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‘मुझे जवान-हैंडसम लड़के नहीं, औरतें पसंद’: ट्रंप

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपनी ऊलजलूल टिप्पणियों की वजह से भी चर्चा में रहते हैं। ट्रंप कभी अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के होंठों की तारीफ कर देते हैं तो कभी किसी देश पर सिर्फ इसीलिए मोटा टैरिफ लगा देते हैं क्योंकि वहां की राष्ट्रपति के बात करने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आता। अब हाल ही में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बनाई गई बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग के दौरान ट्रंप का एक बयान चर्चा में है। बोर्ड ऑफ पीस की गुरुवार की हुई इस पहली बैठक का फोकस जहां गाजा के भविष्य पर होना था, वहां डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी अजीब बातों से गंभीर माहौल को पूरी तरह बदल गई। यहां पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना का स्वागत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक कहा, “जवान और हैंडसम होना अच्छी बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम आपको पसंद ही करें। मुझे जवान, हैंडसम मर्द पसंद नहीं हैं। औरतें, मुझे पसंद हैं। मर्दों में, मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है।” ट्रंप के यह कहते ही हॉल में खूब ठहाके लगे। महज 47 साल के हैं पेना बता दें कि 47 साल के पेना, पैराग्वे के डेमोक्रेटिक दौर के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति हैं। वह पेशे से एक अर्थशास्त्री थे और इससे पहले देश के फाइनेंस मिनिस्टर भी रह चुके हैं। उन्होंने कोलोराडो पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर प्रेसिडेंसी जीतने के बाद अगस्त 2023 में यह कार्यभार संभाला था। भारत ने भी लिया बैठक में हिस्सा इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप के गाजा के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की उद्घाटन बैठक में भारत ने भी हिस्सा लिया। भारत ने इसमें एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया। 'डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' में आयोजित बैठक में उपस्थित लोगों की सूची के मुताबिक, भारत का प्रतिनिधित्व वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या खम्पा ने किया। बता दें कि भारत 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल नहीं हुआ है। अब तक कुल 27 देशों ने इस समूह में शामिल होने के लिए हामी भर दी है, जिनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों के नाम शामिल हैं। मीटिंग में ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका इस बोर्ड के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर देगा।

ट्रंप ने भरी बैठक में शहबाज को खड़ा करवाकर किया जलील

वाशिंगटन. वाशिंगटन में आयोजित 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के उद्घाटन सत्र में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जोर-शोर से हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान न केवल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना बेहतरीन दोस्त बताया, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बीच भाषण में खड़ा कर भारत-पाक शांति का पूरा श्रेय खुद ले लिया। ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने के अपने दावे का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने शहबाज शरीफ की ओर देखते हुए उन्हें खड़ा होने के लिए कहा। जैसे ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खड़े हुए, ट्रंप ने अपनी शैली में प्रधानमंत्री मोदी और भारत का गुणगान शुरू कर दिया। ट्रंप ने वहां उपस्थित दुनियाभर के कई नेताओं और मीडिया के सामने कहा, “भारत और पाकिस्तान… वह एक बहुत बड़ा मामला था। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। वह बहुत उत्साहित हैं और वास्तव में वह अभी इस कार्यक्रम को देख रहे हैं।” ट्रंप ने आगे कहा, "भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का बहुत शुक्रिया। मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।" यह नजारा काफी दिलचस्प था क्योंकि जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल के तहत खड़े होकर यह सब सुन रहे थे, वहीं भारत इस बैठक में केवल एक 'पर्यवेक्षक' के रूप में मौजूद था और पीएम मोदी स्वयं वहां उपस्थित नहीं थे। ट्रंप ने इस दौरान फिर से दोहराया कि उन्होंने पिछले साल भारत-पाक युद्ध को केवल एक फोन कॉल से रोक दिया था। उन्होंने कहा, “जब मुझे पता चला कि दोनों देश लड़ रहे हैं और विमान गिराए जा रहे हैं, तो मैंने फोन उठाया और कहा अगर युद्ध नहीं रुका, तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत का व्यापारिक टैरिफ लगा दूंगा।” ट्रंप ने जिस तरह से सार्वजनिक मंच पर शहबाज शरीफ को खड़ा कर पीएम मोदी का जिक्र किया वह पाकिस्तान के लिए काफी असहज स्थिति थी। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को ट्रंप का करीबी सहयोगी दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ट्रंप बार-बार अपनी बातचीत में भारत और मोदी को अधिक महत्व देते नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की दो टूक- ‘आसिम मुनीर नहीं हैं मेरे बॉस’

इस्लामाबाद. पाकिस्तान की सरकार में सेना की दखल की बातें लंबे समय से चली आ रहीं हैं। अब मुल्क के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया है कि पाकिस्तान में सेना और सरकार कैसे काम करती हैं। उन्होंने इसे हाइब्रिड व्यवस्था कहा है। साथ ही कहा है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर उनके बॉस नहीं हैं। फ्रांस 24 इंग्लिश से बातचीत में आसिफ से सवाल किया गया कि डोनाल्ड ट्रंप के फेवरेट फील्ड मार्शल आसिम मुनीर क्या पाकिस्तान के असली शासक हैं। इसपर आसिफ ने जवाब दिया, 'मैं आपसे सहमत हूं, कुछ लोग हैं जो ऐसा कहते हैं। एक व्यवस्था है। देखिए पाकिस्तान का इतिहास सरकार पर सेना के नियंत्रण का रहा है। 50 के दशक की बात हो या 60 के दशक की। एक समय था, जब सेना ने दखल दिया और सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली।' जब पूछा गया कि क्या अब भी ऐसा ही हो रहा है। उन्होंने कहा, 'ऐसा अब नहीं हो रहा है। क्योंकि जिन हालात का अभी हम सामना कर रहे हैं जैसा कि हमने बात की आतंकवाद, अफगानिस्तान से भारत का खतरा और अर्थव्यवस्था जो 3 साल पहले पूरी तरह कमजोर हो गई थी। तो ऐसे में यह राष्ट्रीय संस्थाओं का आपसी सहयोग है।' उन्होंने कहा, 'पाकिस्तानी सेना या सशस्त्र बल सबसे ज्यादा जरूरी राष्ट्रीय संस्थान हैं। वो राजनीतिक सरकार और चुनी हुई सरकार को सहयोग दे रहे हैं। मैं इसे हाइब्रिड अरेंजमेंट कहूंगा। पाकिस्तान में सेना का शासन नहीं है।' आसिम मुनीर पर कर दिया बड़ा दावा इंटरव्यू के दौरान आसिफ से पूछा गया कि क्या फील्ड मार्शल मुनीर उनके बॉस हैं। उन्होंने इससे इनकार कर दिया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा, 'नहीं वह मेरे बॉस नहीं हैं। मेरे बॉस प्रधानमंत्री हैं।' पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ हैं।

आईटी और BPO की नौकरियां 4 साल में हो जाएंगी खत्म: खोसला

नई दिल्ली. मशहूर भारतीय अमेरिकी कारोबारी और इन्वेस्टर विनोद खोसला ने बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका कहना है कि आईटी और बीपीओ सर्विसेज का भविष्य ज्यादा दिन का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग 2030 तक समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय आईटी कंपनियों को सलाह दी है कि यदि वे भविष्य में बने रहना चाहते हैं तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर तेजी से काम करें। भविष्य में यदि वे दुनिया भर को AI सर्विसेज मुहैया करा सकेंगी तो उनके लिए बचे रहना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन हमारा अनुमान है कि 2030 से 2035 तक आईटी और बीपीओ का बिजनेस समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम अपने पुराने बिजनेस पर ही नहीं टिके रह सकते। इसकी बजाय हमें उन्हें नई सेवाएं देनी होंगी। खोसला ने कहा कि दुनिया अभी AI के साथ तालमेल बिठाने में उतनी सक्षम नहीं है, जितना भारत है। अहम बात है कि उनके पास या तो पश्चिम से तकनीक लेने का विकल्प है, जो बहुत महंगा है। या फिर अफ्रीका और साउथ ईस्ट एशिया के देश हैं, जिनके पास जानकारी काफी कम है। खोसला वेंचर्स के संस्थापक ने कहा कि भारतीय कंपनियां पूरी दुनिया में AI सर्विसेज दे सकती हैं। यह हमारे लिए सबसे अच्छा अवसर है। मुख्य बात यही है कि जो इस समय में तेजी से आगे बढ़ेंगे या बदलाव को स्वीकार करेंगे, उनके पास ही अवसर होंगे। विनोद खोसला ने इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में इस सवाल का भी जवाब दिया कि यदि AI की स्पीड बढ़ी तो नौकरियां कम होंगी और उससे बचने का रास्ता क्या है। उन्होंने कहा कि हर देश आने वाले समय में इस मामले में गति पकड़ेगा। आप देखेंगे कि एआई के चलते उत्पादकता बढ़ेगी और कम लोगों की जरूरत होगी। अगले 15 साल इस दुनिया के लिए अहम होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चीजें और मनोरंजन सस्ते हो जाएंगे। यदि देखें तो 2050 तक काफी बदलाव हो जाएंगे। यही नहीं उन्होंने भारत के लोगों की सुविधा को लेकर भी बात की। 'AI से हर भारतीय को मिलेगा पर्सनल डॉक्टर और किसानों को वैज्ञानिक' खोसला ने कहा कि ऐसा भी संभव हो सकता है कि हर भारतीय के पास अपना एक पर्सनल डॉक्टर हो। यह हर वक्त उपलब्ध होगा। इससे नागरिकों के लिए हेल्थकेयर की सुविधा थोड़ी सस्ती हो जाएगी, जो फिलहाल काफी महंगी है। यह सिस्टम आधार से लिंक हो सकता है। इसके अलावा देश में 25 करोड़ बच्चे हैं, जो AI ट्यूटर का ही इस्तेमाल करते हुए पढ़ाई कर सकते हैं। देश में लाखों किसान हैं, जो बेहद छोटी जोत में काम करते हैं। उनके पास ज्यादा समझ नहीं होती। ऐसे लोगों को कृषि वैज्ञानिक जैसी सेवाएं एआई के माध्यम से मिल सकती हैं।

यूपी में ब्रजेश पाठक और राजभर के बीच तेज हुई ब्राह्मण सियासत

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'प्रबुद्ध वर्ग' यानी ब्राह्मणों का झुकाव सत्ता की चाबी माना जाता है। यही कारण है कि मिशन 2027 से पहले सूबे के सभी प्रमुख दल इस वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। हालिया 'शिखा विवाद' के बाद शुरू हुई यह सियासी जंग अब घर-घर पूजन और रैलियों तक पहुंच गई है। ब्रजेश पाठक का 'बटुक पूजन' और डैमेज कंट्रोल सियासत की ताजा लहर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के उस बयान से शुरू हुई, जिसमें उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में ब्राह्मण बटुकों की चोटी (शिखा) खींचे जाने की घटना को 'महापाप' करार दिया। भाजपा की ब्राह्मण राजनीति के प्रमुख चेहरे माने जाने वाले पाठक यहीं नहीं रुके; उन्होंने बीते कल अपने सरकारी आवास पर बटुकों को आमंत्रित कर उनका विधि-विधान से पूजन किया, उनके पैर पखारे और आशीर्वाद लिया। इसे प्रयागराज की घटना के बाद ब्राह्मण समाज में उपजे असंतोष को शांत करने के 'डैमेज कंट्रोल' के तौर पर देखा जा रहा है। ओपी राजभर की आजमगढ़ रैली और 'प्रबुद्ध' कार्ड डिप्टी सीएम के इस कदम के तुरंत बाद सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी बड़ा दांव चल दिया है। रविवार को आजमगढ़ में होने वाली अपनी 'सामाजिक समरसता रैली' को सफल बनाने के लिए राजभर ने खास रणनीति बनाई है। उन्होंने इस रैली में दस हजार प्रबुद्ध ब्राह्मणों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। राजभर का यह कदम संकेत दे रहा है कि वे केवल पिछड़ों के नेता बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि सवर्णों, विशेषकर ब्राह्मणों को जोड़कर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाना चाहते हैं। मायावती को याद आया 2007 का 'सोशल इंजीनियरिंग' बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस रेस में खुद को पीछे नहीं रखा है। उन्होंने हाल ही में ब्राह्मणों से खुलकर बसपा का समर्थन करने की अपील करते हुए वादा किया कि उनके शासनकाल में ब्राह्मणों का पूरा सम्मान सुरक्षित रहेगा। मायावती ने याद दिलाया कि 2007 में बसपा ने 'दलित-ब्राह्मण' गठजोड़ (सोशल इंजीनियरिंग) के जरिए ही पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। वे एक बार फिर सतीश चंद्र मिश्रा के जरिए इसी पुराने फॉर्मूले को जिंदा करने की कोशिश में हैं। अखिलेश का 'हाता' और अपमान का आरोप वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार पर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगा रहे हैं। अखिलेश अक्सर पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे हरिशंकर तिवारी के गोरखपुर आवास (हाता) का जिक्र करते हुए कहते हैं कि मौजूदा सरकार को 'हाता' नहीं भाता है। वे विकास दुबे एनकाउंटर से लेकर विभिन्न घटनाओं का हवाला देकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा राज में ब्राह्मण उपेक्षित और असुरक्षित हैं। अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा: नया सियासी मोड़ इस ब्राह्मण राजनीति में सबसे चौंकाने वाला मोड़ बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने दिया है। ब्राह्मणों के सम्मान और स्वाभिमान के मुद्दे पर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। एक प्रशासनिक अधिकारी का इस मुद्दे पर कुर्सी छोड़ना यह बताने के लिए काफी है कि पर्दे के पीछे ब्राह्मण अस्मिता की आंच कितनी तेज है। कुल मिलाकर, यूपी में 12 से 13 प्रतिशत की आबादी रखने वाला यह समाज एक बार फिर सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय है। अब देखना यह है कि बटुक पूजन, रैलियों के न्योते और सम्मान के वादों के बीच ब्राह्मण समाज किस पर अपना भरोसा जताता है।

RS सीट पर उद्धव सेना और पवार में खींचतान

मुंबई. महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर दावेदारी का दौर शुरू हो गया है। गुरुवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस सीट पर अपना दावा ठोंक कर गठबंधन के भीतर आगामी राजनीतिक सौदेबाजी के संकेत दे दिए हैं। शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने पार्टी के विधायकों की संख्या का हवाला देते हुए कहा कि यह सीट उनके हिस्से में आनी चाहिए। उन्होंने कहा- अगर आप विधायकों की संख्या देखें, तो राज्यसभा की यह सीट हमारे हिस्से में आती है। MVA के भीतर चर्चा निश्चित रूप से इसी दिशा में आगे बढ़ेगी। हालांकि, आदित्य ठाकरे ने यह भी साफ किया कि शिवसेना (UBT), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के बीच अभी तक औपचारिक रूप से सीटों के बंटवारे पर कोई बातचीत नहीं हुई है। शरद पवार की दावेदारी और शिवसेना का रुख MVA के पास विधानसभा में इतना ही संख्याबल है कि वह महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों में से केवल एक सीट ही जीत सकता है। ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि इस सीट पर कौन सा दल अपना उम्मीदवार उतारेगा। गुरुवार को ही शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने जानकारी दी कि NCP (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने आगामी राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। पवार का वर्तमान कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। राउत ने कहा- जब मैंने शरद पवार से बात की, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से राज्यसभा में लौटने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। जब उनके जैसा कोई वरिष्ठ नेता इस तरह का इरादा दिखाता है, तो गठबंधन के भीतर इस पर गंभीरता से चर्चा करने की आवश्यकता होती है। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि शिवसेना (UBT) और कांग्रेस शरद पवार की उम्मीदवारी का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन MVA के भीतर व्यापक सीट-बंटवारे के तहत शिवसेना विधान परिषद की एक सीट की मांग कर सकती है। उद्धव ठाकरे के लिए विधान परिषद की मांग संजय राउत ने यह भी बताया कि उन्होंने उद्धव ठाकरे से विधान परिषद में दोबारा प्रवेश करने का आग्रह किया है। उद्धव ठाकरे का विधान परिषद का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है। राउत ने कहा- यह मेरा व्यक्तिगत विचार है और कई सहयोगी सहमत हैं कि संगठनात्मक और विधायी मामलों के लिए विधायिका में उद्धव ठाकरे की उपस्थिति महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक-दो दिन में फैसला होने की संभावना है। विधानसभा का गणित और चुनाव की स्थिति भारत निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों के लिए मतदान की घोषणा की है। विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर, महाराष्ट्र की सात सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) चार सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं, उसके सहयोगी दल- शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) एक-एक सीट हासिल कर सकते हैं। यदि MVA एकजुट रहता है, तो वह केवल एक सीट जीत सकता है। एक उम्मीदवार को चुने जाने के लिए 37 प्रथम-वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान विधानसभा की स्थिति:     BJP: 131     शिवसेना (शिंदे): 57     NCP (अजित पवार): 40     शिवसेना (UBT): 20     कांग्रेस: 16     NCP (शरद पवार): 10     निर्दलीय और अन्य: 12 इस बीच, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है कि गठबंधन के सहयोगियों को सामूहिक निर्णय पर पहुंचने से पहले अपने राजनीतिक रुख स्पष्ट करने चाहिए।

IAS कपल ने ट्रेनिंग में मुलाकात कर DM चैंबर में की शादी

नई दिल्ली. चकाचौंध, भारी-भरकम खर्च और शाही शादियों के दौर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के दो युवा अधिकारियों ने सादगी की एक नई इबारत लिखी है। 2023 बैच के आईएएस अधिकारी माधव भारद्वाज और अदिति वार्ष्णेय ने बिना किसी शोर-शराबे और पारंपरिक आडंबर के एक-दूसरे का हाथ थामकर समाज को सादगी का संदेश दिया है। 18 फरवरी को राजस्थान के अलवर स्थित मिनी सचिवालय में इन दोनों अधिकारियों ने कोर्ट मैरिज की। इस विवाह की खास बात यह रही कि इसमें न कोई बैंड था, न कोई पुजारी और न ही कोई लंबी-चौड़ी बारात। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी की यह कानूनी प्रक्रिया अलवर की जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला की मौजूदगी में संपन्न हुई। माधव और अदिति ने कलेक्टर के चैंबर में ही एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। इस सादे समारोह में केवल उनके परिवार के कुछ करीबी सदस्य ही मौजूद थे। जैसे ही अधिकारियों और कर्मचारियों को इस शादी की खबर मिली, वे भी इस खास पल के गवाह बनने के लिए वहां एकत्र हो गए। वर्तमान में माधव भारद्वाज अलवर में ही उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) के पद पर तैनात हैं, जबकि अदिति वार्ष्णेय गुजरात के जामनगर में SDM के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ट्रेनिंग से शुरू हुआ सफर दोनों की प्रेम कहानी और साथ चलने का फैसला मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रशिक्षण के दौरान शुरू हुआ। ट्रेनिंग के दौरान दोस्ती हुई और धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि न केवल उनके विचार मिलते हैं, बल्कि जनसेवा को लेकर उनका दृष्टिकोण भी एक जैसा है। इसी आपसी समझ और समान मूल्यों ने उनके बंधन को जीवन भर के रिश्ते में बदल दिया। उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि वे अपनी शादी में फिजूलखर्ची से बचेंगे। अदिति वार्ष्णेय ने पहले ही प्रयास में हासिल की 57वीं रैंक उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली अदिति ने अपनी स्कूली शिक्षा बिशप कॉनराड स्कूल से पूरी की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से बीए ऑनर्स किया। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन बीच में ही छोड़ दी थी। अदिति की सफलता की कहानी बेहद खास है क्योंकि उन्होंने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 57वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने सामान्य अध्ययन के लिए कोई कोचिंग नहीं ली थी। अदिति ने इस उपलब्धि के साथ अपनी मां का वह सपना पूरा किया, जो वह खुद के लिए देखती थीं। माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ बने अधिकारी दूल्हे माधव भारद्वाज का सफर भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं रहा। कंप्यूटर साइंस में बीटेक (MNNIT प्रयागराज) और IIM अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद माधव माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनी में प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे। कोरोना महामारी के दौरान जब वे 'वर्क फ्रॉम होम' कर रहे थे, तब उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में वे मात्र 3 नंबरों से चूक गए, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने 536वीं रैंक हासिल की और देश सेवा के अपने सपने को सच कर दिखाया। अदिति के पिता दिनेश वार्ष्णेय ने बताया कि हालांकि कोर्ट मैरिज सादगी से हुई है, लेकिन जल्द ही बरेली में एक पारंपरिक समारोह का आयोजन भी किया जाएगा ताकि रिश्तेदार और परिचित इस खुशी में शामिल हो सकें।

ट्रंप की बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत की तरफ से शामिल हुईं नामग्या खंपा

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत ने भी हिस्सा लिया। भारत की ऑब्जर्वर के तौर पर इसमें नामग्या शोदेन खांपा ने हिस्सा लिया जो कि वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक हैं। अमेरिका के शांति भवन में 'बोर्ड ऑफ पीस' की यह बैठक आयोजित की गई थी। 'डोनाल्ड जे ट्रंप इंस्टिट्यूट ऑफ पीस' में आयोजित इस बैठक में भारत की निरीक्षक के दौर पर नामग्या खम्पा ने हिस्सा लिया। भारत ने सीधे तौर पर इस बोर्ड में शामिल नहीं हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि इस बैठक में 40 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। कई देशों के राष्टराध्यक्ष भी उद्घाटन बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खुद बैठक में गए थे। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका इस बोर्ड के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर देगा, जिसके सदस्यों में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे 27 देश शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम की आलोचना की संयुक्त राष्ट्र की उच्चस्तरीय बैठक न्यूयॉर्क में गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन जब ट्रंप ने उसी दिन बोर्ड की बैठक की घोषणा कर दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे राजनयिकों की यात्रा प्रभावित हो सकती है, तो सुरक्षा परिषद की बैठक एक दिन पहले आयोजित कर दी गई। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था और ट्रंप की नई पहल के बीच एजेंडे के टकराव और समानांतर प्रयासों की संभावना है। वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करने की इस नई पहल की व्यापक महत्वाकांक्षाओं को लेकर कुछ देशों में चिंता है कि कहीं यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका को चुनौती देने या उसके समकक्ष बनने की कोशिश न करे। संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में शामिल पाकिस्तान एकमात्र ऐसा सदस्य है जिसने 'बोर्ड आफ पीस' की बैठक में शामिल होने का न्यौता स्वीकार किया है। ब्रिटेन, इजराइल, जॉर्डन, मिस्र और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों ने भी सुरक्षा परिषद की इस बैठक में हिस्सा लिया। पिछले सप्ताह कई अरब और इस्लामी देशों ने अनुरोध किया था कि इनमें से कुछ देशों के अधिकारियों के वाशिंगटन रवाना होने से पहले गाजा और वेस्ट बैंक के मुद्दे पर चर्चा की जाए। संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर ने कहा, ''अधिग्रहण संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। यह राष्ट्रपति ट्रंप की योजना का भी उल्लंघन है और जारी शांति प्रयासों के लिए खतरा पैदा करता है।"

नए पीएम तारिक रहमान पर भड़के यूनुस के समर्थक?

ढाका. बांग्लादेश में हुए आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान को कुर्सी संभाले अभी तीन दिन ही बीते हैं कि उनपर मोहम्मद यूनुस के ही समर्थक आरोप लगाने लगे हैं। अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाने वाले यूनुस के समर्थक नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान पर शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग और भारत के साथ मिलीभगत के आरोप लगा दिए हैं। दरअसल प्रधानमंत्री बनते ही तारिक रहमान ने भारत से रिश्ते दुरुस्त करने की कवायद की है। इसके अलावा बांग्लादेश में कई जगहों पर आवामी लीग के दफ्तर फिर से खुले हैं। यह बात मोहम्मद यूनुस के समर्थकों को रास नहीं आ रही है। बता दें कि नाहिद इस्लाम नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोक हैं। उनकी पार्टी ने ही जुलाई 2024 में शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए थे। इसी का फायदा उठाकर बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरा दी गई और फिर अंतरिम सरकार गठित कर दी गई। मोहम्मद यूनुस की अगुआई वाली अंतरिम सरकार में भारत के खिलाफ खूब अजेंडे चलाए गए। इसके अलावा अल्पसंख्यकों पर हमले भी आम हो गए। मोहम्मद यूनुस ने खुलकर पाकिस्तान के साथ करीबी बढ़ाई और भारत की आलोचना भी की। शेख हसीना से करने लगे तारिक रहमान की तुलना अब तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदलने लगे तो यूनुस के समर्थकों में खलबली मची हुई है। नाहिद इस्लाम ने कहा कि इस चुनाव में भारत, आवामी लीग और बीएनपी मिले हुए थे। उन्होंने कहा कि अगर बीएनपी भी आवामी लीग वाली राजनीति फिर से लाने की कोशिश करेगी तो उसका भी विरोध होगा। नाहित इस्लाम ने कहा कि आखिर देश में आवामी लीग के कार्यालय फिर कैसे खुल रहे हैं। इसपर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार को चाहिए कि आवामी लीग के सारे दफ्तर तुंरत बंद करवाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह काम उनकी पार्टी करेगी। उन्होंने शेख हसीना को फासीवादी बताते हुए कहा कि उन्हें अब बांग्लादेश में कभी पैर जमाने का मौका नहीं मिलेगा। भारत के साथ संबंध सुधारना चाहता है बांग्लादेश मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध हद दर्जे तक खराब हो गए थे। हालांकिअब बांग्लादेश के नए खेल मेंत्री ने भी बीसीसीआई से संबंध सुधारने की इच्छा जताई है। वहीं बांग्लादेश की अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट प्रथम आलो के मुताबिक बीएनपी के आने के बाद कई जिलों में आवामी लीग के दफ्तर खोले गए हैं। मोहम्मद यूनुस की सरकार ने आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया था। ऐसे में इस चुनाव में पार्टी चुनाव ही नहीं लड़ पाई।

भक्तों के लिए सुविधा: वैष्णो देवी-शिवखोड़ी हेलीकॉप्टर सेवा से 20 मिनट में यात्रा संभव

कटरा जम्मू कश्मीर का कटरा स्थित माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह श्रद्धालु अब केवल 20 मिनट में वैष्णो देवी से शिवखोड़ी पहुंच सकेंगे। हेलीकॉप्टर द्वारा कम समय में दोनों तीर्थ स्थल की यात्रा संभव होगी। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के मुताबिक अगले 3 महीने में ये प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के बारे में जो जानकारी मिलती है उसके मुताबिक आरसीसी ग्रेफ द्वारा हैलीपेड से गुफा तक यात्रा मार्ग और पुल निर्माण का काम किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य की लागत तकरीबन 6 करोड रुपए बताई जा रही है। वैष्णो देवी से शिवखोड़ी की यात्रा उप राज्यपाल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 3 महीने के भीतर कटरा से शिवखोड़ी तक की हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा एक अंतरराष्ट्रीय म्यूजियम भी विकसित किया जा रहा है। कटरा में हेलीपैड बनाने का काम अंतिम चरण में और शिवखोड़ी में भी ऐसे ही सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। जब दोनों जगह का काम पूरा हो जाएगा तो तीर्थ यात्री आसानी से दोनों मंदिर आना-जाना कर सकेंगे। वाहनों के जरिए जम्मू या फिर कटरा से शिवखोड़ी पहुंचने में ढाई से 3 घंटे का समय लगता है। हेलीकॉप्टर से इन दोनों तीर्थ स्थलों के बीच की दूरी केवल 20 मिनट रह जाती है। कितना होगा किराया श्रद्धालुओं के लिए 13 अक्टूबर 2010 को कटरा से शिवखोड़ी के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई थी। उस समय यात्रियों को आने जाने के लिए प्रति श्रद्धालु 8500 किराया देना पड़ता था। अब किराया 8 से 10 हजार के बीच होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बनेगा श्री शंकराचार्य मंदिर माता वैष्णो देवी साइन क्षेत्र में श्री शंकराचार्य मंदिर के निर्माण की तैयारी भी चल रही है। छेड़ शक्ति लंबे इंतजार के बाद इस प्रतिष्ठित मंदिर के निर्माण का सपना सच होता दिखाई दे रहा है। 1967 में इसकी अवधारणा तैयार की गई थी लेकिन कुछ कर्म से ही पूरा नहीं हो पाया था। मंदिर निर्माण में वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड 31.51 करोड़ रुपए की अनुमानित राशि खर्च करने वाला है। मंदिर निर्माण से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी ज्यादा होगा। जो श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन करने पहुंचेंगे उन्हें शंकराचार्य मंदिर के दर्शन का मौका भी मिलेगा। साल के अंत तक मंदिर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।