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क्या बॉडीगार्ड संग इश्क बना वजह? जानिए क्यों महल छोड़ गांव में रहने को मजबूर हुईं जॉर्डन की प्रिंसेस

लंदन  दुबई के गर्म रेगिस्तानऔर विशाल संगमरमर के महलों से हजारों मील दूर, अरब की एक राजकुमारी ने ब्रिटेन के एक छोटे से गांव को अपना घर बना लिया है. यहां वह पुरानी हवेली को अपना आशियाना बना रही हैं. राजकुमारी अपने पति से डरकर दुबई से भागी थीं. उनके पति दुबई के शासक हैं. अब उन्होंने आलीशान महलों से दूर एक खंडहर को अपने रहने लायक बनाने का काम शुरू किया है.  यहां बात हो रही है हाया बिन्त हुसैन की, जिन्होंने 2019 में दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से तलाक के बाद ब्रिटेन में रहने का फैसला किया. इस कपल का तलाक अब तक के सबसे बड़े तलाक समझौते में से एक हैं. जिसमें राजकुमारी को 554 मिलियन पाउंड मिले थे. इस प्रिंसेस ने दुबई के अपने संगमरमर के आलीशान महलों वाली  जीवनशैली को छोड़कर वेल्स के ग्रामीण इलाके के एक जर्जर हवेली को अपना ठिकाना बनाने का फैसला किया. जॉर्डन के राजा की बेटी, 51 साल की इस राजकुमारी ने वेल्स के सुदूर गांव पॉविस में स्थित ईस्ट कंट्री के एक होटल पर 3.5 मिलियन पाउंड खर्च किए हैं.  वेल्स के गांव में आशियाना बना रही राजकुमारी कहा जा रहा है कि वह इस होटल का रेनोवेशन कराने में लाखों पाउंड और खर्च कर रही हैं, ताकि यह उस स्तर का हो सके जिसकी उम्मीद बेहद अमीर शाही परिवार से की जाती है.स्थानीय लोगों ने द सन को बताया कि राजकुमारी का यह नया आशियाना पुराना होने के बावजूद हाई सिक्योरिटी वाला ठिकाना है जो ज़्यादा समय तक खंडहर नहीं रहेगा, क्योंकि बिना किसी खर्च की परवाह किए इसका रेनोवेशन शुरू हो गया है. हाया बिंत हुसैन ने अप्रैल 2019 में, अपने पति से खुद को 'जान का खतरा' बताकर दुबई छोड़कर भाग आई थीं. वह उनसे अलग हो गई, क्योंकि उनके पति को एक ब्रिटिश बॉडीगार्ड के साथ उनके रिश्ते पर संदेह होने लगा था और इसी वजह से उनका वैवाहिक जीवन टूट गया. तलाक के निपटारे के दौरान, उच्च न्यायालय के एक जज ने कहा कि दुबई के शासक, जो अब 76 वर्ष के हैं, उनके खिलाफ 'डर, धमकी और उत्पीड़न का आरोप' लगाया गया था, जिसमें उन पर राजकुमारी, उनके बॉडीगार्ड और अन्य कर्मचारियों  के फोन को हैक करने का आरोप शामिल था, जो एक दुर्व्यवहार के बराबर है. तब से हाया अपना समय मध्य लंदन स्थित अपने घर और सरे के एघम में स्थित 12 कमरों वाले आलीशान बंगले के बीच गुजार रही हैं. लेकिन अदालती मुकदमे के बाद राजकुमारी के लिए प्राइवेसी और सुरक्षा पहली प्रायोरिटी बन गई थी. यही वजह है कि वेल्स में स्थित 33 एकड़ की एक प्रॉपर्टी को अपने रहने लायक बनाने का फैसला किया. यहां पहले से ही हाई लेवल सिक्योरिटी अरेंजमेंट थे. इसमें हाई-टेक कैमरे, इंट्री गेट पर आतंकवाद-रोधी शैली के उठने वाले बोलार्ड और एक्स आर्म्ड फोर्स के सुरक्षा गार्डों द्वारा संचालित एक सिक्योरिटी ऑफिस भी शामिल है. 1888 का बना है ये पैलेशियल हाउस 1888 में निर्मित यह पूर्व चार सितारा कंट्री हाउस आवास, वेल्स के सबसे अच्छे छिपे प्रॉपर्टी में से एक के रूप में जाना जाता है. इसमें टेनिस कोर्ट , एक क्रोकेट लॉन, 100 से अधिक प्रकार के पेड़ों वाला एक बागीचा, एक बिलियर्ड्स कक्ष और एक लाइब्रेरी है. हाया, जो घुड़सवारी की शौकीन हैं और एक समय सिडनी ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं.  घुड़सवारी की शौकीन राजकुमारी अब यहां एक अस्तबल बनवा रही हैं ताकि वह घुड़सवारी के अपने शौक को बरकरार रख सकें. वहां के लोकल्स ने बताया कि हमें उस पुराने पैलेस में काम करने वाले कर्मचारियों, मुख्य रूप से बिल्डरों और कारीगरों के दोस्तों और परिवार के माध्यम से इन यात्राओं के बारे में पता चलता है.हैरानी की बात यह है कि राजकुमारी ने वर्तमान इमारतों में से किसी का भी विस्तार करने या उन्हें परिवर्तित करने के लिए किसी भी प्लानिंग का कोई आवेदन नहीं दिया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि वह भविष्य में स्विमिंग पूल बनवाने के लिए आवेदन करेंगी. रखरखाव की लागत कथित तौर पर प्रति वर्ष 100,000 पाउंड से अधिक है. एक ग्रामीण ने द सन को बताया कि राजकुमारी हर महीने लंदन के केंसिंग्टन पैलेस गार्डन में स्थित अपने 10 मिलियन पाउंड के आलीशान बंगले से हेलीकॉप्टर से यहां आती हैं. ताकि चल रहे रेनोवेशन के कार्यों पर नजर रख सकें.यह संपत्ति राजधानी से 160 मील या तीन घंटे की ड्राइव की दूरी पर है, लेकिन हेलीकॉप्टर से एक घंटे से भी कम समय में वहां पहुंचा जा सकता है.महीने में लगभग एक बार, आमतौर पर वीकेंड में आते हुए देखते हैं. फिर हम उन्हें सोमवार सुबह जाते हुए देखते हैं.

भारत पर गर्मी का कहर, ऑक्सफोर्ड ने दी खौफनाक वॉर्निंग

नईदिल्ली  सूरज आग उगलेगा, सड़कें पिघलने लगेंगी, आपका अपना घर एक ‘भट्टी’ बन जाएगा…ये कोई डरावनी कहानी नहीं, बल्कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वो ताजा रिसर्च है जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. 2026 की इस सबसे खौफनाक रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक दुनिया की 40% आबादी यानी लगभग 4 अरब लोग ऐसी गर्मी झेलने को मजबूर होगी, जिसे सहना इंसानी शरीर के बस ककी बात नहीं होगी. दिल दहलाने वाली बात ये है कि वैज्ञानिकों ने भारत के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है. बताया गया है कि ऐसी गर्मी आने वाली है कि धरती पानी की तरह उबलने लगेगी. भारत में क्या होने वाला है? ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने भारत के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत, नाइजीरिया और इंडोनेशिया उन देशों में सबसे आगे होंगे जहां गर्मी का सबसे भयानक रूप देखने को मिलेगा. दावा किया जा रहा है कि पारा 45 से 50 डिग्री सेल्सियस को पार करेगा, इंसानों का शरीर अंदरूनी अंगों को ठंडा रखने में नाकाम हो जाएगा. भारत की करोड़ों की आबादी के पास एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है. वैज्ञानिकों का दावा है कि आने वाले दशकों में गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा सुनामी की तरह बढ़ेगा. 2010 में केवल 1.5 अरब लोग इस खतरे में थे, लेकिन 2050 तक यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा होकर 3.8 अरब पहुंच जाएगी. हम एक ऐसे ग्रह की ओर बढ़ रहे हैं जिसकी पहचान सिर्फ ‘आग और धुआं’ होगी. गैस चेंबर बन जाएंगे ये देश अगर आपको लगता है कि रूस, कनाडा या फिनलैंड जैसे ठंडे देश सुरक्षित हैं, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं. इन देशों के घर गर्मी सोखने और सर्दी से बचाने के लिए बनाए गए हैं. जैसे ही तापमान बढ़ेगा, ये घर ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो जाएंगे. यहां का ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य ढांचा भीषण गर्मी के लिए तैयार ही नहीं है. ऑक्सफोर्ड की रिसर्चर राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि 1.5 डिग्री की सीमा पार होते ही शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती सब कुछ तबाह हो जाएगा. खाने का संकट आएगा, फसलें या तो जल जाएंगी या सूख जाएंगी और भूखमरी फैल जाएगी. करोड़ों लोग रहने लायक जगहों की तलाश में घर छोड़ेंगे.

कृषि क्षेत्र को बजट 2026 से क्या मिलेगा? किसान सम्मान निधि में संभावित इजाफा

नई दिल्ली आगामी एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में किसानों को सरकार से कई उम्मीदें हैं.कृषि विकास को लेकर किसानों की प्रमुख मांगों में खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिलाना एवं पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि में बढ़ोतरी शामिल है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण में जानकारी दी कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश के 11 करोड़ किसानों को अब तक कुल 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस किसानों को मजबूत बनाने पर है.  किसानों का मानना है कि इन मांगों को बजट में शामिल करने से कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी. बीज, यूरिया, खाद, कृषि यंत्र, ट्रैक्टर, डीजल समेत कई ऐसी चीजे हैं जिनपर GST को कम करके किसानों को बड़ी राहत दी जा सकती है. वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. माना जा रहा है कि केंद्रीय बजट 2026 में पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली राशि में इजाफा हो सकता है. क्या बजट 2026 में PM-KISAN योजना की राशि में बदलाव संभव है? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर होती है. हालांकि, मौजूदा हालात में किसान संगठनों और एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई के दौर और खेती में लागत के हिसाब से यह रकम अब कम लगती है.  दरअसल, बीते कुछ सालों में खेती की लागत में तेज उछाल आया है. बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी हर चीज महंगी होती जा रही है. सीमांत और छोटे किसानों के लिए 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता नाकाफी साबित हो रही है. ऐसे में बजट 2026 में इस राशि में बढ़ोतरी की मांग जोर पकड़ रही है. इनपुट लागत में कमी और एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किसानों की एक प्रमुख मांग खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और यंत्रों पर GST दरों को कम करने की है. वर्तमान में कीटनाशकों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसे घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग जोर पकड़ रही है. इसके अतिरिक्त, बजट में पोस्ट-हार्वेस्ट लॉजिस्टिक्स और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश की संभावना है. सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल सरकार की कई योजनाएं खेती के लिए चलाई जा रही हैं. पीएम धन-धान्य कृषि योजना जैसी योजनाएं उन इलाकों में मदद कर सकती हैं जहां खेती कमजोर है. बजट में यह ध्यान रखना चाहिए कि इन योजनाओं का फायदा छोटे किसानों, बारिश पर निर्भर इलाकों और महिलाओं तक पहुंचे.  विकसित भारत की नींव है मजबूत खेती अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनाना है, तो खेती को मजबूत बनाना जरूरी है. बजट 2026 भारतीय खेती को नई दिशा दे सकता है. सरकार के सहयोग से किसान खुशहाल होंगे तो देश भी आगे बढ़ेगा.

परिवर्तनकारी समझौता: भारत-ईयू व्यापार से बढ़ेगा रोजगार और विकास

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को परिवर्तनकारी समझौता बताया। साथ ही कहा कि इससे देश के बाजारों का विस्तार होगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री कार्यकाल की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में कहा गया कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ऐतिहासिक भारत-ईयू ट्रेड डील पर एक लेख लिखा है। यह समझौता पूरी तरह से विकसित भारत के विजन पर समर्पित है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का सफल समापन वास्तव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो यूपीए युग के विपरीत है, जहां समझौते जल्दबाजी में किए गए थे और भारत ने अकसर हासिल करने की तुलना में कहीं अधिक त्याग किया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता हमारी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करेगा और समृद्धि को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व और रणनीतिक दूरदर्शिता के मार्गदर्शन में हुए समझौते भारत के मूल हितों को प्राथमिकता देते हुए बाजारों का विस्तार करते हैं, रोजगार सृजित करते हैं और आर्थिक विकास को गति देते हैं। इससे पहले, गोयल ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर कांग्रेस की आलोचना का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह समझौता एकतरफा नहीं है, बल्कि पारस्परिक रूप से लाभकारी है जो भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देगा और व्यवसायों एवं नागरिकों के लिए व्यापक अवसर खोलेगा। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, यह समझौता आर्थिक संबंधों को गहरा करेगा, हमारे लोगों के लिए अवसर पैदा करेगा और समृद्ध भविष्य के लिए भारत-यूरोप साझेदारी को मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ यह ऐतिहासिक समझौता, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है, भारत की 1.4 अरब जनता के लिए महत्वपूर्ण लाभ लेकर आएगा। इससे हमारे किसानों और लघु उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी, विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे और हमारे सेवा क्षेत्रों के बीच सहयोग मजबूत होगा।

निवेशकों से ठगी का खेल खत्म! 2 करोड़ के चिट फंड फ्रॉड में तन्मय मिर्धा गिरफ्तार

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2 करोड़ रुपए से अधिक के चिट फंड घोटाले में फरार चल रहे आरोपी तन्मय मिर्धा को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी 29 जनवरी को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के ब्रह्म नगर इलाके से की गई। सीबीआई ने यह मामला 23 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दर्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सक्रिय चिट फंड कंपनियों से जुड़े मामलों की गहन जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई को जांच के दौरान पता चला कि आरोपी तन्मय मिर्धा एक्सप्रेस कल्टीवेशन लिमिटेड, कोलकाता का डायरेक्टर था और उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आम जनता से निवेश के नाम पर भारी धनराशि एकत्र की। आरोपी ने आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेशकों से करीब 2.1 करोड़ रुपए जुटाए और बाद में इस धन का गलत इस्तेमाल किया। निवेशकों को न तो तय समय पर वापस मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई, जिससे बड़ी संख्या में लोग आर्थिक नुकसान का शिकार हुए। सीबीआई ने विस्तृत जांच पूरी करने के बाद 4 फरवरी 2022 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, हालांकि आरोपी जांच के दौरान एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुआ और लगातार फरार बना रहा। इसके बाद कोलकाता स्थित एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। लगातार फील्ड वेरिफिकेशन, तकनीकी इनपुट और खुफिया जानकारी के आधार पर सीबीआई ने 29 जनवरी को आरोपी की लोकेशन का पता लगाया, जिसके बाद सीबीआई ने इलाके में घेराबंदी कर आरोपी तन्मया मिर्धा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जा सकता है जिससे इस मामले में और जानकारी मिल सके। सीबीआई के अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि चिट फंड घोटालों में शामिल किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। जो भी इसमें दोषी पाए जाएंगे, जल्द से जल्द उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तन्मय मिर्धा के बयान के आधार पर पता चलेगा कि इसमें कितने लोग शामिल हैं और किस तरह से आम जनता का पैसा लिया गया है।

आसमान में हड़कंप! इंडिगो विमान को उड़ाने की धमकी, अहमदाबाद एयरपोर्ट पर उतारा गया

अहमदाबाद कुवैत से दिल्ली लौट रहे इंडिगो विमान की शुक्रवार को बम से उड़ाने की धमकी के बाद अहमदाबाद में आपात लैंडिंग कराई गई। सभी यात्रियों को नियंत्रित तरीके से विमान से बाहर निकाला गया और एयरपोर्ट के एक सुरक्षित इलाके में ले जाया गया। इस प्रक्रिया के दौरान किसी के घायल होने या मेडिकल इमरजेंसी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। जानकारी सामने आई कि इस विमान में 180 यात्रियों समेत 186 लोग सवार थे। शुक्रवार को विमान में मिले एक टिश्यू पेपर पर धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। हाथों से लिखे गए इस नोट में हाईजैकिंग और बम का जिक्र था, जिसके बाद फ्लाइट क्रू ने तुरंत कार्रवाई की। स्टैंडर्ड एविएशन सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को अलर्ट किया और विमान को सबसे नजदीकी अहमदाबाद एयरपोर्ट की ओर मोड़ने का फैसला किया। फ्लाइट अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गई, जहां उसके आने से पहले ही सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया था। एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एन. डी. नाकुम ने कहा कि धमकी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई की। उन्होंने कहा, "धमकी मिलने के बाद सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया। बम निरोधक दस्ते ने विमान की पूरी तरह से जांच की। अब तक कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक चीज नहीं मिली है। विमान की जांच प्रक्रिया पूरी हो गई है।" बम निरोधक दस्ते, सीआईएसएफ टीमों, डॉग स्क्वॉड और एयरपोर्ट सुरक्षा टीमों ने विमान की विस्तृत जांच की। विमान के अलावा, सभी यात्रियों के सामान की भी जांच की गई और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के अनुसार यात्रियों की व्यक्तिगत सुरक्षा जांच की गई। ऑपरेशन के दौरान पूरे एयरपोर्ट पर भारी पुलिस बल तैनात था। एयरपोर्ट सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा जांच जारी रहने के दौरान फ्लाइट ऑपरेशन मामूली और अस्थायी बदलावों के साथ जारी रहे। फिलहाल, अधिकारी हाथ से लिखे धमकी भरे नोट की जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इसे विमान के अंदर कैसे रखा गया था। अधिकारियों ने कहा कि जांच के नतीजों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

‘विकास नहीं, सत्ता संघर्ष’: 6,000 करोड़ के घोटाले पर त्रिवेदी का कांग्रेस पर हमला

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर 6,000 करोड़ रुपए के शराब घोटाले का आरोप लगाया गया है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जब केंद्र में भाजपा विपक्ष में थी, तब भी गुजरात मॉडल की खूब चर्चा होती थी, लेकिन आज हम बात करेंगे कि कांग्रेस पार्टी जिन राज्यों में सरकार चला रही है, वहां वह किस तरह का मॉडल पेश कर रही है। कांग्रेस सरकार पर 6,000 करोड़ रुपए के शराब घोटाले का आरोप लगा है। यह आरोप केंद्र सरकार ने नहीं, बल्कि उसी राज्य के शराब व्यापारियों ने लगाया है। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस की जिन राज्यों में सरकार है, वे कैसा मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं, उसकी बानगी हम आपके सामने रखना चाहते हैं। वाइन मर्चेंट्स एसोसिएशन ने बताया है कि रेस्टोरेंट से लेकर होटलों तक, किस प्रकार अलॉटमेंट के नाम पर सरकार के विभिन्न स्तरों पर बैठे मंत्रियों और अन्य लोगों तक यह पैसा जाता था। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर प्रदेश की जनता किसी भी दल को सत्ता देती है तो अपेक्षा करती है कि वह सरकार विकास और सुशासन के मार्ग पर प्रदेश को ले जाएगी। मध्य प्रदेश में हमने ऐसी योजनाएं लागू की थीं, जिससे बच्चियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। कर्नाटक में जब 2008 में हमारी सरकार थी, तब हमने किसानों को एक साल के लिए बिना ब्याज के ऋण देने का प्रयास किया था और सफल रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे हमारी सरकार के पास विकास का एक मॉडल है, वैसे ही कांग्रेस के पास भी अपना मॉडल है जहां मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के बीच लगातार सत्ता की लड़ाई चलती रहती है, चाहे वह कर्नाटक हो, मध्य प्रदेश हो या राजस्थान हो। कांग्रेस ने कर्नाटक के लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है, जिन्होंने उन्हें इतना बड़ा जनादेश दिया था। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को एक सख्त निर्देश दिया है, जिसमें कहा गया है कि सीमा पर बाड़ लगाने के काम के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक साफ की जाए। यह साफ दिखाता है कि घुसपैठियों के वोटों के लालच में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया गया। इस फैसले से यह सच्चाई सामने आ गई है कि टीएमसी घुसपैठियों के प्रति हमदर्दी रखती है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग तृणमूल सरकार को नकार देंगे, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है और आने वाले चुनावों में भाजपा को चुनेंगे। उन्होंने कहा कि लेकिन यह एक बहुत दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और विचलित करने वाला प्रश्न उठाता है। यह दर्शाता है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में देश की सीमाओं पर सुरक्षा की कीमत पर, घुसपैठियों के वोट के लालच में, केवल क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ के लिए राष्ट्र की सुरक्षा का सौदा किया जा रहा था। उच्च न्यायालय का यह निर्णय तृणमूल कांग्रेस की नीतियों पर करारा प्रहार है।

सरकारी लापरवाही: एंबुलेंस नहीं मिली, पति के सामने पत्नी और बच्चे की गई जान

श्रीनगर उत्तराखंड के श्रीनगर में से स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां एंबुलेंस नहीं मिलने से सरकारी कर्मचारी की गर्भवती पत्नी की मौत हुई है। साथ ही उसके पेट में ही बच्चे की जान भी गई है। बताया गया कि मृतक का पति ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कार्यरत है। इस घटना के बाद एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया है। मिली जानकारी के अनुसार बुधवार शाम को 31 वर्षीय शिखा पत्नी विनोद घर पर अकेली थी। इस दौरान शिखा की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। गर्भवती महिला कमरे में लहूलुहान हालत में मिली। स्थानीय लोगों की मदद से महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी पहुंचाया गया। जहां गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर रेफर करने की बात कही। लेकिन, अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस का चालक छुट्टी पर पाया गया। जिसकी वजह से मरीज तड़पती-चिल्लाती रही। करीब दो घंटे तक तड़पने के बाद रात 9 बजे एक 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। श्रीनगर ले जाते समय बीच रास्ते में ही जच्चा और बच्चा दोनों ने दम तोड़ दिया। वहीं, चिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण महिला की मौत हुई है। जच्चा-बच्चा दोनों को बचाने की कोशिश की गई थी। लेकिन, कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया था।  

युद्ध की चेतावनी: ट्रंप के सैन्य कदम पर ईरान ने कहा—पूरी ताकत से जवाब देंगे

नई दिल्ली मिडल ईस्ट इस समय युद्ध की कगार पर खड़ा दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खुली सैन्य टकराव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और देश के भीतर जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर दबाव बढ़ाते हुए युद्धपोतों को ईरान के नजदीक भेजने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने और तेहरान पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिए उठाया गया है। लेकिन ईरान ने इस तैनाती को सीधे युद्ध की धमकी करार देते हुए स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह “पूरी ताकत से” जवाब देगा। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी हमले से केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में झुलस सकता है। तेहरान का कहना है कि वह आत्मरक्षा में न केवल जवाबी कार्रवाई करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया होगी, जिससे एक चेन रिएक्शन शुरू हो सकता है। इस संकट के बीच तुर्किये मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इज़राइल और सऊदी अरब वॉशिंगटन पर दबाव बना रहे हैं कि ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इज़राइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताता रहा है, वहीं सऊदी अरब भी क्षेत्र में ईरानी प्रभाव को सीमित करना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में एक भी गलत फैसला या सैन्य चूक पूरे क्षेत्र को पूर्ण पैमाने के युद्ध में धकेल सकती है। पहले से ही गाजा युद्ध, यमन संकट और लेबनान-इज़राइल तनाव से जूझ रहा मध्य पूर्व अब एक और बड़े टकराव की दहलीज पर खड़ा है। ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका की सैन्य धमकियों का उद्देश्य केवल परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान के भीतर जारी सरकार-विरोधी आंदोलनों को कमजोर करना भी है। हालांकि, तेहरान का दावा है कि वह आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर दबाव झेलने के लिए तैयार है।  

भारत को झटका! किर्गिस्तान ने रोका एनिमल प्रोडक्ट आयात, कहा– जोखिम बेहद गंभीर

किर्गिस्तान किर्गिस्तान ने निपाह वायरस के खतरे के मद्देनजर भारत से जानवरों और पशु उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक और दूसरे सबसे बड़े शहर ओश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर आने वाले यात्रियों की जांच भी कड़ी कर दी गई है। रूस की समाचार एजेंसी तास के अनुसार, "भारत में फैल रहे निपाह वायरस को देखते हुए बिश्केक और ओश आने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों के लिए सख्त संक्रमण नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं।"   किर्गिस्तान के जल संसाधन, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रेस सेवा ने कहा कि ये कदम भारत में निपाह वायरस के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं। बिश्केक के मानस हवाई अड्डे पर आने वाले सभी यात्रियों की विशेष कंप्यूटरों के जरिए तापमान जांच की जा रही है। बुधवार को किर्गिस्तान के अधिकारियों ने भारत से जानवरों और पशु उत्पादों के आयात पर औपचारिक रूप से रोक लगा दी। किर्गिस्तान के मंत्रालय ने यह भी कहा कि निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैल सकता है।