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होटल ले जाने के मामले में टीचर को मिली जमानत, कोर्ट ने सहमति का किया उल्लेख

मुंबई  नाबालिग छात्र के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार हुईं मुंबई की एक शिक्षिका को जमानत मिल गई है। मुंबई की एक कोर्ट ने सबूतों के आधार पर कहा कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। टीचर पर आरोप थे कि उसने कई मौकों पर फाइव स्टार होटल ले जाकर नाबालिग छात्र का यौन शोषण किया है। अदालत ने जमानत देते समय आरोपी शिक्षिका पर पीड़ित से किसी तरह का संबंध नहीं साधने की शर्तें लगाई हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आदेश में कहा है कि सबूत दिखाते हैं दोनों के बीच सहमति से संबंध थे। स्पेशल जज सबीना मलिक ने कहा, 'आरोपी ने स्कूल से इस्तीफा दे दिया था, तो छात्र और शिक्षिका के बीच संबंध की बात नहीं है। ऐसे में प्रभाव उतना नहीं है।' जज ने कहा कि ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा और आरोपी को तब तक हिरासत में रखने से कुछ नहीं मिलेगा। इधर, पीड़ित ने जमानत याचिका का विरोध किया है। पक्ष का कहना है कि अगर महिला को जमानत मिलती है, तो वह एक बार फिर छात्र को डराने धमकाने के रास्ते खोज लेगी। साथ ही कहा गया है कि वह सबूतों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकती है। इसपर जज ने कहा कि जरूरी शर्तें लगाई जा सकती हैं, जिनके जरिए ऐसी आशंकाओं को दूर किया जा सकेगा। जज ने कहा कि आरोपी किसी भी तरह से पीड़ित से संपर्क नहीं करेगी। किसी भी गवाह या पीड़ित को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने, डराने या किसी चीज का वादा करने की रोक लगाई जाती है। जज ने यह भी साफ किया है कि इन शर्तों का उल्लंघन करने से जमानत तुरंत रद्द हो जाएगी। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की तरफ से दिए गए आवेदन में महिला ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। साथ ही उसका कहना है कि यह मामला झूठा और लड़के की मां के कहने पर किया गया है, क्योंकि वह उनके रिश्ते के खिलाफ थीं। महिला ने याचिका में लड़के से बातचीत के सबूत पेश किए और कहा है कि उसके पैरेंट्स को रिश्ते के बारे में पता था। वह इसके खिलाफ थे। क्या था केस पुलिस का दावा है कि शिक्षा नाबालिग छात्र के प्रति दिसंबर 2023 में आकर्षित हुई थी। उसने कथित तौर पर जनवरी 2024 में पहली बार यौन संबंधों की पेशकश की। FIR में कहा गया है कि शिक्षिका नाबालिग छात्र को बड़े होटलों में ले जाती थी, जहां कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया जाता था। खबरें हैं कि टीचर ने कई बार शोषण करने से पहले छात्र को नशीला पदार्थ दिया।

Mumbai blast case : बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 12 आरोपी फिलहाल नहीं होंगे बरी

मुंबई  2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में 12 आरोपियों को बरी किए जाने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर SC ने अंतरिम रोक लगाई SC ने महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर नोटिस जारी.2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सभी 12 आरोपियों को बरी करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रोक लगा दी। महाराष्ट्र सरकार और आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में सात बम विस्फोट हुए थे, जिनमें 187 लोगों की मौत हुई और 800 से अधिक घायल हुए थे। इस मामले में 2015 में विशेष एमसीओसीए कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जिसमें पांच को मृत्युदंड और सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 21 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव और अभियोजन पक्ष की विफलता का हवाला देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।. सीजेआई बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची बेंच के सामने महाराष्ट्र सरकार के वकील ने मामले का उल्लेख किया और मामले की जल्द सुने जाने की मांग की गई. जिस पर कोर्ट ने कहा कि देखिए, इतनी जल्दी क्या है? आठ लोग पहले ही रिहा हो चुके हैं. बरी करने पर रोक केवल दुर्लभतम मामलों में ही लगाई जाती है. 24 जुलाई को होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट स मामले में गुरुवार (24 जुलाई) को सुनवाई करेगा. महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि इसकी जल्द सुनवाई जरूरी है. मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले को गुरुवार के लिए सूचीबद्ध किया है. हाई कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को किया बरी सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के मुंबई सीरियल ट्रेन ब्लास्ट मामले में सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा, इससे यह विश्वास करना मुश्किल है कि आरोपी ने अपराध किया है. फैसला सुनाते हुए सबूतों के अभाव में कोर्ट ने 12 आरोपियों को बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि आरोपियों ने अपराध किया है, इसलिए उन्हें बरी किया जाता है. कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर वो किसी दूसरे मामले में वॉन्टेड नहीं हैं, तो उन्हें फौरन जेल से रिहा किया जाए. जांच एजेंसियों के कामकाज पर सवाल करीब 19 साल बाद मिली इस राहत ने जहां इन निर्दोषों के परिवारों को सुकून पहुंचाया है, वहीं इस फैसले ने देश की जांच एजेंसियों के कामकाज पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोपियों को बरी किए जाने से जांच की विश्वसनीयता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि हाई कोर्ट ने सिमी और लश्कर-ए-तैयबा की संलिप्तता वाली एटीएस की कहानी को सिरे से खारिज कर दिया. हाईकोर्ट का यह फैसला मामले की जांच कर रही महाराष्ट्र एटीएस के लिए बड़ा झटका है. एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्य थे और उन्होंने आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के पाकिस्तानी सदस्यों के साथ मिलकर साजिश रची थी. 180 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत विशेष अदालत ने 12 में से 5 को मौत की सजा और 7 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. मौत की सजा पाए एक दोषी की साल 2021 में मौत हो गई थी. 11 जुलाई 2006 को पश्चिमी लाइन पर कई जगहों पर मुंबई लोकल ट्रेनों में हुए 7 विस्फोटों में करीब 180 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. हाई कोर्ट ने 2015 में एक विशेष अदालत की ओर से आरोपियों को दी गई सजा और उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली उनकी अपीलों को स्वीकार कर लिया था.  

उपराष्ट्रपति पद के लिए नई एंट्री ने बढ़ाई हलचल, बीजेपी हाईकमान से हुई बातचीत

नई दिल्ली जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने के बाद अब अगले वाइस प्रेसिडेंट के नाम की अटकलें लगने लगी हैं। अब तक संभावितों की लिस्ट में कई बड़े नेताओं के नाम सामने चुके हैं। अब इसमें एक और बड़ा व चौंकाने वाला नाम शामिल हुआ है। दरअसल, केंद्रीय राज्य मंत्री और जेडीयू सांसद रामनाथ ठाकुर ने बुधवार शाम को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है, जिसके बाद अटकलें लगने लगी हैं कि वे भी उपराष्ट्रपति की रेस में शामिल हैं। रामनाथ ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं और इस समय जेडीयू कोटे से मोदी सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री हैं। कौन हैं रामनाथ ठाकुर, रेस में क्यों हुए शामिल? रामनाथ ठाकुर बिहार से आने वाले बड़े चेहरे हैं। वे राज्य के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर के बड़े बेटे हैं। वे लालू यादव की पहली कैबिनेट का भी हिस्सा रह चुके हैं और तब गन्ना मंत्री बनाया गया था। फिर साल 2005 से 2010 तक नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। उनके पिता कर्पूरी ठाकुर को कुछ समय पहले ही भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। रामनाथ ठाकुर के उपराष्ट्रपति की रेस में शामिल होने की कई वजहें बताई जा रही हैं। दरअसल, इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में यदि एनडीए सरकार वहीं से आने वाले किसी नेता को उपराष्ट्रपति बनाती है तो चुनाव से पहले बड़ा मैसेज जाएगा और इसका फायदा मौजूदा सरकार को राज्य में मिल सकता है। जेडीयू को साधने के लिए रामनाथ ठाकुर को बनाएगी उपराष्ट्रपति? वहीं, रामनाथ ठाकुर को उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी बिना किसी दिक्कत के पांच सालों तक केंद्र में सरकार चला सकती है। बीजेपी को इस समय अकेले दम पर लोकसभा में बहुमत नहीं है और जेडीयू व टीडीपी की मदद से सरकार चला रही है। इसी वजह से उपराष्ट्रपति का पद जेडीयू कोटे से किसी नेता को भी दिया जा सकता है। पहले बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन बाद में उनका नाम रेस से लगभग बाहर हो गया। बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश खुद को मुख्यमंत्री पद से दूर करना नहीं चाहेंगे। इसी वजह से अब उनकी जगह जेडीयू की ओर से रामनाथ ठाकुर का नाम रेस में आ गया है। यदि रामनाथ ठाकुर को एनडीए सरकार उपराष्ट्रपति बनाती है तो इससे नीतीश कुमार भी राज्य के अगले सीएम पद की रेस में बने रहेंगे और उपराष्ट्रपति जैसा बड़ा पद भी उनके ही दल के नेता को मिल जाएगा। लिस्ट में और कौन-कौन से नाम हैं शामिल? पिछले एक दशक से ज्यादा समय में मोदी सरकार हमेशा चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती है। उसकी अगली रणनीति और फैसले के बारे में बहुत ही कम बार पहले से पता चल सका है। इसी तरह इस बार भी उपराष्ट्रपति पद के लिए विभिन्न नामों की अटकलें भले ही लग रही हैं, लेकिन कौन बनेगा, इसका पता तो तभी चलेगा, जब बीजेपी खुद इसका ऐलान करेगी। हालांकि, अभी कई नाम हैं, जो संभावितों की सूची में हैं। सबसे पहले नीतीश कुमार का नाम सामने आया, लेकिन अब उनकी संभावना बहुत कम है। उनके अलावा, हरिवंश नारायण सिंह, राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा जैसे नामों की भी चर्चा है।

भारत के पड़ोस में भड़की जंग: थाइलैंड ने किया कंबोडिया पर हवाई हमला

बैंकॉक  थाईलैंड और कंबोडिया के बॉर्डर पर गुरुवार सुबह शुरू हुई झड़पों के बाद दोनों देशों में जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी का आरोप लगाया है। सीमा पर सैनिकों की गोलीबारी के बाद थाईलैंड ने फाइटर जेट F-16 की तैनाती कर दी है और हवाई हमले भी किए हैं। थाईलैंड की बमबारी से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इससे भारत के पड़ोस में एक भीषण जंग छिड़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। दोनों देशों में इस लड़ाई की वजह दशकों पुराना सीमा विवाद है। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि थाईलैंड ने उसके क्षेत्र में हवाई हमले किए हैं। कंबोडिया ने बताया है कि थाईलैंड की सेना ने F-16 लड़ाकू विमानों से वाट काऊ किरी स्वरक पैगोडा की ओर जाने वाली सड़क पर बम गिराए गए हैं। थाईलैंड ने छह F-16 विमान लड़ाई में उतारने और कंबोडिया के दो क्षेत्रीय सैन्य मुख्यालयों को नष्ट करने का दावा किया है। इससे भड़के कंबोडिया ने कहा है कि वह इन हमलों का जवाब देगा। दोनों देश कैसे बने दुश्मन कंबोडिया और थाईलैंड पड़ोसी हैं लेकिन आज ये दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देश जंग के मुहाने पर हैं। मौजूदा तनाव की शुरुआत 28 मई को हुई, जब झड़प में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई। यह घटना एमराल्ड ट्रायंगल नामक क्षेत्र में हुई, जो थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की साझा सीमा है। यह क्षेत्र लगातार विवादित बना हुआ है क्योंकि थाईलैंड और कंबोडिया दोनों क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं। 29 मई के बाद से दोनों देश एक दूसरे पर हमलावर हैं। कंबोडिया और थाईलैंड 817 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। फ्रांस का 1863 से 1953 तक कंबोडिया पर कब्जा रहा। ऐसे में फ्रांस ने ज्यादातर बॉर्डर तय किया। इसका आधार 1907 के थाईलैंड और कंबोडिया के प्राकृतिक जलविभाजक रेखा (वाटरशेड लाइन) के समझौते पर आधारित था। थाईलैंड ने बाद के वर्षों में इस नक्शे पर यह कहते हुए एतराज जताया कि डांगरेक पर्वत पर स्थित 11वीं शताब्दी के प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया में रखा गया है। नक्शे पर मतभेदों के चलते सीमा के आसपास के क्षेत्र ऐसे बन गए, जिन पर दोनों देश अपना दावा करते हैं। थाई सेना ने बताया कि कंबोडिया ने भारी हथियारों से लैस सैनिकों को तैनात करने से पहले क्षेत्र में एक निगरानी ड्रोन भेजा था. उन्होंने बताया कि गोलीबारी में कम से कम दो थाई सैनिक घायल हो गए. कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेता ने कहा, 'हमारे सैनिकों ने थाई सैनिकों के आक्रमण के खिलाफ अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया. थाईलैंड ने कंबोडिया की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया है.' कंबोडिया के नेताओं ने क्या कहा? कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि थाई सेना ने कंबोडिया के दो प्रांतों पर गोलाबारी की है. पोस्ट में उन्होंने लोगों से अपील की कि वो घबराए नहीं. वहीं, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने फेसबुक पर कहा, 'कंबोडिया ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को सुलझाने की इच्छा जताई है, लेकिन इस बार जब हम पर हथियारों से आक्रमण किया गया तो हमारे पास भी हथियारों से उसका जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.' थाईलैंड के प्रधानमंत्री क्या बोले? थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने कहा कि कंबोडिया के साथ उसका विवाद 'नाजुक स्थिति' में बना हुआ है और इसे सावधानीपूर्वक अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से सुलझाया जाना चाहिए. गुरुवार की दोनों देशों के बीच झड़प से एक दिन पहले थाईलैंड ने कंबोडिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था. इससे पहले सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट में एक थाई सैनिक घायल हो गया था जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और थाईलैंड ने अपना राजदूत वापस बुला लिया था. बुधवार को थाईलैंड ने यह भी कहा कि वो कंबोडिया के राजदूत को देश से निष्कासित करेगा. मई में दोनों देशों के बीच हुए सशस्त्र संघर्ष में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई थी जिससे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. पिछले दो महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और सीमा पर सैनिकों की उपस्थिति बढ़ा दी है. इंटरनेशल कोर्ट में मुकदमा कंबोडिया ने 1959 में मंदिर विवाद को लेकर थाईलैंड को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में घसीटा और 1962 में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रीह विहियर कंबोडियाई क्षेत्र में आता है। थाईलैंड ने उस समय इसे स्वीकार किया लेकिन तर्क दिया कि आसपास की सीमाएं विवादित हैं। इससे सीमा रेखाएं और जटिल हो गईं। ये तनाव 2008 में बढ़ा, जब कंबोडिया ने प्रीह विहियर मंदिर के लिए यूनेस्को विश्व-धरोहर का दर्जा मांगा। जुलाई में मंदिर को मान्यता मिलने के बाद सीमा क्षेत्र के पास कंबोडियाई और थाई सैनिकों के बीच सैन्य झड़पें शुरू हो गईं। ये झड़पें लगातार चलती रहीं और 2011 में चरम पर पहुंच गईं। इस साल 36,000 लोग विस्थापित हुए। दोनों देशों में सैन्य संघर्ष रुका लेकिन अंदर-अंदर एक तनाव चलता रहा। थाईलैंड ने सीमा विवादों को सुलझाने में मदद के लिए एक संयुक्त सीमा आयोग (जेबीसी) की स्थापना भी की लेकिन इसकी बैठकों से कोई महत्वपूर्ण नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के मुकदमों और कई झड़पों के बाद भी चीजें जस की तस हैं। हालिया हफ्तों में इन्होंने काफी खराब रूप से लिया है।

भारत का पासपोर्ट हुआ और मजबूत, पाकिस्तान टॉप से लगभग बाहर

नई दिल्ली दुनिया भर के देशों के पासपोर्ट की नई रैंकिंग आ गई है। इसके मुताबिक भारत का पासपोर्ट दुनिया में 77वें नंबर पर है। वहीं पहले नंबर पर एशिया के ही सिंगापुर और दूसरे पर जापान एवं साउथ कोरिया को रखा गया है। दिलचस्प तथ्य यह है कि पाकिस्तान दुनिया का चौथा सबसे खराब रैंकिंग वाला देश है। उसका पासपोर्ट 96वें नंबर पर रखा गया है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स ने 1 से 99 तक की रैंकिंग में दुनिया के तमाम देशों को रखा है। पाकिस्तान के साथ सोमालिया और यमन को जगह मिली है। सबसे आखिरी यानी 99वें नंबर पर अफगानिस्तान है। इसी तरह 98 पर सीरिया और 97 पर इराक को जगह मिली है। तीसरे पायदान पर यूरोप के ही कई देश हैं, जिनमें डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली और स्पेन शामिल हैं। इन देशों में घूमने के लिए लोग बड़ी संख्या में जाना चाहते हैं। चौथे नंबर पर भी स्वीडन, नीदरलैंड और बेल्जियम समेत यूरोप के ही 7 देश शामिल हैं। भारत के एक और पड़ोसी देश बांग्लादेश के पासपोर्ट को 94वें नंबर पर रखा गया है। उसके साथ ही रैंकिंग में फिलिस्तीन को भी जगह मिली है। इसके अलावा सूडान और उत्तर कोरिया को क्रमश: 92वां और 93वां नंबर मिला है। श्रीलंका और ईरान को 91वें नंबर पर रखा गया है। वहीं दुनिया के सबसे ताकतवर देश कहे जाने वाले अमेरिका को 10वां पायदान मिला है तो इजरायल 18वें नंबर पर है। चीन के पासपोर्ट को रैंकिंग में 60वें नंबर पर रखा गया है। रूस को इस सूची में 46वां स्थान मिला है। भारत की रैंकिंग में इस साल 8 स्थान का उछाल आया है। बीते साल भारतीय पासपोर्ट को 85वें नंबर पर रखा गया था और इस बार 77वें पर है। पासपोर्ट सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला वह दस्तावेज है, जिसके माध्यम से लोग दूसरे देशों की यात्रा कर सकते हैं। आमतौर पर ऐसे देशों की रैंकिंग कमजोर होती है, जो हिंसा प्रभावित हैं या फिर आतंकवाद से ग्रस्त हैं। जैसे अफगानिस्तान, सोमिलाया, पाकिस्तान, सीरिया, सूडान और इराक आदि।

फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे तुर्की पहुँची समर अबू जमर, वहां की दूसरी शादी से खुला राज

खान यूनिस  गाजा के लोग इजरायली हवाई हमलों और गहराते मानवीय संकट से जूझ रहे हैं। वहीं, हमास के वरिष्ठ नेता और मिलिट्री कमांडरों के परिवार चुपचाप युद्ध क्षेत्र को छोड़कर भाग रहे हैं। गाजा में इजरायली हमला शुरू होने के चंद हफ्तों के अंदर ही हमास की टॉप लीडरशिप ने अपने परिवार को सीमा पार तुर्की, मिस्र, ईरान और कतर पहुंचा दिया था। ऐसे में अब गाजा में हमास के नेताओं के खिलाफ आक्रोश भड़क रहा है। इस बीच खबर आई है कि जाली पासपोर्ट और ढेर सारा कैश लेकर भागी हमास के शीर्ष नेता याह्या सिनवार की पत्नी समर अबू जमर ने तुर्की में दोबारा शादी कर ली है। सिनवार को 16 अक्तूबर 2024 को इजरायली सेना ने मार गिराया था। गाजा से तुर्की भाग गई थी समर अबू जमर कई स्थानीय सूत्रों के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दिनों में जाली दस्तावेजों, सैन्य सहायता और विदेशी संपर्कों की मदद से हमास के शीर्ष अधिकारियों के परिवारों को गाजा पट्टी से तस्करी कर बाहर निकाला गया था। जनवरी में, इजरायली सेना ने एक फुटेज जारी किया जिसमें हमास के सैन्य कमांडर याह्या सिनवार की विधवा समर अबू जमर अपने बच्चों के साथ हमास की एक सुरंग में प्रवेश करती दिखाई दे रही थीं। शुरुआती अटकलों के अनुसार, वह अंडरग्राउंड हो गई थीं। लेकिन स्थानीय सूत्रों ने बाद में इजरायली समाचार आउटलेट Ynet को बताया कि अबू जमर पूरी तरह से गाजा छोड़कर तुर्की में रह रही थी। समर अबू जमर ने तुर्की में की दूसरी शादी एक सूत्र ने कहा, "वह अब यहां नहीं है—उसने एक फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल करके राफा सीमा पार की थी।" उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में "उच्च-स्तरीय समन्वय, रसद सहायता और बड़ी रकम शामिल थी जो आम गाज़ावासियों के पास नहीं होती।" सूत्र ने यह भी बताया कि सिनवार की इजरायली सेना द्वारा हत्या के कुछ महीने बाद अबू जमर ने तुर्की में दोबारा शादी कर ली। बताया जाता है कि इस शादी की व्यवस्था हमास के वरिष्ठ राजनीतिक ब्यूरो सदस्य फती हम्माद ने की थी, जिन्हें पहले हमास के लोगों और उनके परिवारों को भागने में मदद करने के प्रयासों से जोड़ा जाता रहा है। समर अबू जमर के महंगे बैग पर हुआ था विवाद पिछले साल अबू जमर को उस समय आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था जब एक वीडियो में उसे एक सुरंग में छिपते हुए एक महंगा हर्मीस बिर्किन हैंडबैग ले जाते हुए दिखाया गया था। याह्या सिनवार के भाई मुहम्मद सिनवार की पत्नी नजवा सिनवार भी लापता है। हाल के महीनों में उनके ठिकाने का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है। स्थानीय सूत्रों का मानना है कि वह भी अपने पति की मृत्यु से पहले अपने बच्चों के साथ गाजा छोड़कर संभवत तुर्की चली गई थी। इजरायली सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दोनों महिलाएं अपने पतियों की हत्या से पहले राफा क्रॉसिंग के रास्ते गाजा से बाहर निकल गई थीं।  

एचआरटीसी बस हादसा: सड़क से फिसलकर गिरी बस, पांच लोगों की मौत, कई घायल

सरकाघाट-मंडी हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट उपमंडल में मसेरन के पास तरांगला में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। यात्रियों से भरी हिमाचल पथ परिवहन निगम(एचआरटीसी) की बस अनियंत्रित होकर नीचे खेतों में जा गिरी। हादसे में  पांच यात्रियों की माैत हो गई है। करीब 20 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में तीन महिलाएं व दो पुरुष शामिल हैं। घायलों का सरकाघाट अस्पताल में उपचार चल रहा है। चंबा में शिक्षक की मौत उधर, चंबा जिले के मंडून गांव में बीती रात को एक शिक्षक की सड़क हादसे में माैत हो गई।  जानकारी के अनुसार गाड़ी अनियंत्रित होकर टीन की छत पर गिर गई। हादसे में खेम राज पुत्र बृजलाल निवासी बुंदेडी की माैत हो गई।  पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने हादसे की पुष्टि की है।  

भारतीय यात्रियों के लिए खुशखबरी: वीज़ा फ्री देशों की संख्या बढ़कर 59 हुई

नई दिल्ली अगर आप भी विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं, तो अब वो हकीकत में बदल सकता हैं। साल 2025 में भारतीय पासपोर्ट की ताकत में और भी बढ़ोतरी हुई है। Henley Passport Index 2025 के अनुसार, अब भारतीय पासपोर्ट धारक 59 देशों में बिना वीज़ा या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। इस साल भारत की रैंकिंग 85वें स्थान से बढ़कर 77वें स्थान पर पहुँच गई है, जो काफी बड़ी छलांग मानी जा रही है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों के लिए अब ज़्यादा देशों में यात्रा करना आसान हो गया है। मलेशिया, थाईलैंड, मालदीव, मॉरीशस जैसे कई लोकप्रिय देश अब भारतीय नागरिकों को वीज़ा-फ्री एंट्री दे रहे हैं। वहीं, श्रीलंका, कतर और म्यांमार जैसे देशों में वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिल रही है। यानी अब आपको लंबी वीज़ा प्रक्रिया से गुज़रने की ज़रूरत नहीं है। वीज़ा-फ्री और वीज़ा-ऑन-अराइवल: क्या है अंतर? विदेश यात्रा की योजना बनाने से पहले इन दोनों में अंतर समझना ज़रूरी है: वीज़ा-फ्री देश: इन देशों में घूमने के लिए भारतीय पासपोर्ट धारकों को पहले से वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं होती। आप सीधे फ्लाइट बुक करके वहाँ जा सकते हैं। हालाँकि, हर देश के अपने नियम होते हैं जैसे कितने दिनों तक रुक सकते हैं या किन उद्देश्यों के लिए जा सकते हैं। वीज़ा-ऑन-अराइवल : इसका मतलब है कि आप जिस देश में जा रहे हैं, वहाँ एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वीज़ा ले सकते हैं। इसके लिए वहाँ के वीज़ा काउंटर पर एक फॉर्म भरना, ज़रूरी दस्तावेज़ देना और निर्धारित फीस चुकानी होती है। भारतीय अब इन 59 देशों में कर सकते हैं यात्रा भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा देने वाले देशों की पूरी सूची इस प्रकार है: वीज़ा-फ्री देश (कुल 30): अंगोला, बारबाडोस, भूटान, ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह, कुक द्वीप समूह, डोमिनिका, फिजी, ग्रेनाडा, हैती, ईरान, जमैका, कज़ाकिस्तान, केन्या, किरिबाती, मकाओ, मेडागास्कर, मलेशिया, मॉरीशस, माइक्रोनेशिया, मोंटसेराट, नेपाल, नियू, फिलीपींस, रवांडा, सेनेगल, सेंट किट्स और नेविस, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, वानुअतु वीज़ा-ऑन-अराइवल देश (कुल 27): 31. बोलीविया 32. बुरुंडी 33. कंबोडिया 34. केप वर्डे द्वीप समूह 35. कोमरो द्वीप समूह 36. जिबूती 37. इथियोपिया 38. गिनी-बिसाऊ 39. इंडोनेशिया 40. जॉर्डन 41. लाओस 42. मालदीव 43. मार्शल द्वीप समूह 44. मंगोलिया 45. मोज़ाम्बिक 46. म्यांमार 47. नामीबिया 48. पलाऊ द्वीप समूह 49. कतर 50. समोआ 51. सिएरा लियोन 52. सोमालिया 53. श्रीलंका 54. सेंट लूसिया 55. तंजानिया 56. तिमोर-लेस्ते 57. तुवालु इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉरिटी वाले देश (2): 58. ज़िम्बाब्वे 59. सेशेल्स (ETA एक डिजिटल परमिट होता है जो यात्रा से पहले ऑनलाइन ही मिल जाता है।) यात्रा से पहले ज़रूरी जानकारी हर देश के अपने नियम होते हैं, जैसे रुकने की समय सीमा, ज़रूरी दस्तावेज़ या एंट्री की शर्तें। इसलिए, यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित देश की आधिकारिक वेबसाइट या दूतावास से पूरी जानकारी ज़रूर ले लें।

Reels का जादू या जाल? सेहत पर पड़ रहा है खतरनाक असर

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर रील्स देखना आजकल युवाओं के लिए दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। खासकर रात में सोने से पहले रील्स या शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना एक सामान्य आदत बन गई है, लेकिन ये आदत मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात को लगातार रील्स देखने से डिजिटल एंजायटी यानी इंटरनेट से जुड़ी मानसिक बेचैनी तेजी से बढ़ रही है। ग्वालियर के जेएएच अस्पताल में मानसिक रोग विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल में 18 से 30 वर्ष के युवाओं में मानसिक परामर्श लेने वालों की संख्या में 40% तक बढ़ोतरी हुई है। इनमें ज़्यादातर छात्र, नौकरीपेशा लोग या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं, जो दिनभर की थकान मिटाने के लिए रात को मोबाइल पर रील्स देखते हैं। लेकिन यह आदत उन्हें राहत देने की बजाय और ज्यादा बेचैन कर रही है। नींद का पैटर्न हो रहा गड़बड़ मनोचिकित्सक डॉ. अतर सिंह के अनुसार, रील्स की लत धीरे-धीरे 'डूम स्क्रॉलिंग' में बदल जाती है। व्यक्ति घंटों तक मोबाइल पर स्क्रॉल करता रहता है, लेकिन उसे संतोष नहीं मिलता। इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी महसूस होती है। यह आदत धीरे-धीरे डिप्रेशन और सोशल आइसोलेशन का कारण भी बन सकती है। डोपामिन हिट्स से बढ़ रही बेचैनी रील्स की तेजी से बदलती क्लिप्स दिमाग को लगातार डोपामिन हिट्स देती हैं। इससे दिमाग बार-बार उसी खुशी की तलाश करता है। जब ये हिट कम होने लगती है, तो व्यक्ति बेचैन और असहज महसूस करने लगता है, जिसे विशेषज्ञ 'डिजिटल एंजायटी' कहते हैं। बचाव के उपाय मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर का सुझाव है कि सोशल मीडिया के उपयोग पर एक समय-सीमा तय करनी चाहिए। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल बंद कर देना चाहिए। उसकी जगह किताब पढ़ें, धीमा संगीत सुनें या मेडिटेशन करें। अगर लगातार बेचैनी, नींद न आना या चिड़चिड़ापन महसूस हो, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: घरेलू हिंसा के मामलों में गिरफ्तारी से पहले 2 माह की मोहलत

नई दिल्ली घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है और इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो साल पुराने दिशा-निर्देशों को अपनाते हुए कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत दर्ज मामलों में पुलिस आरोपियों को दो महीने तक गिरफ्तार न करे। कोर्ट ने कहा कि जब कोई महिला अपने ससुराल वालों के खिलाफ 498A के तहत घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराए तो पुलिस वाले उसके पति या उसके रिश्तेदारों को दो महीने तक गिरफ्तार न करे। कोर्ट ने दो महीने की अवधि को शांति अवधि कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह आदेश एक महिला IPS अधिकारी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने उस महिला अधिकारी को उससे अलग हुए पति और उसके रिश्तेदारों के उत्पीड़न के लिए अखबारों में माफीनामा प्रकाशित कर माफी मांगने का भी आदेश दिया है। दो माह तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2022 के दिशानिर्देशों के मुताबिक, दो महीने की शांति अवधि पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तारी सहित कोई भी कार्रवाई करने से रोकता है। HC के दिशानिर्देशों के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दर्ज मामलों को पहले संबंधित जिले की परिवार कल्याण समिति (FWC) को निपटारे के लिए भेजा जाना चाहिए, और इस दौरान यानी पहले के दो महीनों तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मंगलवार को इन दिशानिर्देशों को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, "इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 13 जून 2022 को क्रिमिनल रिवीजन नंबर 1126/2022 के विवादित फैसले में अनुच्छेद 32 से 38 के तहत 'आईपीसी की धारा 498ए के दुरुपयोग से बचाव के लिए परिवार कल्याण समितियों के गठन' के संबंध में तैयार किए गए दिशानिर्देश प्रभावी रहेंगे और उपयुक्त अधिकारियों द्वारा लागू किए जाएंगे।" सुप्रीम कोर्ट ने पहले कर दिया था निरस्त बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जारी यह दिशानिर्देश 2017 में राजेश शर्मा एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले पर आधारित हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2018 में सोशल एक्शन फॉर मानव अधिकार बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ इसे संशोधित कर दिया था बल्कि इसे निरस्त भी कर दिया था। इस वजह से FWC निष्क्रिय हो गए थे। बहरहाल, कल के फैसले के साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट का वे दिशानिर्देश अब लागू हो गए हैं। प्रत्येक जिले में FWC को भेजा जाएगा मामला उन दिशा निर्देशों के मुताबिक, प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के बाद, "शांति अवधि" (जो कि प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के दो महीने बाद तक है) समाप्त हुए बिना, नामजद अभियुक्तों की कोई गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस "शांति अवधि" के दौरान, मामला तुरंत प्रत्येक जिले में FWC को भेजा जाएगा। दिशा निर्देशों में कहा गया है कि केवल वही मामले FWC को भेजे जाएँगे, जिनमें IPC की धारा 498-A के साथ-साथ, कोई क्षति न पहुँचाने वाली धारा 307 और IPC की अन्य धाराएँ शामिल हैंऔर जिनमें कारावास 10 वर्ष से कम है।