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डॉक्टर की चेतावनी: सीपीआर देने से पहले ABC जरूर चेक करें

नई दिल्ली सीपीआर एक जीवनरक्षक आपातकालीन प्रक्रिया है जो हृदय गति रुकने पर शरीर में ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के प्रवाह को बनाए रखने में मदद कर सकती है। सही समय पर दी गई सीपीआर अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज के जीवित बचने की संभावना को कई गुना बढ़ा सकती है। नोएडा के अमर उजाला कार्यालय में आयोजित एक विशेष हेल्थ कैंप के दौरान हृदय स्वास्थ्य और आपातकालीन चिकित्सा पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में नोएडा के एक निजी अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरभि छाबड़ा ने जीवन रक्षक तकनीक 'सीपीआर' (CPR) के बारे में एक बड़ा और जरूरी सुझाव दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीपीआर देने से पहले यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि मरीज को वास्तव में इसकी आवश्यकता है भी या नहीं। अक्सर घबराहट में लोग बेहोश पड़े हर व्यक्ति को सीपीआर देना शुरू कर देते हैं, जो कि डॉ. सुरभि के अनुसार मरीज के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। डॉ. छाबड़ा ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को सीपीआर देने से पहले 'एबीसी' (ABC) फॉर्मूले की जांच करना जरूरी है। यह तीन चरणों वाली प्रक्रिया बताने में मदद करती है कि क्या व्यक्ति का दिल या सांस वास्तव में रुक गई है। सही पहचान के बिना दी गई चेस्ट कंप्रेशन (छाती दबाना) मरीज की पसलियों या आंतरिक अंगों को चोट पहुंचा सकती है। एयरवे डॉ. सुरभि के अनुसार, एबीसी फॉर्मूले में सबसे पहला चरण 'ए' यानी एयरवे (Airway) की जांच करना है। जब कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए या बेहोश हो जाए, तो सबसे पहले यह देखें कि उसका वायु मार्ग खुला है या नहीं। कई बार गले में कुछ फंसने या जीब के पीछे की ओर गिरने के कारण सांस का रास्ता रुक जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज का सिर थोड़ा पीछे झुकाएं और उसकी ठुड्डी को ऊपर उठाएं। यह क्रिया सांस की नली को सीधा करने और हवा के प्रवाह के लिए रास्ता साफ करने में मदद करती है। अगर वायु मार्ग अवरुद्ध है, तो सीपीआर देने का कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंच ही नहीं पाएगी। ब्रिदिंग एबीसी प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण चरण 'बी' यानी ब्रिदिंग है। डॉ. छाबड़ा ने सुझाव दिया कि मरीज के पास अपना कान ले जाएं और उसकी सांसों की आवाज सुनने की कोशिश करें। साथ ही अपनी नजरें मरीज की छाती पर रखें और देखें कि क्या वह ऊपर-नीचे हो रही है। अगर व्यक्ति सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो उसे सीपीआर की आवश्यकता नहीं होती है। अक्सर लोग सामान्य बेहोशी या 'मिर्गी' के दौरे में भी सीपीआर देने लगते हैं, जो गलत है। केवल तभी सीपीआर दें जब व्यक्ति की सांसें पूरी तरह रुक चुकी हों। सर्कुलेशन एबीसी फॉर्मूले का अंतिम स्टेज है 'सी' यानी सर्कुलेशन चेक करना है। इसका मतलब है कि मरीज के शरीर में खून का प्रवाह हो रहा है या नहीं, इसे जांचना। इसके लिए गर्दन के पास स्थित 'कैरोटिड पल्स' को 5 से 10 सेकंड तक महसूस करें। आप कलाई की नब्ज को भी चेक कर सकते हैं लेकिन अगर कलाई पर नब्ज न मिले तो गर्दन के पास ही चेक करें। डॉ. सुरभि के मुताबिक, अगर पल्स महसूस नहीं हो रही है और मरीज की सांसें भी बंद हैं, तो यह 'कार्डियक अरेस्ट' का स्पष्ट संकेत है। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तुरंत सीपीआर शुरू कर देना चाहिए।  गलत सीपीआर से होने वाले जोखिम डॉ. सुरभि छाबड़ा ने अंत में यह स्पष्ट किया कि सीपीआर एक बेहद शक्तिशाली जीवन रक्षक तकनीक है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सही समय और सही मरीज के चुनाव पर निर्भर करती है। अगर किसी ऐसे व्यक्ति की छाती जोर से दबाई जाए जिसका दिल धड़क रहा है, तो इससे हार्ट रिदम बिगड़ सकता है और पसलियां टूट सकती हैं। एबीसी फॉर्मूले का पालन करने से आप न सिर्फ मरीज की स्थिति को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सहायता (एम्बुलेंस) आने तक उसे एक नया जीवन देने की संभावना भी बढ़ा सकेंगे।    

AI फोटो-वीडियो डालना अब जोखिम भरा? आज से लागू हुए इंटरनेट के 3 नए नियम, जानना जरूरी

नई  दिल्ली अगर आप सोशल मीडिया पर एआई (AI) से बनी तस्वीरें या वीडियो शेयर करने के शौकीन हैं तो आज से आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 'आईटी (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम 2021' के नए संशोधन आज यानी 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। अब इंटरनेट पर किसी भी भ्रामक या एआई कंटेंट को बिना लेबल के पोस्ट करना आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकता है। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'AI Impact Summit' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट को समाज के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने साफ किया कि एआई कंटेंट के लिए 'वॉटरमार्किंग' और सोर्स स्टैंडर्ड तय करना अब समय की मांग है। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर और ज्यादा सतर्क रहने पर जोर दिया। क्या है सिंथेटिकली जेनरेटेड कंटेंट (SGI)? नए नियमों के अनुसार एआई या कंप्यूटर द्वारा तैयार या मॉडिफाई किया गया कोई भी कंटेंट जो किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना जैसा दिखता हो उसे SGI माना जाएगा। ऐसे कंटेंट को शेयर करने से पहले 'वॉटरमार्क' या लेबल लगाना अनिवार्य है ताकि लोग समझ सकें कि यह असली नहीं है। सामान्य फोटो या वीडियो एडिटिंग को इस दायरे से बाहर रखा गया है। लागू हुए ये 3 बड़े बदलाव     अनिवार्य लेबलिंग: एआई कंटेंट पर लगा 'AI Label' एक बार लगने के बाद हटाया नहीं जा सकेगा।          प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी: फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (X) जैसे प्लेटफॉर्म्स को एआई कंटेंट पहचानने के लिए विशेष टूल्स बनाने होंगे। बिना वेरिफिकेशन के ऐसा कंटेंट अपलोड नहीं होगा।     नियमित चेतावनी: सोशल मीडिया कंपनियां हर 3 महीने में अपने यूजर्स को एआई के गलत इस्तेमाल पर होने वाली सजा और जुर्माने के बारे में अलर्ट भेजेंगी। नो-गो जोन: इन पर है सख्त पाबंदी सरकार ने कुछ श्रेणियों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट, फर्जी दस्तावेज, हथियार बनाने की जानकारी और किसी की छवि बिगाड़ने वाले डीपफेक वीडियो बनाने पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। सख्त कानून और भारी जुर्माना नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। अगर सरकार किसी कंटेंट को हटाने का निर्देश देती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा (जो पहले 36 घंटे था)। शिकायतों पर रिस्पॉन्स देने की समय सीमा को घटाकर मात्र 12 घंटे कर दिया गया है।  

ठंड के मौसम में गाजर है सेहत का खजाना, मिलते हैं कई जबरदस्त लाभ

गाजर में कई तरह के पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खासतौर से इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, कई तरह के खनिज लवण व एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। सर्दी का मौसम आते ही बाजार में लाल-लाल गाजर बेहद सस्ते दाम में मिलने लगती हैं। इतना ही नहीं, इस मौसम में लोग गाजर की सब्जी से लेकर उसका जूस तक पीना पसंद करते हैं। यूं तो गाजर को कई तहर से खाया जाता है लेकिन क्या आप इससे मिलने वाले फायदों से वाकिफ हैं। नहीं न, तो चलिए जानते हैं गाजर से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में-   प्रचुर होते हैं पोषक तत्व गाजर में कई तरह के पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खासतौर से इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, कई तरह के खनिज लवण व एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। आंखों को रखेगा तंदुरूस्त गाजर का सेवन आंखों के लिए विशेष रूप से लाभदायी माना गया है। ऐसा इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन व विटामिन ए की वजह से होता है। इसलिए जो लोग गाजर का सेवन पर्याप्त मात्रा में करते हैं, उनकी आंखों की रोशनी लंबे समय तक दुरूस्त तो रहती है ही, साथ ही रतौंधी व मोतियाबिंद जैसी बीमारियां होने की आशंका भी कम हो जाती है।   सदा रखे जवां समय के पहिए को रोक पाना भले ही किसी के लिए संभव न हो लेकिन लंबे समय तक जवां बने रहने के लिए कुछ उपाय तो किए ही जा सकते हैं। इन्हीं में से एक है गाजर का सेवन करना। दरअसल, इसमें बीटा-कैरोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। जो विभिन्न कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं और एजिंग के साइन्स को लंबे समय तक आने से रोकते हैं। इतना ही नहीं, गाजर का सेवन रूखी त्वचा, पिंपल्स, पिगमेंटेशन आदि समस्या से भी निजात दिलाते हैं।   हृदय के लिए लाभदायक गाजर हृदय के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। दरअसल, इसमें कैरोटीनॉयड्स पाए जाते हैं जो किसी भी तरह के हृदय रोग की आशंका को कम करते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें बीटा-कैरोटीन के साथ-साथ अल्फा कैरोटीन और ल्यूटिन भी पाया जाता है। गाजर का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। दांतों की सफाई गाजर प्लैक और खाद्य कणों को मुंह से निकालकर दांतों व पूरे मुंहे की सफाई करने का काम करता है। ठीक उसी तरह, जिस प्रकार एक टूथब्रश व टूथपेस्ट अपना काम करता है। गाजर में पाए जाने वाले मिनरल्स दांतों को किसी भी तरह की क्षति से बखूबी बचाते हैं। इसके अतिरिक्त गाजर मसूड़ों को उत्तेजित करके अधिक लार उत्पन्न करने में मदद करता है और यह लार क्षारीय होने के कारण कैविटी बनाने वाले बैक्टीरिया को संतुलित करके दांतों की रक्षा करता है।  

WhatsApp यूज़र्स खुश! आया ऐसा शानदार फीचर जो काम कर देगा आसान

नई दिल्ली व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए लगातार नए फीचर्स पेश कर रहा है। अब कंपनी ने ग्रुप चैट से जुड़ा एक अहम अपडेट जारी किया है, जिससे नए सदस्य को ग्रुप की पुरानी बातचीत समझने में आसानी होगी। साथ ही, व्हाट्सऐप वेब पर वीडियो कॉलिंग सुविधा लाने की तैयारी भी चल रही है। नए सदस्य को मिलेगी पुरानी चैट अब तक जब किसी नए व्यक्ति को ग्रुप में जोड़ा जाता था, तो वह पहले के मैसेज नहीं देख पाता था। नए अपडेट के बाद ग्रुप में जोड़ते समय 'Send message history' का विकल्प मिलेगा। इसके जरिए नए सदस्य को हाल की चैट हिस्ट्री भेजी जा सकेगी, ताकि वह बातचीत का संदर्भ समझ सके और चर्चा में सहजता से शामिल हो सके। कितने मैसेज भेज सकेंगे? इस फीचर में एडमिन या सदस्य यह चुन सकेंगे कि वे 25, 50, 75 या 100 मैसेज तक की हिस्ट्री साझा करना चाहते हैं। यहां दिनों के आधार पर नहीं, बल्कि मैसेज की संख्या (मैसेज बबल्स) के आधार पर चैट भेजी जाएगी। इससे उपयोगकर्ता अपनी जरूरत के अनुसार सीमित या अधिक मैसेज शेयर कर सकते हैं। सभी को मिलेगी सूचना जब किसी नए सदस्य को चैट हिस्ट्री भेजी जाएगी, तो ग्रुप में मौजूद सभी लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी। नए सदस्य को एक विशेष लेबल भी दिखाई देगा, जिसमें यह बताया जाएगा कि उसे किस तारीख और समय से मैसेज उपलब्ध कराए गए हैं। यह सुविधा ग्रुप एडमिन के अलावा वह सदस्य भी इस्तेमाल कर सकता है, जो किसी को ग्रुप में जोड़ रहा है। सुरक्षा और गोपनीयता बरकरार कंपनी के अनुसार, शेयर की गई चैट पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहेगी। यानी बातचीत की सुरक्षा पहले की तरह सुरक्षित रहेगी। इसके अलावा, जो मैसेज हिस्ट्री भेजी जाएगी, वह सामान्य चैट से अलग तरीके से दिखाई देगी। इसमें समय और भेजने वाले की जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। व्हाट्सऐप वेब पर वीडियो कॉलिंग ग्रुप फीचर के अलावा कंपनी व्हाट्सऐप वेब यूजर्स के लिए भी नया अपडेट लाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्राउजर के जरिए वीडियो कॉलिंग सुविधा की टेस्टिंग की जा रही है। अभी कॉलिंग फीचर केवल Windows और macOS ऐप में उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही Chrome, Safari और Firefox जैसे ब्राउजर पर भी वीडियो कॉल संभव हो सकता है। फिलहाल यह फीचर बीटा वर्जन में है और आने वाले समय में सभी यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है।  

परफेक्ट आई मेकअप गाइड: आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के आसान और असरदार टिप्स

यूं तो आईमेकअप के दौरान काजल, लाइनर, आईशैडो आदि का प्रयोग किया जाता है लेकिन अगर आईमेकअप करते समय मस्कारे का प्रयोग न किया जाए तो इससे आंखों को फिनिशिंग लुक नहीं मिलता। मेकअप के दौरान महिलाएं अपनी आंखों पर विशेष ध्यान देती हैं। यूं तो आईमेकअप के दौरान काजल, लाइनर, आईशैडो आदि का प्रयोग किया जाता है लेकिन अगर आईमेकअप करते समय मस्कारे का प्रयोग न किया जाए तो इससे आंखों को फिनिशिंग लुक नहीं मिलता। अक्सर महिलाएं मस्कारे का प्रयोग तो करती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें इसके इस्तेमाल का सही तरीका नहीं पता होता। अगर आप भी मस्कारे का प्रयोग करके आंखों को अट्रैक्टिव व परफेक्ट लुक देना चाहती हैं तो इन बातों पर जरूर ध्यान दें- कोटिंग पर दें ध्यान मस्कारा लगाते समय सिर्फ एक कोटिंग ही काफी नहीं होती। आंखों को बेहतर लुक देने के लिए मस्कारे के कम से कम दो कोट लगाना जरूरी है। पलकों को घना बनाने के लिए सबसे पहले आंखों पर एक कोट लगाएं और फिर पलकों पर हल्का-सा बेबी पाउडर लगाएं और फिर इसके बाद मस्कारा का दूसरा कोट लगाएं। अब इसे सूखने दें। आप देखेंगी कि पलकें घनी व सुंदर दिखाई दे रही हैं। मस्कारा कोट के दौरान बेबी पाउडर का प्रयोग वैकल्पिक है लेकिन अगर आप इसका इस्तेमाल करती हैं तो इससे मस्कारा लॉन्ग लास्टिंग हो जाता है।   लगाएं सही तरीके से मस्कारा लगाने का एक सही तरीका होता है। अमूमन महिलाएं मस्कारा लगाते समय पलकों को ऊपर कर लेती हैं, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं करना चाहिए। मस्कारा लगाते समय हमेशा पलकों को नीचे की तरफ रखें। इससे मस्कारा लगाना आसान हो जाता है और बेहतर तरीके से लगता है। न करें यह गलती अधिकतर महिलाएं मस्कारा लगाते समय ऊपर की पलकों पर तो इसे अप्लाई करती हैं, लेकिन नीचे की पलक पर लगाना भूल जाती है। ऐसा करने से आंखों को वह लुक नहीं मिलता, जो वास्तव में मिलना चाहिए। इसलिए जब भी आप मस्कारा लगाएं तो ऊपर की पलक के साथ-साथ नीचे की पलक पर भी इसे अवश्य लगाएं।   करें एक्सपेरिमेंट आजकल मेकअप के दौरान महिलाएं कई तरह के एक्सपेरिमेंट करना पसंद करती हैं। अगर आप भी अपनी आंखों के साथ एक्सपेरिमेंट करना चाहती हैं तो दो अलग-अलग रंग के मस्कारा का इस्तेमाल करें। आप ब्लैक के अतिरिक्त ब्लू कलर के मस्कारे का प्रयोग कर सकती हैं। इसके इस्तेमाल के लिए पलकों पर पहले ब्लू मस्कारे का कोट लगाएं और जब यह सूख जाए तो फिर ब्लैक कलर के मस्कारे का इस्तेमाल करें। इससे आंखें बेहद खूबसूरत दिखाई देंगी।   हटाएं अतिरिक्त मस्कारा मस्कारा लगाने के बाद अतिरिक्त मस्कारा हटाना भी जरूरी है, अन्यथा यह आपकी आईलिड व चेहरे पर लगकर पूरा मेकअप खराब कर सकता है। इसके लिए जब आप मस्कारा के दोनों कोट लगा लें और जब वह अच्छी तरह सूख जाए तो ईयरबड की मदद से अतिरिक्त मस्कारा हटा लें।  

ऑनलाइन खरीदारी करते समय डेबिट कार्ड यूज करना क्यों है रिस्की? वजह जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली ऑनलाइन शॉपिंग के क्रेज पिछले कुछ साल से तेजी से बढ़ा है। आप भी करत होंगे ऑनलाइन शॉपिंग। ऑफर्स और डिस्काउंट्स की वजह से ज्यादा शॉपिंग होती है। लेकिन आपको मोड ऑफ पेमेंट के तौर पर क्या इस्तेमाल करना चाहिए? कैश ऑन डिलिवरी? या कार्ड? अगर आपका जवाब डेबिट कार्ड है तो शायद आपको डेबिट कार्ड से शॉपिंग करने से बचना चाहिए। इंटरनेट पर डेबिट कार्ड डीटेल्स देकर कोई भी सामान खरीदना खतरे से खाली नहीं है। ऑनलाइन शॉपिंग सेफ है और ये ऑफलाइन पेमेंट से भी सुरक्षित है। ऑनलाइन शॉपिंग के लिए डेबिट कार्ड यूज न करना दरअसल आपके बचाव का तरीका है। कई सारी परेशानियों से बच सकते हैं। अगर कुछ गलत हुआ तो आप इससे बच सकते हैं। ऑनलाइन पेमेंट के लिए डेबिट कार्ड का यूज न करने की दो वजहे हैं। भारत में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कार्ड नंबर के साथ पासवर्ड या पिन की जरूरत होती है। पहली वजह डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स से शॉपिंग करने से ई-ट्रांजैक्शन यूज होता है, लेकिन एक बड़ा फर्क है। क्रेडिट कार्ड की लिमिट होती है जिससे ज्यादा आप स्पेंड कर ही नहीं सकते। लेकिन डेबिट कार्ड की कोई लिमिट नहीं होती है। आपके अकाउंट में जितने पैसे हैं उतने की शॉपिंग आप कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो डेबिट कार्ड अगर हैक हुआ तो अक्सर आप ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं। मुमकिन है आपके सारे पैसे जा सकते हैं जितने आपके बैंक अकाउंट में हैं। अगर क्रेडिट कार्ड फ्रॉड होता है तो जितनी क्रेडिट लिमिट है उतने ही पैसे जाएंगे। दूसरी वजह क्रेडिट कार्ड में दी गई लिमिट आपका पैसा नहीं होता है। आप क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करते हैं तो आप बैंक का पैसा यूज कर रहे हैं जो फिर आपके ऊपर कर्ज बन जाता है जिसे बाद में बैंक को चुकाना होता है। बैंक इसके लिए इंटरेस्ट चार्ज करती है और कुछ समय तक ये फ्री होता है। ये फ्रॉड से प्रोटेक्शन का भी काम करता है। अगर क्रेडिट कार्ड में किसी ने सेंध भी लगाया है तो ये जिम्मेदारी बैंक की होती है कि वो उसे फ्रॉड से बचाए। आप बैंक को ये एक्सप्लेन कर सकते हैं कि क्रेडिट कार्ड का किसी ने गलत यूज किया है और आप इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। ज्यादातर मामलों में बैंक ट्रांजैक्शन की खुद जांच करता है और अगर उन्हें ये समझ आता है कि आप सच बोल रहे हैं तो फ्रॉड किए गए पैसे आपसे नहीं मांगे जाते हैं जो आपके लिए अच्छी बात है। अगर आपके साथ डेबिट कार्ड फ्रॉड होता है तो आप बैंक को बता सकते हैं कि आपके कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया है, ये भी संभव है कि आपको वो पैसे भी वापस मिल जाएं, लेकिन क्रेडिट और डेबिट कार्ड के फ्रॉड में फर्क ये है कि अगर डेबिट कार्ड फ्रॉड हुआ तो पहले आपके पैसे चले जाएंगे और फिर अगर बैंक आपके दावे को सच मानेका तो वापस मिलेंगे। लेकिन क्रेडिट कार्ड के मामले में आपका पैसा नहीं जाता है, जब तक की बैंक आगे चल कर ये मानने से इनकार कर दे कि आपके साथ कोई फ्रॉड हुआ है। इसके बाद आपसे पैसे चुकाने को कहे जाएंगे। हालांकि तब भी आप इसे चैलेंज कर सकते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो अगर आप डेबिट कार्ड यूज करके पैसे स्पेंड कर रहे हैं तो आपके कैश का तत्काल नुकसान होता है। बैंक से पैसे तुरंत कट जाते हैं, क्रेडिट कार्ड अलग तरीके से काम करता है। यहां ट्रांजैक्शन और पेमेंट करने के बीच आपके पास समय होता है, जो आमतौर पर क्रेडिट कार्ड के बिलिंग साइकल का आखिरी टाइम होता है।  

एड़ियां फटी-फटी? अपनाएं ये 6 आसान घरेलू उपाय और बनाएं उन्हें सॉफ्ट

फटी एड़ियां न केवल आपके पैरों के लुक को खराब करती हैं, बल्कि चलने-फिरने में दर्द और जलन भी पैदा कर सकती हैं। इसकी वजह अक्सर ड्राई स्किन, लंबे समय तक पानी में रहना, विटामिन की कमी या मौसम बदलना हो सकता है। फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए मार्केट में कई क्रीम उपलब्ध हैं, लेकिन घरेलू नुस्खे न सिर्फ सुरक्षित होते हैं बल्कि लंबे समय तक असर भी दिखाते हैं। यहां कुछ बेहद असरदार और आसान घरेलू उपायों की जानकारी दी गई है, जो आपकी फटी एड़ियों को मुलायम और साफ बना देंगे। आइए जानते हैं इनके बारे में। एड़ियों को मुलायम बनाने के उपाय     नारियल तेल और मोम- नारियल तेल एक नेचुरल मॉइस्चराइजर है और मोम स्किन को सील करके नमी को लॉक करता है। दोनों को मिलाकर हल्का गर्म करें और रात में सोने से पहले एड़ियों पर लगाएं। ऊपर से कॉटन के मोजे पहन लें। कुछ दिनों में ही असर नजर आने लगेगा।     ग्लिसरीन और गुलाबजल- ग्लिसरीन त्वचा को नमी देती है और गुलाबजल ठंडक देता है। दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर हर रात एड़ियों पर लगाएं। ग्लिसरीन और रोज वाटर एड़ियों को सॉफ्ट बनाने के साथ-साथ डलनेस भी दूर करता है।     नींबू और शहद- नींबू में नैचुरल ब्लीचिंग प्रॉपर्टीज होती हैं और शहद स्किन को नरम करता है। दोनों को मिलाकर 15-20 मिनट तक एड़ियों पर लगाएं। इससे डेड स्किन हटती है और त्वचा साफ और चमकदार बनती है।     गुनगुना पानी और नमक- गुनगुने पानी में थोड़ा-सा नमक डालकर 15 मिनट तक पैरों को डुबोएं। इसके बाद स्क्रबर या प्यूमिक स्टोन से डेड स्किन हटाएं। यह उपाय हफ्ते में 2 बार करें, इससे स्किन साफ और सॉफ्ट होती है।     केला और शहद का पैक- पका केला मसलकर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और एड़ियों पर लगाएं। 20 मिनट बाद वॉश करें। केला पोषण देता है और शहद एंटीसेप्टिक का काम करता है।     एलोवेरा जेल- एलोवेरा जेल में हीलिंग और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं। इसे रात को साफ एड़ियों पर लगाकर मोजे पहन लें। इससे स्किन रिपेयर होती है और दरारें भरने में मदद मिलती है। इन आसान और नेचुरल उपायों को रोजाना या नियमित रूप से अपनाकर आप अपनी एड़ियों को सॉफ्ट और सुंदर बना सकते हैं, वो भी बिना महंगे प्रॉडक्ट्स या साइड इफेक्ट्स के।  

स्वदेशी तकनीक का दम: पीएम मोदी ने पहने ‘Sarvam Kaze’, भारतीय कंपनी की AI में उड़ान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक शानदार चश्मा पहने हुए देखा गया। यह साधारण नहीं बल्कि AI डिवाइस है। इस वियरेबल का नाम sarvam kaze है। एआई ग्लासेस को देश के AI स्टार्टअप सर्वम AI ने बनाया है। एआई समिट 2026 में जियो ने भी अपने एआई ग्लासेस पेश किए हैं। ऐसे में पीएम मोदी द्वारा स्वदेशी एआई ग्लासेस को पहनना कोई आम बात नहीं है। ये एआई ग्लासेस कई दमदार फीचर्स के साथ लाए जाएंगे। पीएम मोदी ने टेस्ट किए एआई ग्लासेस 16 फरवरी से शुरू हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में Sarvam Kaze पेश किए गए हैं। यह एक AI वियरेबल है। इसकी मदद से अन्य स्मार्ट ग्लासेस की तरह ही यूजर रियल समय में देखी जाने वाली चीजों के बारे में सुन सकते हैं। यह एआई ग्लासेस आपकी बातों का जवाब देता है और इसके जरिए आप कुछ भी कैप्चर कर सकते हैं। भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में वॉक फेंक के दौरान पीएम मोदी ने यह चश्मा पहना था। सर्वम AI के को-फाउंडर प्रत्यूष कुमार द्वारा शेयर की गई फोटोज में प्रधानमंत्री एग्जीबिशन फ्लोर पर इसके रियल-टाइम रिस्पॉन्स को टेस्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। चैट फीचर लाने की योजना में कंपनी कंपनी इस हफ्ते एक चैट फीचर भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस डिवाइस को आवाज और विजुअल इंटरैक्शन के जरिए असल दुनिया में इंटेलिजेंस लाने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यूजर्स सर्वम प्लेटफॉर्म पर जाकर कस्टम एक्सपीरियंस भी पा सकते हैं। इस एआई डिवाइस को भारत में डिजाइन और बनाया गया है। कंपनी इसे पूरी तरह से देसी AI प्रोडक्ट के तौर पर पेश कर रही है। कंपनी के अनुसार इस डिवाइस को मई में भारतीय बाजार में लॉन्च किया जा सकता है। बिना इंटरनेट वाला एआई भारतीय स्टार्टअप Sarvam AI ने हाल ही में Sarvam Edge लॉन्च किया है। इसकी खासियत है कि यह बिना इंटरनेट के चल रहा है। इसकी मदद से आप अपने फोन या लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी AI का इस्तेमाल कर पाएंगे। ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, Sarvam AI ने बताया है कि यह एक ऐसा ऑन डिवाइस AI प्लेटफॉर्म होगा, जिसे चलाने के लिए ना तो क्लाउड सर्वर की जरूरत है और ना ही इंटरनेट कनेक्शन की। Sarvam Edge उन लोगों तक भी AI को पहुंचाएंगा, जो महंगे इंटरनेट प्लान का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं और जिनके क्षेत्र में नेटवर्क नहीं आते हैं। Sarvam Edge की खासियत होगी कि यह आपके डिवाइस की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करेगा और इंटरनेट से जुड़ा ना होने की वजह से 100% सुरक्षित भी रहेगा। इससे देखकर लग रहा है कि अब भारतीय कंपनियों ने भी एआई के क्षेत्र में देश को टॉप पर पहुंचाने के लिए अपनी कमर कस ली है।

अब इंटरनेट नहीं तो भी टेंशन नहीं: ऐसे करें UPI पेमेंट बिना ऐप

नई दिल्ली देश के मेट्रो शहर हों या छोटे कस्बे, आज खरीदारी, मोबाइल रिचार्ज या बिल भुगतान तक में ऑनलाइन पेमेंट हमारे लिए सबसे आसान और भरोसेमंद तरीका बन गया है। Google Pay, Paytm, BHIM जैसे ऐप्स ने लेन-देन को बेहद सहज बना दिया है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इंटरनेट काम नहीं करता और कोई जरूरी पेमेंट करना पड़ता है। ऐसे समय में कैश के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, और अगर पास में कैश भी नहीं है तो मुश्किल बढ़ जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए National Payments Corporation of India (NPCI) ने साल 2022 में ऑफलाइन पेमेंट सर्विस शुरू की। यह सेवा उन लोगों के लिए बेहद मददगार है जो इंटरनेट कनेक्शन कमजोर या उपलब्ध न होने वाले क्षेत्रों में रहते हैं। ऑफलाइन पेमेंट कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड स्टेप 1: अपने मोबाइल फोन से *USSD कोड 99# डायल करें। स्टेप 2: स्क्रीन पर “OK” और “Welcome to *99#” दिखाई देगा। OK पर क्लिक करें। स्टेप 3: अब कई विकल्प दिखाई देंगे। यहां “Send Money” चुनें। स्टेप 4: मोबाइल नंबर का ऑप्शन चुनें। स्टेप 5: उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर दर्ज करें जिसे आप पैसे भेजना चाहते हैं। स्टेप 6: स्क्रीन पर उस व्यक्ति का नाम दिखाई देगा। स्टेप 7: राशि दर्ज करें और अपना UPI पिन डालें। स्टेप 8: पैसा आपके खाते से कट जाएगा और सीधे प्राप्तकर्ता के पास पहुंच जाएगा। ध्यान रखने वाली बातें ऑफलाइन पेमेंट के लिए जरूरी है कि आपका मोबाइल नंबर और आधार नंबर आपके बैंक खाते से लिंक हो। यह सुविधा इंटरनेट के बिना भी सुरक्षित लेन-देन करने में मदद करती है। खासकर ग्रामीण या नेटवर्क कमजोर क्षेत्रों में यह सेवा बहुत लाभकारी साबित हो रही है। NPCI की इस ऑफलाइन पेमेंट सर्विस के जरिए अब लोग कहीं भी, किसी भी समय आसानी से पैसे भेज सकते हैं, बिना इंटरनेट की चिंता किए। यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सभी के लिए वित्तीय लेन-देन को सरल और भरोसेमंद बनाता है।

चेहरे पर रेज़र चलाना पड़ सकता है भारी: ये 5 आम भूलें स्किन को कर देती हैं खराब

आजकल चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के लिए फेस शेविंग महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। यह न केवल बालों को हटाती है, बल्कि त्वचा को एक्सफोलिएट कर डेड स्किन सेल्स को भी निकाल देती है, जिससे मेकअप और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स त्वचा में बेहतर तरीके से समा जाते हैं। हालांकि, चेहरे की त्वचा बहुत सेंसिटिव होती है। इसलिए अगर आप फेस रेजर का इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि कटने, छिलने या पिंपल्स की समस्या न हो। सही रेजर का चुनें चेहरे के लिए कभी भी अपने बॉडी रेजर का इस्तेमाल न करें। चेहरे के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए फेशियल रेजर का ही इस्तेमाल करें, जिनमें एक छोटा और बारीक ब्लेड होता है। हमेशा चेक करें कि रेजर का ब्लेड तेज हो। पुराने ब्लेड से त्वचा छिल सकती है। साथ ही, इस्तेमाल से पहले और बाद में रेजर को सैनिटाइजर या अल्कोहल से साफ जरूर करें ताकि बैक्टीरिया न पनपें। त्वचा को तैयार करना सूखी त्वचा पर कभी भी रेजर न चलाएं। इससे जलन और रेजर बर्न हो सकता है। सबसे पहले चेहरे को माइल्ड फेस वॉश से साफ करें। शेविंग को आसान बनाने के लिए चेहरे पर एलोवेरा जेल, फेशियल ऑयल या एक अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं। यह रेजर और त्वचा के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। शेविंग की सही तकनीक चेहरे को शेव करने का भी एक खास तरीका होता है, जिसे फॉलो करना जरूरी है।     रेजर को त्वचा पर हमेशा 45 डिग्री के एंगल पर रखें।     रेजर को बहुत जोर से न दबाएं। हल्के हाथों से छोटे-छोटे स्ट्रोक्स लें।     हमेशा बालों के उगने की दिशा में ही शेव करें। उल्टी दिशा में शेव करने से इनग्रोन हेयर की समस्या हो सकती है।     शेव करते समय दूसरे हाथ से त्वचा को थोड़ा ऊपर की ओर खींचकर टाइट रखें, ताकि ब्लेड आसानी से फिसल सके। शेविंग के बाद की देखभाल शेविंग के बाद त्वचा के पोर्स खुल जाते हैं, इसलिए सही देखभाल जरूरी है-     शेविंग के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धोएं ताकि त्वचा शांत हो जाए।     शेविंग वाले दिन विटामिन-सी, किसी भी तरह के केमिकल एक्सफोलिएंट, जैसे- AHA/BHA या रेटिनॉल का इस्तेमाल न करें। ये त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं।     एक अच्छे हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर या एलोवेरा जेल से चेहरे को अच्छी तरह हाइड्रेट करें। कब शेविंग से बचें? अगर आपके चेहरे पर मुंहासे, कट्स या कोई स्किन इन्फेक्शन है, तो उस समय शेविंग बिल्कुल न करें। रेजर के इस्तेमाल से बैक्टीरिया पूरे चेहरे पर फैल सकते हैं और आपकी समस्या बढ़ सकती है।