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2026 में सरकारी छुट्टियां कब हैं? केंद्र सरकार की पूरी हॉलिडे लिस्ट जारी

नईदिल्ली   केंद्र सरकार ने आगामी साल 2026 के लिए सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालयों की आधिकारिक छुट्टियों की सूची जारी कर दी है. इस सर्कुलर के अनुसार, कर्मचारियों को अनिवार्य छुट्टियों के अलावा प्रतिबंधित (Restricted) छुट्टियों की सूची में से दो अवकाश चुनने की अनुमति है. हालांकि, दिल्ली/नई दिल्ली से बाहर तैनात कर्मचारियों के लिए छुट्टियों का इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ अलग है. ऐसे कर्मचारियों के लिए 14 राष्ट्रीय स्तर की छुट्टियां अनिवार्य की गई हैं, जबकि 12 ऑप्शनल छुट्टी की सूची में से 3 छुट्टियां चुनना अनिवार्य होगा. क्या ईद, मुहर्रम जैसी तारीखें बदल सकती हैं? ये त्योहार चांद देखने पर निर्भर करते हैं, ऐसे में इनकी तारीख बदल सकती है। दिल्ली/नई दिल्ली में छुट्टी की तारीख में बदलाव हो सकता है, और यह बदलाव मंत्रालय की ओर से अलग से नोटिफाई किया जाएगा। दिल्ली के बाहर, छुट्टी की तारीख का फैसला वहां की राज्य सरकारें या केंद्र सरकार की स्थानीय कमेटियां करती हैं। अगर राज्य सरकार ईद की तारीख बदलती है, तो वहां के केंद्रीय दफ्तर भी उसी तारीख को छुट्टी दे सकते हैं। अगर दिवाली रविवार को पड़े तो क्या होगा? 2026 में दिवाली रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है। हालांकि, कुछ राज्य दिवाली एक दिन पहले नरक चतुर्दशी को मनाते हैं। यदि कोई राज्य नरक चतुर्दशी को आधिकारिक दिवाली की छुट्टी घोषित करता है, तो उस राज्य के केंद्रीय दफ्तर भी उसी दिन दिवाली की छुट्टी दे सकते हैं। पूरे भारत में अनिवार्य छुट्टियों की सूची (2026)     गणतंत्र दिवस     स्वतंत्रता दिवस     महात्मा गांधी जयंती     बुद्ध पूर्णिमा     क्रिसमस     दशहरा (विजयदशमी)     दिवाली (दीपावली)     गुड फ्राइडे     गुरु नानक जयंती     ईद-उल-फितर     ईद-उल-जुहा     महावीर जयंती     मोहर्रम     ईद-ए-मिलाद (प्रोफेट मोहम्मद का जन्मदिन) वैकल्पिक छुट्टियां (Optional Holidays) – 2026 दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालयों के लिए DoPT तीन वैकल्पिक छुट्टियां तय करता है, जबकि दिल्ली के बाहर राज्य की राजधानी स्थित CGEWCC तीन छुट्टियां निम्न सूची में से चुनती है-     दशहरा का अतिरिक्त दिन     होली     जन्माष्टमी     राम नवमी     महा शिवरात्रि     गणेश चतुर्थी/ विनायक चतुर्थी     मकर संक्रांति     रथ यात्रा     ओणम     पोंगल     सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी)     विशु, बैसाखी, बिहू, उगादी, चैती चांद, गुड़ी पड़वा, नवरात्र प्रारंभ, नवरोज, छठ पूजा, करवा चौथ आदि   S.No Holiday Date Day 1 Republic Day Jan 26 Monday 2 Holi Mar 4 Wednesday 3 Id-ul-Fitr Mar 29 Sunday 4 Ram Navami Mar 31 Tuesday 5 Mahavir Jayanti Apr 1 Wednesday 6 Good Friday Apr 3 Friday 7 Buddha Purnima May 31 Sunday 8 Id-ul-Zuha (Bakrid) June 26 Friday 9 Muharram June 26 Friday 10 Independence Day Aug 15 Saturday 11 Janmashtami Sep 4 Friday 12 Milad-un-Nabi / Id-e-Milad Sep 24 Thursday 13 Mahatma Gandhi’s Birthday Oct 2 Friday 14 Dussehra Oct 21 Wednesday 15 Diwali Nov 21 Saturday 16 Guru Nanak’s Birthday Nov 29 Sunday 17 Christmas Day Dec 25 Friday प्रतिबंधित छुट्टियां (Restricted Holidays) – 2026 (Delhi/नई दिल्ली) दिल्ली/नई दिल्ली में कर्मचारी इन सूची में से कोई भी दो अवकाश चुन सकते हैं. अन्य राज्यों में स्थानीय त्योहारों को ध्यान में रखते हुए संबंधित राज्य CGEWCC अपनी सूची तैयार करेगा. Holiday Date Day New Year’s Day Jan 1 (Thursday) Makar Sankranti Jan 14 (Wednesday) Basant Panchami Jan 16 (Friday) Guru Ravidas Jayanti Feb 12 (Thursday) Maha Shivratri Feb 26 (Thursday) Holika Dahan Mar 3 (Tuesday) Chaitra Sukladi / Gudi Padwa / Ugadi Mar 19 (Thursday) Easter Sunday Apr 5 (Sunday) Tagore Jayanti May 8 (Friday) Onam / Thiru Onam Aug 26 (Wednesday) Raksha Bandhan Aug 26 (Wednesday) Ganesh Chaturthi Sep 14 (Sunday) Dussehra (Saptami, Ashtami, Navami) Oct 18–20 – Karva Chauth Oct 30 (Thursday) Chhath Puja Nov 19 (Wednesday) Christmas Eve Dec 24 (Thursday) ईद और चांद देखने पर निर्भर त्योहारों में बदलाव संभव सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा, मोहर्रम और ईद-ए-मिलाद जैसी चांद देखने पर आधारित छुट्टियों की अंतिम तिथियां बाद में अधिसूचित की जाएंगी.

गांजा पीने वालों की बढ़ती संख्या से शराब की बिक्री घटी? रिपोर्ट में सामने आए संकेत

 नई दिल्ली 2025 में कई ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जिसमें पता चला है कि लोगों का शराब से मोहभंग हो रहा है. ऐसे ही एक रिपोर्ट हाल ही में कर्नाटक से आई है, जिसमें बताया गया है कि कुछ महीनों से शराब की बिक्री लगातार कम होती जा रही है. इस रिपोर्ट में साल 2024 से तुलना की गई है और बताया गया है कि शराब की बिक्री कम हो गई है. खास बात ये है कि शराब की बिक्री कम होने पर शराब व्यापारियों का कहना है कि गांजे, चरस ज्यादा बिकने से शराब की बिक्री कम हो गई है. ऐसे में जानते हैं कि क्या सही में ऐसा हो सकता है और ऐसा क्यों कहा जा रहा है… क्या लोग कम पी रहे हैं शराब? सितंबर आखिरी में एक रिपोर्ट में बताया था कि केरल में शराब की बिक्री दस सालों में काफी कम हो गई है. वहां के मंत्री एमबी राजेश ने विधानसभा में बताया था कि 2011-12 में शराब बिक्री 241.78 लाख केस (शराब की बोतलें) थीं जो 2024-25 में घटकर 228.6 लाख रह गई. ऐसे ही कर्नाटक से जुड़ी रिपोर्ट आई जिसमें बताया जा रहा है कि कर्नाटक में पिछले 7 महीनों में शराब की बिक्री काफी कम हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 में अप्रैल से अक्टूबर में जो बिक्री 407 लाख थी, वो इस साल 403 लाख है. वहीं पूरे भारत के हिसाब से देखें तो रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आबादी का पांचवा हिस्सा शराब पीता है यानी करीब 22.4 फीसदी लोग शराब पीते हैं. लेकिन, ये डेटा पहले के मुताबिक काफी कम हो गया है. साल 2025-16 में करीब 29.2 प्रतिशत लोग शराब पीया करते थे, जो अब काफी कम हो गया है. ये डेटाकेंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से दिया गया था. कुछ राज्यों में पीने वालों की संख्या औसत से काफी ज्यादा है. जैसे गोवो में 59.1 फीसदी पुरुष, अरुणाचल प्रदेश में 56.6 फीसदी, तेलंगाना में 50 फीसदी, झारखंड में 40.4 फीसदी, ओडिशा में 38.4 फीसदी, सिक्किम में 36.3 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 35.9 फीसदी, तमिलनाडु में 32.8 फीसदी, उत्तराखंड में 32.1 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 31.2 फीसदी, पंजाब में 27.5 फीसदी, असम में 26.5 फीसदी, केरल में 26 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 25.7 फीसदी लोग शराब पीते हैं. 2015-16 में किए गए NFHS-4 के अनुसार, भारत में 15-49 साल की उम्र की महिलाओं और पुरुषों में शराब पीने वालों का प्रतिशत 1.2 प्रतिशत और 29.2 प्रतिशत था. 2019-21 में किए गए NFHS-5 के अनुसार, यह प्रतिशत घटकर महिलाओं के लिए 0.7 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 22.4 प्रतिशत हो गया. क्या कह रहे हैं व्यापारी? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्यापारियों को कहना है कि शराब की बिक्री में कमी इसलिए हो रही है, क्योंकि अब गांजे आदि की बिक्री बढ़ गई है. गांजा, चरस की बिक्री बढ़ जाने से शराब की बिक्री पर असर पड़ा है.  इस बारे में बेंगलुरु अर्बन डिस्ट्रिक्ट लिकर मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश ने बताया, 'कर्नाटक में हर साल ड्यूटी बढ़ा दी जाती है. अगर हर तिमाही में 15-20 बढ़ते हैं, तो कंज्यूमर कम हो जाते हैं. बीयर पर ड्यूटी बढ़ा दी गई है. ऐसे में लोग ड्रग्स की तरफ जा रहे हैं. पहले यहां से आंध्र को शराब एक्सपोर्ट होती थी, हम एक्सपोर्ट करते थे. लेकिन अब यह कम हो रही है. पुलिस काफी मारिजुआना जब्त करती रहती है. इतना सेवन होता है कि रोज काफी पकड़ा जाता है जितना हो सके ड्रग्स जब्त किए जाने चाहिए ताकि हमारा बिजनेस बढ़े.जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ गई हैं, इन सब वजहों से कंज्यूमर शराब नहीं खरीद पा रहे हैं.' क्या गांजे से कम शराब पीते हैं लोग? ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन से पता चलता है कि गांजा के सेवन से शराब की खपत में कमी हो सकती है. अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकियाट्री में प्रकाशित हुए रिजल्ट के हिसाब से कुछ वक्त के लिए शराब की बिक्री पर असर पड़ता है. ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च में ये भी सामने आया है कि गांजा से शराब की इच्छा बढ़ने की जगह कम हो रही है. कई टेस्ट में सामने आया कि गांजा से उस समय शराब की तलब कम हुई और शराब की खपत कम हो गई. इसके बाद जब शराब मिलती है तो भी वो देरी से पीना शुरू करते हैं. गांजा से कैसे शराब की खपत कम होती है, इसे लेकर 21 से 44 साल के लोगों के 157 वयस्क पर शोध किया गया, जो काफी शराब पीते थे और सप्ताह में कम से कम दो बार गांजा का सेवन करते थे. जब मारिजुआना की सिगरेट पी तो कुछ घंटों तक उन्होंने अपनी पसंदीदा शराब नहीं पी. उन्होंने बाद में भी काफी कम शराब पी और नॉर्मल के मुकाबले 27 फीसदी तक कम शराब पी. इसके अलावा शराब बिक्री कम होने के पीछे कई कारण हैं, जिसमें ड्राई स्टेट में बढ़ोतरी, हाइवे पर शराब दुकानें ना होने के नियम, टैक्स में बढ़ोतरी आदि भी शामिल हो सकते हैं. 

स्टिंग से बढ़ी गर्मी: भाजपा बनाम शिंदे सेना, महाराष्ट्र की राजनीति में दोहरे मोर्चे पर कलह

मुंबई  महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के दो घटक दलों यानी भाजपा और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। अब नए विवाद में भाजपा कोटे से राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना विधायक नीलेश राणे द्वारा भाजपा के एक कार्यकर्ता के घर स्टिंग ऑपरेशन करने पर आपत्ति जताई है और पार्टी कार्यकर्ता के घर में घुसने पर सवाल उठाया है। हालांकि, बावनकुले ने बृहस्पतिवार को कहा कि सिंधुदुर्ग में भाजपा के एक कार्यकर्ता के घर से कथित तौर पर मतदाताओं को बांटने के लिए रखी गई नकदी की जब्ती में यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो वह सख्त कानूनी कार्रवाई का समर्थन करते हैं।   भाजपा के वरिष्ठ नेता ने शिवसेना विधायक नीलेश राणे द्वारा कार्यकर्ता के घर में शयनकक्ष समेत अन्य हिस्से में घुसने तथा उनके ‘स्टिंग ऑपरेशन’ करने के तरीके पर भी सवाल उठाया। दूसरी तरफ, मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने भी अपने बड़े भाई नीलेश राणे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के पास अक्सर वैध व्यावसायिक आय होती है और किसी के घर पर नकदी की मौजूदगी को अन्यथा नहीं देखा जाना चाहिए। निकाय चुनाव से पहले पैसे बांटने का विवाद शिवसेना नेता नीलेश राणे ने बुधवार को आरोप लगाया था कि दो दिसंबर को होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से पहले महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के मालवण में भाजपा के एक कार्यकर्ता के घर पर मतदाताओं को बांटने के लिए रखे गए नकदी से भरे बैग मिले हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी से जुड़े नीलेश राणे ने एक “स्टिंग ऑपरेशन” करने का दावा किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य भाजपा प्रमुख रवींद्र चव्हाण ने दो दिन पहले मालवण का दौरा किया था। सहयोगियों के बीच तनाव और बढ़ा भाजपा द्वारा इन आरोपों का खंडन करने के बाद राज्य सरकार में दोनों सहयोगियों के बीच तनाव और बढ़ गया है। शिवसेना विधायक के पिता नारायण राणे और भाई नितेश राणे भाजपा में हैं। इस मामले पर बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बात करते हुए बावनकुले ने कहा, ‘‘यह भी पूछा जाना चाहिए कि क्या किसी के घर में सीधे घुसना, उसके शयनकक्ष में जाना और फिर यह दावा करना उचित है कि यह स्टिंग ऑपरेशन का हिस्सा है।’’ मामले की गहन जांच होनी चाहिए भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि नीलेश राणे ने ऐसा व्यवहार क्यों किया और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी के शयनकक्ष में जाना ‘‘थोड़ा अनुचित’’ है। राणे के इस आरोप का ज़िक्र करते हुए कि मतदाताओं को बांटने के लिए रखे गए पैसों से भरे बैग भाजपा कार्यकर्ता के घर से मिले थे, बावनकुले ने कहा कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह पैसा एक भाजपा कार्यकर्ता के घर से बरामद हुआ था और प्राथमिकता यह पता लगाने की है कि इसका संबंध किसी व्यावसायिक गतिविधि से था, संपत्ति के लेन-देन से या किसी और चीज से।’’ छोटे राणे ने बड़े राणे के आरोप खारिज किए इस बीच, नितेश राणे ने अपने भाई के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं के ‘क्रशर’, होटल या अन्य वाणिज्यिक गतिविधियां व व्यवसाय हैं। उन्होंने कहा, ‘‘किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता बनने से पहले हम में से ज़्यादातर लोगों के पास कोई न कोई व्यवसाय या आय के स्रोत जरूर थे। किसी को भी सिर्फ़ इसलिए भाजपा को बदनाम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि हमारे कार्यकर्ता के घर से कुछ नकदी मिली है। मुझे हमारे कार्यकर्ता के घर से कुछ नकदी मिलने में कोई समस्या नहीं दिखती।’’ चुनाव दो दिसंबर को होने हैं महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के बारे में नीलेश राणे की टिप्पणी पर नितेश राणे ने कहा, ‘‘हमारे प्रदेश पार्टी प्रमुख हर उस जगह का दौरा करेंगे जहां चुनाव हो रहे हैं।’’ भाजपा नेता एवं राज्य के मंत्री आशीष शेलार ने बुधवार को नीलेश के आरोपों को झूठा बताया था। ‘‘स्टिंग ऑपरेशन’’ के बाद चुनाव अधिकारी और पुलिस भाजपा कार्यकर्ता के घर पहुंचे। कार्यकर्ता ने दावा किया कि यह पैसा उसके व्यवसाय के लिए था और इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। महाराष्ट्र में विभिन्न नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए चुनाव दो दिसंबर को होने हैं।  

हथियारों का बाप ‘ड्रैगनफायर’: दुश्मन ड्रोन को चुटकियों में राख कर देगा यह लेज़र सिस्टम

नई दिल्ली  रक्षा विशेषज्ञ अक्सर कहते रहते हैं कि भविष्य का युद्ध ड्रोनों का युद्ध होगा। आने वाली किसी भी जंग में ड्रोन सबसे निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यही वजह है कि दुनिया का हर बड़ा देश ड्रोन तकनीक के साथ-साथ एंटी-ड्रोन तकनीक पर भी दिन-रात काम कर रहा है। इसी कड़ी में ब्रिटेन ने एक क्रांतिकारी हथियार विकसित कर लिया है जो बड़े-बड़े ड्रोन और छोटी मिसाइलों को पल भर में राख कर सकता है। हम बात कर रहे हैं ब्रिटेन के ड्रैगनफायर (DragonFire) लेजर हथियार की। दावा किया जा रहा है कि इसके सामने 650 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने वाला ड्रोन भी अब सुरक्षित नहीं रहेगा।  स्कॉटलैंड में सफल परीक्षण के बाद ब्रिटेन ने अपनी रॉयल नेवी के लिए ड्रैगनफायर लेजर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (LDEW) सिस्टम को तैनात करने का रास्ता साफ कर दिया है। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह सिस्टम हाई-स्पीड ड्रोन और छोटी मिसाइलों को बड़े पैमाने पर नष्ट करने में सक्षम है। यह 650 किमी/घंटा (फॉर्मूला-1 कार की टॉप स्पीड से दोगुनी रफ्तार) तक के लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और एक किलोमीटर दूर से एक पाउंड के सिक्के जितने छोटे लक्ष्य पर भी सटीक निशाना लगा सकता है। ताजा परीक्षणों में ड्रैगनफायर ने ब्रिटेन का पहला हाई-पावर लेजर फायर 'लाइन ऑफ साइट से परे' करते हुए ऊंचाई पर उड़ते हाई-स्पीड ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। जारी वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आकाश में एक पतली नीली किरण चमकती है और कुछ ही सेकंड में लक्ष्य ड्रोन टुकड़ों में बिखरकर धुएं का गोला बन जाता है। ड्रैगनफायर आखिर है क्या? ड्रैगनफायर ब्रिटेन की पहली हाई-पावर लेजर डिफेंस सिस्टम है। यह ड्रोन, मिसाइल और अन्य हवाई खतरों को प्रकाश की अत्यधिक केंद्रित किरण से सेकंडों में जला कर राख कर देती है। यह पूरी तरह ब्रिटिश तकनीक से बना है। एक बार फायर करने की लागत मात्र 10 पाउंड (लगभग 1100 रुपये) है, जबकि पारंपरिक एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल की एक यूनिट की कीमत लाखों पाउंड होती है। इसीलिए इसे 'गेम चेंजर' और 'अत्यंत किफायती' हथियार कहा जा रहा है। इस प्रणाली को पैन-यूरोपीय मिसाइल कंपनी MBDA ने QinetiQ और लियोनार्डो-यूके के साथ मिलकर विकसित किया है। करीब पांच साल के लगातार विकास के बाद अब यह परिपक्व चरण में पहुंच चुकी है। ब्रिटेन ने 2027 से रॉयल नेवी के जहाजों पर इसे तैनात करने के लिए MBDA को 316 मिलियन पाउंड (लगभग 3500 करोड़ रुपये) का ठेका दिया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह हाई-पावर लेजर हमारी रॉयल नेवी को नाटो में अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर देगा। यह अत्याधुनिक क्षमता ब्रिटेन और हमारे सहयोगियों की रक्षा को नई ऊंचाई देगी।

श्रद्धालुओं की संख्या थमी, वैष्णो देवी यात्रा सुनी—दिल्ली विस्फोट के बाद हालात बिगड़े

कटड़ा बीते माह दिल्ली में हुए धमाके का असर अभी भी मां वैष्णो देवी की यात्रा (Mata Vaishno Devi Yatra) पर लगातार बना हुआ है, क्योंकि मां वैष्णो देवी की यात्रा (Maa Vaishno Devi Yatra) में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि, बीते दिनों मां वैष्णो देवी का यात्रा रोजाना का आंकड़ा 11000 से 15000 के मध्य बना हुआ था परंतु वर्तमान में यह आंकड़ा गिरकर 9000 से 11000 के मध्य पहुंच गया है। जिसके कारण आधार शिविर कटड़ा में लगातार श्रद्धालुओं की कमी देखने को मिल रही है। हालांकि, जो भी श्रद्धालु वर्तमान में मां वैष्णो देवी की यात्रा कर रहे हैं श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। एक ओर जहां श्रद्धालुओं को मां वैष्णो देवी (Mata Vaishno Devi) के दिव्य दर्शन आसानी के साथ हो रहे हैं तो दूसरी ओर यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा के साथ ही बैटरी कार सेवा, रोपवे केवल कार सेवा के साथ घोड़ा, पिट्ठू तथा पालकी आदि की सेवाएं भी लगातार उपलब्ध हो रही हैं और श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी मां वैष्णो देवी की यात्रा लगातार जारी रखे हुए हैं। मां वैष्णो की यात्रा (Maa Vaishno Devi) में लगातार गिरावट के कारण कटड़ा के बाजार पूरी तरह से वर्तमान में वीरान नजर आ रहे हैं और व्यापारी वर्ग लगातार श्रद्धालुओं का इंतजार कर रहा है। वहीं, जानकारों का मानना है कि आगामी दिसंबर माह के दूसरे पखवाड़े में नव वर्ष के आगमन को लेकर मां वैष्णो देवी की यात्रा में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसका नगर का व्यापारी वर्ग फिलहाल बेसब्री से इंतजार कर रहा है। बीते 26 नवंबर को करीब 9700 श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के चरणों में हाजिरी लगाई थी, तो वहीं 27 नवंबर यानि कि वीरवार देर शाम 6:00 बजे तक करीब 7000 श्रद्धालु पंजीकरण करवा कर भवन की ओर रवाना हो चुके थे और श्रद्धालुओं का लगातार आना जारी है।  

भारत-नेपाल संबंधों में तनाव: नेपाल ने नए नोट पर विवादित नक्शा छापा, बढ़ी कूटनीतिक गर्मी

नेपाल  नेपाल के केंद्रीय बैंक ने बृहस्पतिवार को 100 रुपए के नए नोट जारी किए, जिन पर देश का संशोधित मानचित्र छपा है, जिसमें विवादास्पद कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र भी शामिल हैं। भारत ने इस कदम को ‘‘कृत्रिम विस्तार'' करार दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के नए नोट पर पूर्व गवर्नर महाप्रसाद अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। बैंक नोट पर जारी करने की तिथि 2081 बीएस अंकित है, जो गत वर्ष 2024 को दर्शाती है। तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान, नेपाल ने मई 2020 में संसद के अनुमोदन के माध्यम से कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्रों को शामिल करते हुए मानचित्र को अद्यतन किया था। मानचित्र के अद्यतन संस्करण के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए, NRB के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह मानचित्र पुराने 100 रुपये के बैंक नोट में पहले से ही मौजूद है और सरकार के निर्णय के अनुसार इसे संशोधित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 रुपये, 50 रुपये, 500 रुपये और 1,000 रुपये जैसे विभिन्न नोटों में से केवल 100 रुपये के बैंक नोट पर ही नेपाल का मानचित्र अंकित है। भारत का कहना है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके क्षेत्र हैं। नेपाल पांच भारतीय राज्यों – सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ 1850 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करता है। भाषा शफीक पवनेश भारत की कड़ी प्रतिक्रिया  MEA (विदेश मंत्रालय) ने कहा है कि नेपाल द्वारा 100 रुपये के नोट पर विवादित क्षेत्रों  Kalapani, Lipulekh और Limpiyadhura  को अपना बताने वाला नया नक्शा छापना “एकतरफा” (unilateral) कदम है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि ऐसा नक्शा मात्र नोट पर होने से “पृथ्वी पर वास्तविक स्थिति (ground reality)” नहीं बदल जाएगी। भारत ने इसे “कृत्रिम विस्तार (artificial enlargement)” और “असमर्थनीय (untenable)” ज़मीन दावे कहा है।  भारत ने नेपाल को चेतावनी दी है कि सीमा विवाद को लेकर कोई भी कदम  विशेष रूप से नक्शों या मुद्रा में  बिना आपसी समझौते के नहीं होगा।  सीमावर्ती राज्यों विशेषकर Uttarakhand के व्यापारियों का भी कहना है कि वे विवादित नक्शे वाले नोट स्वीकार नहीं करेंगे। भारत की स्थिति स्पष्ट है  कि नेपाल द्वारा नोट में विवादित क्षेत्र दिखाना स्वीकार्य नहीं। यह कदम किसी भी तरह से सीमा विवाद या नियंत्रण‑दावे को बदलने वाला नहीं। भारत अपनी सीमाओं और संप्रभुता के प्रति पूरी तरह सतर्क है और नेपाल से “संवाद और कूटनीति” के जरिए विवाद हल करने की मांग करता है।  

साइक्लोन डिटवाह की दस्तक! तटीय राज्यों में तेज़ हवाओं-बारिश का अलर्ट जारी

कोलकाता  बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोन ‘डिटवाह’ (Cyclone Ditwah) के 30 नवंबर तक तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों तक पहुँचने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव वाला क्षेत्र तेज होकर साइक्लोनिक तूफान (Weather Update) में बदल गया है। IMD ने बताया कि यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और तटीय इलाकों को प्रभावित करेगा। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, साइक्लोन सेन्यार निकोबार द्वीप समूह के सबसे उत्तरी द्वीप से 850 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है और शाम तक यह कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व श्रीलंका के पास तथा इक्वेटोरियल हिंद महासागर में एक और वेदर सिस्टम सक्रिय है।   IMD के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, साइक्लोन डिटवाह पोट्टुविल के पास है, जो चेन्नई से लगभग 700 किलोमीटर दूर है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यह सिस्टम 30 नवंबर की शुरुआत तक उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों तक पहुंच जाएगा। दिल्ली, यूपी और बिहार पर इस तूफान का कोई असर नहीं बताया गया है, लेकिन इन इलाकों में बारिश होने की संभावना है, जिससे सर्दी बढ़ सकती है। साइक्लोन का नाम ‘डिटवाह’ यमन द्वारा दिया गया है। IMD ने चेन्नई, नागपट्टिनम, तिरुवल्लूर और तंजावुर समेत तमिलनाडु के कई जिलों में 27, 28 और 29 नवंबर के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। साइक्लोन सेन्यार की ताजा जानकारी के अनुसार, यह भारतीय क्षेत्र से दूर मलेशिया की ओर बढ़ रहा है और सुमात्रा के पास है। मौसम विशेषज्ञों ने इसे ‘रेयर’ बताया क्योंकि यह मलक्का स्ट्रेट में पहली बार इतना शक्तिशाली साइक्लोनिक सिस्टम रिकॉर्ड किया गया है।

मोदी–पुतिन मुलाकात: यूक्रेन जंग, ऊर्जा सहयोग और रक्षा साझेदारी पर होगी अहम बातचीत

नई दिल्ली भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल की खरीद सीमित करने के साफ संकेत के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा के दौरान कच्चे तेल (क्रूड) व्यापार प्रमुख मुद्दा बनेगा। दिसंबर के पहले हफ्ते में पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ सालाना सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति की तरफ से भारत को रूसी क्रूड की खरीद बढ़ाने के लिए हर संभव छूट देने की पेशकश होने के आसार हैं। रूसी तेल व्यापार है भारत यात्रा का मुख्य मुद्दा यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों से जूझ रही रूसी अर्थव्यवस्था के लिए भारत एक जीवन रेखा साबित हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में भारत द्वारा रूसी तेल आयात में कमी ने मास्को को चिंतित कर दिया है। कूटनीतिक व उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि रूसी पक्षकारों ने पहले ही भारत को यह संकेत दिया है कि जिस तरह की छूट भारतीय तेल कंपनियों को पहले मिला करती थी, आगे वैसी ही छूट जारी रह सकती है। भारतीय तेल उद्योग के सूत्रों ने बताया कि हाल के दिनों में रूसी तेल आपूर्तिकर्ता कंपनियों के साथ विमर्श में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि वो किसी भी कीमत पर भारत जैसे बड़े ऊर्जा खरीददार देश को छोड़ना नहीं चाहते। रूस की योजना अगले दो दशक तक अपने सारे प्रमुख तेल उत्पादक फील्डों से तेल उत्पादन बढ़ाने की है। भारत को तेल छूट जारी रखने की पेशकश इस बढ़ते हुए उत्पादन की खपत तभी होगा जब भारत जैसे तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था उसे खरीदे। पिछले दो वर्षों (2023-2025) में रूस की कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी नाटकीय रूप से बढ़ी है। 2021 में रूसी क्रूड भारत के कुल आयात का मात्र तीन फीसद था, जो 2024 तक 37 फीसद तक पहुंच गया। 2024-25 वित्तीय वर्ष में रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड आपूर्तिकर्ता बन गया, जिसकी हिस्सेदारी 35 फीसद रही। अक्टूबर 2025 में भारत ने रूस के कुल तेल निर्यात का 38 फीसद हिस्सा लिया है जो चीन (47 फीसद) के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इस वृद्धि का श्रेय डिस्काउंटेड रूसी तेल को जाता है, जिसने भारत की रिफाइनरियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी को आकर्षित किया। कुल मिलाकर, 2024 में रूस से भारत को 67.15 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें क्रूड का योगदान प्रमुख था।अब स्थिति बदलने के संकेत हैं। भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट रूप से रूसी क्रूड आयात बंद करने की घोषणा की है, जबकि कुल आयात दिसंबर में तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकता है। भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड खरीदार है और इसकी हिस्सेदारी खोने से रूसी तेल उद्योग पर भारी दबाव के संकेत मिलने लगे हैं। यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी-यूरोपीय प्रतिबंधों ने रूसी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। 2025 में रूस का जीडीपी विकास दर एक फीसद से नीचे रहने का अनुमान है। महंगााई की दर आठ फीसद से ज्यादा है। यही वजह है कि रूस हर हाल में भारत से क्रूड कारोबार को जारी रखना चाहता है। रूस की तेल उद्योग की तरफ से दिया जाने वाले टैक्स वहां के कुल राजस्व का 40 फीसद होता है। भारत जैसे विशाल खरीददार का विकल्प अभी रूस को मिलना मुश्किल है। एक तो यह प्रतिबंध की वजह से मुश्किल है और दूसरा, चीन के अलावा और किसी भी देश में इतनी ज्यादा तेल खरीदने की क्षमता नहीं है। पुतिन का चार साल बाद भारत आगमन हो रहा है। इसके पहले वह यूक्रेन-रूस युद्ध की शुरुआत (फरवरी, 2022) से ठीक पहले दिसंबर, 2021 में भारत आए थे। रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा संभव माना जाता है कि उस दौरे ने फरवरी, 2022 के बाद भारत की तरफ से रूस से ज्यादा कच्चे तेल की खरीद की जमीन तैयार की थी। अब जबकि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्ति की ठोस पहल अमेरिका और यूरोपीय देशों की तरफ से की जा रही हैं तब पुतिन फिर से नई दिल्ली में होंगे। अधिकारियों का कहना है कि आगामी भारत-रूस सालाना सम्मेलन में रक्षा व ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग सबसे मुद्दा होने जा रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा भी है कि इस यात्रा का फोकस आर्थिक साझेदारी पर होगा।  

प्रकृति का कहर: श्रीलंका में मूसलाधार बारिश ने ली 31 जानें, अगले 12 घंटे बेहद खतरनाक

कोलम्बो  श्रीलंका में बीते 11 दिन में मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण 31 लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 4,000 लोग प्रभावित हुए हैं। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि अकेले मध्य पर्वतीय जिलों में 18 लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है। डेली मिरर ऑनलाइन की खबर के अनुसार एक भयावह घटना में, कुंबुक्कना में बढ़ते जलस्तर के बीच एक यात्री बस फंस गई, जिसके बाद आपात दलों ने 23 यात्रियों को सफलतापूर्वक बचा लिया।   अडाडेराना समाचार पोर्टल ने बताया कि करीब 10 लोग घायल हुए हैं जबकि 14 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने 25 में से 17 प्रशासनिक जिलों में बिगड़ती स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। मौसम ब्यूरो के अनुसार देश के दक्षिण पूर्व में एक निम्न दाब क्षेत्र बना, जो बाद में एक अवदाब क्षेत्र में बदल गया। ब्यूरो के अनुसार फिलहाल वह बट्टीकलोआ से 210 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है। ब्यूरो ने कहा, “अगले 12 घंटे में इसके उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने और जोर पकड़कर गहन दबाव क्षेत्र में बदलने का प्रबल अनुमान है।” ब्यूरो ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने का पूर्वानुमान है।  

शिक्षा को बढ़ावा: केंद्र सरकार देगी SC छात्रों को 2 लाख तक की वार्षिक सहायता

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी घोषणा की है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के लिए SC छात्रों के लिए टॉप क्लास स्कॉलरशिप योजना के नए और अपडेटेड दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन नए नियमों के अनुसार छात्रों को अब पहले से अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं। योजना का उद्देश्य और मुख्य लाभ इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी योग्य छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। इसके तहत देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे SC छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस सरकार द्वारा वहन की जाएगी। इसके अलावा, छात्रों को शैक्षणिक भत्ता भी दिया जाएगा ताकि वे अपनी पढ़ाई से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकें। संशोधित वित्तीय सहायता व्यवस्था वर्ष 2024-25 से सरकार छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस और गैर-वापसी योग्य शुल्क सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजेगी। निजी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह सहायता प्रति वर्ष अधिकतम 2 लाख रुपये तक सीमित होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छात्रों को समय पर और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता मिल सके और किसी भी तरह की देरी या धोखाधड़ी से बचा जा सके। छात्रों के भविष्य के लिए बड़ी पहल सरकार का मानना है कि इस योजना से SC वर्ग के छात्रों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई करने का बेहतर अवसर मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी को भी मजबूत करेगा। कुल मिलाकर, यह योजना लाखों SC छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।