samacharsecretary.com

भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है आम

रायपुर आम केवल एक फल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आम उत्पादों को बडे रूप में विकसित करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।  राज्यपाल  रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने की। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व में आम उत्पादन में अग्रणी है और देश में एक हजार से अधिक किस्मों के आम पाए जाते है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्थानीय आमों की विशेषताओें का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन से अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां और महोत्सव देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादकों को एक-दूसरे की उन्नत खेती पद्धतियों, नई किस्मों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादन की बहुत संभावनाएं है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के व्यापक अवसर मौजूद है। मैंगों टूरिज्म की भी छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं है। राज्यपाल ने कहा कि आम उत्पादन के साथ-साथ इसके वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को मिलकर कार्य करना चाहिए।  डेका ने कहा कि हमारे जीवन को ईको फैंडली बनाना आज की आवश्यकता है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना होगा। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम पर लगाने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि आम फलों का राजा है। आम की पत्तियों और लकड़ियों का भी हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। हमारे घरों में मांगलिक कार्य होने पर हम आम की पत्तियों से तोरण बनाते है एवं आम की सूखी लकड़ियों का उपयोग हवन एवं पूजा में करते है। इस महोत्सव में 250 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेशवासियोें को इस महोत्सव का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। प्रदर्शनी मे बेर के आकार से लेकर बीजापुर के हाथीझुल जैसे बड़े किस्मों के आम भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधामंत्री  नरेन्द्र मोदी के मंशानुरूप किसानों की आय दुगुनी करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और आम की खेती भी इस संकल्प को पूरा करने के लिए सहायक सिद्ध होगी। आम महोत्सव के उद्घाटन पश्चात राज्यपाल  डेका और मुख्यमंत्री  साय ने आम उत्पादकों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी में आम के विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया ।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष  सुरेश चंद्रवंशी एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी सहित अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, किसान एवं बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।

किसानों से अब तक 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों से अब तक 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 हजार करोड़ रुपये का किसानों को किया जा चुका है भुगतान प्रदेश में सबसे लम्बे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था की गई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन पर वीडियो संदेश के माध्यम से दी जानकारी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन में अपने सभी लक्ष्य हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। प्रदेश में किसानों से अब तक रिकॉर्ड 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को 2585 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रति क्विंटल 40 रुपए बोनस का लाभ दिया है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान किया। अब तक किसानों को गेहूं उपार्जन की 24 हजार करोड़ राशि दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में आज वीडियो संदेश के माध्यम से ये जानकारी दी। किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं खरीदने के लिए किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश में इस वर्ष गेहूं की पैदावार बढ़ी है। देश में सर्वाधिक गेहूं उत्पादन वाले राज्यों में पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश सर्वाधिक लंबे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था लागू करने वाला एकमात्र राज्य है। सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं गोदामों तक पहुंच चुका है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे और मध्यम श्रेणी के किसानों से पहले गेहूं खरीदा गया। यह व्यवस्था प्रदेश में पहली बार लागू की गई। छोटे किसानों से अब तक लगभग 32.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। इसके बाद बड़े किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिला। अब तक लगभग पौने 14 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन कर लिया गया है। सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसान भाई-बहनों का गेहूं गोदाम तक पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति और विश्व में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है। इस कठिन दौर में भी रिकॉर्ड गेहूं खरीदी की गई है। राज्य सरकार किसानों के लिए अनेक जन हितैषी निर्णय ले रही है। अन्नदाता भाई-बहनों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार ने यह पूरा वर्ष कृषक कल्याण को समर्पित किया है। प्रदेश का हर किसान समृद्ध और खुशहाल हो, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फसल उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग से किसानों की आय में वृद्धि हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है।

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन का मुख्य आधार है और हमारी पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित और संवर्धित करना हमारा परम सामाजिक और पर्यावरणीय कर्तव्य है। इसी पावन उद्देश्य के साथ राज्य में शुरू किया गया 'जल गंगा संवर्धन अभियान' आज केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सहयोग से एक पवित्र जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पुनर्जीवन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है, जिसके अंतर्गत अब तक रिकॉर्ड 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जल सहेजने के इस पुनीत कार्य में पूरे देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 6 हजार 330 करोड़ रुपये की राशि से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य हुए पूरे जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के तहत राज्य में कुल 3,67,777 कार्यों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार पूरा किया जा चुका है, जबकि 1,51,093 कार्य तीव्र गति से प्रगति पर हैं। इस विशाल अभियान को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से क्रियान्वित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा कुल 10,644.02 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से अब तक 6,330.81 करोड़ रुपये (लगभग 59.5%) की राशि का उपयोग किया गया है, जो विकास की वास्तविक गति को दर्शाती है। कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में हुई जल क्रांति ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड 57,794 खेत तालाब और 91,838 डग वेल रिचार्ज (कुआं पुनर्भरण) संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक और नए जल स्रोतों को सहेजने के उद्देश्य से 29,906 जल संरक्षण एवं पुनर्भरण संरचनाओं तथा 126 भव्य 'अमृत सरोवरों' का कार्य शत्-प्रतिशत् पूरा किया जा चुका है। सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 1,152 विशेष सिंचाई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के लिए 2,721 मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत सामाजिक, पर्यावरणीय और शैक्षणिक स्तर पर भी विशेष प्रयास किए गए हैं। वाटरशेड प्रबंधन के तहत 4,822 कार्यों को पूर्ण किया गया है, जिससे भूमिगत जल स्तर में व्यापक सुधार होगा। वहीं, स्कूलों में स्वच्छता और शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए 'WoW मोबाइल ऐप' के माध्यम से 5,275 पानी की टंकियों की सफाई का कार्य संपन्न कराया गया है। इसके अलावा, 'जल संसद जल बंधन 2.0' (JSJB 2.0) पहल के तहत 21.23 लाख से अधिक कार्यों का सफल पंजीकरण किया गया है, जिसमें समय पर कार्य पूर्ण करने की उत्कृष्ट दर 91.3% दर्ज की गई है। देश के लिए मिसाल बनेगा मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय प्रदेश की जागरूक जनता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समर्पित प्रशासनिक अमले को देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश का यह सशक्त जल प्रबंधन मॉडल पूरे देश के लिए एक नई और अनुकरणीय दिशा तय करेगा। आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मध्यप्रदेश इस दिशा में निरंतर नवाचार करता रहेगा।  

Abdullah Azam Case: कोर्ट ने रद्द की 7 साल की सजा, जेल से रिहाई की बढ़ी उम्मीदें

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान अभी जेल में बंद है. पर अब्दुल्ला के लिए एक अच्छी खबर आई है. MP/MLA सेशन कोर्ट ने दो पासपोर्ट मामले में सुनाई गई 7 साल की सजा को रद्द कर दिया है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या अब्दुल्ला जेल से बाहर आएंगे।  वैसे भला ही अब्दुल्ला आजम खान को कोर्ट से दो पासपोर्ट मामले में राहत मिल गई हो, लेकिन जेल से बाहर आने का रास्ता साफ नहीं हुआ है. दरअसल, कुछ ऐसे मामले जो कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं जिसमें अभी सुनवाई जारी है।  गौरतलब है, दो पासपोर्ट मामले में MP/MLA मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 5 दिसंबर 2025 को अब्दुल्ला आज़म को 7 साल की सजा सुनाई थी. इस फैसले के खिलाफ अब्दुल्ला आज़म की ओर से MP/MLA सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी, जिस पर 25 मई को बहस पूरी हो चुकी थी. इस मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने अब्दुल्ला आज़म की अपील मंजूर कर ली और पूर्व में सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया।  बता दें, बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने 30 जुलाई 2019 को रामपुर के सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था. आरोप था कि अब्दुल्ला आज़म ने अलग-अलग जन्मतिथि दर्शाकर दो पासपोर्ट बनवाए. एक पासपोर्ट में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 जबकि दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज होने का आरोप था. दोनों पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विदेश यात्रा करने के आरोप भी लगाए गए थे. यह मामला MP/MLA कोर्ट में विचाराधीन था। 

योगी सरकार के प्रयास रंग लाए, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट

योगी सरकार के प्रयासों का असर, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई कमी एसआरएस की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मौत के आंकड़ों के सुधार कंगारू मदर केयर, सीपैप मशीन, मिल्क बैंक व नियमित टीकाकरण बने बड़े सहायक आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण करने का भी मिला फायदा लखनऊ  योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में नवजात से पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। आंकड़ों में आया यह सुधार हजारों बच्चों के सुरक्षित जीवन, लाखों परिवारों की उम्मीदों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते विश्वास की कहानी दर्शाता है। साथ ही जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने की चुनौती भी पेश करता है।  नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 26 से 25, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 37 से 35 और पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्युदर 42 से 41 रह गई है। यह सर्वे प्रति 1000 बच्चों के हिसाब से किया गया है।      बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी पर उत्तर प्रदेश का उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होना, जहाँ बच्चों की मृत्यु दर में सभी आयु वर्गों में कमी आई है, सबके सामूहिक समर्पण, अथक परिश्रम और जमीनी स्तर पर निरंतर किए गए प्रयासों का प्रमाण है। यह रुझान उत्साहजनक हैं तो हमें यह भी याद दिलाते हैं कि नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी की रफ़्तार अभी भी उम्मीद से धीमी है और जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में खास बदलाव नहीं आया है। इससे साफ़ पता चलता है कि बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी और जीवन के पहले 48 घंटों के दौरान दी जाने वाली देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर बहुत ज़्यादा निर्भर करेगा। स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ शालिनी त्रिपाठी के अनुसार प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई है। बीते तीन-चार सालों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को लगातार प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर लगाई जाने वाली सीपैप मशीन, कंगारू मदर केयर, मिल्क बैंक, निःशुल्क दवाओं व नियमित टीकाकरण भी शिशुओं की मृत्यु दर कम करने में सहायक साबित हुए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में शुरू हुए मदर न्यूबार्न केयर यूनिट (एमएनसीयू), जिसमें प्रसव के बाद मां-बच्चे को एक साथ वार्ड में ठहराया जाता है, से भी बड़ा लाभ हो रहा है।  रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने से जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मिली मजबूती वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स डेजी रानी ने बताया कि नर्सों को नवजात शिशु की देखभाल पर नियमित रूप से साप्ताहिक वर्चुअल लर्निंग सेशन और समय-समय पर आमने-सामने रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जा रही है। इन ट्रेनिंग से उन्हें नवजात शिशु के खतरे के लक्षणों को पहचानने, समय पर रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने और जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मजबूत करने में काफी मदद मिली है। वीरांगना अवंती बाई अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सलमान ने बताया कि बहुत से बच्चों की मौत संक्रमण व अस्वच्छता के कारण भी हो जाती थी। अब अस्पतालों में स्वच्छता व बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाता है कि शिशु के पास आने से पहले डाक्टर, नर्स के हाथ साफ हों, प्रसूता का डिलिवरी क्षेत्र साफ हो, बच्चे को लपेटने वाला कपड़ा साफ हो, बच्चे की नाल काटने वाला उपकरण व नाल में बांधी जाने वाली क्लिप स्वच्छ हो। अस्पतालों में स्वच्छता व संक्रमण कम होना भी शिशु मृत्यु दर कम होने की एक वजह है।

छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहें हैं जोर: मंत्री रामविचार नेताम

किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता: मंत्री रामविचार नेताम छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहें हैं जोर: मंत्री रामविचार नेताम दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि: मंत्री रामविचार नेताम ठोस रसायनिक उर्वरक के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया-डीएपी को दे रहे हैं बढ़ावा नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए मंत्री रामविचार नेताम रायपुर धान के कटोरे के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ अब परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण अनुकूल स्थायी कृषि के एक नए युग में अग्रसर हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के तहत किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए चौतरफा रणनीति पर काम शुरू हो गया है। केन्द्रीय कृषि विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज इस आशय की जानकारी दी।          कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में राज्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का कृषि ढांचा अब एक बड़े बदलाव की ओर है। हमारी सरकार ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के जरिए राज्य के लगभग 40 लाख किसान परिवारों, जिनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत जिसमें 31 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के किसान शामिल हैं, के आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज की गई 76 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि और तिलहन के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि हमारा किसान अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वहीं खरीफ 2026 में हम अरहर, उड़द और मूंग के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य हर हाथ को काम और हर खेत को सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित खाद उपलब्ध कराना है।              राज्य में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और रणनीतिक तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि कृषि तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक प्रबंधन से खेती की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि खरीफ 2026 के लिए हमारी तैयारियां पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित हैं। राज्य के किसानों को कृषि विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। सीमांत किसानों को जहां एकमुश्त उर्वरक दिया जा रहा है, वहीं यूरिया की कालाबाजारी और अत्यधिक खपत को रोकने के लिए लघु व बड़े किसानों को 20 से 25 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार में यूरिया देने की व्यवस्था की गई है। हम डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स को तेजी से बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा, एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पूरी खरीद और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया गया है।           कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ वर्ष 2025-26 में दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके साथ ही तिलहन मिशन और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के बीज वितरण से तिलहनी फसलों के क्षेत्र में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक का विस्तार हुआ है। वहीं क्लस्टर विकास, बागवानी के क्षेत्र में फल, सब्जी और मसाला फसलों के लिए क्लस्टर आधारित विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया है। टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती के तहत् 23,050 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया जा चुका है, जिसमें 461 क्लस्टर्स और 922 कृषि सखियों की मदद ली जा रही है। सॉइल हेल्थ के तहत् वर्ष 2025-26 में 2.81 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए। साथ ही, नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने के लिए राज्य के 126 पीएम स्कूलों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं (सॉइल टेस्टिंग लैब्स) स्थापित की जा चुकी हैं।             स्मार्ट इरिगेशन के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप‘ के तहत सूक्ष्म सिंचाई और लागत कम करने के लिए ड्रोन तकनीक व ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम’ (फसल + पशुपालन + मत्स्य + केंटकी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम किसान और पीएम फसल बीमा योजना के डेटा को इंटीग्रेट करके जून से जुलाई 2026 तक विशेष केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) अभियान चलाया जाना प्रस्तावित है। वहीं पीएम आशा योजना के अंतर्गत दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करने की तैयारी है।                    कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मंच के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष कृषि विकास की गति को और तेज करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव और अपेक्षाएं भी रखी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ धान प्रधान राज्य होने के कारण, फसल विविधीकरण को गति देने के लिए केंद्र से एक पृथक प्रोत्साहन नीति की मांग की गई है। साथ ही प्राकृतिक उत्पादों का एमएसपी प्राकृतिक और जैविक खेती के उत्पादों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की व्यवस्था की जाए।            मंत्री नेताम ने सम्मेलन में सप्लाई प्लान और खाद सब्सिडी उर्वरकों की समय पर उपलब्धता के लिए माहवार सप्लाई प्लान के अनुसार खाद प्रदाय की मांग के साथ ही डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में एनपीके की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को छोटे किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष अनुदान का प्रावधान किया जाए। वहीं उर्वरकों की अत्यधिक खपत और बर्बादी को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार उर्वरकों की 25 किलोग्राम की छोटी बोरी तैयार की जानी अपेक्षित है। साथ ही राज्य के आदिवासी बाहुल्य और वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए विशेष कृषि विकास पैकेज तथा डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तकनीकी व आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता प्रदान की जाए।                  इस अवसर पर संचालक कृषि राहुल … Read more

मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात

माफिया अब खुली जीप में पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकताः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात  धार्मिक आयोजन में व्यवधान डालने वाले की रावण व कंस जैसी दुर्गति तयः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री ने कहा, माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सपा सरकार, देखकर छूटता था पसीना सीएम योगी ने जन प्रतिनिधियों की मांग पर घोसी चीनी मिल के विस्तारीकरण के लिए मांगा प्रस्ताव  मऊ/लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ की धरती से माफिया को फिर खुली चुनौती दी। उन्होंने दो टूक कहा कि अब किसी माफिया व गुंडे में दुस्साहस नहीं है कि त्योहारों में उपद्रव कर दे। यदि किसी ने रामलीला, यज्ञ-कथा, जन्माष्टमी, रामनवमी, शिवरात्रि, रक्षाबंधन आदि धार्मिक आयोजनों में व्यवधान डाला तो उसकी रावण व कंस जैसी दुर्गति तय है। किसी ने बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो उसका इंतजार यमराज ही करेंगे। अब कोई माफिया खुली जीप में चलकर पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ के गांधी मैदान में 392 करोड़ से अधिक लागत वाली 114 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने मऊ को क्रांतिधरा बताते हुए साहित्यकार श्याम नारायण पांडेय, समाज सुधारक स्वामी सहजानंद सरस्वती, मऊ को नई पहचान दिलाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने पूर्व राज्यपाल फागू चौहान का भी जिक्र किया और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया।   अच्छी सरकारी देती है विकास, गलत लोग चुनने पर लगती है सुरक्षा में सेंध  मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी सरकार विकास लेकर आती है। यह विकास बिना भेदभाव नागरिकों के जीवन स्तर को उठाने का माध्यम होता है। सड़क या पुल जाति पूछकर नहीं चलने देते, स्वास्थ्य केंद्र जाति पूछकर उपचार और बाढ़ सुरक्षा के कार्य जाति पूछकर बचाव नहीं करते। जब अच्छे लोग चुने जाते हैं तो अच्छी सरकार आती है। जब गलत लोग चुने जाते हैं तो सुरक्षा में सेंध लगती है, जन विकास में लगने वाले पैसे में डकैती और बेटी-व्यापारी की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा होता है।  धार्मिक आयोजनों में व्यवधान पैदा किया जाता था मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश का यही हाल था। जिन लोगों की आयु 30-35 वर्ष से ऊपर है, वे भूले नहीं होंगे कि 21 वर्ष पहले 2005 में भरत-मिलाप कार्यक्रम पर दंगा कर मऊ को जलाने का प्रयास हुआ था। सत्ता के संरक्षण में माफिया रामलीला आयोजन में व्यवधान पैदा कर निर्दोष हिंदुओं का कत्लेआम कर रहे थे। माफिया को देखकर सपा का पसीना छूटता था, इनके मुंह से आवाज नहीं निकलती थी। माफिया के सामने नतमस्तक व नाक रगड़ने वाली सरकार मौन थी और यहां की सुरक्षा खतरे में थी। अराजकता का तांडव था। जनता यदि चंदा जुटाकर रामलीला, रामनवमी, यज्ञ, जन्माष्टमी, शिवरात्रि का आयोजन करती थी तो उसमें व्यवधान पैदा किया जाता था। शोहदे बेटियों का अपहरण करते थे, व्यापारी सूर्यास्त से पहले प्रतिष्ठान बंद करने को मजबूर थे। गरीब, युवा, नारी व किसान का उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लगता है  सीएम योगी ने कहा कि 2014 में जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में देश की बागडोर सौंपी तो सभी ने 12 वर्ष में बदलते भारत को देखा। मोदी जी कहते हैं कि हमारे लिए केवल चार जातियां (गरीब, युवा, नारी व किसान) हैं। इनका उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लग जाएगा और भारत दुनिया की बड़ी ताकत बन जाएगा। उन्होंने दिल्ली में योजनाएं बनाईं, भाजपा शासित राज्यों ने इसे लागू भी किया, लेकिन 2014 से 2017 तक सपा सरकार ने यूपी में उन योजनाओं को लागू नहीं होने दिया। सपा ने गरीबों के लिए शौचालय, आवास, राशन, सड़क नहीं बनने दी।  चार बार सरकार के बावजूद सपा शासन में गरीबों को नहीं मिलीं सुविधाएं  सीएम ने कहा कि आज प्रदेश में 65 लाख गरीबों को आवास, पौने तीन करोड़ गरीबों के घरों में शौचालय, 16 करोड़ गरीबों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। उपदेश देने वाले सपाइयों से पूछिए कि चार बार शासन करने के बाद भी उन्होंने और लगभग 50 वर्ष तक शासन करने वाली कांग्रेस ने यह कार्य क्यों नहीं किया। कांग्रेस-सपा सरकार में उनके गुंडे गरीब का राशन खा जाते थे और गरीब टकटकी लगाकर देखता था। 24 घंटे के भीतर मिलती है 5 लाख की सहायता  सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई है। किसान परिवार या बटाईदार यदि आपदा की चपेट में आ जाता है तो मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत 24 घंटे के अंदर जनप्रतिनिधि पांच लाख रुपये की सहायता राशि उसके घर जाकर देते हैं।  बिना रुके, झुके, थके चल रहे विकास अभियान सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में विकास अभियान बिना रुके, बिना झुके, बिना डिगे, बिना थके चल रहे हैं। हर गरीब के लिए आवास, पानी, सड़क, पुल, बाढ़ से बचाव आदि के प्रयास हो रहे हैं। सड़कें, पर्यटन केंद्र संवर रहे हैं, पुल-पुलिया बन रही हैं। बिजली परियोजनाएं तैयार हो रही हैं। सुरक्षा का माहौल है, नौजवान के लिए नौकरी-रोजगार, बेटी के स्वावलंबन, अन्नदाता किसान के सम्मान के लिए योजनाएं चल रही हैं। विकास का पैसा विकास में और गरीब का पैसा गरीब के पास जा रहा है। सीएम ने नागरिकों से कहा कि वर्तमान को सजाने व संवारने का दायित्व आपके ऊपर है। आपने डबल इंजन सरकार को जिताने में योगदान दिया तो पीएम मोदी के नेतृत्व, मार्गदर्शन में सरकार सफल हुई और इसका श्रेय आपको जाता है।  सीएम ने बताई एक-एक वोट की ताकत सीएम योगी ने एक-एक वोट की ताकत बताई और कहा कि जब किसी देवस्थल का पुनरुद्धार व अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इसका पुण्य भी आपके खाते में जाता है। आपका एक वोट 500 वर्ष की गुलामी के कलंक को धोकर राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण करता है तो बेटी-व्यापारी की सुरक्षा, माफिया को मिट्टी में मिलाकर कर्फ्यू, उपद्रव मुक्त प्रदेश बनाने में योगदान देता है। विकास की यात्रा अनवरत आगे बढ़नी … Read more

किराया नहीं चुकाने वालों पर प्रशासन का एक्शन, हजारीबाग में दुकानें होंगी सील

हजारीबाग. नगर निगम की दुकानों का वर्षों से किराया नहीं चुकाने वाले दुकानदारों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक गई है। करोड़ों रुपये बकाया रहने के बाद नगर निगम प्रशासन सख्त मूड में आ गया है। बुधवार को सहायक नगर आयुक्त विपिन कुमार ने राजस्व संग्रह को लेकर समीक्षा बैठक कर साफ शब्दों में कहा कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि जमा नहीं करने वाले दुकानदारों की दुकानों को सील कर नए सिरे से आवंटन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नगर निगम क्षेत्र के राजस्व संग्रह की समीक्षा बैठक में बताया गया कि शहर के में 21 स्थानों पर लगभग एक हजार से अधिक म्युनिसिपल शॉप संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन दुकानों पर कुल बकाया राशि लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपये पहुंच चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 400 से अधिक ऐसे दुकानदार हैं जिनका किराया दो वर्षों से अधिक समय से लंबित है और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये से अधिक बकाया है। सहायक नगर आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि नगर पालिका अधिनियम 2013 के तहत कार्रवाई करते हुए लंबे समय से बकायेदार दुकानों को सील किया जाएगा। इसके साथ ही उन दुकानों का नया आवंटन करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। निगम प्रशासन के इस सख्त रुख से बकायेदारों में हड़कंप मच गया है। बैठक में विशेष रूप से मटवारी स्थित म्युनिसिपल शॉप की स्थिति पर चिंता जताई गई। यहां लगभग 158 दुकानों पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 51 लाख से अधिक बकाया है। चलेगा राजस्व वसूली अभियान सहायक नगर आयुक्त ने आज शुक्रवार से विशेष राजस्व वसूली अभियान चलाने का निर्देश देते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। साथ ही कहा कि निगम की संपत्तियों का उपयोग कर व्यापार करने वाले दुकानदार यदि समय पर किराया नहीं देंगे तो अब सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में नगर प्रबंधक सह नोडल पदाधिकारी उपेंद्र कुमार, राजस्व निरीक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह, तहसीलदार सूरज कुमार समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।

कोसी नदी के कटाव से खगड़िया का पीपापुल बंद, आवागमन ठप होने से बढ़ी परेशानी

खगड़िया. पसराहा थाना क्षेत्र के पैकात पंचायत को बिरवास के पास जोड़ने वाला कपसिया-बीरवास पीपापुल का एक जेटी मधेपुरा जिला के रतवारा थाना क्षेत्र के कपासिया की ओर से कोशी नदी बढ़ते जलस्तर और कटाव के कारण एप्रोच पथ से बीते गुरुवार को नीचे चला गया जिसके कारण इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के परियोजना अभियंता बबलू कुमार शुक्रवार को इसे चालू करने के लिए पहुंचे किंतु वर्ष के कारण समाचार परेशान तक यह चालू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि एक हाइड्रा मंगाया गया था उससे ऊपर नहीं हुआ दो हाइड्रा मंगा कर इसे ऊपर कर दिया जाएगा। जेटी को खोलकर बीच में एक 12 मीटर का पीपा लगाया जाएगा। इसके बाद जेटी को जोड़ देने से यह चालू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एक जेटी नीचे गया था जिसमें पांच गीडर है वह नीचे चला गया है जो करीब 20 मीटर लंबा है। कोसी में कटवा के कारण ऐसा हुआ है। वह मरमती कार्य को लेकर स्थल पर बने हुए हैं। विभाग की ओर से इस पीपापुल को दुरुस्त कर आगामी 15 जून तक चालू रखने का आदेश दिया है, क्योंकि मानसून की तैयारियों के तहत हर साल 15 जून को इस अस्थायी पुल को हटा लिया जाता है। पैकात पंचायत के मुखिया शिकू पासवान देवठा पंचायत के मुखिया आलोक कुमार ने कि इस पीपा पुल से मधेपुरा खगड़िया भागलपुर की करीब 2 लाख की आबादी का आवागमन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां खगड़िया जिला के गोगरी सर्किल नंबर एक पैकात पंचायत की 15 हजार की आबादी देवठा पंचायत के 10 हजार की आबादी कोयला पंचायत के 15 हजार की आबादी के अतिरिक्त परबत्ता प्रखण्ड के सौर उतरी पंचायत सौर दक्षिणी पंचायत की आबादी तथा भागलपुर जिला के रायपुर आशा टोला आदि के साथ-साथ मधेपुरा जिला की बड़ी आबादी का आवागमन इस मार्ग से होता था जो इस पुल को धसने के बाद से बंद हो गया है। अब उन्हें लंबी दूरी तय करनी होगी गौरतलब है कि इस पीपापुल का उद्घाटन इस वर्ष बीते 28 जनवरी को हुआ था और महज कुछ महीनों के भीतर ही इसके बंद होने से लोगों के सामने आवाजाही का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसकी गुणवत्ता की पोल खोलने लगी है समाचार परेशान तक बिहार राज्य फूल निर्माण विभाग के परियोजना अभियंता बबलू कुमार स्थल पर बने हुए थे उन्होंने कहा कि हाइड्रा मंगाया जा रहा है इसे शीघ्र जोड़कर चालू किया जाएगा

हरियाणा को जल्द मिलेगा नया मुख्य सचिव, अनुराग रस्तोगी के उत्तराधिकारी की दौड़ में 10 IAS

चंडीगढ़. हरियाणा में एक साल के सेवा विस्तार पर चल रहे मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में कई वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों ने मुख्य सचिव पद के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है। वर्ष 1990 बैच के आइएएस अधिकारी अनुराग रस्तोगी को प्रदेश सरकार ने पिछले साल सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले एक साल का सेवा विस्तार दिया था। उनका कार्यकाल अगले महीने समाप्त होने जा रहा है। मुख्य सचिव बनने की दौड़ में दस आइएएस अधिकारी शामिल हैं। इन दावेदारों में से नौ ऐसे अधिकारी हैं, जिनकी इसी साल अथवा अगले साल सेवानिवृत्ति है। ऐसे में सरकार को मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी देने के लिए गंभीर मंथन करना पड़ेगा। मुख्य सचिव पद के सबसे अहम दावेदार 1990 बैच के आइएएस सुधीर राजपाल हैं। राजपाल इसी साल नवंबर माह में सेवानिवृत्त होंगे। सुधीर राजपाल वर्तमान में गृह जैसे संवेदनशील विभाग संभाल रहे हैं। कानून-व्यवस्था, जेल प्रशासन और न्यायिक समन्वय जैसे विभाग सीधे सरकार के कोर प्रशासन से जुड़े होते हैं। वरिष्ठता के आधार पर वे सबसे आगे हैं। दावेदारों में शामिल आइएएस सुमिता मिश्रा दूसरी बड़ी दावेदार 1990 बैच की आइएएस सुमिता मिश्रा हैं। मिश्रा जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगी। इस समय वह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वित्त आयुक्त,स्वास्थ्य विभाग,चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी देख रही हैं। वर्ष 1990 बैच के आइएएस राजा शेखर वुंडरू इस समय परिवहन विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं, लेकिन वह जुलाई 2026 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इस पद के लिए दावेदार 1991 बैच के आइएएस विनीत गर्ग सितंबर 2027 में सेवानिवृत्त होंगे और वर्तमान में उनके पास प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी विभाग की जिम्मेदारी है। 1991 बैच के आइएएस अनिल मलिक अप्रैल 2028 में सेवानिवृत्त होंगे। मलिक वर्तमान में केंद्र में सेवाएं दे रहे हैं। इसी बैच की आइएएस अधिकारी जी अनुपमा नवंबर 2027 में सेवानिवृत्त होंगी। वर्तमान में वह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग,नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी देख रही हैं। सेवानिवृत्त की लिस्ट में अपूर्व कुमार शामिल 1991 बैच के ही अपूर्व कुमार सिंह अक्टूबर 2027 में, केंद्र में सेवाएं दे रहे अभिलक्ष लिखी अक्टूबर 2026 में, 1992 बैच के आइएएस अरुण कुमार गुप्ता सितंबर 2026 में तथा 1993 बैच के आइएएस वी उमाशंकर जून 2028 में सेवानिवृत्त होंगे। उमाशंकर वर्तमान में सचिव, सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की जिम्मेदारी देख रहे हैं। उक्त सभी अधिकारी वरिष्ठता के आधार पर मुख्य सचिव पद के लिए प्रबल दावेदार हैं। अब सरकार द्वारा एक पैनल बनाकर बहुत जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।