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भोपाल Master Plan-2047 में बड़े बदलाव, 27% हरित क्षेत्र; आवासीय इलाकों में सख्ती

भोपाल  राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित महानगर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) का मसौदा जारी कर दिया है। करीब 21 साल की देरी से आए इस प्रारूप में शहर की 45 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार किया गया है। नए मास्टर प्लान में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब आवासीय इलाकों में शोरूम और शॉपिंग मॉल जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। वहीं, शहर में हरित क्षेत्र को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।भोपाल के मास्टर प्लान 2047 का प्रारूप आखिरकार जारी हो गया है। पिछला मास्टर प्लान 1995 में बना था और उसकी योजना अवधि 2005 तक थी। इसके बाद नया प्लान लागू नहीं हो सका। यानी कानूनी तौर पर तय ही नहीं था कि शहर के किस हिस्से में क्या बन सकता है।  विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल भी बढ़ाकर 61,017.02 हेक्टेयर कर दिया गया है। वर्ष 2005 की विकास योजना में यह क्षेत्रफल 25,351 हेक्टेयर प्रस्तावित था। यानी नए प्रारूप में विकास योग्य क्षेत्र करीब ढाई गुना हो गया है। 1016 वर्ग किमी में फैलेगा निवेश क्षेत्र, 254 गांव होंगे शामिल मास्टर प्लान के नए प्रारूप में निवेश क्षेत्र का बड़ा विस्तार किया गया है। इसे बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर तक करने का प्रस्ताव है, जिसमें 254 गांव शामिल होंगे। इसके साथ ही शहर के विकास को गति देने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर और असीमित एफएआर का प्रावधान भी किया गया है। मास्टर प्लान के मसौदे पर अगले 30 दिनों तक आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से दावे-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इन पर विचार के बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। 21 साल की देरी से बढ़ी थीं विकास संबंधी जटिलताएं भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित था। इस देरी के कारण शहर में निर्माण, भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कई तरह की जटिलताएं पैदा हुईं। इस मुद्दे को लेकर दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया' ने अभियान चलाकर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की तो विवाद बढ़ गया। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मास्टर प्लान लाने की बात कही थी। अब मसौदा जारी होने के बाद शहर के विकास को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद है। सड़क की चौड़ाई तय करेगी व्यावसायिक गतिविधियां     – 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकेंगी। ऐसे क्षेत्र में केवल डाक्टर, वकील, सीए, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, मैनेजमेंट प्रोफेशनल जैसी पेशेवर गतिविधियां ही सिर्फ एक मंजिल तक चलाई जा सकेंगी।     – 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क पर भी शोरूम, होटल-कैफे नहीं खुलेंगे। यहां सिर्फ बैंक एटीएम, स्टेशनरी, मेडिकल आदि संचालित किए जा सकेंगे।     – 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर नर्सिंग होम, सीमित क्षमता वाले रेस्टोरेंट, होटल-कैफे, कोचिंग संस्थान और शोरूम का संचालन किया जा सके।     – 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर शापिंग काम्प्लेक्स संचालित किया जा सकेगा। हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर, व्यवस्थित विकास की तैयारी भोपाल विकास योजना-2047 में शहर के पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विस्तार को प्रमुखता दी गई है। हरित क्षेत्र को 12 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। निवेश क्षेत्र के विस्तार, नए ग्रोथ कॉरिडोर और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सड़क की चौड़ाई के आधार पर नियम तय होने से शहर के विकास को व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना है। मसौदे पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मास्टर प्लान सामने आएगा। इसके बाद ही प्रस्तावित प्रावधानों के अंतिम स्वरूप और उनके क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बड़ा बदलाव 51 किलोमीटर के 'ग्रोथ कॉरिडोर' से आएगा, जो शहर को एयरपोर्ट और बाहरी इलाकों से जोड़ेगा।     इस पर BRT यानी सिर्फ बसों के लिए रिजर्व लेन बनेगी, ताकि बसें जाम में न फंसें।     भविष्य में इसे मेट्रो जैसी सेवा में भी बदला जा सकता है।     इसके इर्द-गिर्द 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) का कॉन्सेप्ट लगेगा यानी जहां बस या मेट्रो जैसी सुविधा होगी, वहीं आसपास घर, दफ्तर और बाकी जरूरी सुविधाएं भी पास-पास बसाई जाएंगी।     यह सिर्फ आने-जाने की सड़क नहीं होगी, इसके आसपास होटल, अस्पताल, IT-AI-डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक बाजार, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और शिक्षा संस्थान भी विकसित होंगे।     पूरे शहर की निगरानी के लिए 'डिजिटल ट्विन सिटी' सिस्टम भी बनेगा, यानी शहर का डिजिटल नक्शा बनाकर अवैध निर्माण या जाम जैसी समस्याएं समय रहते पकड़ी जा सकेंगी। 18 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो गाड़ी रिपेयर शॉप, शोरूम, ऑडिटोरियम (100 सीट तक), कॉल सेंटर जैसी बड़ी गतिविधियां भी शुरू हो सकती हैं। यानी अगर आपका घर संकरी गली में है, तो आसपास सीमित सुविधाएं ही आएंगी। चौड़ी सड़क पर है, तो रोजमर्रा की जरूरत की हर चीज घर के पास मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। नए आवासीय इलाकों को शुरू से ही इसी सोच के साथ बसाने का प्रस्ताव है, ताकि स्कूल, दुकान, स्वास्थ्य सुविधा और पार्किंग घर के पास ही मिले। अगर आप पुराने शहर में रहते हैं और ऊंचाई-सीमा के चलते नई मंजिल नहीं जोड़ पा रहे, तो सरकार आपको 'हेरिटेज TDR' नाम का एक प्रमाणपत्र देगी। यह असल में एक निर्माण करने का हक है, जिसे आप बेच सकते हैं। अगर आप किसी पुरानी अपार्टमेंट सोसाइटी में रहते हैं और 70% पड़ोसी पुनर्विकास के लिए राजी हों, तो पूरी बिल्डिंग तोड़कर नई बनवाना अब कानूनी तौर पर आसान होगा। यह समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल का रोडमैप     राजधानी की यह विकास योजना (मास्टर प्लान) भोपाल की प्राकृतिक धरोहर- भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। इसमें हरित टीडीआर … Read more

Delhi PUC Enforcement: 1 अक्टूबर से सख्ती, इन वाहनों पर होगी सरकार की नजर

नई दिल्ली दिल्ली में गाड़ी चलाते हैं तो 1 अक्टूबर की तारीख याद रख लीजिए. क्योंकि अब सिर्फ गाड़ी का इंजन, ब्रेक और हॉर्न ही नहीं, आपकी जेब में रखा PUC सर्टिफिकेट भी सरकार की नजर में होगा. PUC वैलिड नहीं है तो मुश्किल बढ़ सकती है. दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अक्टूबर से इनवैलिड या एक्सपायर्ड PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों के लिए इंफोर्समेंट ड्राइव (Enforcement Drive) शुरू होगी. यानी सड़क पर निकलने से पहले यह देख लेना जरूरी होगा कि आपकी गाड़ी प्रदूषण जांच में पास है या नहीं।  दरअसल, सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली की हवा खराब होने लगती है. और इस बार सरकार पहले से ही कड़ी तैयारी में है. दिल्ली ही हवा को साफ रखने के लिए सरकार ने बुराड़ी में ऐसा ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) भी शुरू किया है, जहां सालाना 1 लाख वाहनों की जांच हो सकेगी. मतलब दिल्ली की सड़कों पर अब प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की पहचान और कार्रवाई, दोनों पर निगरानी बढ़ने वाली है।  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के लॉन्च के मौके पर कहा कि, "दिल्ली में 1 अक्टूबर से वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट से जुड़ा इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किया जाएगा. इसके तहत वाहनों के PUC certificate की वैधता की जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार पूरे साल वायु प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग कदम उठा रही है और यह उसी दिशा में एक और पहल है।  सरकार PUC सेंटर्स की निगरानी और उनके काम करने के तरीके को भी ज्यादा इफेक्टिव और भरोसेमंद बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए तकनिकियों में बदलाव किया जाएगा और इसे और भी एडवांस बनाया जाएगा. ताकि PUC सर्टिफिकेट जारी करने के प्रोसेस और उसकी मॉनिटरिंग पर बेहतर नजर रखी जा सके।  कैमरों से निगरानी मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली के सभी PUC सेंटर्स पर कैमरा लगाए जा रहे हैं. इन कैमरों की मदद से यह निगरानी की जाएगी कि PUC सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया सही तरीके से हो रही है या नहीं. सरकार का फोकस PUC सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनाने पर है. इससे उन वाहनों पर भी नजर रखने में मदद मिल सकती है, जिनके प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता खत्म हो चुकी है या जो तय प्रदूषण मानकों पर खरे नहीं उतरते।  10,000 का चालान बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के वाहन चलाते हुए पकड़े जाने की स्थिति में वाहन चालक को मोटी चपत लग सकती है. अधिकारियों का कहना है कि, PUC नियमों का उल्लंघन करने के लिए 10,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है. इसलिए वाहन मालिकों को तत्काल अपने वाहनों के पीयूसी की जांच करनी चाहिए और यदि वैलिडिटी खत्म हो गई है या आने वाले दिनों में समाप्त होने वाली है तो समय से पहले PUC जांच करवा कर सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरूरी है।  बुराड़ी में देश का सबसे बड़ा ATS रेखा गुप्ता ने बुराड़ी में जिस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया है, उसे उन्होंने देश का सबसे बड़ा ATS बताया है. इस स्टेशन के जरिए बड़ी संख्या में कमर्शियल व्हीकल्स की फिटनेस और पॉल्यूशन से जुड़ी जांच की जाएगी. सरकार के मुताबिक, इससे दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले ज्यादातर कमर्शियल वाहनों की आसानी से जांच की जा सकेगी. बुराड़ी ATS में हर साल 40,000 हैवी मोटर व्हीकल्स और 60,000 लाइट मोटर व्हीकल्स की जांच करने की क्षमता होगी. यानी यह स्टेशन सालाना कुल 1 लाख वाहनों की टेस्टिंग कर सकेगा।  ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर पंकज सिंह ने बताया कि बुराड़ी ATS में वाहनों की फिटनेस टेस्टिंग पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रोसेस के जरिए होगी. इस टेस्टिंग के दौरान ब्रेकिंग इफिसिएन्सी, सस्पेंशन परफॉर्मेंस, हेडलाइट कंडिशन, साइड-स्लिप और इमिशन लेवल जैसे पैरामीटर्स की जांच की जाएगी. इसके अलावा वाहनों के अंडरसाइड की भी जांच की जाएगी. इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम के जरिए यह तय हो सकेगा कि, उक्त वाहन शहर में चलने लायक है या नहीं।  दिल्ली सरकार के मुताबिक, बुराड़ी से पहले 3 सितंबर को तेहखंड में भी एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया गया था. इस ATS में हर साल करीब 72,000 वाहनों की जांच करने की क्षमता है. सरकार अब दिल्ली में ATS और PUC सेंटर्स के नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है. एक तरफ ऑटोमेटेड टेस्टिंग के जरिए वाहनों की फिटनेस और इमिशन की जांच की जाएगी, वहीं दूसरी तरफ PUC सेंटर्स पर कैमरा और टेक्नोलॉजी के जरिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। 

Singapore-India Growth Forum में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाएं रखेंगे CM साय

विदेश मंत्रालय द्वारा सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ फोरम 2026 के लिए छत्तीसगढ़ का चयन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 3 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे मुख्यमंत्री श्री साय, SING फोरम 2026 में रखेंगे छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाएं एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को वैश्विक मंच पर करेगा छत्तीसगढ़ प्रस्तुत कौशल विकास, वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास में सहयोग की संभावनाओं पर भी होगी चर्चा रायपुर विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर जाने वाले छत्तीसगढ़ के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर में आयोजित होने वाले सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में भाग लेगा। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ को अपनी उपलब्धियों, विकास की संभावनाओं और निवेश के अवसरों को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही सिंगापुर के व्यापार जगत, उद्यमियों और निवेशकों के साथ भविष्य के सहयोग के लिए नए संबंध स्थापित करने की दिशा में भी पहल होगी। SING फोरम 2026 का यह पहला संस्करण है, जिसका आयोजन सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है। फोरम में सिंगापुर और भारत के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रमुख और निवेशक एक मंच पर आएंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करना तथा व्यापार और निवेश के नए अवसरों को प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय फोरम में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य में एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक निवेश संभावनाओं को प्रस्तुत करेंगे। राज्य प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्यमियों के समक्ष रखने के साथ ही दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर संवाद किया जाएगा। कौशल विकास और हरित विकास में सहयोग पर रहेगा फोकस सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल स्किल सेंटर, मंडई वाइल्डलाइफ रिजर्व और गार्डन्स बाय द बे के साथ भी बैठकें करेगा। इन बैठकों में कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग के साथ वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास से जुड़े अनुभवों एवं संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि यह यात्रा छत्तीसगढ़ को वैश्विक साझेदारों से जोड़ने और राज्य के विकास के नए रास्ते खोलने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध विशेषज्ञता, निवेश और नवाचार की संभावनाओं से छत्तीसगढ़ को जोड़कर विकास और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएं। उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल मुख्यमंत्री साय के साथ राज्य प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार तथा मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी)  उमेश अग्रवाल शामिल रहेंगे।

गोरखनाथ मंदिर में आहुत श्रद्धांजलि सप्ताह में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंगलवार (29 सितंबर) को गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह में सम्मिलित होंगे।  मुख्यमंत्री, गोरखनाथ मंदिर में मंगलवार सुबह युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति में आहुत श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख संतों की भी सहभागिता होगी। इसके बाद गोरखनाथ मंदिर में मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा सुनाई जा रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का विराम होगा। सीएम योगी भी इस कथा के विराम सत्र में सम्मिलित होंगे। गोरखपुर दौरे के तीसरे दिन, बुधवार को मुख्यमंत्री अपने पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करेंगे।

यूपीआईटीएस-2026 में चार दिन में ₹5,500 करोड़ के व्यापारिक समझौते

ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के लिए भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में आयोजित चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने चार दिनों में ही नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में 28 सितंबर तक संचयी रूप से ₹5,500 करोड़ यानी करीब 574 मिलियन अमेरिकी डॉलर के 3,765 व्यापारिक समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके अलावा देश-विदेश के खरीदारों और कंपनियों की ओर से ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ दर्ज की गई है। मंगलवार को ट्रेड शो का अंतिम दिन है, जिससे इन आंकड़ों में और वृद्धि की संभावना है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) के अपर महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, 28 सितंबर तक कुल 35,387 बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकें संपन्न हुई हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए आयोजित रिवर्स बायर्स सेलर्स मीट (आरबीएसएम) में 11,887 बैठकें, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में घरेलू व अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच 23,500 बी2बी बैठकें हुईं। इन बैठकों ने प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं और निर्यातकों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ने का काम किया है। योगी सरकार की नीतियों का वैश्विक बाजार में दिख रहा असर यूपीआईटीएस-4.0 महज उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश अनुकूल वातावरण और उद्यमिता की क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रभावी मंच बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक एवं कारोबारी इकोसिस्टम का लाभ एमएसएमई, ओडीओपी, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमियों को मिल रहा है। चार दिनों में हुए 3,765 एमओयू और ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ से स्पष्ट है कि यूपीआईटीएस ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सेतु का काम किया है। यहां छोटे उद्यमियों से लेकर बड़े निर्माताओं तक को घरेलू और विदेशी खरीदारों के साथ सीधे संवाद, उत्पाद प्रदर्शन और व्यापारिक समझौतों का अवसर मिल रहा है। ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में यूपी की नई पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के तहत यूपीआईटीएस के माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसे कार्यक्रमों ने स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों के उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने पहुंचाने का अवसर दिया है। यूपीआईटीएस-4.0 के माध्यम से उत्तर प्रदेश की एमएसएमई शक्ति, ओडीओपी उत्पाद, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षमता एक ही मंच पर वैश्विक बाजार से जुड़ रही है। इससे न केवल व्यापार के नए अवसर बन रहे हैं, बल्कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों के लिए निर्यात की संभावनाएं भी विस्तार पा रही हैं।

योगी सरकार में बालवाटिकाओं को मिलेगा ‘लर्निंग कॉर्नर’ का नया संसार, 966 पीएम श्री विद्यालयों में होगी आधुनिक व्यवस्था, ₹193 लाख की मंजू

लखनऊ योगी सरकार ने नौनिहालों की प्रारंभिक शिक्षा को और अधिक रोचक, गतिविधि आधारित एवं बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पीएम श्री योजना के अन्तर्गत वर्ष 2026-27 में 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों/बालवाटिकाओं में लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ₹193 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए ₹20,000 की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।  इन केंद्रों में बच्चों की आयु और सीखने की जरूरतों के अनुरूप रीडिंग कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर, परफॉर्मेंस कॉर्नर और आर्ट कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर की स्थापना से बालवाटिकाओं में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार होगा, जहां किताब, खिलौना, कला, अभिनय और गतिविधि सीखने के माध्यम बनेंगे। योगी सरकार की यह पहल प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को अधिक जीवंत, अनुभवपरक और बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खेल और गतिविधियों से सीखेंगे बच्चे, बालवाटिका बनेगी सीखने की प्रयोगशाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शासन के निर्देशों के अनुसार चारों लर्निंग कॉर्नर बच्चों के सामाजिक एवं संवेदनात्मक विकास, संज्ञानात्मक विकास, शारीरिक विकास तथा सूक्ष्म मांसपेशियों के विकास में सहायक होंगे। 3-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले लर्निंग कॉर्नर में रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट गतिविधियों के लिए आयुवर्ग के अनुरूप सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।  कहानी की किताबों से लेकर पजल और ब्लॉक्स तक, सीखने के लिए समृद्ध सामग्री रीडिंग कॉर्नर में हिंदी वर्णमाला मैट, चित्रात्मक कहानी की पुस्तकें, ओपन बुक शेल्फ, चित्र एवं संख्या चार्ट और लेखन/चित्रकारी के लिए क्लिप बोर्ड जैसी सामग्री शामिल है। इसका उद्देश्य बच्चों में शब्दावली, सुनने और शुरुआती साक्षरता से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ावा देना है। ब्लॉक कॉर्नर में बड़े फोम ब्लॉक्स, लकड़ी के ब्लॉक्स, शेप सॉर्टर, पिक्चर पजल, अल्फाबेट एवं नंबर ब्लॉक्स, स्टैकिंग टॉयज और लेसिंग बोर्ड जैसी सामग्री निर्धारित की गई है। इससे बच्चों में आकार पहचान, समस्या समाधान, स्थानिक समझ, शुरुआती साक्षरता एवं संख्याज्ञान जैसी क्षमताओं के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।  परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर से निखरेगी रचनात्मकता परफॉर्मेंस कॉर्नर में बच्चों के लिए विभिन्न भूमिका-आधारित गतिविधियों से जुड़ी सामग्री रखी जाएगी। इनमें ड्रेस-अप कॉस्ट्यूम, फिंगर स्टिक पपेट, किचन प्ले सेट, सॉफ्ट डॉल, इमोशन मास्क, स्मॉल ड्रम, हैट्स एवं स्कार्फ और टॉय टेलीफोन जैसी सामग्री शामिल है। इनका उद्देश्य कल्पनाशील भूमिका-अभिनय, कहानी कहने, संवाद, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। आर्ट कॉर्नर में नॉन-टॉक्सिक फिंगर पेंट, क्रेयॉन, चाइल्ड-सेफ ग्लू स्टिक, आर्ट शीट एवं कलर पेपर जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके माध्यम से बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति और सूक्ष्म मोटर कौशल विकसित करने के अवसर मिलेंगे।  3-5 और 5-6 वर्ष के बच्चों की जरूरत के अनुसार अलग व्यवस्था लर्निंग कॉर्नर की सामग्री आयु वर्ग के अनुरूप निर्धारित की गई है। 3-5 वर्ष और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों की उम्र और विकासात्मक जरूरतों के अनुरूप गतिविधियां संचालित की जा सकें। 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए रीडिंग कॉर्नर में शुरुआती पठन कौशल को ध्यान में रखते हुए अर्ली रीडर्स एवं द्विभाषी पुस्तकों जैसी सामग्री का प्रावधान किया गया है।    “लर्निंग कॉर्नर से बच्चों की जिज्ञासा को मिलेगा सीखने का नया मंच” “बालवाटिका में सीखना बच्चों के लिए जितना सहज और आनंददायक होगा, उनकी बुनियाद उतनी ही मजबूत होगी। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर विकसित होने से नौनिहालों को पढ़ने, खेलने, कला, अभिनय और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। हमारा प्रयास है कि बच्चे अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा के साथ सीखें और शुरुआती वर्षों में ही उनकी क्षमताओं को सही दिशा मिले।” संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा “गतिविधि आधारित वातावरण से निखरेंगी बच्चों की सीखने की क्षमताएं” “लर्निंग कॉर्नर में आयु वर्ग के अनुरूप निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों को उनकी विकासात्मक जरूरतों के अनुसार सीखने के अवसर मिलें। रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर के प्रभावी उपयोग के साथ सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।”  मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

जीबीसी 5.0 के लक्ष्य के करीब पहुंचा सोनभद्र, 14,612 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू

सोनभद्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की नीति के तहत सोनभद्र अब बड़े निवेश की नई मंजिल की ओर बढ़ रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) 5.0 के लिए शासन की ओर से निर्धारित 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य के करीब जिला तेजी से पहुंच रहा है। अब तक जिले में 33 परियोजनाओं के लिए 14,612 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू हो चुके हैं। शेष 5,388 करोड़ रुपये के लक्ष्य को भी जल्द हासिल करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पनौरा में 7,400 करोड़ का पीएसपी प्लांट जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि प्रमुख निवेश परियोजनाओं में अदानी समूह का 7,400 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। समूह की ओर से पनौरा में पीएसपी (पंप्ड स्टोरेज पावर) प्लांट स्थापित किया जाएगा। ऊर्जा भंडारण और विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में यह परियोजना सोनभद्र की ऊर्जा क्षमता को और मजबूत करने वाली होगी। वहीं, टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) ने बसुधारी में करीब 6,400 करोड़ रुपये के निवेश से परियोजना स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। बड़े ऊर्जा निवेश से सोनभद्र की पहचान देश के प्रमुख ऊर्जा एवं औद्योगिक केंद्रों में और मजबूत होने की संभावना है। 33 परियोजनाओं के लिए 14,612 करोड़ के एमओयू जिलाधिकारी ने बताया कि शासन से जिले को 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। इसके सापेक्ष अब तक 33 परियोजनाओं के लिए 14,612 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि शेष 5,388 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को भी जल्द प्राप्त करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय कारोबार, परिवहन, निर्माण तथा सेवा क्षेत्र को भी गति मिलेगी। बड़े निवेश से बदलेगी सोनांचल की तस्वीर सोनभद्र में प्रस्तावित बड़े निवेश से जिले के औद्योगिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजनाएं न केवल औद्योगिक गतिविधियों को गति देंगी, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नए अवसर पैदा करेंगी। निवेश से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार सोनभद्र में लगातार बढ़ते औद्योगिक निवेश से जिले में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बड़े उद्योगों के साथ सहायक उद्योगों और सेवा क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय युवाओं, कारोबारियों और उद्यमियों को भी लाभ मिल सकता है। शासन के निवेश लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ते कदमों से सोनभद्र के औद्योगिक हब के रूप में उभरने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

यूपीआईटीएस में छाया यूपीएसडीएम के हुनर का जादू

ग्रेटर नोएडा जब हुनर को मंच मिलता है तो उत्साह खुद-ब-खुद उमड़ पड़ता है। यही नजारा सोमवार को उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी-2026 में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के पवेलियन में देखने को मिला। प्रदर्शनी के चौथे दिन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का पवेलियन सुबह से ही हुनर, उत्साह और उमंग से गुलजार रहा। दिन की शुरुआत जोश और गर्व से भरे माहौल में हुई। पीएसी की 32वीं वाहिनी के जवानों ने बैंड की शानदार प्रस्तुति देकर पूरे प्रदर्शनी परिसर में देशभक्ति की लहर दौड़ा दी। उनकी एक-एक धुन पर कदम थिरक उठे और इसी जोश ने युवाओं में नई ऊर्जा भर दी। देखते ही देखते युवा खुद मंच की ओर खिंचे चले आए और ‘कौशल मंच’ पर एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियां दीं। युवाओं के इस जुनून को देखकर उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल के अधिकारी भी खुद को रोक नहीं पाए और मंच पर आकर उन्होंने भी अपने हुनर का प्रदर्शन किया। ‘कौशल मंच’ जहां प्रतिभाओं से जगमगा रहा था, वहीं पवेलियन के 16 प्रत्यक्ष कौशल प्रदर्शन केंद्रों पर सीखने-सिखाने का दौर भी पूरे दिन चलता रहा। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विभिन्न कौशलों को करीब से जाना। शाम ढलते ही उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का पवेलियन सुरों के रंग में रंग गया। दिल्ली घराने के उस्ताद अलीम खान एवं समूह ने अपनी शानदार प्रस्तुति से महफिल लूट ली। उस्ताद अलीम खान और उनके बेटे अरीम खान ने वायलिन पर जब मधुर धुनें छेड़ीं तो पूरा पंडाल झूम उठा। तबले पर समीर खान की थाप ने इस शाम को और भी यादगार बना दिया।

23 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित होगा मुरिया दरबार

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रतीक बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में देश की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति  मुर्मु ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति  मुर्मु को मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का निमंत्रण पत्र सौंपने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री  तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद  महेश कश्यप तथा संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन उपस्थित रहे। राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का अवसर मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के अवसर पर बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे को अनूठा उदाहरण बताया था। उन्होंने बस्तर की प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। ऐसे में बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, जनजातीय परंपराओं और लोक विरासत के लिए विशेष गौरव का अवसर होगी। मुरिया दरबार बस्तर की जीवंत सामाजिक परंपरा बस्तर दशहरा की परंपराओं में मुरिया दरबार का विशेष महत्व है। यह आयोजन बस्तर की सामाजिक एवं सामुदायिक व्यवस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है। मुरिया दरबार के माध्यम से बस्तर की परंपराओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक प्रमुखों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है। बस्तर की संस्कृति और सामाजिक जीवन में मांझी एवं चालकी जैसे पारंपरिक पदों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी मांझी और चालकी की सामाजिक जीवन तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया था। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की ऐसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी पहचान केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया में है। मुरिया दरबार में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति  मुर्मु की उपस्थिति से बस्तर की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि बस्तर की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार किया जाए।  अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण है। 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में राष्ट्रपति का स्वागत करना पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण होगा। बस्तर की संस्कृति से राष्ट्रपति का विशेष जुड़ाव महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की संस्कृति और जनजातीय विरासत से विशेष जुड़ाव रहा है। फरवरी 2026 में उन्होंने जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। अपने संबोधन में उन्होंने बस्तर की प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और गुफाओं को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि बस्तर की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास को आगे बढ़ाना आवश्यक है। जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी राष्ट्रपति ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित एवं संवर्धित करने और जनजातीय समुदायों की विकास यात्रा में सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया था।

5.48 लाख से अधिक फुटफॉल के साथ यूपीआईटीएस ने रचा नया रिकॉर्ड

ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के अनुरूप आयोजित चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने व्यापारिक गतिविधियों के साथ जनभागीदारी के मामले में भी नया रिकॉर्ड बनाया है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित पांच दिवसीय ट्रेड शो में 28 सितंबर तक कुल 5,48,881 फुटफॉल दर्ज की गई। इसमें 1,56,523 घरेलू कारोबारी खरीदार और 3,92,358 सामान्य आगंतुक शामिल हैं। ट्रेड शो मंगलवार को संपन्न होगा, जिससे फुटफॉल का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। यूपीआईटीएस में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि यह आयोजन अब केवल कारोबारियों और उद्योग जगत तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदेश के उत्पादों, हस्तशिल्प, हथकरघा, ओडीओपी उत्पादों, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उत्पादों और आधुनिक विनिर्माण की झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में आम लोग भी ट्रेड शो में पहुंच रहे हैं। वहीं, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की मौजूदगी ने प्रदर्शनी को वास्तविक कारोबारी गतिविधियों का मंच बना दिया है। कारोबार और जनभागीदारी का संगम यूपीआईटीएस-4.0 की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां कारोबार और जनभागीदारी एक साथ दिखाई दी। जहां एक ओर कारोबारी खरीदार प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत, उत्पादन क्षमता और निर्यात संभावनाओं को समझने के लिए विभिन्न स्टॉल पर पहुंचे, वहीं दूसरी ओर सामान्य आगंतुकों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय उत्पादों और शिल्प की जानकारी ली। 1,56,523 घरेलू कारोबारी खरीदारों की मौजूदगी ने प्रदेश के उद्यमियों को देश के अलग-अलग हिस्सों के व्यापारियों और संभावित कारोबारी साझेदारों से सीधे जुड़ने का अवसर दिया। इससे स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और व्यापारिक नेटवर्क को विस्तार देने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन को मिल रही मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के तहत उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यूपीआईटीएस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया है। यहां प्रदेश के अलग-अलग जिलों के उत्पाद एक ही छत के नीचे प्रदर्शित किए जा रहे हैं। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत तैयार किए जा रहे उत्पादों के साथ हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि आधारित उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, कालीन, पीतल, कांच, लकड़ी के उत्पाद और अन्य पारंपरिक एवं आधुनिक उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ट्रेड शो महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बड़ी संख्या में सामान्य आगंतुकों की मौजूदगी ने इन उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर भी दिया है। इससे उत्पादों की पहचान बढ़ाने, ब्रांडिंग को मजबूत करने और स्थानीय उद्यमियों को नए ग्राहक वर्ग से जोड़ने में मदद मिल रही है। 3.92 लाख सामान्य आगंतुकों ने बढ़ाई रौनक 28 सितंबर तक ट्रेड शो में पहुंचे 3,92,358 सामान्य आगंतुकों ने यूपीआईटीएस को व्यापक जनभागीदारी वाला आयोजन बना दिया है। अलग-अलग हॉल में लगे स्टॉल्स पर लोगों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। आगंतुक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए उत्पादों को करीब से देख रहे हैं और उनकी निर्माण प्रक्रिया, विशेषताओं तथा उपयोगिता की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। ट्रेड शो में व्यापारिक गतिविधियों के साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध कला-संस्कृति, खानपान और पारंपरिक उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे प्रदेश की विविधता को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिल रहा है। प्रदर्शनी हॉलों में लगातार बढ़ी कारोबारी गतिविधियां विभिन्न प्रदर्शनी हॉलों में खरीदारों और आगंतुकों की निरंतर आवाजाही से कारोबारी गतिविधियों को गति मिली है। कारोबारी खरीदार उत्पादों की जानकारी लेने के साथ संभावित आपूर्तिकर्ताओं और निर्माताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं। ट्रेड शो में घरेलू खरीदारों के साथ विदेशी खरीदारों की भागीदारी ने प्रदेश के उद्यमियों के लिए निर्यात बाजार के नए अवसर भी खोले हैं। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने तथा संभावित व्यापारिक साझेदारों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला है।