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मॉनसून सत्र विस्तार: सरकार लाएगी इनकम टैक्स सहित 8 बड़े बिल

नई दिल्ली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आगामी मॉनसून सत्र में कुल 8 नए विधेयक पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है। यह सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर अब 19 अगस्त तक चलेगा। पहले संसद 12 अगस्त तक ही चलने वाली थी, जिसे बाद में एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। लोकसभा सचिवालय ने जिन प्रमुख विधेयकों की जानकारी दी है उनमें टैक्स, शिक्षा, खेल, और खनिज नीति जैसे क्षेत्रों से जुड़े विधेयक शामिल हैं। लोकसभा में मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025, जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025, भारतीय प्रबंध संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2025, भू-धरोहर स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण और रख-रखाव) विधेयक, 2025, खनिज और खान (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025 और राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी विधेयक (संशोधन), 2025 विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। इनके अलावा, गोवा में अनुसूचित जनजातियों के विधानसभा क्षेत्रों में पुन: प्रतिनिधित्व निर्धारण विधेयक, 2024, मर्चेंट शिपिंग विधेयक, 2024, भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025 और आयकर विधेयक, 2025 को पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा। संसद की विधायी शाखा के अनुसार, इस बार सभी सांसदों को 'मेंबर्स पोर्टल' के माध्यम से ही समन और सूचनाएं भेजी गई हैं। सभी सांसदों को सत्र के शेड्यूल और विधायी कार्यक्रम की जानकारी डिजिटल रूप में दी गई है।  

राष्ट्रपति की पत्नी या कोई और? दो महिलाओं ने किया फ्रांसीसी फर्स्ट लेडी की पहचान पर सवाल

फ्रांस फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिजिट मैक्रों एक बार फिर सुर्खियों में हैं — लेकिन इस बार वजह फैशन या कोई भाषण नहीं, बल्कि उनके खिलाफ फैलाई गई एक अफवाह है। इस अफवाह में उनकी जेंडर आइडेंटिटी को लेकर झूठे दावे किए गए हैं, जिसे लेकर अब उन्होंने कानूनी कार्रवाई शुरू की है। यह मामला अब सिर्फ फ्रांस में ही नहीं, बल्कि अमेरिका और रूस तक चर्चा का विषय बन गया है।   क्या है पूरा मामला? यह मामला पहली बार दिसंबर 2021 में तब सामने आया जब अमंडाइन रॉय नाम की यूट्यूबर ने एक 4 घंटे लंबा इंटरव्यू अपलोड किया, जिसमें पत्रकार नताशा रे ने दावा किया कि ब्रिजिट मैक्रों असल में पहले एक पुरुष थीं – जीन-मिशेल ट्रोग्नेक्स, और बाद में उन्होंने लिंग परिवर्तन कर इमैनुएल मैक्रों से शादी की। रे ने यह भी कहा कि उन्होंने इस 'खुलासे' के लिए तीन साल तक रिसर्च की और उनके पास कई सबूत हैं, हालांकि किसी भी दावे की स्वतंत्र पुष्टि कभी नहीं हो सकी। कानूनी मोर्चे पर ब्रिजिट की कार्रवाई ब्रिजिट ने इन दोनों महिलाओं पर मानहानि का मुकदमा दायर किया। निचली अदालत ने फैसला सुनाते हुए दोनों पर €13,000 (लगभग ₹11.7 लाख) का जुर्माना लगाया। €8,000 ब्रिजिट को, €5,000 उनके भाई को (जिनका नाम भी घसीटा गया था)। लेकिन पेरिस की अपीली अदालत ने यह सजा रद्द कर दी। अब ब्रिजिट और उनके भाई ने फ्रांस की सर्वोच्च अदालत में अपील की है।  मामला अब इंटरनेशनल लेवल पर यह सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका में ट्रंप समर्थक पत्रकारों – कैंडेस ओवेन्स और टकर कार्लसन ने इसे जोरशोर से उठाया: ओवेन्स ने इसे मानव इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिजिट और उनके भाई असल में एक ही व्यक्ति हैं। ओवेन्स ने Becoming Brigitte नाम से वीडियो सीरीज शुरू की और दावा किया कि वह अपनी प्रोफेशनल प्रतिष्ठा इस थ्योरी पर दांव पर लगाने को तैयार हैं। जनवरी 2025 में ब्रिजिट की ओर से ओवेन्स को कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसमें लिखा था कि किसी महिला को अपनी पहचान साबित करने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। फिर भी ओवेन्स पीछे नहीं हटीं और फरवरी में उन्होंने फ्रेंच पत्रकार जेवियर पौसार्ड के साथ इंटरव्यू किया, जिन्होंने इसी विषय पर एक किताब भी लिखी— जो अब अमेजन पर बेस्टसेलर बन चुकी है।   रूस तक पहुंचा विवाद पत्रकार नताशा रे ने 2024 में रूस में राजनीतिक शरण मांगी। उनका दावा है कि फ्रांस में उन्हें सरकार द्वारा सताया गया और बोलने की आज़ादी छीनी जा रही है। उन्होंने फ्रांस सरकार की तुलना अमेरिका से की और खुद को एडवर्ड स्नोडन की तरह बताया, जो अमेरिका की खुफिया जानकारी लीक करने के बाद रूस में शरण लिए हुए हैं। ब्रिजिट और इमैनुएल मैक्रों की उम्र में अंतर पहले से ही आलोचना का विषय रहा है (मैक्रों 46 और ब्रिजिट 72)। इस विवाद ने फ्रांसीसी राजनीति की गरिमा और राष्ट्रपति पद की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े कर दिए। कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ साइबरबुलिंग और डिजिटल उत्पीड़न का केस बताया है।

निमिषा की मौत की घड़ी करीब? तलाल के भाई का दो टूक जवाब- समझौता नहीं होगा

नई दिल्ली यमन में सजा-ए-मौत का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के लिए राहत का वक्त कुछ घंटे ही रहा। अब तलाल आबदो मेहदी के परिवार ने फिर से साफ कर दिया है कि वे ब्लड मनी स्वीकार नहीं करेंगे। तलाल आबदो मेहदी पर आरोप है कि उसने निमिषा प्रिया का उत्पीड़न किया था और उसका पासपोर्ट रख लिया था। उसे हासिल करने के लिए ही निमिषा ने उसे ड्रग्स दिया था और उसकी ओवरडोज से वह मर गया था। इस मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत सुनाई गई है। उन्हें आज यानी 16 जुलाई के दिन सजा मिलनी थी, लेकिन केरल के ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के दखल से इसे टाल दिया गया था। कहा गया कि निमिषा प्रिया के वकील और परिजनों को वक्त दिया जाएगा कि वे तलाल के परिवार को ब्लड मनी के लिए राजी कर लें। लेकिन ऐसा होता मुश्किल दिख रहा है। तलाल के भाई का कहना है कि वे ब्लड मनी स्वीकार नहीं करेंगे। तलाल के भाई अब्देलफतेह मेहदी ने कहा कि हमारे परिवार ने समझौते के सभी ऑफर खारिज कर दिए हैं। हम चाहते हैं कि भाई की कातिल को सजा-ए-मौत ही मिले। माफी के सवाल पर अब्देलफतेह मेहदी ने कहा कि यह बेहद गंभीर अपराध है और इसमें कोई माफी नहीं दी जा सकती। हम इस मामले में 'दीयत' यानी ब्लड मनी स्वीकार नहीं करेंगे। ब्लड मनी पर डील के लिए टाली गई है सजा, पर बढ़ गई मुसीबत यमन के कानून के अनुसार यदि मारे गए शख्स का परिवार आरोपी से मुआवजे के बदले माफी दे तो सजा खत्म की जा सकती है। अब्देलफतेह ने फेसबुक पर लिखी लंबी पोस्ट में कहा, 'आज क्या हो रहा है। मध्यस्थता और समझौते की बातें हो रही हैं। यह कोई नई बात नहीं है ना ही सरप्राइज वाली चीज है। इस साल फिर से कई बार समझौते की कोशिशें हुई हैं और ये नई नहीं हैं। हम पर काफी दबाव डाला गया है, लेकिन हमारी मांग में कोई बदलाव नहीं है। हम भी यही चाहते हैं कि उसे सजा-ए-मौत हो। फिलहाल सजा को टाल दिया गया है और हम इससे हैरान हैं। मध्यस्थता करने वाले समझ लें कि हम किसी भी तरह से समझौते के लिए तैयार नहीं हैं और ब्लड मनी स्वीकार नहीं है।' तलाल का भाई बोला- खून का कोई सौदा नहीं होता यही नहीं बेहद सख्त लहजे में तलाल आबदो मेहदी के भाई ने ब्लड मनी को खारिज कर दिया। अब्देलफतेह मेहदी ने लिखा, 'खून को खरीदा नहीं जा सकता। सजा को टाले जाने से हम नहीं रुकेंगे। किसी भी तरह के दबाव के आगे हम नहीं झुकेंगे। न्याय को भुलाया नहीं जा सकता। न्याय होगा और भले ही उसमें देर लगे। यह सिर्फ कुछ समय की बात है और अल्लाह हमारे साथ है।' बता दें कि सोमवार को भी अब्देलफतेह ने यही बात बीबीसी की अरबी सेवा से बातचीत के दौरान कही थी। उनका कहना है कि हम सिर्फ निमिषा की सजा-ए-मौत चाहते हैं।  

पहलगाम अटैक पर चौंकाने वाला खुलासा, 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद आतंकियों ने किया था एक और कांड

 पहलगाम  22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद लगातार एजेंसियां अपनी जांच में जुटी हुई हैं। आतंकी हमले के सबसे अहम चश्मदीद ने जांच करने वाली एजेंसियों के सामने चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने बताया कि उसने 22 अप्रैल को घास के मैदानों में 26 लोगों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को हवा में चार राउंड फायरिंग करते देखा था और वह जश्न मना रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टार प्रोटेक्टेड चश्मदीद गवाह को एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की मदद से ट्रैक किया था। इस गवाह का हमले के कुछ ही मिनटों के बाद बैसरन घाटी के मैदान में तीन पाकिस्तानी आतंकियों से सामना हुआ था। उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने इंडियन एक्प्रेस को बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया। उन्होंने जश्न मनाने के लिए गोलियां चलानी शुरू कर दीं। उसने हवा में चार राउंड गोलियां चलाई गईं।’  चश्मदीद ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उसने 22 अप्रैल को 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को ‘जश्न’ में हवा में चार राउंड गोलियां चलाते देखा था. यह पता चला है कि ‘स्टार प्रोटेक्टेड गवाह, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की मदद से ट्रैक किया था, हमले के कुछ मिनट बाद बैसरन घाटी में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों का सामना किया था. पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद को गिरफ्तार किया था. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन सशस्त्र आतंकवादियों की पहचान उजागर की और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एनआईए को एक स्थानीय व्यक्ति मिला. अब वह मुख्य गवाह है. उसने हमले के कुछ ही मिनटों बाद हुई घटनाओं की अहम जानकारी साझा की. बताया जा रहा है कि उसने जांचकर्ताओं को बताया कि नागरिकों की हत्या करने के बाद जब वे बैसरन से निकल रहे थे, तो बंदूकधारियों ने उसे रोक लिया. उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया. उन्होंने जश्न में गोलियां चलानी शुरू कर दीं. हवा में चार राउंड गोलियाँ चलाई गईं.’ उसके बयान के आधार पर जांच दल ने घटनास्थल से चार इस्तेमाल किए हुए कारतूस जब्त किए. बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि उसने आतंकियों के मददगार परवेज और बशीर को कथित तौर पर एक पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते देखा था, जिसे बंदूकधारियों ने आखिरकार उनसे ले लिया था. जांचकर्ताओं ने परवेज और बशीर से भी लंबी पूछताछ की है. उसके आधार पर अब उन्हें पता चला है कि हमले से पहले क्या हुआ था. एक केंद्रीय खुफिया एजेंसी के सूत्र ने बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले तीनों आतंकी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा. उनके पास हथियार थे. उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटक स्थलों, रास्तों और टाइम टेबल से जुड़े सवाल पूछते रहे.’ सूत्रों के मुताबिक, जाने से पहले आतंकियों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए. सूत्र ने बताया, ‘इसके बाद वे बशीर से मिले. उन्होंने उनसे (दोनों स्थानीय परवेज और बशीर) 22 अप्रैल को दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बैसरन पहुंचने को कहा. सूत्रों ने बताया कि हमलावरों में से एक सुलेमान शाह बताया जा रहा है, जो पिछले साल 20 अक्टूबर को श्रीनगर-सोनमर्ग राजमार्ग पर जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण कर रही एक कंपनी के सात कर्मचारियों की हत्या में शामिल था. घटनास्थल से चार कारतूस बरामद पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों को अरेस्ट किया था। एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन आतंकवादियों की पहचान का खुलासा किया और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी थे।’ इस मामले में गवाहों के बयान के बाद जांच कर रही टीम ने घटनास्थल से चार कारतूस भी जब्त किए हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांच करने वाली टीम को यह भी बताया था कि उसने परवेज और बशीर को कथित तौर पर पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते हुए देखा था। बशीर और परवेज से एजेंसी ने की पूछताछ एजेंसी ने परवेज और बशीर से भी काफी लंबी पूछताछ की है। एक सेंट्रल एजेंसी के सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले, तीनों हमलावर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा। उनके पास हथियार थे। उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सिक्योरिटी अरेंजमेंट, टूरिस्ट प्लेस, रूट और टाइम से जुड़े हुए सवाल पूछते रहे।’ हमलावरों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए।    

UK के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा भागवत गीता का पाठ, सीएम धामी ने कहा- इसकी तैयारी पहले से थी

देहरादून  स्कूलों में भागवत गीता पढ़ाए जाने को लेकर सीएम धामी का बड़ा बयान आया है. सीएम धामी ने कहा, ‘हमने शिक्षा विभाग की समीक्षा मीटिंग में तय किया था, उस पर अब काम शुरू हो गया है.’ सीएम ने कहा कि भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया गया ज्ञान हमारे बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करेगा. सीएम ने कहा कि इससे बच्चे न्यायशील बनेगे और जीवन में आगे बढ़ेंगे. प्रदेश के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में श्रीमद् भागवत गीता के श्लोक पढ़ाए जाने के फैसले को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन महारा ने कहा कि किसी भी अच्छी चीज का स्वागत होना चाहिए. लेकिन सिर्फ श्रीमद् भागवत गीता को ही क्यों शामिल किया जाए. एक धर्म विशेष से जुड़े साहित्य को पढ़ाना सिर्फ वोटों की राजनीति लगती है. हर रोज सुनाना होगा एक श्लोक उत्तराखंड में एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को श्रीमद् भगवद्गीता का एक श्लोक अर्थ सहित प्रतिदिन सुनाया जाए ताकि आधुनिक शिक्षा के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा से छात्रों को अवगत कराकर उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनाया जा सके. उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में जारी एक आदेश में कहा गया है कि प्रार्थना सभा में सुनाए जाने वाले इस श्लोक के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जानकारी भी छात्रों को दी जाएगी. शिक्षकों को सप्ताह का श्लोक घोषित करना होगा इसके अलावा, शिक्षकों को प्रत्येक सप्ताह गीता के एक श्लोक को ‘सप्ताह का श्लोक’ घोषित कर उसे सूचना पटट पर अर्थ सहित लिखे जाने को कहा गया है जिसका छात्र अभ्यास करेंगे और सप्ताह के अंत में उस पर चर्चा कर उसका ‘फीडबैक’ लिया जाएगा . आदेश में शिक्षकों को समय-समय पर श्लोकों की व्याख्या करने तथा छात्रों को इस बात की जानकारी देने को कहा गया है कि श्रीमद् भगवद्गीता के सिद्धांत किस प्रकार मानवीय मूल्य, व्यवहार, नेतृत्व कौशल, निर्णय क्षमता, भावनात्मक संतुलन और वैज्ञानिक सोच विकसित करते हैं. केवल विषय के तौर पर ना पढ़ाया जाए छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि गीता के उपदेश मनोविज्ञान, तर्कशास्त्र, व्यवहार विज्ञान एवं नैतिक दर्शन पर आधारित हैं जो धर्मनिरपेक्ष द्रष्टिकोण से संपूर्ण मानवता के लिए उपयोगी हैं. आदेश में कहा गया है कि विद्यालय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्रों को ये श्लोक केवल विषय या पठन सामग्री के रूप में नहीं पढ़ाए जाएं बल्कि ये उनके जीवन एवं व्यवहार में भी परिलक्षित हों. सती ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार एवं ज्ञान प्रणाली का अध्ययन कराया जाना है। इससे पहले उत्तराखंड में राज्य पाठ्यचर्या को लेकर छह मई को आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीमद् भगवद्गीता और रामायण को भी इसमें शामिल करने के निर्देश दिए थे.

देश में पिछले 14 साल में 11.7 करोड़ मौतें हुई, UIDAI ने पिछले 14 वर्षों में केवल 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए

नई दिल्ली वर्तमान समय में आधार कार्ड को भारत में नागरिक पहचान के सबसे बड़े दस्तावेज के रूप में पेश किया गया है। हालांकि इससे होने वाले फर्जीवाड़ा और इसकी गोपनीयता पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। अब ‘आधार’ पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ये खुलासा आरटीआई (RTI) से हुआ है। आरटीआई से खुलासा हुआ है कि सरकारी डाटा के मुताबिक देश में पिछले 14 साल में 11.7 करोड़ मौतें हुई है। वहीं आधार जारी करने वाली संस्था UIDAI ने पिछले 14 वर्षों में केवल 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए हैं। यह संख्या देश में हुई मौतों के मुकाबले बेहद कम है। इस खुलासे ने एक बार फिर आधार डेटा की विश्वसनीयता और इसके अपडेट न होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही इसकी खामियों को एक बार फिर से उजागर किया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के मुताबिक, अप्रैल 2025 तक भारत की कुल जनसंख्या 146.39 करोड़ है। वहीं आधार कार्ड धारकों की संख्या 142.39 करोड़ है। इसके मुकाबले, भारत के सिटिजन रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के अनुसार, 2007 से 2019 तक हर साल औसतन 83.5 लाख लोगों की मौत होती रही है। ऐसे में पिछले 14 वर्षों में करीब 11.69 करोड़ से ज्यादा मौतें हुई होंगी। जबकि UIDAI ने सिर्फ 1.15 करोड़ आधार नंबर बंद किए हैं। यानी कुल मौतों का 10% से भी कम। जब RTI में पूछा गया कि पिछले पांच वर्षों में साल-दर-साल कितने आधार नंबर मृत्यु के आधार पर बंद किए गए हैं, तो UIDAI ने साफ कहा, “ऐसी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है। UIDAI ने सिर्फ कुल आंकड़ा दिया कि 31 दिसंबर 2024 तक मृत्यु के आधार पर 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए गए हैं। UIDAI ने कहा: हमारे पास आधार विहीन लोगों का कोई अनुमान नहीं जब पूछा गया कि क्या UIDAI ने कभी यह अनुमान लगाया कि देश में कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास आधार नहीं है, तो जवाब था, “ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.” UIDAI के अनुसार, जब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) आधार नंबर के साथ किसी मृतक का डेटा साझा करता है, तब एक प्रक्रिया के बाद आधार नंबर निष्क्रिय किया जाता है. अगस्त 2023 में जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, पहले मृत्यु रजिस्टर के डेटा को UIDAI के डेटाबेस से मिलाया जाता है. फिर दो बातें देखी जाती हैं: (1) नाम की 90% तक समानता होनी चाहिए, (2) लिंग (Gender) का 100% मेल होना चाहिए. अगर ये दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तब भी अंतिम फैसला तब लिया जाता है जब यह पुष्टि हो जाए कि मृत्यु के बाद उस आधार नंबर से कोई बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन या अपडेट नहीं हुआ है. अगर मौत के बाद भी आधार का इस्तेमाल हुआ हो, तो आगे की जांच होती है. वहीं, अगर निष्क्रिय किया गया आधार भविष्य में किसी प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होता है, तो सिस्टम उपयोगकर्ता को चेतावनी देता है. फिर वह व्यक्ति बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए आधार पुनः सक्रिय करवा सकता है. UIDAI के पास नहीं है साल-दर-साल आधार निष्क्रियता का रिकॉर्ड जब RTI में पूछा गया कि पिछले पांच वर्षों में साल-दर-साल कितने आधार नंबर मृत्यु के आधार पर बंद किए गए हैं, तो UIDAI ने साफ कहा, “ऐसी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है.” UIDAI ने सिर्फ कुल आंकड़ा दिया कि 31 दिसंबर 2024 तक मृत्यु के आधार पर 1.15 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय किए गए हैं. बिहार में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन और खतरे की घंटी बिहार में SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन के दौरान कई जिलों में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन देखने को मिला है। उदाहरण के लिए: किशनगंज: 126%, कटिहार और अररिया: 123%, पूर्णिया: 121%, शेखपुरा: 118% इसका मतलब है कि इन जिलों की अनुमानित जनसंख्या से ज्यादा लोगों को आधार जारी हो चुका है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि मरने वालों के आधार नंबर समय पर निष्क्रिय नहीं किए जाते. इसके अलावा जनसंख्या अनुमान में त्रुटियां, प्रवासन (Migration), और डुप्लिकेशन भी जिम्मेदार हैं. क्या कहता है यह सब? इस RTI के जवाब से यह साफ होता है कि UIDAI के पास न तो आधारविहीन लोगों का कोई अनुमान है, न ही मृत लोगों के आधार निष्क्रिय करने की प्रभावी व्यवस्था. इससे न केवल डेटा की सटीकता पर सवाल उठते हैं बल्कि नीति निर्माण और जनसंख्या आंकड़ों में भी गंभीर खामी उजागर होती है. UIDAI को अपनी सिस्टम में पारदर्शिता और ताजगी लाने की जरूरत है, खासकर जब आधार अब बैंकिंग, राशन, मतदान, और सरकारी योजनाओं से जुड़ चुका है. देश में कितने लोगों के पास आधार नहीं, इसकी जानकारी नहीं जब पूछा गया कि क्या UIDAI ने कभी यह अनुमान लगाया कि देश में कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास आधार नहीं है, तो जवाब था, “ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। UIDAI के अनुसार, जब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) आधार नंबर के साथ किसी मृतक का डेटा साझा करता है, तब एक प्रक्रिया के बाद आधार नंबर निष्क्रिय किया जाता है। अगस्त 2023 में जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, पहले मृत्यु रजिस्टर के डेटा को UIDAI के डेटाबेस से मिलाया जाता है। फिर दो बातें देखी जाती हैं: (1) नाम की 90% तक समानता होनी चाहिए, (2) लिंग (Gender) का 100% मेल होना चाहिए। अगर ये दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तब भी अंतिम फैसला तब लिया जाता है जब यह पुष्टि हो जाए कि मृत्यु के बाद उस आधार नंबर से कोई बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन या अपडेट नहीं हुआ है. अगर मौत के बाद भी आधार का इस्तेमाल हुआ हो, तो आगे की जांच होती है। बिहार में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन और खतरे की घंटी बिहार में SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन के दौरान कई जिलों में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन देखने को मिला है। उदाहरण के लिए: किशनगंज: 126%, कटिहार और अररिया: 123%, पूर्णिया: 121%, शेखपुरा: 118%। इसका मतलब है कि इन जिलों की अनुमानित जनसंख्या से ज्यादा लोगों को आधार जारी हो चुका है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि मरने वालों के आधार नंबर समय पर निष्क्रिय नहीं किए जाते। इसके अलावा जनसंख्या अनुमान में त्रुटियां, प्रवासन (Migration), और डुप्लिकेशन भी जिम्मेदार हैं। 

भारतीय सेना की बढ़ेगी ताकत, US से आ रहे रात के अंधेरे में भी हमला करने वाले अपाचे हेलिकॉप्टर

नई दिल्ली अमेरिका से अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों की डिलिवरी इसी सप्ताह होने जा रही है। पहली खेप के तहत कुल तीन अपाचे हेलिकॉप्टर मिलेंगे, जो रात के अंधेरे में भी टारगेट को खोजने और मार करने में सक्षम होंगे। अमेरिकी सेना में लंबे समय से तैनात इन हेलिकॉप्टरों की काफी डिमांड रही है। अब तक करीब 20 देशों को अमेरिका की ओर से इन हेलिकॉप्टरों की डिलिवरी की जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार भारत इन हेलिकॉप्टरों को पाकिस्तान से लगती सीमा पर तैनात करने की तैयारी में है। 2 जुलाई को ही खबर आई थी कि इन हेलिकॉप्टरों की डिलिवरी का इंतजार खत्म होगा और इसी महीने ये भारत आ सकते हैं। इन हेलिकॉप्टरों को 'हवाई टैंक' भी कहा जाता है। अमेरिका से आने वाले AH-64Es अपाचे हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर होगी। भारतीय सेना की ओर से इन हेलिकॉप्टरों के लिए अलग से बेड़ा पहले ही तैयार कर लिया गया है। जोधपुर में 15 महीने पहले ही इसकी शुरुआत हो चुकी है। लेकिन हेलिकॉप्टरों की डिलिवरी अटक गई थी। इसकी वजह थी कि दुनिया के भू-राजनीतिक समीकरण बदल गए और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन भी ट्रेड टैरिफ आदि में व्यस्त था। बता दें कि पहले ही इंडियन एयरफोर्स के पास दो स्क्वैड्रन पठानकोट और जोरहाट में ऐक्टिव हैं। बता दें कि 2015 में भी भारत सरकार ने 22 अपाचे हेलिकॉप्टरों की डील अमेरिका से की थी। उस ऑर्डर की पूरी डिलिवरी अमेरिका की ओर से जुलाई 2020 में कर दी गई थी। इसके बाद 2020 में भारत ने 6 हेलिकॉप्टर और खरीदने की डील की थी। इसके तहत पहली खेप की डिलिवरी मई से जून 2024 के बीच की जानी थी। लेकिन इसमें देरी होती गई। बता दें कि अमेरिकी कंपनी बोइंग और टाटा की ओर से भी एक जॉइंट वेंटर हैदराबाद में चल रहा है। यहां तैयार किया गया एक अपाचे हेलिकॉप्टर 2023 में भारतीय सेना को मिला था। इस हेलिकॉप्टर की खासियत यह है कि अंधेरे में भी यह अटैक कर सकता है। इसके अलावा किसी भी मौसम में यह सटीक डेटा हासिल कर सकता है। रात के अंधेरे में भी कर लेता है टारगेट की तलाश इन हेलिकॉप्टरों में नाइट विजन नेविगेशन सिस्टम है। इसके माध्यम से रात के अंधेरे में भी टारगेट की तलाश की जा सकती है। बता दें कि अपाचे हेलिकॉप्टरों को ना सिर्फ आक्रमण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है बल्कि इन्हें सुरक्षा और शांति ऑपरेशनों के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।  

भारत को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी क्षमताओं का विकास करना चाहिए: CDS जनरल अनिल चौहान

नई दिल्ली  CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि भारत को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी क्षमताओं का विकास करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने खासतौर से ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। उन्होंने जानकारी दी है कि पाकिस्तान की तरफ से भारत के खिलाफ चलाए गए ड्रोन नाकाम रहे थे और कोई नुकसान नहीं पहुंचा सके। हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी दावा किया था कि पाकिस्तान की कार्रवाई में भारत को कोई नुकसान नहीं हुआ है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय बलों ने इस्लामाबाद की तरफ से चलाए गए ड्रोन्स को काइनैटिक और नॉन काइनैटिक साधनों से तबाह कर दिया था। उन्होंने कहा, '10 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने हथियार रहित ड्रोन का इस्तेमाल किया, इनमें से कोई भी भारतीय सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा सका।' उन्होंने यह भी बताया कि कुछ ड्रोन सही सलामत हालत में भी बरामद हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया है कि भारत में बने काउंटर UAS सिस्टम भारत की जमीनी स्थिति और जरूरतों के हिसाब से बने हैं और सैन्य ऑपरेशन के दौरान काफी अहम हैं। उन्होंने कहा, 'विदेशी तकनीकों पर निर्भरता हमारी तैयारी को कमजोर करती है, उत्पादन बढ़ाने की हमारी ताकत को सीमित करती है। ऐसे में हर समय उपलब्ध रहने के लिए जरूरी पुर्जों की कमी हो जाती है।' पीटीआई के अनुसार, सीडीएस ने कहा, 'आज के युद्ध को अतीत के हथियारों से नहीं जीता जा सकता है। आज के युद्ध को कल की तकनीक से लड़ा जाना चाहिए।' NSA पहले ही खोल चुके पोल शुक्रवार को IIT मद्रास के एक कार्यक्रम में पहुंचे डोभाल ने कहा, 'पूरे ऑपरेशन में 23 मिनट लगे…। आप मुझे एक तस्वीर बता दें, जो दिखाता हो कि भारतीय क्षेत्र में कहीं नुकसान हुआ हो। वो लोग लिखते हैं, न्यूयॉर्क टाइम्स…, लेकिन तस्वीरें दिखाती हैं कि 10 मई के पहले और बाद में पाकिस्तान में 13 एयर बेस की हालत क्या थी।' उन्होंने कहा, 'हमें अपनी स्वदेशी तकनीक विकसित करने की जरूरत है।' उन्होंने कहा, 'हमें बहुत गर्व है कि वहां बहुत सारा स्वदेशी सामान लगा था। ब्रह्मोस से लेकर रडार तक हमने पूरी तरह से भारतीय सामान का इस्तेमाल किया था। हमने पाकिस्तान के पास 9 आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने का फैसला किया था। हम एक भी नहीं चूके। हमने वहां के अलावा कहीं भी हमला नहीं किया।'  

ठगी, धमकी और मौत: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लूटी जिंदगी

बेंगलुरु ऑनलाइन फ्रॉड के मामले हर दिन आ रहे हैं। सरकार की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए कैंपेन भी चलाए गए हैं कि वे किसी फर्जी जांच अधिकारी, पुलिस और जज के झांसे में ना आएं। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज भी नहीं होती। यह बात भी बार-बार बताई जा रही है। फिर भी लोग ऐसे मामलों में झांसे में आ रहे हैं और अपनी पूंजी खो रहे हैं। बेंगलुरु में तो बेहद दर्दनाक घटना हुई है, जिसमें स्कैमर के झांसे में आए बिजली विभाग के क्लर्क ने पहले तो 11 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। फिर जब उसे हकीकत का पता चला तो वह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाया और आत्महत्या कर ली। कुमार नाम के शख्स को किसी ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए फोन किया था और अरेस्ट कर लेने की धमकी दी थी। कुमार के सुसाइड नोट से पता चला है कि उन्हें ब्लैकमेल किया गया और अलग-अलग बैंक खातों में 11 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। शख्स ने कहा कि मैं इस ठगी से परेशान था और अपनी जिंदगी ही समाप्त कर रहा हूं। यह मामला कर्नाटक केलागेरे गांव का है। कुमार ने पेड़ पर फंदा लगाकर जान दे दी। कुमार बेंगलुरु इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड यानी BESCOM में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के तौर पर कार्यरत थे। कुमार ने आत्महत्या का कारण बताते हुए लिखा है कि मुझे विक्रम गोस्वामी नाम बताते हुए एक शख्स का कॉल आया था। उसने दावा किया कि वह सीबीआई का अधिकारी है और मेरे नाम का अरेस्ट वॉरंट उसके पास है। उसे पहले 1.95 लाख रुपये जमा कराने की धमकी दी गई। उसने ऐसा कर दिया तो फिर और रकम की डिमांड हुई। धीरे-धीरे उसने 11 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद भी वसूली खत्म नहीं हुई और कुमार ने टेंशन में आकर जान दे दी। कुमार ने नोट में लिखा है कि वह इस दबाव से आजिज आ चुके थे। खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाला शख्स उन्हें अब भी परेशान कर रहा था। अपने सुसाइड नोट में कुमार ने उन मोबाइल नंबरों का भी जिक्र किया है, जिनसे उन्हें कॉल आते थे। इस मामले में अब पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा ट्रांजेक्शन और सुसाइड नोट का भी वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। कुमार का फोन भी लॉक था, जिसके चलते पुलिस का चैलेंज बढ़ गया था।  

गुफा, ध्यान और डिजिटल कमाई: रूसी महिला ने क्यों चुना भारत को अपना घर?

कर्नाटक  कर्नाटक के गोकर्ण स्थित एक गुफा में मिली रूसी महिला से पूछताछ का दौर जारी है। फिलहाल, वह गुफा से बाहर निकाले जाने पर दुखी है। खबर है कि साल 2017 में उसका वीजा खत्म हो गया था, लेकिन वह भारत में बनी रही। गुफा में उसके साथ 6 और 8 साल की दो बेटियां भी हैं। वह बताती हैं कि करीबियों को खोने समेत ऐसे कई कारण थे, जिनके दुख के चलते वह रूस वापस नहीं लौटीं। पीटीआई से बातचीत में 40 वर्षीय नीना कुटीना ने बताया, 'बीते 15 सालों में मैं करीब 20 देशों में गई हूं। मेरे बच्चे अलग-अलग जगहों पर पर पैदा हुए। मैंने बगैर डॉक्टरों या अस्पताल की मदद से खुद ही उनकी डिलीवरी की, क्योंकि मैं ये सब जानती थी। किसी ने मेरी मदद नहीं की। मैंने अकेले ही किया।' गुफा में क्या करती थीं नीना ने कहा, 'हम सूर्योदय के साथ जागते थे, नदियों में तैरते थे और प्रकृति में रहते थे। मौसम को देखकर मैं आग या गैस सिलेंडर पर खाना पकाती थी और पास के गांव से सामान खरीद कर लाती थी। हम पेंटिंग करते थे, गाने गाते थे, किताबें पढ़ते थे और शांति से रहते थे।' उन्होंने कहा, 'अब हमें असहज स्थिति में रखा गया है। यह जगह गंदी है। यहां कोई निजता नहीं है और हमें खाने के लिए सिर्फ सादा चावल मिलता है। हमारा कई सामान ले लिया गया है, जिसमें 9 महीने पहले गुजरे बेटे की अस्थियां भी हैं।' कैसे चलता था खर्च नीना ने कहा कि वह आर्ट और म्यूजिक वीडियो बनाकर और कभी-कभी पढ़ाकर या बेबीसिटिंग कर पैसा कमाती थी। उन्होंने कहा, 'मैं इन सब कामों के जरिए पैसा कमाती थी और अगर मेरे पास कोई काम नहीं होता था या मुझे कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिलता था जिसे काम की जरूरत नहीं होती थी, तो मेरे भाई, मेरे पिता और मेरा बेटा भी मदद करता था। हमें जो भी जरूरत होती थी, तो उसके हिसाब से हमारे पास पर्याप्त पैसा होता था।' क्यों वापस नहीं गईं नीना बताती हैं कि कई करीबियों का गुजर जाना एक वजह थी। उन्होंने कहा, 'लगातार दुख, दस्तावेजों से जुड़े काम और अन्य समस्याओं से घिरे हुए थे।' उन्होंने कहा कि वह 4 और देशों की यात्रा कर भारत वापस आई हैं, 'क्योंकि हमें भारत और इसके पर्यावरण, इसके लोगों और सभी चीजों से बहुत प्यार है।' उन्होंने बताया कि वह अब रूसी दूतावास के संपर्क में हैं।