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बाइक स्टंट के दौरान हुई त्रासदी, ट्रेलर से टकराकर 3 युवकों की मौत

रीवा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रील बनाने का खतरनाक शौक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ. मऊगंज के नेशनल हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार में रील बनाते समय यह हादसा हुआ. घटना का खौफनाक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तीन युवक तेज रफ्तार बाइक पर नजर आ रहे हैं।  दरअसल, मऊगंज थाना क्षेत्र के पन्नी पथरिया स्थित नेशनल हाईवे पर यह हादसा हुआ. दो बाइकों में सवार कुल पांच लोग इसकी चपेट में आ गए. जानकारी के अनुसार, एक पल्सर बाइक पर सवार तीन युवक तेज रफ्तार में चलते हुए मोबाइल से रील बना रहे थे. इसी दौरान उनकी बाइक सड़क किनारे खड़े ईंट से लोड ट्रेलर से जा टकराई।  टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक उछलकर दूर जा गिरे और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई. इसी बीच पीछे से आ रही दूसरी बाइक भी उसी खड़े ट्रेलर से भिड़ गई, जिससे उसमें सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।  पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया. सची पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ. घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।  डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है. पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है।  मृतकों और घायलों की पहचान पुलिस के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान 17 वर्षीय उपलक्ष कोल, 22 वर्षीय अमरीश कोल और 17 वर्षीय हेमराज कोल के रूप में हुई है. तीनों बेला गांव के निवासी थे और लौर थाना क्षेत्र से संबंधित थे।  वहीं, हादसे में घायल हुए दो सगे भाइयों की पहचान प्रशांत द्विवेदी और प्रदीप द्विवेदी के रूप में हुई है, जो चितपुरवा गांव के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट के कारण तीन लोगों की मौत और दो के घायल होने की पुष्टि हुई है। 

यूपी में 40 आईएएस अफसरों के तबादले, 15 जिलों के डीएम भी बदले गए

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा हेरफेर किया है। सीएम योगी के निर्देश पर देर रात 40 आईएएस अफसरों के तबादले किए गए हैं। इनमें 15 जिलों के डीएम और 5 जिलों के सीडीओ का भी ट्रांसफर हुआ है। वहीं, परिवहन आयुक्त समेत दो कमिश्नर और 1 प्रमुख सचिव और 4 विशेष सचिव के स्तर पर भी तबादला हुआ है। उन्नाव के जिलाधिकारी गौरांग राठी को झांसी का डीएम, विशेष सचिव ऊर्जा इंद्रजीत सिंह को सुल्तानपुर का डीएम नियुक्त किया गया है, जबकि सुल्तानपुर के डीएम कुमार हर्ष को बुलंदशहर भेजा गया है। विशेष सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक अन्नपूर्णा गर्ग को श्रावस्ती का डीएम बनाया गया है।  झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आलोक यादव को शामली का डीएम तथा शामली के डीएम अरविंद कुमार चौहान को सहारनपुर का डीएम नियुक्त किया गया है। हापुड़ पिलखुआ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नितिन गौड़ को अमरोहा का डीएम बनाया गया है। इसी तरह विशेष सचिव खाद्य एवं रसद अभिषेक गोयल को हमीरपुर का डीएम, निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार सरनीत कौर ब्रोका को रायबरेली का डीएम और अमरोहा की डीएम निधि गुप्ता वत्स को फतेहपुर का डीएम बनाया गया है। हमीरपुर के डीएम घनश्याम मीणा को उन्नाव, मैनपुरी के डीएम अंजनी कुमार सिंह को लखीमपुर खीरी और औरैया के डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को मैनपुरी का डीएम नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव बृजेश कुमार को औरैया का डीएम बनाया गया है।  सहारनपुर के डीएम मनीष बंसल को आगरा भेजा गया है, जबकि आगरा के डीएम अरविंद मल्लप्पा बांगरी को मुख्यमंत्री का विशेष सचिव बनाया गया है। प्रबंध निदेशक दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, आगरा नीतीश कुमार को प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बुलंदशहर की डीएम श्रुति को दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, आगरा का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। प्रतीक्षारत आईएएस आशुतोष निरंजन को परिवहन आयुक्त और परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को सचिव माध्यमिक शिक्षा नियुक्त किया गया है। लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को देवीपाटन मंडल का कमिश्नर बनाया गया है। देवीपाटन मंडल के कमिश्नर शशि भूषण लाल सुशील को प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार द्वितीय को एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। फतेहपुर के जिलाधिकारी रविंदर सिंह को विशेष सचिव ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, निदेशक यूपीनेडा तथा प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाया गया है। झांसी के जिलाधिकारी मृदुल चौधरी को विशेष सचिव पर्यटन एवं निदेशक पर्यटन नियुक्त किया गया है। श्रावस्ती के डीएम अश्वनी कुमार पांडे को निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण, रायबरेली की डीएम हर्षिता माथुर को निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन का निदेशक बनाया गया है। डॉ. राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ की कुलसचिव अनीता वर्मा सिंह को विशेष सचिव खाद्य एवं रसद विभाग तथा नियंत्रक विधिक बाट-माप नियुक्त किया गया है। सचिन कुमार सिंह (सीडीओ, अमेठी) को अपर निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद बनाया गया है। बसंत अग्रवाल (एडीएम वित्त एवं राजस्व, हाथरस) को निदेशक कर्मचारी राज्य बीमा योजना (श्रम चिकित्सा सेवाएं) नियुक्त किया गया है। सौम्या पांडे को उक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा, जुनैद अहमद (सीडीओ, झांसी) को अपर श्रमायुक्त, कानपुर नगर, हिमांशु गौतम (सीडीओ, हापुड़) को उपाध्यक्ष झांसी विकास प्राधिकरण और मुकेश चंद्र (सीडीओ, बहराइच) को उपाध्यक्ष हापुड़ पिलखुआ विकास प्राधिकरण बनाया गया है। केशव कुमार (सीडीओ, बदायूं) को डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय का कुलसचिव नियुक्त किया गया है। श्रुति शर्मा संयुक्त मजिस्ट्रेट देवरिया को मुख्य विकास अधिकारी हापुड़, गामिनी सिंगला संयुक्त मजिस्ट्रेट सुल्तानपुर को मुख्य विकास अधिकारी बदायूं, सुनील कुमार धनवंता संयुक्त मजिस्ट्रेट आजमगढ़ को मुख्य विकास अधिकारी बहराइच, पूजा साहू संयुक्त मजिस्ट्रेट चित्रकूट को मुख्य विकास अधिकारी अमेठी, रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड संयुक्त मजिस्ट्रेट गाजीपुर को मुख्य विकास अधिकारी झांसी की जिम्मेदारी दी गई है।

Urban Transformation: 1 लाख करोड़ की योजना से टियर-2/3 शहरों की बदलेगी तस्वीर

चंडीगढ़. हरियाणा समेत देश के समस्त राज्यों में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने शहरी चुनौती कोष (अर्बन चैलेंज फंड) और क्रेडिट रिपमेंट गारंटी सब-स्कीम (सीआरजीएसएस) की शुरुआत की है। एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष के साथ चार लाख करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें विशेष फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजना है। केंद्रीय शहरी, ऊर्जा एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल द्वारा लांच किए गए शहरी चुनौती कोष को शहरों के बुनियादी ढांचे के वित्त पोषण में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस कोष के जरिये नगर निकायों को म्युनिसिपल बांड, बैंक ऋण और पीपीपी के माध्यम से संसाधन जुटाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, सीआरजीएसएस के माध्यम से छोटे शहरों को क्रेडिट गारंटी का सहारा मिलेगा, जिससे वे भी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में भागीदारी कर सकेंगे। कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि जुड़े। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता वाले इस फंड के माध्यम से केंद्र सरकार चार लाख करोड़ तक के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह फंड पारंपरिक अनुदान प्रणाली से आगे बढ़कर निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण होगा। अब शहरों को केवल फंड देने की बजाय उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत, जवाबदेह और निवेश के लिए तैयार बनाना केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार ‘विकसित भारत 2047’ का सपना इन्हीं शहरों की मजबूती पर निर्भर करता है। कोष की खास बात यह है कि इसमें केंद्रीय सहायता परियोजना लागत के अधिकतम 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत फंड म्युनिसिपल बांड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए जुटाया जाएगा। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होगा बल्कि निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल आवंटन में से 90 हजार करोड़ रुपये परियोजनाओं के लिए, पांच हजार करोड़ रुपये परियोजना की तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए और पांच हजार करोड़ रुपये क्रेडिट पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना के लिए निर्धारित किए गए हैं। शहरी चुनौती कोष शहरों में परिवर्तनकारी परियोजनाओं को बढ़ावा देगा, जिनमें पुराने शहरों और बाजारों का पुनर्विकास, शहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, गैर-मोटर चालित परिवहन, जल और स्वच्छता ढांचा तथा जलवायु-लचीला विकास शामिल हैं। इस योजना के तहत केवल वही परियोजनाएं प्राथमिकता में होंगी जो स्केलेबल, प्रभावशाली और वित्तीय रूप से व्यवहार्य (बैंक योग्य) हों, ताकि उनका दीर्घकालिक असर दिखाई दे। इस योजना का प्रमुख स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि निकायों को अपनी वित्तीय क्षमता मजबूत करने, सुधार लागू करने और बाजार आधारित फंडिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी ‘शहरी चुनौती कोष’ वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगा, जिसका उद्देश्य भारत के शहरों को नए आर्थिक विकास केंद्रों और भविष्य के ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करना है।

पाकिस्तान यात्रा से लौटे श्रद्धालु: बैसाखी पर्व पर गुरुधामों के दर्शन, सकुशल पूरी हुई यात्रा

अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बैसाखी और खालसा साजना दिवस पर पाकिस्तान गए सिख श्रद्धालुओं का जत्था वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आया है। पाकिस्तान स्थित गुरुधामों के दर्शन करके लौटे इस जत्थे में कुल 2238 श्रद्धालु शामिल थे। पाकिस्तान से लौटे श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि उनकी यात्रा बेहद सुखद और शांतिपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि उनको वहां किसी भी तरह की परेशानी नहीं आई, बल्कि पाकिस्तान सरकार और प्रशासन की ओर से रहने, सुरक्षा और लंगर सहित सभी आवश्यक सुविधाओं का अच्छा प्रबंध किया गया था। श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने श्री ननकाना साहिब, श्री पंजा साहिब, श्री डेरा साहिब और श्री करतारपुर साहिब सहित कई पवित्र स्थलों पर माथा टेका। उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों का धन्यवाद करते हुए अपील की कि धार्मिक यात्राओं के लिए अन्य कॉरिडोर और सुविधाएं बढ़ाई जाएं।

वन भूमि पर कब्जे की कोशिश विफल: जगदलपुर में 14 ग्रामीणों को पुलिस ने दबोचा

जगदलपुर. बस्तर जिले के माचकोट वन परिक्षेत्र में वन भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिश को वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नाकाम कर दिया है। दो अलग-अलग वन अपराध मामलों में कुल 14 ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए सभी आरोपी सुकमा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, लंबे समय से अंदरूनी जंगल क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई कर जमीन पर कब्जा करने की तैयारी चल रही थी। वन विभाग को लगातार बाहरी लोगों के कुल्हाड़ी लेकर जंगल में घूमने की सूचना मिल रही थी। इसके बाद विभागीय टीम ने गुप्त निगरानी और रेकी शुरू की। जांच में सामने आया कि एक गिरोह सुनियोजित तरीके से जंगल की भूमि खाली कर कब्जा जमाने की योजना बना रहा था। वन अमले ने मौके पर दबिश देकर 14 लोगों को धर दबोचा। अधिकारियों के मुताबिक गिरोह का सरगना नागेश पहले भी इसी तरह के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। रिहाई के बाद भी वह ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर फिर अतिक्रमण के लिए ला रहा था। वन विभाग ने पिछले एक वर्ष में 28 से 30 बाहरी लोगों को पकड़कर चेतावनी दी थी। इस बार आरोपियों पर भारतीय वन अधिनियम 1927 और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। वन विभाग ने साफ किया है कि जंगल की जमीन पर कब्जे की हर कोशिश पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Haryana Police Recruitment Update: प्रेग्नेंट कैंडिडेट्स को राहत नहीं, अब चश्मा पहनने वालों के लिए खुला मौका

चंडीगढ़. हरियाणा में साढ़े पांच हजार पुलिस कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है। पुलिस कॉन्स्टेबल बनने के लिए 3.24 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। सोमवार से पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में शारीरिक मापदंड परीक्षा (पीएमटी) की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। इस दौरान अभ्यर्थियों में भर्ती के नियमों को लेकर कुछ संशय है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने गूगल फार्म के माध्यम से अभ्यर्थियों से सवाल पूछे हैं, जिनमें से कुछ ऐसे चुनींदा सवालों के जवाब दिए गए हैं, जो समस्त अभ्यर्थियों को दिशा देने का काम करेंगे। आयोग के चेयरमैन ने कहा है कि पुलिस की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने सिरसा की सुनीता व लक्ष्मी, भिवानी की मालती देवी, कुरुक्षेत्र की काजल, महेंद्रगढ़ की पिंकी और जींद की मीना के एक सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि शारीरिक मापदंड परीक्षा में किसी भी गर्भवती महिला को कोई छूट नहीं दी जाएगी। विशेष परिस्थितियों में केवल पीएसटी (फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट-शारीरिक जांच परीक्षा) में ही छूट दी जा सकती है। गर्भवती महिला अभ्यर्थियों को मेडिकल प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य होगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के साथ एक अलग सार्वजनिक सूचना पीएसटी से पहले जारी कर दी जाएगी। पीएमटी में उम्मीदवार की लंबाई व छाती (पुरुषों के लिए) समेत विभिन्न शारीरिक मापदंड चेक किए जाते हैं। पीएसटी में उम्मीदवार की दौड़ और शारीरिक क्षमता (फिटनेस टेस्ट) लिया जाता है। पीएमटी की प्रक्रिया 31 मई तक पूरी हो सकेगी, जबकि पीएसटी की प्रक्रिया अगले एक पखवाड़े के भीतर किसी भी समय आरंभ हो सकती है। पीएसटी की विस्तृत समय सारणी जल्द होगी जारी रेवाड़ी की प्रियांशु यादव, नूंह के लक्षित व ओमप्रकाश, सोनीपत की एकता, कैथल के विशाल और चुलियाना के अक्षत ने कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन से पूछा है कि क्या पीएमटी और पीएसटी एक साथ होंगे। यदि नहीं तो इनके बीच में कितने समय का अंतर होगा। क्या 85 दिनों की अवधि में पूरी प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। इस सवाल के जवाब में हिम्मत सिंह ने बताया कि पीएमटी का नोटिस जारी किया जा चुका है। पीएसटी इसके बाद आयोजित होगा, जिसकी विस्तृत समय सारणी अलग से जारी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं है कि पीएमटी खत्म होने के बाद ही पीएसटी आरंभ होगा। पीएसटी की प्रक्रिया पीएमटी के चलते-चलते भी शुरू की जा सकेगी। एडमिट कार्ड और एक फोटो पहचान पत्र जरूरी नूंह के ओमप्रकाश, महेंद्रगढ़ की पूजा और जहांगीरपुर की रेणु ने सवाल पूछा है कि पीएमटी और पीएसटी के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं। इस सवाल के जवाब में आयोग ने कहा है कि पीएमटी-पीएसटी का एडमिट कार्ड और एक फोटो पहचान पत्र साथ लाने होंगे। इन दस्तावेजों के बिना प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। दौड़ के दौरान नहीं मिलेगी स्टाप वाच, स्क्रीन लगेगी हिसार के सुनील, बोलन (हिसार) की दिक्षा, कापड़ो के प्रवीण, महेंद्रगढ़ के रविंद्र और बहादुरगढ़ के प्रदीप कुमार ने सवाल किया कि क्या दौड़ के दौरान स्टाप वाच उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके जवाब में कर्मचारी चयन आयोग के चेयमरैन हिम्मत सिंह ने कहा कि पीएसटी के दौरान समय रिकॉर्ड आरएफआईडी आधारित प्रणाली से किया जाएगा, जो कि जर्मन की मशीनों से होगा। अलग से स्टॉप वाच उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। कर्मचारी चयन आयोग डिस्पले स्क्रीन लगवाने की कोशिश कर रहा है, जिस पर दौड़ के समय को लाइव देखा जा सकेगा। कोई शिकायत है तो मौके पर मौजूद मिलेगी समिति नरवाना के दर्शन और रेवाड़ी के हरिपाल ने तकनीकी गड़बड़ी होने पर क्या होगा यानी पीएमटी मशीनों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आयोग के पास क्या फार्मूला है। इस सवाल के जवाब में चेयरमैन ने कहा कि सभी केंद्रों पर पूरी तकनीकी व्यवस्था रहेगी। किसी भी समस्या के लिए मौके पर शिकायत समिति मौजूद रहेगी, जिसके पास अभ्यर्थी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। लेकिन हमें उम्मीद है कि कोई तकनीकी समस्या नहीं आने वाली है। मेडिकल प्रक्रिया में पास होना जरूरी नूंह के मोहम्मद कैफ और सोनीपत के सरोहा ने पूछा कि क्या चश्मा पहनने वाले अभ्यर्थी दौड़ में भाग ले सकते हैं। इस सवाल पर चेयरमैन हिम्मत सिंह ने कहा कि पीएमटी-पीएसटी में चश्मे को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है, परंतु पुलिस के भर्ती नियमों के मुताबिक मेडिकल प्रक्रिया से आपको गुजरना होगा। यदि मेडिकल प्रक्रिया से गुजरने के दौरान किसी तरह की कोई समस्या आती है तो अलग बात है। पीएमटी-पीएसटी के लिए जारी हो चुके निर्देश रोहतक की प्रीति व नितेश, भिवानी के राहुल तंवर व कपिल, नरवाना के मनकीत, कालां के अंकित और हांसी के मनु ने पीएमटी-पीएसटी के लिए ऊंचाई एवं छाती की माप के संबंध में आयोग से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है। इस पर आयोग ने कहा कि इस बारे में विस्तृत दिशा निर्देश अलग से जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद पुरुष कॉन्स्टेबल के लिए ऊंचाई 170 सेंटीमीटर (आरक्षित 168) और छाती 83 से 87 सेंटीमीटर का प्रविधान है। महिला कॉन्स्टेबल के लिए ऊंचाई 158 सेंटीमीटर और आरक्षित वर्ग के लिए 156 सेंटीमीटर है। अब उम्मीदवारों के लिए अगला फोकस पीएमटी पास कर पीएसटी की तैयारी करना है। कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह का दावा है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जल्द पूरी की जाएगी। सिख अभ्यर्थियों के लिए धार्मिक मर्यादाओं का अनुपालन लंबाई, वजन और छाती के मापन से यदि कोई अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं होगा तो वह अपील काउंटर पर आवेदन कर दोबारा माप करा सकता है।अभ्यर्थियों के लिए बैगेज जमा करने और विश्राम क्षेत्र की व्यवस्था की गई है। जीरकपुर से सुबह पांच बजे से 10 बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसी भी अभ्यर्थी को एनर्जी बूस्टर का सेवन नहीं करना चाहिए। सिख अभ्यर्थियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। उनके मापन के लिए धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप अलग व्यवस्था और सिख कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

Weather Update: पंजाब में छाए बादल, गर्मी से मिली राहत, तापमान लुढ़का

पठानकोट. शहर में मौसम ने अचानक करवट ली है। दिनभर तेज धूप के बीच बादलों की आवाजाही से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। शनिवार को अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि न्यूनतम तापमान गिरकर 18.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कल के मुकाबले अधिकतम तापमान में करीब 1.2 डिग्री की कमी आई है, जिससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। दोपहर बाद आसमान में बादल छाने लगे और हवाएं चलने से वातावरण सुहावना हो गया। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तरी पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसका प्रभाव पठानकोट और आसपास के इलाकों पर भी देखा जा रहा है। आने वाले 24 घंटों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसके बाद मौसम के फिर से शुष्क रहने की उम्मीद है, हालांकि तापमान में 2 से 3 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। सुबह तेज धूप के बाद दोपहर तक बादलों और सूरज के बीच आंख-मिचौली चलती रही। हल्की हवाओं के कारण लोगों ने राहत महसूस की, लेकिन उमस बरकरार रही। गर्मी से बचने के लिए लोग दुपट्टे और कपड़ों से मुंह ढककर निकलते नजर आए। मौसम में आए इस बदलाव ने फिलहाल लोगों को राहत दी है और अब सभी की नजरें संभावित बारिश पर टिकी हैं।

अलर्ट प्रशासन ने रोकी बाल विवाह की 2 घटनाएं, समय रहते समझाइश देकर टली बड़ी कार्रवाई

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. देश के कई राज्यों में अक्षय तृतीया के अवसर को विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसके चलते इस अवधि में बाल विवाह के मामले भी सामने आते हैं। इसी के मद्देनजर जिले में प्रशासन और बाल संरक्षण विभाग की सतर्कता के चलते दो अलग-अलग मामलों में नाबालिगों के संभावित बाल विवाह को समय रहते रोक दिया गया। सूचना प्राप्त होते ही संबंधित टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत दोनों विवाहों को रुकवा दिया। पहला मामला: सोन बचरवार पंचायत पहला मामला पेंड्रा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सोन बचरवार का है, जहां एक नाबालिग बालक की शादी की तैयारी चल रही थी। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने तत्काल टीम को मौके पर भेजा। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि बालक की उम्र 17 वर्ष 10 माह 14 दिन है, जो निर्धारित कानूनी आयु 21 वर्ष से कम है। इसके बाद टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विवाह रुकवाया। दूसरा मामला: गुम्मा टोला में कार्रवाई दूसरा मामला ग्राम पंचायत गुम्मा टोला का है, जहां थाना गौरेला क्षेत्र में एक अन्य नाबालिग के विवाह की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से मिली। टीम ने मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की, जिसमें बालक की उम्र 20 वर्ष 9 माह 7 दिन पाई गई, जो बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत निर्धारित उम्र से कम है। इसके चलते इस विवाह को भी रोक दिया गया। परिजनों को दी गई समझाइश दोनों मामलों में टीम ने बालक-बालिका के माता-पिता और परिवारजनों को समझाइश दी तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही, भविष्य में बाल विवाह नहीं करने के लिए घोषणा पत्र और पंचनामा पर हस्ताक्षर भी कराए गए। टीम की सराहनीय भूमिका इस पूरी कार्रवाई में जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड हेल्पलाइन, गौरेला पुलिस और पेंड्रा पुलिस की भूमिका सराहनीय रही। प्रशासन की इस तत्परता से एक बार फिर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाने का संदेश गया है।

स्टूडेंट्स बनेंगे भविष्य के बिजनेस लीडर: पंजाब में लॉन्च होगा यंग एंटरप्रेन्योर्स प्रोग्राम

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए एंटरप्रेन्योशिप शिक्षा को अब कक्षा 9 और 10 तक विस्तारित करने का फैसला किया है। पहले यह विषय केवल कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए लागू था, लेकिन अब इसे शुरुआती स्तर पर ही अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में समस्या समाधान, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मनिर्भरता जैसे गुण विकसित होंगे। राज्य सरकार ने इस कार्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ अपनी साझेदारी को अगले तीन वर्षों के लिए और बढ़ा दिया है। यह समझौता (एमओयू) कक्षा 9 से 12 तक कार्यक्रम के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करेगा। इस पहल के तहत राज्य के सभी सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध संस्थानों में इसे लागू किया जाएगा, जिससे करीब 6.4 लाख विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। 2022 में हुई थी पीवाईईपी की शुरुआत पंजाब यंग एंटरप्रेन्योर्स प्रोग्राम (पीवाईईपी) की शुरुआत 2022 में की गई थी, जबकि 2025 में कक्षा 11 और 12 के लिए इसे अनिवार्य विषय बनाया गया। इसके बाद से विद्यार्थियों की भागीदारी में लगातार वृद्धि देखी गई है और आइडिया आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिला है। अब कक्षा 9 और 10 में इसे अनिवार्य तो किया जाएगा, लेकिन इन कक्षाओं में इसके अंक नहीं जोड़े जाएंगे। उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के सीईओ और सह-संस्थापक मेकिन माहेश्वरी के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं की पहचान करते हैं, उनके समाधान तैयार करते हैं और उन्हें व्यवहारिक रूप में परखते हैं। कई विद्यार्थियों के आइडिया छोटे स्तर के व्यवसाय और सामुदायिक परियोजनाओं में भी बदल रहे हैं। उन्होंने बताया कि कक्षा में पढ़ाई का फोकस ‘करके सीखने’ (लर्निंग बाय डूइंग) पर है, जिससे विद्यार्थी केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं रहते। युवाओं को अवसर पैदा करने योग्य किया जा रहा तैयार शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि अवसर पैदा करने वाला बनाना चाहती है। उन्होंने बताया कि बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम के तहत पिछले वर्ष 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों को सीड फंडिंग दी गई थी, जबकि इस वर्ष 65 हजार विद्यार्थियों को सहयोग दिया जाएगा। गौरतलब है कि उद्यम लर्निंग फाउंडेशन वर्तमान में राज्य के करीब 3700 स्कूलों में काम कर रही है और देश के 12 राज्यों में उद्यमिता शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। यह संस्था पाठ्यक्रम को मजबूत करने, शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से आने वाले वर्षों में पंजाब के विद्यार्थी न केवल आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को भी नई दिशा देंगे।

छत्तीसगढ़ के कोरबा में बड़ा हादसा, राखड़ बांध टूटने से ऑपरेटर की मौत, तीन मजदूर सुरक्षित निकाले गए

कटघोरा. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब नवागांव के कला में स्थित सीएसईबी का राखड़ बांध (झाबु डेम) अचानक फूट गया। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया और मौके पर काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसे में एक जेसीबी ऑपरेटर की मौत हो गई, जबकि अन्य मजदूरों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऐसे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, घटना के समय जेसीबी ऑपरेटर सहित कुल पांच लोग राखड़ डेम में मरम्मत कार्य में लगे हुए थे। इसी दौरान अचानक बांध फूट गया और राखड़ का तेज बहाव शुरू हो गया। देखते ही देखते जेसीबी मशीन बह गई और मलबे में दबकर ऑपरेटर की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान मड़वारानी निवासी हुलेश्वर कश्यप के रूप में हुई है। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। वहीं आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही दर्री थाना पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। रेस्क्यू टीम और ग्रामीणों की मदद से तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वही, मलबे में दबे जेसीबी और चालक को बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद सीएसईबी प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि डेम की मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे यह हादसा हुआ। मुआवजे की घोषणा प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को तत्काल 5 लाख रुपये नगद और 18 लाख रुपये का चेक, कुल 23 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। वहीं इस घटना को लेकर युवा कांग्रेस ने आक्रोश जताते हुए लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इधर, जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है और हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।