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सीएम कुर्सी पर ‘किस्मत’ का खेल! डीके शिवकुमार बोले – भाग्य में होगा तो बनूंगा मुख्यमंत्री

बेंगलुरु  कांग्रेस के पूर्व सांसद डीके सुरेश का कहना है कि यदि उनके बड़े भाई डीके शिवकुमार के भाग्य में होगा, तभी वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम शिवकुमार की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर डीके शिवकुमार ने यह बात कही। कर्नाटक की राजनीति में फिलहाल नवंबर क्रांति की चर्चाएं जोरों पर हैं और कहा जा रहा है कि इस महीने मुख्यमंत्री बदल सकता है। सिद्धारमैया के बेटे ने भी पिछले दिनों कहा था कि उनके पिता का राजनीतिक करियर अब आखिरी पड़ाव है। उन्होंने इसके साथ ही सतीश जरकिहोली को सीएम बनाए जाने की सिफारिश भी कर दी थी। इससे कयास और तेज हैं कि नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। वहीं इस बारे में जब डीके सुरेश से पूछा गया तो वह भाग्यवादी हो गए। उन्होंने कहा कि यदि शिवकुमार के भाग्य में होगा तो वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि हाईकमान का जो फैसला होगा, वही स्वीकार होगा। नवंबर में लीडरशिप चेंज होने के सवाल पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमारे लिए तो नवंबर का महीना कन्नड़ राज्योत्सव का है। इस महीने सभी कन्नाडिगा राज्य उत्सव मनाते हैं। मुझे इसके अलावा दूसरी किसी चीज की जानकारी नहीं है। आपको ऐसा कुछ जानना है तो फिर सीएम, प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय नेताओं से पूछना चाहिए। चर्चा है बिहार इलेक्शन के बाद कर्नाटक में बदलाव पर विचार हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि भाग्य होगा तो बदलाव होगा। यदि भाग्य में उपलब्धि नहीं होगी तो पद नहीं मिलेगा। इसके बारे में चिंता करने की जरूरत ही क्या है। मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं अपने भाई को सीएम के तौर पर देखना चाहता हूं। लेकिन भाग्य पर ही छोड़ना होगा और देखते हैं कि भविष्य में क्या होगा। उन्होंने कहा कि शिवकुमार फिलहाल डिप्टी सीएम हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनका यह काम है कि पार्टी को कोई नुकसान ना हो। इसलिए मैं समझता हूं कि वह ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो। नवंबर क्रांति क्या है, जिस पर कर्नाटक में जोरों पर है चर्चा कर्नाटक के राजनीतिक हलकों में इस साल के अंत में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इसके तहत मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित सत्ता हस्तांतरण के समझौते का हवाला दिया जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या शिवकुमार तथाकथित 'नवंबर क्रांति' से बेपरवाह हैं। सुरेश ने कहा, ‘वह पार्टी अध्यक्ष हैं और सभी के साथ समान व्यवहार करना उनका कर्तव्य है। उन्हें पार्टी के हितों और सम्मान की रक्षा करते हुए अपना आचरण करना चाहिए और वह ऐसा कर रहे हैं। वह पार्टी के फैसलों का पालन करेंगे।’ ढाई साल में सीएम बदलने के कयासों पर क्या कहा वहीं ढाई साल में लीडरशिप चेंज होने वाले दावों पर उन्होंने कहा कि यह ढाई साल की बात नहीं है। कांग्रेस को लोगों ने पांच साल का जनादेश दिया है। हमें लोगों के हितों की रक्षा करनी चाहिए और किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। सरकार और पार्टी इसी दिशा में काम कर रही हैं। अटकलों के बीच सिद्धारमैया ने सोमवार को कहा कि वह कांग्रेस आलाकमान के फैसले के अधीन पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए पद पर बने रहेंगे। 2023 में खबरें थीं कि सीएम पद पर हुआ रोटेशन का फैसला मई 2023 में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच शीर्ष पद के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। अंतत: कांग्रेस आलाकमान ने शिवकुमार को उप-मुख्यमंत्री का पद संभालने के लिए मना लिया था। उस समय खबरों में दावा किया गया था कि रोटेशनल मुख्यमंत्री की व्यवस्था पर सहमति बन गई है, जिसके तहत शिवकुमार ढाई साल बाद पदभार संभालेंगे। हालांकि पार्टी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की।  

8000 KM बॉर्डर पर जंग का खतरा! पाकिस्तान क्यों घबराया भारत से?

नई दिल्ली भारत को हमेशा दो मोर्चों के युद्ध में उलझाने की कोशिश पाकिस्तान करता रहा है। इसी नीति के तहत उसने पीओके का एक हिस्सा चीन को दिया था। पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत तो ढाई मोर्चे के युद्ध की बात अकसर करते थे- पहला चीन, दूसरा पाकिस्तान और तीसरा आंतरिक संघर्ष। लेकिन अब इससे भी बड़ी चुनौती पाकिस्तान के आगे खड़ी होती दिखती है और यह एक या दो नहीं बल्कि 4 मोर्चों पर है। जी हां, पाकिस्तान के सामने 4 मोर्चों पर जंग का संकट बना हुआ है। ये 4 मोर्चे कुल 8000 किलोमीटर लंबी सीमा पर हैं और पाकिस्तान की इनसे निपटने की तैयारी भी पर्याप्त नहीं दिखती है। पाकिस्तान के सामने यह संकट अफगानिस्तान से तनाव के चलते बढ़ा है। पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने तो इस डर को खुलेआम जाहिर भी किया, जब कहा कि अफगानिस्तान से जंग के दौरान भारत की ओर से हमला हो सकता है। दरअसल पाकिस्तान ने लंबे समय तक अफगानिस्तान में तालिबान को साधने की कोशिश की और भारत के लिए चिंताएं भी बढ़ाईं। लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में तनाव और पाकिस्तान तालिबान के साथ तालिबान के रिश्तों ने हालात जटिल बना दिए हैं। अब अफगानिस्तान और पाकिस्तान खुद डूरंड लाइन पर लड़ रहे हैं। फिलहाल अफगानिस्तान के मामले में भारत का अपरहैंड है। कैसे इतनी लंबी सीमा बन सकती है पाकिस्तान के लिए सिरदर्द दरअसल भारत के साथ पाकिस्तान सबसे लंबी 3,323 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। इसके अलावा अफगानिस्तान से उसका 2,430 किलोमीटर का बॉर्डर है। पाकिस्तान की चिंता यह है कि भारत के साथ लगती एलओसी और इंटरनेशनल बॉर्डर पर तो उसने हमेशा बड़े पैमाने पर सेना को तैनात रखा है, पश्चिमी मोर्चे यानी अफगानिस्तान की ओर से उसने कभी इस लिहाज से फोकस नहीं किया। अब जैसी स्थिति है, उसमें अफगानिस्तान भी उसके लिए एक चिंता है। भू-राजनीतिक विश्लेषक सुमित अहलावत मानते हैं कि यदि अफगानिस्तान और भारत के साथ जंग की स्थिति बनी तो पाकिस्तान 5,753 किलोमीटर लंबी सीमा पर व्यस्त होगा। ईरान से लगती सीमा पर ऐक्टिव हो सकते हैं बलूच विद्रोही इसके अलावा ईरान के साथ लगती 959 किलोमीटर लंबी सीमा भी उसे सुरक्षित करनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस सीमा से बलूचिस्तान प्रांत लगता है, जहां पहले से ही विद्रोह के हालात हैं। फिर 1,046 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा भी कम चुनौती पूर्ण नहीं है। इस तरह करीब 8000 किलोमीटर की पाकिस्तान सीमा एक जंगी माहौल में तब्दील हो सकती है। उसके लिए राहत की बात 438 किलोमीटर की पीओके वाली वह सीमा ही है, जो चीन से लगती है। पाकिस्तान के जैसे आर्थिक हालात हैं, उस स्थिति में इस तरह की जंग लंबे समय तक लड़ पाना उसके बूते की बात भी नहीं है। यही कारण है कि अफगानिस्तान जैसे अपेक्षाकृत कमजोर और छोटी सेना वाले देश से भी पाकिस्तान किसी भी हाल में सिर्फ शांति ही चाहता है।  

सलमान खान को ‘आतंकवादी’ बताने से हिली शहबाज सरकार, सफाई देने में जुटी

इस्लामाबाद  बॉलीवुड एक्टर सलमान खान को लेकर कुछ दिन पहले रिपोर्ट्स आईं कि पाकिस्तान ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया। इससे सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सलमान के फैंस की नाराजगी पाकिस्तान को झेलनी पड़ी। अब यूटर्न लेते हुए पाकिस्तान ने उन रिपोर्ट्स को ही खारिज कर दिया है और सफाई दी है कि ऐसा कुछ भी नहीं घोषित किया गया। यह सब फर्जी खबरें हैं। पाकिस्तान की इन्फोर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री ने मामले में सफाई पेश की है। पाकिस्तान के मंत्रालय की ऑफिशियल फैक्ट-चेकिंग टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन खबरों पर बात की जिनमें कहा गया था कि सलमान टेरर वॉच लिस्ट में हैं। पोस्ट में एक हेडलाइन का स्क्रीनशॉट था जिसमें लिखा था- ‘बलूचिस्तान पर टिप्पणी के बाद पाकिस्तान ने सलमान खान को टेरर वॉचलिस्ट में डाला। स्क्रीनशॉट पर फेक न्यूज/ अनवेरिफाइड लिखा एक स्टैम्प लगा हुआ था। पोस्ट में न्यूज रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावे को हाईलाइट किया गया- बलूचिस्तान के बारे में कमेंट करने के बाद सलमान खान को कथित तौर पर पाकिस्तान के एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया गया है, और उन्हें टेरर फैसिलिटेटर कहा गया है। इसके बाद पोस्ट में आगे लिखा, “NACTA के प्रोसिक्यूटेड पर्सन्स पेज या किसी मिनिस्ट्री ऑफ इंटीरियर / प्रोविंशियल होम डिपार्टमेंट के गजट पर सलमान खान को फोर्थ शेड्यूल में शामिल करने की जानकारी देने वाला कोई पाकिस्तानी सरकार का ऑफिशियल बयान, नोटिफिकेशन या एंट्री नहीं मिली।” आखिर में, पाक MoIB ने कहा, “वेरिफाई किए जा सकने वाले प्राइमरी सबूतों की कमी में यह दावा अनवेरिफाइड और झूठा है। देखने से, यह एक पक्के फैक्ट के बजाय एक सनसनीखेज हेडलाइन लगती है।” यानी कि पाकिस्तान सरकार ने बता दिया है कि उसने सलमान खान को आतंकवादी नहीं घोषित किया है। सलमान के किस बयान से पाक को लगी थी मिर्ची दरअसल, इस महीने की शुरुआत में, सलमान खान सऊदी अरब के रियाद में जॉय फोरम 2025 में शामिल हुए थे। यहां पर उन्होंने बलूचिस्तान को एक तरह से अलग देश बताया था। इससे पाकिस्तानी भड़क गए थे। इस कार्यक्रम में सलमान ने शाहरुख खान और आमिर खान के साथ स्टेज पर परफॉर्म किया था। स्टेज पर, एक्टर ने मिडिल ईस्ट में इंडियन फिल्मों की अपील पर बात की और कहा था, “अभी, अगर आप एक हिंदी फिल्म बनाते हैं और उसे यहां (सऊदी अरब में) रिलीज करते हैं, तो वह सुपरहिट होगी। अगर आप एक तमिल, तेलुगु, या मलयाली फिल्म बनाते हैं, तो वह सैकड़ों करोड़ का बिजनेस करेगी क्योंकि दूसरे देशों से बहुत सारे लोग यहां आए हैं। बलूचिस्तान के लोग हैं, अफगानिस्तान के लोग हैं, पाकिस्तान के लोग हैं… हर कोई यहां काम कर रहा है।”

वुमन जिहादी ब्रिगेड पर मसूद अजहर का भड़काऊ बयान, हिंदू महिलाओं को सेना में डालना बताया योजना

बहावलपुर  पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने अपनी जंग में नया मोड़ ला दिया है. अब महिलाओं को भी जिहाद के लिए तैयार किया जा रहा है. संगठन के सरगना मौलाना मसूद अजहर का 21 मिनट का एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आया है. यह बहावलपुर के मर्कज उस्मान ओ अली में हाल ही में दिया गया भाषण है. इसमें अजहर ने महिलाओं के नए विंग 'जमात-उल-मोमिनात' की पूरी योजना बताई है. यह महिलाओं को ट्रेनिंग, ब्रेनवॉश और जंग में इस्तेमाल करने का ब्लूप्रिंट है. महिलाओं की ट्रेनिंग: पुरुषों जैसी ही अजहर ने कहा कि पुरुष भर्तियों को 15 दिनों का 'दौरा-ए-तरबियत' कोर्स मिलता है. इसमें उन्हें भारत के खिलाफ जिहाद का ब्रेनवॉश किया जाता है. अब महिलाओं के लिए 'दौरा-ए-तस्किया' कोर्स शुरू होगा. यह भी बहावलपुर के मर्कज में चलेगा. अजहर ने वादा किया कि जो महिला इस जमात में शामिल होगी, वह मौत के बाद सीधे जन्नत पहुंचेगी. पहला कोर्स पूरा करने के बाद दूसरा स्टेज 'दौरा-आयत-उल-निसाह' होगा. इसमें महिलाओं को इस्लामी किताबों से सिखाया जाएगा कि महिलाएं जिहाद कैसे करें. अजहर ने कहा, पिछले 20 सालों से पुरुषों को जन्नत का लालच दिया जाता रहा. अब महिलाओं को भी वही सिखाया जाएगा. क्यों बनाई महिलाओं की ब्रिगेड? अजहर ने तर्क दिया कि जैश के दुश्मनों ने हिंदू महिलाओं को सेना में डाला है. महिला पत्रकारों को हमारे खिलाफ खड़ा किया है. इसलिए मैं भी अपनी महिलाओं को तैयार कर रहा हूं. वे इनके खिलाफ लड़ेंगी. उन्होंने कहा, जेईएम के पुरुष मुजाहिदीन इन महिलाओं के साथ खड़े होंगे. यह ब्रिगेड दुनिया भर में इस्लाम फैलाएगी. भर्ती और नियम: हर जिले में ब्रांच अजहर ने ऐलान किया कि पाकिस्तान के हर जिले में जमात-उल-मोमिनात की ब्रांच बनेगी. हर ब्रांच का 'डिस्ट्रिक्ट मुंतेज़िमा' होगी. वह महिलाओं को भर्ती करेगी. सख्त नियम: ब्रिगेड में शामिल महिलाएं किसी भी अनजान मर्द से फोन या मैसेंजर पर बात नहीं करेंगी. सिर्फ पति या करीबी परिवार से ही. लीडरशिप: अजहर के परिवार की महिलाएं पहले की जांचों से पता चला कि अजहर ने अपनी बहन सादिया अजहर को ब्रिगेड का सरदार बनाया है. दूसरी बहन समैरा अजहर और पुलवामा हमलावर उमर फारूक की विधवा आफेरा फारूक भी लीडर हैं. ये रोज ऑनलाइन सेशन चलाकर महिलाओं को जोड़ेंगी और भर्ती करेंगी. जेईएम ने एक नया पोस्टर जारी किया. इसमें 'उम्मे मसूद' (असली नाम समैरा अजहर) को ऑनलाइन क्लास का टीचर बताया. ये क्लासें हफ्ते में 5 दिन, 25 अक्टूबर से शुरू हुईं. अजहर ने कहा, जमात में 4-5 ऐसी महिलाएं हैं जिनके पुरुष रिश्तेदार भारतीय सेना से मुठभेड़ में मारे गए.  इन्हें 'शोबा-ए-दावत' कैंपेन के तहत नई भर्तियों को प्रेरित करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. अजहर ने महिलाओं से अपनी किताब "ऐ मुसलमान बहना" पढ़ने को कहा. यह ब्रेनवॉश का हिस्सा है. ऑपरेशन सिंदूर का बदला? अजहर के 14 परिवार के सदस्य भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' में मारे गए. इनमें यूसुफ अजहर, जमीला अहमद, हंबजा जमीला और हूज़ैफा अजहर शामिल थे. अब अजहर का दावा है कि उनकी बड़ी बहन हवा बीबी भी उसी हमले में मरी. ऑडियो में भावुक अजहर ने कहा कि मैंने अपनी बहन के साथ महिलाओं की ब्रिगेड का प्लान बनाया था. उसकी मौत के बाद इसे अमल में ला रहा हूं. पाकिस्तान की भूमिका पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों को बढ़ावा देता है. आधिकारिक तौर पर ये बैन हैं, लेकिन हाल के भू-राजनीतिक बदलावों से पाकिस्तान को हौसला मिला है. इन संगठनों को ज्यादा आजादी मिल रही है. भारत के खिलाफ ये नई साजिशें चिंता की बात हैं. 

‘ब्लाउज डिलीवरी लेट’ का महंगा पड़ा अंजाम — महिला ने दर्जी को ठोका ₹7 हजार का फाइन

नई दिल्ली  आमतौर पर कपड़े सिलने में दर्जी की देरी से हर कोई परेशान रहता है लेकिन अहमदाबाद में एक महिला ने इस आम समस्या के खिलाफ आवाज़ उठाई और एक डिजाइनर शॉप को सबक सिखाया। यह मामला उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल बन गया है जो समय पर सेवा न मिलने पर चुप रह जाते हैं। जानिए क्या था पूरा मामला नवंबर 2024 में अहमदाबाद की एक महिला ने परिवार में होने वाली शादी के लिए एक पारंपरिक साड़ी का ब्लाउज सिलवाने के लिए सीजी रोड पर स्थित एक डिजाइनर शॉप को ऑर्डर दिया था। महिला ने ब्लाउज के कपड़े और डिज़ाइन का चुनाव करते हुए ₹4,395 का एडवांस भुगतान भी कर दिया था। दर्जी ने ब्लाउज तैयार करने की अंतिम तिथि 24 दिसंबर तय की थी। तय तारीख आने पर दर्जी ने ब्लाउज तैयार नहीं किया। महिला ने बार-बार अनुरोध किया और शादी से पहले ब्लाउज देने की गुहार लगाई लेकिन दर्जी ने लापरवाही दिखाई और समय पर काम पूरा नहीं किया। महिला ने उठाया कानूनी कदम समय पर ब्लाउज न मिलने और दर्जी के लापरवाह रवैये से परेशान होकर महिला ने सबसे पहले दर्जी को एक कानूनी नोटिस भेजा जिसका कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद महिला ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अहमदाबाद उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज करा दी। कोर्ट का सख्त आदेश उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि दर्जी द्वारा तय समय सीमा में काम पूरा न करना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी को दर्शाता है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस लापरवाही के कारण महिला को अनावश्यक रूप से मानसिक तनाव सहना पड़ा। आयोग ने दर्जी को 45 दिनों के भीतर निम्न भुगतान करने का आदेश दिया: पूरी रकम वापसी: ग्राहक से ली गई पूरी एडवांस राशि ₹4,395 को 7% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करना होगा। मानसिक पीड़ा का मुआवजा: ग्राहक को हुई मानसिक प्रताड़ना और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए ₹7,000 का अतिरिक्त मुआवजा देना होगा।  

केवाईवी प्रक्रिया से बढ़ी वाहन मालिकों की मुश्किलें, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

नई दिल्ली बार-बार KYC (नो यॉर कस्टमर) (केवाईसी) (अपने ग्राहक को जानें) की प्रक्रिया से गुजरना ही शायद काफी नहीं था, तो अब सरकार ने एक नया नियम लागू किया है- KYV (Know Your Vehicle) (केवाईवी) यानी अपने वाहन को जानें। यह नई प्रक्रिया उन सभी लोगों के लिए जरूरी है जिनके पास गाड़ी और FASTag (फास्टैग) है। इसका मकसद है फास्टैग सिस्टम को साफ और सुरक्षित बनाना। लेकिन लोगों के लिए यह एक और झंझट बन गया है। क्या है KYV और क्यों लागू हुआ? 1 नवंबर 2024 से KYV को सभी फास्टैग यूजर्स के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब आपको अपनी गाड़ी की फोटो और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) अपलोड करने होंगे। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फास्टैग सही गाड़ी से जुड़ा हुआ है। यह पहल NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की है, जिसे NPCI ने लागू किया है। इस नियम के पीछे वजह यह है कि कई मामलों में फास्टैग का गलत इस्तेमाल हो रहा था। जैसे ट्रक ड्राइवर कारों के फास्टैग का इस्तेमाल करके कम टोल टैक्स दे रहे थे। सरकार का कहना है कि KYV के जरिए ऐसे दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। कैसे करना होगा KYV KYV प्रोसेस में हर फास्टैग को उसके व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) और चेसिस नंबर से लिंक करना जरूरी है। इसके अलावा,     आपको अपनी गाड़ी का सामने से एक फोटो लेना है, जिसमें फास्टैग और नंबर प्लेट साफ दिखे।     एक साइड फोटो भी लेनी है, जिसमें गाड़ी के एक्सल (पहिए) नजर आएं।     इन फोटो के साथ वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) अपलोड करनी होगी। इसके बाद बैंक या फास्टैग जारी करने वाली कंपनी इन डिटेल्स को VAHAN (वाहन) डेटाबेस से वेरिफाई करेगी। अगर KYV नहीं किया गया तो फास्टैग अपने-आप डिएक्टिवेट हो जाएगा। हर तीन साल में दोबारा करनी होगी प्रक्रिया यह प्रक्रिया सिर्फ एक बार की नहीं है। हर तीन साल में दोबारा KYV वेरिफिकेशन कराना होगा, ताकि सिस्टम अपडेट रहे और गलत इस्तेमाल को रोक जा सके। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कई लोग फास्टैग को गाड़ी पर लगाने की बजाय पर्स या जेब में रखते हैं। जिससे उसका गलत इस्तेमाल संभव हो जाता है। अब "वन व्हीकल, वन टैग" का नियम लागू किया जाएगा। सरकार को भी समझ आया झंझट लोगों की परेशानियों को देखकर अब सरकारी अधिकारी बैंकों से कह रहे हैं कि बिना ग्राहक को फोन किए उनका फास्टैग डिएक्टिवेट न करें। रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क परिवहन मंत्रालय के एक अधिकारी ने माना कि प्रक्रिया "बहुत जटिल" है और इसे आसान बनाना जरूरी है। सरकार अब यह विचार कर रही है कि सभी बैंकों के पोर्टल पर KYV प्रक्रिया एक जैसी हो। और इसके लिए एक समान हेल्पलाइन नंबर भी दी जाए, ताकि लोग आसानी से मदद पा सकें।

64 गैंगस्टर एक साथ ढेर! पुलिस ऑपरेशन बना देश का अब तक का सबसे बड़ा एनकाउंटर

ब्राजील देश में कई बड़े-बड़े एनकाउंटर हुए हैं. लेकिन, बीते दिन इतिहास का एक सबसे बड़ा एनकाउंटर हुआ, जिसमें कम से कम 64 क्रिमिनल्स को पुलिस ने ढेर कर दिया. इस एक्शन में हालांकि पुलिस के भी कुछ जवानों को अपनी जान देनी पड़ी. यह घटना अपने देश का नहीं बल्कि हजारों मील दूर ब्राजील की है. दरअसल, ब्राजील के रियो डी जेनेरो में संगठित अपराध के खिलाफ की गई अब तक की सबसे बड़ी पुलिस कार्रवाई में कम से कम 64 लोगों की मौत हो गई. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार ब्राजीलियाई पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं. यह कार्रवाई शहर के उत्तरी इलाकों, विशेष रूप से एलेमाओ और पेनहा कॉम्प्लेक्स फेवेला क्षेत्रों में केंद्रित थी, जहां कमांडो वर्मेल्हो (रेड कमांड) नामक अपराधी संगठन का वर्चस्व है. रियो डी जेनेरो के गवर्नर क्लाउडियो कास्ट्रो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए. अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कम से कम 42 राइफलें भी बरामद की गईं. मंगलवार दोपहर को एक्स पर एक पोस्ट में कास्ट्रो ने इस कार्रवाई को रियो डी जेनेरो के इतिहास की सबसे बड़ी ऑपरेशन करार दिया. राज्य सरकार ने एक्स पर एक लंबे थ्रेड में बताया कि यह अभियान कमांडो वर्मेल्हो के क्षेत्रीय विस्तार का मुकाबला करने के लिए एक साल से अधिक समय से तैयार किया जा रहा था. इसमें 2,500 से अधिक सैन्य और सिविल पुलिसकर्मी शामिल थे. कमांडो वर्मेल्हो ब्राजील का सबसे पुराना सक्रिय अपराधी संगठन है, जिसका नाम रेड कमांड 1985 तक चले सैन्य तानाशाही के दौरान जेलों में बने वामपंथी कैदियों के संगठन से प्रेरित है.   इनसाइट क्राइम थिंक टैंक के अनुसार, यह संगठन अब एक विशाल ट्रांसनेशनल अपराधी नेटवर्क बन चुका है, जो ड्रग तस्करी और वसूली में लिप्त है. हाल के वर्षों में राज्य की कार्रवाइयों और अन्य अपराधी मिलिशिया के साथ बढ़ती हिंसा से यह जूझ रहा है. कार्रवाई के दौरान स्थिति बेहद तनावपूर्ण रही. रॉयटर्स द्वारा जारी वीडियो में एलेमाओ फेवेला से काले धुएं के विशालकाय स्तंभ उठते दिखाई दिए. बाद में ली गई तस्वीरों से पता चला कि ये धुएं जले हुए वाहनों से निकल रहे थे, जिन्हें गैंग ने बैरिकेड के रूप में इस्तेमाल किया था. रियो डी जेनेरो पुलिस विभाग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि मंगलवार को कम से कम 81 लोग गिरफ्तार किए गए.अधिकारीयों का दावा है कि गैंग ने कार्रवाई का जवाब देने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया. राज्य सरकार ने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि प्रतिशोध में अपराधियों ने पेनहा कॉम्प्लेक्स में पुलिस अधिकारियों पर ड्रोन से हमला किया.  

सैलरी में बंपर बढ़ोतरी — अब ₹1 लाख वालों की इनकम होगी इतनी ज्यादा!

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग  को लेकर अब नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 2.86 रखा जा सकता है। इसी आधार पर सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव संभव है। ₹19,000 महीना तक बढ़ेगा वेतन रिपोर्ट के अनुसार, इस फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में लगभग ₹19,000 प्रति माह का इजाफा हो सकता है। यानी जो कर्मचारी अभी ₹1 लाख मासिक वेतन प्राप्त कर रहा है, उसकी तनख्वाह बढ़कर करीब ₹1.14 लाख प्रति माह तक पहुंच सकती है। क्या है फिटमेंट फैक्टर का फॉर्मूला? वेतन निर्धारण के लिए आयोग “फिटमेंट फैक्टर” का उपयोग करता है। फॉर्मूला है — नई बेसिक सैलरी = वर्तमान बेसिक सैलरी × फिटमेंट फैक्टर (2.86) यानी यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे ₹25,500 है, तो बढ़ोतरी के बाद यह ₹72,930 तक जा सकती है। कब लागू होगी नई सैलरी? आठवें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें 18 महीने के भीतर सरकार को सौंपनी हैं। उसके बाद केंद्र द्वारा मंजूरी मिलने पर नया वेतन ढांचा लागू किया जाएगा। अनुमान है कि 2026 की शुरुआत तक यह लागू हो सकता है। कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत इस फैसले से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से न केवल कर्मचारियों की आय में सुधार होगा, बल्कि बाजार में उपभोग और मांग भी बढ़ेगी।  

भारत बंद की चेतावनी! ट्रैक्टरों में राशन-दवाइयां लेकर किसान बैठे धरने पर

नागपुर महाराष्ट्र की सियासत और सड़कें दोनों इन दिनों गर्म हैं। पूर्व मंत्री और प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख बच्चू कडू की अगुवाई में हजारों किसान अब “मीटिंग नहीं, आंदोलन से न्याय” के नारे के साथ सड़कों पर उतर आए हैं। नागपुर-हैदराबाद हाईवे पर किसानों ने डेरा डाल दिया है — ट्रैक्टरों की कतारें, सड़क पर पड़े कांटेदार पेड़ और हर ओर गूंजते नारे… दृश्य किसी जनक्रांति से कम नहीं। करीब 25 किलोमीटर तक हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग चुकी हैं और पुलिस बल हालात संभालने में जुटा है। जब तक कर्ज माफी नहीं, तब तक आंदोलन जारी बच्चू कडू ने साफ कहा है कि यह संघर्ष अब पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं, तो अगला कदम ट्रेन रोकने और भारत बंद का होगा। उनका कहना है कि वर्षों से किसानों को भरोसे और वादों के सहारे रखा गया, लेकिन अब वे अपने अधिकार की लड़ाई निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे। कडू ने कहा- अब सरकार की मीटिंग नहीं, जनता की सड़कें न्याय देंगी। यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र नहीं, पूरे देश के किसानों की आवाज बनेगा।  किसानों की चार प्रमुख मांगें किसानों ने अपने आंदोलन के लिए चार स्पष्ट मांगें रखी हैं — -संपूर्ण कर्जमाफी -बारिश और फसल नुकसान का उचित मुआवजा -राज्य के दिव्यांग नागरिकों को ₹6,000 मासिक भत्ता -सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी -कडू का कहना है कि ये मांगे किसानों के अस्तित्व से जुड़ी हैं, किसी राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा नहीं। हाईवे पर जाम, प्रशासन अलर्ट मोड में प्रदर्शनकारियों ने जब से हाईवे जाम किया है, तब से ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई हुई है। कई जगह यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों से डायवर्ट किया गया है। पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है, ताकि स्थिति बेकाबू न हो।   आंदोलन के लिए तैयार किसान इस बार किसान लंबी लड़ाई के लिए पूरी तैयारी के साथ आए हैं। ट्रैक्टरों में राशन, दवाइयां, पानी और तंबू तक मौजूद हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे “खाली हाथ घर नहीं लौटेंगे” – चाहे उन्हें कितने भी दिन रुकना पड़े।  बच्चू कडू का बढ़ता जनसमर्थन कडू बीते महीनों से लगातार किसानों की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने देशभर के किसानों को नागपुर बुलाकर इस आंदोलन को “महाएलगार” का नाम दिया है। ग्रामीण इलाकों में उनका यह रुख तेजी से चर्चा में है – एक तरफ सरकार इसे कानून-व्यवस्था की चुनौती मान रही है, तो दूसरी तरफ कई किसान संगठन अब खुले समर्थन में उतर आए हैं।  

डोनाल्ड ट्रंप किस ‘पेनकिलर’ के बहाने शी जिनपिंग से करेंगे बात? जानें इस मुलाकात का बड़ा एजेंडा

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के शी जिनपिंग की साउथ कोरिया में मुलाकात हो सकती है। एशिया-पैसिफिक समिट के दौरान यह मीटिंग होगी, जिसका एजेंडा भी डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं शी जिनपिंग के साथ फेंटानिल पर बात करूंगा। इसी दवा की सप्लाई दोनों देशों के बीच विवाद का विषय बनी है और अमेरिका ने चीन पर टैरिफ लादे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि मैं शी जिनपिंग के साथ मीटिंग में फेंटानिल दवा और किसानों के मसले पर बात करूंगा। दोनों की मीटिंग गुरुवार को होने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यदि चीन की ओर से फेंटानिल दवा में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के निर्यात पर नियंत्रण लगता है तो फिर हम टैरिफ में कमी करेंगे। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि हम चीन पर लादे गए फेंटानिल टैरिफ में 20 फीसदी तक की कमी करेंगे। फिलहाल चीनी उत्पादों पर अमेरिका में 55 फीसदी टैक्स लग रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि मीटिंग में ताइवान का मसला नहीं उठेगा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि हम इस पर बात करेंगे।   फेंटेनाइल एक दर्द निवारक दवा है, जिसे नशे के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मॉर्फिन या हेरोइन की माफिक नशा करती है। यह पूरी तरह से प्रयोगशालाओं में बनाई जाती है, जिसमें कोई प्राकृतिक तत्व नहीं होता। आमतौर पर इसे दर्द निवारक दवा के रूप में लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसकी ओवरडोज घातक है। अमेरिका में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल दर्द जैसी समस्या से निजात पाने की बजाय नशे के लिए किए जाने की खबरें हैं। इसी के चलते अमेरिका चाहता है कि चीन उन केमिकल्स का निर्यात रोक दे, जिनसे यह दवा तैयार होती है। अमेरिका ने इसी चिंता के तहत चीन पर टैरिफ भी लादे हैं। अब यही दवा एक बार फिर से दोनों ताकतवर मुल्कों के बीच चर्चा का विषय होगी। कैसे लोग हो जाते हैं फेंटेनाइल की लत का शिकार फेंटेनाइल कई अन्य नशीली दवाओं की तुलना में अधिक शक्तिशाली है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी घातक ओवरडोज़ का कारण बन सकती है। ऐसा तब भी हो सकता है जब कोई व्यक्ति बिना जाने फेंटेनाइल ले ले, अगर इसे नकली प्रिस्क्रिप्शन गोलियों या अन्य अवैध दवाओं में मिलाया गया हो। फेंटेनाइल टेस्ट स्ट्रिप्स का उपयोग करने से फेंटेनाइल युक्त दवाओं के उपयोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को अकसर लत हो जाती है। इसके बार-बार उपयोग से मस्तिष्क की गतिविधि में परिवर्तन होता है जिसके कारण लोग हानिकारक प्रभावों का अनुभव होने पर भी इसका उपयोग जारी रखते हैं।