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स्मार्टफोन यूज़र्स को झटका: Samsung A–F सीरीज महंगी, OnePlus 15R के दाम बढ़ने के संकेत

नई दिल्ली स्‍मार्टफोन ब्रैंड सैमसंग ने अपनी A और F सीरीज की डिवाइसेज को महंगा कर दिया है। टिप्‍सटर अभिषेक यादव ने यह जानकारी शेयर की है। बताया है कि आने वाले दिनों में OnePlus 15R के दाम भी करीब 4 हजार रुपये तक बढ़ाए जा सकते हैं। हालांकि वनप्‍लस की तरफ से आध‍िकारिक जानकारी इस बारे में नहीं आई है। बताया जा रहा है कि Samsung Galaxy A56, A36 और Galaxy F17 5G के मॉडलों की कीमत बढ़ाई गई है। बढ़े हुए दाम 25 फरवरी से लागू हो गए हैं। आइए जानते हैं कौन सा मॉडल कितना महंगा हुआ है। Smartphones A और F सीरीज की कीमतों में बढ़ोतरी टिप्‍सटर पर भरोसा किया जाए तो Galaxy A56 (8/256) की कीमत अब 44,999 रुपये हो गई है। इसमें 1 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। Galaxy A56 (12/256) के दाम अब 48,999 रुपये हो गए हैं। इसमें 2 हजार रुपये की बढ़ाेतरी हुई है। Galaxy A36 (8/256) मॉडल की कीमत 36,499 रुपये हो गई है जो पहले से 1 हजार रुपये अधिक है। Galaxy A36 (12/256) के दाम अब 40,499 रुपये हो गए हैं जो 2 हजार रुपये पहले से ज्‍यादा हैं। वहीं, Galaxy F17 5G (4/128) मॉडल के दाम अब 16,499 रुपये हैं। इन्‍हें 1 हजार रुपये बढ़ाया गया है। Galaxy F17 5G (6/128) के दाम अब 17,999 रुपये हैं। इन्‍हें 1 हजार रुपये बढ़ाया गया है। Galaxy F17 5G (8/128) के दाम अब 19,999 रुपये हो गए हैं। इन्‍हें 1,500 रुपये बढ़ाया गया है। OnePlus 15R भी होगा महंगा? टिप्‍सटर के दावों पर भरोसा किया जाए तो OnePlus 15R को भी महंगा किया जा सकता है। यह स्‍मार्टफोन वनप्‍लस की सबसे लेटेस्‍ट लॉन्‍च ड‍िवाइस है। भारत में इसे 47,999 की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। अब कहा जा रहा है कि कंपनी 1 मार्च के इसके दाम बढ़ा सकती है। अभिषेक यादव ने अपडेटेड MOPs शेयर किए हैं। दावा है कि वनप्‍लस 15R को 4 हजार रुपये महंगा किया जा सकता है, जिसके बाद फाेन के दाम 51999 रुपये हो जाएंगे। यह 256 जीबी मॉडल की कीमत होगी। वहीं, 512 जीबी मॉडल के दाम बढ़ाकर 56999 रुपये किए जा सकते हैं। क्‍यों बढ़ रहे स्‍मार्टफोन्‍स के दाम? स्‍मार्टफोन्‍स की कीमतें बढ़ने की प्रमुख वजह रैम और स्‍टोरेज है। इनके दाम में बढ़ोतरी हो रही है। एआई के कारण दुन‍ियाभर की कंपनियां धड़ाधड़ रैम और स्‍टोरेज के लिए ऑर्डर दे रही हैं। हाल ही में WD यानी वेस्‍टर्न डिजिटल ने बताया था कि उसके पास स्‍टोरेज के अगले 1 साल के ऑर्डर आ गए हैं। इसका असर स्‍मार्टफोन की कीमतों में भी दिखाई दे रहा है।

WhatsApp का नया अपडेट: सिम कार्ड हटाते ही होगा ऐप बंद, जानें नया नियम

 नई दिल्ली WhatsApp प्लेटफॉर्म ने सिम बाइडिंग सर्विस को शामिल किया है और लेटेस्ट बीटा अपडेट में इसकी टेस्टिंग शुरू हो चुकी है. ये जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है. दरअसल, साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए भारत सरकार के रसंचार विभाग ज्यादातर OTT ऐप्स के लिए SIM-Binding नियम का ऐलान किया है.  Wabetainfo ने पोस्ट करके बताया है कि मैसेजिंग ऐप ने न्यू रेगुलेशन के साथ काम करना शुरू कर दिया है, जिसका नाम सिम बाइंडिंग है. इसकी मदद से WhatsApp अकाउंट सेफ रहेगा और एक्टिव सिम कार्ड पर ही काम करेगा.  WhatsApp beta के Android 2.26.8.6 अपडेट में पता चलता है कि वह भारत के मेंडेटरी सिम लिंक रूल्स पर काम कर रहा है.  सिम बाइडिंग नियम क्या है? SIM-Binding, असल में एक ऐसी सर्विस है कि कोई भी मैसेजिंग या कम्युनिकेशन ऐप उसी SIM कार्ड के साथ काम करेगा, जिस नंबर से वह रजिस्टर है. स्मार्टफोन से जैसे ही सिम निकाली या बदली जाती है तो WhatsApp भी काम करना बंद कर देगा. UPI ऐप्स में सिम बाइडिंग की सुविधा पहले से है.  WhatsApp चलाने के लिए चाहिए होगी एक्टिव सिम कार्ड. (Unsplash) Wabetainfo का पोस्ट  Wabetainfo ने एक स्क्रीनशॉट्स जारी किया है, जो पोस्ट में देखा जा सकेगा. इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप भारत में नए नियमों को फॉलो करने के लिए तकनीकी उपाय लागू करेगा. WhatsApp पर मौजूदा समय सिस्टम   मौजूदा समय में यूजर्स समय-समय पर 6 डिजिट के वेरिफिकेशन कोड को एंटर करके WhatsAppको यूज कर सकते हैं. एक बार लॉगइन करने के बाद सिस्टम यह चेक नहीं करता है कि सिम एक्टिव है या नहीं. सिम बाइडिंग के साथ ऐसा नहीं होगा.  भारत सरकार का मकसद  भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) के मुताबिक, सिम बाइडिंग सिस्टम डिसकनेक्टेड हो चुके हैं नंबर या फिर दोबारा सेल किए गए फोन के नंबर के मिसयूज को रोकना है. साइबर स्कैमर्स पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी. 

चार्ज खत्म ही नहीं होता? 10001mAh बैटरी वाले Realme P4 Power ने टेस्टिंग में किया हैरान

नई दिल्ली कोई फोन कितना पावरफुल हो सकता है, यह मुझे Realme P4 Power ने बता द‍िया। जब डिवाइस लॉन्‍च हुई थी तो सबसे ज्‍यादा चर्चा इसकी बैटरी की रही। 10001mAh के साथ यह भारत का सबसे बड़ी बैटरी वाला फोन है। मैंने भी इसकी बैटरी को जमकर टेस्‍ट किया। मेरी टेस्टिंग में यह लगातार 49 घंटे और 44 मिनटों तक टिका रहा। यह मेरे ल‍िए चौंकाने वाला था। आजतक किसी भी स्‍मार्टफोन की बैटरी मेरे र‍िव्‍यू में इतनी देर नहीं चली है। लेकिन फोन खरीदते वक्‍त क्‍या सिर्फ बैटरी ही देखी जाए? बाकी मामलों में कैसा है Realme P4 Power, आइए जानते हैं।  कैसे किया बैटरी टेस्‍ट Realme P4 Power की बैटरी को टेस्‍ट करने से पहले मैंने फोन को फुल चार्ज कर लिया था। चार्जिंग में रहते हुए ही मैंने फोन की ब्राइटनैस को 50% पर सेट कर दिया। वॉल्‍यूम जीरो कर दिया और बैटरी पावर सेविंग मोड को बंद कर दिया। मैंने Youtube पर एक ऑनलाइन वीड‍ियो न‍िकाला जो 100 घंटों का था। उसे मैंने अधि‍कतम रेजॉलूशन पर सेट किया और ऑनलाइन वीडियो प्‍ले कर दिया। अब मैं फोन को चार्जिंग से हटा चुका था। मेरे तय किए गए सभी पैरामीटर्स के साथ यूट्यूब वीड‍ियो पूरे दो दिनों तक नॉनस्‍टॉप चलता रहा। पहले 24 घंटों में बैटरी 47% बच गई थी। कुल मिलाकर फोन 49 घंटे और 44 मिनटों बाद स्‍व‍िच्‍ड ऑफ हुआ। बैटरी कितनी दमदार? Realme P4 Power की बैटरी पर मुझे जरा भी शक नहीं है। अगर ऑनलाइन स्‍ट्रीमिंग में यह फोन दो दिनों से ज्‍यादा चल सकता है तो निश्‍चित रूप से डाउनलोडेड वीड‍ियाे के साथ इसकी बैटरी और भी लंबी चलेगी। इसके अलावा मैंने इस बैटरी को रोजाना इस्‍तेमाल में भी परखा। मैं एक एवरेज यूजर हूं जो दिन में 5 से 6 घंटे मोबाइल पर व्‍यस्‍त रहता है। एक बार फुल होने के बाद इसने मुझे ढाई दिन का बैकअप दिया। अगर आप हैवी यूजर हैं यानी गेमिंग वगैरह अध‍िक करते हैं, तब भी फोन की बैटरी आराम से दो दिन चल जाएगी। कितनी देर में चार्ज होता है फोन? यह फोन 80W की अल्‍ट्रा चार्जिंग को सपोर्ट करता है। मेरी टेस्टिंग के दौरान यह लगभग दो घंटे में फुल चार्ज हुआ। मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि अगर कंपनी सबसे बड़ी बैटरी दे रही है तो उसे चार्जिंग भी सबसे ज्‍यादा देनी चाहिए थी। तब यह फोन अपनी बैटरी और चार्जिंग पावर से ‘सोने पे सुहागा’ हो जाता। ड‍िजाइन और डिस्‍प्‍ले यह फोन तीन कलर्स- ट्रांस सिल्‍वर, ट्रांस ऑरेंज और ट्रांस ब्‍लू में आता है। फोन का डिजाइन नीचे से क्‍लीन और डिसेंट और टॉप में जालीदार पैटर्न लिए हुए है। कंपनी ने इसे गेमिंग टच देने की कोशिश की है। 219 ग्राम वजन के साथ मैं इसे बहुत भारी नहीं कहूंगा, क्‍योंकि इसमें बहुत बड़ी बैटरी है। वजन कंट्रोल करने के लिए कंपनी ने बैक और साइड फ्रेम में प्‍लास्टिक इस्‍तेमाल किया है। हालांकि यह सस्‍ता या चीप टाइप नहीं दिखता है। फोन में 6.7 इंच का एमोलेड डिस्‍प्‍ले है। यह फुल एचडी प्‍लस रेजॉलूशन ऑफर करता है। 144 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट के साथ यह गेमर्स के ल‍िए भी आइडल चॉइस लगता है। मुझे फोन के डिस्‍प्‍ले कलर्स, कॉन्‍ट्रास्‍ट और शार्पनेस डिसेंट लगी। फोन में कंटेंट स्‍ट्रीम करने का अनुभव भी शानदार रहा। मेरी आंखें इसके कलर्स के साथ जल्‍दी एडजस्‍ट हो गई थीं। परफॉर्मेंस मीडि‍याटेक डाइमेंसिटी 7400 अल्‍ट्रा 5G चिपसेट से पावर्ड मेरी यूनिट में 12GB रैम थी। टेस्टिंग के दौरान इसने मुझे स्‍मूथ परफॉर्मेंस दी। ऐप्‍स तेजी से ओपन और बंद हो रहे थे। मल्‍टीटास्‍क‍िंग में भी लैग या हैंग जैसी रुकावट नहीं आई। हालांकि बहुत अधिक हैवी गेमिंग पर कुछेक फ्रेम जरूर ड्रॉप हुए, लेकिन इतना तो चलता है। ओवरऑल परफॉर्मेंस में यह फोन न‍िराश नहीं करेगा। डेली काम आप बिना अटके कर पाएंगे। UFS 3.1 के साथ फाइल ट्रांसफर भी स्‍मूथ होता है। कैमरा कैमरा वह पॉइंट है जहां में रियलमी पी4 पावर को ओके-ओके कहूंगा। इसका 50MP का मेन बैक कैमरा डेली यूज में ठीक फोटो लेता है। 8MP का अल्‍ट्रावाइड कैमरा भी र‍िजल्‍ट दे जाता है। 16MP के सेल्‍फी कैमरे से पसंद आने वाली फोटो क्‍ल‍िक होती हैं लेकिन कोई वाव फैक्‍टर इसके कैमरों में नहीं है। टेलीफोटो लेंस या पेरिस्‍कोप कैमरा जैसी चीजें नहीं हैं। फ्रंट कैमरा में 4K वीड‍ियो रिकॉर्डिंग नहीं मिलती, जो मुझे इस फोन की बड़ी कमी लगी। अगर आप कैमरा लवर हैं और अच्‍छे कैमरा वाला फोन तलाश रहे हैं तो आपको Realme P4 पावर की जगह कुछ और ढूंढना चाहिए।

धूप वाला पानी और विटामिन-D: हकीकत, भ्रम या देसी नुस्खा?

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला अजीबोगरीब दावा कर रही है। उसका कहना है कि एक कांच की बोतल में पानी भरें, उसमें थोड़ी जगह खाली छोड़ दें और उसे दिनभर के लिए धूप में रख दें। महिला के अनुसार, इस धूप में रखे पानी को पीने से आपके शरीर में 'विटामिन डी' की कमी पूरी हो जाएगी। डॉक्टर के अनुसार, धूप में पानी रखकर उसे पीने से विटामिन डी मिलने की बात पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है। यह वैज्ञानिक रूप से बिल्कुल भी प्रमाणित नहीं है। डॉक्टर स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि लोगों को इस तरह के गलत प्रयोग बिल्कुल नहीं करने चाहिए। शरीर में कैसे बनता है विटामिन डी? डॉक्टर ने समझाया कि शरीर में विटामिन डी बनने की एक पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। पानी पीने से इसका कोई लेना-देना नहीं है। असली प्रक्रिया कुछ इस तरह काम करती है:     धूप का सीधा संपर्क: जब आप अपने शरीर की कम से कम आधी त्वचा को सीधे धूप के संपर्क में लाते हैं, तो सूरज से अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी त्वचा पर पड़ती हैं।     त्वचा में रिएक्शन: ये किरणें त्वचा में मौजूद रसायन 'डीहाइड्रोकोले कैल्सिफेरोल' के साथ रिएक्शन करती हैं।     विटामिन डी3 का निर्माण: इस रिएक्शन के बाद शरीर में 'विटामिन डी3' बनता है। शरीर में कैसे काम करता है यह विटामिन? त्वचा में विटामिन डी3 बनने के बाद यह सीधा आपके लिवर में जाता है और वहां जाकर एक्टिवेट होता है। इसके बाद यह हड्डियों से जुड़ता है, जिससे आपकी बोन हेल्थ बेहतर होती है और यह 'ऑस्टियोपोरोसिस' जैसी हड्डियों की गंभीर बीमारी में भी मदद करता है। धूप से विटामिन डी लेने का सही तरीका क्या है? डॉक्टर के मुताबिक, अगर आप कपड़े पहनकर धूप में बैठते हैं, तो आपको विटामिन डी नहीं मिलेगा। कपड़े सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों को आपकी त्वचा तक जाने से रोक देते हैं। इसलिए, सूरज की किरणों का त्वचा से सीधा संपर्क होना बहुत जरूरी है। आपने अक्सर देखा होगा कि विदेशी लोग समुद्र के किनारे लेटकर धूप सेंकते हैं। वे ऐसा टैनिंग के साथ-साथ सीधे अपनी त्वचा पर विटामिन डी और अल्ट्रावायलेट किरणें प्राप्त करने के लिए ही करते हैं। धूप में रखे पानी से विटामिन डी मिलने का कॉन्सेप्ट पूरी तरह से गलत है। अगर आप सच में विटामिन डी पाना चाहते हैं, तो दिन में कम से कम आधा घंटा अपने शरीर के आधे हिस्से को बिना कपड़ों के सीधे धूप दिखाएं या फिर, जरूरत पड़ने पर विटामिन डी का सप्लीमेंट लें।  

स्लो वाई-फाई को तेज करने के लिए अपनाएं ये 9 तरीके

अगर आपके घर के वाई-फाई के सिग्नल कमजोर हैं, तो ये 9 सिंपल टिप्स अपनाएं और स्लो वाई-फाई से निजात पाएं। क्लिक करें… -राउटर घर के बीचों-बीच रखें, ताकि घर के हर हिस्से में बराबर सिग्नल पहुंचें। -राउटर की पोजिशन तय करने के लिए आप क्लाउडचेक की भी मदद ले सकते हैं। इससे आपको पूरे घर का वाई-फाई रूट पता चल जाएगा, और आप तय कर पाएंगे कि कहां सिग्नल कमजोर हैं। -राउटर को कभी भी फर्श पर न रखें। उसे जमीन से कम से कम 2 फीट ऊपर रखें, क्योंकि सिग्नल्स की दिशा कुछ नीचे की तरफ होती है। अगर राउटर फर्श पर रखा होगा तो सिग्नल्स के रास्ते में रुकावट आएगी। -राउटर को टीवी कैबिनेट या पर्दे के पीछे न छिपाएं। उसे खुले में रखें, ताकि फ्री सिग्नल और बेहतर स्ट्रेंथ मिले। -राउटर को टीवी, कॉर्डलेस फोन और माइक्रोवेव जैसे दूसरे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स से दूर रखें। उनसे राउटर सिग्नल बाधित होते हैं, क्योंकि वे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स छोड़ते हैं। -वाई-फाई चोरों से सतर्क रहें। अपना डब्लूपीए पासवर्ड ऐसा रखें कि कोई उसे हैक न कर सके। इसके लिए आप त्मंअमत की हेल्प ले सकते हैं। -सही वायरलेस चैनल भी आपके वाई-फाई के लिए इंपॉर्टंट है। खासतौर से तब, जब आपके आस-पास बहुत सारे वाई-फाई नेटवर्क हों। वाई-फाई एनेलाईजर और वाई-फाई स्टंबल्र जैसे टूल्स आपको अपने घर के लिए परफेक्ट चैनल सर्च करने में मदद कर सकते हैं। दूसरे राउटर्स की इंटरफरेंस कम करने से सिग्नल मजबूत किए जा सकते हैं। राउटर सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करते रहें। पुराने राउटर के मामले में आपको ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी। -चेक करें कि कहीं वीक सिग्नल का कारण आपका इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर तो नहीं है। इस मामले में हम अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं कि राउटर खराब है या सर्विस प्रवाइडर की समस्या है। अगर दोनों सिचुएशन (वाई-फाई से कनेक्शन और राउटर से डायरेक्ट कनेक्शन) में आपकी डिवाइस पर नेट स्लो है, तो इसकी वजह आपका सर्विस प्रवाइडर है। इसके लिए आप स्पीड टेस्ट की मदद ले सकते हैं, आपको पता चल जाएगा कि समस्या कहां है।  

जिद्दी स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाने के आसान घरेलू उपाय

प्रेग्नेंसी और वजन घटने या बढ़ने की वजह से अक्सर शरीर के कई हिस्सों पर स्ट्रेच माक्र्स हो जाते हैं। वहीं कई लोगों में हॉर्मोनल चेंजेस की वजह से भी ऐसे निशान पड़ जाते हैं। सफेद रंग के ये जिद्दी दाग यूं तो बड़ी मुश्किल से जाते हैं। पर हम आपको कुछ ऐसे घरेलू तरीके बता रहे हैं, जिससे इन निशानों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। पौष्टिक भोजन स्वस्थ त्वचा के लिए विटामिन सी और ई, जिंक, सिलिका और अन्य पोषक तत्वों की प्रचुरता वाला संतुलित और पौष्टिक आहार चुनें। खाने में स्ट्रॉबेरी, जामुन, पालक, गाजर, हरी बींस, साग और बादाम शामिल करें। नींबू का रस नींबू का रस एक प्राकृतिक अम्ल है, जो स्ट्रेच माक्र्स को हल्का करता है। नींबू के रस को स्ट्रेच माक्र्स पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें। चीनी अपने प्राकृतिक सफेद रूप में चीनी स्ट्रेच माक्र्स हटाने का काफी कारगर उपाय है। एक चम्मच चीनी में बादाम का तेल और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर उसे स्ट्रेच माक्र्स पर लगाने से काफी असर होता है। वनस्पति तेल से मसाज गर्भवती महिलाओं को वनस्पति तेल से मसाज करना चाहिए। इससे स्ट्रेच माक्र्स के निशान कम हो जाते हैं। एलोवेरा जेल एक कप एलोवेरा में 2 चम्मच विटामिन ई का तेल मिलाइए। इस मिश्रण को तब तक लगाइए जब तक त्वचा इसे पूरी तरह सोख न ले। रोजाना लगाने से त्वचा में फर्क महसूस होगा। कोकोआ मक्खन स्ट्रेच माक्र्स पर कोकोआ मक्खन लगाने से दाग कम होते हैं। स्ट्रेच माक्र्स वाले भागों पर दिन में दो बार कोकोआ मक्खन से मसाज करें। एक महीने में ही फर्क आएगा।  

बिना टावर भी चलेगा फोन! ऐपल ला सकता है एंटीना वाला स्मार्ट कवर

एंटीना वाला फोन कवर, जी हां आपने सही सुना। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, Apple एक नए स्मार्ट केस डेवलप करने पर विचार कर रहा है। इसमें एक बड़ा और ज्यादा एडवांस्ड एंटीना सिस्टम जोड़ जाएगा ताकि सैटेलाइट कम्युनिकेशन को काफी बेहतर बनाया जा सके। बता दें कि कंपनी ने अपने आईफोन में 2022 में सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS फीचर लॉन्च किया था। इसके बाद अब ऐपल भविष्य में आने वाले फोन्स में कई बड़े अपग्रेड देने पर विचार कर रही है। लेटेस्ट पेटेंट से पता चलता है कि इमरजेंसी SOS फीचर में जल्द ही एक बड़ा अपग्रेड आ सकता है। इस फीचर को बेहतर बनाने के लिए नए स्मार्ट कवर का पेटेंट कराया गया है। फोन के एंटीना नहीं होते इतने पावरफुल Apple ने iPhone 14 के साथ सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की शुरुआत की थी। इस फीचर के साथ कंपनी ने लोगों को चौंका दिया था। यूजर्स अपने आईफोन को लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की ओर पॉइंट करके इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन फोन के अंदर दिए गए एंटीना का सरफेस एरिया और पावर सीमित होती है, इसलिए डेटा ट्रांसमिशन भी सीमित हो जाता है। बिल्डिंग, पेड़ और जमीन के कारण सैटेलाइट के साथ कनेक्शन बनाए रखना में मुश्किल आती है। कवर बड़े ग्रुप के साथ बनाता है कनेक्शन इस समस्या को हल करने और अपनी सैटेलाइट SOS को और भी बेहतर बनाने के लिए Apple ने एक हटाने वाले कवर के लिए पेटेंट फाइल किया है। इसे फेज्ड ऐरे एंटीना के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सिग्नल बीम बनाने और उन्हें चलाने के लिए कई ट्रांसमीटर और रिसीवर का इस्तेमाल करता है। कवर किसी एक सैटेलाइट पर लॉक होने के बजाय बड़े ग्रुप के साथ कनेक्शन बनाए रखता है। यह आसमान में घूमते हुए सैटेलाइट के बीच आसानी से शिफ्ट हो सकता है। पेटेंट के इलस्ट्रेशन में एक फोल्ड-आउट कवर दिखाया गया है। यह आसमान की ओर पॉइंट करता है और डेडिकेटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) लिंक या नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) के जरिए iPhone के साथ सिंक होता है। ज्यादा डेटा भेजने में मिलेगी मदद केस में एक बड़ा एंटीना लगा है, जो iPhone को ज्यादा डेटा भेजने में मदद कर सकता है। इसके बाद, फोन शायद ज्यादा सैटेलाइट कनेक्टिविटी को सपोर्ट कर सकता है। यह होने वाली रुकावट को कम कर सकता है और ट्रांसमिशन की ताकत को भी बढ़ा सकता है। हालांकि, इसे कब मार्केट में लाया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन ये साफ है कि आईफोन कवर के साथ अगर एनटीना लगा होगा तो SOS सर्विस काफी बेहतर हो जाएगी।

ChatGPT का बढ़ता क्रेज: भारत में युवा इसे कोडिंग, पढ़ाई और काम में कर रहे हैं इस्तेमाल, रिपोर्ट में खुलासा

मुंबई   भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के इस्तेमाल के मामले में एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. ओपनएआई के नए डेटा के मुताबिक, भारत अब चैटजीपीटी का अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन चुका है. भारत में चैटजीपीटी के वीकली एक्टिव यूज़र्स की संख्या 10 करोड़ से भी आगे पहुंच चुकी है. इसमें खास बात यह है कि भारतीय यूज़र्स सिर्फ एआई को आज़मा नहीं रहे, बल्कि इसे अपनी डेली-लाइफ के काम और प्रोफेशनल जरूरतों के लिए गंभीरता से इस्तेमाल भी कर रहे हैं. ओपनएआई की नई पब्लिक डेटा पहल 'OpenAI Signals' की रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में यूज़र्स टेक्निकल टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल एवरेज से कहीं ज्यादा कर रहे हैं. खासतौर पर कोडिंग और डेटा एनालिसिस के मामले में भारत काफी तेजी से आगे निकल रहा है. प्लस और प्रो सब्सक्राइबर्स के बीच डेटा एनालिसिस टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल औसत से करीब चार गुना ज्यादा है. वहीं, कोडिंग से जुड़े के लिए Codex का इस्तेमाल लगभग तीन गुना ज्यादा देखा गया है. OpenAI के सीईओ सैम अल्टमैन ने भी आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए यही बात कही है. ChatGPT यूज़ करने के तरीके भारत में आंकड़ा ग्लोबल तुलना मुख्य नोट्स वीकली एक्टिव यूजर्स 100 मिलियन से ज्यादा US के बाद दूसरा सबसे बड़ा सबसे तेज Codex ग्रोथ कोडिंग (Coding / Codex) 3x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से 3 गुना तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु सबसे आगे डेटा एनालिसिस 4x ज्यादा (Plus/Pro) ग्लोबल एवरेज से 4 गुना एडवांस टूल्स में हाई यूज लर्निंग/एजुकेशन 2x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से दोगुना युवा सबसे आगे वर्क-रिलेटेड मैसेजेस 35% ग्लोबल: 30% ड्राफ्टिंग, डिबगिंग, स्पीड-अप प्रैक्टिकल गाइडेंस (नॉन-वर्क) 35% – सेल्फ-लर्निंग, डिसीजन मेकिंग जनरल जानकारी / राइटिंग दोनों कामों के लिए 20% – बेसिक क्वेरीज और कंटेंट उम्र ग्रुप 18-24: 50% 18-34: 80% 18-24: 33% युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर)   चैटजीपीटी का सबसे एडवांस यूज़ कर रहा भारत रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय यूज़र्स कोडिंग से जुड़े सवाल भी दुनियाभर के यूजर्स की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा पूछ रहे हैं. वहीं, पढ़ाई और लर्निंग से जुड़े सवालों में भी भारत ग्लोबल एवरेज से लगभग दोगुना आगे है. जियोग्राफिक तौर पर देखें तो तेलंगाना, कर्नाटका और तमिलनाडु जैसे टेक हब्स में कोडिंग से जुड़ा इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखने को मिला है. इसके अलावा भारत में लोग काम से जुड़े कामों के लिए भी चैटजीपीटी का काफी इस्तेमाल करते हैं और इसमें भी तेजी से बढ़ोतरी आई है. करीब 35% कंज्यूमर मैसेजेस सीधे काम से जुड़े होते हैं, जबकि ग्लोबल लेवल पर यह आंकड़ा लगभग 30 प्रतिशत है. ऑफिस वर्क में लोग ड्राफ्टिंग, एडिटिंग, टेक्निकल हेल्प, डिबगिंग और काम को तेज करने के लिए चैटजीपीटी पर भरोसा कर रहे हैं. भारत के यूज़र्स काम के अलावा भी चैटजीपीटी का काफी प्रैक्टिल तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. लगभग 35% नॉन-वर्क मैसेजेस किसी न किसी तरह की प्रैक्टिकल गाइडेंस से जुड़े होते हैं. इसके अलावा करीब 20% मैसेजेस जनरल जानकारी और 20% राइटिंग से जुड़े होते हैं. इससे साफ है कि लोग सेल्फ लर्निंग, डिसीजन मेकिंग और पर्सनल प्रोडक्टिविटी के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं.     18-24: 33%    युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर) उम्र के लिहाज से देखें तो भारत में चैटजीपीटी का इस्तेमाल युवाओं के बीच सबसे ज्यादा है. 18 से 24 साल के यूज़र्स कुल मैसेजेस का लगभग आधा हिस्सा भेजते हैं. वहीं, 18 से 34 साल के यूज़र्स मिलकर करीब 80% मैसेजेस करते हैं. OpenAI के चीफ इकोनॉमिस्ट रोनी चैटर्जी का कहना है कि एआई को अपनाने की रफ्तार इतनी तेज है कि उसे मापने वाले टूल्स भी पीछे छूट रहे हैं. उनका मानना है कि OpenAI Signals भारत में एआई को लेकर चर्चा को हाइप से निकालकर डेटा के आधार पर समझने में मदद करेगा.

स्मार्टफोन यूजर्स अलर्ट! Google Gemini बनकर स्कैमर्स चुरा रहे पर्सनल डिटेल्स, जानें कैसे रहें सुरक्षित

नई दिल्ली क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी तरह स्कैमर्स भी गूगल जेमिनी (Google Gemini) का इस्तेमाल करके आपको अपना निशाना बना सकते हैं। NOD32 एंटीवायरस बनाने वाली कंपनी ESET के रिसर्चर्स ने PromptSpy नाम का एक नया एंड्रॉयड मैलवेयर खाजा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि मैलवेयर यूजर्स को मैनिपुलेट करने के लिए गूगल जेमिनी का इस्तेमाल करता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेडिशनल मैलवेयर हार्ड कोडेड इंस्ट्रक्शन पर निर्भर करता है। PromptSpy पहला ऐसा एंड्रॉयड मैलवेयर है, जो जेनरेटिव AI का इस्तेमाल करता है। आइये, इस नए मैलवेयर के बारे में डिटेल में जानते हैं और इससे बचने का तरीका भी बताते हैं। क्या है PrompySpy ? एंड्रॉयड मैलवेयर ऐड फ्रॉड के लिए स्क्रीनशॉट को एनालाइज करते हैं और इस तरह के काम करने के लिए वे मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। ESET का कहना है कि PrompySpy आपकी स्क्रीन की जानकारी पाने के लिए Gemini का इस्तेमाल करते हैं। वे स्क्रीन की जानकारी जेमिनी को भेजता है और AI चैटबॉट से पूछता है कि आगे क्या करना है। कैसे काम करता है मैलवेयर? रिसर्चर्स का कहना है कि इस तरह मैलवेयर अलग-अलग एंड्रॉयड डिवाइस और इंटरफेस के हिसाब से काम करता है। वे अब पहले से लिखी गई स्क्रिप्ट पर निर्भर नहीं रहते हैं। पहले इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके कुछ ही डिवाइस पर काम करते थे, लेकिन अब जेमिनी के जरिए स्कैमर्स अलग-अलग डिवाइस के पैटर्न को समझ लेते हैं और जेमिनी से आगे बढ़ने की प्रक्रिया भी पूछ लेते हैं। AI का करता है इस्तेमाल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एंड्रॉयड डिवाइस में एक ऐसा फीचर होता है, जिससे यूजर ऐप्स को “लॉक” या “पिन” कर सकते हैं ताकि जब आप सभी ऐप्स को बैकग्राउंड से हटाएंगे तो वे मेमोरी से साफ ना हों। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के फोन्स में यह विभिन्न तरह से काम करता है। यहीं PromptSpy AI का इस्तेमाल करता है। मैलवेयर स्क्रीन पर क्या है, इसकी जानकारी Gemini को XML फॉर्मेट में भेजता है, जिसमें UI एलिमेंट, टेक्स्ट लेबल, क्लास टाइप और स्क्रीन कोऑर्डिनेट शामिल हैं। एंड्रॉयड की इस सर्विस का होता है इस्तेमाल इसके बाद गूगल का AI चैटबॉट JSON में किसी ऐप को लॉक या पिन करने के निर्देश भेजकर जवाब देता है। फिर PromptSpy एंड्रॉयड की एक्सेसिबिलिटी सर्विस का इस्तेमाल करके यह काम करता है। ऐसे बचें Google का सुझाव है कि यूजर्स को अपने डिवाइस पर प्ले प्रोटेक्ट चालू करना चाहिए, क्योंकि यह सिक्योरिटी फीचर उनके डिवाइस को मैलवेयर से इन्फेक्ट होने से बचाने में मदद कर सकता है।

अब दुबला नहीं रहेगा बच्चा! वजन बढ़ाने के लिए 6 बेस्ट फूड्स

अक्सर कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा खाना तो अच्छे से खाता है, लेकिन फिर भी वह दुबला-पतला है और उसका वजन नहीं बढ़ रहा है। अगर आप भी इसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो चिंता न करें। विशेषज्ञ के मुताबिक, आप अपने बच्चे की डाइट में कुछ खास फूड्स को शामिल करके इस परेशानी को दूर कर सकते हैं। इस आर्टिकल में हम उन 6 बेहतरीन चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो बच्चे का वजन बढ़ाने में मदद करती हैं। दाल और घी आप किसी भी दाल को अच्छी तरह उबाल लें। फिर उसे अच्छे से मैश करके उसमें घी मिलाएं और बच्चे को खिलाएं। यह वजन बढ़ाने का एक बहुत अच्छा तरीका है। पनीर, टोफू या अंडा बच्चे के सही विकास के लिए ये जरूरी पोषक तत्व हैं। पनीर, टोफू या अंडे में प्रोटीन होता है, जो बच्चे का वजन बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है। शकरकंद या आलू शकरकंद या आलू को अच्छी तरह उबालकर और मैश करके बच्चे को दें। इसमें फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो शरीर को एनर्जी देते हैं और तेजी से वजन बढ़ाते हैं। पीसे हुए सूखे मेवे सूखे मेवों को बारीक पीस लें। इस पाउडर को आप दूध, दही या दाल में मिलाकर बच्चे को दे सकते हैं। ड्राई फ्रूट्स बच्चे का वजन बढ़ाने में बहुत असरदार होते हैं। आटे का हलवा और ओट्स का दलिया बच्चे को हल्की चीनी डालकर आटे का हलवा बनाकर खिलाने से भी वजन बढ़ता है। इसके अलावा, आप बच्चे को ओट्स का दलिया बनाकर भी दे सकते हैं, यह भी वजन बढ़ाने में मदद करता है। फुल फैट दही के साथ फल फुल फैट दही में केला, चीकू या आम मिलाकर एक स्वादिष्ट फ्रूट योगर्ट तैयार करें और बच्चे को खिलाएं। इससे भी बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है। अगर आपका बच्चा अंडरवेट है और उसका वजन नहीं बढ़ रहा है, तो आप उसे ये पौष्टिक चीजें दे सकते हैं। डॉक्टर का कहना है कि इससे उसका वजन भी बढ़ेगा और उसके शरीर में किसी भी तरह के पोषण की कमी नहीं रहेगी।