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विधानसभा का शीतकालीन सत्र 8 दिसंबर से नागपुर में, मानसून सत्र सम्पन्न

मुंबई अराजकता, हंगामे, बहिर्गमन, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव, झड़प और ऐसी ही अन्य घटनाओं के बीच, महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र आखिरकार समाप्त हो गया। यह सत्र तीन हफ्ते चला। सत्र की समाप्ति की घोषणा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि विधानमंडल का शीतकालीन सत्र अब सोमवार, 8 दिसंबर को नागपुर में आयोजित किया जाएगा। शीतकालीन सत्र की तिथि के संबंध में एक प्रस्ताव राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को भेजा जाएगा। नार्वेकर ने यह भी घोषणा की कि राज्यपाल द्वारा दिए गए संदेश के अनुसार मानसून सत्र स्थगित किया जा रहा है।  सत्र की कार्यवाही की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान कुल 15 बैठकें हुईं और कुल 133 घंटे 48 मिनट काम हुआ, जबकि 45 मिनट का समय बर्बाद हुआ। औसत दैनिक कार्य 8 घंटे 55 मिनट का था। इसमें एक बधाई प्रस्ताव, सात शोक प्रस्ताव, 8277 तारांकित प्रश्न, 579 स्वीकृत प्रश्न, 92 उत्तरित प्रश्न, 8 सुझाव प्राप्त, 8 अस्वीकृत सुझाव, 7 चर्चाएं, लोक महत्व के विषयों पर 181 सुझाव प्राप्त, 42 स्वीकृत सुझाव, जिनमें से केवल पांच पर चर्चा हुई। विधानसभा में 14 सरकारी विधेयक प्रस्तुत किए गए। 15 विधेयकों पर सहमति बनी, जबकि एक वापस लिया गया। विधायकों से 2481 उल्लेखनीय सुझाव प्राप्त हुए, जिनमें से 511 स्वीकृत हुए और 152 सुझावों पर प्रत्यक्ष चर्चा हुई।  

भ्रामक समाचारों पर कार्रवाई: पायलट फेडरेशन ने विदेशी मीडिया से मांगी सार्वजनिक माफी

नई दिल्ली  अहमदाबाद विमान हादसे के बाद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। इसके बाद विदेशी मीडिया ने हादसे को लेकर गलत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इन मीडिया रिपोर्ट्स पर पायलट संघ ने आपत्ति जताई है। साथ ही दो संस्थानों को कानूनी नोटिस भेजा है। अहमदाबाद में 12 जून को हुए विमान हादसे को लेकर विदेशी मीडिया की भ्रामक रिपोर्टिंग पर भारतीय पायलट संघ (एफआईपी) ने आपत्ति जताई है। एफआईपी ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों संस्थानों से गलत रिर्पोटिंग के लिए माफी मांगने की मांग की गई है।  भारतीय पायलट संघ (एफआईपी) के अध्यक्ष सीएस रंधावा ने बताया कि हमने कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हमने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स को उनकी रिपोर्टों पर एक नोटिस भेजा है। हमने उनसे माफी मांगने के लिए कहा है। रॉयटर्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल को भेजे एक ईमेल में, एफआईपी ने कहा कि हमें पता चला है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ वर्ग बार-बार चुनिंदा और असत्यापित रिपोर्टिंग के माध्यम से विमान हादसे का निष्कर्ष निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इस हादसे ने जनता को बड़ा सदमा पहुंचाया है। यह भारतीय विमानन उद्योग की सुरक्षा को लेकर, खासकर निराधार तथ्यों के आधार पर जनता में चिंता या आक्रोश पैदा करने का समय नहीं है। एफआईपी ने कहा कि मीडिया संस्थान आधिकारिक पुष्टि और अंतिम रिपोर्ट के बिना ऐसी कोई भी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित न करें जिसमें दुर्घटना के कारणों पर अटकलें  लगाई गईं हों और मृत पायलटों को दोषी ठहराती हों। इस तरह की अटकलें लगाने वाली सूचनाओ का प्रकाशन बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। इससे मृत पायलटों की प्रतिष्ठा को गंभीर और अपूरणीय क्षति हुई है। रॉयटर्स ने शोक संतप्त परिवारों को अनावश्यक संकट में डाला है और पायलट वर्ग का मनोबल गिराया है, जो भारी दबाव और सार्वजनिक जिम्मेदारी के तहत काम करता है।  एफआईपी ने मीडिया संस्थानों से कहा कि आधिकारिक जांच के परिणाम जारी होने तक रॉयटर्स और सभी संबद्ध प्लेटफॉर्म्स को दुर्घटना और विमान को संचालित करने वाले पायलटों से संबंधित असत्यापित, अटकलों से जुड़ी अनौपचारिक रिपोर्ट को पेश करने के खिलाफ आगाह करने का निर्देश दिया जाता है। रॉयटर्स से यह कहा गया कानूनी नोटिस में रॉयटर्स से कहा गया है कि वह आधिकारिक पुष्टि और अंतिम रिपोर्ट के अभाव में दुर्घटना के कारण के बारे में अटकलें लगाने वाली या किसी व्यक्ति, विशेष रूप से मृत पायलटों को दोषी ठहराने वाली कोई भी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकें। वह 17 जुलाई 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट की तुरंत समीक्षा और संशोधन करें। इसमें एक उपयुक्त अस्वीकरण शामिल हो और ऐसी किसी भी सामग्री को हटा दें जिसे दोष देने के रूप में समझा जा सकता है।  एफआईपी ने रॉयटर्स को एक स्पष्टीकरण जारी करने के लिए कहा है। इसमें यह स्वीकार किया गया हो कि अधिकारियों ने कोई अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है। यह लेख कुछ रिपोर्टों पर आधारित था। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि कृपया ध्यान दें कि इस नोटिस के अनुसार कार्रवाई न करने पर मानहानि, मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए लागू कानून के तहत सभी कानूनी उपायों का सहारा लेना पड़ सकता है। एनटीएसबी के बयान पर जताई खुशी भारतीय पायलट संघ के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने कहा कि हम एनटीएसबी बोर्ड के बयान से खुश हैं। इससे पश्चिमी मीडिया में चल रही रिपोर्टों पर रोक लगेगी। वे अपनी ही दुनिया में मस्त हैं और सोचते हैं कि वे कुछ भी प्रकाशित करके बच निकल सकते हैं। भारतीय रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट है। हमें अंतिम रिपोर्ट आने का इंतज़ार करना होगा। देश में विमानन दुर्घटनाओं और महत्वपूर्ण परिवहन घटनाओं की जांच के लिए जिम्मेदार अमेरिकी संघीय एजेंसी राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को विमान हादसे पर मीडिया में आई हालिया कवरेज की कड़ी आलोचना की थी।  एनटीएसबी की अध्यक्ष जेनिफर होमेंडी ने कहा था कि एअर इंडिया 171 दुर्घटना पर हालिया मीडिया रिपोर्टें समय से पहले और अटकलें लगाने वाली हैं। भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने अभी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। इतने बड़े पैमाने की जांच में समय लगता है। हम AAIB की सार्वजनिक अपील का पूरा समर्थन करते हैं। सभी जांच संबंधी प्रश्न एएआईबी को भेजे जाने चाहिए। 

भ्रामक समाचारों पर कार्रवाई: पायलट फेडरेशन ने विदेशी मीडिया से मांगी सार्वजनिक माफी

नई दिल्ली  अहमदाबाद विमान हादसे के बाद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। इसके बाद विदेशी मीडिया ने हादसे को लेकर गलत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इन मीडिया रिपोर्ट्स पर पायलट संघ ने आपत्ति जताई है। साथ ही दो संस्थानों को कानूनी नोटिस भेजा है। अहमदाबाद में 12 जून को हुए विमान हादसे को लेकर विदेशी मीडिया की भ्रामक रिपोर्टिंग पर भारतीय पायलट संघ (एफआईपी) ने आपत्ति जताई है। एफआईपी ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों संस्थानों से गलत रिर्पोटिंग के लिए माफी मांगने की मांग की गई है।  भारतीय पायलट संघ (एफआईपी) के अध्यक्ष सीएस रंधावा ने बताया कि हमने कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हमने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स को उनकी रिपोर्टों पर एक नोटिस भेजा है। हमने उनसे माफी मांगने के लिए कहा है। रॉयटर्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल को भेजे एक ईमेल में, एफआईपी ने कहा कि हमें पता चला है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ वर्ग बार-बार चुनिंदा और असत्यापित रिपोर्टिंग के माध्यम से विमान हादसे का निष्कर्ष निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इस हादसे ने जनता को बड़ा सदमा पहुंचाया है। यह भारतीय विमानन उद्योग की सुरक्षा को लेकर, खासकर निराधार तथ्यों के आधार पर जनता में चिंता या आक्रोश पैदा करने का समय नहीं है। एफआईपी ने कहा कि मीडिया संस्थान आधिकारिक पुष्टि और अंतिम रिपोर्ट के बिना ऐसी कोई भी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित न करें जिसमें दुर्घटना के कारणों पर अटकलें  लगाई गईं हों और मृत पायलटों को दोषी ठहराती हों। इस तरह की अटकलें लगाने वाली सूचनाओ का प्रकाशन बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। इससे मृत पायलटों की प्रतिष्ठा को गंभीर और अपूरणीय क्षति हुई है। रॉयटर्स ने शोक संतप्त परिवारों को अनावश्यक संकट में डाला है और पायलट वर्ग का मनोबल गिराया है, जो भारी दबाव और सार्वजनिक जिम्मेदारी के तहत काम करता है।  एफआईपी ने मीडिया संस्थानों से कहा कि आधिकारिक जांच के परिणाम जारी होने तक रॉयटर्स और सभी संबद्ध प्लेटफॉर्म्स को दुर्घटना और विमान को संचालित करने वाले पायलटों से संबंधित असत्यापित, अटकलों से जुड़ी अनौपचारिक रिपोर्ट को पेश करने के खिलाफ आगाह करने का निर्देश दिया जाता है। रॉयटर्स से यह कहा गया कानूनी नोटिस में रॉयटर्स से कहा गया है कि वह आधिकारिक पुष्टि और अंतिम रिपोर्ट के अभाव में दुर्घटना के कारण के बारे में अटकलें लगाने वाली या किसी व्यक्ति, विशेष रूप से मृत पायलटों को दोषी ठहराने वाली कोई भी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकें। वह 17 जुलाई 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट की तुरंत समीक्षा और संशोधन करें। इसमें एक उपयुक्त अस्वीकरण शामिल हो और ऐसी किसी भी सामग्री को हटा दें जिसे दोष देने के रूप में समझा जा सकता है।  एफआईपी ने रॉयटर्स को एक स्पष्टीकरण जारी करने के लिए कहा है। इसमें यह स्वीकार किया गया हो कि अधिकारियों ने कोई अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है। यह लेख कुछ रिपोर्टों पर आधारित था। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि कृपया ध्यान दें कि इस नोटिस के अनुसार कार्रवाई न करने पर मानहानि, मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए लागू कानून के तहत सभी कानूनी उपायों का सहारा लेना पड़ सकता है। एनटीएसबी के बयान पर जताई खुशी भारतीय पायलट संघ के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने कहा कि हम एनटीएसबी बोर्ड के बयान से खुश हैं। इससे पश्चिमी मीडिया में चल रही रिपोर्टों पर रोक लगेगी। वे अपनी ही दुनिया में मस्त हैं और सोचते हैं कि वे कुछ भी प्रकाशित करके बच निकल सकते हैं। भारतीय रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट है। हमें अंतिम रिपोर्ट आने का इंतज़ार करना होगा। देश में विमानन दुर्घटनाओं और महत्वपूर्ण परिवहन घटनाओं की जांच के लिए जिम्मेदार अमेरिकी संघीय एजेंसी राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को विमान हादसे पर मीडिया में आई हालिया कवरेज की कड़ी आलोचना की थी।  एनटीएसबी की अध्यक्ष जेनिफर होमेंडी ने कहा था कि एअर इंडिया 171 दुर्घटना पर हालिया मीडिया रिपोर्टें समय से पहले और अटकलें लगाने वाली हैं। भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने अभी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। इतने बड़े पैमाने की जांच में समय लगता है। हम AAIB की सार्वजनिक अपील का पूरा समर्थन करते हैं। सभी जांच संबंधी प्रश्न एएआईबी को भेजे जाने चाहिए। 

‘महिला सशक्तिकरण से ही सशक्त राष्ट्र’: RSS प्रमुख ने पुरानी सोच पर उठाए सवाल

नागपुर   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी देश की प्रगति के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण बेहद जरूरी है और उन्हें पुरानी व पिछड़ी सोच वाली परंपराओं से मुक्त किया जाना चाहिए। वे महाराष्ट्र के सोलापुर में उद्योगवर्धिनी नाम के एक गैर-सरकारी संगठन की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। 'महिलाएं किसी भी समाज का सबसे अहम हिस्सा' मोहन भागवत ने कहा, 'महिलाएं किसी भी समाज का सबसे अहम हिस्सा होती हैं। पुरुष जीवनभर काम करता है, महिला भी जीवनभर काम करती है, लेकिन उससे आगे जाकर वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है। बच्चों के मन और संस्कार मां के स्नेह में ही विकसित होते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विकास के लिए अनिवार्य है। मोहन भागवत ने कहा, 'ईश्वर ने महिलाओं को एक अतिरिक्त विशेषता दी है, जिससे वे वह सब कर सकती हैं जो पुरुष नहीं कर पाते। साथ ही, उन्हें पुरुषों के जैसे सभी गुण भी दिए हैं। इसलिए वे पुरुषों के बराबर हर काम कर सकती हैं।' राष्ट्रीय विकास के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण बेहद महत्वपूर्ण- भागवत उन्होंने कहा, “एक पुरुष अपनी मृत्यु तक काम करता है और एक महिला भी अंत तक काम करती है, लेकिन वह उससे भी आगे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती है. एक महिला के प्यार और स्नेह के तले बच्चे बढ़ते है, परिपक्व होते हैं और उनका विकास होता है.' इसके साथ ही आरएसएस प्रमुख ने कहा, “राष्ट्रीय विकास के लिए भी महिलाओं का सशक्तिकरण बेहद महत्वपूर्ण है.” ईश्वर ने महिलाओं को दिए हैं अतिरिक्त गुण- भागवत उन्होंने कहा, “ईश्वर ने पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को कुछ अतिरिक्त गुण दिए हैं, जिससे महिलाएं वह सभी काम कर सकती हैं, जो सामान्य रूप से पुरुष नहीं कर सकते है. इसके साथ ही, ईश्वर ने महिलाओं को वे सभी गुण दिए हैं, जो उन्होंने पुरुषों को दिए हैं, जिसके कारण वे वह सब कुछ भी कर सकती हैं, जो पुरुष कर सकते हैं.” महिलाओं को वह करने दें, जो वे करना चाहती हैं- भागवत भागवत ने कहा, “इसलिए पुरुषों का यह दावा करना मूर्खता है कि वे महिलाओं का उत्थान करेंगे.” उन्होंने कहा, “इस तरह के अहंकार का कोई आधार नहीं है. महिलाओं को वह करने दें, जो वे करना चाहती हैं. बस उन्हें सशक्त बनाएं और उन्हें रूढिवादी रीति-रिवाजों और परंपराओं से मुक्त करें.” उन्होंने कहा, “जब एक महिला खुद का उत्थान करती है, तो वह पूरे समाज को ऊपर उठाती है.” वहीं, आरएसएस प्रमुख ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिलाओं को सशक्त और मजबूत बनाने में उद्योगवर्धिनी के योगदान की सराहना भी की. उन्होंने कहा- पुरुषों को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि वे महिलाओं का उत्थान करेंगे। ईश्वर ने महिलाओं को न केवल पुरुषों जैसी क्षमताएं दी हैं, बल्कि अतिरिक्त गुण भी दिए हैं जो उन्हें खास बनाते हैं। जिन शाखाओं में 100+ लोग, वहां पथ संचलन 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 साल पूरे हो रहे हैं। 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन विजया दशमी भी है। विजया दशमी के दिन संघ की स्थापना हुई थी। संघ ने 2 अक्टूबर को अपने नए-पुराने स्वयं सेवकों को शाखाओं में पहुंचने का आह्वान किया है। एक ओर रामधुन बजेगी, वहीं जिन शाखाओं में 100 से अधिक स्वयं सेवक हैं, वहां पथ संचलन होगा। 4-6 जुलाई तक दिल्ली में संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों पर चर्चा की थी। घर-घर संपर्क अभियान संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि शताब्दी वर्ष में यूपी में संघ भीड़ जुटाने का कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगा। आम लोगों से जुड़ने के लिए ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत, ब्लॉक स्तर पर शाखाएं कार्यक्रम करेंगी। जिलों में चुनिंदा 100 से 200 लोगों की गोष्ठियां होगी। छोटी गोष्ठियां शाखा स्तर पर भी होंगी। ग्रामीण में मंडल व शहरी क्षेत्रों में बस्ती स्तर पर हिन्दू सम्मेलन होंगे। संघ ‘गृह संपर्क’ का अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाएगा। इसमें स्वयंसेवक 25 से 30 घरों में जाकर संघ के कार्यों की जानकारी देंगे। 'महिला आगे बढ़ती है, तो वह पूरे समाज को आगे ले जाती है' उन्होंने यह भी कहा कि पुरुषों को यह सोचना कि वे महिलाओं को ऊपर उठाएंगे, यह एक अहंकार की बात है। 'ऐसा सोचने की कोई जरूरत नहीं है। महिलाओं को बस स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए, उन्हें पिछड़ी परंपराओं से मुक्त करना चाहिए और उन्हें खुद को विकसित करने देना चाहिए। जब एक महिला आगे बढ़ती है, तो वह पूरे समाज को आगे ले जाती है।' इस कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने उद्योगवर्धिनी संस्था की तरफ से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की भी सराहना की। 

रिवाज़ या विवाद? हिमाचल में दो सगे भाइयों ने रचाई एक ही लड़की से शादी, लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

सिरमौर  हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई गांव में हाल ही में एक अनोखी शादी ने सबका ध्यान खींचा, जहां एक दुल्हन ने दो भाइयों से विवाह रचाया। शिलाई गांव के प्रदीप नेगी और कपिल नेगी ने नजदीकी कुनहाट गांव की सुनीता चौहान से एक साथ विवाह किया। यह विवाह समारोह पूरी सहमति और सामुदायिक भागीदारी के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन हाटी समुदाय की बहुपति (पॉलीएंड्री) परंपरा पर आधारित था, जिसमें एक ही पत्नी को दो या अधिक भाई साझा रूप से अपनाते हैं। परिवार और परंपरा का मेल  रिपोर्ट के अनुसार, प्रदीप नेगी जल शक्ति विभाग में कार्यरत हैं और उनके छोटे भाई कपिल विदेश में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कार्यरत हैं। हालांकि दोनों की दिनचर्या और देश अलग हैं। फिर भी दोनों भाइयों ने मिलकर इस परंपरा को निभाने का निर्णय लिया। प्रदीप ने कहा कि यह हमारा संयुक्त निर्णय था। यह विश्वास, देखभाल और साझी जिम्मेदारी का रिश्ता है। हमने इस परंपरा को खुले तौर पर अपनाया क्योंकि हमें अपनी जड़ों पर गर्व है। वहीं कपिल ने कहा कि मैं भले ही विदेश में हूं, लेकिन इस विवाह के माध्यम से हम अपनी पत्नी को स्थिरता, समर्थन और प्रेम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दुल्हन ने क्या कहा दुल्हन सुनीता का कहना है कि यह मेरा स्वयं का निर्णय था। मुझ पर कोई दबाव नहीं था। मैं इस परंपरा को जानती हूं और इसे अपनी इच्छा से अपनाया है। बता दें कि इस अनूठी शादी में सैकड़ों गांववाले और रिश्तेदार शामिल हुए। तीन दिन तक चले समारोह में पारंपरिक ट्रांस-गिरी व्यंजन परोसे गए और पहाड़ी लोकगीतों पर नृत्य करते ग्रामीणों ने शादी को उत्सव का रूप दे दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमारे गांव में ही तीन दर्जन से अधिक परिवारों में दो या तीन भाइयों की एक पत्नी होती है। लेकिन ऐसी शादियां आमतौर पर चुपचाप होती हैं। यह शादी ईमानदारी और गरिमा के साथ सार्वजनिक रूप से मनाई गई, जो इसे खास बनाती है। व्यावहारिक कारणों से जन्मी परंपरा ट्रांस-गिरी क्षेत्र में पॉलीएंड्री की परंपरा के पीछे कई व्यावहारिक कारण रहे हैं। जैसे पुश्तैनी जमीन का विभाजन रोकना, महिलाओं को विधवा होने से बचाना और परिवार में एकता बनाए रखना। खासकर तब जब भाइयों को काम के लिए दूर जाना पड़ता था। अब जबकि हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिल चुका है।

चीन ने TRF को आतंकी माना, PAK को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगा झटका, पहलगाम पर जताई चिंता

बीजिंग पहलगाम आतंकी हमला करने वाले लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को अमेरिका ने विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया है। इस पर चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान को झटका दिया है। चीन ने शुक्रवार को क्षेत्रीय देशों से क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने के बयान के बारे में पूछे जाने पर कहा, "चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है।" उन्होंने कहा, "चीन क्षेत्रीय देशों से आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता को संयुक्त रूप से बनाए रखने का आह्वान करता है।" चीन का यह बयान उसके दोस्त पाकिस्तान के नजरिए से झटका माना जा रहा है, क्योंकि पहलगाम हमले के बाद यूएनएससी में टीआरएफ और लश्कर जैसे शब्दों को चीन की आपत्ति के बाद हटा दिया गया था। ऐसे में पाकिस्तान को उम्मीद रही होगी कि इस बार भी चीन टीआरएफ के सवाल पर या तो पल्ला झाड़ लेगा या फिर पहलगाम हमले में किसी पाकिस्तानी आतंकी संगठन की संलिप्तता से इनकार कर देगा, लेकिन उसने आतंकवाद के खिलाफ बयान देकर पाकिस्तान के मन-मुताबिक बात नहीं की। वहीं, बार-बार पहलगाम हमले की निंदा करना भी पाकिस्तान को रास नहीं आया होगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले एक बयान में कहा था कि विदेश विभाग टीआरएफ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित कर रहा है। टीआरएफ को अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित किए जाने की बात संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति, जो आतंकवादियों और उनके संगठनों को प्रतिबंधित करने वाली एक महत्वपूर्ण आतंकवाद-रोधी व्यवस्था है, में गूंजने की उम्मीद थी। कई पाकिस्तानी आतंकवादी समूह और व्यक्ति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं, जिसके अंतर्गत संपत्ति जब्त, यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और जमात-उद-दावा (जेयूडी) के साथ-साथ हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे प्रमुख आतंकवादी शामिल हैं। पहलगाम हमले के बाद, सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 25 अप्रैल को हमले की निंदा करते हुए एक कड़ा बयान जारी किया, लेकिन पाकिस्तान और चीन की आपत्तियों के बाद कथित तौर पर बयान से टीआरएफ और लश्कर-ए-तैयबा का उल्लेख हटा दिया गया। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 लोग मारे गए थे। टीआरएफ ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। US से TRF को कैसे घोषित कराया आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को 26 लोगों की नृशंस हत्या के एक महीने के भीतर भारत ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के खिलाफ तैयार डोजियर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) को सौंप दिया था। इसी का परिणाम है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने TRF को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, भारत को यह जानकारी चार दिन पहले ही दे दी गई थी कि TRF को अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया जा रहा है। यह घोषणा पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि 'आतंकवाद पर जोरो टॉलरेंस' की नीति में भारत और अमेरिका कोई रियायत नहीं देगा। आपको बता दें कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद यह फैसला हुआ है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 27-29 मई के वॉशिंगटन दौरे के दौरान यह डोजियर अमेरिकी विदेश विभाग को सौंपा। इसी प्रकार की जानकारी संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति को भी न्यूयॉर्क में दी गई। लश्कर का मुखौटा है टीआरएफ टीआरएफ की कमान शेख सज्जाद गुल उर्फ सज्जाद अहमद शेख के हाथ में है, जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का 'कश्मीरी चेहरा' बनाकर तैयार किया गया है। TRF ने 2020 से 2024 तक कश्मीर घाटी में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया। इसने पहलगाम नरसंहार के अलावा, मध्य कश्मीर (2023) में ग्रेनेड हमले, 2023 में अनंतनाग के बिजबेहरा इलाके में जम्मू-कश्मीर पुलिस पर घात लगाकर हमला, गगनगीर, जेड-मोड़ सुरंग हमला और 2024 में गंदेरबल हमला किया है। कौन है सज्जाद गुल? सज्जाद गुल वर्तमान में रावलपिंडी में रहता है और जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथीकरण, भर्ती, आतंकवादी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल है। उसका भाई परवेज अहमद शेख 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में एक आतंकवादी था। परवेज अपने परिवार के साथ सऊदी अरब गया और फिर पाकिस्तान चला गया। वह खाड़ी देशों में स्थित भारतीय भगोड़ों के साथ आतंकी फंडिंग और हवाला गतिविधियों में शामिल है। दिल्ली में हुआ था गिरफ्तार सज्जाद गुल को 2022 में यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया गया था। वह श्रीनगर के एचएमटी इलाके का रहने वाला है। उसने अपनी बुनियादी शिक्षा श्रीनगर में पूरी की और फिर बेंगलुरु से एमबीए किया। इसके बाद उसने केरल में लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया और श्रीनगर लौटकर एक डायग्नोस्टिक लैब स्थापित की और साथ ही लश्कर-ए-तैयबा को सहायता प्रदान करना शुरू कर दिया। उसे दिल्ली पुलिस ने निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया और उसके पास से पांच किलोग्राम आरडीएक्स बरामद किया गया। वह दिल्ली में बम विस्फोटों की साजिश रचने और ठिकानों की टोह लेने में शामिल था। गुल और उसके दो साथियों को 7 अगस्त, 2003 को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। अपनी सजा पूरी होने और जेल से रिहा होने के बाद, सज्जाद 2017 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान भाग गया। आईएसआई ने ही 2019 में सज्जाद को लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख बनाने और यह दिखाने के लिए टीआरएफ का प्रमुख चुना था कि आतंकवाद जम्मू-कश्मीर में ही पनप रहा है। आईएसआई ने फरवरी 2019 में पुलवामा बम विस्फोट के बाद इस कदम की रणनीति बनाई थी। इसी समय पाकिस्तान आतंकवादियों और आतंकी समूहों को प्रायोजित करने और पनाह देने के लिए दुनिया की नजरों में आया था। … Read more

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ईडी की नजर: ऑनलाइन सट्टेबाज़ी में गूगल-मेटा को नोटिस

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स के प्रमोशन मामले में गूगल और मेटा को नोटिस जारी किया है. ईडी का आरोप है कि दोनों कंपनियों ने इन ऐप्स के विज्ञापनों को प्रमुखता से दिखाया है. 21 जुलाई को दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है. यह जांच ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के प्रयासों का हिस्सा है. ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स का प्रमोशन अब गूगल और मेटा को भारी पड़ने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि ईडी का आरोप है कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी के ऐड हर किसी को प्रमुखता से दिखाए गए हैं. इसके कारण लोगों तक उनकी पहुंच आसानी से हुई है. यही कारण है कि ईडी ने अब दोनों ही कंपनियों के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए बुलाया है. 21 जुलाई को होगी पूछताछ ईडी ने जो नोटिस जारी किया है. उसके मुताबिक दोनों ही कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पूछताछ की जाएगी. इसमें ऑनलाइन सट्टेबाजी के ऐड इस तरह से दिखाए जाने को लेकर सवाल जवाब होंगे. माना जा रहा है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए करोड़ों रुपये की काली कमाई की गई है. ईडी की कार्रवाई देशभर में जारी ईडी देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने तेलंगाना के कई बड़े फिल्मी सितारों के खिलाफ केस दर्ज किया था. इसमें विजय देवरकोंडा से लेकर राणा दग्गुबाती और प्रकाश राज जैसे नाम शामिल हैं. कुल मिलाकर 29 एक्टर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इसके अलावा देशभर में कई ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ छापेमारी की जा रही है. ईडी द्वारा आने वाले दिनों में उनके बयान दर्ज किए जाने की उम्मीद है, इसके साथ ही ईडी उन शिकायतकर्ताओं की तलाश कर रहा है, जिन्हें इन सट्टेबाजी प्लेटफार्मों द्वारा ठगा गया था. देशभर में ईडी की कार्रवाई जारी है. 15 जुलाई को ईडी ने मुंबई में कई जगहों पर छापेमारी की थी. यह छापेमारी अवैध डब्बा ट्रेडिंग और ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ की गई थी. इस छापेमारी के दौरान टीम ने 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी और कई लग्जरी घड़ियों के साथ ही कई गाड़ियां जब्त की थी.  

उत्तराखंड फिर कांपा! चमोली में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके

चमोली सुबह की शांति को तोड़ते हुए उत्तराखंड के चमोली जिले में आज तड़के सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 3.3 थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप रात 12:02:44 बजे महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र चमोली से 22 किलोमीटर दूर जोशीमठ के पास बताया जा रहा है। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। हाल के दिनों में भूकंप की लगातार सक्रियता यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में प्रकृति ने अपनी ताकत दिखाई हो। हाल ही में, 8 जुलाई को उत्तरकाशी जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह कंपन दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर महसूस हुआ था। चमोली में आए इस नवीनतम भूकंप ने लोगों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है। अफगानिस्तान में फिर कांपी धरती, 4.6 तीव्रता का भूकंप अफगानिस्तान में शनिवार को भूकंप दो जबरदस्त झटके महसूस किए गए। इाके अलावा म्यांमार में भी भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के एक बयान में कहा गया है कि शनिवार को अफगानिस्तान में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। ताजा भूकंप रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का था। देर रात 2.11 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 125 किमी गहराई में था। इससे पहले अफगानिस्तान में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। राम 01.26 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 190 किमी गहराई में था। इससे पहले राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के एक बयान में कहा गया था कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। 17 जुलाई को भी रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। म्यांमार में 3.7 तीव्रता का भूकंप एनसीएस के मुताबिक, शनिवार को म्यांमार में भी 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप 105 किलोमीटर की गहराई में आया। सुबह 03.26 बजे भूकंप के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले शुक्रवार को म्यांमार में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था। 17 जुलाई को भी 80 किमी की गहराई में भूकंप आया था। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव की वजह से म्यांमार एक उच्च भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से संक्षेपित भूकंप मापदंडों के अनुसार, 1990 से 2019 तक म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल 3.0 से अधिक या उसके बराबर तीव्रता वाली लगभग 140 घटनाएं घटी हैं।

उत्तराखंड फिर कांपा! चमोली में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके

चमोली सुबह की शांति को तोड़ते हुए उत्तराखंड के चमोली जिले में आज तड़के सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 3.3 थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप रात 12:02:44 बजे महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र चमोली से 22 किलोमीटर दूर जोशीमठ के पास बताया जा रहा है। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। हाल के दिनों में भूकंप की लगातार सक्रियता यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में प्रकृति ने अपनी ताकत दिखाई हो। हाल ही में, 8 जुलाई को उत्तरकाशी जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह कंपन दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर महसूस हुआ था। चमोली में आए इस नवीनतम भूकंप ने लोगों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है। अफगानिस्तान में फिर कांपी धरती, 4.6 तीव्रता का भूकंप अफगानिस्तान में शनिवार को भूकंप दो जबरदस्त झटके महसूस किए गए। इाके अलावा म्यांमार में भी भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के एक बयान में कहा गया है कि शनिवार को अफगानिस्तान में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। ताजा भूकंप रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का था। देर रात 2.11 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 125 किमी गहराई में था। इससे पहले अफगानिस्तान में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। राम 01.26 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 190 किमी गहराई में था। इससे पहले राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के एक बयान में कहा गया था कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। 17 जुलाई को भी रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। म्यांमार में 3.7 तीव्रता का भूकंप एनसीएस के मुताबिक, शनिवार को म्यांमार में भी 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप 105 किलोमीटर की गहराई में आया। सुबह 03.26 बजे भूकंप के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले शुक्रवार को म्यांमार में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था। 17 जुलाई को भी 80 किमी की गहराई में भूकंप आया था। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव की वजह से म्यांमार एक उच्च भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से संक्षेपित भूकंप मापदंडों के अनुसार, 1990 से 2019 तक म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल 3.0 से अधिक या उसके बराबर तीव्रता वाली लगभग 140 घटनाएं घटी हैं।

नौसेना को मिली नई ताकत: पहला स्वदेशी डीएसवी ‘आईएनएस निस्तार’ शामिल

नई दिल्ली भारतीय नौसेना की ताकत अब और बढ़ गई है। दरअसल आज नौसेना के बेडे़ में देश का पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निस्तार शामिल हो गया है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की मौजूदगी में विशाखापत्तनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस निस्तार को नौसैनिक बेड़े में शामिल किया गया। आईएनएस निस्तार को देश में ही डिजाइन और इसका निर्माण किया गया है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने 8 जुलाई 2025 को ही भारतीय नौसेना को सौंपा दिया था। इस युद्धक जहाज का निर्माण भारतीय शिपिंग रजिस्टर के नियमों के तहत किया गया है। 'हथियार आयातक से निर्यातक बन रहा भारत' केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि 'भारतीय नौसेना का इतिहास गौरवशाली है और आईएनएस निस्तार भारत की ताकत को और बढ़ाएगा।' उन्होंने कहा कि 'भारत आज सैन्य मामले में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है और अब आयातक से निर्यातक बन रहा है। भारत ने 23,622 करोड़ रुपये हथियार निर्यात किए हैं और अब लक्ष्य 50 हजार करोड़ रुपये के हथियार निर्यात करने का है।' इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि 'नए आईएनएस निस्तार से नौसेना की डाइविंग क्षमता और गहरे पानी में भी काम करने की क्षमता बेहतर होगी।' उन्होंने कहा कि 'पुराने जहाज कभी नहीं मरते, वे सिर्फ नए रूप में हमारे पास वापस आते हैं।' रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह अहम कदम है। सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, कुल 120 एमएसएमई कंपनियों ने मिलकर इस युद्धक जहाज को बनाने का काम किया। आईएनएस निस्तार के 80 फीसदी उपकरण स्वदेशी हैं। यह युद्धक जहाज आधुनिक तकनीक से लैस है और इसकी मदद से समुद्र में गहरे तक उतरा जा सकता है। इस डाइविंग सपोर्ट वेसल की मदद से राहत और बचाव कार्य चलाने, मरम्मत के काम आदि में काफी मदद मिलेगी। दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही अभी आईएनएस निस्तार जैसी ताकत है। नौसेना की बढ़ेगी ताकत निस्तार नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है आजादी या बचाव। आईएनएस निस्तार की खासियत की बात करें तो यह 118 मीटर लंबा और 10 हजार टन वजनी जहाज है, जो समुद्र में गहराई तक जाने में मदद करने वाले उपकरणों से लैस है। इसकी मदद से 300 मीटर तक समुद्र की गहराई में जाया जा सकता है। यह जहाज डीएसआरवी के लिए मदर शिप का काम करता है। अगर किसी पनडुब्बी में कोई आपात स्थिति आती है तो मरम्मत कार्य या बचाव कार्य के लिए जवानों को एक हजार मीटर की गहराई तक उतारा जा सकता है। भारतीय नौसेना को पहली बार साल 1969 में सोवियत संघ से पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला था। करीब दो दशकों की सेवा के बाद उसे रिटायर किया गया था। अब आईएनएस निस्तार स्वदेशी और भारत में ही डिजाइन किया गया है।