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पुलिस, सिविल सोसायटी एवं एनजीओ के समन्वय से न्याय सुलभता और जनसुरक्षा को और प्रभावी बनाने पर मंथन

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आज 08 सितंबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में ‘संबल—न्याय सुलभता, समाज कार्य एवं सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव रहे। विशिष्ट अतिथियों में कमिश्नर उच्च शिक्षा विभाग प्रबल शिपहा, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव, कानूनविद् एवं विशेष वक्ता श्रीमती रचना त्यागी, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा की प्रो. सारिका सिन्हा, मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार तथा उप पुलिस महानिरीक्षक, सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘संबल’ नाम से सामुदायिक सुरक्षा पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें आपराधिक न्याय क्षेत्र में कार्यरत समुदाय-आधारित गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के कार्यों व अनुभवों को साझा किया गया था। इस पहल में सामाजिक कार्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी जोड़ा गया, ताकि पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के बीच स्थायी समन्वय एवं सहयोग का मॉडल विकसित किया जा सके। UNFPA के सहयोग से आयोजित वर्तमान सम्मेलन उसी दिशा में एक अगला कदम है, जिसका उद्देश्य पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था, विधिक सेवाओं, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय विकसित कर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं अपराध के पीड़ितों तक न्याय और सहायता की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाना है। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के 75 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों, बाल संरक्षण से जुड़े पुलिस अधिकारियों, जिला पुलिस प्रमुखों, सामुदायिक पुलिसिंग अधिकारियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, अभियोजन अधिकारियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्य एवं विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव ने सामुदायिक पुलिसिंग को पुलिसिंग का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा पुलिस एवं गैर-शासकीय संगठनों के बीच स्थायी एवं संस्थागत समन्वय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के कार्यक्रम के बाद प्रदेश में सक्रिय गैर-शासकीय संगठनों की जानकारी संकलित कर पुलिस अधिकारियों एवं इकाइयों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिला, बच्चे, बुजुर्ग, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर तथा अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को पुलिस कार्रवाई के साथ आश्रय, उपचार, पुनर्वास एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कमजोर एवं वंचित वर्गों की सुरक्षा, सामाजिक सहयोग और विश्वास निर्माण से भी जुड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास, महिला-बाल सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनजीओ पुलिस के प्रभावी सहयोगी बन सकते हैं। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए एनजीओ के प्रयासों को आंतरिक सुरक्षा एवं विश्वास निर्माण का उदाहरण बताया तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित व्यक्तियों के संरक्षण-पुनर्वास और घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को सहायता में पुलिस-एनजीओ समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। महिला सशक्तिकरण योजनाओं के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कर घरेलू हिंसा एवं महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में कमी का आकलन करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों तथा प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बड़े धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं जनसुरक्षा में उनकी सहभागिता को आवश्यक बताया। वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ के लिए अभी से प्रशिक्षण, योजना एवं समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार ने कहा कि पुलिस जब थाने या कार्यालय में होती है, तो सामान्यतः उसके सामने किसी विवाद के दो पक्ष होते हैं—पीड़ित और आरोपी। दोनों पक्षों को संतुष्ट करना कठिन होता है। इसके विपरीत, समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने से ऐसी कई स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल जाती है, जिनका समाधान कम प्रयास में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोहल्लों में खुले में नशा करना, अवैध शराब की गतिविधियां, महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थान, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा अथवा किसी स्थान पर लगातार होने वाली दुर्घटनाएं जैसी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी शिकायत प्रायः थाने या पुलिस कार्यालय तक नहीं पहुंचती। समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहभागिता से पुलिस को इन समस्याओं की जमीनी जानकारी मिलती है और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। संजय कुमार ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग में पुलिस, नागरिक, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संगठन तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर कार्य करते हैं। इससे जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने, आपसी गलतफहमियां दूर करने और पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, कम्युनिटी सेफ्टी वॉलंटियर्स, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों एवं लगभग 93 गैर-शासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि न्याय की सुलभता केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध की संभावना कम करने तथा पीड़ित एवं जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है। डॉ कपूर ने POCSO Act एवं किशोर न्याय व्यवस्था में सपोर्ट पर्सन, चाइल्ड केयर संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिक समाज की सहभागिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए महिलाओं एवं अन्य वंचित वर्गों के लिए सहयोग तंत्र मजबूत करने तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के उन्मूलन के साथ प्रभावित बालिकाओं के लिए संरक्षण एवं वैकल्पिक सहयोग व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि हाल ही में संचालित “सेफ क्लिक” एवं “नशे से दूरी है जरूरी” अभियानों में ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, गैर-शासकीय संगठनों तथा पुलिस के विभिन्न प्रभागों ने सक्रिय सहभागिता की। इन अभियानों के माध्यम से … Read more

पहली बार लोकरंग पर्व में दिखी सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक, पंथी और नाचा-गम्मत ने भी मोहा दर्शकों का मन

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने वाले तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का तीसरा एवं अंतिम दिन सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति के नाम रहा। पहली बार लोकरंग पर्व के मंच पर जशपुर अंचल के सरहुल एवं करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की मधुरता और कलाकारों के ऊर्जावान नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया। कार्यक्रम में विजय कुमार भगत, जशपुर के दल द्वारा सरहुल एवं करमा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी लोकजीवन, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं से जुड़े इन लोकनृत्यों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, पारंपरिक लय और आकर्षक वेशभूषा ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया। इसके साथ ही रायपुर के डॉ. रामनारायण नेताम ने आदिवासी लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। नवलदास मानिकपुरी, दुर्ग ने लोकगीत-संगीत से समां बांधा। वहीं सुआरती बारले, भिलाई ने पंथी नृत्य की ऊर्जापूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सुरमादत्त जोशी, रायपुर की नाचा-गम्मत की प्रस्तुति ने हास्य, मनोरंजन और लोकनाट्य के रंगों से कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया। लोककलाओं को मंच देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी : डॉ. कन्नौजे लोकरंग पर्व के समापन अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर जनजातीय अंचलों सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्थानीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ प्रोत्साहन और सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लोकरंग पर्व जैसे सांस्कृतिक आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध और सुघर लोकसंस्कृति को सहेजने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने के साथ ही विलुप्त होती लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्रोत्साहन मिलता है। लोकविरासत के विविध रंगों का संगम बना लोकरंग तीन दिनों तक चले लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों की लोकसंस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को मंच मिला। अंतिम दिन सरहुल, करमा, आदिवासी लोकगीत, पंथी और नाचा-गम्मत जैसी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोकपरंपराओं में निहित है। कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। लोकरंग पर्व का अंतिम दिन दर्शकों के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की विविधता और जीवंतता को करीब से अनुभव करने का अवसर बना। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। आयोजन ने एक ओर जहां लोककलाकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने, संवारने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सार्थक संदेश दिया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के मानदेय वृद्धि का शासनादेश जारी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के अनुपालन में शासन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि का शासनादेश जारी कर दिया है। मंगलवार को अपर मुख्य सचिव, महिला कल्याण एवं बाल विकास लीना जौहरी ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के राज्यांश में 4,000 रुपये प्रतिमाह और सहायिकाओं के राज्यांश में 2,000 रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त वृद्धि की गई है। इसके बाद कार्यकर्ताओं को कुल 12,000 रुपये और सहायिकाओं को 6,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।     राज्यांश में फिक्स्ड व वैरिएबल पीएलआई शामिल शासनादेश के अनुसार, कार्यकर्ताओं के राज्यांश में 1,500 रुपये अतिरिक्त फिक्स्ड मानदेय तथा 2,500 रुपये अतिरिक्त वैरिएबल पीएलआई मानदेय की वृद्धि की गई है। सहायिकाओं के राज्यांश में 750 रुपये अतिरिक्त फिक्स्ड मानदेय और 1,250 रुपये अतिरिक्त वैरिएबल पीएलआई मानदेय बढ़ाया गया है। वर्तमान में भारत सरकार के मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि तथा राज्य सरकार के अतिरिक्त मानदेय को मिलाकर कार्यकर्ताओं को 8,000 और सहायिकाओं को 4,000 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं।   सितंबर से लागू, अक्टूबर में भुगतान शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से प्रभावी होगा और इसका भुगतान अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। यह निर्णय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के बढ़े कार्य-दायित्व, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), पोषण सेवाओं, डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं के अभिसरण में उनकी भूमिका को देखते हुए लिया है। निदेशक को कार्रवाई के निर्देश   अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने निदेशक, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार हर्षिता माथुर को शासनादेश के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस व्यवस्था में किसी भी बदलाव का निर्णय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के अनुमोदन के अधीन होगा।

मुख्यमंत्री योगी ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं व बच्चों का बढ़ाया हौसला

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘आंगनवाड़ी की आवाज स्वस्थ बच्चा-शिक्षित समाज’ के तहत अयोध्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, मेधावी बच्चों तथा पोषण, शिक्षा एवं महिला कल्याण से जुड़ी उत्कृष्ट अधीक्षिकाओं को सम्मानित किया। उन्होंने नव नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र का वितरण भी किया। बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरित किए गए। साथ ही 2,51,162 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.11 करोड़ रुपये की धनराशि अंतरण किया। इस दौरान ‘नवीन टेक होम राशन’ (टीएचआर) कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी हुआ।   इनका किया गया सम्मान व दिया गया चेक, साड़ी, प्रशस्ति पत्र आदि  बढ़े हुए मानदेय का चेक वितरण  सुनीता पांडेय – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  सोनी साहू – आंगनवाड़ी सहायिका साड़ी वितरण  ममता पांडेय – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  नीलम यादव – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  अर्चना मिश्रा – आंगनवाड़ी सहायिका  सोनी साहू – आंगनवाड़ी सहायिका नव नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र का वितरण ज्योति निषाद – आंगनवाड़ी सहायिका अमृता निषाद – आंगनवाड़ी सहायिका अति कुपोषित श्रेणी से सामान्य पोषण स्थिति प्राप्त करने वाले बच्चों तथा संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान अनाया पुत्री  आरती परी कन्नौजिया पुत्री  सारिका  मिथलेश कुमारी (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित संवासिनी गृह के निवासरत बच्चों द्वारा शिक्षा संस्थान में उत्कृष्ट परिणाम के अंतर्गत मोहिनी पाल (इंटर में 82.02 प्रतिशत अंक) – प्रशस्ति पत्र व बैग भाविनी शर्मा (हाईस्कूल में 89.16 प्रतिशत अंक) – प्रशस्ति पत्र व बैग देवेश यादव (हाईस्कूल में 77 प्रतिशत अंक) – प्रशस्ति पत्र व बैग महिला कल्याण विभाग की उत्कृष्ट विभागीय सेवाओं हेतु सम्मान  सफलता (अधीक्षिका राजकीय बाल गृह बालिका, लखनऊ) – प्रशस्ति पत्र  नीतू सिंह (पर्यवेक्षक राजकीय बाल गृह बालिका, प्रयागराज) – प्रशस्ति पत्र बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत माउंट एवरेस्ट बेस कैंप का विजय अभियान करने वाली बालिकाएं नीलांशु – प्रशस्ति पत्र व बैग प्रियंका उपाध्याय – प्रशस्ति पत्र व बैग प्रियंका प्रजापति – प्रशस्ति पत्र व बैग वहीं आईआरएफसी नई दिल्ली के श्वेतकेतु मिश्रा (चीफ जनरल मैनेजर) व अवनीश प्रकाश ने दो करोड़ रुपये के सीएसआर के जरिए जनपद के 1,250 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री स्कूल किट उपलब्ध कराई। भारत केयर्स के सीईओ भोमिक शाह ने 5 हजार छात्राओं को स्कॉलरशिप दी और जगमग अयोध्या कार्यक्रम का क्रियान्वयन कराया। इन्हें भी सीएम योगी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

सहकारिता मंत्री ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा

रायपुर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न हुई।     मंत्री केदार कश्यप ने बैठक में सहकारिता के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। हमारा मुख्य ध्येय प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के माध्यम से अंतिम व्यक्ति और प्रदेश के प्रत्येक किसान तक शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना है।  को-ऑपरेटिव सेक्टर पर केन्द्रीत काफी-टेबल बुकलेट का किया विमोचन  बैठक में मंत्री कश्यप ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से किसानों का भरोसा सहकारिता प्रणाली पर और मजबूत होगा। उन्होंने को-आपरेटिव बैंको में रिक्त पदों की समीक्षा की। उन्होंने रिक्त पदों की भर्ती की कार्यवाही तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में मंत्री ने सहकारी सप्ताह 29 जून से 06 जूलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ में को-ऑपरेटिव सेक्टर में आयोजित विविध कार्यक्रम पर केन्द्रीत काफी-टेबल बुकलेट का विमोचन किया गया। पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने दिए निर्देश   बैठक में मंत्री कश्यप ने अधिकारियों, प्रबंध संचालकों, संभागीय संयुक्त आयुक्तों, उप/सहायक आयुक्तों तथा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए ताकि वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे। 16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपए का ऋण वितरित  मंत्री कश्यप ने अल्पकालीन कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान, समय पर उर्वरक (खाद), बीज एवं ऋण वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसानों को कोआपरेटिव्ह बैंको के माध्यम से चालू खरीफ सीजन 2026 हेतु 8800 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 90 प्रतिशत है। बैठक में मंत्री कश्यप द्वारा अधिकारियों को शत-प्रतिशत कृषि ऋण वितरण के निर्देश दिया गया। ग्रामीण अंचलों में कॉमन सर्विस सेंटर का विस्तार करने तथा माइक्रो ए.टी.एम. की उपलब्धता बढ़ाकर डिजिटल बैंकिंग को सुलभ बनाने पर बल दिया गया। 718 गोदामों का निर्माण पूर्ण मंत्री कश्यप ने 100 सोसायटियों में गोदाम निर्माण व त्प्क्थ् योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई, साथ ही नवगठित 515 पैक्स के सुचारू संचालन के निर्देश दिए गए। बैठक में आराईडीएफ अंतर्गत  आबंटित 725 गोदामों में 718 गोदामों के निर्माण पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। शेष 7 गोदाम के जल्द ही निर्माण पूर्ण किये जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया। अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों को दिलाने निर्देश  सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, न्यायालयीन मामलों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने तथा कार्यालयों में ई-ऑफिस और आधार-बेस्ड उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए। धान उपार्जन केंद्रों में शेष बचे धान का शीघ्र एवं पारदर्शी तरीके से अंतिम निराकरण करने के आदेश दिए गए। बैठक के अंत में मंत्री कश्यप ने सभी विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र से जुड़े आम नागरिकों तक पहुंचाने का निर्देश दिये।  इस अवसर पर सचिव सहकारिता डॉ सी.आर प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाएं रमेश शर्मा, अपेक्स बैंक महाप्रबंधक एवं प्रभारी प्रबंध संचालक युगल किशोर, अपर पंजीयक यू बीएस राठिया, अपर पंजीयक श्रीमती सावित्री भगत व सहकारिता विभाग व अपेक्स बैंक के अधिकारीगण तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ उपस्थित थे।

डिप्टी सीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश जारी करने की प्रक्रिया

लखनऊ उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। अब सरकारी चिकित्सक सेवानिवृत्ति के बाद 70 वर्ष की आयु तक पुनर्नियुक्ति के माध्यम से अपनी सेवाएं दे सकेंगे। वर्तमान व्यवस्था के तहत सरकारी डॉक्टर 65 वर्ष की आयु तक सेवाएं दे रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव स्तर से इस संबंध में आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं लंबे समय तक उपलब्ध होने से मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श और बेहतर उपचार की सुविधा मिल सकेगी। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी इस पहल से राहत मिलेगी।  उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख चिकित्सकीय संवर्ग है। इसमें चिकित्सा अधिकारी एवं विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं, जो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद योग्य एवं अनुभवी चिकित्सकों को 70 वर्ष की आयु तक सेवाएं देने का अवसर मिलने से उनके लंबे अनुभव का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा।  अधिक सक्षम बनेंगी स्वास्थ्य सेवाएं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि इस निर्णय से विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी वाले चिकित्सकीय विभागों में यह व्यवस्था प्रभावी साबित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में भी अनुभवी डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति के बाद 70 वर्ष की आयु तक पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य अनुभवी चिकित्सकों की विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग करते हुए प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सक्षम, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाना है।

उपभोक्ता संघ के माध्यम से मिलेगा ग्लूटेन फ्री गेहूं बीज : मंत्री सारंग

भोपाल  सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ता संघ के माध्यम से ग्लूटेन फ्री गेहूं बीज उपलब्ध कराया जाए। मंत्री  सारंग मंगलवार को मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित के संचालक मंडल की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में बीज संघ मुख्यालय के कार्यालय के लिए अन्यत्र स्थान पर भवन लेने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि 6 माह के अंदर बीज संघ का नया ऑफिस हो, इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए। मंत्री  सारंग ने संघ की वित्तीय गतिविधियों के आकलन के लिए आउटसोर्स से चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवाएं लेने को भी कहा। उन्होंने संघ के बायलॉज को समिति बनाकर रिव्यू करने के निर्देश दिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि बीज संघ बिजनेस मॉड्यूल पर काम करें। बीज संघ व्यावसायिक सोच के साथ आगे बढ़े, इसके लिए आकर्षित करने वाला प्लान तैयार करें। उन्होंने संघ की गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से भी एक्टिविटी करने के लिए एजेंसी हायर करने के निर्देश दिए। बैठक मे प्रबंध संचालक  एम.के. दीक्षित द्वारा बिन्दुवार विषयों को प्रस्तुत किया गया। बैठक के दौरान हाइब्रिड मक्का एवं उद्यानिकी (सब्जी) बीज तथा ग्लूटेन फ्री गेहूं के बीज उत्पादन, विपणन एवं निजी क्षेत्र की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कीमत पर उपलब्ध कराने के संबंध में संचालक मण्डल को अवगत कराया गया। संचालक मण्डल द्वारा उक्त कार्य की सराहना करते हुए और अधिक हाईब्रिड फसलों के उत्पादन कार्यक्रम लेने, ग्लूटेन फ्री गेहूं एवं सब्जी बीज के विक्रय के लिये उपभोक्ता सहकारी संघ एवं अन्य संस्थानों से एमओयू निष्पादित करने का निर्णय लिया गया। बैठक के दौरान मंत्री  सारंग द्वारा बीज संघ के नवीन क्षेत्रों में व्यवसाय विकसित करने के लिए निर्देशित किया गया। बीज संघ के व्यवसाय विविधीकरण के लिए व्यवसाय विशेषज्ञ एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों को शामिल करते हुए संघ की उपविधियों में वांछित संशोधन का सुझाव प्रस्तुत करने बाबत कमेटी गठित करने के निर्देश दिये गये, जिससे प्रदेश के कृषकों को प्रमाणित, हाइब्रिड एवं उघानिकी की फसलों के लिये सभी प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा सके। संचालक मंडल की बैठक में आगामी आमसभा मे प्रस्तुत किये जाने वाले विषयों का अनुमोदन किया गया। बैठक के दौरान बीज संघ में कार्यरत कर्मचारियों के हित मे भी विभिन्न निर्णय लिये गये।  

टीम में शामिल रहे डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी और एक्टर शोभिनव समेत सभी प्रमुख सदस्य

लखनऊ फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। टीम में फिल्म के निर्माता, निर्देशक व सभी प्रमुख कलाकार शामिल रहे। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और मुख्य अभिनेता शोभिनव ने सीएम योगी को फिल्म के विषय और इसकी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ जी की पावन पंक्तियों और नाथ संप्रदाय से जुड़े फिल्म के अहम दृश्यों को देखा। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि फिल्म में परम पूज्य बाबा नीब करौरी और नाथ संप्रदाय के सिद्ध संतों की ऐतिहासिक मुलाकातों का विशेष चित्रण किया गया है। शोध बताते हैं कि अपने शुरुआती दौर में बाबा नीब करौरी लंबे समय तक नाथ संप्रदाय के संतों के सान्निध्य में रहे थे, जहां से उन्होंने दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्तियों को ग्रहण किया था। सीएम योगी ने फिल्म एवं इसके निर्माण से जुड़े सभी सदस्यों के प्रयासों को सराहा और अपनी शुभकामनाएं भी दीं। गौरतलब है कि फिल्म 'हनुमान अंश' प्रसिद्ध संत बाबा नीब करौरी (नीम करौली बाबा) के जीवन और उनकी हनुमान भक्ति पर आधारित है। कम बजट में बनी इस फिल्म को दर्शकों का भारी समर्थन मिल रहा है।

किसानों के लिए बड़ी सुविधा, ऐप से बुक करें खाद और QR कोड दिखाते ही मिलेगा उर्वरक

पूर्णिया  किसानों को अब खाद के लिए उर्वरक दुकानों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। किसान अब ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के नाम से डिजिटल प्रणाली विकसित किया गया है। इसके तहत किसान घर बैठे मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकेंगे। इसके लिए किसान की फार्मर आईडी होना अनिवार्य है। मोबाइल ऐप पर आधार संख्या और ओटीपी के माध्यम से किसान की पहचान का सत्यापन होगा। ऐप पर किसान अपने खेत और फसल का विवरण दर्ज कर आसानी से मोबाइल से ही खाद की बुकिंग कर रहे हैं। बुकिंग के बाद मोबाइल पर मिलने वाले क्यूआर कोड को अधिकृत विक्रेता के पास स्कैन कराने पर तुरंत खाद उपलब्ध कराई जाएगी। कृषि कर्मियों को दी गई है जागरूकता की जिम्मेदारी अधिकारियों का मानना है कि इससे खाद के वितरण में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था को लेकर किसानों को जानकारी देने की जिम्मेदारी पंचायत एवं प्रखंड स्तर के कृषि कर्मियों को दी गई है। किसान सलाहकार, कृषि फसल की जानकारी ऐप में दर्ज करेंगे तो उसके अनुसार उर्वरक की उचित मात्रा ऐप पर दिखेगी। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, उन्हें पहले इसे बनवाना होगा। फार्मर आईडी बनने के बाद किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल बुकिंग शुरू होने के बाद खाद की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी पहले से अधिक प्रभावी होगी। बटाइदार भी कर सकेंगे खाद का उठाव जिन किसानों की जमीन उनके नाम पर दर्ज है, वे आसानी से इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे। जिन किसानों के पूर्वजों के नाम जमीन दर्ज है या जिनका नाम जमाबंदी में नहीं है, उनके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्मर आईडी बनाने की व्यवस्था की गई है। संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन समेत जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी नहीं बनी है, जो बटाईदार हैं या फिर सामुदायिक, मंदिर, सरकारी अथवा संस्थागत जमीन पर खेती करते हैं, उनके लिए भी इस निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद लेने की पूरी व्यवस्था की गई है। विभिन्न प्रकार की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस व्यवस्था से जुड़ सकेंगे। जिले में ऐप के माध्यम से एक सितंबर से खाद की बुकिंग शुरू हो गई है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार अनुशंसित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और पूरी बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। जिले में अब तक 4,846 किसानों ने ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग की है जिन्हें नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। – विजय प्रकाश, जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्णिया  

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति, केंद्र ने जारी की अधिसूचना

 बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद केंद्र सरकार ने संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार की छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने मंगलवार को नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी कर दी। तीनों की नियुक्ति उनके संबंधित पद का कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को हुई बैठक में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में तीन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की अनुशंसा की थी। कॉलेजियम के आधिकारिक रिकॉर्ड में संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार के नाम दर्ज हैं। हाई कोर्ट में पदोन्नयन महत्वपूर्ण संतोष शर्मा वर्तमान में कोरबा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में पदस्थ हैं। सुषमा सावंत छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर की निदेशक हैं, जबकि सुधीर कुमार रायपुर के परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के पद पर हैं। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की आधिकारिक न्यायिक अधिकारियों की सूची में तीनों के वर्तमान पद दर्ज हैं। तीनों अधिकारियों के उच्च न्यायिक सेवा में लंबे अनुभव को देखते हुए उनका हाई कोर्ट में पदोन्नयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त की बैठक में देश के विभिन्न हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्तावों पर विचार किया था। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम मंजूर किए गए थे। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के स्तर पर प्रक्रिया में था। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से तीनों के हाई कोर्ट न्यायाधीश बनने का रास्ता साफ हो गया है।