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कूनो में चीतों का सफल प्रजनन, 4 मादा चीतों ने 3 महीने में दी संतान, जंगल में प्रजनन को बताया टास्क

श्योपुर मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब चीतों का केवल आश्रय स्थल नहीं रहा, बल्कि एक सफल चीता प्रजनन केन्द्र के रूप में दुनिया भर में अलग पहचान बना चुका है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह से रच बस गये हैं। कूनो की धरती अब आये दिन नन्हे शावकों की किलकारियों से गूंज रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लुप्त हो चुके चीतों के देश में फिर से बसाने का सपना ‘प्रोजेक्ट चीता’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केन्द्र-राज्य के विभागों के समन्वय और प्रबंधन से वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में नये इतिहास लिखे जाने के साथ साकार हो रहा है। चुनौतियों पर विजय के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता प्रोजेक्ट चीता का प्रारंभिक चरण शुरुआती चुनौतियों से भरा हुआ था, लेकिन कूनो की आबोहवा और विभाग के विशेषज्ञों के कुशल प्रबंधन ने सभी चुनौतियों से पार पाते हुए वन्य-जीव संरक्षण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लुप्त प्रजाति की पुनर्स्थापना का सफलतम पर्याय बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्याप्त शिकार चीतों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल सिद्ध हुए हैं। मादा चीतों द्वारा लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना प्राकृतिक आवास मान चुकी हैं। क्यों बढ़ा कूनो पर दबाव?  कूनो में लगातार बढ़ रही चीतों की आबादी के कारण संसाधनों पर असर पड़ रहा है। वन क्षेत्र की सीमित क्षमता के चलते सभी चीतों को एक ही स्थान पर रखना चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा संख्या होने पर भोजन और क्षेत्र को लेकर संघर्ष बढ़ सकता है। इसके अलावा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होता है। इन्हीं कारणों से चीतों को दूसरे उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। वन विभाग इस दिशा में वैज्ञानिक तरीके से निर्णय ले रहा है। ताकि चीतों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।   गांधी सागर बन रहा नया ठिकाना  गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के नए आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह क्षेत्र भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से चीतों के लिए उपयुक्त माना गया है। फिलहाल यहां तीन चीतों को पहले ही बसाया जा चुका है। आने वाले समय में और चीतों को यहां शिफ्ट करने की योजना है। इससे कूनो पर दबाव कम होगा और चीतों को नया क्षेत्र मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग स्थानों पर आबादी फैलाने से उनकी संख्या सुरक्षित रूप से बढ़ेगी। यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाई जाती है। गांधी सागर को चीता हब के रूप में तैयार किया जा रहा है। भारत बना वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण  ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता ने भारत को दुनिया के सामने एक उदाहरण के रूप में स्थापित किया है। यह पहल दिखाती है कि सही योजना और दृढ़ इच्छाशक्ति से विलुप्त प्रजातियों को फिर से बसाया जा सकता है। कूनो अब केवल एक राष्ट्रीय पार्क नहीं, बल्कि एक ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर के रूप में उभर रहा है। दुनियाभर के वन्यजीव विशेषज्ञ इस परियोजना पर नजर बनाए हुए हैं। यह उपलब्धि भारत के संरक्षण प्रयासों की बड़ी जीत मानी जा रही है। साथ ही यह अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।   बढ़ता कुनबा : प्रोजेक्ट चीता की नई उड़ान              नए शावकों का जन्म: अप्रैल 2026 में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इससे पहले फरवरी-मार्च 2026 में ज्वाला, निर्वा और आशा भी शावकों को जन्म दे चुकी हैं।              कुल संख्या: कूनो में चीतों की संख्या अब 57 हो चुकी है।              भारत में जन्मे शावक: 27 से अधिक शावकों का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता है।              विदेशी सहयोग: फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 8-9 नए चीते लाए गए, जिससे परियोजना को और मजबूती मिली। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट कूनो का ब्रीडिंग सेंटर बनना केवल पर्यावरणीय उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चीतों की बढ़ती संख्या के साथ यहां वाइल्डलाइफ टूरिज्म की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इससे श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय युवाओं के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। प्रोजेक्ट चीता-एक ऐतिहासिक यात्रा              17 सितंबर 2022: प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा— यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बिग प्रेडेटर स्थानांतरण पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट था।              फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आए।              मार्च 2023: ज्वाला ने 70 वर्षों बाद भारत में पहले शावकों को जन्म दिया।              2024: आशा और गामिनी जैसी मादा चीतों ने नई पीढ़ी को जन्म दिया, जिसमें गामिनी ने एक साथ 5 शावकों का रिकॉर्ड बनाया।              2025-26: नई खेप के साथ प्रोजेक्ट का विस्तार और शावकों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती गई। नई पीढ़ी और भविष्य की दिशा कूनो में अब दूसरी पीढ़ी के चीते भी विकसित हो रहे हैं। मुखी जैसी भारत में जन्मी मादा चीता का शावकों को जन्म देना पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट में जैनेटिक ब्रीडिंग के रूप में मील का पत्थर माना जा रहा है। वन विभाग अब शावकों की पहचान नामों के बजाय कोड (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है, ताकि उनकी वंशावली को वैज्ञानिक तरीके से ट्रैक किया जा सके। आगे की योजना-दूसरा घर तैयार कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे प्रोजेक्ट चीता को और विस्तार मिलेगा और भारत में चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और सफल प्रजनन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में चीतों की वापसी का सपना अब साकार हो रहा है। यह … Read more

गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा यूपी का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, 29 अप्रैल को पीएम करेंगे लोकार्पण

लखनऊ उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में 29 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक 'गंगा एक्सप्रेसवे' को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा "इंडस्ट्रियल कॉरिडोर" बनने जा रहा है। बुनियादी ढांचे को औद्योगिक रफ्तार देने के लिए इसे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) मॉडल पर तैयार किया गया है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन बनाने की दिशा में संजीवनी साबित होगा। 594 किमी का विशाल इंडस्ट्रियल नेटवर्क यूपीडा (UPEIDA) की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 594 किमी लंबे कॉरिडोर के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की है। मेरठ से प्रयागराज तक फैले इन नोड्स को वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स की आधुनिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह स्ट्रैटेजिक प्लानिंग पूरे एक्सप्रेसवे को एक 'इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट' में बदल देगी, जिससे माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी। निवेश की बारिश और रोजगार के अवसर गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योगों को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह है। अब तक सरकार को 987 निवेश प्रस्ताव (EOI) मिल चुके हैं, जिनके जरिए लगभग ₹46,660 करोड़ के निवेश का लक्ष्य है। यह निवेश मुख्य रूप से एग्री-प्रोसेसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे क्षेत्रों में आएगा। इससे न केवल उद्योगों की लागत घटेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। क्षेत्रीय असमानता का अंत, हरदोई बनेगा सेंटर यह एक्सप्रेसवे कॉरिडोर यूपी के 12 जिलों के बीच विकास के संतुलन को बेहतर करेगा। हरदोई, उन्नाव, प्रतापगढ़ और रायबरेली जैसे जिलों में, जहाँ औद्योगिक गतिविधियां कम थीं, अब वहां विकास की नई लहर दौड़ेगी। इस योजना में बुलंदशहर नोड सबसे बड़ा क्लस्टर होगा, जो 2,798 एकड़ में फैला है। योगी सरकार का लक्ष्य सड़क निर्माण को केवल आवाजाही तक सीमित न रखकर, उसे प्रदेश के औद्योगिक सशक्तिकरण का जरिया बनाना है। मेरठ से प्रयागराज तक नोड्स की स्थिति (एट ए ग्लेंस) गंगा एक्सप्रेसवे पर उद्योगों का जाल कुछ इस तरह बिछाया गया है:     पश्चिमी यूपी: मेरठ (529 एकड़), हापुड़ (304 एकड़), बुलंदशहर (2,798 एकड़) और अमरोहा (348 एकड़)।     मध्य यूपी: संभल (591 एकड़), बदायूं (269 एकड़), शाहजहांपुर (252 एकड़) और हरदोई (335 एकड़)।     पूर्वी एवं तराई क्षेत्र: उन्नाव (333 एकड़), रायबरेली (232 एकड़), प्रतापगढ़ (263 एकड़) और प्रयागराज (251 एकड़)।  

गांव की महिलाओं ने हाथ करघे को बनाया आत्मनिर्भरता का जरिया, जानें सफलता का राज

रायपुर ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने अपने सामूहिक प्रयास, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर ऐसी सफलता की कहानी रची है, जो न केवल आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएँ यदि अवसर और सहयोग प्राप्त करें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं। धमतरी जिले के छोटे से ग्राम नारी में आज आत्मनिर्भरता, परंपरा और नवाचार का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कभी सीमित संसाधनों और अवसरों वाला यह गाँव अब ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।  परंपरा से जुड़ी नई शुरुआत  नारी गाँव में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन पड़ोसी राज्य ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस क्षेत्र में कदम रखा। संबलपुरी साड़ियाँ अपनी विशेष इकत डिज़ाइन और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें बनाने के लिए उच्च कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है।  सरकार का मजबूत सहयोग   छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समिति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत नियमित रूप से धागा प्रदाय किया जा रहा है, जिससे बुनकरों को नियमित रोजगार तथा समितियों को सुचारु संचालन हेतु सेवा प्रभार के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही नवीन बुनाई प्रशिक्षण तथा बुनकरों को नवीन करघे वितरण से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इस सहयोग से समिति आर्थिक रूप से सशक्त हुई है तथा बाजार मांग के अनुरूप वस्त्र तैयार करने मे सक्षम हुई है।  बढ़ता बाजार और आय  आज ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्राम नारी द्वारा तैयार की गई साड़ियों की बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के बाजारों में होती है। वर्तमान मे समिति द्वारा माह मे 300-400 साड़ियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समिति का मासिक कारोबार लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।  महिलाओं का सशक्तिकरण   इस पहल ने न केवल आय के स्रोत को बढ़ाया है बल्कि, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दी है तथा सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित की है। जो महिलाएँ पहले इस कार्य से अनभिज्ञ थीं, वे आज कुशल बुनकर बन चुकी हैं और आत्मविश्वास के साथ उत्पादन में योगदान दे रही हैं। पूर्व मे शासकीय वस्त्र उत्पादन से जो महिलाएं प्रतिदिन 300-350 रुपये कमाती थी, वे आज 550-600 रुपये काम रही है। भविष्य मे अतिरिक्त कौशल उन्नयन प्रशिक्षण तथा दक्षता से वे 1000-1200 रुपये प्रतिदिन कमाने मे सक्षम हो सकेंगी।    भविष्य की दिशा   ग्राम नारी की यह सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रही है। यदि इसे आगे ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुँच का समर्थन मिले, तो यह और भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यह कहानी दर्शाती है कि जब सरकारी सहयोग और समुदाय की मेहनत साथ आती है, तो छोटे गाँव भी सफलता की बड़ी मिसाल बन सकते हैं।

एंबुलेंस देरी पर सवाल: हाईकोर्ट में जनहित याचिका, ओला-उबर से हुई तुलना

जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने प्रदेश से गुजरने वाले राजमार्गों में अवैध कट-प्वाइंट्स को चुनौती के मामले में जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग के एसीएस सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। जनहित याचिकाकर्ता डिंडौरी निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी महावीर सिंह ने अपना पक्ष स्वयं रखा। उन्होंने दलील दी कि जब ओला-उबर जैसी गाड़ियां दो मिनट के भीतर पहुंच जाती हैं, तो एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंचती है। उन्होंने बताया कि भोपाल-जबलपुर हाईवे में डिवाइडर तोड़कर 300 कट बना लिए हैं, इससे स्पीड कम होती है और दुर्घटनाएं भी बढ़ती हैं। प्रदेश से गुजरने वाले राजमार्गों में अवैध कट-प्वाइंट्स के कारण एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती हैं, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। लिहाजा, जनहित याचिका को बेहद गंभीरता से लिया जाए। कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। जवाब आने के बाद आगे दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

विज्ञान के प्रति नई दृष्टि हुई विकसित

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित 18वीं विज्ञान मंथन यात्रा का समापन सोमवार को नेहरू नगर स्थित विज्ञान भवन भोपाल में उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। 21 से 27 अप्रैल तक आयोजित इस ज्ञानयात्रा में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों ने सहभागिता करते हुए विज्ञान के प्रति नई दृष्टि विकसित की।यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा शिक्षा से आगे बढ़ाकर विज्ञान के व्यावहारिक एवं अनुप्रयुक्त स्वरूप से परिचित कराना था। इस दौरान प्रतिभागियों ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण किया, जिसमें श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, बेंगलुरु स्थित इसरो के उन्नत अनुसंधान प्रतिष्ठान, इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क और चेन्नई के वैज्ञानिक संग्रहालयों एवं प्लेनेटेरियम का अवलोकन शामिल रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा ने ‘विज्ञान’ एवं ‘मंथन’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान सत्य की खोज की सतत प्रक्रिया है, जबकि मंथन निरंतर चिंतन एवं आत्मविश्लेषण का प्रतीक है। दोनों के समन्वय से नवाचार एवं सृजन की संभावनाएँ विकसित होती हैं। इस अवसर पर मैपकास्ट के निदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि विज्ञान केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोग एवं अनुभव के माध्यम से जीवन में उतरने वाली प्रक्रिया है। कार्यक्रम में डॉ. वी.के. कटारे, मिशन एक्सीलेंस प्रभारी डॉ. सुनील गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न समूहों के चयनित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने बताया कि रॉकेट प्रक्षेपण स्थल, उपग्रह नियंत्रण प्रणाली तथा अंतरिक्ष अनुसंधान की जटिल प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष देखने से उनके ज्ञान, जिज्ञासा एवं आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।ग्रुप हेड डॉ. रामानुज पाठक, डॉ. राजकुमार शर्मा एवं सीमा अग्निहोत्री सहित शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस यात्रा से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, अनुशासन, टीमवर्क एवं जिज्ञासा का विकास हुआ है तथा कक्षा-कक्ष से बाहर सीखने की यह पद्धति अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।कार्यक्रम के अंत में मिशन एक्सीलेंस प्रभारी डॉ. सुनील गर्ग ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। समापन अवसर पर यह स्पष्ट हुआ कि विज्ञान मंथन यात्रा केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं, बल्कि एक प्रभावी ज्ञानयात्रा है, जो विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर उन्हें भविष्य में नवाचार एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित करती है। 

4 लाख 20 हजार किसानों से 17 लाख 82 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थिति के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिकटन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही गेहूं का उपार्जन भी किया जा रहा है। दो दिन में बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 36 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.23 लाख किसानों द्वारा 52.53 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके है। प्रदेश में 4 लाख 20 हजार 277 किसानों से 17 लाख 82 हजार 984 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने वाले किसानों को 2546.92 करोड़ रुपये के भुगतान के लिये ईपीओ जनरेट किए गए। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रो पर प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूं विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र किया गया। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थाल, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्थाए की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के पीसी सेप पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यसवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूं की भर्ती जूट बारदाने के साथ-साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यावस्था की गई है, जिससे उपार्जित गेहूं का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ को वैज्ञानिक दिशा प्रदान करेगी विशेषज्ञ समिति

भोपाल देश में वन्य जीव संरक्षण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति का गठन देशभर के चिड़ियाघरों में संचालित ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ गतिविधियों की समीक्षा, मार्गदर्शन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। समिति में पहली बार मध्यप्रदेश कैडर के आईएफएस अधिकारी डॉ. ए. अंसारी को शामिल किया गया है। डॉ. अंसारी प्रदेश के सिवनी में वर्किंग प्लान अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। समिति में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें- डॉ. ए. अंसारी (वर्किंग प्लान ऑफिसर, सिवनी, मध्यप्रदेश), डॉ. मनोज वी. नायर (अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, ओडिशा), डॉ. कार्तिकेयन वासुदेवन (वैज्ञानिक, हैदराबाद) और डॉ. अभिजीत पावडे (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली) शामिल हैं। समिति का कार्यकाल आदेश जारी होने की तिथि से 6 माह निर्धारित किया गया है। गैर-सरकारी सदस्यों को बैठक शुल्क एवं यात्रा भत्ता केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जाएगा। प्राधिकरण समिति को आवश्यक प्रशासनिक एवं सचिवीय सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ समिति का गठन देश में वन्यजीव संरक्षण और लुप्तप्राय प्रजातियों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी, संगठित और परिणामोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी। इस समिति के गठन से देशभर के चिड़ियाघरों में संचालित संरक्षण प्रयासों को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है। समिति चिड़ियाघरों में संरक्षण प्रजनन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। इनमें—संरक्षण प्रजनन प्रस्तावों की समीक्षा एवं सिफारिशें, वित्तीय सहायता के प्रस्तावों का परीक्षण, प्राथमिकता वाली प्रजातियों की पहचान और सूची का पुनरीक्षण, समन्वयक और सहभागी चिड़ियाघरों की भूमिका निर्धारित करना,कार्यक्रम के मूल्यांकन और मॉनिटरिंग के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं का विकास, प्रगति रिपोर्ट के लिए प्रारूप तैयार करना और चिड़ियाघरों के मूल्यांकन हेतु प्रश्नावली विकसित करना शामिल हैं। समिति मास्टर प्लान प्रस्तुत करने के लिए प्रारूप भी तैयार करेगी और आवश्यकतानुसार अन्य कार्य भी संपादित करेगी।  

बीते चार वर्ष में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया सकारात्मक बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में संचालित सांदीपनि विद्यालय शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की अनूठी नजीर पेश कर रहे हैं। एमपी बोर्ड के हाल ही जारी 10वीं-12वीं के परीक्षा परिणामों में सांदीपनि विद्यालयों के 58 विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय मेरिट में स्थान पाने में सफलता हासिल की है। इतना ही नहीं, एमपी बोर्ड की इन परीक्षाओं में सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम साल दर साल बेहतर हो रहा है। विगत चार वर्षों में सांदीपनि विद्यालयों ने 10वीं-12वीं के परीक्षा परिणामों में 20 से 28 प्रतिशत तक का सुधार दर्ज कराया है। वर्ष 2026 में कक्षा 10 की राज्य स्तरीय मेरिट सूची में जहां 41 विद्यार्थी सांदीपनि विद्यालयों से हैं, वहीं कक्षा 12 में विज्ञान, वाणिज्य, कला और कृषि संकायों की मेरिट सूची में 17 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। 10वीं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी वर्ष 2023 से संचालित इन सांदीपनि विद्यालयों के वर्ष 2026 तक के परीक्षा परिणामों में वर्ष दर वर्ष प्रगति हो रही है। वर्ष 2023 में एमपी बोर्ड की कक्षा 10वीं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत 68 था, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 88 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं 10वीं कक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत भी 46 से बढ़कर 75 प्रतिशत से अधिक हो गया है। 12वीं का परीक्षा परिणाम 28 प्रतिशत तक सुधरा कक्षा 12वीं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत वर्ष 2023 के 59 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2026 में बढ़कर 87 प्रतिशत से अधिक हो गया। वहीं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत 42 से बढ़कर 75 प्रतिशत तक हो गया। सांदीपनि विद्यालयों के प्रयास उत्कृष्ट परिणाम देने पर केंद्रित इन उपलब्धियों के पीछे सांदीपनि विद्यालयों में सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण, नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग, शिक्षक-छात्रों के बीच बेहतर संवाद तथा परिणाम आधारित रणनीतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रथम श्रेणी में विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने के प्रतिशत में निरंतर वृद्धि इस बात का संकेत है कि अब प्रयास केवल परीक्षा पास करने तक सीमित न रहकर उत्कृष्ट परिणाम देने पर केंद्रित हो रहे हैं। इन प्रयासों ने शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धा की भावना तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रेरणा भी विकसित की है। परिणामोन्मुख और छात्र-केंद्रित शिक्षा का प्रेरणादायक मॉडल सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश के लिए किसी प्रकार की मेरिट या चयन परीक्षा की अनिवार्यता नहीं होती है। इन विद्यालयों में स्थानीय या आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। इन विद्यालयों के कारण सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के विद्यार्थियों को भी शिक्षा के आदर्श और आधुनिक वातावरण में अध्ययन करने का अवसर मिलता है। ऐसे में सांदीपनि विद्यालय आज गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और छात्र-केंद्रित शिक्षा का एक सशक्त और प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहे हैं।  

छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवा धाम कुरियारी में आयोजित 9 दिवसीय राम कथा में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी मती कौशल्या साय के साथ आश्रम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि सदैव भगवान राम के चरणों से धन्य रही है। उन्होंने वनवास काल में भगवान राम के आगमन और माता शबरी की अद्भुत भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने आस्था, समर्पण और विश्वास की अनूठी परंपरा को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि तेंदुवाधाम आज धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु एक साथ राम कथा का श्रवण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक ही मंच से अनेक संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना विशेष अनुभव है। उन्होंने आश्रम परिसर में हरिवंश औषधालय एवं पंचकर्म केंद्र,  राम-जानकी मंडपम, हरिवंश वैदिक पाठशाला, मां दुर्गा गौ मंदिर और हनुमत प्रवेश द्वार सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के लोकार्पण पर आश्रम प्रबंधन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि भी है। उन्होंने अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण के दौरान छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक चावल और चिकित्सकों की टीम के वहां पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेशवासियों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान राम भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और जवानों के अदम्य साहस से आज प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है तथा राज्य में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” यहां की संस्कृति और जीवन मूल्यों की सच्ची पहचान है। इस अवसर पर परमपूज्य वासुदेवनंद सरस्वती महाराज, किन्नर अखाड़ा प्रमुख मां टीना सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। राघव सेवा समिति के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश ने बताया कि यह स्थल माता शबरी की जन्मभूमि शिवरीनारायण में स्थित है, जहां ‘कलिंग शैली’ में भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। आश्रम में औषधालय, वैदिक विद्यालय, गौ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गीता वाटिका, शबरी रसोई और निर्धन कन्या विवाह जैसी अनेक सामाजिक-धार्मिक पहल संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के तहत विभिन्न वर्गों – दिव्यांगजन, रक्तदाता, कुष्ठ रोगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों – को समर्पित विशेष दिवस भी आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सांसद मती कमलेश जांगड़े, महंत  रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

शादी में लूट का तांडव: पहले चाचा से बैग, फिर दूल्हे के पिता से 95 हजार लेकर फरार हुए बदमाश

ग्वालियर  शहर में आधी रात लूट की दो वारदातों ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। महज 17 मिनट के भीतर बहोड़ापुर और किलागेट के बीच महज तीन किलोमीटर के दायरे में बारातों में ही बाइक सवार बदमाशों ने लूट को अंजाम देकर पुलिस को खुली चुनौती दे डाली। पहली वारदात रात 12.02 बजे राजवाड़ा पैलेस के बाहर हुई। यहां दूल्हे के चाचा से बारात से थोड़े ही आगे बैग लूट लिया। इसमें रुपये और बेंदा था। इसके बाद बहोड़ापुर में पटेल बारात घर के बाहर दूसरी बारात में दूल्हे के पिता को निशाना बना डाला। दूल्हे के पिता से 95 हजार रुपये की लूट की है। सीसीटीवी में कैद हुई लुटेरों की करतूत दोनों ही वारदातों में एक ही गैंग के बदमाश हैं। काले रंग की पल्सर पर सवार बदमाशों ने ही लूट की है। दोनों ही घटनाएं सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई हैं, लेकिन पुलिस आरोपितों तक पहुंचने में अभी सफल नहीं हो सकी है। लुटेरों की पहचान के प्रयास चल रहे हैं। बहोड़ापुर, ग्वालियर और क्राइम ब्रांच थाने की टीमें आरोपितों की तलाश में लगी हैं। रात 12.02 बजे राजवाड़ा पैलेस के पास पहली वारदात हुई। हनुमान नगर निवासी कामता प्रसाद श्रीवास के भतीजे की शादी राजवाड़ा पैलेस से थी। कामता प्रसाद बारात से थोड़े आगे चल रहे थे। उन्होंने बताया कि पहले सामने से बाइक सवार बदमाश आए और पीछे की तरफ गए। यही बदमाश लौटकर आए और पीछे से बैग पर झपट्टा मारकर लूट लिया। बैग छीनने के झटके से कामता प्रसाद सड़क पर गिर पड़े और जब तक शोर मचाया, लुटेरे भाग चुके थे।