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मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने सोमवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के बंडा क्षेत्र में अवैध शराब सेवन से प्रभावित मरीजों से मिले। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।  देवड़ा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं तथा पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे प्रकरण में कठोर कार्रवाई करने की बात की है।  देवड़ा ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी शराब दुकानों की जांच, स्टॉक की नियमित निगरानी तथा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच करें और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें। उपमुख्यमंत्री  देवड़ा को जानकारी दी गई कि अवैध शराब से प्रभावित एवं उपचाररत मरीजों का ध्यान रखा जाये। ईलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाये। एक गंभीर मरीज को भोपाल एम्स भेजा गया है। अधिकांश मरीजों की स्थिति अब स्थिर है। जानकारी दी गई की थाना बंडा में भारतीय न्याय संहिता और मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 30 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।   उप मुख्यमंत्री मरीज और उनके परिजनों से मिले उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने सोमवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचकर आईसीयू एवं क्रिटिकल केयर वार्ड में भर्ती मरीजों मिले। उन्होंने उनके स्वास्थ्य की जानकारी डॉक्टरों से प्राप्त कर निर्देश दिये कि ईलाज की सभी व्यवस्था की जाये। मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिजनों से भी चर्चा कर उन्हें आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम 24 घंटे उपलब्ध रहे तथा दवाओं, उपकरणों और अन्य चिकित्सा संसाधनों की कोई कमी न होने दी जाए। 

सिलाई, किराना दुकान से लेकर बटेर-मुर्गी पालन और हैचरी तक आजीविका की कई गतिविधियां

रायपुर  छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को स्थायी आजीविका का माध्यम बना रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी की मती रानू कैवर्त ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने मेहनत, हुनर और बिहान से मिले सहयोग के बूते आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। कभी सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने वाली रानू कैवर्त आज अपने गांव में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव के रूप में उन्होंने समूह से मिले मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग का बेहतर उपयोग करते हुए आजीविका की अनेक गतिविधियों को अपनाया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि अब विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है। एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आमदनी रानू कैवर्त ने आत्मनिर्भर बनने के लिए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कई गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाया। उनके समूह द्वारा सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन गतिविधियों ने परिवार के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए हैं। सिलाई कार्य और कपड़ों की दुकान से जहां उन्हें अपने हुनर को आय में बदलने का अवसर मिला, वहीं किराना दुकान तथा पशु-पक्षी पालन से आमदनी के अतिरिक्त साधन तैयार हुए। हैचरी और देशी मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों ने उनके व्यवसाय को और विस्तार दिया। अलग-अलग गतिविधियों को आपस में जोड़कर रानू ने ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग किया है। बिहान से मिला अवसर, मेहनत ने बदली तस्वीर रानू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। बिहान से प्राप्त आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और समूह की सामूहिक शक्ति ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। उन्होंने इस सहयोग को अपनी मेहनत और लगन से जोड़ा और धीरे-धीरे आजीविका के कई साधन विकसित किए। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि अवसर, संसाधन, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं। रानू का प्रयास अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर अपने हुनर को आजीविका में बदलने के लिए प्रेरित कर रहा है। महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त संबल रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना के तहत प्रत्येक माह मिलने वाली आर्थिक सहायता का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। नियमित आर्थिक सहयोग से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे उनके आर्थिक आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है और वे अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार रानू कैवर्त ने अपनी सफलता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और बिहान से मिले सहयोग ने उनके जैसे ग्रामीण परिवारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। आज वे अपने हुनर और मेहनत के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। रानू कैवर्त की सफलता ग्रामीण छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां सरकारी योजनाओं का सहयोग, स्व-सहायता समूह की सामूहिक शक्ति और महिलाओं की मेहनत एवं उद्यमशीलता मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं। ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में बढ़ते रानू के कदम यह संदेश देते हैं कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक बदलाव की मजबूत वाहक बन सकती हैं।

रसोई गैस को लेकर बड़ी राहत, ग्रामीण-शहरी उपभोक्ताओं के लिए LPG रिफिल बुकिंग अंतर हुआ समान

 पटना  गांव में रसोई गैस जल्दी खत्म हो जाए तो अगला सिलेंडर बुक कराने के लिए 45 दिन का इंतजार… यह परेशानी अब दूर होगी। ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी रिफिल बुकिंग का अंतर अब एक समान 25 दिन कर दिया गया है। यानी पिछली रिफिल की डिलीवरी के 25 दिन बाद ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता भी अगला सिलेंडर बुक करा सकेंगे। अब तक ग्रामीण वितरकों से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग का अंतर 45 दिन था। ऐसे में चार-पांच सदस्यों वाले परिवार में गैस जल्दी खत्म होने पर उपभोक्ताओं को बुकिंग की निर्धारित अवधि पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता था। कई उपभोक्ताओं को इस दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है गांव में भी शहर जैसी सुविधा एलपीजी उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बुकिंग अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 25 दिन बाद रिफिल बुक कराने की सुविधा थी, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिन इंतजार करना पड़ता था। अब दोनों के लिए 25 दिन का समान अंतराल होने से यह अंतर समाप्त हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की खपत परिवार के आकार और खाना पकाने की जरूरत पर निर्भर करती है, क्षेत्र पर नहीं। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी समान बुकिंग व्यवस्था होने से उन्हें समय पर रिफिल मिल सकेगा। पटना में घरेलू सिलेंडर 1031.50 रुपये पटना में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1031.50 रुपये है। सितंबर में घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 3034.50 रुपये बताई गई है। उपभोक्ताओं के लिए बदलाव एक नजर में व्यवस्था पहले अब ग्रामीण क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 45 दिन 25 दिन शहरी क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 25 दिन 25 दिन पटना में घरेलू सिलेंडर 14.2 किलो 1031.50 कमर्शियल सिलेंडर 19 किलो 3034.50

लखनऊ ने रचा इतिहास, स्वच्छ हवा के मामले में देशभर में पहला स्थान; मिला ₹1.50 करोड़ का पुरस्कार

लखनऊ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ ने देशभर में पहला स्थान हासिल कर राजधानी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित स्वच्छ वायु दिवस कार्यक्रम में लखनऊ को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत नेशनल बेस्ट परफॉर्मिंग सिटी रैंक-1 का सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही नगर निगम के जोन-4 स्थित वार्ड संख्या-70 (पेपर मिल) को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया। सम्मान समारोह में महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव और पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने पुरस्कार प्राप्त किया। लखनऊ को प्रथम स्थान के साथ 1.50 करोड़ रुपये और वार्ड-70 को 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा तथा पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह सम्मान प्रदान किया। स्वच्छ वायु के क्षेत्र में किए गए कार्यों के मूल्यांकन के बाद लखनऊ को देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला शहर घोषित किया गया। प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का मिला पुरस्कार नगर निगम ने पिछले वर्षों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया। डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1100 इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारा गया। इनके संचालन की निगरानी जीपीएस आधारित कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग ढांचे का भी विस्तार किया गया। धूल कम करने के लिए मशीनों का सहारा सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं। प्रमुख मार्गों पर नियमित सफाई और पानी का छिड़काव किया गया। वहीं 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का कर धूल प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम किया गया। कचरा प्रबंधन बना सफलता की बड़ी वजह शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था विकसित की गई। ताजा कचरे की डंपिंग बंद कर दी गई है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था और 300 टीपीडी क्षमता का संयंत्र भी संचालित किया जा रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण में उल्लेखनीय मदद मिली। हरियाली और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, वर्टिकल गार्डन विकसित करने, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाने और यातायात सुधार के लिए भी व्यापक काम किया गया। वर्तमान में शहर में 140 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई, नालों की सफाई और नदियों में कचरा जाने से रोकने जैसे कदम भी उठाए गए। महापौर बोलीं- यह पूरे लखनऊ की उपलब्धि महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना पूरे शहर के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, नगर विकास मंत्री के मार्गदर्शन, नगर निगम की टीम की मेहनत और शहरवासियों के सहयोग को दिया। इन पांच कारणों से नंबर-1 बना लखनऊ — 1100 इलेक्ट्रिक कूड़ा वाहन सड़क पर उतारकर डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाई गई। — 97 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों से सड़क की धूल नियंत्रित की गई और नियमित पानी का छिड़काव कराया गया। — 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा निस्तारण की व्यवस्था लागू कर ताजा कचरे की डंपिंग बंद की गई। — 559.85 किलोमीटर सड़कों का पक्कीकरण कर उड़ती धूल और प्रदूषण को कम किया गया। —हरियाली, इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया गया।

उदयपुर की हवा हुई जहरीली! 6 साल में सबसे खराब AQI, लोगों के लिए बढ़ा खतरा

 उदयपुर उदयपुर शहर की आबोहवा छह साल में इस अगस्त जितनी जहरीली कभी नहीं रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021 से 2025 तक शहर की हवा ज्यादातर दिन मॉडरेट यानी सामान्य श्रेणी में दर्ज हुई थी। पिछले साल अगस्त में पूरे 31 दिन सामान्य रहे, 2023 और 2024 में भी 90 फीसदी से ज्यादा दिन मॉडरेट में गुजरे। पर, बीते अगस्त ने रुझान पूरी तरह तोड़ दिया। यही नहीं सितंबर के पहले सप्ताह में भी हवा गुणवत्ता खराब बनी हुई है। आमतौर पर दिवाली के आसपास प्रदूषण का जो स्तर होता है, वह इन दिनों है। इस साल के अगस्त के 31 दिनों में से 23 दिन खराब और सात दिन सीधे हानिकारक श्रेणी में रहे हैं। यानी हर तीसरा दिन ऐसा रहा, जब सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इसके उलट, अच्छी श्रेणी का एक भी दिन बीते अगस्त में दर्ज नहीं हुआ, जबकि 2024 में तीन और 2022 में एक दिन इस श्रेणी में मिला था। 2021 में भी 25 दिन खराब श्रेणी में रहे थे, लेकिन उस साल एक भी दिन हानिकारक स्तर तक नहीं पहुंचा था। जबकि इस साल सात दिन इस निशान को पार कर गए। इसलिए मनाया जाता है इंटरनेशनल डे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2019 में यह दिवस घोषित किया था, जो पहली बार 7 सितंबर 2020 को मनाया गया। इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता बढ़ाना और साफ हवा के लिए प्रेरित करना है। ऐसी हवा, जिसमें प्रदूषण का स्तर इतना कम हो कि इंसान स्वस्थ हवा में सांस ले सके। इस बात पर जोर दिया जाता है कि साफ दिखाई देने वाला आसमान हमेशा साफ हवा की गारंटी नहीं है। सबसे भारी रहे ये दिन बीते अगस्त में 28 तारीख को सबसे ज्यादा (168 एक्यूआई) दर्ज हुआ, जो महीने का सबसे प्रदूषित दिन रहा। इसके अलावा 20 से 24 अगस्त के बीच लगातार 5 दिन शहर हानिकारक श्रेणी में झेलता रहा। पिछले पांच सालों में ऐसा कोई लगातार दौर सामने नहीं आया है। ऐसे समझें AQI कितना खराब और कितना अच्छा     0-50 तक अच्छा     51-100 तक सामान्य     101-150 तक खराब     151-200 हानिकारक     201-300 तक बेहद खराब     301 से ऊपर खतरनाक वर्षवार अगस्त में एक्यूआई (दिनों की संख्या) वर्ष        अच्छा    सामान्य    खराब    हानिकारक 2021    00            05           25         01 2022    01              23         07         00 2023    00              30           01       00 2024    03              28           01        00 2025    00             31           00          00 2026    00            01           23           07 नोट: बेहतर खराब और खतरनाक श्रेणी के दिनों को शामिल नहीं किया गया है। इनका कहना है… इस साल बरसात नहीं होना सबसे बड़ा कारण है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में देर तक टिके हुए हैं। साथ ही पूर्व में हुई बरसात के बाद सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से उड़ने वाली धूल भी वजह रहती है। शहर में बड़े निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। -विनय कट्टा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल

बेटियां जितना पढ़ेंगी, उतना ही सशक्त होगी परिवार, समाज और प्रदेश – लखन लाल देवांगन

रायपुर शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय, कोरबा में आयोजित दीक्षारम्भ समारोह में कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत नवप्रवेशित छात्राओं का स्वागत किया और अतिथियों द्वारा महाविद्यालय की लगभग 1,500 छात्राओं को सीएसआर (CSR) मद के माध्यम से एजुकेशन किट प्रदान की गई। कार्यक्रम में महापौर  संजू देवी राजपूत अति विशिष्ट अतिथि तथा कलेक्टर  कुणाल दुदावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।  अन्य शासकीय कॉलेजों में भी बनेंगे विशाल डोम  शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास पर जोर देते हुए मंत्री  देवांगन ने कहा कि मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में डीएमएफ (DMF) मद से विशाल डोम का निर्माण कराया जाएगा। विकास मॉडल के केंद्र में GYAN मंत्री  देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। प्रदेश का विकास मॉडल GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) पर केंद्रित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 27.5 प्रतिशत हो गया है। मेहनत से सफलता के शिखर तक पहुँचें बेटियाँ- महापौर महापौर  संजू देवी राजपूत ने छात्राओं को देश का भविष्य और विकसित भारत की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए निरंतर मेहनत और संघर्ष के साथ सफलता के शिखर तक पहुँचने का आह्वान किया। शिक्षा डीएमएफ की सर्वाेच्च प्राथमिकता- कलेक्टर कलेक्टर कोरबा  कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया कि जिले में डीएमएफ मद के कार्यों में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जिले के छात्र-छात्राओं को देश के किसी भी शासकीय महाविद्यालय में उच्च अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद, महाविद्यालय की प्राचार्य  पपिया चतुर्वेदी, प्राध्यापकगण एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मोहनजीत सिंह पर हमले के विरोध में पंजाब-चंडीगढ़ का मिनिस्टीरियल स्टाफ हड़ताल पर, कल भूख हड़ताल

मोहाली  पंजाब सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच चल रही तनातना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। साझा मुलाजिम मंच ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी वो अपना संघर्ष नहीं छोड़ेंगे। साझा मुलाजिम मंच के अध्यक्ष सुखचैन सिंह खैहरा ने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को पंजाब भर में मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी लेकर हड़ताल पर रहेगा। वहीं चडीगढ़ व मोहाली के कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे। सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि साझा मुलाजिम मंच ने मुलाजिमों के खिलाफ जारी किए गए पत्र को सात सितंबर तक वापस करने का अल्टीमेटम दिया था लेकिन सरकार ने वो लेटर वापस नहीं किया। जिसके बाद मुलाजिमों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत विरोध शुरू करने का फैसला कर दिया है। उन्होंने बताया कि क्लेरिकल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी पर रहेगा। उन्होंने कहा कि संगरूर में मोहनजीत सिंह पर हुए हमले के विरोध में कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर बैठकर भूख हड़ताल करेंगे। इस मामले में रविवार को भी यूनियन की बैठक हुई। बैठक में यूनियन ने क्या फैसला किया, जानिए…     08 सितंबर को पूर्ण काम बंद और भूख हड़ताल: चंडीगढ़ के समस्त निदेशालयों, मोहाली के सरकारी कार्यालयों, पंजाब सिविल सचिवालय और एफ.सी.आर. कार्यालयों में आठ सितंबर को पूरी तरह काम बंद रखकर मोहनजीत सिंह (गांव शेरों) के हक में एक दिवसीय भूख हड़ताल की जाएगी।     काली पट्टी और काले कपड़ों में विरोध: विरोध प्रदर्शन के दौरान सभी कर्मचारी काले कपड़े पहनकर या काले बिल्ले लगाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं अनुशासित ढंग से अपना रोष प्रकट करेंगे।     रिटायर्ड साथियों की विशेष निगरानी टीम गठित: हड़ताल को सफल बनाने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम आठ सितंबर को विभिन्न दफ्तरों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा करेगी। टीम यह देखेगी कि कोई कर्मचारी दफ्तरों में काम तो नहीं कर रहे।     अधिकतम भागीदारी की जिम्मेदारी: सभी कर्मचारी संगठनों को अपने-अपने विभागों से अधिक से अधिक कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और इस एक्शन को पूरी तरह सफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।     सभी एकजुट हैं: प्रधान सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर सभी यूनियन एक जुट हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने डीए को लेकर सरकार ने जो बयान दिया उसे भी अभी तक लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री सिर्फ हवा में बात कर रहे हैं। मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा की मोहाली में रैली मुलाजिम नेता जरमनजीत सिंह ने बताया कि मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा द्वारा आशा कार्यकर्ताओं, फैसिलीटेटरों, मिड-डे मील वर्करों और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों की पूर्ति के लिए 8 सितंबर को मोहाली में रैली की जा रही है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन उनकी रैली को पूरा समर्थन देगा और पंजाब सरकार से इन कर्मचारियों को तुरंत न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग करेगा।

स्कूल निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, राजस्थान में कनिष्ठ अभियंता निलंबित, अधिकारियों को सख्त निर्देश

जयपुर  स्कूली शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि जांच के दौरान निर्माण कार्य में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यादव सोमवार को शासन सचिवालय में स्कूली शिक्षा विभाग के विभिन्न निर्माण कार्यों को लेकर वीसी के माध्यम से समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने भवनों की मरम्मत, नए भवनों के निर्माण, अनुपयोगी और जर्जर हो चुके भवनों को नष्ट (डिसमेंटल) करने तथा भूमि आवंटन की प्रक्रियाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। यादव ने कहा कि 'स्कूल नॉर्म्स' के अनुसार सभी विद्यालयों में पर्याप्त और सुलभ शौचालयों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए तथा जहां आवश्यकता हो, वहां निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाएं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,021.25 करोड़ रुपए के प्रस्तावित कार्यों के विरुद्ध विभिन्न योजनाओं एवं अभिसरण के माध्यम से लगभग 3,037.21 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 1,293 नवीन विद्यालय भवन, 5,348 वृहद मरम्मत कार्य तथा 9,334 नवीन/अतिरिक्त कक्षा-कक्ष शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 290 नवीन विद्यालय भवन, 599 वृहद मरम्मत कार्य तथा 2,099 कक्षा-कक्षों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने इन सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने तथा निर्माण की प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यादव ने कहा कि सभी निर्माण कार्य स्वीकृत निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही करवाए जाएं। उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोनी, जिला नागौर में प्रगतिरत निर्माण कार्य में तकनीकी पर्यवेक्षण में प्रथमदृष्टया गंभीर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। एसीएस यादव ने कहा कि जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वयं जाकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का सघन निरीक्षण करें। वे वहां चल रहे मरम्मत और नए भवन निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करें और उस संबंध में राज्य स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों से संबंधित किसी भी आवश्यक कार्य—चाहे वह निर्माण कार्य हो या मरम्मत के लिए केवल पत्र लिखने से काम नहीं चलेगा। संबंधित अधिकारी कार्यों को समय पर पूरा करवाएंगे। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने टीम के साथ एकजुट होकर काम करने और किसी भी समस्या को तुरंत राज्य स्तर पर अवगत कराने के निर्देश दिए। कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। साथ ही एसीएस ने निर्देश दिए कि वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है, बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। विभिन्न विभागीय योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागीय योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें पीएम-जनमन (PM-JANMAN), पीएम श्री (PM Shri) योजना के विभिन्न चरण, समग्र शिक्षा अभियान (SMSA), स्टार्स (STARS) प्रोजेक्ट के तहत वोकेशनल रूम्स व हॉस्टल निर्माण, राज्य बजट घोषणाओं के तहत स्वीकृत कार्य, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) और डाइट (DIET) को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाने से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा की गई। जिला स्तरीय निर्माण प्रकोष्ठों की समस्याओं पर मंथन समीक्षा बैठक में जिला स्तर के निर्माण प्रकोष्ठों (ADPC) के समक्ष आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से मंथन हुआ। कार्यालयों में एमआईएस (MIS) सपोर्ट की आवश्यकता, साइट निरीक्षण, भूमि विवाद व नामान्तरण (Land-Related Issues), टेंडर प्रक्रिया एवं संवेदकों के बिल भुगतान में होने वाले विलंब जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कार्यों में तेजी लाने के लिए टेंडर प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण लैब्स स्थापित करने के सुझावों पर भी विचार किया गया।

साक्षरता से सशक्त हो रहा मध्यप्रदेश, लिख रहा विकास की नई इबारत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम है कि विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में साक्षरता अभियान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में संचालित विभिन्न साक्षरता कार्यक्रमों से अब तक 1 करोड़ 63 लाख 4 हजार 132 शिक्षार्थी जुड़े हैं। इनमें से 1 करोड़ 38 लाख 90 हजार 550 शिक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। साक्षरता का यह अभियान अब केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझने, शासकीय योजनाओं का लाभ लेने और आत्मनिर्भर बनने के लिए सक्षम बना रहा है। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेश में करीब 1 करोड़ 89 लाख 65 हजार 583 असाक्षर व्यक्ति चिन्हित किए गए थे। निरंतर संचालित साक्षरता कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 50 लाख 75 हजार 33 रह गई है। प्रदेश में साक्षरता को जन-अभियान का स्वरूप देते हुए विभिन्न चरणों में कार्यक्रम संचालित किए गए, जिनसे बड़ी संख्या में वयस्क शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े हैं। ‘उल्लास’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से साक्षरता अभियान को मिली नई गति वर्तमान में प्रदेश में "उल्लास नव भारत साक्षरता" कार्यक्रम 2022-2027 संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत अब तक 99 लाख 68 हजार 100 शिक्षार्थियों को साक्षरता अभियान से जोड़ा गया है। इनमें से 84 लाख 46 हजार 498 शिक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त की है। उल्लास कार्यक्रम के जिला-वार परिणामों में भी कई जिलों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। झाबुआ में 1,96,967, विदिशा में 2,33,642 और नीमच में 1,55,561 शिक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। इसी प्रकार खरगोन में 3,09,948, उज्जैन में 3,75,618, धार में 2,69,673, रीवा में 2,55,188 और खंडवा में 2,51,462 शिक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त की है। झाबुआ, नीमच और विदिशा ने हासिल की 100 प्रतिशत उपलब्धि शिक्षार्थियों को साक्षरता कार्यक्रम से जोड़कर झाबुआ, नीमच और विदिशा जिले ने अपने निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है। बुरहानपुर और खंडवा में 97 प्रतिशत, भिंड और निवाड़ी में 89 प्रतिशत, बालाघाट में 88 प्रतिशत एवं राजगढ़ में 87 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। साक्षरता से आगे सशक्तिकरण का लक्ष्य प्रदेश में संचालित विभिन्न साक्षरता कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि शिक्षार्थियों को दैनिक जीवन में पढ़ने, लिखने और गणना करने में सक्षम बनाने के साथ उनके अधिकारों, कर्तव्यों, शासकीय योजनाओं और उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक करना भी है। साक्षरता के बढ़ते दायरे का असर लोगों के दैनिक जीवन में भी दिखाई दे रहा है। बैंकिंग व्यवस्था को समझने, शासकीय दस्तावेज पढ़ने, विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने में साक्षरता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में साक्षरता अभियान को सफल बनाने में शिक्षकों, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय, स्व-सहायता समूहों, प्रशासन और विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साक्षरता के क्षेत्र में हासिल की गई यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की तस्वीर भी प्रस्तुत करती है।  

बच्चों के जीवन को सही दिशा देने वाली समझ देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को लिखी पाती शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं- सीएम योगी बच्चों के जीवन को सही दिशा देने वाली समझ देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य- मुख्यमंत्री तकनीक तेजी से जीवन बदल रही, डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता- योगी ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों पर विशेष जोर प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली- मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस और आगामी अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखी है। इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर उन्हें राष्ट्र निर्माण की नींव रखने वाले 81 गुरुजनों को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसी ज्ञान के विस्तार और प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। शिक्षा का उद्देश्य संस्कार और जीवन मूल्यों से जोड़ना भी मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के विद्यालय जाने का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सीखना नहीं है, बल्कि उन्हें ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ प्रदान करना है। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरुकुल समग्र शिक्षा के केंद्र रहे हैं, जहां ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों और दायित्वबोध की शिक्षा दी जाती थी। यही भाव आज की शिक्षा व्यवस्था का भी आधार होना चाहिए। ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह जीवन को सरल बनाने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो। तकनीक के दौर में डिजिटल और एआई साक्षरता जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक तेजी से हमारे जीवन को बदल रही है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता है। एआई, डीप-टेक और उभरती प्रौद्योगिकी शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के नए अवसर खोल रहे हैं। हमारी सरकार परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कौशल से जोड़ रही है। लखनऊ में एआई सिटी और कानपुर में ड्रोन एवं यूएवी तकनीक का विकसित होता पारिस्थितिकी तंत्र उत्तर प्रदेश के तकनीकी भविष्य की नई संभावनाओं का आधार बन रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता और कौशल विकास पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालयी सुविधाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है और अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। शिक्षा की यात्रा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी यात्रा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे विद्यार्थियों में संस्कार, जिज्ञासा, अनुशासन, आत्मविश्वास और दायित्वबोध जगाते हैं तथा हमारी गौरवशाली ज्ञान-परंपरा को आधुनिक ज्ञान और नवाचार से जोड़ते हैं।  साक्षरता के संकल्प में समाज की भागीदारी जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि साक्षरता का संकल्प समाज के सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति अक्षर ज्ञान से वंचित है, तो उसे साक्षर बनाना हम सभी का कर्तव्य है। किसी को पढ़ना-लिखना सिखाने का छोटा-सा प्रयास उसके जीवन में ज्ञान, आत्मविश्वास और अवसरों के नए द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर संकल्प लें कि हर बच्चा विद्यालय पहुंचे, हर विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाए, हर युवा कौशल और नवाचार से जुड़े तथा हर नागरिक साक्षर होने के साथ डिजिटल ज्ञान और एआई के प्रति जागरूक बने।