samacharsecretary.com

OpenAI Dots की एंट्री, AI अब सिर्फ जवाब नहीं देगा बल्कि आपके लिए काम भी करेगा

नई दिल्ली अभी तक AI से कोई काम करवाने के लिए आपको उसे बार-बार कमांड देने होते हैं. सवाल पूछा, जवाब मिला और बातचीत खत्म. लेकिन अब OpenAI इस तरीके को बदलने की कोशिश कर रहा है. कंपनी ने dots नाम के ऐसे AI एजेंट पेश किए हैं, जो एक बार काम समझने के बाद आपके बिना हर कदम पर कमांड दिए लगातार उस काम पर आगे बढ़ सकते हैं।  सीधे शब्दों में समझें तो यह सिर्फ ऐसा AI नहीं है जो आपके सवाल का जवाब देता है. आप उसे कोई जिम्मेदारी दे सकते हैं और वह उसके अगले कदम खुद तय करके काम आगे बढ़ाता रहेगा. जरूरत पड़ने पर आपसे राय या मंजूरी मांगेगा और फिर काम जारी रखेगा. यही बदलाव dots को सामान्य चैटबॉट से अलग बनाता है. हाल ही में मेटा ने Muse लॉन्च किया है, इसका Muse Charm डिवाइस भी ऑलवेज ऑन एआई एजेंट की तरह काम करता है।  खुद से करेगा ब्राउजिंग भी OpenAI के मुताबिक dots को खास तौर पर ऐसे कामों के लिए बनाया गया है जो एक मैसेज के जवाब के साथ खत्म नहीं होते. हर dot को अपना क्लाउड कंप्यूटर और ब्राउजर मिलता है. यह जुड़े हुए ऐप्स का इस्तेमाल करके किसी प्रोजेक्ट पर काम कर सकता है और यूजर के ChatGPT से बाहर जाने के बाद भी काम जारी रख सकता है।  मसलन, अगर आप किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं तो dot सिर्फ जानकारी खोजकर आपको नहीं देगा. वह उपलब्ध जानकारी देख सकता है, काम का अगला फेज तय कर सकता है, जरूरी चीजों का मसौदा तैयार कर सकता है और फिर आपके पास रिव्यू के लिए वापस आ सकता है।  यानी AI का नया मॉडल कुछ ऐसा है. काम बताइए और हर छोटी चीज बताने के बजाय उसे काम आगे बढ़ाने दीजिए. सबसे दिलचस्प बात, आप ChatGPT बंद कर दें तो भी काम चलता रहेगा।  dots की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘always-on’ होना है. OpenAI के अनुसार यह आपके किसी काम को लेकर बैकग्राउंड में काम करता रह सकता है. जब कोई महत्वपूर्ण फैसला लेना हो या आपकी मंजूरी की जरूरत हो, तब यह आपके पास वापस आता है।  उदाहरण के लिए अगर आप किसी रिपोर्ट के लिए लगातार बदल रहे आंकड़ों पर काम कर रहे हैं, तो dot नई जानकारी आने पर उसे देख सकता है, अपने विश्लेषण को अपडेट कर सकता है और जहां आपकी राय जरूरी है, वहां आपको बता सकता है. इसी तरह अगर अगर कोई टास्क दिया है तो वो खुद ही मल्टिपल सोर्स को कॉन्टैक्ट कर सकता है.  कंटेंट बनाने वालों के लिए भी इसका इस्तेमाल दिलचस्प हो सकता है. OpenAI के उदाहरण में dot किसी क्रिएटर के इंटरव्यू ट्रांसक्रिप्ट से जरूरी हिस्से खोजकर शो नोट्स और सोशल मीडिया पोस्ट के ड्राफ्ट तैयार कर सकता है. यूजर के बदलाव के बाद वह आगे के काम में भी उन पसंद को इस्तेमाल कर सकता है।  4,000 से ज्यादा ऐप्स से जुड़ने की क्षमता OpenAI ने dots को सिर्फ ChatGPT तक ही नहीं रखा है. कंपनी के मुताबिक ये जुड़े हुए ऐप्स के साथ काम कर सकते हैं और 4,000 से ज्यादा ऐप्स तक कनेक्शन का सपोर्ट बताया गया है. इन्हें ChatGPT के अलावा Slack और Microsoft Teams जैसे प्लेटफॉर्म से भी इस्तेमाल किया जा सकता है. टेक्स्ट मैसेजिंग का विकल्प आगे आने की बात कही गई है।  इसका मतलब यह है कि AI आपके लिए अलग-अलग ऐप्स में बिखरे काम को एक साथ देखने और आगे बढ़ाने की भूमिका निभा सकता है. यहीं से dots का असर सिर्फ AI चैट तक सीमित नहीं रहता. यह ईमेल, मीटिंग, रिसर्च, दस्तावेज, कोडिंग और टीम के काम जैसे कई हिस्सों तक पहुंच सकता है।  हर काम AI खुद ही खरेगा तो इंसान क्या करेगा? यहां एक जरूरी बात है. dots को पूरी तरह खुली छूट नहीं दी गई है. यूजर तय करता है कि dot किन ऐप्स को इस्तेमाल कर सकता है और उसे कितनी परमिशन मिलेगी. कुछ कामों के लिए यूजर की मंजूरी जरूरी रखी जा सकती है. OpenAI के मुताबिक सेंसिटिव काम जैसे पासवर्ड बदलना यूजर के कंट्रोल में रहता है।  OpenAI ने Custom Rules का विकल्प भी दिया है. इसके जरिए यूजर तय कर सकता है कि dot कौन-सा काम खुद कर सकता है, किस काम के लिए मंजूरी लेनी होगी और कौन-सा काम बिल्कुल नहीं करना है. यह जरूरी है क्योंकि किसी AI को आपके ईमेल, फाइलों और दूसरे ऐप्स तक पहुंच देना सिर्फ सुविधा का मामला नहीं है. इसके साथ सुरक्षा और प्राइवेसी का सवाल भी जुड़ा है. OpenAI की टक्कर Meta के Muse से dots का लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब Meta भी अपने AI एजेंट Muse को आगे बढ़ा रही है. Meta ने सितंबर में Muse पेश किया था, जो यूजर की ओर से काम कर सकता है, लंबे समय तक किसी लक्ष्य पर काम जारी रख सकता है और जरूरत पड़ने पर मंजूरी मांग सकता है।  इसलिए OpenAI और Meta के बीच मुकाबला अब सिर्फ यह नहीं रह गया है कि किस कंपनी का AI बेहतर जवाब देता है. अगली लड़ाई इस बात की है कि किसका AI आपके लिए ज्यादा काम खुद कर सकता है। 

80s AI Photo Trend हुआ वायरल, मगर Retro फोटो बनाने में कितनी बिजली-पानी की खपत? जानें पूरा असर

नई दिल्ली इंस्टाग्राम, फेसबुक और X (ट्विटर) पर इन दिनों ChatGPT का 80s AI Photo Trend तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी सेल्फी को 1980 के दशक की बॉलीवुड या विंटेज स्टाइल फोटो में बदलकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। बड़े हेयरस्टाइल, रेट्रो कपड़े, फिल्म ग्रेन और गर्म रंगों वाली ये तस्वीरें लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। भारत में इस ट्रेंड की वजह से ChatGPT से जुड़े सर्च और डाउनलोड में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। लेकिन इस मजेदार ट्रेंड के पीछे एक ऐसा सच भी है जिस पर कम लोग ध्यान दे रहे हैं—हर AI फोटो बनाने में बिजली, डेटा सेंटर और पानी की खपत होती है। आखिर क्या है ChatGPT का 80s AI Photo Trend? इस ट्रेंड में यूज़र अपनी फोटो ChatGPT या किसी AI इमेज जनरेटर पर अपलोड करते हैं और एक प्रॉम्प्ट देकर उसे 1980 के दशक की तस्वीर जैसा बना देते हैं। AI चेहरे को पहचानकर बैकग्राउंड, कपड़े, हेयरस्टाइल, लाइटिंग और फोटो की पूरी स्टाइल बदल देता है। यह ट्रेंड पहले वायरल हुए Ghibli AI Portraits और Barbie AI Photos की तरह ही तेजी से लोकप्रिय हुआ है।  इस ट्रेंड की खास बातें Vintage Bollywood Look Film Camera Grain Effect 80s Fashion और Hairstyles Warm Lighting और Retro Background सोशल मीडिया पर Reels और DP के लिए इस्तेमाल AI फोटो बनाने से पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है? AI फोटो बनाने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर लगातार काम करते हैं। इन सर्वरों को चलाने और ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि एक साधारण AI फोटो भी पर्यावरणीय संसाधनों का उपयोग करती है।  एक AI फोटो की अनुमानित खपत संसाधन अनुमानित उपयोग पानी लगभग 5–50 मिलीलीटर प्रति AI फोटो बिजली लगभग 0.01–0.29 kWh प्रति AI इमेज डेटा सेंटर GPU आधारित हाई-परफॉर्मेंस सर्वर लगातार सक्रिय रहते हैं। जब करोड़ों लोग AI फोटो बनाते हैं, तब क्या होता है?  अगर दुनिया भर में एक दिन में 1 करोड़ AI फोटो बनाई जाएं, तो अनुमान के अनुसार 50,000 से 5 लाख लीटर तक पानी अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल हो सकता है। यह पानी मुख्य रूप से डेटा सेंटर की कूलिंग सिस्टम में उपयोग होता है। अनुमानित प्रभाव (Illustrative) यह चार्ट प्रकाशित शोध और रिपोर्टों में दिए गए अनुमानित दायरे पर आधारित है। वास्तविक खपत AI मॉडल और डेटा सेंटर के अनुसार अलग हो सकती है.  सिर्फ बिजली नहीं, कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है AI मॉडल जितनी ज्यादा तस्वीरें बनाते हैं, उतनी ज्यादा कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत होती है। इसका मतलब है: अधिक बिजली की खपत। डेटा सेंटर से अधिक कार्बन उत्सर्जन। सर्वर कूलिंग के लिए अधिक पानी। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के अनुसार AI सिस्टम की रोजमर्रा की गतिविधियां उसकी कुल ऊर्जा मांग का बड़ा हिस्सा होती हैं।  क्या आपकी फोटो और डेटा भी सुरक्षित हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि AI प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करते समय यूज़र्स को यह समझना चाहिए कि उनकी तस्वीरें और उनसे जुड़ा डेटा प्लेटफॉर्म की नीतियों के अनुसार प्रोसेस और स्टोर किया जा सकता है। इसलिए किसी भी AI टूल पर निजी या संवेदनशील तस्वीरें साझा करने से पहले उसकी Privacy Policy जरूर पढ़ें।  जिम्मेदारी से AI इस्तेमाल करें AI तकनीक रचनात्मकता और मनोरंजन के लिए शानदार है, लेकिन इसका जिम्मेदार उपयोग भी जरूरी है। क्या करें? केवल जरूरत होने पर AI फोटो बनाएं। एक ही फोटो के कई अनावश्यक वर्ज़न जनरेट करने से बचें। निजी और संवेदनशील तस्वीरें अपलोड करने से पहले सावधानी बरतें। भरोसेमंद AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।

ChatGPT के फ्री वर्जन में दिखेंगे Sponsored Ads, जानें आपकी पर्सनल चैट कितनी रहेगी सेफ

आज के समय में AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. ऑफिस के काम से लेकर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों तक, लोग AI टूल्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें ChatGPT भी काफी पॉपुलर है. अब तक इसके फ्री वर्जन का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. चैटजीपीटी के फ्री वर्जन में अब सवालों के जवाब के साथ Sponsored Ads भी नजर आ सकते हैं. यानी किसी सवाल का जवाब पढ़ते समय उसके नीचे आपको किसी कंपनी या प्रोडक्ट का एडवर्टाइजमेंट देखने मिलेगा. OpenAI अपने सब्सक्रिप्शन मॉडल के अलवा Ads के जरिए भी कमाई का रास्ता तैयार कर रहा है. ऐसे में आने वाले समय में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने का एक्सपीरिएंस फ्री यूजर्स के लिए थोड़ा बदल सकता है. आइए समझते हैं कि ये Ads कैसे दिखेंगे और क्या आपकी पर्सनल चैट्स सेफ रहेगा. क्या सभी यूजर्स को दिखेंगे Ads? चैटजीपीटी के बढ़ते यूजर बेस के बीच OpenAI ने Ads को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. ये Ads खास तौर पर फ्री में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर सवाल के जवाब के नीचे एडवर्टाइजमेंट जरूर नजर आएगा. Ad किस यूजर को और किस तरह दिखाया जाएगा, यह प्लेटफॉर्म के सिस्टम और Ad मॉडल पर निर्भर करेगा. जवाब के नीचे दिख सकता है Sponsored Ad मान लीजिए आपने चैटजीपीटी से किसी प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछा. चैटजीपीटी आपको हमेशा की तरह इसका जवाब देगा. इसी जवाब के नीचे आपको एक छोटा स्पॉन्सर्ड Ad दिखाई दे सकता है. अगर आपको उस एडवर्टाइजमेंट में दिखाया गया कोई प्रोडक्ट पसंद आता है, तो आप उसके बारे में ज्यादा जानकारी ले सकते हैं या उसे खरीद सकते हैं. इस तरह कंपनियों को अपने प्रोडक्ट संभावित ग्राहकों तक पहुंचाने का नया प्लेटफॉर्म मिल जाएगा. कंपनियां चैटजीपीटी पर कैसे चलाएंगी Ads? चैटजीपीटी पर एडवर्टाइजमेंट दिखाने के लिए कंपनियां OpenAI के Ads प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके जरिए कंपनियों को अपने Ads को ज्यादा से ज्यादा पोटेंशियल कस्टमर तक पहुंचाने का मौका मिलेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों के लिए एडवर्टाइजमेंट की शुरुआती कीमत करीब 725 रुपये प्रति दिन हो सकती है. हालांकि, कीमत और Ad की अवेलियेबलीटी जैसे नियम समय के साथ बदल सकते हैं. क्या एडवर्टाइजर्स आपकी चैटजीपीटी चैट्स पढ़ पाएंगे? यह सवाल सबसे इंपॉर्टेंट है. आखिर जब चैटजीपीटी पर Ads दिखेंगे, तो क्या कंपनियां आपकी पर्सनल बातचीत भी देख पाएंगी? OpenAI के मुताबिक, एडवर्टाइजर्स यूजर्स की पर्सनल चैट्स को पढ़ नहीं सकते. यानी आपने चैटजीपीटी पर क्या सवाल पूछा, क्या इन्फॉर्मेशन शेयर की या किस सब्जेक्ट पर बातचीत की, इसकी जानकारी एडवर्टाइजर्स के साथ सीधे शेयर नहीं की जाएगी. Ads को सही यूजर्स तक पहुंचाने के लिए कुछ जरूरी जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन आपकी पर्सनल बातचीत एडवर्टाइजर्स को अवेलेबल नहीं कराई जाएगी. यानी चैटजीपीटी पर Ads आने के बावजूद आपकी पर्सनल चैट्स और एडवर्टाइजर्स के बीच एक अलगाव बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.

युद्ध के बीच ChatGPT पर नाराज़गी, 300% तक बढ़ा अनइंस्टॉलेशन रेट

वाशिंगटन अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमला कर रहे हैं और ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है. इस दौरान अमेरिका AI कंपनियां भी चर्चा में हैं. इसमें Anthropic और OpenAI की काफी चर्चा की गई है. इस दौरान OpenAI ने जल्दबाजी में पेंटागन के साथ पार्टनरशिप कर ली लेकिन लोगों ने सोशल मीडिया पर कंपनी की काफी आलोचना की. इसके बाद ओपनएआई के चैटजीपीटी ऐप को लोगों ने अनइंस्टॉल करना शुरू किया, जिसका आंकड़ा 300 परसेंट तक पहुंच गया. इसके बाद OpenAI के सीईओ ने गलती को सुधारा। अमेरिकी AI कंपनी और चैटजीपीटी मेकर OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने माना है कि अमेरिका डिफेंस डिपार्टमेंट के साथ पार्टनरशिप करने में थोड़ा समय लेना चाहिए था. OpenAI ने पेंटागन के साथ शुरुआती डील ऐसे समय कि जब  Anthropic का कॉन्ट्रैक्सट खत्म हुआ. इसके बाद सोशल मीडिया पर ओपनएआई को विरोध का सामना करना पड़ा। ChatGPT ऐप किया अनइंस्टॉल  लोगों ने ओपनएआई का विरोध तो किया, साथ ही उसके ChatGPT ऐप को अनइंस्टॉल करना शुरू किया. सेंसर टावर के मुताबिक, 28 फरवरी को ChatGPT के अनइंस्टॉल दिन-प्रतिदिन के आधार पर 295% तक बढ़ चुके थे. वहीं दूसरी ओर Anthropic के Claude चैटबॉट के डाउनलोड्स की संख्या 51 परसेंट तक बढ़ी. साथ ही Claude अमेरिका में Apple App Store पर नंबर 1 स्थान तक पहुंच गया।  ऑल्टमैन ने किया X पर पोस्ट  सैम ऑल्टमैन ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट किया और बताया है कि ओपनएआई ने अब पेंटागन के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट को अपडेट कर दिया है. कंपनी अपने प्रिन्सिपल को क्लीयर कर दिया है।  उन्होंने आगे बताया है कि पेंटागन के साथ जल्दी करने का मकसद था कि अमेरिकी रक्षा विभाग और एआई इंडस्ट्री के बीच तनाव और न बढ़े. Anthropic का पेंटागन के साथ कॉन्ट्रैक्ट इसलिए खत्म हो गया था. ऑल्टमैन ने माना कि पूरी स्थिति अंत में मौकापरस्ती और अव्यवस्थित लगने लगी. ऑल्टमैन ने कहा कि वह इस अनुभव को भविष्य के फैसलों पर ध्यान रखेंगे। कैटी पेरी ने भी जताया विरोध  पॉप स्टार कैटी पेरी ने भी X प्लेटफॉर्म पर Claude के स्क्रीनशॉट के साथ दिल वाले इमोजी के साथ शेयर किया. कैटी पेरी के इस पोस्ट से पता चलता है कि वह पेंटागन की मांगों को ठुकराने वाले Anthropic के फैसले को सपोर्ट कर रही हैं।  ओपनएआई ने क्या बदलाव किए? सैम ऑल्टमैन ने एक इन्टरनल मेमो भी शेयर किया है. मेमो में बताया है कि ओपनएआई के सिस्टम का यूज अमेरिकी नागरिक पर बड़े पैमाने पर  घरेलू निगरानी में नहीं किया जा सकता है. यह प्रतिबंध अमेरिकी संविधान के National Security Act 1947 के चौथे संशोधन और FISA Act 1978 जैसे कानूनों पर बेस्ड है।    

ऑनलाइन स्कैम से डर खत्म! ChatGPT को बनाएं पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड, जानें पूरा सेटअप तरीका

नई दिल्ली तमाम उपलब्ध AI चैटबॉट्स में ChatGPT का इस्तेमाल भारतीय सबसे ज्यादा करते हैं। हालांकि कम ही जानते हैं कि वे ChatGPT का इस्तेमाल अपने और फोन के सिक्योरिटी गार्ड के रूप में भी कर सकते हैं। बशर्ते इसके लिए जरूरी सेटअप करना आता हो। दरअसल आप ChatGPT में ही Malwarebytes के फीचर्स का फायदा उठा सकते हैं। ऐसे में यह बिना किसी एक्स्ट्रा ऐप के आपके फोन में मौजूद फर्जी लिंक और स्कैम मैसेज को खुद पहचानकर निकाल सकता है। दरअसल कुछ समय पहले ही ChatGPT ने कुछ ऐप्स का खुद में इंटीग्रेशन किया था। ऐसे में उन ऐप्स के फीचर्स का लाभ आप ChatGPT से ही उठा सकते थे। इसी की वजह से अब आप ChatGPT के जरिए किसी भी संदिग्ध मैसेज या स्पैम गतिविधि का पता लगा सकते हैं। क्या है Malwarebytes? Malwarebytes एक डिवाइस प्रोटेक्शन सॉफ्टवेयर है, जो कि 20 साल से पुराना ऐप है और इंफेक्टेड डिवाइसेज को क्लीन करने और यूजर्स को संभावित स्पैम से अलर्ट करने के मामले में सबसे भरोसेमंद समझा जाता है। इसका इस्तेमाल अब आप अलग से इसके ऐप या सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किए बिना ही, सीधा ChatGPT के जरिए कर सकते हैं। ChatGPT में Malwarebytes को कैसे सेटअप करें? ChatGPT में इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आपको:     पहले ChatGPT अकाउंट में लॉग इन करें।     अब सेटिंग्स में ऐप्स पर टैप करें।     यहां ऐप स्टोर पर Malwarebytes को सर्च करें।     ऐप मिल जाए, तो Connect पर क्लिक करें।     इंटीग्रेट होने पर आप स्कैम और लिंक चेक रन कर सकते हैं। ChatGPT से कैसे स्कैन करवाएं फोन? ChatGPT से अपना फोन या कोई और डिवाइस स्कैन करवाने के लिए तीन तरीके अपना सकते हैं।     पहला तरीका: @malwarebytes लिखें और उसे निर्देश दें, जैसे कि @malwarebytes, is this email a scam?     दूसरा तरीका: ChatGPT में लिखें कि Malwarebytes, is this a scam? और इसके बाद उस टेक्स्ट, लिंक या फोन नंबर को पेस्ट कर दें, जिस पर आपको शक हो।     तीसरा तरीका: आप + बटन पर क्लिक करके ड्रॉप-डाउन मेन्यू से Malwarebytes को चुनकर स्कैन रन करें।

खौफनाक मामला: रैपिडो ड्राइवर ने किया रेप, AI ने ही पुलिस तक पहुंचाई सूचना

इंदौर   इंदौर शहर से डराने वाली खबर सामने आई है। रावजी बाजार थाना क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म मामले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि एक रैपिडो चालक ने बातों के जाल में फंसाकर किशोरी को अपने कमरे पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़ता ने सूझबूझ दिखाते हुए मोबाइल पर चैट जीपीटी के माध्यम से चाइल्ड हेल्पलाइन और थाने का नंबर निकाला और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी अंकित नागर (22) निवासी राजगढ़ को गिरफ्तार कर लिया है। बातों के जाल में फंसाया, फिर ले गया रूम पर रविवार को किशोरी सामान खरीदने निकली थी। रैपिडो चालक अंकित से उसकी बातचीत हुई। अंकित ने उसे झांसा दिया कि उसे भी अपने भांजे के लिए कपड़े खरीदने हैं। दोनों के साथ में खरीदारी करने के बाद किशोरी ने पैसे खत्म होने की बात कही तो आरोपी झांसे में लेकर उसे नेहरू नगर स्थित अपने कमरे पर ले गया। चैट जीपीटी से मांगी मदद वारदात के बाद आरोपी पीड़िता को उसके घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। हैरानी की बात यह है कि वहां से थाना कुछ कदम दूर है, लेकिन घबराहट में पीड़ता सीधे थाने नहीं गई। उसने अपने मोबाइल पर 'चैट जीपीटी' का उपयोग किया और चाइल्ड हेल्प लाइन के नंबर निकाले। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और किशोरी को समझा-बुझाकर थाने लाया गया। 8 दिन पहले ही शुरू किया था काम थाना प्रभारी के मुताबिक, आरोपी अंकित नागर (22) मूलत: राजगढ़ का रहने वाला है और इंदौर में पढ़ाई के साथ रैपिडो चलाता है। पूछताछ में बताया कि 8 दिन पहले ही उसने रैपिडो का काम शुरू किया है। अब रैपिडो कंपनी को नोटिस जारी किया है। जांच की जा रही है कि आरोपी का पुलिस वेरिफिकेशन करवाया गया था या नहीं। मामले में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और बलात्कार की गंभीर धाराओं में एफआइआर दर्ज की है। बयानों के उलझन में जांच जारी शुरुआती पूछताछ में पीड़ता और आरोपी के बयानों में कुछ विरोधाभास भी सामने आए हैं। थाना प्रभारी के मुताबिक, घटनाक्रम की कडिय़ों को जोड़ा जा रहा है। महिला पुलिस की मौजूदगी में पीडि़ता के बयान दर्ज किए हैं, जिसमें उसने बलात्कार की पुष्टि की है। चूंकि मामला किशोरी से जुड़ा है, इसलिए पुलिस इसे अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता से ले रही है।

ChatGPT का नया ट्रांसलेट फीचर लॉन्च: जरूरत के हिसाब से अनुवाद, गूगल ट्रांसलेशन को देगा टक्कर?

 नई दिल्ली OpenAI ने एक और नया टूल लॉन्‍च कर दिया है जो बहुत से लोगों के लिए बेहतर साबित हो सकता है। ChatGPT Translate नाम से आए टूल का मुख्‍य काम अनुवाद करना है, लेकिन इस टूल की सबसे खास बात है कि यह जरूरत देखकर अनुवाद करता है। उदाहरण के लिए आप किसी आर्टिकल को बिजनेस के लिए फॉर्मल ट्रांसलेट करवा सकते हैं जबकि बच्‍चों के लिए उसे और आसान भाषा में तैयार कराया जा सकता है। चैटजीपीटी ट्रांसलेट अभी लगभग 50 भाषाओं में अनुवाद कर सकता है। इसमें हिंदी समेत तमाम भारतीय भाषाएं शामिल हैं। गूगल ट्रांसलेट जैसा इंटरफेस चैटजीपीटी ट्रांसलेट का इंटरफेस, गूगल ट्रासंलेट जैसा ही है। इसमें दो बॉक्‍स हैं। एक बॉक्‍स में कंटेंट डालना होगा। दूसरे बॉक्‍स में आप भाषा का चुनाव करेंगे, जिसमें आपको ट्रांसलेशन चाहिए। वैसे तो चैटजीपीटी में पहले से ट्रांसलेशन की सुविधा मिल रही थी, लेकिन अब इसे एक अलग प्रोडक्‍ट के तौर पर ले आया गया है। यह वेबसाइट और मोबाइल दोनों पर काम करेगा। एनबीटी टेक ने जब इस टूल को टेस्‍ट किया तो यह वेब ब्राउजर पर काम कर रहा था। ओपनएआई ने इस टूल के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं दी है। यह भी नहीं बताया है कि उसने इसमें कौन सा मॉडल इस्‍तेमाल किया है। इन भारतीय भाषाओं में सपोर्ट चैटजीपीटी ट्रांसलेट अभी हिंदी, मराठी, पंजाबी, गुजराती, तम‍िल, तेलेगु, ऊर्दू जैसी प्रमुख भारतीय भाषाओं को सपोर्ट कर रहा है। यानी यह लगभग सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा दे रहा है। ChatGPT ट्रांसलेट VS Google ट्रासंलेट ChatGPT ट्रांसलेट में टेक्‍स्‍ट, इमेज और वॉइस ट्रांसलेशन की सुविधा देने की बात कही गई है। हालांकि खबर लिखे जाने तक हमें इमेज ट्रांसलेशन काम करता हुआ नहीं दिखा। यह फीचर अगले कुछ दिनों में आ सकते हैं। अच्‍छी बात यह है कि ट्रांसलेशन को अपने मुताबिक बदला जा सकता है। गूगल ट्रांसलेशन में एक बार जो ट्रांसलेट हो जाता है, वह बदला नहीं जाता। चैटजीपीटी ट्रांसलेशन में आप एआई से यह कह सकते हैं कि उसे किस अंदाज में बदले। यह फीचर भविष्‍य की ओर इशारा करता है जिसका मुख्‍य मकसद किसी बात को सिर्फ अनुवाद की शक्‍ल में पेश ना करके उसे आसान और समझने वाली बातचीत में बदलना है।

ऐप स्टोर में ChatGPT: जानें कैसे बुक करें घर और ऑर्डर करें राशन

नई दिल्ली सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने ChatGPT के लिए अपना नया ऐप स्टोर लॉन्च किया है। अब यूजर्स चैट के दौरान ही Adobe, Canva और गूगल ड्राइव जैसे ऐप का सीधे इस्तेमाल कर सकेंगे। हाल ही में Adobe के फोटोशॉप और एक्रोबेट जैसे फीचर्स जोड़े थे, जिसके बाद ऐप डायरेक्टरी के लाइव होने की चर्चा शुरू हो गई थी। ऐप स्टोर का फायदा होगा कि आप चैट करते-करते सिर्फ जानकारी ही नहीं लेंगे, बल्कि ऐप के फंक्शन के साथ अपनी प्रोडक्टिविटी को और बढ़ा सकेंगे। कंपनी का कहना है कि अगर आपको घर की तलाश है तो अब आप चैट के दौरान ही अपार्टमेंट सर्च कर सकते हैं। अगर किराने का सामान ऑर्डर करना है तो बातचीत करते हुए सीधे ग्रॉसरी ऑर्डर की जा सकती है। वहीं, ऑफिस के काम के लिए किसी रफ आउटलाइन को सीधे स्लाइड डेक या प्रेजेंटेशन में बदला जा सकता है। इस ऐप स्टोर पर जो ऐप हैं, वह आपके मोबाइल या कंप्यूटर पर इंस्टॉल नहीं होंगे, बल्कि Connect बटन पर क्लिक करके उन्हें सिर्फ ऑथराइजेशन (अनुमति) देनी होगी। फिलहाल ऐप को फीचर्ड, लाइफस्टाइल और प्रोडक्टिविटी जैसे 3 हिस्सों में बांटा गया है। कैसे कर सकते हैं इस्तेमाल     वेब पर ChatGPT यूज करते हैं तो chatgpt.com/apps पर जाएं।     जिस ऐप को यूज करना चाहते हैं उससे Connect बटन दबाकर कनेक्ट करें।     अगर ChatGPT का मोबाइल ऐप चला रहे हैं तो ऐप के लेफ्ट साइडबार में प्रोफाइल के अंदर Apps का ऑप्शन दिखेगा।     यहां Browse Apps में जाकर अपने जरूरत के ऐप से कनेक्ट करें।     इसके बाद उस ऐप से Chat करने का ऑप्शन दिखने लगेगा। एक बार कनेक्ट होने के बाद चैटिंग बार में बस @ लगाकर ऐप का नाम लिखकर इस्तेमाल कर सकते हैं। पुराने फीचर्स में भी किया बदलाव OpenAI अब एक ऐसे फीचर पर भी काम कर रहा है जिससे बातचीत के हिसाब से ChatGPT खुद ही सही ऐप का सुझाव देगा। इसके साथ ही कंपनी ने पुराने कनेक्टर्स के नाम भी बदल दिए हैं। अब गूगल ड्राइव या ड्रॉपबॉक्स जैसे फीचर्स को Apps with file search या Apps with sync के नाम से जाना जाएगा। प्राइवेसी और डेटा का भी रखा ध्यान सुरक्षा के लिहाज से कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये ऐप ChatGPT के मेमोरी फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर सेटिंग्स में AI मॉडल को बेहतर बनाने वाला विकल्प चुना है, तो आपकी जानकारी का इस्तेमाल भविष्य के मॉडल्स को ट्रेनिंग देने के लिए भी किया जा सकता है।

AI ने किया धोखा! किम कार्दशियन लॉ एग्जाम में फेल, ChatGPT को ठहराया जिम्मेदार

AI (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) का क्रेज समय-समय के साथ-साथ बढ़ता जा रहा है। ऑफिस के काम करने से लेकर पढ़ाई करने तक, कई कामों में यह काफी उपयोगी है। हालांकि, रियलिटी स्टार किम कार्दशियन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जो लोगों को हैरान कर रहा है। उन्होंने बताया कि कैसे ChatGPT ने उन्हें लॉ की पढ़ाई के दौरान टेस्ट में फेल करवाया। किम कार्दशियन ने 'वैनिटी फेयर' के एक नए वीडियो में इसका खुलासा किया है। इस वीडियो में वे एक लाइ डिटेक्टर टेस्ट दे रही थीं। सिंगर और एक्ट्रेस टेयाना टेलर ने किम से AI के बारे में पूछा कि क्या वह इसे दोस्त मानती हैं? तो इसका जबाव देते हुए किम ने कहा कि नहीं। उन्होंने इसका कारण भी बताया। जानते हैं कि आखिर किम ने ऐसा क्यों कहा और किस तरह AI ने उन्हें टेस्ट में फेल कराया। लीगल सलाह के लिए चैटजीपीटी का करती हैं इस्तेमाल किम ने बताया है कि वह लीगल सलाह के लिए OpenAI के चैटबॉट ChatGPT का इस्तेमाल करती हैं। वह अकसर कानूनी सवालों की तस्वीरें खींचकर ChatGPT पर अपलोड करती हैं। हालांकि, इसके बाद भी चैटजीपीटी उनका भरोसेमंद स्टडी पार्टनर साबित नहीं हुआ। किम ने कहा कि वह हमेशा गलत होता है। इसकी वजह से वह बार-बार टेस्ट में फेल हुईं। उन्होंने यह भी बताया है कि फिर उन्हें गुस्सा आता है और वह उस पर चिल्लाकर कहती हैं कि तुमने मुझे फेल करवाया, तुमने ऐसा क्यों किया? चैटबॉट से करती हैं बहस, जैसे कोई इंसान हो किम ने मजाकिया अंदाज में बताया कि वह कभी-कभी चैटबॉट से ऐसे बहस करती हैं जैसे वह कोई इंसान हो। किम के अनुसार, चैटबॉट जवाब देता है और यह तुम्हें सिर्फ अपनी अंतरात्मा पर भरोसा करना सिखा रहा है। तुम्हें जवाब पहले से ही पता था। मालूम हो कि किम कार्दशियन और टेयाना टेलर दोनों अपने नए Hulu लीगल ड्रामा ऑल फेयर का प्रमोशन कर रही हैं, जिसका प्रीमियर इसी हफ्ते हुआ है। एआई लोगों को कहीं न कहीं कर रहा निराश किम के इस एक्सपीरियंस से पता चल रह है कि जनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल करते समय लोगों को किस तरह की हंसी और निराशा दोनों का सामना करना पड़ता है। ChatGPT जैसे चैटबॉट भले ही बहुत समझदार लगें, लेकिन वे असल में दी गई जानकारी को समझते नहीं हैं।

यूज़र्स के लिए बड़ा बदलाव – ChatGPT से नहीं मिल पाएगी मेडिकल, वित्तीय या कानूनी सलाह

नई दिल्ली एआई चैटवाट अपने उपयोग कर्ताओं को मेडिकल, वित्तीय और कानून से संबंधित सलाह नहीं देगा।चैट जीपीटी की पेरेंट कंपनी ने मुकदमे बाजी और जिम्मेदारी से बचने के लिए,भारत के प्लेटफार्म पर यह कदम उठाया है। कंपनी का कहना है, यह कदम चैट जीपीटी का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और उनकी कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए यह निर्णय लिया है। वर्तमान निर्णय के पश्चात अब चैटवाट मुकदमे से बचने के लिए कानूनी जानकारी, निवेश इत्यादि से संबंधित  तथा स्वास्थ्य से संबंधित दावों के बारे में सुझाव और सलाह की जिम्मेदारी नहीं लेगा। कंपनी को डर है,  जिस तरह की जानकारी चैट जीपीटी द्वारा दी जाती है।भारत में उस जानकारी को लेकर मुकदमेबाजी का शिकार होना पड़ सकता है। जिसके कारण कंपनी ने जिम्मेदारी से हटा लिया है। अब उपयोगकर्ता अपने स्तर पर निर्णय करेगा, उसे वह जानकारी सही लगती है, या गलत है। अब क्या बदल जाएगा? नए नियमों के बाद ChatGPT यूजर्स को दवाओं के नाम, उनकी मात्रा, मुकदमे की टेंपलेट, कानूनी रणनीति और निवेश से जुड़ी सलाह नहीं देगा. अब यह केवल जनरल प्रिंसिपल, बेसिक मैकेनिज्म की जानकारी और लोगों को डॉक्टर, वकीलों और वित्तीय सलाहकारों जैसे प्रोफेशनल्स से कंसल्टेशन करने की सलाह देगा.  29 अक्टूबर से ChatGPT ने इलाज, कानूनी मुद्दों और पैसों के बारे में सलाह देना बंद कर दिया है। यह बॉट अब आधिकारिक तौर पर एक एजुकेशनल टूलहै, न कि एक सलाहकार और नई शर्तें इसे स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। नए नियमों के तहत, अब चैटजीपीटी न ही आप लोगों को दवा का नाम या खुराक का सुझाव देगा, न ही कानूनी रणनीति बनाने में मदद करेगा और न ही निवेश संबंधी खरीद और बिक्री की सलाह देगा। क्यों किया जा रहा है यह बदलाव? पिछले कुछ समय से कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जब लोग ChatGPT से मिली सलाह का पालन कर खुद को नुकसान पहुंचा चुके हैं. अगस्त में एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जब एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने ChatGPT से सलाह लेकर नमक की जगह सोडियम ब्रोमाइड खाना शुरू कर दिया था. इससे उसे मानसिक समस्याएं होने लगीं, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी तरह एक और मामले में अमेरिका के एक 37 वर्षीय व्यक्ति को खाना निगलने में समस्या हो रही थी. उसने ChatGPT से इस बारे में पूछा तो चैटबॉट ने बताया कि कैंसर के कारण ऐसा होना बहुत मुश्किल है. वह व्यक्ति इससे संतुष्ट हो गया और उसने समय पर डॉक्टर से संपर्क नहीं किया. बाद में जब कैंसर चौथी स्टेज पर पहुंच गया, तब जाकर वह डॉक्टर के पास पहुंचा.