट दे रखी है. शाह ने नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए मार्च, 2026 की तारीख भी तय कर दी है. सुरक्षाबलों की कार्रवाई से हलकान होकर लगातार नक्सली सरेंडर कर रहे हैं,  जिससे संगठन लगातार कमजोर हुआ है.