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ग्रामवासियों के बीच पहुंचे उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मौके पर ही किया समस्याओं का समाधान

रायपुर गांव-गांव पहुंच रही सुशासन की योजनाएं – उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के कवर्धा विकासखंड के ग्राम जेवड़नखुर्द तथा बोड़ला विकासखंड के ग्राम मिनमीनिया में आयोजित सुशासन तिहार में ग्रामीणों के बीच पहुंचे एवं आमजनों से सीधे संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच सादगी और आत्मीयता के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं तथा कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने शिविर में दिव्यांगजनों की मांग पर त्वरित रूप से ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को नए आवास की चाबी भी सौंपी तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत अनेक हितग्राहियों को लाभान्वित किया।            इस दौरान उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सुशासन तिहार में शासन की योजनाएं अब गांव-गांव तक पहुंच रही है। उन्होंने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यो की जानकारी देते हुए बताया कि बरपेलाटोला से सिंघनपुरी तक 2.5 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण, मुख्य सड़क पोड़ी से उसलापुर नहर होते हुए बोधईकुंडा तक 4.5 करोड़ रुपए की सड़क, चरडोंगरी – कोठार मार्ग से सारंगपुरखुर्द नहर पार तक 2.6 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण तथा सूरजपुर से मोहगांव तक 3.58 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य किया जाएगा।   गांवों तक पहुंची प्रधानमंत्री आवास, शिविर में मिल रही निःशुल्क दस्तावेज सुविधा             उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए लंबे समय तक आंदोलन चलाया गया था और  सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक के पहले ही प्रस्ताव में प्रधानमंत्री आवास योजना को शामिल किया गया और पहली कैबिनेट में ही 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए। उन्होंने बताया कि ग्राम मिनमीनिया में 21 गांवों और ग्राम जेवड़नखुर्द में 15 गांवों के लिए शिविर आयोजित किया गया है और सभी गांवों में आवास की भी स्वीकृति की जा चुकी है।            उन्होंने बताया कि नए हितग्राहियों को भी जोड़ने के लिए नया सर्वे भी कराया गया है, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि सुशासन तिहार शिविर में बी-1, खसरा और ऋण पुस्तिका जैसी आवश्यक दस्तावेज निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे है। अटल डिजिटल सेवा केंद्र, स्मार्ट क्लास, महतारी सदन और मिनी स्टेडियम से गांवों में बढ़ रहीं सुविधाएं            उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के अनेक गांवों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण अपने गांव में ही विभिन्न योजनाओं की राशि निकाल पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 27 किस्तों में 27 हजार रुपए महिलाओं के खातों में पहुंचाए जा चुके हैं, जिनकी राशि अब ग्रामीण अपने गांव में ही निकाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांवों के स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत की गई है, जहां डिजिटल माध्यम और 3डी एनिमेशन से बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है।  दिव्यांगजनों को गतिशील बनाने के लिए स्कूटी प्रदान की जा रही है। महिलाओं की बैठकों के लिए महतारी सदन और युवाओं में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। सिंचाई परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ            उप मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 8.10 करोड़ रुपए की लागत से छीरपानी जलाशय से जुड़ी राम्हेपुर वितरक नहर एवं संबद्ध माइनर नहरों के सीसी लाइनिंग कार्य का भूमिपूजन कर निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना के पूरा होने पर 1540 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और मानिकपुर, सिल्हाटी, बघर्रा, सारंगपुर कला, सिंधनुपरी एवं राम्हेपुर कला सहित 6 गांवों के किसान सीधे लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा छिरपानी नहर विस्तार के लिए 50 करोड़ रुपए की घोषणा भी की गई है। इसके साथ ही भोरमदेव फीडर, दियाबार जलाशय, नेवारी और कोठार जलाशय में करोड़ों रुपए की लागत से नहर विस्तार और उन्नयन कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखना एजेंसी, अधिकारियों और हम सभी की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों से उन्होंने स्वयं निगरानी रखने और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तत्काल देने की अपील की। उप मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश          उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने सुशासन तिहार शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से हितग्राहियों को मिल रहे लाभ के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा निर्देशित किया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप कोई भी पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रम में शामिल होकर दिया शुभाशीष            सुशासन तिहार शिविर के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने शिशुओं को अन्नप्राशन कराकर उन्हें शुभाशीष प्रदान किया तथा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म संपन्न कराई।            इस दौरान पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य  भगत पटेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत  कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट,  विजय पटेल,  मनीराम साहू,  लोकचंद साहू,  नितेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण और ग्रामवासी उपस्थित रहे।  

मॉडल स्कूलों में नहीं मिले छात्र, झारखंड सरकार ने स्थानीय स्तर पर सीट भरने का लिया फैसला

रांची. राज्य के माॅडल स्कूलों में नामांकन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रवेश परीक्षा के परिणाम में हुई लंबी देरी और बेहद कम सफलता प्रतिशत के कारण इस बार भी हजारों बच्चों का अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई का सपना अधूरा रह गया। इस वर्ष माॅडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में 3479 परीक्षार्थी शामिल हुए, लेकिन मात्र 1165 छात्र-छात्राएं ही सफल हो सके। यानी करीब 35 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर पाए, जबकि लगभग 65 प्रतिशत सीटें खाली रह गई। जिसके बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने भी पूरी स्थिति पर खेद जताया है। परिषद अब इस व्यवस्था में बदलाव के संकेत भी दिए हैं। अगले सत्र से प्रवेश परीक्षा का आयोजन खुद जेईपीसी कराने की तैयारी में जुट गया है। ताकि परिणाम और नामांकन प्रक्रिया सरल कर समय पर पूरी की जा सके। जैक द्वारा जारी परिणाम के अनुसार इस वर्ष माॅडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में 3479 परीक्षार्थी शामिल हुए, लेकिन मात्र 1165 छात्र-छात्राएं ही सफल हो सके। यानी करीब 35 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर पाए, जबकि लगभग 65 प्रतिशत सीटें खाली रहने की आशंका पैदा हो गई है। पूरे राज्य में माॅडल स्कूलों में लगभग 3280 सीटें उपलब्ध हैं। ऐसे में अब अधिकांश स्कूलों में नामांकन के बावजूद सीटें रिक्त रह सकती हैं। दूसरी ओर अप्रैल माह तक छात्र-छात्राएं परिणाम का इंतजार करते रहे, जबकि अधिकतर निजी और सरकारी स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी थी। अब जब झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने माॅडल स्कूल परीक्षा 2026 का परिणाम जारी किया है तो स्थिति और चिंताजनक हो गई है। अब स्थानीय स्तर पर भरी जाएंगी सीटें माॅडल स्कूल प्रभाग प्रभारी धीरसेन ए. सोरेंग ने बताया कि खाली सीटों को अब स्थानीय स्तर पर भरने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस बार भी परिणाम में देरी से सत्र प्रभावित होगा। हालांकि नामांकन पूरा होने के बाद छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी ताकि पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराया जा सके। उन्होंने कहा कि माॅडल स्कूल की वर्तमान नामांकन नीति में बदलाव की जरूरत है। यह योजना मूल रूप से केंद्र सरकार की थी, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इससे हाथ खींच लिया। अब राज्य सरकार इन स्कूलों का संचालन कर रही है, लेकिन पुरानी नीति ही लागू है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए आनलाइन प्रवेश परीक्षा अभी भी चुनौती बनी हुई है। डिजिटल संसाधनों और अंग्रेजी माध्यम की तैयारी के अभाव में बड़ी संख्या में बच्चे सफल नहीं हो पा रहे हैं। रिजल्ट में देरी से बढ़ी परेशानी प्रवेश परीक्षा आयोजित होने के बाद महीनों तक परिणाम जारी नहीं होने से अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी रही। कई अभिभावक इस उम्मीद में बच्चों का अन्य स्कूलों में नामांकन नहीं करा सके कि माडल स्कूल का परिणाम जल्द जारी होगा। लेकिन अप्रैल समाप्त होने के बाद परिणाम आने से अब उनके सामने विकल्प सीमित हो गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों के लिए माडल स्कूल कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सबसे बड़ा विकल्प माने जाते हैं। लेकिन समय पर नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अब कई बच्चों को सामान्य सरकारी स्कूलों का रुख करना पड़ सकता है। पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं सीटें यह पहला अवसर नहीं है जब माडल स्कूलों में नामांकन प्रभावित हुआ हो। पिछले वर्ष भी अगस्त-सितंबर तक नामांकन प्रक्रिया चलती रही थी, जिसके कारण करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली रह गई थीं। इस बार स्थिति और गंभीर दिखाई दे रही है। राज्य के 82 माडल स्कूलों में नए सत्र की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। कई स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पहुंच चुकी हैं और शिक्षकों की तैनाती भी कर दी गई है। राजधानी रांची में आठ माडल स्कूल संचालित हैं, जहां अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि कई स्कूल अभी भी आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। क्या है माॅडल स्कूल योजना माॅडल स्कूलों की स्थापना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को छठी कक्षा में गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इन स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित शिक्षक और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई थी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे भी निजी स्कूलों जैसी शिक्षा प्राप्त कर सकें। जहां कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा मिलती है।

DPDP अधिनियम-2023 के तहत ‘प्राइवेसी बाय डिजाइन’ अपनाएगा छत्तीसगढ़

​रायपुर        छत्तीसगढ़ में नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं में विश्वसनीयता और डेटा गवर्नेंस को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) एवं भारत सरकार के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय डिजिटल इंडिया परामर्श कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न शासकीय विभागों को 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023' के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीकी अनुपालन को लेकर कड़े व स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए। ​नागरिकों की डेटा सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता:  मयंक अग्रवाल      ​ कार्यशाला को संबोधित करते हुए CHiPS के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO)  मयंक अग्रवाल ने राज्य सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना शासन की मुख्य प्राथमिकता है। ​"DPDP अधिनियम केवल एक विधिक या कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में 'Privacy by Design' (डिजाइन में ही गोपनीयता) एवं 'Citizen-Centric Data Governance' (नागरिक-केंद्रित डेटा गवर्नेंस) की दिशा में एक क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण परिवर्तन है।   ​ अग्रवाल ने राज्य की तकनीकी प्रगति साझा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 'सेवा सेतु' प्लेटफॉर्म का डिजिलॉकर, उमंग और माय स्कीम (My Scheme) जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ सफलतापूर्वक एकीकरण (Integration) किया जा चुका है। इसके जरिए नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्र और सरकारी सेवाएँ डिजिटल रूप से आसानी से मिल रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि आगामी चरण में सभी विभागों को "Digital-by-Default" दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि अधिक से अधिक सेवाओं को राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) से जोड़ा जा सके। ​पारदर्शिता, जवाबदेही और साइबर सुरक्षा को मिलेगा बल:  सुनील जैन       ​नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD), नई दिल्ली के संचालक  सुनील जैन ने कार्यशाला में विभागीय दायित्वों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि DPDP अधिनियम, 2023 सभी सरकारी संस्थाओं के लिए डेटा प्रबंधन की नई और सख्त जवाबदेहियों को परिभाषित करता है। इस अधिनियम के कड़ाई से अनुपालन से न केवल विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी, बल्कि राज्य की साइबर सुरक्षा प्रणाली को भी अभूतपूर्व बल मिलेगा। ​साइबर खतरों से निपटने के लिए 'डेटा न्यूनतमकरण' जरूरी      ​ राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक  पी. रामाराव ने डिजिटल युग में डेटा की सुरक्षा को लेकर विभागों को सचेत किया। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारियां आजकल साइबर अपराधियों के मुख्य निशाने पर होती हैं। इससे बचने के लिए उन्होंने सभी विभागों को डेटा न्यूनतमकरण (Data Minimization), लॉग मॉनिटरिंग तथा नियमित अंतराल पर सुरक्षा समीक्षा (Security Audit) अपनाने की महती सलाह दी। ​राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने दी तकनीकी प्रस्तुतियाँ     ​ कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। NeGD के  नितीश कालरा ने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, डेटा फिड्यूशियरी (Data Fiduciary) की भूमिका, सहमति प्रबंधन (Consent Management) और नागरिक शिकायत निवारण तंत्र पर प्रस्तुति दी। चिप्स के  आशीष जायसवाल और NeGD के  विशाल विरमानी ने डिजिलॉकर के साथ विभागों के एकीकरण, सुरक्षित दस्तावेज़ साझाकरण और डिजिटल प्रमाण-पत्रों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। ​सु कीर्ति गुप्ता एवं  महेश कुमार ने उमंग और माय स्कीम प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक नागरिक सेवाओं की पहुँच बढ़ाने की रणनीतियों को साझा किया। ​30, 60 और 90 दिनों का बनेगा एक्शन प्लान       ​ कार्यशाला के समापन पर CHiPS के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अनुपम आशीष टोप्पो ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने घोषणा की कि इस कार्यशाला से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों के आधार पर सभी विभागों के लिए 30, 60 और 90 दिनों की एक चरणबद्ध विभागीय कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की जाएगी। इस योजना के माध्यम से राज्य में DPDP अधिनियम का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं के विस्तार को गति दी जाएगी।      ​ इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में CHiPS सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के 180 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। कार्यक्रम में डेटा संरक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एकीकरण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर गहन मंथन किया गया।  

राज्यपाल डेका से लेफ्टिनेट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता ने की सौजन्य भेंट

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता ने सौजन्य भेंट की। उनके साथ हेड क्वाटर कोसा के कमाण्डर ब्रिगेडियर टी.एस.बावा तथा जी.ओ.सी. एम.बी एरिया जबलपुर लेफ्टिनेट जनरल एच.एस. वांड्रा भी उपस्थित थे।

छापेमारी में 4 लाख 20 हजार रुपये से ज्यादा कीमत का संदिग्ध ईंधन जब्त

इंदौर इंदौर जिले के देपालपुर मेथवाडा स्थित मे. इंदौर बायो एनर्जी प्रा.लि. बायो डीजल पंप भागीदार सुनीता पति सुभाष केसवाल एवं सुभाष पति रामचंद्र केसवाल निवासी द्वारकापुरी द्वारा अवैध रूप से नकली बायो डीजल की बिक्री करने पर खाद्य विभाग द्वारा शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने पंप को सील कर दिया है। मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप पर प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल होना पाया गया। बताया गया कि मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप की शिकायत प्राप्त होने पर खाद्य विभाग की टीम द्वारा जांच की गई। प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल पाए जाने पर पंप को सील किया। साथ ही पंप संचालक द्वारा राज्य सरकार के अधिकृत लाइसेंस प्राप्त छह कंपनी के सप्लायर से सप्लाई नहीं लेकर अनाधिकृत फर्म से सप्लाई लेना पाया। पंप संचालक बीएस 100 मानक का ही बायो डीजल विक्रय कर सकते हैं, बायोडीजल के मानक की डेंसिटी 900 से ऊपर होती है, लेकिन मौके पर डेंसिटी 860 पाई गई। मौके से कुल छह हजार लीटर नकली बायो डीजल जब्‍त किया। इसकी कीमत लगभग चार लाख 20 हजार रूपये से ज्यादा है। नकली बायोडीजल के सैंपल लेकर पंप में बिक्री बंद करवाते हुए पंप, डिस्पेंसरी यूनिट और भूमिगत टैंक को सील कर दिया है। सैंपल अधिकृत लेबोरेटरी में टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। नमूना रिपोर्ट आने के बाद में आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।  

नोएडा से एक आरोपी गिरफ्तार

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लगातार सख्त एवं तकनीकी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पन्ना पुलिस ने एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया गया है। फरियादी गोपाल बंसकार ने 1930 साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कर बताया कि उसके सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सिमरिया स्थित खाते से संचालित नवी यू.पी.आई. एप के माध्यम से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कुल 1 लाख 90 हजार रुपये की साइबर ठगी की गई है। शिकायत प्राप्‍त होते ही पुलिस अधीक्षक पन्ना मती निवेदिता नायडू के निर्देशन में पुलिस एवं साइबर सेल की एक विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों द्वारा फरियादी के मोबाइल फोन में एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कराकर मोबाइल का अनाधिकृत एक्सेस प्राप्त किया गया था। एपीके फाइल इंस्टॉल होने के बाद आरोपियों ने मोबाइल की संवेदनशील जानकारी, बैंकिंग एक्सेस, यूपीआई एवं ट्रांजेक्शन ओटीपी संबंधी जानकारी हासिल कर खाते से अवैध ट्रांजेक्शन किये। पुलिस टीम द्वारा तकनीकी जांच एवं डिजिटल ट्रेल के विश्लेषण के दौरान पता चला कि 23 अप्रैल को फरियादी के खाते से 95 हजार रुपये तथा 27अप्रैल को पुनः 95 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किये गये थे। विवेचना के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों एवं साइबर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने अन्‍य साथियों के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया है। मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल, संदिग्ध लिंक अथवा मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड एवं इंस्टॉल न करें। किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल, यूपीआई पिन अथवा मोबाइल एक्सेस किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन अथवा नजदीकी पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराएं। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध सतर्क, सक्रिय एवं प्रतिबद्ध होकर आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्यरत है।  

राजगढ़ में नाबालिग से बाल विवाह व दुष्कर्म मामले में 5 गिरफ्तार

भोपाल  महिलाओं, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संवेदनशील अपराधों के विरुद्ध लगातार सख्त एवं त्वरित कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश के राजगढ़ एवं आगर मालवा जिलों में पुलिस टीमों ने तत्परता, संवेदनशीलता एवं तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मानव तस्करी, बाल विवाह, दुष्कर्म एवं महिलाओं के शोषण से जुड़े गंभीर मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हुआ है कि मध्यप्रदेश पुलिस महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। राजगढ़ जिले में थाना कोतवाली पुलिस ने 12 वर्षीय नाबालिग बालिका से बाल विवाह, खरीद-फरोख्त, दैहिक शोषण एवं प्रताड़ना के अत्यंत संवेदनशील मामले का खुलासा करते हुए 6 नामजद आरोपियों में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक  अमित तोलानी के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। प्रकरण में सामने आया कि पीड़िता के पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां की दूसरी शादी आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर निवासी गुना से कराई गई थी। इसके बाद आरोपी पीड़िता एवं उसकी मां को राजगढ़ लेकर आया, जहां सुनियोजित तरीके से 3 फरवरी 2025 को 12 वर्षीय बालिका का विवाह भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर से करा दिया गया। आरोपियों द्वारा इस बाल विवाह के एवज में लाखों रुपये नगद एवं जेवरात लिए गए। विवाह के बाद नाबालिग के साथ दुष्कर्म एवं लगातार शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना की गई। मामले में अन्य आरोपियों द्वारा भी पीड़िता का शोषण किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला थाना प्रभारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने अत्यंत संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बालिका की काउंसलिंग की, जिससे पीड़िता ने साहसपूर्वक अपनी आपबीती पुलिस को बताई। इसके बाद थाना कोतवाली राजगढ़ में पॉक्सो एक्ट, जेजे एक्ट एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर, देवराज गुर्जर, सागर गुर्जर, शैतानबाई तथा पीड़िता की मां शामिल हैं। वहीं मुख्य आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर फरार है, जिसकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस अधीक्षक राजगढ़ द्वारा 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। इसी प्रकार आगर मालवा के थाना बड़ौद पुलिस ने मानव तस्करी एवं जबरन विवाह कराने की साजिश का पर्दाफाश करते हुए त्वरित कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार कर युवती को सुरक्षित संरक्षण में लिया। पुलिस अधीक्षक आगर मालवा  दिलीप कुमार सोनी के निर्देशनमें यह कार्रवाई की गई। प्रकरण में बैतूल निवासी युवती द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई कि वह इंदौर में कार्य करने जा रही थी, तभी शाहपुर बस स्टॉप से कुछ व्यक्तियों ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसे वाहन में बैठा लिया। आरोपियों द्वारा युवती को राजस्थान निवासी व्यक्ति से जबरन विवाह कराने एवं रुपये लेकर बेचने की योजना बनाई गई थी। विरोध करने पर युवती को जान से मारने एवं अन्य स्थान पर बेच देने की धमकी भी दी गई। घटना के दौरान पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस कंट्रोल रूम आगर को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही डायल-112, कंट्रोल रूम एवं थाना बड़ौद पुलिस तत्काल सक्रिय हुई और तकनीकी विश्लेषण एवं लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर राजस्थान सीमा से लगे क्षेत्र में सघन घेराबंदी की गई। पुलिस टीम के पहुंचते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन पुलिस ने तत्परता एवं सूझबूझ से कार्रवाई करते हुए युवती को सुरक्षित बरामद कर आरोपी ईश्वर सिंह बागरी को गिरफ्तार कर लिया।थाना बड़ौद में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस द्वारा न केवल त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण, संरक्षण एवं न्याय दिलाने हेतु संवेदनशील पुलिसिंग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगा।  

आयुष्मान योजना से मिली नई उम्मीद जगनी बाई को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ

रायपुर आयुष्मान भारत योजना समाज के गरीब, जरूरतमंद एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। योजना के माध्यम से अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। नारायणपुर जिले की निवासी जगनी बाई लाभान्वित हुई हैं, जिन्हें बढ़ती उम्र के कारण लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।              जगनी बाई ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ उनकी तबीयत लगातार खराब रहने लगी थी। कमजोरी, शरीर में दर्द तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें अस्पताल जाकर इलाज कराने की आवश्यकता पड़ती थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बेहतर उपचार कराना संभव नहीं हो पा रहा था। कई बार इलाज के खर्च की चिंता के कारण समय पर अस्पताल जाना भी मुश्किल हो जाता था। इसी दौरान उन्हें आयुष्मान भारत योजना की जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत उनका आयुष्मान कार्ड बनाया गया, जिसके बाद उन्हें निःशुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त हुई। कार्ड बनने के बाद जगनी बाई को अस्पताल में भर्ती होने, आवश्यक जांच कराने, डॉक्टरों से परामर्श लेने तथा दवाइयों सहित उपचार की सुविधा बिना किसी आर्थिक बोझ के मिली। उन्होंने बताया कि पहले इलाज के खर्च को लेकर परिवार के सदस्य हमेशा चिंतित रहते थे, लेकिन अब आयुष्मान योजना के कारण उन्हें बड़ी राहत मिली है। अस्पताल में बेहतर उपचार मिलने से उनके स्वास्थ्य में सुधार आया है और परिवार के लोगों को भी मानसिक राहत मिली है। जगनी बाई ने सरकार की इस जनहितैषी योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना गरीब एवं जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए बहुत बड़ी सहायता साबित हो रही है।               ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई वरिष्ठ नागरिक आर्थिक अभाव के कारण समय पर इलाज नहीं करा पाते थे, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाती थीं। आयुष्मान भारत योजना ऐसे लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब गरीब परिवार भी बेहतर अस्पतालों में इलाज करा पा रहे हैं।               70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गों को योजना के माध्यम से विशेष रूप से लाभ मिल रहा है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और उनका जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। शासन की यह पहल समाज के कमजोर वर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आयुष्मान योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। शासन द्वारा लगातार लोगों को योजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है तथा पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं।               जगनी बाई की तरह अनेक हितग्राही इस योजना का लाभ लेकर स्वस्थ जीवन की ओर आगे बढ़ रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षा और विश्वास भी दे रही है।

विशेष स्वच्छता अभियान के बीच नन्हे बालक आनंद कश्यप ने दिया स्वच्छता का संदेश

रायपुर दंतेवाडा जिले में 15 मई से 15 जून तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से लोगों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन एवं साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में फरसपाल रोड स्थित पुरनतरई गांव से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां एक नन्हे बालक आनंद कश्यप ने अपने छोटे से प्रयास से बड़ा संदेश दिया है। गांव में स्थित एक छोटी सी दुकान के बाहर कार्डबोर्ड के डिब्बे से बनाया गया एक अनोखा कूड़ेदान लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा था। उस पर बड़े सरल शब्दों में लिखा था, “कचरा यहां डिब्बा में डालें।” देखने में साधारण लगने वाला यह कूड़ेदान स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया है। जब दुकान संचालक से इस बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि यह कूड़ेदान उनके बेटे आनंद कश्यप ने स्वयं बनाया है। आनंद की इस सोच और प्रयास ने सभी को प्रभावित किया। सीमित संसाधनों में तैयार किया गया यह छोटा सा प्रयास यह दर्शाता है कि यदि इरादे मजबूत हों तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। आनंद कश्यप की यह पहल लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक होने और अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की प्रेरणा दे रही है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। आनंद जैसे नन्हे सिपाही ही स्वच्छ और सुंदर भारत के निर्माण की मजबूत नींव हैं।

दमोह के डायल-112 हीरोज ट्रैक्टर हादसे में गंभीर रूपए से घायल व्यक्ति को त्वरित सहायता पहुँचाकर कराया अस्पताल में भर्ती

भोपाल  दमोह जिले के थाना पथरियाक्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्यवाही से ट्रैक्टर हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। त्वरित सहायता मिलने से घायल व्यक्ति को समय रहते चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी। 29 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना पथरिया क्षेत्र अंतर्गत गढ़ाकोटा रोड पर एक व्यक्ति ट्रैक्टर से गिरकर उसके टायर के नीचे आ जाने से गंभीर रूप से घायल हो गया है तथा तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना पथरिया क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन एफआरवी-12 को मौके के लिए रवाना किया गया। सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षकश्री राजेश सिंह एवं पायलट श्री मन्नू सिंह लोधी ने मौके पर पहुँचकर पाया कि एक व्यक्ति ट्रैक्‍टर से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।डायल-112 स्‍टॉफ ने बिना समय गवाएं घायल व्यक्ति को सुरक्षित डायल-112 वाहन से पथरिया अस्पताल में भर्ती कराया। डायल-112 की त्वरित कार्यवाही से घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता पहुँचाकर आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सड़क दुर्घटनाओं एवं अन्य संकट की स्थितियों में डायल-112 जवान संवेदनशीलता, तत्परता एवं सेवा भाव के साथ लोगों की मदद कर रहे हैं।