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22 सितंबर से सस्ते होंगे प्रोडक्ट्स? GST कटौती पर दुकानदारों की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली.  सरकार ने दिवाली से पहले देशवासियों को बड़ा तोहफा देते हुए रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले घरेलू सामानों से लेकर कार-बाइक तक पर लागू जीएसटी को घटा दिया है। जीएसटी काउंसिल की बीते 3 सितंबर को हुई बैठक में चार की जगह सिर्फ दो जीएसटी स्लैब रखे गए हैं, जो 5% और 18% के हैं। जबकि 12% और 28% को हटा दिया गया है। इसके बाद तेल, साबुन, शैंपू, दूध, मक्खन, घी से लेकर टीवी, फ्रिज, एसी समेत तमाम सामानों का स्लैब चेंज हुआ है, जिससे इनपर टैक्स घट गया है और नई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस तारीख से ग्राहकों को सस्ते रेट में सामान मिलने लगेगा? आजतक ने दुकानदारों की राय जानी और इसके असर को समझा।।। पुराने स्टॉक को लेकर बड़ी परेशानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 3 सितंबर को जीएसटी रेट कट का ऐलान किए जाने के बाद ये जानने के लिए दुकानदारों से बात की कि क्या 22 सितंबर के बाद खुदरा दुकानदार नई लागू सस्ती दरों पर सामान को घाटा सहकर बेचेंगें और इससे दुकानदारों के बिजनेस पर क्या असर होगा? इस पर खुदरा दुकानदारों और रिटेलरों ने अपनी-अपनी राय रखी। नोएडा में किराने का दुकान चलाने वाले तेजपाल सिंह ने बताया कि रिटेलर के पास तो पुराने माल का स्टॉक भरा पड़ा है। क्योंकि हम इसे थोड़ा-थोड़ा करके बेचते हैं और जीएसटी रेट कट के बाद अभी तो पता ही नहीं रेट कितनी कमी आई है। उन्होंने कहा कि अगर समान आगे से महंगा आएगा, तो फिर हम महंगा बेचेंगे।उन्होंने कहा कि खुदरा दुकानदार 100 ग्राम से 500 ग्राम या किलो के भाव में बेंचते हैं, तो पूरी आने वाले समय में ही कीमतों के बारे में पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।  एक अन्य दुकानदार नरेश का जीएसटी सुधार को लेकर लिए गए फैसले पर कहना है कि सरकार का काम अच्छा है इससे हम लोगों को फायदा होगा, लेकिन आगे देखने वाली बात होगी कि यह कितना असरदार साबित होता है। हम लोग दाल, चीनी, चावल बेचते हैं, तो उनके रेट किस तरह रहेंगे, इसका पता तो नई दरें लागू होने के बाद हम तक पहुंचने वाले सामान के बाद ही सही से पता चल पाएगा। लेकिन जो माल स्टॉक में है, उस पुराने माल को तो हम लोग अभी इसी रेट पर बेचेंगे, जब पीछे से जीएसटी कम होकर आएगा, तो हम भी सस्ता कर देंगे।  सवाल- कितने तैयार हैं दुकानदार?  सरकार के जीएसटी कट के फैसले के बाद चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने भी बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने करीब 400 वस्तुओं और सेवाओं पर  GST दरों में बड़ी कटौती की है, जो 22 सितंबर से लागू होने वाली हैं। इनमें फूड प्रोडक्ट्स से लेकर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें, इलेक्ट्रॉनिक्स, कार-बाइक्स, बीमा पॉलिसी तक शामिल हैं, जो सस्ते हो जाएंगे। सीटीआई के मुताबिक, सरकार चाहती है कि इस बदलाव का सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचे। लेकिन सवाल यह है कि आने वाले दिनों में लोगों को जीएसटी कटौती का फायदा देने के लिए व्यापारी और दुकानदार कितने तैयार हैं? इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यह बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि पहले ही पुरानी दरों वाला हजारों टन माल दुकानों और गोदामों में भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे पुराने सामान पर दाम कैसे घटाएं और ग्राहकों को इसका फायदा कैसे दे पाएं। 22 सितंबर से पहले के माल पर पुरानी दरों का ही टैग और दाम होगा, अब उसी माल को घटे हुए दाम पर बेचने के लिए कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और दुकानदारों को आपसी समन्वय करना होगा। इन तरीकों से हल्का होगा बोझ बृजेश गोयल ने दुकानदारों पर पड़ने वाले बोझ को हल्का करने के कुछ तरीके भी शेयर किए। उन्होंने कहा प्राइस एडजस्टमेंट से पुराने स्टॉक को लेकर पैदा हुई समस्या कम हो सकती है। इसके लिए कंपनियां पुरानी दरों वाले सामान के लिए डीलरों को क्रेडिट नोट देंगी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी डीलर ने साबुन का एक कार्टून पुरानी GST की दरों के हिसाब से खरीदा है और अब उसकी कीमत घट गई है, तो फिर कंपनी उसे बराबर का क्रेडिट देगी, इससे डीलर नुकसान में नहीं रहेगा और ग्राहकों को सामान भी सस्ता मिलेगा। सीटीआई चेयरमैन के मुताबिक, रिटेल सेक्टर की दिग्गज कंपनियां रिलायंस, डीमार्ट के पास मजबूत तकनीकी सिस्टम है, वे अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर और पीओएल मशीनों को तुरंत अपडेट भी कर सकते हैं, लेकिन दूसरी ओर छोटे दुकानदारों और मोहल्लों के दुकान चलाने वाले किराना व्यापारियों को यह बदलाव करने में थोड़ी दिक्कत पेश आ सकती है, क्योंकि उनके पास उस तरह का तकनीक उपलब्ध नहीं है। बृजेश गोयल के मुताबिक, कंपनियों को साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, बिस्कुट जैसे उत्पादों पर नई MRP वाले स्टीकर लगाने पड़ेंगे या फिर हो सकता है कुछ कंपनियां कीमत घटाने की जगह उस सामान के पैकिंग का वजन बढ़ा दें, जैसे 10 रुपये वाले बिस्किट के पैकेट में ज्यादा बिस्किट मिलने लगें, लेकिन प्राइस पुराना ही रहे।  दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती CTI चेयरमैन बृजेश गोयल की मानें, तो कुल मिलाकर सरकार द्वारा तय की गई नई दरें 22 सितंबर से ही लागू होंगी और आम उपभोक्ताओं को GST कटौती का लाभ पहुंचाना छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है, क्योंकि पुरानी जीएसटी दरों का सामान नई दरों के हिसाब से बेचना दुकानदारों के लिए घाटे का सौदा भी साबित हो सकता है।

चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट की हिदायत, SIR डॉक्यूमेंट्स में आधार को किया शामिल

पटना  बिहार में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में अब आधार को भी मान्यता रहेगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में आदेश दिया और चुनाव आयोग से कहा कि 11 अन्य दस्तावेजों की तरह आधार को भी मान्यता दी जाए। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग किसी की ओर से दिए गए आधार की वैधता की जांच कर सकता है। इस तरह अब वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए आधार को भी मान्यता मिल गई है, जिसकी डिमांड लंबे समय से की जा रही थी। बेंच ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को SIR के लिए वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि SIR के लिए आधार कार्ड को पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाए। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार रहेगा कि वह आधार कार्ड की प्रमाणिकता के बारे में जांच कर ले। इस तरह आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड समेत अन्य 11 दस्तावेजों की तरह ही मान्यता मिलेगी। बेंच ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह आज ही आधार कार्ड को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दे ताकि स्पष्ट संदेश दिया जा सके। बेंच ने यह भी कहा कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का ही प्रमाण है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग का पक्ष रख रहे वकील ने यह भी कहा कि SIR के दौरान ऐसे लोग भी पाए गए हैं, जो यहां के वोटर बने हुए थे। लेकिन वास्तव में वे घुसपैठिए हैं और अवैध तौर पर भारत में प्रवेश कर के आए हैं। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह एक समस्या है। इसी को लेकर उन्होंने कहा कि आधार कार्ड का वेरिफिकेशन चुनाव आयोग की ओर से किया जा सकता है। बता दें कि यही वजह है कि चुनाव आयोग कहता रहा है कि आधार कार्ड को पता या फिर नागरिकता का आधार नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया में वोटर्स को पूरा वक्त दिया जाएगा और नामांकन से एक दिन पहले तक यह जारी रहेगा।

अब कर सकेंगे ज्यादा बड़ा ट्रांजैक्शन! NPCI ने बढ़ाई UPI लिमिट, जानें नई सीमा

नई दिल्ली  नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन लिमिट्स में बड़ा बदलाव किया है। नई सीमाएं 15 सितंबर 2025 से लागू होंगी। इसका उद्देश्य रिटेल ग्राहकों को बड़े भुगतानों में सुविधा देना है। खासतौर पर बीमा प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड बिल, सरकारी भुगतान, निवेश और यात्रा जैसे बड़े लेनदेन अब एक ही ट्रांजेक्शन में पूरे किए जा सकेंगे। जहां पहले बड़े भुगतानों को कई हिस्सों में बांटना पड़ता था। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। हालांकि, P2P (पर्सन टू पर्सन) ट्रांसफर की सीमा अभी भी प्रतिदिन 1 लाख रुपये ही रहेगी। क्रेडिट कार्ड और लोन भुगतान नए नियमों के तहत अब क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के लिए प्रति लेनदेन सीमा 5 लाख रुपये और दैनिक सीमा 6 लाख रुपये तय की गई है। इसी तरह लोन और ईएमआई भुगतान की सीमा 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन और दैनिक सीमा 10 लाख रुपये कर दी गई है।   निवेश और बीमा प्रीमियम पहले कैपिटल मार्केट निवेश और बीमा प्रीमियम की अधिकतम सीमा 2 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन और 10 लाख रुपये दैनिक सीमा कर दिया गया है। इससे निवेशक और बीमा ग्राहक दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। यात्रा और सरकारी भुगतान यात्रा उद्योग में अब 5 लाख रुपये तक का भुगतान एक ही ट्रांजेक्शन में संभव होगा। इसी तरह, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और टैक्स पेमेंट्स की सीमा भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। बैंकिंग और फॉरेक्स सेवाएं डिजिटल ऑनबोर्डिंग के जरिए टर्म डिपॉजिट की सीमा पहले 2 लाख रुपये थी। अब इसे 5 लाख रुपये प्रति दिन कर दिया गया है। डिजिटल अकाउंट ओपनिंग की सीमा 2 लाख रुपये ही रहेगी। फॉरेक्स पेमेंट्स (BBPS) की सीमा भी अब 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन और दैनिक 5 लाख रुपये कर दी गई है। क्यों अहम है यह बदलाव     बड़े भुगतान छोटे हिस्सों में बांटने की जरूरत नहीं।     बीमा, ईएमआई, निवेश और सरकारी टैक्स जैसे बड़े लेनदेन आसान।     व्यवसायिक उत्पादकता और डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा।     बैंकों को अपनी जोखिम नीति अनुसार लोअर कैप लगाने की स्वतंत्रता।

साजिश का पर्दाफाश: NIA ने जम्मू-कश्मीर समेत पांच राज्यों में छापेमारी की

श्रीनगर  एनआईए ने आतंकी साजिश मामले में जम्मू-कश्मीर और पांच राज्यों में ताबड़तोड़ ऐक्शन शुरू किया है। सोमवार को कम से कम 22 ठिकानों पर छापेमारी हुई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक आतंकी साजिश से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में बारामूला, कुलगाम, अनंतनाग और पुलवामा जिलों में तलाशी जारी है। जानकारी के मुताबिक मामला आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। एनआईए की टीम सोमवार सुबह ही बारामूला के जंगम गांव पहुंच गई। यहां रशीद लोन के घर पर छापेमारी की गई। इस मामले पर एनआईए ने अब तक कोई बयान जारी नहीं किया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले हैं। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के कुलगाम, अनंतनाग, पुलवामा और बारामुला में तलाशी जारी है। कई जगहों से मोबाइल फोन और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इससे पहले जून में एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में ही 32 ठिकानों पर छापेमारी की थी। बिहार में एनआईए को बड़ी सफलता बिहार में एनआईए को बड़ी सफलता मिली है। एनआईए की टीम ने खालिस्तानी आतंकी शरणजीत को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को छापेमारी के दौरान गोपालपुर से गिरप्तार किया गया। स्वर्ण मंदिर में ग्रेनेड अटैक मामले में शरणजीत कुमार उर्फ शनी आरोपी है। वह पंजाब के गुरदासपुर के बटाला का रहने वाला है।

भयंकर संकट में गाजा, यूएन ने किया अलर्ट, इजरायल की सुप्रीम कोर्ट भी हुई नाराज

गाजा  गाजा में इजरायली हमलों में अब तक 64 हजार लोगों की जान गई है। वहीं भुखमरी से मरने वालों को कोई आंकड़ा ही सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय संगठन गाजा में अकाल को लेकर बेहद चिंतित हैं। यूएन की एजेंसी का भी कहना है कि अगर इजरायल चाहे तो गाजा अकाल से बच सकता है। ग्लोबल हंगर मॉनीटर के मुताबिक हजारों फिलिस्तीनी अब भी भुखमरी का शिकार हैं। वहीं गाजा सिटी में इजरायली हमला तेज होने के बाद यहां स्थिति काफी खराब हो गई है। इजरायल ने मार्च से मई तक 11 महीने के लिए गाजा में मानवीय सहायता पर भी रोक लगा दी थी। वहीं अब इजरायल का दावा है कि वह आम लोगों तक राशन पहुंचा रहा है। वहीं यूएन की एजेंसी के मुताबिक यह सहायता पर्याप्त नहीं है। यूएन ऐड के चीफ टॉम फ्लेचर ने कहा कि समय तेजी से गुजर रहा है। अगर गाजा को अकाल से बचाना है तो इसके लिए बहुत कम समय बचा है। इजरायल की रक्षा एजेंसी COGAT कहना है कि पिछले सप्ताह गाजा में 1900 ट्रंक भेजे गए हैं। धीरे-धीरे सप्लाई बढ़ाई जा रही है। एजेंसी ने कहा, यह सहायता केवल आम लोगों के लिए है ना कि हमास के लिए। इजरायल का कहना है कि गाजा सिटी की बहुमंजिला इमारतों पर हमास का कब्जा है इसलिए आम लोग इसे खाली कर दें। बीते दिनों इजरायल ने गाजा सिटी की कई हाई राइज को निशाना बनाया है। इन हमलों में कम से कम 14 लोग मारे गए। गाजा के लोगों का कहना है कि गाजा सिटी राफाह बन जाए, इससे पहले हमास को इजरायल के साथ बात करके युद्ध खत्म करना चाहिए। इजरायल में भी आम जनता गाजा के इस युद्ध का समर्थन नहीं करती है। शनिवार को भी हजारों लोगों ने युद्ध खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। माना जा रहा है कि गाजा में अब भी 48 इजरायली बंधक जिंदा हैं। इजरायली सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को लताड़ा इजराइल के सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को कहा कि सरकार फलस्तीनी कैदियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध नहीं करा रही। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कैदियों को पर्याप्त भोजन मुहैया कराएं। यह लगभग ढाई साल में ऐसा दुर्लभ मामला है, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने सरकार के खिलाफ कोई फैसला सुनाया है। युद्ध शुरू होने के बाद से इजराइल ने गाजा में हमास से जुड़े होने के संदेह में हजारों लोगों को कैद किया है। हजारों लोगों को महीनों हिरासत में रखने के बाद छोड़ा भी गया है। अधिकार समूहों ने जेलों और हिरासत केंद्रों में कैदियों के साथ बड़े पैमाने पर दुर्व्यवहार होने की जानकारी दी है, जिनमें पर्याप्त मात्रा में भोजन व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध न कराना और अस्वच्छता जैसी समस्याएं शामिल हैं। मार्च में इजराइली जेल में 17 वर्षीय फलस्तीनी लड़के की मौत हो गई थी, जिसके बाद चिकित्सकों ने कहा था कि मौत का मुख्य कारण भूख हो सकती है।

फेसबुक-यूट्यूब बैन के विरोध में नेपाल में हिंसक प्रदर्शन, गोलीबारी में 1 की मौत, 80 घायल

काठमांडू  सोमवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू के न्यू बानेश्वर में मौजूद संसद भवन परिसर में उस समय तनाव फैल गया जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और गेट पार कर संसद के भीतर प्रवेश की कोशिश की. ये प्रदर्शनकारी नई जेनरेशन के वो युवा हैं, जो देश में सोशल मीडिया पर बैन लगने के बाद काफी नाराज हैं. इन युवाओं ने पहले शांतिपूर्ण विरोध की बात कही थी लेकिन प्रदर्शन के उग्र हो गया और वे संसद भवन तक पहुंच गए. नेपाल में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे वजह मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध है. इस प्रदर्शन में मौजूद ज्यादातर प्रदर्शनकारी वही युवा हैं, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं. जब प्रदर्शनकारी बेकाबू होकर संसद परिसर तक पहुंचने लगे तो काठमांडू डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस की ओर से पूरे न्यू बानेश्वर में कर्फ्यू लगा दिया गया है. मुख्य जिला अधिकारी छाबीलाल रिजाल ने सेक्शन 6 के तहत दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से कर्फ्यू लगाया है, जो रात 10 बजे तक लगा रहेगा.  हजारों की संख्या में Gen-Z लड़के और लड़कियां सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारी नेपाल के संसद परिसर में घुस गए. इसे देखते हुए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की.  ये प्रदर्शनकारी नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. इसके मद्देनजर काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया गया है. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.  इस घटना से जुड़ी पल-पल की अपडेट यहां पढ़ें:- – काठमांडू में Gen-Z प्रोटेस्ट के उग्र होने के बाद नेपाली सेना की तैनाती के आदेश दिए गए हैं. – नेपाल सरकार ने मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए इमरजेंसी सुरक्षा बैठक बुलाई है. पुलिस ने रात 10 बजे तक के लिए काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया है.  – काठमांडू में कर्फ्यू का आदेश जारी कर दिया गया है. इसके तहत चार जिलों में किसी के भी प्रवेश या निकास, किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन, सभा, बैठक या घेराबंदी करने पर प्रतिबंध है. – इस प्रोटेस्ट में एक शख्स की मौत हो गई जबकि 80 घायल हो गए. – नेपाल में वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत-नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि SSB ने भारत नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ा दी है. भारत-नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा में SSB तैनात है. SSB ने सुरक्षाकर्मियों और सर्विलांस बढ़ा दिया है.  – यह प्रोटेस्ट लगातार उग्र होता जा रहा है. दमाक में पुलिस फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं. घायलों को अस्पताल ले जाया गया है. – प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हो रही है. प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ काठमांडू के विभिन्न शहरों में यह Gen-Z रिवोल्यूशन शुरू हुआ है. इस दौरान प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुए गए. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. देश की नई युवा पीढ़ी के द्वारा सरकार के द्वारा सोशल मीडिया बैन किए जाने से लेकर भ्रष्टाचार तक के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है.  इस प्रदर्शन में हजारों युवा सड़क पर यात्रा सरकार के खिलाफ नाराबाजी करते दिखाई दे रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान सरकार ने घंटों तक फोन और इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी थी.  काठमांडू के मेयर ने युवाओं के इस प्रोटेस्ट को अपना समर्थन पहले ही दे दिया है. वहीं, प्रधानमंत्री ओली का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि युवाओं को ये पता होगा कि कानून का उल्लंघन करने का क्या खामियाजा भुगतना पड़ता है.  नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया पर क्यों लगाया बैन? नेपाल सरकार ने चार सितंबर को फेसबुक, X, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया है क्योंकि इन प्लेटफॉर्म्स ने नेपाल सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. सरकार ने 2024 में एक नया कानून लागू किया था, जिसके तहत सभी सोशल मीडिया कंपनियों को नेपाल में ऑपरेशन के लिए स्थानीय कार्यालय स्थापित करना जरूरी है और टैक्सपेयर के रूप में पंजीकरण करना अनिवार्य था. इस नियम का पालन नहीं करने पर सरकार ने यह कदम उठाया है. इसके पीछे सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया पर अनियंत्रित कंटेंट जैसे फर्जी खबरें, उकसाने वाले कंटेंट और अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए यह जरूरी था. हालांकि, इस फैसले की व्यापक आलोचना हुई है क्योंकि इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना जा रहा है. कई लोगों का मानना है कि यह प्रतिबंध राजतंत्र समर्थकों के प्रदर्शनों और सरकार विरोधी भावनाओं को दबाने का प्रयास हो सकता है, जो हाल के महीनों में बढ़े हैं. नेपाल सरकार के द्वारा फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप और यूट्यूब जैसे 26 सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने से नाराज युवाओं ने आठ सितंबर से Gen-Z रिवोल्यूशन के नाम से प्रदर्शन शुरू किया है. बता दें कि प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने चार सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और X जैसे 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगा दिया था. सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया पर लगा ये बैन तभी हटेगा, जब ये कंपनियां नेपाल में अपना ऑफिस खोल लें, सरकार के समक्ष पंजीकरण कराएं और गड़बड़ी रोकने के लिए सिस्टम बनाएं. नेपाल में अब तक सिर्फ टिकटॉक, वाइबर, निम्बज, विटक और पोपो लाइव ने ही कंपनी रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन कराया है. 

तूफान Kiko ने बढ़ाया हवाई का संकट, अमेरिकी प्रशासन ने लगाई इमरजेंसी

वाशिंगटन अमेरिका का हवाई राज्य एक शक्तिशाली तूफान का सामना कर सकता है। श्रेणी 4 के तूफान 'किको' (Kiko) के द्वीप समूह के करीब आने के कारण प्रशासन ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। 'द हिल' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) ने बताया कि  सुबह यह तूफान होनोलूलू से लगभग 1,205 मील पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। इसकी हवाओं की रफ्तार 130 मील प्रति घंटे थी और यह 25 मील प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान तक बिग आइलैंड और माउई तक पहुंच सकता है। इसके सोमवार देर रात और सप्ताह के मध्य तक पूर्वी हवाई द्वीप समूह पर अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है। कार्यवाहक गवर्नर सिल्विया ल्यूक ने आपातकाल की स्थिति घोषित करते हुए निवासियों और पर्यटकों से लगातार अपडेट्स पर नजर रखने और आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी क्षति से निपटने के लिए संसाधनों को जुटाने, मलबा हटाने और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के लिए तैयार हैं। कमजोर होकर तट से टकराने की उम्मीद हालांकि, वर्तमान में यह तूफान बहुत शक्तिशाली है, लेकिन हवाई के आस-पास का ठंडा पानी इसके तट के करीब आते-आते इसे कमजोर कर सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बिग आइलैंड पर लैंडफॉल (तट से टकराने) से पहले यह श्रेणी 2 और 1 में बदल जाएगा और संभवतः एक उष्णकटिबंधीय तूफान में परिवर्तित हो जाएगा। तीन दशकों बाद बड़ा खतरा हवाई इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (EMA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि यदि यह तूफान अपनी ताकत बरकरार रखता है, तो हवाई को तीन दशकों में पहली बार किसी बड़े तूफान का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले सितंबर 1992 में आए तूफान 'इनिकी' ने राज्य में काफी तबाही मचाई थी, जो हवाई के इतिहास का सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी तूफान था। उस समय इसकी हवाओं की गति 145 मील प्रति घंटे थी।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक ढेर, तीन जवान घायल

कुलगाम जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के गुड्डार इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार, सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों पर छिपे आतंकियों ने फायरिंग कर दी, जिसके बाद गोलीबारी तेज हो गई. पहले जानकारी सामने आई थी कि इलाके में 3 से 4 आतंकियों के छिपे होने की आशंका है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को मार गिराया गया है. फिलहाल सुरक्षाबलों ने क्षेत्र को घेर लिया है और ऑपरेशन जारी है. आतंकियों की तलाश के दौरान बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों के तीन जवान गोलीबारी के दौरान घायल हो गए हैं, जिसमें एक सेना के अधिकारी हैं. घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. कुलगाम एनकाउंटर के दौरान अब तक ऑपरेशन में एक आतंकी मारा गया है. वह सेब के बागान से भागने की कोशिश कर रहा था, तभी सुरक्षाबलों ने उसे ढेर कर दिया. कहा जा रहा है कि गुड्डार इलाके में घिरे आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के हैं. सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की. उनकी तलाश की जा रही है. भारतीय सेना ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिली विशेष खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। वहीं, सीआरपीएफ ने कहा कि सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद हुई मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर हो गया, जबकि एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर घायल हो गए। इंटरनेशनल बॉर्डर से पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बीच, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक पाकिस्तानी नागरिक को हिरासत में लिया है. जानकारी के मुताबिक, बीएसएफ जवानों ने कल देर शाम सीमा स्तंभ के पास संदिग्ध हलचल देखी थी. तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और इस दौरान एक पाकिस्तानी नागरिक को पकड़ लिया गया. सुरक्षा बलों ने उसे मौके पर ही हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. फिलहाल उसकी पहचान और सीमा पार से आने के मकसद की जांच की जा रही है. बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती पूछताछ के बाद ही उसके इरादों और पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी. सीमा पर सुरक्षा को देखते हुए इलाके में गश्त और सर्चिंग और तेज कर दी गई है.

बच्चों से जवान तक: भारत में ये बीमारियां बना रही 56% मौतों का मुख्य कारण

नई दिल्ली  भारत में दिल की बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। बीते कुछ सालों में 10 साल के बच्चों से लेकर जिम में वर्कआउट करते नौजवानों तक को हार्ट अटैक पड़ते देखा गया है। सोशल मीडिया पर लगभग हर हफ्ते ऐसे दिल दहला देने वाले वीडियो सामने आते हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक 10 साल के बच्चे की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिससे पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ गई है। अब एक सरकारी रिपोर्ट ने इस डर को और गहरा कर दिया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) के अनुसार, देश में होने वाली कुल मौतों में से करीब एक-तिहाई मौतें सिर्फ हार्ट अटैक के कारण हो रही हैं। यानी भारत में हर तीसरी मौत दिल से जुड़ी बीमारी की वजह से हो रही है। कौन सी बीमारियां ले रही हैं सबसे ज्यादा जान? इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि भारत में अब संक्रामक रोगों से ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं गैर-संक्रामक रोग (Non-communicable diseases – NCDs)। आंकड़ों के मुताबिक:- दिल की बीमारियां (Heart Attack/Cardiovascular issues): 31% मौतें सांस के संक्रमण (Respiratory Infections): 9.3% कैंसर व ट्यूमर (Tumors): 6.4% पुरानी सांस की बीमारियां (Chronic Respiratory Diseases): 5.7% पाचन संबंधी समस्याएं: 5.3% बुखार और वायरल इंफेक्शन: 4.9% डायबिटीज (Diabetes Mellitus): 3.5% मूत्र और जननांग तंत्र की बीमारियां: 3% कुल मिलाकर, 56.7% मौतें अब नॉन-कम्युनिकेबल डिजीजेज यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की वजह से हो रही हैं।   हार्ट अटैक क्यों बन रहा है बड़ा खतरा? एक वक्त था जब हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब यह तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है – बदलती जीवनशैली। देर तक बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, अनियमित खानपान, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और नींद की अनदेखी जैसी आदतें दिल पर बुरा असर डाल रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कोरोना वैक्सीन को भी हार्ट अटैक से जोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों ने इसे खारिज किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा हाथ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का है, न कि वैक्सीन का। कैंसर भी कम घातक नहीं दिल की बीमारियों के अलावा कैंसर भी भारत में एक प्रमुख जानलेवा बीमारी बनकर उभरा है। National Cancer Registry Programme की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2019 के बीच भारत में कैंसर के 7.08 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें से 2.06 लाख लोगों की जान चली गई। खासकर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। अब क्या किया जा सकता है? इस alarming स्थिति से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी योजनाएं काफी नहीं हैं। हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है: नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक आहार लें समय पर सोएं और तनाव को कम करें रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी बनाए रखें दिल की सेहत को लेकर जागरूकता और सतर्कता अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुकी है।  

1951 मॉडल रोल्स रॉयस कार के विवाद में तलाक, पूर्व प्रधानमंत्री की कार बनी विवाद का कारण

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अलग रह रहे एक दंपती की शादी को खत्म कर दिया है. दंपती के रिश्ते में 1951 मॉडल की रोल्स रॉयस कार को लेकर खटास आ गई थी, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन "महारानी" के लिए मंगवाया था. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को दर्ज किया, जिसके अनुसार पुरुष अपनी पूर्व पत्नी को 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा, जिसके बाद उनके बीच सभी दावों का निपटारा हो जाएगा. पीठ ने 29 अगस्त को कहा, "हम याचिकाकर्ता और प्रतिवादी 1 (पति) के बीच विवाह को भंग करते हैं. अब उनके बीच कोई भी वैवाहिक या अन्य संबंध नहीं रहेगा." समझौते के अनुसार, पति 31 अगस्त तक 1 करोड़ रुपये और शेष 1.25 करोड़ रुपये 30 नवंबर तक चुकाएगा. इस व्यवस्था के तहत, महिला अपने पति द्वारा दिए गए उपहार अपने पास रखेगी और पति उसे और उसके परिवार को मिले सभी उपहार, जैसे सगाई की अंगूठी और अन्य कीमती सामान, एक करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के साथ लौटा देगा. कोर्ट ने दोनों पक्षों को दी चेतावनी दंपती के बीच सभी मामलों को रद्द करते हुए पीठ ने इसे पूर्ण और अंतिम समझौता माना. विवाह खत्म होने के बाद, शीर्ष अदालत ने पक्षों को सोशल मीडिया सहित किसी भी रूप में एक-दूसरे को बदनाम न करने की चेतावनी दी. ग्वालियर में रहने वाली महिला ने दावा किया कि वह बहुत प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है, जिसके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे और उन्हें कोंकण क्षेत्र का शासक घोषित किया गया था. दूसरी ओर, महिला का पति सैन्य अधिकारियों के परिवार से ताल्लुक रखता है और मध्य प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान चलाता है. रोल्स रॉयस कार के कारण विवाद इस विवाद का मुख्य कारण 1951 मॉडल की प्राचीन हस्तनिर्मित क्लासिक रोल्स रॉयस कार थी, जो आज तक एक ही मॉडल है और जिसकी वर्तमान कीमत 2.5 करोड़ रुपये से अधिक है. यह कार पंडित नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन महारानी के लिए मंगवाई थी. महिला ने दावा किया कि उसके अलग हुए पति और उसके परिवार ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग करके उसे लगातार परेशान किया था. हालांकि पति ने इस आरोप से इनकार किया है. महिला ने अपनी याचिका में कहा, "उच्च न्यायालय ने इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रतिवादी 1 और 2 (पति और उसके पिता) का शुरू से ही दुर्भावनापूर्ण इरादा था कि वे रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट मांगें. जब प्रतिवादियों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उन्होंने शादी से इनकार करना शुरू कर दिया और याचिकाकर्ता पर झूठे और तुच्छ आरोप लगाने लगे और उसके चरित्र पर कीचड़ उछालने लगे." उच्च न्यायालय के 5 दिसंबर, 2023 के आदेश की आलोचना करते हुए याचिका में कहा गया, "…यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी 1 (पति) और 2 (पति के पिता) ने याचिकाकर्ता (महिला) के पिता की रोल्स रॉयस कार के प्रति अपना आकर्षण दिखाया है और उन्हें उक्त कार उपहार में मिलने की उम्मीद थी और मुंबई में फ्लैट के संबंध में, दहेज की इस मांग को पूरा न करना ही इसका मुख्य कारण था. याचिकाकर्ता को उसके ससुराल नहीं ले जा रहे हैं." मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने महिला द्वारा अपने पति के खिलाफ दहेज और क्रूरता के मामले को खारिज कर दिया था. इसके बाद अलग हुए दंपती का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. दूसरी ओर, पति ने अलग हुई पत्नी, उसके माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ विवाह प्रमाणपत्र तैयार करने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया था. सुप्रीम कोर्ट ने पहले वरिष्ठ अधिवक्ता और केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आर बसंत को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया था.