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भारत में टॉप 5 सुरक्षित 7-सीटर कारों की पूरी लिस्ट

  देश में पिछले कुछ सालों के दौरान 7-सीटर कार सेगमेंट में सबसे ज्यादा तरक्की देखने को मिली है। वहीं, इन कारों में अब सेफ्टी भी काफी बेहतर मिलने लगी है। इस सेगमेंट में सस्ते मॉडल से लेकर कई प्रीमियम मॉडल शामिल हैं। हाल के दिनों में ग्राहकों के बीच एक और ट्रेंड देखने को मिला है। दरअसल, 7-सीटर कारों की बिक्री बढ़ने की वजह यह है कि ये कारें बड़े भारतीय परिवारों के लिए काफी प्रैक्टिकल होती है। वहीं, अब ये अफॉर्डेबल कीमत पर मिल जाती हैं। हम यहां पर ऐसी ही 5 7-सीटर कारों के बारे में बता रहे हैं, जो सेफ्टी के हिसाब से काफी शानदार भी हैं। पसंदीदा मॉडल्स पर सीमित समय की शानदार डील 1. टाटा सफारी पिछले कुछ सालों में टाटा भारत की सबसे पॉपुलर और लीटिंग कार कंपनियों में से एक बन गई है। उनकी गाड़ियों की लाइनअप में कई गाड़ियां शामिल हैं, जिनमें ज्यादातर SUV हैं। उनकी मौजूदा फ्लैगशिप गाड़ी सफारी है। यह एक 7-सीटर SUV है, जो अपने लुक्स और फीचर्स की वजह से ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय है। भारत NCAP क्रैश टेस्ट इसे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.08 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 44.54 पॉइंट मिले। सफारी दो इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है। इसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन, जो 170 PS की पावर और 280 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। वहीं, 2.0-लीटर टर्बो डीजल इंजन, जो 170 PS की पावर और 350 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। पेट्रोल और डीजल, दोनों ही वर्जन मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ऑप्शन के साथ उपलब्ध हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 13.29 लाख रुपए है। 2. टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस टोयोटा ने भी भारत की सबसे सुरक्षित 7-सीटर कारों की लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। कंपनी इनोवा हाईक्रॉस को पेट्रोल और 'स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड' दोनों ही वर्जन में पेश करती है। इनोवा और इनोवा क्रिस्टा के बाद, यह देश की सबसे पॉपुलर MPV में से एक है। उम्मीद है कि अगले साल इनोवा हाईक्रॉस, क्रिस्टा की जगह पूरी तरह से ले लेगी। इसके अलावा, टोयोटा फ्लीट मार्केट के लिए इनोवा हाईक्रॉस का एक और भी ज्यादा अफॉर्डेबल स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वर्जन लाने की योजना भी बना रही है। इनोवा हाईक्रॉस की शुरुआती एक्स-शोरूम 18.70 लाख रुपए है। सेफ्टी के लिए इसे भी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.47 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 45 पॉइंट मिले। 3. मारुति सुजुकी इनविक्टो मारुति इनविक्टो असल में इनोवा हाईक्रॉस का ही एक रीबैज्ड वर्जन है। यह थोड़ी ज्यादा अफॉर्डेबल है क्योंकि मारुति इसमें हाईक्रॉस में मिलने वाले सभी फीचर्स नहीं देती है। इनविक्टो की एक्स-शोरूम कीमत 24.97 लाख रुपए से शरू होती है। हाईक्रॉस की तरह ही, इनविक्टो को भी भारत NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग मिली। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.43 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 45 पॉइंट मिले। 4. महिंद्रा स्कॉर्पियो N महिंद्रा अपनी मजबूत SUVs के लिए जानी जाती है और स्कॉर्पियो N भी इससे अलग नहीं है। यह एक लैडर-फ्रेम SUV है जो काफी हद तक ऑफ-रोडिंग कर सकती है और सड़क पर भी अच्छा परफॉर्म करती है। यह पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है। सिर्फ कुछ चुनिंदा डीजल वैरिएंट में ही 4×4 मिलता है। महिंद्रा स्कॉर्पियो N के फेसलिफ्ट पर भी काम कर रही है और इसे टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है। स्कॉर्पियो N की शुरुआती कीमत 13.49 लाख रुपए से शुरू होती है। ये 7-सीटर SUV भी एक मजबूत गाड़ी है। इसे ग्लोबल NCAP में 5-स्टार रेटिंग मिली है। इसे एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 34 में से 29.25 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 28.93 पॉइंट मिले। 5 महिंद्रा XUV 7XO महिंद्रा की XUV 7XO भी देश की सबसे सुरक्षित 7-सीटर मानी जाती है। हालांकि, 7XO के लिए कोई ऑफिशियल क्रैश टेस्ट स्कोर उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अभी तक इसका टेस्ट नहीं किया गया है। यह असल में XUV700 का ही एक अपडेटेड वर्जन है, जिसका टेस्ट ग्लोबल NCAP ने पहले किया था। दोनों गाड़ियां मैकेनिकल और बनावट के हिसाब से एक जैसी हैं। इनमें मुख्य अंतर सिर्फ कॉस्मेटिक अपडेट और कुछ एक्स्ट्रा फीचर्स का है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 13.66 लाख रुपए से शुरू है। बता दें कि ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में महिंद्रा XUV700 को एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 17 में से 16.03 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 41.66 पॉइंट मिले।

शरीर के वजन के अनुसार दैनिक जल आवश्यकता कैसे निर्धारित करें

देश में गर्मी ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है और कई हिस्सों में तापमान मई शुरू होने से पहले ही 40-42 डिग्री के करीब पहुंच चुका है. ऐसे में गर्मी का दौर शुरू होते ही सबसे पहली सलाह यही मिल रही है कि खूब पानी पियो. लेकिन खूब पानी का मतलब क्या है? वैसे हम सालों से सुनते आ रहे हैं कि दिन में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन मॉडर्न साइंस इस नियम से अलग बताता है. असल में पानी की जरूरत हर इंसान की बॉडी, एक्टिविटी और उसके वजन आदि के हिसाब से अलग-अलग होती है. यदि आप जरूरत से कम पानी पीते हैं तो थकान और सिरदर्द होगा और अगर बिना सोचे-समझे बहुत ज्यादा पी लेते हैं तो यह किडनी पर बोझ डाल सकता है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि किसे कितना पानी पीना चाहिए? आज हम आपको कितना पानी पीना चाहिए, इस बारे में एक नया फॉर्मूला बताएंगे जो आपके वजन से कैलकुलेट होता है. वजन के हिसाब से कैसे तय करें पानी की मात्रा? यूनिवर्सिटी ऑफ मिसूरी की रिपोर्ट के मुताबिक, हाइड्रेशन के लिए कोई 'वन साइज फिट्स ऑल' नियम नहीं होता और यह पूरी तरह आपके बॉडी मास पर निर्भर करता है. रिसर्च एक बेहद सरल फॉर्मूला बताती हैं जिससे आप घर बैठे जान सकते हैं कि आपके शरीर को कितने लीटर पानी की जरूरत है. अपना वजन (किलोग्राम में) ÷ 30 = कुल लीटर. उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 60 किलो है, तो उसे 30 से भाग देने पर 2 आता है. यानी आपको दिन भर में कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए. वहीं अगर किसी का वजन 90 किलो है, तो उसे कम से कम 3 लीटर पानी की जरूरत होगी. गर्मी में बढ़ जाती है पानी की जरूरत मायो क्लिनिक के मुताबिक, यह फॉर्मूला एक बेसलाइन यानी बुनियादी जरूरत बताता है. लेकिन जब पारा 40 डिग्री के पार हो, तो गणित थोड़ा बदल जाता है. मेयो क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, अगर आप धूप में बाहर निकलते हैं या एक्सरसाइज करते हैं, तो पसीने के जरिए निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई के लिए आपको हर आधे घंटे की एक्टिविटी पर करीब 350 मिली एक्स्ट्रा पानी पीना चाहिए. साथ ही यदि आप कैफीन (चाय-कॉफी) ज्यादा लेते हैं तो आपको और भी ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है क्योंकि कैफीन शरीर को डिहाइड्रेट करता है. सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें अक्सर लोग तब पानी पीते हैं जब गला सूखने लगता है. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एक 'चेतावनी' मानते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) की एक स्टडी बताती है कि प्यास लगना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर पहले ही 1-2 प्रतिशत डिहाइड्रेट हो चुका है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप थोड़े-थोड़े समय पर पानी पीते रहें. सही हाइड्रेशन न केवल आपकी एनर्जी लेवल को बनाए रखता है, बल्कि यह वजन घटाने और स्किन को ग्लोइंग बनाने में भी मददगार साबित होता है.

घर पर बनाएं कोरियन स्टाइल राइस जेल, पाएं नेचुरल ग्लो

गर्मी बढ़ रही है और इसका सीधा असर हमारी स्किन पर भी पड़ता है. एक समय के बाद अपनी स्किन का खास ध्यान रखना होता है,  वरना कम उम्र में ही स्किन लटक जाती है और चेहरे पर झुर्रियां पड़नी शुरू हो जाती है. अगर स्किन का खोया हुआ निखार  वापस पाना चाहते हैं तो यह कोरियन स्किन सीक्रेट आपके काम आ सकता है. कोरियन लोगों की स्किन हर कोई चाहता है और वो लोग भी स्किन के लिए सबसे ज्यादा चावल का ही इस्तेमाल करते हैं. अगर आप नेचुरल तरीके से अपनी स्किन को ग्लोइंग और हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो घर पर बना राइस जेल एक बेहतरीन ऑप्शन है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को नमी देते हैं, दाग-धब्बों को हल्का करते हैं और स्किन को सॉफ्ट बनाते हैं. आइए  इसे बनाने और इस्तेमाल करने का आसान तरीका जानते हैं.   इंग्रेडिएंट्स     ½ कप कच्चा सफेद चावल       1 बड़ा चम्मच ताजा एलोवेरा जेल     2 बड़े चम्मच ग्रीन टी (ठंडी)     1 छोटा चम्मच कच्चा शहद     1 विटामिन E कैप्सूल का तेल     ½ छोटा चम्मच ग्लिसरीन     1 बड़ा चम्मच फर्मेंटेड राइस वॉटर     1 बड़ा चम्मच खीरे का रस घर पर राइस जेल बनाने का तरीका     सबसे पहले चावल को दो बार धो लें. फिर दो कप पानी में 15 मिनट तक उबालें, जब तक पानी का कलर दूधिया न हो जाए.     उसके बाद इसे गैस से उतार लें और ठंडा करने के लिए छोड़ दीजिए, ठंडा होने के बाद इसे मिक्सर में डालकर ब्लेंड करें.     मिक्सर में पीसने के बाद पेस्ट को आप मलमल के कपड़े या छलनी से छान लें. फिर मिक्सर को करीब 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दीजिए.     जब यह पेस्ट गाढ़ा हो जाए तब इसमें एलोवेरा जेल, ग्रीन टी, शहद, विटामिन E तेल, ग्लिसरीन, राइस वॉटर और खीरे का रस मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें.     राइस जेल बनकर तैयार हो जाएगा, तो आप उसे साफ कांच के जार में भरें और ऊपर से एयरटाइट बंद कर दें.     आप चाहें तो इसे फ्रिज में भी रख सकते हैं और यह एक हफ्ते तक आसानी से चल जाएगा.       रोजाना राइस जेल का कैसे करें इस्तेमाल     राइस जेल को अपने चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले आप अपने फेस को अच्छी तरह से पानी से धो लें. उसके बाद ही राइस जेल को अपने फेस पर अप्लाई करें.     राइस जेल को आप अपने हल्के हाथों से थपथपाकर लगाएं, ताकि वो स्किन में अच्छी तरह से ब्लेंड हो जाए. उसके कुछ समय बाद आप सनस्क्रीन या नाइट क्रीम लगा सकते हैं.     रात को सोने से ठीक पहले इस जेल को लगाना ज्यादा सही होता है, क्योंकि पूरी रात यह स्किन में गहराई से काम करता है.     वैसे तो आप इसे रोज रात को इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन ज्यादा ड्राई स्किन वाले इसको दो बार लगा सकते हैं.  

AI से सपनों पर कंट्रोल का दावा! स्टार्टअप ने लॉन्च किए अनोखे वियरेबल डिवाइस

AI की मदद से लेटर, कोटिंग और कैलकुलेशन आदि तक कराई जा सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की मदद से अपने सपनों को भी कंट्रोल किया जा सकता है. ये दावा एक स्टार्टअप प्रोफेटिक AI ने किया है. स्टार्टअप ने अपने वियरेबल डिवाइस लॉन्च किए हैं, जिनको लेकर दावा किया है कि आप क्या सपने में देखना चाहते हैं, इस डिवाइस की मदद से कंट्रोल किया जा सकती है. इनकी शुरुआती कीमत $449 (लगभग 42,300 रुपये) है. स्टार्टअप ने दो नए वियरेबल डिवाइस को पेश किया है, जिनके नाम डुअल और फेस है. ये आम लोगों के सपने देखने के तरीके को बदलने का काम करते हैं. वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है इन वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है, जिनसे एक तार जुड़ा होता है. कंपनी के पोर्टल पर लिस्ट डिवाइस देखने में एक जैसे लगते हैं. ये डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम को ट्रिगर कर सकते हैं, जो एक ऐसी स्थिति होती है, जब आप जानते हैं कि आपप सपना देख रहे हैं और उसको कंट्रोल किया जा सकता है. यह कैसे काम करता है? X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर प्रोफेटिक AI ने बताया कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करते हैं. ये डिवाइस सिर के जरिए सुरक्षित अल्ट्रासोनिक ऊर्जा को प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स तक भेजते हैं और फ्रंटोपैरिएटल नेटवर्क को एक्टिव कर देते हैं. ये सिस्टम आमतौर पर सपने देखते समय डिएक्टिव रहते हैं, जिससे ल्यूसिड अवेयरनेस की कमी होती है. स्टार्टअप का दावा है कि इस नेटवर्क को एक्टिव करके ये डिवाइस उस गतिविधि को संतुलित करने में मदद करते हैं. Prophetic Pulse में इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG) सेंसर भी लगे हैं, जिनका उपयोग मेंटल एक्टिविटी को समझने में किया जाता है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क का स्टार्टअप Neuralink भी अपने ब्रेन इम्प्लांट चिप्स में EEG सेंसर का उपयोग करती है. ये टेक्नोलॉजी ट्रांस्क्रानियल फोक्स्ड अल्ट्रा साउंड पर और AI आधारित है. डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम जनरेट कर सकते हैं और सपनों की याददाश्त, स्पष्टता और कंट्रोल को बेहतर बना सकते हैं. इसकी कीमत कितनी होगी? ऑफिशियल पोर्टल पर Prophetic Dual की कीमत 449 अमेरिकी डॉलर (लगभग 43,200 रुपये) है. इसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक शुरू होगी. Prophetic Phase की कीमत 1,299 डॉलर  (करीब 1,22,000 रुपये) होगी और इसकी डिलीवरी 2027 के मध्य से शुरू होगी.

सिजेरियन डिलीवरी का बढ़ता चलन,मेडिकल जरूरत या बड़ा बिज़नेस?

आज के दौर में मातृत्व का अनुभव कुदरती प्रक्रिया से हटकर व्यापारिक मोड़ ले चुका है। चिकित्सा जगत में अब प्रसूता को एक सामान्य महिला के बजाय मरीज की तरह देखा जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो भोपाल जैसे बड़े शहरों के निजी अस्पतालों में हर दूसरा बच्चा सर्जरी के जरिए दुनिया में आ रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ‘हाई रिस्क प्रेगनेंसी’ का डर दिखाकर प्रसव जैसी स्वाभाविक प्रक्रिया को एक गंभीर बीमारी की तरह पेश किया जा रहा है, जिससे सामान्य डिलीवरी का चलन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। प्राइवेट अस्पतालों मे भर्ती होते ही शुरू होता खेल निजी अस्पतालों में जैसे ही कोई गर्भवती महिला दाखिल होती है, वहां के माहौल में एक मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का संचार शुरू कर दिया जाता है। वार्ड से लेकर लेबर रूम तक ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती हैं कि घबराए हुए परिजन सुरक्षा के नाम पर सिजेरियन के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं। यही वजह है कि पिछले एक दशक में प्रदेश के भीतर सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाले जन्मों की संख्या दोगुनी हो गई है, जो सीधे तौर पर व्यापारिक मानसिकता की ओर इशारा करती है। WHO के चौकाने वाले आंकड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का अनुपात 45 प्रतिशत के पार जा चुका है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत के आसपास है। ये भिन्नताएं सवाल खड़ा करती हैं कि क्या अस्पताल बदलने मात्र से चिकित्सा की आवश्यकताएं भी बदल जाती हैं? यह विरोधाभास साफ करता है कि प्रसव का तरीका अब मां की सेहत से ज्यादा अस्पताल के मुनाफे और डॉक्टर की सुविधा पर निर्भर करने लगा है। परिवार में ऐसे बनाते है डर प्रसव के इस पूरे ‘बाजार’ को समझना हो तो उन परिवारों की कहानी देखनी होगी, जिनसे सामान्य स्थिति होने के बावजूद सिजेरियन की सहमति ली गई। अक्सर डॉक्टर तर्क देते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी में बहुत समय लगेगा और ऑपरेशन करना ज्यादा सुरक्षित और त्वरित विकल्प है। बच्चे की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की भावनाएं इतनी प्रबल होती हैं कि वे भारी-भरकम बिल के सामने सवाल पूछना भूल जाते हैं। एक सिजेरियन प्रसव का औसत खर्च 85 हजार से एक लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह पूरा क्षेत्र करोड़ों के कारोबार में तब्दील हो गया है। सिजेरियन डिलीवरी में पैसों का खेल भारत में सिजेरियन (C-Section) प्रसव की दर अब 27.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 10-15 प्रतिशत के मानक से कहीं अधिक है। साल 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हुए कुल प्रसवों में से लगभग 54 लाख बच्चे ऑपरेशन के जरिए हुए। यदि एक ऑपरेशन का खर्च एक लाख रुपये माना जाए, तो यह 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक का एक संगठित ‘सी-सेक्शन बाजार’ बन चुका है। अकेले राजधानी भोपाल में ही इस माध्यम से करोड़ों का राजस्व पैदा हो रहा है। महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं; डॉक्टर के अपने तर्क दूसरी ओर, विशेषज्ञ और डॉक्टर अपनी दलील देते हुए कहते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और देर से होने वाली शादियां इसकी बड़ी वजह हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं हैं और चिकित्सा संबंधी जोखिमों से बचने के लिए सिजेरियन का चुनाव किया जा रहा है। शहरी जीवन में बढ़ता तनाव, भय और शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाहत जैसे सामाजिक कारण भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं। परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही परामर्श बेहद जरूरी- एक्स्पर्ट्स विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के प्रति महिलाओं के मन में बैठे डर को दूर करने की आवश्यकता है। गर्भावस्था के दौरान सही सलाह, भावनात्मक सहयोग और धैर्य की कमी के कारण महिलाएं ऑपरेशन का रास्ता चुनती हैं। यदि परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी और मानसिक मजबूती दी जाए, तो इस बढ़ते हुए ‘सर्जरी कल्चर’ पर अंकुश लगाया जा सकता है।  

गर्मियों में अंडा खाना सुरक्षित या नहीं? एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा सच

 भारत के कई हिस्सा में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है और सुबह 7 बजे से ही गर्माहट समझ आने लगी है. ऐसे में गर्मी के मौसम में अक्सर लोग खान-पान को लेकर सचेत रहते हैं ताकि उनका डाइजेशन और सेहत सही रहे. लेकिन जो लोग रोजाना अंडे खाते हैं, उन लोगों को भी चिंता होने लगती है कि रोजाना अंडा खाएं या नहीं? अंडा जिसे सुपरफूड माना जाता है, उसे लेकर एक बड़ा भ्रम यह है कि इसकी तासीर गर्म होती है और गर्मियों में इसे खाने से पेट खराब या शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? हार्वर्ड हेल्थ और इंटरनेशनल रिसर्च डेटा के अनुसार, अंडा गर्मियों में भी उतना ही सुरक्षित है जितना सर्दियों में, बस शर्त यह है कि उसे खाने का तरीका सही होना चाहिए. तो आइए जान लीजिए कि इस तपती गर्मी में आपको अंडे का सेवन कैसे करना चाहिए. गर्मियों में अंडे और शरीर की गर्मी का सच हॉवर्ड न्यूट्रिशन सोर्स के अनुसार, अंडा विटामिन D और कोलीन का बेहतरीन सोर्स है. अगर आप इसे सही हाइड्रेशन यानी पर्याप्त पानी के साथ लेते हैं, तो यह शरीर में गर्मी पैदा नहीं करता. अक्सर माना जाता है कि अंडे खाने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंडे में हाई क्वालिटी वाला प्रोटीन और अमीनो एसिड होते हैं जिन्हें पचाने के लिए शरीर को अधिक एनर्जी की आवश्यकता होती है. इस प्रोसेस को थर्मिक इफेक्ट ऑफ फूड कहा जाता है. क्या है अंडा खाने का सबसे सही समय? ऑस्ट्रेलिया एग्स की रिपोर्ट बताती है कि सुबह अंडा खाने से दिनभर एनर्जी बनी रहती है और बार-बार भूख नहीं लगती. दरअसल, गर्मी के मौसम में मेटाबॉलिज्म दोपहर और रात के समय थोड़ा धीमा हो जाता है इसलिए इस समय भारी भोजन को पचाना मुश्किल होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अंडों का सेवन सुबह के नाश्ते में करना सबसे बेहतर रहेगा. सुबह शरीर का मेटाबॉलिज्म सबसे अधिक होता है जिससे अंडे का प्रोटीन आसानी से पच जाता है. दोपहर की कड़ी धूप या रात को सोने से ठीक पहले अंडा खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी या ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. गर्मियों में इन 2 बातों का रखें ख्याल गर्मियों में सबसे बड़ा खतरा साल्मोनेला (Salmonella) बैक्टीरिया का होता है. अधिक तापमान में अंडे जल्दी खराब हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अंडों को फ्रिज में 4°C से कम तापमान पर स्टोर करें. इसके अलावा गर्मियों में भारी तेल-मसाले वाले ऑमलेट या एग करी के बजाय उबले हुए अंडे या कम तेल वाली पोच्ड एग को प्राथमिकता दें. अंडे को इसे खीरे, पुदीने या ताजी सब्जियों के सलाद के साथ खाएं ताकि शरीर का हाइड्रेशन लेवल बना रहे. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, किसी स्वस्थ व्यक्ति गर्मियों में भी रोज 1 से 2 अंडे सुरक्षित रूप से खा सकता है.

गर्मी में बढ़ा किडनी स्टोन का खतरा, डिहाइड्रेशन बन रहा बड़ा कारण

गर्मियों का मौसम आ गया है और देश के कई राज्यों-शहरों का तापमान 40-42 डिग्री से ऊपर जा चुका है. ऐसे में इस मौसम में कई लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं भी होने लगती हैं लेकिन हमेशआ की तरह इस बार भी गर्मी का मौसम आते ही किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी के मामलों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है. डॉक्टरों का मानना है कि तापमान में बढ़ोतरी और लाइफस्टाइल की कुछ गलतियां सीधे तौर पर हमारी किडनी पर भारी पड़ रही हैं. दरअसल, जब बाहर का पारा बढ़ता है तो शरीर को ठंडा रखने के लिए हमें सामान्य से कहीं ज्यादा पानी की जरूरत होती है. अगर इसमें चूक हुई तो किडनी में मिनरल्स जमा होने लगते हैं जो बाद में दर्दनाक पथरी का रूप ले लेते हैं. इससे बचने के लिए क्या करें, इस बारे में जानना काफी जरूरी है. पसीना और डिहाइड्रेशन का कनेक्शन हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, तापमान बढ़ने पर शरीर में कैल्शियम का संतुलन बिगड़ता है जिससे स्टोन का रिस्क बढ़ता है इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजनाथ कश्यप के अनुसार, पसीने के माध्यम से शरीर का तरल पदार्थ निकल जाता है, जिससे यूरिन में कैल्शियम और ऑक्सालेट जैसे तत्वों का कंसंट्रेशन बढ़ जाता है. आसान शब्दों में समझें तो गर्मी में किडनी स्टोन होने का सबसे बड़ा कारण डिहाइड्रेशन है. जब हमें बहुत ज्यादा पसीना आता है तो शरीर का पानी कम हो जाता है. ऐसी स्थिति में किडनी कम यूरिन बनाती है जो काफी गाढ़ी होती है. यूरिन में कैल्शियम और ऑक्सालेट जैसे तत्व जब पानी की कमी के कारण बाहर नहीं निकल पाते तो वे आपस में जुड़कर क्रिस्टल बनाने लगते हैं. यही क्रिस्टल धीरे-धीरे बड़े होकर पथरी बन जाते हैं. खान-पान की इन गलतियों से बचें गर्मियों में लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स या ज्यादा नमक वाले स्नैक्स अधिक खा लेते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा नमक (सोडियम) यूरिन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देता है, जो स्टोन का मुख्य कारण है. इसके अलावा, रेड मीट और ज्यादा शुगर वाली ड्रिंक्स भी इस खतरे को दोगुना कर देती हैं. अगर आप गर्मियों में एक्सरसाइज ज्यादा करते हैं और उस अनुपात में पानी नहीं पीते तो भी रिस्क बढ़ जाता है. बचाव के लिए क्या करें? मेयो क्लिनिक की रिसर्च के मुताबिक, किडनी स्टोन से बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप दिन भर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं. नींबू पानी का सेवन भी बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें मौजूद साइट्रेट पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकता है. साथ ही भोजन में नमक की मात्रा कम रखें और ताजी हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें. अगर यूरिन का रंग गहरा पीला है, तो समझ लीजिए कि आपके शरीर को तुरंत पानी की जरूरत है.

प्रीपेड बिजली मीटर रिचार्ज के ये जरूरी नियम जान लें, नहीं तो घंटों तक रह सकते हैं बिना बिजली के

 हाल ही में कई राज्यों में बड़ी संख्या में प्रीपेड बिजली मीटर इंस्टॉल किए गए हैं। इनके साथ बड़ी समस्या जो लोगों को आ रही वो ये कि प्रीपेड मीटर का बैलेंस माइनस में जाने से कनेक्शन तुरंत कट जाता है। ऐसे मे अगर मीटर को रिचार्ज करवाते समय सावधानी ना बरती जाए, तो घंटों बिना बिजली के रहना पड़ सकता है। दरअसल प्रीपेड मीटर का बैलेंस माइनस में जाने पर बिजली कट जाए, तो लोग आनन-फानन में किसी भी पेमेंट ऐप से मीटर रिचार्ज करवा लेते हैं। ऐसा करने पर बिजली विभाग के सर्वर पर आपके अकाउंट में राशि तुरंत अपडेट नहीं होती। इसमें कुछ समय लगता है और अगर सर्वर पर लोड अधिक हो, तो समय ज्यादा भी लग सकता है। गौर करने वाली बात है कि बिजली विभाग के सर्वर पर जब तक आपके खाते की राशि अपडेट ना हो, तब तक आपका कनेक्शन शुरू नहीं हो पाता। ऐसे में माइनस में बैलेंस चले जाने की वजह से कनेक्शन कटे, तो रिचार्ज करवाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए? बिजली कट जाए, तो जल्दी कैसे होगी शुरू? प्रीपेड बिजली मीटर का बैलेंस माइनस में जाने की वजह से अगर आपका कनेक्शन कट जाए, तो रिचार्ज किसी थर्ड पार्टी ऐप से ना कराएं। यह बात सही है कि कई पेमेंट ऐप्स पर प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने का ऑप्शन मिल जाता है लेकिन थर्ड पार्टी ऐप्स से रिचार्ज कराने पर राशि तुरंत अकाउंट में अपडेट नहीं होती। ऐसे में जरूरी है कि आप रिचार्ज मीटर की ऑफिशियल ऐप या सरकारी वेबसाइट पर जाकर करवाएं। इससे आपका बैलेंस अपडेट होने में समय कम लगता है और आपका कनेक्शन जल्द शुरू कर दिया जाता है। सही राशि चुनना जरूरी कई बार लोग बैलेंस माइनस में जाने पर सिर्फ उतनी अमाउंट का ही रिचार्ज करवाते हैं, जितनी राशि माइनस में गई होती है। ऐसा करना गलत है और इससे आपके मीटर का बैलेंस पॉजिटिव नहीं हो पाता और बिजली शुरू होने में काफी समय लग जाता है। अगर आपके बिजली मीटर का बैलेंस -100 है, तो आपको 100 से ज्यादा रुपये का रिचार्ज कराना चाहिए। इसे आप 125 या 150 रुपये तक रखें ताकि आपका बैलेंस पॉजिटिव हो और बिजली जल्द से जल्द शुरू की जा सके। 1912 पर जानकारी देना ना भूलें कई बार सर्वर पर लोड ज्यादा होने से ऑफिशियल ऐप से भी रिचार्ज कराने पर अमाउंट को खाते में अपडेट होने में समय लग सकता है। इस स्थिति में आप 1912 पर कॉल करके अपने अकाउंट को अपडेट करवा सकते हैं। यह कॉल आपको रजिस्टर्ड नबंर से करना होगा और कॉल पर आपसे आपकी कस्टमर आईडी और रिचार्ज की ट्रांजैक्शन आईडी मांगी जा सकती है। ये तमाम डिटेल्स पास रखकर ही 1912 पर कॉल करें। इन तमाम बातों का ध्यान रखकर आप अपना कनेक्शन तुरंत चालू करवा सकते हैं।  

कूलर चलाने का सही समय: सुबह 5–6 बजे शुरू करें, पूरे दिन घर रहेगा ठंडा और बिजली की होगी बचत

 क्या आप जानते हैं कि कूलर आपका कमरा ही नहीं पूरे घर का ठंडा रख सकता है, अगर उसे सही समय पर चलाया जाए। दरअसल कूलर के काम करने की टेक्नोलॉजी AC से काफी अलग है। एयर कंडीशनर कमरे में मौजूद गर्म हवा को बाहर निकालता है और ठंडा और शुष्क बनाकर कमरे में वापस छोड़ता है। यही वजह है कि AC को किसी भी समय चलाया जाए, वह कमरा ठंडा कर सकता है। वहीं कूलर अलग तरह से काम करता है। वह बाहर की हवा को ठंडा करके कमरे में छोड़ता है। ऐसे में कूलर के लिए ठंडक देने के लिए जरूरी हो जाता है कि उसके आस-पास का माहौल बहुत ज्यादा गर्म ना हो। ऐसे में कूलर को अगर कूलर सही समय पर चलाया जाए, तो वह गर्मी बढ़ने से पहले दीवारों, फर्श और छत को ठंडा कर देता है। ऐसे में दिनभर ठंडा माहौल घर में बना रहेगा। इससे AC चलाने की जरूरत भी कम महसूस होगी और लंबी अवधि में आप पैसों की बचत भी कर पाएंगे। किस समय चलाना चाहिए कूलर? अगर आप चाहते हैं कि आपका कूलर दिनभर घर या कमरे को (जहां तक कूलर की हवा की रेंज है) को ठंडा करे, तो उसे तब चलाएं जब बाहर मौसम गर्म ना हो। इसके लिए आप सुबह 5-6 बजे का समय चुन सकते हैं। इस समय कूलर बाहर से हवा खींचकर उसे काफी ज्यादा ठंडा कर पाएगा क्योंकि बाहर ज्यादा गर्मी नहीं होगी। यह समय कूलर चलाने के लिए बेस्ट समझा जाता है और इसके बाद अगर 9-10 बजे तक कूलर को चलने दिया जाए, तो आपके घर या कमरे का तापमान दिनभर मेंटेन रहने के लिए सेट हो जाता है।(REF.) कूलर की टेक्नोलॉजी का कनेक्शन जैसा कि हमने बताया कूलर बाहर की हवा खींचकर उसे पानी से गुजाकर ठंडा करता है और उस ठंडी हवा को कमरे में छोड़ता है। अगर कूलर को बाहर गर्म हवा मिले, तो पानी से गुजारने के बावजूद वह ठंडी नहीं हो पाती और नतीजतन कूलर ठंडक नहीं दे पाता। यही वजह है कि कूलर उस समय चलाने की सलाह दी जाती है, जब बाहर वातावरण में गर्मी न हो। दिनभर कैसे बनी रहती है ठंडक? दिन के समय में कूलर चलाने की वजह से घर का फर्श, दीवारें और छंत ठंडक अपने भीतर स्टोर कर लेती हैं। इसके बाद जब दिन में तापमान बढ़ता है, तो वे पहले से ठंडी दीवारों और छत को उस तरह से नहीं तपा पाता, जैसे कि साधारण दीवारें या छत तप जाती हैं। इसका नतीजा यह रहता है कि आपका कूलर पूरा दिन घर का तापमान मेंटेन रख पाता है। इसके चलते आपको AC चलाने की जरूरत भी महसूस नहीं होती या 1-2 घंटे AC चलाकर और बाकी समय कूलर के साथ घर को चिल्ड रख सकते हैं। शाम और रात को चलाना कैसा? लोग कूलर को शाम या रात में चलाने की सलाह भी देते हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है। हालांकि यह गर्मियों में झुलसने वाले उत्तर भारत के लिए ज्यादा ठीक समय नहीं है। दरअसल उत्तर भारत में तापमान 40-45 या कई बार 50 डिग्री तक भी पहुंचता है। ऐसे में कूलर दिन में ना चलाकर अगर शाम या रात में चलाया जाए, तो वह बुरी तरह से तप चुकी दीवारों और छत को ठंडा नहीं कर पाता। इसका सबसे ज्यादा फायदा तभी मिलता है, जब आप सुबह से ही दीवारों और छत का तापमान ठंडा कर लें। वहीं जहां गर्मी का ऐसा प्रकोप नहीं पड़ता, उनके लिए शाम या रात में कूलर चलाना भी अच्छा रहता है।  

इन 7 फलों से बनाएं नेचुरल फेस पैक, चेहरा रहेगा फ्रेश और हेल्दी

 गर्मी के मौसम में तेज धूप और गर्म हवाएं चेहरे को नुकसान पहुंचाती हैं. डिहाइड्रेशन की वजह से स्किन ड्राई, बेजान और रफ दिखने लगती है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने चेहरे का खास ख्याल रखें. इसके लिए महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय आप घर में मौजूद मौसमी फलों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपकी स्किन को नेचुरल तरीके से हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद करते हैं. पपीता पपीते में मौजूद एंजाइम्स स्किन को एक्सफोलिएट करते हैं और कोलेजन बढ़ाने में मदद करते हैं. पपीते को मैश करके चेहरे पर लगाएं, इससे चेहरा सॉफ्ट और ग्लोइंग बनेगा. स्ट्रॉबेरी स्ट्रॉबेरी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो किल-मुहांसों को कम करने में मदद करते हैं. इसे मैश करके शहद के साथ मिलाएं और फेस पैक की तरह लगाएं. तरबूज तरबूज त्वचा को अंदर से हाइड्रेट करता है. इसके गूदे को सीधे चेहरे पर लगाएं या टोनर की तरह इस्तेमाल करें. ब्लूबेरी ब्लूबेरी स्किन को डैमेज से बचाती है और चमक बढ़ाती है. इसे दही के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाने से बेहतर रिजल्ट मिलते हैं. अनानास अनानास डार्क स्पॉट्स को कम करने में मदद करता है. इसका रस निकालकर पिंपल या दाग वाली जगह पर लगाएं. कीवी कीवी स्किन को सॉफ्ट बनाती है और एजिंग के लक्षण कम करती है. इसे मैश करके नारियल तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं. आम आम त्वचा को मॉइश्चराइज करता है और एक्ने को कम करने में मदद करता है. इसे मैश कर फेस मास्क की तरह इस्तेमाल करें. इन आसान घरेलू उपायों को अपनाकर आप गर्मियों में अपनी चेहरे को हेल्दी, फ्रेश और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं.