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iOS 26.1 अपडेट: नए iPhone में मिलने वाले बड़े बदलाव और नई सुविधाएं

नई दिल्ली  iOS 26.1 बीटा 2 अपडेट के जारी होने के बाद, Apple अब iPhone के लिए iOS 26.1 को रोल आउट करने की योजना बना रहा है। नया अपडेट कई सुधार लाएगा, साथ ही सुविधाओं और प्रदर्शन में मामूली बदलाव शामिल होंगे। इसमें AirPods के लिए विस्तारित लाइव ट्रांसलेशन सपोर्ट शामिल है – सेटिंग्स, सफारी, फोन, फिटनेस ऐप, अलार्म और अन्य सेक्शन में बदलाव किए जाएंगे। iOS 26.1 में क्या-क्या फीचर होंगे?  नए अपडेट में Apple Music के लिए नए फीचर शामिल होंगे। अब यूजर्स स्वाइप इशारों का इस्तेमाल करके मिनीप्लेयर के गानों के बीच स्विच कर पाएंगे – बाईं ओर स्वाइप करने पर नया गाना बजेगा और दाईं ओर स्वाइप करने पर पिछला गाना बजेगा। इसके अलावा, Apple AirPods के लिए एक लाइव ट्रांसलेशन फीचर भी पेश कर सकता है, जो अब पांच नई भाषाओं को सपोर्ट करेगा, जिससे कुल भाषाओं की संख्या 11 हो जाएगी। इसके अलावा, यह नया फीचर आपको अपने AirPods के साथ रीयल-टाइम में अनुवादित बातचीत करने की सुविधा देगा। यह सुविधा AirPods Pro 3, AirPods Pro 2 और नए AirPods 4 (ANC वेरिएंट) के साथ आएगी। समर्थित भाषाओं में मैंडरिन, अंग्रेजी (अमेरिका और यूके), फ्रांच, जर्मन, इतालवी, कोरियाई, जापानी, पुर्तगाली और स्पेनिश शामिल हैं। अलार्म को गलती से बजने से रोकने के लिए Apple एक पुराना संकेत भी फिर से पेश कर सकता है। नया स्वाइप-टू-स्टॉप एक्शन iOS 26 में पेश किए गए बड़े, दिखने वाले स्टॉप बटन की जगह लेगा। इस संकेत का इस्तेमाल अलार्म और टाइमर, दोनों पर किया जा सकता है। किन डिवाइसों को iOS 26.1 मिलेगा? iOS 26.1 उन सभी iPhones पर उपलब्ध होगा जो iOS 26 को सपोर्ट करते हैं। इसमें iPhone X और उसके बाद के मॉडल, जिनमें दूसरी पीढ़ी और नया iPhone SE शामिल हैं।

कद्दू के बीज के सौंदर्यवर्धक लाभ

कद्दू के बीज स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ त्वचा और बालों के सौंदर्य के लिए काफी लाभकारी होते हैं। कद्दू के बीज में अमीनो एसिड, जिंक, विटामिन ई आदि बहुत सारे उपयोगी पोषक तत्व होते हैं। कद्दू के बीज कोशिकाओं को रिपेयर करने के साथ-साथ नई कोशिकाओं के निर्माण में भी काफी मददगार होते हैं। ये त्वचा की कोशिकाओं में नए कोलेजन बनाने में मदद करते हैं इसलिए खूबसूरत त्वचा के लिए कद्दू के बीज काफी फायदेमंद होते हैं। सौंदर्यवर्धक लाभ कद्दू के बीज के- 1.मुंहासों से बचाता है: कद्दू के बीजों में एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं जो कि मुंहासों की सूजन और लालपन को कम करने में मदद करते हैं। कद्दू के बीजों के पाउडर को दूध में मिलाकर चेहरे पर लगाने से मुंहासे नहीं होते हैं। 2. झुर्रियों को कम करता है: कद्दू के बीजों में जिंक और विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में होते हैं इसलिए यह त्वचा में कसावट लाते हैं और झुर्रियां पैदा नहीं होने देते हैं। इसलिए कद्दू के बीजों को अपनी डाइट में शामिल करें। 3. बालों को घना बनाते हैं: कद्दू के बीजों में आयरन और L-लाइसिन जैसे दो पोषक तत्व होते हैं जो कि बालों को झड़ने से रोकते हैं और ग्रोथ बढ़ाते हैं। बालों के लिए कद्दू के बीजों का सेवन करने और कद्दू के बीज के तेल की मालिश करना फायदेमंद होता है। 4.त्वचा को निखारता है: विटामिन ए नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और कद्दू के बीजों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए होता है। कद्दू के बीजों का सेवन करने से शरीर में विटामिन ए की कमी नहीं होती है और त्वचा निखरी हुई बनती है। 5.बालों को रेशमी बनाता है: विटामिन ई बालों को पोषण देता है और रेशमी बनाता है। कद्दू के बीज में विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में होता है जिससे ये बालों को सुंदर और रेशमी बनाने में मदद करते हैं।  

पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है भुजपीड़ासन योग

डॉक्टर्स मानते हैं कि शरीर के ज्यादातर रोगों का कारण हमारे पेट की गड़बड़ी होती है। पेट की मांसपेशियों की मजबूती के लिए भुजपीड़ासन बहुत फायदेमंद आसन है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन आता है और अंगों में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। इसके अलावा इस आसन की खास बात ये है कि इसके नियमित अभ्यास से आप पेट की सभी बीमारियों जैसे- कब्ज, बदहजमी, गैस और पेट पर जमा चर्बी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे कर सकते हैं ये आसन और क्या हैं इसके अन्य स्वास्थ्य लाभ। ऐसे करें भुजपीड़ासन- सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और आगे की तरफ झुकते हुए अपनी हथेलियों को आगे की तरफ कर लें। आपके आपके पैरों से थोड़ी दूरी पर होने चाहिए। अब अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ उठाएं। घुटनों को थोड़ा मोड़ें और अपने पैरों को (जो अब तक पीछे हैं) अपने हाथों के पास लाएं (अब आपकी हथेलियां और तलवे एक सीध में जमीन पर हों) अब अपने दाएं हाथ को उठाकर अपनी दाईं एड़ी के ऊपर (जहां से पैर की मोटाई शुरू होती है) का हिस्सा पकड़ें। इसी तरह बाएं हाथ को भी उठाकर अपनी बाईं एड़ी (जहां से पैर की मोटाई शुरू होती है) के ऊपर का हिस्सा पकड़ें। शरीर का पूरा भार अपने दोनों तलवों पर दें ताकि आपका बैलेंस न बिगड़े। अब धीरे-धीरे एक तलवे को इस तरह ऊपर उठाएं कि आपका अंगूठा जमीन को न छोड़े। 5-7 सेकंड इसी पोजीशन में रहें और फिर तलवों को जमीन पर पूरा रख दें। इसके बाद दूसरे पैर को भी इसी तरह उठाएं कि आपका अंगूठा जमीन न छोड़ें। इस पैर से भी 5-7 सेकंड इसी पोजीशन में रहें और फिर तलवों को जमीन पर पूरा रख दें। अपनी हथेलियों को पैरों से थोड़ा पीछे करते हुए जमीन पर रख दें। अब धीरे-धीरे हथेलियों पर सारे शरीर का भार डाल दें और शरीर को हवा में लटकता हुआ छोड़ दें। क्या हैं इस आसन के लाभ: पेट की सभी समस्याओं में फायदेमंद है भुजपीड़ासन। इस आसन से आपके एब्डोमेन में खिंचाव आता है जिससे आपका पाचन बेहतर होता है। ये आसन आपकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति भी बढ़ाता है। इसका अभ्यास करने से आपकी कलाई, हाथ और आपके अपर बॉडी में मजबूती आती है। यह आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है। भुजपीड़ासन का अभ्यास करने से आपका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इसका अभ्यास आपके सिरदर्द को ठीक करने में भी मदद करता है। आसन में बरतें ये सावधानी: अगर आपको कलाई, कोहनी, लोअर बैक और कंधे पर किसी प्रकार की चोट लगी है तो इस आसन को नहीं करें। अगर आपको सर्वाइकल स्पॉडिलाइटिस और ब्लड प्रेशर की भी समस्या है तो भी इस आसन को मत करें। इस आसन को करने के लिए किसी योगा इन्सट्रक्टर की मदद जरूर लें।  

फेसबुक नोटिफिकेशन्स को बंद करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर आप फोटो, वीडियो, चैटिंग या देश-दुनिया से जुड़े सभी अपडेट आसानी से चेक कर सकते हैं। फेसबुक पर आने वाले नोटिफिकशन में बर्थडे का नोटिफिकेशन काफी खास होता है जिसकी मदद से आप किसी अपने को समय पर बर्थडे विश कर पाते हैं। लेकिन इसके अलावा फेसबुक पर आने वाले लाइव इवेंट या अन्य कोई नोटिफिकेशन आपको डिस्टर्ब या परेशान कर सकते हैं। ऐसे में परेशान होने की बजाय आप चाहें तो उन अनचाहे नोटिफिकेशन्स से मिनटों में ही छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए आपको हमारे द्वारा बताए कुछ आसान टिप्स फॉलो करने होंगे। इन आसान टिप्स की मदद से आप अनचाहे नोटिफिकेशन को बंद कर सकते हैं। स्टेप 1. अनचाहे नोटिफिकेशन को बंद करने के लिए सबसे पहले अपने लैपटॉप या मोबाइल में फेसबुक ऐप ओपन करें। स्टेप 2. फेसबुक ओपन करने के बाद वहां साइड में दिए गए तीन डॉट्स पर क्लिक करें। जिसके बाद आपके सामने एक विंडो ओपन होगी जिसमें स्क्रॉल करने के बाद सबसे नीचे सेटिंग्स एंड प्राइवेसी का ऑप्शन दिया गया है। उस पर क्लिक करें। स्टेप 3. सेटिंग्स एंड प्राइवेसी ऑप्शन में दिए गए सेटिंग्स सेक्शन पर क्लिक करें। जहां आपको नोटिफिकेशनस सेटिंग्स का विकल्प नजर आएगा। स्टेप 4. नोटिफिकेशनस सेटिंग्स में तीन ऑप्शन दिए गए हैं। जिसमें मैनेज पुश नोटिफिकेशनस, व्हाट नोटिफिकेशनस यू रिसीव और वेयर यू रिसीव नोटिफिकेशनस शामिल हैं। स्टेप 5. इनमें से आप जो भी नोटिफिकेशन बंद करना चाहते हैं उस विकल्प पर क्लिक करें और उसे ऑफ कर दें। आपको यहां सभी नोटिफिकेशन्स को एक साथ बंद करने का ऑप्शन मिलेगा। इसके अलावा आप चाहें तो इवेंट, बर्थडे, फ्रेंड रिक्वेस्ट, कमेंट, वीडियो आदि से जुड़े नोटिफिकेशन्स को भी बंद कर सकते हैं।  

गर्भावस्था में बालों की देखभाल: ज्यादा शैंपू करने से हो सकता है नुकसान!

गर्भावस्था में महिलाएं यूं तो सेहत का ख्याल रखती हैं, और कई तरह की सावधानियां भी रखती हैं। लेकिन कभी-कभी अनजाने में कुछ गलतियां भी होती हैं, जिनके बारे में महिलाओं को पता नहीं होता, जैसे बालों में शैंपू का इस्तेमाल…। जी हां, एक शोध में यह बात सामने आई है, कि शैंपू का अधिक इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं पर बुरा असर डाल सकता है। इसका प्रमुख कारण इसमें पाए जाने वाले केमिकल्स हैं। चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी में 300 अधिक महिलाओं पर किए गए शोध के आधार पर यह बात साबित हुई है, जिनमें 172 महिलाएं स्वस्थ प्रेगनेंट जबकि 132 महिलाएं गर्भपात का शिकार थीं। इन महिलाओं के यूरिन टेस्ट करने पर यह पाया गया कि जो महिलाएं गर्भपात का शिकार थीं, उनमें फैथलेट्स केमिकल की मात्रा अत्यधिक थी, जो संभवतः गर्भपात का कारण बन सकती है। इस शोध के आधार पर गर्भावस्था के दौरान शैंपू का अधिक उपयोग करने पर गर्भपात का कारण बन सकता है। इससे बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को सतर्कता रखना बेहद आवश्यक है। कोशिश करें कि शैंपू का अत्यधिक प्रयोग करने से बचें या फिर शैंपू के स्थान पर कोई प्राकृतिक विकल्प का इस्तेमाल करें। इसके अलावा गर्भावस्था में प्रतिदिन बालों को धोने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय अधिक बाल धोने से गर्भाशय में संकुचन हो सकता है, जो महिलाओं और गर्भस्थ शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। शैंपू का अधिक प्रयोग करने से केवल गभर्पात का ही खतरा नहीं होता बल्कि यह लिवर संबंधी समस्याओं को जन्म देने के साथ ही, सीने में दर्द और सांस संबंधी तकलीफ भी दे सकता है। यह कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं को भी जन्म दे सकता है, जो आपके लिए खतरनाक है। इसके अलावा अधिक इस्तेमाल से यह आपके बालों का पोषण भी छीन सकता है।  

कैंसर से जंग में असरदार साथी: गाजर का जूस

कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचने के लिए इसका इलाज पहले चरण में ही कराना बेहतर होता है। लेकिन कैंसर के ज्यादातर मामलों में इसका खुलासा तब होता है, जब यह अपनी प्रारंभिक अवस्था से आगे बढ़ चुका होता है। ऐसे में कीमोथैरेपी के अलावा कैंसर को और कोई इलाज नहीं होता और यह अत्यधिक तकलीफदेह होता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी, कि चैथी स्टेज पर आने के बाद भी कैंसर का इलाज संभव है, सिर्फ गाजर के सेवन से। ब्रिटेन की न्यू कैसल यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार, गाजर में पॉलीएसिटिलीन पाया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को समाप्त कर ट्यूमर का विकास रोकने में सहायता करता है। इसके अलावा गाजर में कई तरह के विटामिन और मिनरल्स के अलावा बीटा कैरोटीन, अल्फा कैरोटीन, कैल्शियम एवं अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आंतरिक अंगों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। शोध के मुताबिक गाजर में मौजूद फैलकारिनॉल, फैलकैरिन्डियॉल और एंटी कैंसर तत्व लंग कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर व कोलोन कैंसर के खतरे को कम करते हैं। इसमें पाया जाने वाला रेटिनॉइड एसिड महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर की कारक कोशिकाओं के शुरूआती बदलाव को रोकने में कारगर होता है। गाजर के सेवन से कैंसर की चैथी स्टेज पर जीत हासिल करने का भी एक उदाहरण सामने आया है। इंडिया टाइम्स डॉट कॉम में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, कैमरून नामक एक महिला ने गाजर के जूस का सेवन कर कैंसर को चैथे चरण में आने के बावजूद मात देने में कामयाबी हासिल की है। कैमरून बताती हैं, कि उन्हें सन 2013 में कोलोन कैंसर के बारे में पता चला, जो कि चैथे चरण पर पहुंच चुका था। कीमोथैरेपी के अलावा इसके लिए कोई और विकल्प भी नहीं था। कैमरून ने इंटरनेट पर रिसर्च कर, राल्प कोले नामक व्यक्ति का अनुभव पढ़ा, जिसे प्रतिदिन 2.25 किलो गाजर का जूस पीने से कैंसर में काफी लाभ हुआ था। इसके बाद कैमरून ने भी गाजर के जूस का सेवन शुरू किया। कैमरून ने लगतार आठ सप्ताह तक प्रतिदिन 2.25 किलो गाजर का जूस पीना शुरू किया। इस दौरान कैमरून ने पाया कि कैंसर ट्यूमर में होने वाली वृद्धि रूक गई है। लगभग 13 महीनों के बाद उनका कैंसर पूरी तरह से ठीक हो चुका था।  

शोधकर्ताओं की चौंकाने वाली खोज: नवजातों में सामने आया डायबिटीज का नया प्रकार

अब तक माना जाता था कि डायबिटीज वयस्कों या बड़े बच्चों की बीमारी है, लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है। छह महीने से कम उम्र के कुछ शिशुओं में डायबिटीज का एक बिल्कुल नया प्रकार पाया गया है। यह सामान्य कारणों से नहीं, बल्कि उनके डीएनए में हुए खास बदलावों की वजह से होता है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि नवजात शिशुओं में होने वाले डायबिटीज के करीब 85 प्रतिशत मामलों के पीछे उनके जीन में गड़बड़ी होती है। इस नई खोज में टीएमईएम167ए नामक जीन को इस बीमारी से जोड़ा गया है। यह वही जीन है जिसमें म्यूटेशन होने पर शिशु के शरीर में इंसुलिन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। डॉ. एलिसाडेफ्रैंको और उनकी टीम ने बताया कि इस अध्ययन ने हमें इंसुलिन के निर्माण और उसके स्राव से जुड़े जीनों को समझने का एक नया रास्ता दिखाया है। उन्होंने पाया कि टीएमईएम167ए जीन में हुए बदलाव केवल डायबिटीज ही नहीं, बल्कि कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे मिर्गी और माइक्रोसेफली (सिर का सामान्य से छोटा होना) से भी जुड़े हैं। कैसे हुई यह खोज? वैज्ञानिकों ने छह बच्चों पर विस्तृत अध्ययन किया। इन सभी बच्चों में डायबिटीज के लक्षण जन्म के कुछ ही महीनों के भीतर दिखाई देने लगे थे। स्टेम सेल तकनीक और जीनएडिटिंग के जरिए जब उनके डीएनए की जांच की गई, तो टीएमईएम167ए जीन में असामान्य परिवर्तन पाए गए। इसके बाद टीम ने लैब में इन कोशिकाओं पर प्रयोग किए। उन्होंने सामान्य और परिवर्तित जीन वाले दोनों प्रकार के स्टेम सेल्स को अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं में बदला- वही कोशिकाएं जो इंसुलिन बनाती हैं। परिणाम चौंकाने वाले थे: जिन कोशिकाओं में टीएमईएम167ए जीन बदला हुआ था, वे इंसुलिन बनाने में असमर्थ थीं। क्यों खास है यह खोज? यह अध्ययन सिर्फ नवजात डायबिटीज को समझने के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण इंसुलिन उत्पादन प्रक्रिया को जानने के लिए भी अहम है। डायबिटीज की अधिकतर दवाएं इंसुलिन के उत्पादन या उसकी क्रिया पर असर डालती हैं। अगर इस नए जीन की भूमिका पूरी तरह समझ ली गई, तो भविष्य में ऐसी दवाएं बनाई जा सकेंगी जो मूल कारण, यानी जीन स्तर पर बीमारी को नियंत्रित कर सकें। डॉ. फ्रैंको के अनुसार, “यह खोज हमें न केवल दुर्लभ नवजात डायबिटीज को समझने में मदद करेगी, बल्कि सामान्य टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की गुत्थियों को सुलझाने में भी उपयोगी साबित हो सकती है।” वैज्ञानिक अब टीएमईएम167ए जीन के कार्य और इसके अन्य स्वास्थ्य प्रभावों पर और गहराई से शोध करने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि इस जीन की बेहतर समझ से नवजात शिशुओं के लिए समय पर निदान और प्रभावी इलाज संभव होगा। डायबिटीज का यह नया रूप यह साबित करता है कि हमारे जीन हमारे स्वास्थ्य पर कितना गहरा असर डालते हैं। शिशुओं में इतने शुरुआती चरण में इस बीमारी की पहचान न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह आने वाले समय में अनगिनत बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।  

ब्रेस्ट कैंसर: डर नहीं, जागरूकता जरूरी! जानें किन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली कैंसर… जितना यह नाम डराता है, उतनी ही तेजी से यह दुनिया भर में अपने पैर भी पसार रहा है। तमाम तरह के कैंसर में से ब्रेस्ट कैंसर भारतीय महिलाओं को तेजी से अपना शिकार बना रहा है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2019 में ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 200,218 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में बढ़कर लगभग 221,579 हो गए। इस बीमारी से मौतों की संख्या भी 2023 में लगभग 82,429 तक पहुंच गई। ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं। नब्बे के दशक से ही इस संदर्भ में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने के बावजूद भारत में लगभग 81 प्रतिशत महिलाएं इससे अनभिज्ञ हैं। स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं को सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है और आज प्रत्येक 28 में से 1 महिला इससे पीड़ित है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आप इसके लक्षणों को समझें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें, ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। इस मामले में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज की ब्रेस्ट और एंडोक्राइन सर्जन डॉक्टर गीतिका नंदा सिंह कहती हैं कि पहले स्तन कैंसर का खतरा 40 से ज्यादा उम्र की महिलाओं को मुख्य रूप से होता था, लेकिन अब 24 साल की लड़कियां भी इस बीमारी की जद में आ रही हैं। सामान्य तौर पर अगर आपकी उम्र 29 साल की हो चुकी है, तो आपको अपने स्तन का परीक्षण खुद से ही करते रहना चाहिए। अगर किसी महिला के परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा है, तो कुछ खास प्रकार के स्तन कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी महिलाओं को 30 की उम्र के बाद साल में एक बार मैमोग्राफी करवाते रहना चाहिए। ये हो सकती हैं वजहें अन्य कैंसर की तरह ही स्तन कैंसर का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। न ही यह स्पष्ट है कि यह इतनी तेजी से पैर क्यों पसार रहा है। हालांकि कुछ चीजें बताई जाती हैं, जो इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकती हैं। वैज्ञानिक तौर पर यह पाया गया है कि खराब जीवनशैली, अस्वस्थ भोजन और तनाव कैंसर को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही हेयर ट्रीटमेंट में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल, सौंदर्य प्रसाधन और डिओडोरेंट में पाए जाने वाले कुछ घातक केमिकल भी इस तरह के कैंसर को बढ़ावा देते हैं। और कौन-सी चीजें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ाती हैं, आइए जानें: बदली जीवनशैली: हम बदल रहे हैं और साथ ही हमारे जीने का तरीका भी बदल रहा है। हम सब कई-कई घंटे लगातार बैठकर काम करते हैं और बदले में अपनी शारीरिक गतिविधियों से समझौता करने लगे हैं। प्रदूषण, प्रोसेस्ड और जंक फूड का ज्यादा मात्रा में सेवन, फल-सब्जियों से बढ़ती दूरी, ज्यादा मीठा, ज्यादा वसा…ये सब साथ मिलकर शरीर में सूजन, मोटापा और हार्मोन असंतुलन को बढ़ावा देते हैं। ये सब कैंसर की वजह हो सकते हैं। शारीरिक बदलाव: दिनचर्या के साथ ही हमारे शरीर में भी बदलाव आ रहे हैं। बहुत कम उम्र में पीरियड शुरू हो रहा है, तो मेनोपॉज भी जल्दी दस्तक देने लगा है। स्तनपान न करवाना या कम समय तक करवाना भी स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। यों करें ब्रेस्ट कैंसर की पहचान स्तन में गांठ: स्तन या स्तन के आसपास या बगल में गांठ महसूस हो तो उसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर गीतिका कहती हैं कि हर गांठ कैंसर नहीं होती है, लेकिन अगर स्तन में गांठ है तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कैंसर की गांठ आमतौर पर बिना दर्द वाली होती हैं। लेकिन आकार में वृद्धि के साथ इसमें दर्द महसूस हो सकता है। निप्पल से रिसाव: अगर आप नई मां नहीं हैं, फिर भी आपके निप्पल से रिसाव आ रहा है, तो आपको सचेत हो जाना चाहिए। रिसाव अलग-अलग रंगों का हो सकता है। कभी-कभी निप्पल से खून का भी रिसाव होता है। इसे कैंसर का लक्षण माना जाता है, इसलिए रिसाव होने पर चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। स्तन या निप्पल का आकार बदलना: दोनों स्तनों के आकार में हल्का फर्क होना सामान्य है। अगर आपको एक स्तन तुलनात्मक तौर पर ज्यादा असामान्य नजर आ रहा है, तो यह भी कैंसर का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा स्तन की त्वचा का लाल होना, उसमें खुजली होना या स्तन में डिंपल या गड्ढे पड़ना स्तन कैंसर का लक्षण होता है। वहीं, आपको अपनी निप्पल पर भी गौर करना चाहिए। अगर निप्पल अंदर की ओर धंस रही है, तो आपको लापरवाही नहीं करनी चाहिए। संभव है स्तन कैंसर से उबरना समय रहते स्तन कैंसर को आसानी से मात दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में आपकी मनोदशा आपका साथ देती है। स्तन कैंसर का पता चलने पर आपको घबराने की नहीं, बल्कि हिम्मत से सही कदम उठाने की जरूरत है। पहले और दूसरे स्टेज पर स्तन कैंसर को सौ फीसदी तक ठीक किया जा सकता है। स्तन कैंसर की जांच में मेमोग्राफी, एमआरआई, एफएमसीजी और कुछ खून की जांच शामिल हैं। आप घर पर ही इसके शुरुआती लक्षणों को परख सकती हैं। पीरियड के सातवें दिन आइने में अपने स्तन को गौर से देखना चाहिए। एक हाथ ऊपर करके दूसरे हाथ को स्तन पर गोलाकार घुमाते हुए यह टटोलें कि कहीं कोई गांठ तो नहीं बन रही है। आपकी सजगता आपको एक बड़ी मुसीबत से बचा सकती है। खानपान से बनाएं सुरक्षा चक्र हमारा खानपान न सिर्फ हमें कैंसर से बचाए रख सकता है, बल्कि खानपान में किया गया सुधार कैंसर के खिलाफ जंग में सफलता दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। साबुत अनाज, बीन्स, हर्ब्स, मेवे जैसे खाद्य पदार्थ कैंसर होने या उससे बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं। इस बाबत आहार सलाहकार डॉ़ भारती दीक्षित कहती हैं कि हरी पत्ती वाली सब्जियों में कैंसररोधी खूबियां होती हैं। सरसों, पालक, धनिया आदि में बीटा कैरोटीन और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। बंदगोभी, ब्रोकली और फूल गोभी आदि में आइसोथियोसाइनेट पाया जाता है, जो कैंसर के खतरे को कम करने का काम करता है। अदरक, लहसुन भी इस मामले में लाभकारी साबित होता है। विटामिन-सी यानी खट्टे फलों को भी पर्याप्त मात्रा में अपनी खुराक में शामिल कीजिए। अध्ययन बताते हैं कि सेब, नाशपाती भी कैंसर से … Read more

शोस्टॉपर पलक तिवारी: लैक्मे फैशन वीक के दूसरे दिन बनीं महफिल की रौनक

नई दिल्ली राजधानी में दिल्ली में फैशन जगत के जाने-माने इवेंट लैक्मे फैशन वीक (LFW) की शुरुआत हो चुकी है। यह एक ऐसा फैशन इवेंट है, जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह इवेंट 8 अक्टूबर से शुरू हुआ, जो 12 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख डिजाइनर अपने एक्सक्यूसिव कलेक्शन पेश करेंगे। इस इवेंट के दूसरे दिन, यानी गुरुवार 9 अक्टूबर को NIF ग्लोबल ने अपने शो 'द रनवे' के लिए शोस्टॉपर पलक तिवारी के साथ अपने कलेक्शन पेश किए। शो के दूसरे दिन NIF ग्लोबल, 'द रनवे' कलेक्शन पेश किया गया। आइए जानते हैं इन सभी कलेक्शन के बारे में विस्तार से- LFW में गाच का नवीनतम कलेक्शन 'रिकॉलिंग' प्रदर्शित किया गया। यह रवींद्र नाथ टैगोर के पुराने गीत 'पुरोनो सेई दिनेर कोथा' से प्रेरित था, जिसका अर्थ है 'पुराने दिनों की यादें'। अतीत की मीठी-कड़वी यादों को ताजा करने का एक उत्सव मनाता इस कलेक्शन में इको प्रिंट, बंगाली लिपि में गाच के ब्लॉक प्रिंट, एरी सिल्क, चंदेरी सिल्क, पश्मीना सिल्क, लिनेन सिल्क, कॉरडरॉय जैसे प्राकृतिक कपड़ों पर कंथा सिलाई और क्रूएल कढ़ाई का इस्तेमाल किया गया। शोस्टॉपर बनीं पलक तिवारी इस दौरान एक्ट्रेस पलक तिवारी एनआईएफ के 'द रनवे' कलेक्शन के लिए शोस्टॉपर बनीं। उन्होंने इस दौरान अपने लुक और खास आउटफिट से लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षिक किया। रनवे कलेक्शन के शोस्टॉपर के तौर पर उन्होंने ने सफेद शर्ट के ऊपर डेनिम ड्रेस पहनी हुई थी। इस ड्रेस में कमर के चारों ओर एक प्रिंटेड बेल्ट थी और उन्होंने काले रंग की स्ट्रैपी हील्स, टाई और एक बैग के साथ अपने लुक को पूरा किया। सात डिजाइनर्स ने पेश किए कलेक्शन रीइमैजिन्ड हीरलूम्स’ थीम के तहत, NIF ग्लोबल के इस शोकेस में देशभर के सात डिजाइनर्स के 5 कलेक्शंस पेश किए गए। इस दौरान यह बताया गया कि कैसे विकसित हो सकती हैं। थीम को फॉलो करते हुए मुंबई के डिजाइनर्स जेनिका नाहर और द्विती जैन, सूरत की माहेक जारिवाला, कोलकाता की अनुरूपा साहा और बर्नाली गाराई और हेंसी पटेल ने अपने कलेक्शन पेश किए। इस दौरान रनवे पर राजस्थान की किल्टिंग से लेकर कच्छ की कढ़ाई तक, बंगाल की कंथा से लेकर गुजरात की मणि कढ़ाई तक की झलक देखने को मिली।  

OnePlus का नया धमाका: ₹999 में शानदार Type-C वायर्ड ईयरफोन, साउंड क्वालिटी बेमिसाल!

नई दिल्ली OnePlus ने भारतीय बाजार में एक बार फिर अपने यूजर्स के लिए नया प्रोडक्ट पेश किया है. कंपनी ने नया OnePlus Half In-Ear Wired Type-C Earphones लॉन्च किया है, जो दिखने में क्लासिक और कीमत में बेहद किफायती है. यह ईयरफोन खास तौर पर उन लोगों के लिए है, जो अब भी वायर्ड साउंड क्वालिटी को प्राथमिकता देते हैं और ब्लूटूथ डिवाइस की चार्जिंग झंझट से बचना चाहते हैं. क्लासिक लुक और मॉडर्न कनेक्टिविटी OnePlus का यह नया ईयरफोन हाफ इन-ईयर डिजाइन में आता है, जिसका लुक काफी हद तक Apple के EarPods से मिलता-जुलता है. इसमें Type-C कनेक्टिविटी दी गई है, जिससे यह आज के सभी आधुनिक स्मार्टफोन्स के साथ आसानी से कनेक्ट हो जाता है. कंपनी का दावा है कि यह ईयरफोन न सिर्फ बेहतर साउंड देता है, बल्कि इसमें डिजिटल सिग्नल इंटरफेस की सुविधा भी है, जो यूजर को साफ और गहरी आवाज का अनुभव कराती है. दमदार ऑडियो परफॉर्मेंस OnePlus Half In-Ear Wired Earphones में 14.2mm का डायनमिक ड्राइवर दिया गया है, जिसे कंपनी की एकॉस्टिक टीम ने खास तरीके से ट्यून किया है. यह सेटअप हाई-क्वालिटी बास और क्लियर ऑडियो डिलीवर करता है, जिससे यूजर्स को प्रीमियम साउंड एक्सपीरियंस मिलता है. एचडी कॉलिंग और आसान कंट्रोल इन ईयरफोन्स में इन-लाइन रिमोट कंट्रोल दिया गया है, जिसकी मदद से यूजर्स आसानी से म्यूजिक प्ले या पॉज़ कर सकते हैं और कॉल्स को पिक या कट कर सकते हैं. कंपनी के मुताबिक, इसमें स्टेबल कनेक्टिविटी दी गई है, जिससे यूजर को HD कॉलिंग एक्सपीरियंस मिलता है. उलझन से मुक्त वायर और आरामदायक फिट OnePlus का यह नया ईयरफोन टैंगल-फ्री वायर के साथ आता है, यानी इसे बैग या पॉकेट में रखने पर तारें उलझती नहीं हैं. इसके अलावा, इसमें स्किन-फ्रेंडली मटेरियल का उपयोग किया गया है, जिससे लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर भी कानों में कोई परेशानी नहीं होती. कीमत और उपलब्धता OnePlus ने इस ईयरफोन को फिलहाल सिर्फ व्हाइट कलर ऑप्शन में लॉन्च किया है. इसकी कीमत ₹999 रखी गई है और इसे OnePlus की आधिकारिक वेबसाइट या रिटेल स्टोर्स से खरीदा जा सकता है. क्यों है खास     Type-C कनेक्टिविटी – मॉडर्न स्मार्टफोन्स के लिए उपयुक्त     14.2mm ड्राइवर के साथ दमदार साउंड     ट्यून किया गया एकॉस्टिक सिस्टम     HD कॉलिंग सपोर्ट     टेंगल-फ्री केबल     बजट फ्रेंडली प्राइस ₹999 OnePlus का यह नया Type-C वायर्ड ईयरफोन उन यूजर्स के लिए एक शानदार विकल्प है जो बजट में प्रीमियम ऑडियो क्वालिटी चाहते हैं. साफ आवाज, आरामदायक डिजाइन और भरोसेमंद ब्रांड के साथ यह डिवाइस निश्चित रूप से बाजार में अच्छी पकड़ बनाने वाला है.