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जेलेंस्की का बड़ा बयान: कहा- भारत पर टैरिफ लगाना बिल्कुल सही कदम

कीव  यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky on US Tariff) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की टैरिफ नीति का खुलकर समर्थन किया है। जेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाकर बिल्कुल सही किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो देश रूस से व्यापार कर रहे हैं, उन पर टैरिफ लगाना एक बेहतरीन कदम है। 'रूस के साथ व्यापार पूरी तरह खत्म करना होगा' जेलेंस्की ने एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि यूरोपीय देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। उनका मानना है कि रूस के साथ व्यापार पूरी तरह खत्म करना होगा, तभी पुतिन पर असली दबाव डाला जा सकेगा। जेलेंस्की ने कहा, “हमें लगता है कि पुतिन पर और कड़ा दबाव डालने की जरूरत है और यह काम अमेरिका को करना चाहिए।” उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि केवल वही रूस को रोकने की क्षमता रखते हैं। “मुझे पूरा विश्वास है कि ट्रंप इस दिशा में सफल होंगे,” जेलेंस्की ने कहा। भारत और रूस को लेकर बयान जेलेंस्की से पूछा गया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनफिंग एक साथ एससीओ समिट में नजर आए थे। इस पर ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। इसके बाद ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर कड़े टैरिफ लगाए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जेलेंस्की ने कहा, “मुझे लगता है कि जो देश रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, उन पर टैरिफ लगाना बिल्कुल सही है।” यूरोपीय देशों पर नाराजगी जेलेंस्की ने विशेष रूप से यूरोपीय देशों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देश आज भी रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, जिससे पुतिन को आर्थिक सहारा मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “यह कहीं से भी सही नहीं है। हमें रूस से हर तरह की खरीदारी बंद करनी होगी।” ट्रंप और पुतिन की मुलाकात पर टिप्पणी जेलेंस्की ने यह भी बताया कि तीन हफ्ते पहले अलास्का में ट्रंप और पुतिन की मुलाकात हुई थी, लेकिन इसके बाद भी रूस का रवैया नहीं बदला। रूस लगातार यूक्रेन पर हमले कर रहा है। ऐसे में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना ही एकमात्र समाधान है। जेलेंस्की ने दोहराया कि रूस के साथ सभी डील्स बंद करनी होंगी और यह काम सिर्फ अमेरिका कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रंप इस दिशा में निर्णायक कदम उठाएंगे।

डिनर पार्टी में मारपीट की नौबत: ट्रंप के सामने भिड़े वित्त मंत्री बेसेंट और वरिष्ठ अफसर

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डिनर पार्टी में उनके दो टॉप इकोनॉमिक अधिकारी मारपीट की नौबत तक पहुंच गए. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि एक अधिकारी ने दूसरे के सामने कहा कि 'तेरा मुंह तोड़ दूंगा… बाहर चल'. यह घटना वाशिंगटन डीसी में एक विशेष क्लब "एक्जीक्यूटिव ब्रांच" के उद्घाटन और एक पॉडकास्ट होस्ट चमथ पालिहपितिया के जन्मदिन समारोह के दौरान हुई. ट्रंप के जिन दो अफसरों के बीच मारपीट की नौबत आई वे हैं सेक्रेटरी ऑफ फाइनेंस यानी कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के डायरेक्टर बिल पुल्टे के बीच.  सीएनएन के अनुसार एग्ज़ीक्यूटिव क्लब में एक रात्रिभोज के दौरान स्कॉट बेसेन्ट ने पुल्टे के मुंह पर मुक्का मारने की धमकी दी. सूत्रों के अनुसार बेसेंट  को पता चला कि बिल पुल्टे ट्रंप के सामने उनकी चुगली कर रहे हैं.  इसकी जानकारी मिलते ही स्कॉट बेसेन्ट आपे से बाहर हो गए और उन्होंने बिल पुल्टे के चेहरे पर मुक्का मारने की धमकी दी.  यह घटना 4 सितंबर 2025 को वाशिंगटन डीसी में एक निजी डिनर के दौरान हुई. इस डिनर में कई बड़े नाम मौजूद थे जैसे ट्रांसपोर्टेशन सेक्रेटरी सीन डफी, कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड लुटनिक, इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम, और नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड. लगभग 30 मेहमानों के लिए एक लम्बी मेज सजाई गई थी जिस पर उच्च श्रेणी के क्रिस्टल और चीनी मिट्टी के बर्तन लगे थे.  लेकिन कॉकटेल पार्टी के शोरगुल के बीच बेसेंट ने पुल्टे पर गालियों से भरी तीखी टिप्पणी की. दरअसल खबर यह है कि स्कॉट बेसेन्ट ने कई लोगों से सुना था कि फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के निदेशक ट्रंप के सामने उनकी बुराई कर रहे थे.  मौका मिलते ही बेसेंट ने पुल्टे से कहा, "तुम राष्ट्रपति से मेरे बारे में क्यों बात कर रहे हो? भाड़ में जाओ." "मैं तुम्हारे मुंह पर मुक्का मार दूंगा." अमेरिकी राजनीति पर गहरी नजर रखने वाली वेबसाइट पॉलटिको में इस झगड़े की विस्तार से रिपोर्ट छपी है.  बेसेंट की प्रतिक्रिया देख पुल्टे स्तब्ध लग रहा था. चश्मदीदों के अनुसार इस तनावपूर्ण मुठभेड़ के बाद क्लब के सह-मालिक और फाइनेंसर ओमीद मलिक को हस्तक्षेप करना पड़ा. लेकिन बेसेंट को यह मंजूर नहीं था. वह पुल्टे को पार्टी से ही बार निकलवाना चाहता था.  बेसेंट ने क्लब मलिक से कहा, "या तो वो यहां रहेगा या मैं. तुम मुझे बताओ कि यहां से कौन निकलेगा." "या फिर," उसने आगे कहा, "हम बाहर जा सकते हैं." "क्या करने?" पुल्टे ने पूछा. "बात करने?" "नहीं," बेसेंट ने जवाब दिया. "मैं तुम्हारी पिटाई कर दूंगा." स्थिति को शांत करने के लिए मलिक ने उन लोगों को अलग किया और बेसेंट को शांत करने के लिए क्लब के दूसरे हिस्से में ले गए. डिनर के दौरान बेसेंट और पुल्टे को मेज के विपरीत छोर पर बिठाया गया. इस घटना पर बेसेंट, पुल्टे, मलिक और व्हाइट हाउस ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.  ट्रंप को उम्मीद थी तीनों साथ मिलकर काम करेंगे ट्रंप ने मई में घोषणा की थी कि बेसेंट, वाणिज्य मंत्री ल्यूटनिक और पुल्टे मिलकर काम करेंगे. लेकिन ट्रंप प्रशासन के सूत्रों के अनुसार इन अफसरों के बीच एक तरह की ज़मीनी जंग छिड़ी हुई है. इस विवाद से परिचित कुछ लोगों का कहना है कि बेसेंट का मानना ​​है कि पुल्टे ने खुद को उन मामलों में शामिल कर लिया है जिसे वित्त मंत्री अपना अधिकार क्षेत्र मानते हैं. ट्रंप से कई सीट दूर बैठे बेसेंट यह पहली बार नहीं है जब बेसेंट का ट्रंप के किसी सलाहकार से झगड़ा हुआ हो. इस साल की शुरुआत में कई सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि बेसेंट का एलॉन मस्क से तीखी बहस हुई थी.   बेसेंट रविवार को ट्रंप के साथ यूएस ओपन में शामिल हुए हालांकि उन्हें राष्ट्रपति से कुछ सीटें दूर बैठाया गया था. 

नेपाल राजनीति में हलचल: दो मंत्रियों के इस्तीफे से ओली सरकार पर संकट, सहयोगी पार्टी ने भी किया किनारा

काठमांडू  नेपाल में Gen-Z प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है. गृह मंत्री के बाद मंगलवार को कृषि और पशुपालन विकास मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के बजाय सत्तावादी दिशा में जा रहा है. अपने इस्तीफे में नेपाली कांग्रेस के सांसद ने लिखा कि सरकार ने नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को मान्यता देने के बजाय दमन, हिंसा और बल प्रयोग का रास्ता अपनाया है, और इसलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं. नेपाल सरकार के मंत्री ने कहा कि यह तरीका लोकतंत्र की जगह सत्तावाद की ओर देश को ले जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि वह सत्ता में बने रहकर इस सवाल का जवाब नहीं दे सकते कि आखिर क्यों सरकार ने उस पीढ़ी के खिलाफ हिंसा का रास्ता चुना, जिसके साथ मिलकर राष्ट्र का निर्माण होना चाहिए. पहले गृहमंत्री रमेश लेखक ने दिया इस्तीफा रामनाथ अधिकारी का यह कदम सोमवार को गृहमंत्री रमेश लेखक के इस्तीफे के एक दिन बाद सामने आया है. रमेश लेखक ने सोमवार शाम प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. यह इस्तीफा भी Gen-Z प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मौतों के बाद आया. केपी ओली से इस्तीफा देने की मांग नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफा देने की मांग की है. उन्होंने कहा, "निर्दोष युवाओं की मौत अनावश्यक रूप से हुई है. इसके लिए प्रधानमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और तुरंत पद छोड़ना चाहिए." नेपाली कांग्रेस की ओली सरकार से अलग होने की तैयारी  थापा ने आगे कहा कि नेपाली कांग्रेस इस स्थिति की केवल गवाह या सहभागी बनकर नहीं रह सकती. उन्होंने साफ किया कि वह इस मुद्दे को पार्टी की बैठक में भी मजबूती से उठाएंगे और पार्टी को सरकार से अलग होने पर जोर देंगे. गौरतलब है कि सोमवार को हुए प्रदर्शनों में कमोबेश 20 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे. सरकार की तरफ से सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया, जिसे विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने दमनकारी करार दिया. अब लगातार दो मंत्रियों के इस्तीफे और नेपाली कांग्रेस महासचिव की सख्त मांग ने प्रधानमंत्री ओली की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

NDA का पलड़ा भारी! 427 से ज्यादा सांसदों का समर्थन, उपराष्ट्रपति चुनाव में PM मोदी ने किया मतदान की शुरुआत

नई दिल्ली देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद के लिए वैचारिक बनाम संख्यात्मक मुकाबले का मंच तैयार है. मंगलवार को कुल 782 सांसद (लोकसभा और राज्यसभा दोनों से) उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान करने जा रहे हैं. जीत सुनिश्चित करने के लिए, किसी भी उम्मीदवार को 391 वोटों के साधारण बहुमत की जरूरत होती है. वर्तमान राजनीतिक अंकगणित के मुताबिक, सत्तारूढ़ एनडीए को पहले से ही करीब 427 सांसदों का समर्थन हासिल है, जो स्पष्ट रूप से बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, पीएम मोदी ने डाला पहला वोट . कुछ दलों ने मतदान से बनाई दूरी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन की संभावनाएं और मज़बूत हो गई हैं. इस बीच, सात सांसदों वाले बीजू जनता दल (बीजेडी) और चार सांसदों वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और अकाली दल ने मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है. विपक्षी गठबंधन, INDIA ब्लॉक के पास करीब 324 सांसदों का समर्थन है. ऐसे में संख्याबल के आधार पर एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का अगला उपराष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है. उनके खिलाफ विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी वैचारिक लड़ाई लड़ने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों पक्षों की तरफ से किस उम्मीदवार को कितना समर्थन हासिल है, आइए जानते हैं. एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): लोकसभा – 240 सांसद राज्यसभा – करीब 100 सांसद तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) लोकसभा – 16 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद जनता दल (यूनाइटेड) जेडीयू लोकसभा – 12 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): लोकसभा – 5 सांसद शिवसेना (शिंदे गुट) लोकसभा – 7 सांसद राज्यसभा – करीब 3 सांसद जन सेना पार्टी (जेएसपी) लोकसभा – 2 सांसद जनता दल (सेक्युलर) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) लोकसभा – 2 सांसद अपना दल, एजीपी, एजेएसयू, एचएएम (एस), अजीत पवार का एनसीपी गुट, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी (यूपीपी) और चुनिंदा निर्दलीय जैसे अन्य छोटे सहयोगी दल भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले हैं.  INDIA ब्लॉक के साथ 324 सांसद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) लोकसभा – 99 सांसद राज्यसभा – 27 सांसद समाजवादी पार्टी (सपा) लोकसभा – 37 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लोकसभा – 29 सांसद राज्यसभा – 13 सांसद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) लोकसभा – 22 सांसद राज्यसभा – 10 सांसद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) लोकसभा – 9 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद एनसीपी (शरद पवार गुट) लोकसभा – 8 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 5 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सीपीएम लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) लोकसभा – 2 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद अन्य छोटे सहयोगी, जैसे वीसीके (2 सांसद), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल – 3 सांसद), आरएसपी (1), और अन्य भी INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार के पक्ष में वोट करेंगे. संभावित नतीजा एनडीए के पास पहले से ही बहुमत से कहीं ज़्यादा संख्याबल है और वाईएसआर कांग्रेस का भी समर्थन मिल रहा है, इसलिए सत्तारूढ़ गठबंधन अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है. दूसरी ओर, 300 से ज़्यादा सांसदों की मज़बूत संख्या के बावजूद, INDIA ब्लॉक चुनौती से काफ़ी पीछे है.

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का बड़ा रक्तदान अभियान, पोस्टर भी हुआ जारी

 नई दिल्ली अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से 17 सितंबर को विश्वव्यापी मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। देशभर के शहरों के साथ 50 से ज्यादा देशों में 7500 से अधिक शिविर आयोजित किए जाएंगे। रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में भी रक्तदान शिविर आयोजित होंगे, जिसमें बड़ी संख्या में लोग रक्तदान करेंगे। सिक्किम में राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर, पंजाब में राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 के पोस्टर का विमोचन किया। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने बैनर का विमोचन किया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से गत 10 वर्षों में आयोजित मेगा रक्तदान शिविरों में 10 लाख से अधिक यूनिट रक्त एकत्र किया जा चुका है। इस बार फिर से कीर्तिमान रचने की तैयारी है। परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि वैश्विक स्तर पर रक्त की कमी को पूरा करने, युवाओं को रक्तदान के प्रति जागरूक करने एवं मानवता की सेवा के उद्देश्य से यह आयोजन होगा। 2022 में एकत्र हुआ था 5600 यूनिट ब्लड बता दें कि 17 सितंबर को अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का स्थापना दिवस है। इस मौके पर 2022 में भी रक्तदान शिविर का आयोजन कई शहरों में किया गया था, जिसमें 5600 यूनिट ब्लड एकत्र हुआ था. इस ब्लड को जरूरतमंदों तक पहुंचाकर उनकी मदद की गई। तेरापंथ युवक परिषद ने ज्यादा से ज्यादा संख्या में रक्तदान कर कैंप को सफल बनाने की अपील की है।

आज उपराष्ट्रपति चुनाव का परिणाम, सांसदों की कल हुई मतदान ट्रेनिंग के बाद हुआ रोमांचक मुकाबला

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति के लिए आज मंगलवार को मतदान होगा। उसी दिन शाम तक नतीजे घोषित होंगे। इसके साथ ही देश को 50 दिन बाद जगदीप धनखड़ की जगह नया उपराष्ट्रपति मिलेगा। 21 जुलाई को धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के चलते चुनाव हो रहा है। पिछले दो दशकों में उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत का मार्जिन लगातार बढ़ा है। 2002 में भैरों सिंह शेखावत ने 149 वोट से जीत दर्ज की थी। वहीं, 2022 में धनखड़ ने विपक्ष की मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया था। NDA ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुदर्शन रेड्‌डी को उम्मीदवार बनाया है। आंकड़ों में NDA को स्पष्ट बढ़त है। हालांकि संसद में विपक्ष की मजबूती से पिछले दो दशक में पहली बार मुकाबला करीबी हो सकता है।  भाजपा सांसदों को उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग की जानकारी दी गई । वहीं, इंडिया गठबंधन भी अपने सांसदों को मतदान प्रक्रिया समझाने के लिए मॉक पोल हुआ । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहयोगी दलों को डिनर भी दिया । चुनाव का शेड्यूल: सुबह 10 बजे वोटिंग, 6 बजे नतीजे मतदान 9 सितंबर, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन में होगा। वोटों की गिनती शाम 6 बजे से और तुरंत परिणाम घोषित होंगे। हर सांसद को विशेष पेन से बैलेट पर पहली वरीयता दर्ज करनी होगी। ऐसा न करने पर वोट अमान्य होगा। हर वोट का मूल्य एक समान होगा। 2017 में 11 और 2022 में 15 वोट अमान्य हुए थे। नियम: लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य देते हैं वोट उपराष्ट्रपति पद के लिए लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य वोट देते हैं। हालांकि इसके लिए व्हिप नहीं जारी हो सकती। सभी सांसद पार्टी लाइन पर वोट करें तो एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन के 439 और विपक्ष के रेड्डी के 324 वोट माने जा रहे हैं। हालांकि गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग दोनों तरफ से समीकरण बिगाड़ सकती है। इसलिए दोनों ओर से पूरी तैयारी की जा रही है। लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 542 है। एक सीट खाली है। एनडीए के 293 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में 245 सांसद हैं। 5 सीट खाली हैं। एनडीए के पास 129 सांसद हैं। यह मानते हुए कि उपराष्ट्रपति के लिए नामांकित सदस्य भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। इस तरह, सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत के लिए 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगस्त 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। वहीं विपक्षी उम्मीदवार मार्गेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे। तब 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था। 2000 से लगातार बढ़ा जीत का अंतर 2002: भैरों सिंह शेखावत (एनडीए) ने सुशील शिंदे (कांग्रेस) को 149 वोट से हराया। 2007: हामिद अंसारी (यूपीए) ने नजमा हेपतुल्ला (एनडीए) को 233 वोट से हराया। 2012: अंसारी दोबारा निर्वाचित हुए। एनडीए के जसवंत सिंह को 252 वोट से हराया। 2017: एनडीए के वेंकैया नायडू ने विपक्ष के गोपालकृष्ण गांधी को 272 वोट से मात दी। 2022: धनखड़ ने एनडीए प्रत्याशी के तौर पर मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया। उपराष्ट्रपति चुनाव का 'नंबर गेम' समझें उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करते हैं. इस लिहाज से दोनों सदनों के कुल सांसदों की संख्या 781 है. इस लिहाज से जीत के लिए 392 सांसदों का समर्थन चाहिए. लोकसभा – 542 (अध्यक्ष को छोड़कर) एनडीए: 293 विपक्ष: 234 अन्य: 15 राज्यसभा – कुल संख्या 245-6 = 239 एनडीए: 132 विपक्ष: 77 अन्य: 30 'संख्यात्मक' लड़ाई बनाम 'नैतिक' लड़ाई! एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है. ऐसे में शुरू से ही यह बात स्पष्ट थी कि विपक्ष दक्षिण से एक उम्मीदवार उतारेगा. विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक ने तेलंगाना से आने वाले बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर चुनावी लड़ाई को संख्यात्मक से ज़्यादा प्रतीकात्मक बना दिया है. 'इंडिया' ब्लॉक अपने घटक दलों को एकजुट रखने के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त संख्या जुटाने की उम्मीद लगाए है, क्योंकि तेलुगु अस्मिता के ज़रिए वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों को लुभाने की कवायद है. सुदर्शन रेड्डी ने जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात की, लेकिन जगन ने उनका समर्थन करने में असमर्थता जताई, क्योंकि जगन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एनडीए उम्मीदवार का समर्थन देने का वादा कर चुके थे. हालांकि, विपक्ष इस बात को समझने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उन्होंने संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की भावना की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की प्रशंसा की. साथ ही जगन ने अनुरोध किया कि सुदर्शन की उम्मीदवारी का समर्थन करने में उनकी असमर्थता को गलत न समझा जाए. विपक्ष को 'अंतरात्मा की आवाज़' का सहारा विपक्ष उम्मीद कर रहा है कि उपराष्ट्रपति का चुनाव जितना साफ दिख रहा है, उतना है नहीं. कई सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग कर सकते हैं. बी. सुदर्शन रेड्डी कह भी चुके हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव में व्हिप नहीं होता है. ऐसे में कई विपक्षी सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग करेंगे. कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने शराब घोटाले मामले के आरोपी सांसद मिथुन रेड्डी की रिहाई पर टीडीपी और वाईएसआरसी के बीच प्रतिद्वंद्विता का हवाला देते हुए कहा, 'अब अंतरिम ज़मानत पर वह कुछ समय के लिए आज़ाद हैं. इसलिए नहीं कि न्याय हुआ, बल्कि इसलिए कि उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट देना है. असली सस्पेंस यह है कि क्या टीडीपी के लोग बीजेपी के उस उम्मीदवार को वोट देंगे जिसने उन्हें जेल भेजा? या न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी को वोट देंगे जो संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं?' सत्ता पक्ष को 'नंबर गेम' से दिख रही उम्मीद सीपी राधाकृष्णन को एनडीए के 'नंबर गेम' पर अपनी जीत साफ दिख रही है. एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 132 का समर्थन है. इस तरह 425 सांसदों का समर्थन साफ दिख रहा है. इससे एनडीए की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन 2022 में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को मिले 528 वोटों की तुलना में यह कम है. हालांकि, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व सीपी राधाकृष्णन की जीत के मार्जिन को बढ़ाने के लिए … Read more

नए Pakistan Census में खुलासा, मस्जिदों की संख्या स्कूलों और अस्पतालों से बहुत ज्यादा

कराची  अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली किसी से छुपी नहीं है. देश में हालात ऐसे हैं कि लोग दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं. राशन के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहना आम बात हो गई है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है. इन विपरीत परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान पर एक पुरानी कहावत सटीक बैठती है 'घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने.' अब इसी बदहाली की असली तस्वीर सामने आई है. हाल ही में पाकिस्तान ने पहली बार अपनी आर्थिक जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, और यह रिपोर्ट बहुत ही चौंकाने वाली है. आर्थिक रिपोर्ट से मिले आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश की अर्थव्यवस्था किस कदर चरमरा चुकी है. पाकिस्तान में 6,00,000 से ज्यादा मस्जिदें और 36,000 मदरसे हैं, जबकि मात्र 23,000 कारखाने हैं। पाकिस्तान की पहली आर्थिक जनगणना में ये बात सामने आई है। इसे पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने जारी किया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान करीब 61 हजार करोड़ रुपए के बेलआउट पैकेज की दूसरी समीक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ बातचीत कर रहा है। मात्र 2.42 लाख स्कूल और 214 यूनिवर्सिटी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 2,42000 स्कूल, 11568 कॉलेज और मात्र 214 यूनिवर्सिटी हैं। कॉलेजों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत ज्यादा है। इससे पता चलता है कि शिक्षा और कल-कारखानों की जगह देश ने मस्जिदों और मदरसों पर निवेश किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 27 लाख रिटेल शॉप्स, 1.88 लाख होलसेल की दुकानें, 2.56 लाख होटल और 1.19 लाख अस्पताल हैं। 250 से ज्यादा रोजगार वाले मात्र 7086 प्रतिष्ठान पाकिस्तान के अंदर सबसे ज्यादा विकसित राज्य पंजाब है, जहाँ देश की 58 फीसदी प्रतिष्ठान हैं। इसके बाद सिंध में 20 फीसदी, खैबर पख्तूनख्वा में 15 फीसदी और बलूचिस्तान में 6 फीसदी हैं। राजधानी इस्लामाबाद में 1 फीसदी से कम प्रतिष्ठान हैं। पंजाब में मदरसे और मस्जिदें भी सबसे ज्यादा हैं। देश में छोटे कारोबार का बोलबाला हैं। यहाँ 71 लाख ऐसे बिजनेस हैं जहाँ 1 से 50 लोग काम करते हैं। जबकि 35351 ऐसे प्रतिष्ठान हैं जहाँ 50 से 250 लोग काम करते हैं। सिर्फ 7086 ऐसे बिजनेस यूनिट्स हैं जहां 250 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। मस्जिदों- मदरसों की तुलना में फैक्ट्री काफी कम देश में कुल 400 लाख स्थाई यूनिट्स हैं जिनमें से 72 लाख रोजगार देती हैं। देश में 2023 तक 254 लाख लोग काम कर रहे थे। इनमें सबसे ज्यादा सर्विस सेक्टर में 113 लाख लोग हैं यानी करीब 45 फीसदी। 76 लाख लोग सोशल सेक्टर में हैं जो करीब 30 फीसदी हैं। जबकि 22 फीसदी लोग प्रोडक्शन सेक्टर में काम करते हैं। देश में करीब 6.04 लाख मस्जिदें हैं जबकि 36331 मदरसे हैं। पाकिस्तान के हालात को ये रिपोर्ट बयाँ कर रहा है। गंभीर आर्थिक संकट की एक अहम वजह पिछले कुछ दशकों में देश में इस्लामिक कट्टरता को माना जा रहा है। यही वजह है कि देश में मस्जिदों, मदरसों की संख्या, कारखानों से कहीं अधिक है। शिक्षण संस्थान कम हैं और जो हैं वहाँ की शिक्षा का स्तर भी विश्वस्तरीय नहीं है। जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें पाकिस्तान का हाल      देश भर में केवल 11,568 कॉलेज और 214 विश्वविद्यालय हैं। स्वास्थ्य सेवा भी लोगों के हिसाब से अपर्याप्त हैं। कुपोषण और बीमारी से जूझ रहे देश में 2,083 लोगों पर सिर्फ एक अस्पताल उपलब्ध है।     1.09 करोड़ लोग पशुपालन, सिलाई, खाद्य पैकेजिंग और ऑनलाइन सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जो औपचारिक रोजगार के अवसरों की कमी को दर्शाता है।     आर्थिक जनगणना के अनुसार, 71.43 लाख व्यवसाय 253.44 लाख लोगों को रोजगार दे रहे हैं। इनमें केवल 2,50,000 ही औपचारिक रूप से प्रतिभूति और विनिमय आयोग में पंजीकृत हैं, जो अविकसित अर्थव्यवस्था की प्रकृति को दर्शाता है।     सूक्ष्म और लघु उद्यम व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र पर हावी हैं, जहां 95 प्रतिशत प्रतिष्ठान दस से कम लोगों को रोजगार देते हैं।     अकेले सेवा क्षेत्र में लगभग 58 प्रतिशत कार्यबल मौजूद है, जबकि उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र बहुत पीछे है। क्षेत्रीय असमानताएं भी उजागर हुई हैं, जहां आर्थिक प्रतिष्ठानों और सामाजिक बुनियादी ढांचे की संख्या के मामले में पंजाब और सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान से आगे हैं।  

नेपाल में बवाल, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों में झड़प; PM ओली ने बुलाई आपात बैठक

 काठमांडू  पड़ोसी मुल्क नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाए जाने को लेकर युवक सड़कों पर उतर आए. काठमांडू समेत कई शहरों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी हुई है. हालात पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लगाया गया और सेना की तैनाती की गई है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार बैन हटाए और पारदर्शिता लाए. काठमांडू में तो प्रदर्शन हिंसक हो गया और युवाओं ने संसद भवन में घुस कर जमकर तोड़फोड़ औेर आगजनी की. पुलिस ने फिर आंसू गैस, पानी की बौछार और यहां तक की रबर बुलेट का इस्तेमाल किया.हालात पर काबू पाने के लिए नेपाल की सरकार ने काठमांडू, पोखरा समेत कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया और सड़कों पर सेना की तैनाती कर दी है.  इस प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की मौत भी हुई है और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के आवास पर सुरक्षा बढ़ाई गई नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार को लेकर ओली सरकार के खिलाफ युवाओं का प्रदर्शन हिंसक हो गया है. अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. युवा प्रदर्शनकारी पीएम ओली के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.  काठमांडू में कर्फ्यू का दायरा बढ़ाया गया काठमांडू में कर्फ्यू का दायरा बढ़ाया गया है. अब पाबंदियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के आवासों के साथ-साथ सिंहदरबार क्षेत्र तक लागू होंगी. शुरुआत में कर्फ्यू केवल बनेश्वर के कुछ हिस्सों में लगाया गया था, जब प्रदर्शनकारी प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुस आए थे. लेकिन स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इसे बढ़ाकर राष्ट्रपति भवन (शीतल निवास क्षेत्र), महाराजगंज, उपराष्ट्रपति का निवास (लैनचौर), सिंहदरबार के चारों ओर, प्रधानमंत्री का निवास (बालुवाटार) और आसपास के इलाकों तक कर दिया है.    मरने वालों का आंकड़ा 20 पहुंचा, 25 की हालत नाज़ुक नेपाल में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़प में मौत का आंकड़ा 20 पहुंच गया है. इनमें से 18 की मौत काठमांडू और दो की इटाहारी में हुई. संसद भवन के पास अभी माहौल तनावपूर्ण है.  दूसरी ओर 100 से ज्यादा लोग घायल हैं. इनमें से 25 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ने की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हुई है.   काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान घायल लोगों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश  रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय के सचिव प्रदीप पौडेल ने निर्देश दिया है कि राजधानी काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए.  तीन और शहरों में लगा कर्फ्यू युवाओं के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए सरकार कर्फ्यू का दायरा लगातार बढ़ाते जा रही है. रुपन्देही, बुटवल और भैरहवा में अब कर्फ्यू लगा दिया गया है. सूत्रों के अनुसार, इसके अलावा स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए नेपाल की सेना की ओर से सड़कों पर सैनिकों की संख्या में वृद्धि की गई है. भैरहवा भारत से लगने वाली सीमा पर ही स्थित शहर है. नेपाल मानवाधिकार आयोग ने युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई की निंदा की नेपाल मानवाधिकार आयोग ने युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई की निंदा की है. आयोग ने कहा कि पुलिस और सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए अत्याधिक बल का प्रयोग किया. कभी आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां, कभी बैटन तो कभी पानी की तोप का इस्तेमाल किया गया.  नेपाल के पत्रकार ने प्रदर्शन के स्तर बढ़ने के बीच बताई तीन मुख्य वजह आजतक से नेपाल के पत्रकार साबिन धामला ने युवाओं के प्रदर्शन से बातचीत की है. उन्होंने कहा- काठमांडू के अलावा अन्य शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं और स्थिती और बिगड़ते जा रही है. Gen-Z के आंदोलन को सरकार ने पहले कम आंका गया. सरकार सोच रही थी कि इस प्रदर्शन का कोई लीडर नहीं तो ये लोग क्या ही कर लेंगे. नाखुश-नाराज और जो बेचैन युवा थे, उसको ये सोशल मीडिया पर पाबंदी ट्रिगर कर गई. ये बड़े कारण हैं जो प्रदर्शन को और व्यापक कर दिया.  नेपाल में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे वजह मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध है. नेपाल की सड़कों पर हजारों की संख्या में युवाओं की भीड़ देखी जा रही है. ये लोग भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर लगे बैन को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. आपको बता दें कि नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब और स्नैपचैट पर पाबंदी लगा दी गई है, जिससे युवा काफी नाराज हैं.  बुटवल, भैरहवा और ईटहरी में सख्‍ती नेपाल में Gen Z प्रोटेस्ट के तेज होते ही प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है. बुटवल, भैरहवा और ईटहरी में धारा 144 जैसी पाबंदियाँ लागू कर दी गईं, जिसके तहत किसी भी तरह की सभा, रैली या धरना-प्रदर्शन पर रोक रहेगी. रूपनदेही और सुनसरी ज‍िला प्रशासन ने ऐलान किया कि हालात को काबू में रखने और शांति बहाल करने के लिए यह कदम उठाया गया है.  नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के घर पथराव नेपाल के झापा ज‍िले के दमक में हालात गरमा गए जब लोगों ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के घर पर पत्थर बरसा दिए. गुस्से में आए प्रदर्शनकारियों ने ईस्ट-वेस्ट हाइवे पर टायर जलाकर रोड जाम कर दिया, जिससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं. माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की. फिलहाल इलाके में भारी सुरक्षा तैनात है. लोगों का कहना है कि यह विरोध स्थानीय मुद्दों और ओली के कामकाज को लेकर बढ़ती नाराज़गी की वजह से भड़का. पुलिस का दावा है कि अब स्थिति काबू में है, लेकिन नजर लगातार रखी जा रही है. नेपाल में सेना ने संभाला सड़कों पर मोर्चा नेपाल में प्रदर्शन हिंसक होने के बाद सड़कों पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया है. वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन पुलिस की फायरिंग के बाद चीज़ें बिगड़ गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन पर गोलियां चला रही है.

सेना और नौसेना कमांडो का 17000 फीट पर अभ्यास, क्षमता और समन्वय बढ़ाने का प्रयास

कोलकाता भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज और नौसेना के मरीन कमांडो (मार्कोस) ने सिक्किम में बेहद कठिन परिस्थितियों में संयुक्त स्कूबा और लड़ाकू डाइविंग अभ्यास किया। यह अभ्यास  17,000 फीट की ऊंचाई पर एक सप्ताह तक चला। रक्षा अधिकारियों ने इस संयुक्त अभ्यास के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों बलों के बीच तालमेल बढ़ाना, उनके विशेष युद्ध कौशल को निखारना और विविध व चुनौतीपूर्ण इलाकों में अभियानों के लिए उनकी तैयारी सुनिश्चित करना है। तथा इससे यह सुनिश्चित करना होता है कि भारत की विशिष्ट सेनाएं हिमालय से लेकर गहरे समुद्र तक विविध भूभागों में मिशन के लिए तैयार रहें।   उन्होंने बताया कि उच्च ऊंचाई वाले प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने ओपन सर्किट एयर डाइविंग, क्लोज सर्किट प्योर ऑक्सीजन डाइविंग, अत्यधिक ठंडे पानी की स्थिति में 17 मीटर की गहराई तक गोता लगाया तथा कॉम्बैट नाइट डाइविंग की। 30 अगस्त से पांच सितंबर तक चला अभ्यास यह प्रशिक्षण 30 अगस्त से 5 सितंबर के बीच बर्फीले पानी और दुर्गम इलाके में आयोजित किया गया। इस दौरान कमांडो ने ओपन-सर्किट एयर डाइविंग, क्लोज-सर्किट प्योर ऑक्सीजन डाइविंग, और अत्यधिक ठंडे पानी में 17 मीटर की गहराई तक गोताखोरी का अभ्यास किया। इसके अलावा, उन्होंने रात के समय में भी लड़ाकू गोताखोरी का भी अभ्यास किया। इस बारे में एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि इस तरह का प्रशिक्षण सैनिकों को भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए तैयार करने के लिए आवश्यक है, जहां अप्रत्याशितता ही एकमात्र स्थिरता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास से दुर्लभ उच्च ऊंचाई की स्थितियों में काम करना, बर्फीले पानी में सटीक कार्य करना और संयुक्त अभियानों में लड़ाकू गोताखोरी को एकीकृत करते हैं। इस दौरान टीम कमांडर ने कहा कि इन चरम स्थितियों में प्रशिक्षण से सैनिक की सहनशक्ति, कौशल और मानसिक शक्ति के हर पहलू का परीक्षण होता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि जब भी आवश्यकता हो, हमारी टीमें किसी भी वातावरण में प्रभावी ढंग से काम कर सकें, चाहे वह कितना भी कठिन या चुनौतीपूर्ण क्यों न हो।  

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में मुठभेड़ जारी, सुरक्षाबलों ने आतंकियों को किया निशाना

जम्मू जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में अब तक दो आतंकियों को मार गिराया गया है, जबकि भारतीय सेना का एक जवान बलिदान हो गया है। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवान घायल भी हुए हैं। ऑपरेशन अब भी जारी है। तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाब दिया। फायरिंग में एक अफसर के घायल होने की खबर है। इलाके में तलाशी अभियान जारी है। कश्मीर जोन पुलिस के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर कुलगाम के गुड्डर जंगल में मुठभेड़ हो रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की एसओजी काम पर हैं। तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की है, सुरक्षाबलों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया है। दोनों तरफ से तेज गोलीबारी हुई। खबर मिली है कि एक अफसर घायल हो गया है। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।   भारतीय सेना के अनुसार, अभियान के दौरान एक आतंकवादी मारा गया। एक जूनियर कमीशन अधिकारी घायल हो गया। अभियान जारी है। फिलहाल सुरक्षाबलों ने जंगल को घेर लिया है।