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Acer का नया AI लैपटॉप भारत में लॉन्च, 62,999 रुपए से शुरू, मिलेगा खास ‘AI बटन’

नई दिल्ली अगर आप नया लैपटॉप खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. Acer कंपनी ने भारत में अपना नया लैपटॉप लॉन्च किया है, जिसका नाम Swift Lite 14 AI PC है। यह लैपटॉप Acer की Lite सीरीज का हिस्सा है, जो अपने हल्के डिजाइन के लिए जानी जाती है। Swift Lite 14 लैपटॉप में एल्यूमीनियम अलॉय बॉडी है और इसमें प्राइवेसी शटर वाला फुल HD वेबकैम, सटीक टचपैड, फुल-साइज कीबोर्ड और माइक्रोसॉफ्ट के AI असिस्टेंट Copilot को एक्सेस करने के लिए एक खास Copilot बटन भी दिया गया है। आइए आपको इस लैपटॉप के बारे में डिटेल में बताते हैं। कीमत और उपलब्धता सबसे पहले कीमत की बात कर लेते हैं। Acer Swift Lite 14 AI PC लैपटॉप की शुरुआती कीमत ₹62,999 है। यह एसर के एक्सक्लूसिव आउटलेट्स, एसर के ऑफिशियल ऑनलाइन स्टोर, क्रोमा, रिलायंस डिजिटल और विजय सेल्स पर उपलब्ध है। आप इसे इन स्टोर्स से खरीद सकते हैं। डिजाइन और डिस्प्ले आप इस लैपटॉप को आसानी से कैरी कर सकते हैं। यह लैपटॉप सिर्फ 15.9mm मोटा है और इसका वजन 1.1 किलोग्राम है। इसमें 14 इंच का OLED डिस्प्ले है, जिसका रेजोल्यूशन WUXGA (1920 × 1200) और आस्पेक्ट रेशियो 16:10 है। यह डिस्प्ले 100% DCI-P3 कलर कवरेज को सपोर्ट करता है और इसमें 87% स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो मिलता है। लैपटॉप का डिस्प्ले 180-डिग्री हिंज का इस्तेमाल करके पूरी तरह से फ्लैट मोड़ा जा सकता है। इसका IPS डिस्प्ले वेरिएंट भी उपलब्ध है। परफॉर्मेंस और AI फीचर्स एसर का यह लैपटॉप Intel Core Ultra प्रोसेसर और Intel AI Boost NPU से पावर्ड है। यह AI फीचर्स जैसे विंडोज स्टूडियो इफेक्ट्स, बैकग्राउंड ब्लर और नॉइज कैंसिलेशन को बैटरी परफॉर्मेंस को प्रभावित किए बिना सपोर्ट करता है। कंपनी का कहना है कि इसके डिजाइन से बैटरी का ज्यादा देर तक इस्तेमाल हो पाता है। यह Windows 11 होम पर चलता है और इसमें Copilot का इंटीग्रेटेड एक्सेस मिलता है। कनेक्टिविटी कनेक्टिविटी के लिए लैपटॉप में 32 GB तक LPDDR5 RAM और 1 TB PCIe Gen 4 SSD स्टोरेज मिलती है, जो 50Wh की बैटरी से चलती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें पावर डिलीवरी और डिस्प्लेपोर्ट के साथ USB 3.2 Gen 2 Type-C पोर्ट, एक USB 3.2 Gen 1 Type-A पोर्ट, HDMI, 3.5mm ऑडियो जैक और एक केंसिंग्टन लॉक स्लॉट शामिल हैं। इसे Type-C चार्जर से चार्ज किया जाता है। लैपटॉप Wi-Fi 6 और ब्लूटूथ 5.1 या उससे ऊपर को सपोर्ट करता है।

Apple यूज़र्स के लिए खुशखबरी: iPhone और Watch अब करेंगे पहले से कहीं ज़्यादा सिंक और स्मार्ट काम

टेक्नोलॉजी दिनों-दिन आगे बढ़ रही है। आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काफी चलन में है। ऐसा तय माना जा रहा है कि भविष्य में एआई का खूब इस्तेमाल किया जाएगा। कई कंपनियों ने एआई का इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है। अभी तक AI का इस्तेमाल बीमारियों का पता लगाने, बीमारियों का इलाज करने या पढ़ाई-लिखाई में मदद करने के लिए किया जाता है। आने वाले वक्‍त में एआई का इस्तेमाल प्रेग्‍नेंसी का पता लगाने के लिए भी किया जाएगा। दुनिया की जानी मानी कंपनी Apple ने ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं। iPhone और Apple Watch से पता चलेगी प्रेग्नेंसी ऐपल के प्रोडक्ट्स जैसे iPhone, iPad, Apple Watch आदि को सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स माना जाता है। इनमें कई ऐसे फीचर्स होते हैं जो इन्हें दूसरे डिवाइस से अलग बनाते हैं। एक नई रिसर्च के मुताबिक Apple ने एक कमाल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल बनाया है जो अब iPhone और Apple Watch से मिली जानकारी (व्यवहारिक डेटा) का इस्तेमाल करके 92% सटीकता के साथ प्रेग्नेंसी का पता लगा सकता है। कैसे काम करती है यह नई टेक्नोलॉजी? इस रिसर्च का नाम "Beyond Sensor Data: Foundation Models of Behavioral Data from Wearables Improve Health Predictions" है। इस रिसर्च में बताया गया है कि यह नया AI मॉडल कुछ खास स्वास्थ्य संकेतों जैसे नींद की गुणवत्ता, दिल की धड़कन में बदलाव (हार्ट रेट वेरिएबिलिटी), चलने-फिरने की आदतें (मोबिलिटी) और अन्य महत्वपूर्ण बातों को पहचान सकता है। यह वियरेबल बिहेवियर मॉडल (WBM) प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को भी ट्रैक कर सकता है। इस नए फाउंडेशन मॉडल को बनाने के लिए 2.5 बिलियन घंटे से भी ज्यादा वियरेबल डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह पिछले मॉडल्स से बेहतर या उनके बराबर काम कर सके। हालां‍क‍ि अभी यह पता नहीं है क‍ि यह टेक्‍नोलॉजी कबतक ड‍िवाइसेज में ले आएगी जाएगी। रिसर्च में क्या-क्या शामिल था? रिसर्चर्स ने 430 प्रेग्नेंट महिलाओं के डेटा का इस्तेमाल करके एक प्रेग्नेंसी डेटासेट बनाया, जिनकी डिलीवरी नॉर्मल या सिजेरियन हुई थी। WBM ने ऐप्पल हेल्थ ऐप, हेल्थकिट और हार्ट रेट सेंसर डेटा (PPG) से जानकारी इकट्ठा की। रिसर्च में बताया गया है कि डेटा से पता चला कि बच्चे के जन्म से पहले के नौ महीने और डिलीवरी के बाद का एक महीना "पॉजिटिव" हफ्ते थे, क्योंकि महिलाएं प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद ठीक होने के दौरान शारीरिक बदलावों से गुजर रही थीं। बाकी समय को "नेगेटिव" हफ्ते के तौर पर चिन्हित किया गया। नतीजों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए रिसर्चर्स ने 24,000 से ज्यादा उन महिलाओं का डेटा भी इकट्ठा किया जिनकी उम्र 50 साल से कम थी और जो प्रेग्नेंट नहीं थीं।  

दुनियाभर में ChatGPT का सर्वर डाउन, जिसने हड़कंप मचा दिया …

मुंबई  16 जुलाई 2025 को सुबह एक बार फिर OpenAI की सर्विसेस पूरी दुनिया में ठप हो गई हैं. ChatGPT, Sora और GPT API का इस्तेमाल कर रहे लाखों यूजर्स को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह इस महीने की दूसरी बड़ी आउटेज है, जिससे यूजर्स के मन में OpenAI की सर्विस की भरोसेमंदी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. क्या हो रहा है? Downdetector वेबसाइट के अनुसार, 16 जुलाई को सुबह 6:10 बजे (भारतीय समयानुसार) यूजर्स की शिकायतों में अचानक तेजी आई. रिपोर्ट्स में बताया गया: • 88% यूजर्स ChatGPT का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर पा रहे. • बाकी शिकायतें API, Sora और Codex से जुड़ी हैं. OpenAI के ऑफिशियल स्टेटस पेज पर कहा गया है कि सभी सर्विस में 'degraded performance' हो रही है. कंपनी ने कहा है: 'हमने एरर रेट्स में वृद्धि देखी है और समाधान पर काम कर रहे हैं.' सोशल मीडिया पर हड़कंप X (पहले Twitter) जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स लगातार शिकायतें पोस्ट कर रहे हैं. कुछ प्रमुख समस्याएं: • चैट स्क्रीन खाली दिखाई दे रही है या अधूरी प्रतिक्रिया मिल रही है. • लॉगिन करने में परेशानी, कई यूजर्स वेरिफिकेशन में अटक रहे हैं. • अचानक डिस्कनेक्शन होने से यूजर्स का काम अधूरा छूट रहा है. Dev यूजर्स को Codex में कोडिंग सपोर्ट नहीं मिल रहा और कंटेंट क्रिएटर्स को Sora से वीडियो बनाने में काफी देरी हो रही है. OpenAI की प्रतिक्रिया OpenAI ने इस परेशानी को स्वीकार किया है, लेकिन अभी तक: • न तो समस्या की असली वजह (जैसे सर्वर ओवरलोड, सॉफ्टवेयर बग आदि) बताई है, • और न ही सर्विस पूरी तरह से कब ठीक होगी, इसकी जानकारी दी है. यूजर्स क्या करें? जब तक सर्विस पूरी तरह से ठीक नहीं होती, OpenAI की तरफ से कुछ सुझाव दिए गए हैं: 1. बार-बार लॉगिन करने की कोशिश न करें, इससे सिक्योरिटी लॉक लग सकता है. 2. OpenAI Status Page पर जाकर अपडेट चेक करते रहें. 3. अपने काम को किसी बाहरी सिस्टम में सेव करते रहें, ताकि डाटा लॉस से बचा जा सके. 

Google ला रहा नया प्लेटफॉर्म, Android और ChromeOS का होगा मर्जर

Google एक बड़ी प्लानिंग तैयार कर रहा है और आने वाले दिनों में Android और ChromeOS को मिलाकर एक पावरफुल सिंगल ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) को तैयार किया जाएगा. यहां आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि इसके कयास लंबे समय से लगाए जा रहे थे और अब कंपनी ने टेक रडार को दिए गए इंटरव्यू में बताया है कि दोनों को मिलाकर एक सिंगल प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम हो रहा है.   जानकारी के मुताबिक, Android Ecosystem के प्रेसिडेंट Sameer Samat ने कहा कि हम Chrome OS और Android की खूबियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर शामिल करने जा रहे हैं. इसके लिए एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, हालांकि किसी टाइमलाइन का जिक्र नहीं किया है.  यूजर्स को मिलेगा एक जैसा एक्सपीरियंस  Chrome OS और Android दोनों प्लेटफॉर्म का मर्जर करके एक प्लेटफॉर्म बनाने से यूजर्स को काफी फायदा देखने को मिलेगा. इस मर्जर की मदद से यूजर्स को मोबाइल, टैबलेट, और Chromebook का यूज करने पर एक जैसा एक्सपीरियंस मिल सकता है. Google अपने दो ऑपरेटिंग सिस्टम को मिलाकर एक प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम कर रहा है.      ChromeOS को लेकर बताते देते हैं कि यह Chromebook लैपटॉप के लिए तैयार किया है. यह कई मामलों में अच्छा है, जिसके साथ Android Apps का भी सपोर्ट मिलता है. इसके बावजूद इसमें कुछ लिमिटेशन भी हैं.      Android ऑपरेटिंग सिस्टम की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. Google Pixel, Samsung, OnePlus, Redmi, Realme समेत दुनियाभर में ढेरों ब्रांड हैं, जिनमें Android OS का यूज किया जाता है.    Chrome OS और Android से क्या होगा फायदा? Android और Chrome OS प्लेटफॉर्म का मर्जर होने के बाद यूजर्स को काफी नया एक्सपीरियंस देखने को मिल सकता है. इसमें दोनों प्लेटफॉर्म अपने फीचर्स और ऐप्स को शेयर कर सकेंगे. आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि Android Apps पहले से ही Chromebook पर चलते हैं और इस न्यू मर्जर के बाद यूजर्स को बेहतर यूजर एक्सपीरियंस देखने को मिलेगा.  क्रोम और एंड्रॉयड का मर्जर से मिलेगी क्रॉस डिवाइस कनेक्टिविटी  Google भी Apple जैसा ईकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश में लगा है. जहां सभी डिवाइस आसानी से कनेक्ट हो जाते हैं और इससे यूजर्स को बेहतर एक्सपीरियंस भी मिलता है. यहां यूजर्स को बेहतर क्रॉस डिवाइस कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा.

भारत में लॉन्च हुआ LG का AI Smart TV, लगभग 25 लाख रुपये है कीमत, जानिए फीचर्स

LG ने भारतीय बाजार में अपने नए स्मार्ट टीवी को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने OLED evo और QNED evo सीरीज को पेश किया है. इस लाइन-अप में आपको ज्यादा प्रीमियम फीचर्स मिलेंगे. इसमें AI फीचर्स दिए गए हैं, जो इन स्मार्ट टीवी को दूसरों से अलग बनाते हैं. कंपनी ने सिर्फ स्मार्ट फीचर्स को नहीं जोड़ा है, बल्कि TV को इंटेलिजेंस बनाने पर काम किया है.  यूजर किस तरह से इंटरैक्ट करता है, टीवी इसका ध्यान रखता है और फ्यूचर में वैसे ही कंटेंट को सजेस्ट करता है. दोनों ही वेरिएंट्स में कंपनी ने AI एन्हांसमेंट, एडवांस डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और अपडेटेड WebOS दिया है. आइए जानते हैं इन स्मार्ट टीवी की कीमत और दूसरी खास बातें.  क्या है इन Smart TV में खास? 2025 OLED evo और QNED evo TV में कंपनी ने Alpha AI Gen 2 प्रोसेसर दिया है. इसकी वजह से आपको बेहतर कस्टमाइजेशन और स्मार्ट कंट्रोल्स मिलेंगे. AI मैजिक रिमोट में अब कंपनी ने अलग से AI बटन दिया गया है, जिसका इस्तेमाल वॉयस कंट्रोल और नेविगेशन के लिए किया जा सकता है.  यूजर्स के इस्तेमाल करने के तरीके पर टीवी उन्हें पर्सनलाइज्ड कंटेंट ऑफर करेगा और कीवर्ड्स पर सजेस्ट करेगा. AI सर्च का फीचर जोड़ा गया है जो लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर बना है. टीवी में दिया गया AI चैटबॉट रियल टाइम में इशू को डिटेक्ट करता है और उसका समाधान प्रदान करता है.  लेटेस्ट टीवी में ने नया webOS दिया है, जो अपग्रेडेड और फास्ट यूजर एक्सपीरियंस ऑफर करता है. इसमें आपको रिडिजाइन होम स्क्रीन मिलेगी, जो मल्टीपल यूजर प्रोफाइल सपोर्ट करती है. इसमें बिल्ट-इन Apple AirPlay और गूगल कास्ट मिलता है, जिसकी मदद से आप अपने फोन के कंटेंट को टीवी पर शेयर कर सकते हैं.  कितनी है कीमत? QNED AI TV को कंपनी ने 74,990 रुपये (QNED8BA सीरीज) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. ये टीवी 43-inch से 75-inch तक के स्क्रीन साइज का ऑप्शन मिलता है. वहीं QNED evo सीरीज (QNED8GA/XA) 1,19,990 रुपये की शुरुआती कीमत पर मिलेगी. OLED स्मार्ट टीवी 1,93,900 रुपये (B5 सीरीज) की शुरुआती कीमत पर आता है.  OLED evo के C5 सीरीज को आप 1,49,990 रुपये की कीमत, G5 सीरीज को 2,67,990 रुपये में और G5 Ultra-Large टीवी सीरीज को 24,99,990 रुपये में खरीद पाएंगे. ये कीमत 97-inch के स्मार्ट टीवी की है.

स्वाद में मीठा, सेहत में जानलेवा – जलेबी और समोसा सिगरेट जितने खतरनाक!

नागपुर  भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने समोसा, जलेबी और लड्डू जैसे लोकप्रिय भारतीय नाश्तों को लेकर एक निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने अब सिगरेट की तरह इन नाश्तों को भी एक स्वास्थ्य चेतावनी के साथ परोसने की योजना बनाई है। इस कदम का उद्देश्य देश में बढ़ते मोटापे और इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर लगाम लगाना है। मोटापे की बढ़ती समस्या स्वास्थ्य मंत्रालय के आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, भारत में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य बीमारी बनती जा रही है। मंत्रालय की मानें तो साल 2050 तक भारत में 44.9 करोड़ लोग मोटापे से ग्रस्त हो जाएंगे। जिससे भारत अमेरिका के बाद इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित देश बन सकता है। वर्तमान में, हर पांच में से एक शहरी वयस्क मोटापे का शिकार है। बच्चों में मोटापे की बढ़ती दर, गलत खानपान की आदतें और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने इस चिंता को और भी बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर के केंद्रीय संस्थानों जैसे कि नागपुर के AIIMS, को निर्देश दिया है कि वे 'तेल और शुगर बोर्ड' (Oil and Sugar Boards) लगाएं। इन बोर्डों पर खाद्य पदार्थों में मौजूद छिपे हुए फैट और चीनी की मात्रा की स्पष्ट जानकारी लिखें। समोसा, जलेबी, लड्डू, वड़ा पाव, पकोड़ा जैसे तले हुए और चीनी से भरपूर नाश्तों को इस सूची में शामिल किया गया है। मंत्रालय का मानना है कि इन खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में ट्रांस-फैट, संतृप्त वसा और चीनी की अधिक मात्रा होती है। जो मोटापे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण हैं। ऐसे में सरकार कैफे, रेस्तरां और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मेन्यू कार्ड्स और पैकेजिंग पर स्वास्थ्य चेतावनी छापने की योजना बना रही है।  क्या बोले कार्डियॉलजिस्ट AIIMS नागपुर के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें यह आदेश मिल गया है और वे कैंटीन और सार्वजनिक जगहों पर ये बोर्ड लगाने की तैयारी कर रहे हैं। कार्डियॉलजिक सोसाइटी ऑफ इंडिया की नागपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. अमर अमाले ने कहा, 'यह खाने की चीज़ों पर लेबल लगाने की शुरुआत है, जो सिगरेट की चेतावनी जितनी ही ज़रूरी होगी।' उन्होंने आगे कहा कि हम सालों से कह रहे हैं कि चीनी और ट्रांस फैट अब नए तंबाकू हैं। लोगों को यह जानने का हक है कि वे क्या खा रहे हैं। भारत बनने वाला है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोटापा का केंद्र सरकार की चिट्ठी में कुछ डराने वाले आंकड़े दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2050 तक 44.9 करोड़ से ज़्यादा भारतीय या तो ज़्यादा वज़न वाले होंगे या मोटापे का शिकार हो जाएंगे। इससे भारत दुनिया में मोटापे का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा। शहरों में पहले से ही हर पांच में से एक वयस्क ज़्यादा वज़न वाला है। बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या भी चिंता का विषय है, जिसका कारण खराब खानपान और सुस्त जीवनशैली है। 'चीनी और तला भोजन दे रहा बीमारियां' अधिकारियों का कहना है कि यह पहल गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से लड़ने का एक हिस्सा है। इन बीमारियों का सीधा संबंध ज़्यादा चीनी और तेल वाले भोजन से है। एक बार लगने के बाद, ये बोर्ड सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में चुपचाप खड़े संतरी की तरह काम करेंगे। ये लोगों को याद दिलाएंगे कि दिखने में मासूम लड्डू में इतनी चीनी हो सकती है कि वह आपकी सेहत के लक्ष्यों को बर्बाद कर दे। पीएम के फिट इंडिया अभियान का हिस्सा वरिष्ठ मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा कि यह खाने पर पाबंदी लगाने के बारे में नहीं है। लेकिन अगर लोगों को पता चले कि एक गुलाब जामुन में पांच चम्मच चीनी हो सकती है, तो वे दूसरी बार खाने से पहले सोच सकते हैं। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'फिट इंडिया' अभियान को आगे बढ़ाता है। इसमें उन्होंने तेल के इस्तेमाल में 10% की कटौती करने की बात कही थी। अब नागपुर उस संदेश को सबसे आगे रखने के लिए तैयार है, भले ही इसका मतलब ऑफिस के स्नैक काउंटर पर कुछ अजीब नज़रों का सामना करना पड़े। इसलिए, अगली बार जब आप किसी सरकारी कैंटीन में समोसे के लिए हाथ बढ़ाएं, तो हैरान न हों अगर पास में एक रंगीन बोर्ड धीरे से कहे, समझदारी से खाएं। आपका भविष्य आपको धन्यवाद देगा। यह पहल लोगों को स्वस्थ रहने के लिए जागरूक करने की एक कोशिश है। सरकार चाहती है कि लोग खाने-पीने की चीज़ों में मौजूद चीनी और तेल की मात्रा के बारे में जानें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। समोसा, जलेबी और लड्डू ही क्यों चुने गए? अब सोचने वाली बात यह है कि सिर्फ समोसा, जलेबी और लड्डू को ही क्यों चुना गया। तो बताते चले समोसा, जलेबी और लड्डू भारतीय संस्कृति में लोकप्रिय खाद्य पदार्थ हैं। चाय के साथ यग घर पर आए मेहमानों के लिए अक्सर समोसा परोसा जाता है। कोई भी शुभ अवसर हो तो मुंह मीठा करने के लिए लड्डू और जलेबी खाई जाती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इन सभी खाद्य पदार्थों में मौजूद उच्च कैलोरी, तेल, और चीनी इन्हें स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा बनाती है। समोसा: तेल में तला हुआ, जिसमें मैदा और आलू या मांस की स्टफिंग होती है, जो ट्रांस-फैट और कैलोरी से भरपूर होता है। जलेबी: चीनी की चाशनी में डूबी जलेबी में अत्यधिक शुगर होती है, जो मधुमेह और वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। लड्डू: घी और चीनी से बने लड्डू में संतृप्त वसा और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इन खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता और रोजमर्रा के खानपान में इनका व्यापक उपयोग इन्हें चेतावनी सूची में शामिल करने का प्रमुख कारण है।

Vivo ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन vivo X200 FE किया लॉन्च

नई दिल्ली Vivo ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Vivo X200 FE है। यह स्मार्टफोन Vivo X200 सीरीज में शामिल किया गया है। इस फोन में कई बेहतरीन फीचर्स को शामिल किया गया है। यह फोन OnePlus 13s और Apple के iPhone 16e जैसे फोन्स को टक्कर देगा। Vivo X200 FE में MediaTek Dimensity 9300+ प्रोसेसर और Zeiss-ट्यून ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। आइए आपको इस फोन के फीचर्स के बारे में डिटेल में बताते हैं। कीमत सबसे पहले कीमत की बात कर लेते हैं। Vivo X200 FE की शुरुआती कीमत ₹54,999 है। यह कीमत 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले बेस मॉडल के लिए है। वहीं, इसके 16GB रैम और 512GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत ₹59,999 रखी गई है। यह फोन एम्बर येलो , फ्रॉस्ट ब्लू  और लक्स ग्रे तीन कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है। आप इसे वीवो इंडिया ऑनलाइन स्टोर, फ्लिपकार्ट और ऑफलाइन स्टोर्स से खरीद सकते हैं। फोन की प्री-बुकिंग आज से शुरू हो गई है और इसकी बिक्री 23 जुलाई से शुरू होगी। ग्राहक HDFC बैंक, SBI और Axis बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर ₹6,000 तक का इंस्टेंट डिस्काउंट पा सकते हैं। इसके अलावा पुराने फोन को एक्सचेंज करने पर ₹6,000 तक का एक्सचेंज बोनस भी मिलेगा। स्पेसिफिकेशंस स्पेसिफिकेशंस की बात करें तो Vivo X200 FE में 6.31 इंच की 1.5K AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,800 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आती है। यह फोन MediaTek Dimensity 9300+ चिपसेट से पावर्ड है और इसमें 16GB तक LPDDR5X रैम और 512GB तक UFS 3.1 स्टोरेज मिलती है। कैमरे की बात करें तो फोन में Zeiss-सपोर्टेड ट्रिपल रियर कैमरा यूनिट है। इसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP Sony IMX921 प्राइमरी सेंसर, 8MP अल्ट्रा-वाइड सेंसर और 3x ऑप्टिकल जूम के साथ 50MP Sony IMX882 पेरिस्कोप टेलीफोटो शूटर दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए डिवाइस में 50MP का फ्रंट सेंसर दिया गया है। बैटरी और AI फीचर्स Vivo X200 FE में 6,500mAh की बड़ी बैटरी है, जो 90W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। सॉफ्टवेयर के मामले में यह डिवाइस Android 15 पर आधारित Funtouch OS 15 पर काम करता है। इसमें कई AI फीचर्स भी दिए गए हैं, जैसे AI स्क्रीन ट्रांसलेशन, लाइव टेक्स्ट और स्मार्ट कॉल असिस्टेंट। कंपनी का दावा है कि यह फोन IP68+IP69 रेटिंग के साथ डस्ट और पानी से सुरक्षित है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, ब्लूटूथ 5.4, GPS, NFC और एक USB Type-C पोर्ट शामिल हैं। इस फोन का वजन 186 ग्राम है।

ऐसे हटा सकते हैं अपने पीसी से डुप्लीसकेट फाइल्सि

पर्सनल कम्यू नी टर में मौजूद डुप्लींकेट फाइल्सा, न केवल कीमती स्टो रेज स्पे स को गैरजरूरी रूप से उपयोग करती हैं। बल्कि यह यूजर को कन्फ्यूिज भी करती हैं। यानी जब भी आप कम्यूररे टर में सर्च प्रोग्राम चलाएंगे, तो आपको दो रिजल्ट् दिखेंगे। यदि आप डुप्लीजकेट फाइल्सक को मैनुअली हटाएंगे तो इसमें काफी समय लगेगा तथा इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि सारी फाइल्डं आप हटा लेंगे। कैसे एकत्रित होती हैं डुप्लीपकेट फाइल्स:- कई बार यूजर फाइल्सट को डाउनलोड करके भूल जाते हैं। फिर उसी फाइल को दोबारा डाउनलोड कर लेते हैं। इस प्रकार से एक ही फाइल की दो कॉपी बन जाती हैं। इसी तरह डेटा फोल्डनर की कॉपी करने से भी कई बार डुप्लीकेट फाइल्स बन जाती हैं। आइए, जानते हैं कि किस प्रकार से डुप्लीइकेट फाइल्सं से छुटकारा पाया जा सकता है… डुपगुरु: डुपगुरु ऐसा प्रोग्राम है, जो पीसी से डुप्लीकेट फाइल्सह को खोजता है। यह प्रोग्राम विंडोज के साथ ही मैक और लिनक्स् ऑपरेटिंग सिस्ट्म पर भी चलाया जा सकता है। अगर आपके पास डुपगुरु नहीं है तो आप सीक्लिनर को भी उपयोग कर सकते हैं। यह प्रोग्राम भी मशीन से डुप्ली्केट फाइल्से को खोजता है। ऐसे उपयोग करें: डुपगुरु को इंस्टॉइल करने के बाद आपको एक स्क्रीइन दिखाई देगी। यहां आपको डुप्लीतकेट फाइल्सथ को सर्च किए जाने वाले फोल्डीर्स को चुनना होगा। चुनने के बाद आप स्कैनन पर क्लिक करिए और यह प्रोग्राम अपना काम शुरू कर देगा। हो सकता है कि स्कैटनिंग में यह कुछ समय लगाए, लेकिन टास्कप पूरा होन के बाद यह आपको डुप्लीककेट फाइल्सर की लिस्टस दिखाएगा। यहां ओरिजिनल फाइल्सइ नीले रंग की दिखाई देंगी और डुप्लीरकेट फाइल ठीक इसी के नीचे दिखाई देगी। आप यहां सिलेक्टं ऑल करके सारी डुप्लीरकेट फाइल्सय को चुन सकते हैं या फिर मैनुअली एक-एक फाइल भी सिलेक्टय कर सकते हैं। इसके बाद आप चाहें तो इन फाइल्सप को डिलीट कर दें, या फिर किसी अन्यड ड्राइव अथवा फोल्ड्र में रख लें।  

धीरे-धीरे जुड़ेगा टूटा रिश्ता, इसे ऐसे संभालें…

रिश्तों का जुड़ना जितना मुश्किल होता है, उन्हें सहेजना उससे भी ज्यादा कठिन। इसके विपरीत तोड़ने के लिए एक झटका ही काफी है। यह झटका कुछ भी हो सकता है- कोई कड़वी बात, किसी मसले पर उपेक्षा, कोई मामूली गलती, गलतफहमियां या कुछ और। मुश्किल यह है कि ऐसा जब भी होता है तो इसका पहले से कोई एहसास नहीं होता। पता ही तब चलता है, जब घटना घट चुकी होती है। अगर समय से पता चल जाए कि जो हम कहने या करने जा रहे हैं, वह हमारे संबंधों पर क्या असर डालेगा तो अधिकतर संबंध बिगड़ने ही न पाएं। कई बार ऐसा भी होता भी है कि गलती के बाद तुरंत एहसास हो जाता है। ऐसी स्थिति में समझदार लोग बात को संभालने की कोशिश भी करते हैं। कई बार बात बन भी जाती है, लेकिन कई बार यह कोशिश बेकार साबित होती है। इसीलिए कवि रहीम ने कहा है- रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय टूटे से फिर ना जुडे, जुडे तो गांठ पड़ जाय। अक्सर देखा जाता है कि ऐसे रिश्तों में जुड़ने के बाद भी कुछ कसक-सी रह जाती है। हालांकि आधुनिक मनोविज्ञान का मानना है कि यह मुश्किल ही है, असंभव नहीं। अगर रिश्ते में आई दरार की वजह को समझते हुए ठीक तरह से प्रयास किए जाएं तो उस कसक का मिटना भी असंभव नहीं है। इसके पहले कि किसी टूटे हुए रिश्ते को नए सिरे से सहेजने की कोशिश शुरू की जाए, सबसे जरूरी है कि उसके वास्तविक कारण की तलाश की जाए। देखें अपनी ओर यह जरूरी नहीं कि संबंध टूटने के मामले में गलती हर बार आपकी ही हो, पर ऐसे मामले में देखना सबसे पहले अपनी ओर ही चाहिए। अधिकतर होता यह है कि हम स्थितियों को समझे बिना ही दूसरे पक्ष को जिम्मेदार मान लेते हैं। यह सोचे बगैर कि उसने ऐसा कुछ किया भी तो किन हालात में। यह गौर करना चाहिए कि अगले व्यक्ति ने जो कुछ भी किया, उस पर हमारी प्रतिक्रिया क्या थी। हमने जो किया, क्या वह सही था! ऐसा तो नहीं कि हमने उसकी बात को समझे बिना ही प्रतिक्रिया दी और उसका दिल दुखाया! ऐसा कुछ लगे तो अपनी गलती स्वीकार कर, माफी मांग लेने में कोई हर्ज नहीं है। स्वीकारें दूसरों को दूसरों में ही गलती ढूंढने का एक कारण यह है कि अधिकतर लोग दूसरे के व्यक्तित्व को स्वीकार नहीं पाते। हर व्यक्ति दूसरों से अपनी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की उम्मीद करता है। खासकर रिश्तों के मामले में हर किसी के मन में एक फ्रेम होता है। सभी चाहते हैं कि संबंधित व्यक्ति उसी फ्रेम में फिट बैठे। कुछ लोग किसी का भी इस फ्रेम से बाहर जाना बर्दाश्त नहीं कर पाते। लेकिन, दुनिया में सब कुछ किसी की अपेक्षा के अनुरूप ही हो, यह कैसे संभव है? हमें यह बात समझनी चाहिए कि हर किसी का अपना व्यक्तित्व है। किसी से अपने जैसा बनने की अपेक्षा या उसे अपने अनुरूप ढालने की कोशिश खतरनाक हो सकती है। बेहतर होगा कि जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करें। व्यक्ति का सम्मान रिश्ता कोई भी हो, टूटने का कारण अधिकतर अहं का टकराव होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि यह होता क्यों है? इसकी एक वजह तो यही होती है कि हम दूसरे के व्यक्तित्व को वैसे ही स्वीकार नहीं कर पाते, जैसा वह है। दूसरी यह कि किसी पर अपने व्यक्तित्व और अपनी अपेक्षाओं को थोपने की कोशिश करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में अगर दूसरा व्यक्ति हमसे मजबूत हुआ तो वह खुद को साबित करने में लग जाता है और अगर कमजोर हुआ तो समर्पण जैसी अवस्था में आ जाता है। ये दोनों ही स्थितियां सही नहीं हैं। दोनों ही स्थितियों में अहं का टकराव तय है। अगर आपकी ऐसी किसी प्रवृत्ति के कारण कोई संबंध टूटने की ओर बढ़ रहा है, सचेत हो जाएं। पहले तो दूसरों पर अपनी अपेक्षाएं और अपना व्यक्तित्व थोपना बंद कर दें। धीरे-धीरे यह एहसास कराएं कि आपने खुद को बदलना शुरू किया है। प्रशंसा है जरूरी रिश्ते चाहे निजी हों या प्रोफेशनल, सभी पौधों की तरह होते हैं। वे फूलते-फलते रहें, इसके लिए उन्हें सींचना अनिवार्य है और रिश्तों की सिंचाई के लिए अच्छे कार्यों की प्रशंसा से बेहतर जल नहीं हो सकता। कोई जब अच्छा कार्य करता है तो वह प्रशंसा चाहता है। होता अक्सर उल्टा है। किसी से कोई गलती हो जाने पर तो हम उसे दस बातें सुना देते हैं, लेकिन अच्छे काम को उसका कर्तव्य मानकर टाल देते हैं। इसके विपरीत अगर अच्छा काम करने पर किसी की प्रशंसा की जाए तो गलतियों पर टोके जाने से भी उसे पर बुरा नहीं लगता। आभार जताएं जिस तरह अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं, वैसे ही उनके पूरे होने पर आभार जताना भी। कई बार रिश्ते इसलिए टूट जाते हैं कि हम अपना काम हो जाने के बाद संबंधित व्यक्ति को धन्यवाद तक नहीं बोलते। रिश्ते बने रहें, इसके लिए उन्हें सहेजना जरूरी है। जारी रहे संवाद बेशक कई बार गलती आपकी नहीं होती, दूसरा पक्ष ही गलत होता है और यह बात जाहिर होती है। यदि यह बात बार-बार की है तो स्थिति अलग है, लेकिन अगर पहली-दूसरी बार की बात है तो क्षमा कर देना बेहतर है। ध्यान रहे, ऐसी स्थिति में संवाद नहीं टूटना चाहिए। क्योंकि किसी भी रिश्ते को बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी तत्व है संवाद। संवाद टूट जाने की स्थिति में बने-बनाए रिश्ते भी बेजान होने लगते हैं और टूटे रिश्तों को फिर से जोड़ने में तो सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ही संवाद की होती है।  

क्या खत्म हो रहा है पारंपरिक ब्राउज़िंग का युग? आ गए हैं AI ब्राउज़र!

नई दिल्ली वेब ब्राउजर का इस्तेमाल आज के समय में हर कोई करता है। स्मार्टफोन हो या कंप्यूटर सभी पर ब्राउजर डाउनलोड किया जाता है। लोग सालों से Chrome, Safari या Firefox जैसे ब्राउजर का इस्तेमाल कर रहे हैं। आमतौर पर लोग ब्राउजर खोलते हैं और एड्रेस बार में वेबसाइट टाइप करते हैं। वेब ब्राउजर हमारे कंप्यूटर पर लगभग हर काम के लिए जरूरी है, चाहे वह वर्ड प्रोसेसिंग हो, चैट करना हो या ईमेल चेक करना हो। अभी तक लोग साधारण ब्राउजर का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब AI ब्राउजर भी आ गए हैं। यानी कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से चलने वाले ब्राउजर। इसी कड़ी में Dia ब्राउजर का नाम भी आता है जो एआई से चलता है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं। Dia ब्राउज़र क्या है और यह क्यों खास है? Browser Co. of New York नाम की एक स्टार्टअप कंपनी का नया वेब ब्राउजर Dia काफी रोमांचक लगता है। यह ऐप जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम करता है, ठीक वैसे ही जैसे ChatGPT और Google के Gemini जैसे चैटबॉट काम करते हैं। Dia यह दिखाता है कि एक वेब ब्राउजर सिर्फ वेबसाइट खोलने से कहीं ज्यादा कर सकता है। यह हमें सीखने और समय बचाने में भी मदद कर सकता है। Dia कैसे बदलता है वेब ब्राउजिंग का एक्सपीरियंस? यह ब्राउजर कुछ ही सेकंड में वीडियो की समरी लिख कर दे देता है। ऐसे में लंबे वीडियो पूरा देखने की जरूरत नहीं पड़ती। ब्रेकिंग न्यूज पढ़ते समय मामले को बेहतर तरीके से समझने के लिए यह उससे जुड़े दूसरे आर्टिकल्स की लिस्ट दे देता है। इस चैटबॉट से पैराग्राफ की प्रूफरीडिंग करने में भी मदद ली जा सकती है। Perplexity का AI ब्राउजर Dia जैसे AI-पावर्ड इंटरनेट ब्राउजर का एक नया युग शुरू होने जा रहा है। यह भविष्य में इंटरनेट इस्तेमाल करने के हमारे अनुभव को पूरी तरह से बदल देगा। हाल ही में सर्च इंजन बनाने वाली स्टार्टअप Perplexity ने Comet नाम का एक AI वेब ब्राउजर लॉन्च किया है और खबरें हैं कि ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI भी इस साल एक ब्राउजर लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। Dia ब्राउजर की खासियत दूसरे वेब ब्राउजरों की तरह Dia भी एक ऐप है जिससे आप वेबपेज खोल सकते हैं। लेकिन इसकी खासियत यह है कि यह एक AI चैटबॉट को आसानी से जोड़ता है जो यूजर को वेबपेज छोड़े बिना कई तरह के काम करने में मदद करता है। Dia में एक शॉर्टकट (command+E) दबाने पर एक छोटी सी विंडो खुलती है जो वेबपेज के साथ चलती है। यहां आप उस चीज या वीडियो से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं जिसे आप पढ़ या देख रहे हैं और चैटबॉट जवाब देगा। यह कैसे काम करता है? AI चैटबॉट जैसे ChatGPT, Gemini और Claude लार्ज लैंग्वेज मॉडल का इस्तेमाल करके जवाब देते हैं। Browser Co. of New York ने बताया कि उन्होंने कई कंपनियों के AI मॉडल का इस्तेमाल किया है, जिनमें Gemini, ChatGPT और Claude के पहले वाले मॉडल भी शामिल हैं। जब यूजर कोई सवाल पूछते हैं, तो Dia ब्राउजर उसका अच्छे से जांचता है और उस AI मॉडल से जवाब लेता है जो सवाल का जवाब देने के लिए सबसे सही होता है। क्या होगी कीमत? Dia अभी फ्री है, लेकिन AI मॉडल आमतौर पर कंपनियों के लिए बहुत महंगे होते हैं। Dia के AI ब्राउजर पर निर्भर रहने वाले यूजर्स को आखिर में इसके लिए पेमेंट करना ही होगा। आने वाले हफ्तों में Dia की मेंबरशिप करने के लिए हर महीने 5 डॉलर से लेकर हजारों डॉलर प्रति माह देने पड़ सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यूजर AI बॉट से कितनी बार सवाल पूछते हैं। जो लोग AI टूल का इस्तेमाल केवल सप्ताह में कुछ बार करते हैं, उनके लिए ब्राउजर फ्री रहेगा।