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Madhya Pradesh सरकार का बड़ा तोहफा, 75%+ अंक लाने वाले छात्रों को मिलेगा लैपटॉप अनुदान

भोपाल. प्रदेश में इस साल भी 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों की संख्या बढ़ी है। इसका असर मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना पर भी पड़ा है। इस साल इस योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 26 हजार ज्यादा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल से उन सभी विद्यार्थियों की सूची मांगी है, जिन्होंने 12वीं परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। विभाग द्वारा सूची के सत्यापन के बाद पात्र विद्यार्थियों के खातों में सीधे राशि ट्रांसफर की जाएगी। जून व जुलाई में विद्यार्थियों को लैपटाप की राशि प्रदान करने की तैयारी है। इस योजना पर इस साल सरकार करीब 302 करोड़ रुपयों से अधिक खर्च करने जा रही है। हर साल बढ़ रहा आंकड़ा वर्ष लैपटॉप पाने वालों की संख्या 2023 – 78000 2024 – 90,000 2025 – 94,500 16 साल पहले शुरू हुई थी योजना मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की शुरुआत वर्ष 2009-10 में की गई थी। प्रारंभ में इस योजना के तहत केवल 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को ही पात्र माना जाता था। उस समय लाभार्थियों की संख्या करीब 20 से 25 हजार के बीच रहती थी। बाद में इसे घटाकर 70 प्रतिशत किया गया। कुछ वर्षों से 75 प्रतिशत अंक का मानक तय किया गया है। स्कूल टॉपर को स्कूटी मिलती है राज्य सरकार मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य योजनाएं भी चला रही है। शासकीय स्कूलों में 12वीं कक्षा के टॉपर विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान करने की योजना भी लागू है। इसमें स्कूल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला छात्र या छात्रा पात्र होता है। 1.21 लाख विद्यार्थियों को राशि इस बार मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। मंडल से ऐसे विद्यार्थियों की सूची मांगी गई है। – धर्मेंद्र शर्मा, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय।

जीनोमिक्स क्रांत,AIIMS में भविष्य की चिकित्सा पर चर्चा

 नई दिल्ली बीमारियों का उपचार अब सबके लिए एक जैसा नहीं रहेगा, बल्कि अब यह हर मरीज के जीन (DNA) के आधार पर तय किया जाएगा। इसे प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है, जिसमें उपचार अधिक सटीक, प्रभावी और व्यक्तिगत होता है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं और ज्यादा उन्नत तथा प्रभावी हो जाएंगी। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में ‘डीएनए डे 2026’ पर आयोजित संगोष्ठी में सामने आई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीनोमिक्स (डीएनए आधारित विज्ञान) के उपयोग से भविष्य में उपचार का तरीका बदलने वाला है। चिकित्सक मरीज की जेनेटिक जानकारी के आधार पर बीमारी का बेहतर निदान और सही उपचार कर सकेंगे। जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर संगोष्ठी में जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर दिया गया। संगोष्ठी का आयोजन डीएनए सोसायटी आफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (एसवाईएस-एम्स) ने संयुक्त रूप से कराया। संगोष्ठी में 1953 में डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज और 2003 में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की पूर्णता को भी रेखांकित किया गया। उद्घाटन सत्र डीएनए सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. अशोक शर्मा ने प्रिसिजन मेडिसिन में जीनोमिक्स की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि, सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आईजीआईबी) के मुख्य वैज्ञानिक प्रो. अभय शर्मा ने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान पर न‌ई जानकारी साझा की। उन्होंने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान के उभरते आयामों को समझाया। कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत मुख्य व्याख्यान में शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के प्रो. संजीव गलांडे ने 'कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत किया। डीएसआइ के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य प्रो. श्रीकांत कुकरेती ने जीनोमिक्स अनुसंधान और क्लिनिकल उपयोग के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता बताई। प्रीमास लाइफ साइंसेज के डा. भास्कर मैती ने स्पैटियल बायोलॉजी और मल्टीओमिक्स तकनीकों के उपयोग को समझाया। 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति वाले इस आयोजन में विशेषज्ञों ने ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी पहलों को देश में किफायती और सुलभ जीनोमिक चिकित्सा के लिए अहम बताया।

नायब सरकार की इंडस्ट्री पॉलिस,रोजगार, सब्सिडी और टेक्नोलॉजी पर जोर

चंडीगढ़  बहुत जल्द नायब सरकार अपनी नई उद्योग पालिसी-2026 लेकर आ रही है। ड्राप्ट तैयार हो चुका है। पिछले सप्ताह दो दिन उद्यमियों के साथ नई दिल्ली में बैठक कर पालिसी को लेकर सुझाव और निवेश पर चर्चा करने के बाद उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। पॉलिसी बनने के बाद कैबिनेट की मंजूरी लेने के बाद उसे लागू कर दिया जाएगा। नई पॉलिसी में रोजगार, निवेश और नई तकनीक के साथ-साथ बेहतर उत्पाद बनाने वाली औद्योगिक इकाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। नायब सरकार का दावा है कि देश की सबसे बेहतर उद्योग पॉलिसी होगी। युवाओं और महिलाओं को मिलेगी और अधिक नौकरी नई पॉलिसी में हरियाणा के युवाओं को अधिक रोजगार देने वाली कंपनियों के लिए सरकार से मिलने वाली सालाना प्रोत्साहन राशि में बढ़ोत्तरी हो सकती है। कंपनी अगर दिव्यांग और स्थानीय महिलाओं को नौकरी देगी तो सरकार की ओर से उसे प्रति वर्ष 1.2 लाख रुपये की प्राेत्साहन राशि देगी। जो कंपनी सबसे अधिक हरियाणा के युवाओं को लगाएगी उसे अधिक सब्सिडी मिल सकती है। रिसर्च सेंटर बनाने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी लार्ज इंडस्ट्री को दस करोड़ तो मेगा कंपनियों को पसास करोड़ रुपये तक देने का भी प्रविधान बन सकता है। यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद का नेशनल स्तर पर पेटेंट कराती है तो उसे 50 लाख और विश्व स्तर पर कराने पर बतौर इनाम एक करोड़ की राशि राज्य सरकार देगी। ऐसे होगा निगरानी तंत्र पॉलिसी के तहत एक उच्चस्तरीय समिति होगी जिसके मुख्यमंत्री खुद होंगे। यह समिति अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी देगी। हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन बोर्ड का गठन होगा जिसे अध्यक्ष उद्योग मंत्री होंगे जो मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी देगा। एक उद्योग विभाग की समिति होगी हो छोटी औद्योगिक इकाइयों को मंजूरी देगी। नई पॉलिसी की खसियत     कंपनियों को निवेश पर नहीं बल्कि प्रदर्शन के आधार पर लाभ मिलेगा     कोर क्षेत्र में 30 प्रतिशत इंटरमीडिएट में 60 सब प्राइम में 75 और प्राइम क्षेत्र में 100 स्टांप डयूटी पर छूट मिलेगी     सिंगल विंडो सिस्टम होगा। एक पोर्टल पर सभी सुविधा मिलेगी, जिसमें आनलाइन आवेदन, ट्रैकिंग सिस्टम और तय समय में स्वीकृत मिलना शामिल है।     आटोमोबाइल, ऑटो पार्टस, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रानिक्स, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी, ईवी, केमिकल, तथा पेट्रोकेमिकल इन्हें पांच प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का प्रविधान बनाया जा सकता है।  

मरीजों और परिजनों को राहत, एम्स भोपाल में 400 वाहनों की नई पार्किंग बनेगी

एम्स भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मुख्य द्वार पर नई पार्किंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने से न केवल अस्पताल परिसर व्यवस्थित नजर आएगा, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को वाहन सुरक्षित खड़े करने की बड़ी सुविधा मिलेगी। फिलहाल पार्किंग स्थल पर फिनिशिंग का काम चल रहा है, जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं एम्स भोपाल में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। एम्स के पीआरओ डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि नई पार्किंग में 400 से अधिक वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था की गई है। फिनिशिंग कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी व्यवस्थित पार्किंग होने से अस्पताल परिसर में यातायात भी सुचारू रहेगा और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी। वर्तमान में एम्स की ओपीडी रोजाना चार हजार से अधिक रहती है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को वाहन खड़ा करने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। जगह के अभाव में लोग अपने वाहन बाहर मैदान या सड़कों के किनारे खड़े करने को मजबूर थे, जिससे अक्सर वाहन चोरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नई पार्किंग शुरू होने के बाद इस समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।  

HRRL रिफाइनरी में आग के बाद मरम्मत तेज, मई में उत्पादन की तैयारी

बाड़मेर  राजस्थान के बालोतरा (पचपदरा) में अग्निकांड के बाद खुशखबरी मिली है। देश की महत्वाकांक्षी परियोजना एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) में फिर से जल्द ही सुचारू होगी। हाल ही में हुई अग्नि दुर्घटना को लेकर कंपनी ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। रिफाइनरी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में लगी आग के बाद अब मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। कंपनी का लक्ष्य है कि मई 2026 के अंत तक यूनिट को दोबारा चालू कर उत्पादन शुरू कर दिया जाए। जांच में खुलासा: लीकेज बना हादसे की वजह कंपनी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह आग सीडीयू यूनिट के हीट एक्सचेंजर स्टैक तक ही सीमित रही। दुर्घटना का मुख्य कारण वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से हाइड्रोकार्बन का रिसाव माना जा रहा है। राहत की बात यह रही कि सुरक्षा प्रणालियों के सक्रिय होने से आग पूरे प्लांट में नहीं फैली। इस हादसे में कुल छह एक्सचेंजर और उनसे जुड़े सहायक उपकरणों को नुकसान पहुंचा है, जिन्हें अब बदला या दुरुस्त किया जा रहा है। मई 2026 से मिलेगा स्वदेशी ईंधन एचआरआरएल प्रबंधन के अनुसार, प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का काम अगले 3 से 4 सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी की योजना के मुताबिक मई 2026 का दूसरा पखवाड़ा से सीडीयू यूनिट को दोबारा शुरू किया जाएगा। कंपनी ने इसके लिए मई के तीसरे- चौथे सप्ताह की समयसीमा रखी है। इसी महीने के दौरान एलपीजी, पेट्रोल (MS), डीजल (HSD) और नैफ्था जैसे उत्पादों का ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। अन्य सहायक इकाइयां पहले से ही कमीशनिंग के अंतिम चरण में हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से स्थिर किया जाएगा। राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में लगी भीषण आग, PM मोदी करने वाले थे उद्घाटन पढ़िये पदपचरा रिफाइनरी अग्निकांड से जुड़ी प्रमुख बातें     कंपनी की प्रारम्भिक जांच के अनुसार आग लगने की मुख्य वजह हाइड्रोकार्बन का रिसाव था।     यह रिसाव वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे एक प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से हुआ था।     पदपचरा रिफाइनरी 80,000 करोड़ रुपये की विशाल परियोजना है, जिसकी ल क्षमता 9 मिलियन टन प्रति वर्ष है।  

आगरा में RTE दाखिले में लापरवाही, 18 स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी

 आगरा  यूपी के आगरा में निशुल्क शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब और कमजोर आय वर्ग के बच्चों को निजी स्कूल प्रवेश नहीं दे रहे हैं। 2213 बच्चे प्रवेश से वंचित हैं। स्कूल संचालक अभिभावकों को औपचारिकता पूरी कराने के लिए टाल मटोल करने में लगे हैं। शुक्रवार को जिला टास्क फोर्स (डीटीएफ) की बैठक में डीएम मनीष बंसल के सामने यह मामला आया तो उन्होंने ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है। आरटीई के तहत आगरा के 8112 बच्चों को प्रवेश लिए चयनित किया गया था। इनमें से 5899 बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिल चुका है। मगर 2213 बच्चे प्रवेश के लिए भटक रहे हैं। उनके माता-पिता स्कूलों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो चुके हैं। डीएम ने जब इस लापरवाही का कारण पूछा तो अधीनस्थों ने बताया कि 18 निजी स्कूल हैं जो कि अड़चन पैदा कर रहे हैं। हालांकि इन स्कूलों को नोटिस जारी कर दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी बच्चों को प्रवेश नहीं हुआ है। इस पर डीएम ने फटकार लगाते हुए इन स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बीईओ जाकर कराएं प्रवेश: डीएम डीएम मनीष बंसल ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ऐसे स्कूलों में खुद जाकर देखें किन कारणों से बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहे हैं। जो औपचारिकताएं पूरी करा चुके हैं, उनके बच्‍चों को तत्काल प्रभाव से प्रवेश कराया जाए। प्रवेश नहीं देने के कारण जानकार उन्हें इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आरटीई में शत प्रतिशत प्रवेश कराया जाना चाहिए। जो प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। बीईओ रोजाना चखेंगे मिडडे मील नवागत डीएम मनीष बंसल ने स्कूल चलो अभियान को जनआंदोलन बनाने की बात कही है। स्कूलों में पंजीकरण की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ये भी देखा जाए कि बच्चें प्रतिदिन स्कूल पहुंचे। इसके अलावा बच्चों को मिलने वाला मिड डे मील को बीईओ बच्चों के साथ बैठकर मिड डे मील खाएं। ऐसा करते हुए प्रतिदिन फोटो शेयर करें।  

BPSC परीक्षा में सॉल्वर गैंग का जाल, 8 FIR दर्ज

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) की परीक्षा में धांधली की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें एक बड़े संगठित गिरोह और 'सॉल्वर गैंग' की भूमिका सामने आ रही है। इस मामले में अब तक बिहार के 5 अलग-अलग जिलों में 8 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, वहीं पुलिस ने अब तक कुल 38 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। EOU ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BPSC से कई अहम जानकारियां मांगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। 5 जिलों में एक जैसा चीटिंग पैटर्न EOU की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा और गया जैसे जिलों के परीक्षा केंद्रों पर धांधली का एक जैसा पैटर्न मिला है। कई अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज के साथ रंगे हाथों पकड़े गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस धांधली के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था, जो अभ्यर्थियों को 25 से 30 लाख रुपये में परीक्षा पास कराने का झांसा देता था। SIT का गठन कर अब इस संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है। ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर क्यों मेहरबान था आयोग? जांच का सबसे बड़ा और विवादित पहलू परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी 'मेसर्स साई एजु केयर प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर' की भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस कंपनी को परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, उसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले ही ब्लैकलिस्टेड कर रखा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक दागी कंपनी को इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा का जिम्मा कैसे दिया गया? इसके अलावा, बायोमेट्रिक हाजिरी लेने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनसे अब कड़ी पूछताछ की जा रही है। 14 से 21 अप्रैल के बीच हुई थी परीक्षा BPSC ने 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच AEDO की परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के दौरान ही कई केंद्रों से गड़बड़ी की खबरें आने लगी थीं, जिसके बाद EOU ने मोर्चा संभाला। अब EOU ने BPSC से उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा है, जो परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी के चयन में शामिल थे।

हाईटेक एंबुलेंस सेवा से मिलेगा तेज इलाज, GPS और लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस होंगे वाहन

चंडीगढ़ हरियाणा की सड़कों पर बढ़ते हादसे अब सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि हर मिनट जिंदगी और मौत की जंग बन चुके हैं। कई मामलों में एंबुलेंस की थोड़ी सी देरी भारी पड़ जाती है। इसे देखते हुए राज्य सरकार अब अपने इमरजेंसी एंबुलेंस नेटवर्क की रफ्तार को तेजी देगी ताकि हादसे के बाद मदद मिनटों में पहुंचे, घंटों में नहीं। इसके लिए राज्य सरकार अपने एंबुलेंस बेड़े में 296 नई एंबुलेंस शामिल करने जा रही है। इन एंबुलेंस के जरिये सरकार का लक्ष्य किसी भी हादसे या ट्रामा के स्पॉट पर दस मिनट से कम समय पर पहुंचने का रखा गया है। नए बेड़े में 70 एंबुलेंस एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट वाली होंगी। 59 को आउटसोर्सिंग के जरिये शामिल किया जाएगा। बाकी 167 बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एंबुलेंस की खरीद प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया, ट्रॉमा, हार्ट अटैक और सड़क हादसों जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट की अहमियत होती है। खासतौर पर हाईवे और घनी आबादी वाले शहरों में बढ़ती इमरजेंसी कॉल्स को देखते हुए त्वरित प्रतिक्रिया बेहद जरूरी हो गई है। कोशिश है कि जरूरत के समय एंबुलेंस दस मिनट से कम समय पर पहुंचे। मार्च का हमारी एंबुलेंस का औसत 9.29 मिनट का आया है। अब इसे नौ मिनट के आसपास ही रखना है। इस पर खासी निगरानी की जा रही है। अमर उजाला ने एंबुलेंस की कमी का भी मुद्दा उठाया था। सात जिलों में एंबुलेंस की संख्या बढ़ेगी राज्य में फिलहाल 550 एंबुलेंस हैं। इनमें 210 के वाहन अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। गुरुग्राम में 27 एंबुलेंस को बढ़ाकर 35, फरीदाबाद में 20 से 27, पंचकूला में 21 से 27, यमुनानगर में 20 से 25, हिसार में 30 से 33, करनाल में 30 से 31 और सिरसा में 32 से 37 एंबुलेंस तैनात करने का प्रस्ताव है। इस विस्तार का मकसद आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को कम करना और दुर्घटना या गंभीर मरीजों तक तेजी से चिकित्सा सहायता पहुंचाना है। हाईटेक होगी एंबुलेंस सेवा नई एंबुलेंस सिर्फ संख्या नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि तकनीक से भी लैस होंगी। इनमें रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग, ऑटोमैटिक कॉल-रूटिंग सिस्टम और डायरेक्ट कम्युनिकेशन डिवाइस लगाए जाएंगे जिससे कॉल से लेकर रिस्पॉन्स तक का समय घटेगा। एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस में कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और जरूरी दवाओं जैसी सुविधाएं होंगी ताकि मरीज को मौके पर ही स्थिर किया जा सके। इसके साथ ही स्टाफ को भी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। ड्राइवर, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन और कॉल सेंटर ऑपरेटरों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि कॉल आने से लेकर मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक हर कदम पर बेहतर तालमेल बन सके। किस साल कितना टाइम रहा साल             एंबुलेंस का टाइम 2017-18             16 मिनट 2018-19             16 मिनट 2019-20             16 मिनट 2020-21             15 मिनट 2021-22             13 मिनट 2022-23             12 मिनट 2023-24             12 मिनट 2024-25             11 मिनट  

रांची में जल संकट गहराया, धुर्वा-हटिया क्षेत्र में आपूर्ति बाधित

रांची  झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रही है. खासकर धुर्वा और आसपास के इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे करीब एक लाख की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है. भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. हटिया डैम से सप्लाई बाधित शहर के कई प्रमुख इलाकों (धुर्वा, हटिया, डोरंडा, हिनू, बिरसा चौक और एयरपोर्ट क्षेत्र) में हटिया डैम से होने वाली जलापूर्ति बाधित हो गई है. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पिछले 72 घंटों से नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है. इससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. जलापूर्ति बाधित होने का असर घरों के साथ-साथ छोटे व्यवसायों और दुकानों पर भी देखने को मिल रहा है. बिजली कटौती बनी मुख्य वजह पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार इस संकट की सबसे बड़ी वजह लगातार हो रही बिजली कटौती है. हटिया डैम स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशनों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है. बिजली की कमी के कारण पानी को लिफ्ट करने और पाइपलाइन में पर्याप्त दबाव (प्रेशर) बनाने में समस्या आ रही है. इसी वजह से जलापूर्ति पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही है. आंशिक सप्लाई से बढ़ी परेशानी पिछले तीन दिनों से इन इलाकों में केवल आंशिक जलापूर्ति ही हो रही है. कई जगहों पर नलों में पानी आता भी है, तो उसका प्रेशर बेहद कम होता है. इससे लोगों को पानी भरने में काफी दिक्कत हो रही है. धुर्वा सेक्टर-2 के निवासी राजीव सिन्हा बताते हैं कि नल से पानी या तो आता नहीं है, और अगर आता है तो इतना कम कि बर्तन भरना भी मुश्किल हो जाता है. बाजार से पानी खरीदने को मजबूर लोग जल संकट के चलते लोग अब बाजार से जार और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हो गए हैं. इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में पानी की मांग पहले से ज्यादा होती है, लेकिन सप्लाई अनियमित होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई है. कई परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी का इंतजाम करना चुनौती बन गया है. विभाग ने जताई परेशानी पेयजल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे बिजली विभाग के साथ समन्वय बनाकर स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जब तक पावर कट की समस्या दूर नहीं होती, तब तक जलापूर्ति को पूरी तरह बहाल करना मुश्किल रहेगा. अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बिजली आपूर्ति सामान्य होगी, जलापूर्ति भी धीरे-धीरे सुचारू हो जाएगी. लोगों में बढ़ती नाराजगी लगातार हो रही पानी की किल्लत से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में ऐसी समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जलापूर्ति और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सके. जल्द समाधान की उम्मीद फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में जुटे हैं. लेकिन जब तक बिजली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक जल संकट से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. रांची के हजारों लोगों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, और सभी को जल्द से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.  

ड्रोन से इंदौर में ट्रैफिक पर सख्ती, 2430 मामलों में हुई कार्रवाई

इंदौर शहर में यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीकों का उपयोग निरंतर बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में लगातार ड्रोन सर्विलांस के माध्यम से प्रमुख चौराहों एवं मुख्य मार्गों पर व्यस्तम समय के दौरान प्रभावी निगरानी की जा रही है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध ड्रोन से प्राप्त इनपुट के आधार पर मौके पर तैनात यातायात पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई। इसमें गलत पार्किंग, संकेत उल्लंघन, गलत दिशा आदि पर कार्रवाई की गई। चारों जोनों में विस्तारित ड्रोन सर्विलांस ड्रोन सर्विलांस के दायरे को और अधिक विस्तारित करने के लिए यातायात के चारों जोनों में अलग-अलग ड्रोन टीमों द्वारा लगातार व्यस्तम समय में कार्य किया जा रहा है। डीसीपी (यातायात) राजेश कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में व्यस्तम समय के दौरान मुख्य चौराहों, मार्गों में ड्रोन के माध्यम से यातायात व्यवस्था की निगरानी की गई। ड्रोन में लगे पीए सिस्टम द्वारा अनाउंसमेंट भी किए गए, जिससे आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा सकें। कंट्रोल रूम और वायरलेस के जरिए त्वरित यातायात प्रबंधन ड्रोन सर्विलांस टीम द्वारा जहां कहीं भी यातायात बाधित पाया गया, वहां से तत्काल वायरलेस के माध्यम से कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। कंट्रोल रूम द्वारा नजदीकी ट्रैफिक पॉइंट को सूचित कर त्वरित रूप से यातायात व्यवस्था को सुचारु कराया गया। आगामी समय में भी यातायात पुलिस द्वारा शहर के प्रमुख मार्गों एवं चौराहों को चिह्नित कर ड्रोन सर्विलांस के माध्यम से इस प्रकार की कार्रवाई निरंतर जारी रखी जाएगी।