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आतंकियों की साजिश का खुलासा, पहलगाम अटैक की चार्जशीट में सामने आए नए तथ्य

पहलगाम पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट ने उस खौफनाक साजिश की परतें खोल दी हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सामने आया है कि पहलगाम घूमने आए निर्दोष पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. शुरुआती जांच में ही पता चल गया था कि इस वारदात को लश्कर-ए-तैयबा के संगठन TRF यानी द रजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया. हमले के कुछ ही देर बाद TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में उसने अपने बयान से पलटते हुए इसे फॉल्स नैरेटिव बता दिया।  इस हमले की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग के एडिशनल एसपी गुलाम हसन को सौंपी थी. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हमले को तीन आतंकियों ने मिलकर अंजाम दिया था. इनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी शामिल थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस पूरे हमले के मास्टरमाइंड का नाम भी सामने आया. जांच एजेंसियों ने बताया कि इस हमले की साजिश सज्जाद जट्ट उर्फ अली भाई ने रची थी, जो लंबे समय से आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।  हमले के तुरंत बाद घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया और पुलिस व फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल को अपने कब्जे में ले लिया. पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और सबूत जुटाने का काम शुरू हुआ. मौके से हथियारों से जुड़े अहम सुराग, कारतूसों के खोखे और अन्य फॉरेंसिक सबूत बरामद किए गए. इसके साथ ही मृतकों के परिवार वालों और घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए. शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया था कि हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था।  30 अप्रैल को NIA ने पूरे इलाके में बड़े स्तर पर ग्रिड सर्च ऑपरेशन चलाया. इस अभियान में NIA, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स, सुरक्षा बलों और एंटी-सैबोटाज टीमों को शामिल किया गया. पूरे जंगल और आसपास के इलाकों को खंगाला गया. जांच एजेंसियों ने हर संभावित जगह से सबूत जुटाने की कोशिश की. इसके बाद CBI से उस लोकेशन की 3D मैपिंग कराई गई, जिसकी रिपोर्ट 7 मई को NIA को सौंप दी गई. इस मैपिंग से आतंकियों की मूवमेंट और हमले के एंगल को समझने में मदद मिली।  जांच के दौरान NIA ने स्थानीय लोगों से भी बड़े पैमाने पर पूछताछ की. दुकानदारों, पोनी वालों, ढोक में रहने वाले लोगों और टैक्सी ड्राइवरों समेत कुल 1,113 लोगों से सवाल-जवाब किए गए. यही पूछताछ बाद में जांच की सबसे अहम कड़ी साबित हुई. एक अज्ञात गवाह ने एजेंसी को बताया कि हमले से एक दिन पहले उसने बशीर अहमद जोठाड़ को तीन हथियारबंद लोगों के साथ देखा था. गवाह के मुताबिक, बशीर उन तीनों को परवेज के ढोक यानी झोपड़ी में लेकर गया था।  गवाह ने आगे बताया कि 22 मई की सुबह जब वह बैसरन पार्क गया, तब उसने वहां बशीर और परवेज दोनों को देखा था. कुछ घंटों बाद ही बैसरन में गोलीबारी की खबर आ गई. इसी गवाह ने जांच एजेंसियों को यह भी बताया कि बाद में आतंकियों ने उसे भी पकड़ लिया था और उससे कलमा पढ़ने को कहा था. जब उसने कलमा पढ़ दिया, तब जाकर आतंकियों ने उसे छोड़ा. इस बयान ने जांच एजेंसियों को यह यकीन दिलाया कि हमलावर धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बना रहे थे।  गवाह से मिली जानकारी के बाद NIA ने कई जगहों पर छापेमारी की. जांच में कुछ और अहम सबूत हाथ लगे, जिसके बाद 22 जून को पोनी वाले बशीर अहमद और परवेज अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान परवेज अहमद ने उस रात की पूरी कहानी जांच एजेंसियों को बताई. उसने कहा कि 21 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे वह अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ ढोक में चाय पीने की तैयारी कर रहा था, तभी उसका मामा बशीर वहां पहुंचा और सबको चुप रहने के लिए कहा।  कुछ देर बाद बशीर बाहर गया और फिर तीन हथियारबंद लोगों के साथ लौटा. तीनों के हाथों में बंदूकें थीं और वे बेहद थके हुए लग रहे थे. उन्होंने पानी मांगा और अंदर बैठ गए. परवेज ने बताया कि उन लोगों ने कहा कि वे लंबा सफर तय करके आए हैं. इसके बाद उन्होंने अल्लाह के रास्ते में लड़ने वालों की मदद करने पर सवाब मिलने की बात कही. परवेज के मुताबिक, वे लगातार जिहाद और कश्मीर की आजादी की बातें कर रहे थे।  परवेज ने बताया कि उसकी पत्नी ताहिरा ने उन आतंकियों के लिए खाना बनाया था. खाना खाते समय आतंकी अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की आवाजाही और इलाके में तैनाती के बारे में सवाल पूछ रहे थे. परवेज ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकी उर्दू बोल रहे थे, लेकिन उनकी बोली में पंजाबी लहजा साफ महसूस हो रहा था. आपस में भी वे पंजाबी में ही बात कर रहे थे. परवेज की पत्नी ताहिरा ने भी जांच के दौरान यही बयान दिया।  जांच एजेंसियों ने बाद में बशीर अहमद जोठाड़ से भी पूछताछ की. उसने बताया कि हमले से एक दिन पहले वह अपने घोड़े को देखने जंगल की तरफ गया था. तभी अचानक पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद लोग उसके सामने आ गए. उनके हाथों में बंदूकें थीं. उन्होंने बशीर से कहा कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले जाया जाए और खाने का इंतजाम किया जाए. बशीर ने बताया कि उसे तुरंत समझ आ गया था कि वे मुजाहिद हैं।  बशीर ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकियों ने अपने बैग और पाउच उसे छिपाने के लिए दिए थे. बाद में उन सामानों को परवेज ने कंबलों के नीचे छिपा दिया था. तीनों आतंकी करीब पांच घंटे तक ढोक में रुके रहे. रात करीब 10 बजे वे एक-एक करके वहां से निकल गए. जाते समय छोटे कद वाले आतंकी ने परवेज को 3000 रुपये भी दिए. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह रकम मदद के बदले दी गई थी।  दोनों आरोपियों से पूछताछ में कई अहम राज सामने आए. इसके बाद 28 जून को बशीर अहमद के ढोक, परवेज अहमद के ढोक और बैसरन मार्गूजा इलाके में सर्च … Read more

पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में पर्यटकों की रौनक लौटी, पर्यटन क्षेत्र में आई नई उम्मीद

श्रीनगर  22 अप्रैल 2025 का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं था. यहां पहलगाम स्थित बैसरन घाटी (Baisaran Valley) में हुए घातक आतंकी हमले ने पूरे कश्मीर घाटी को झकझोर दिया था. ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहलाने वाली इस खूबसूरत घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर उन्हें गोलियों से भून डाला था. इस नृशंस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे. इस हमले ने न सिर्फ मानवीय क्षति पहुंचाई, बल्कि पहलगाम के पर्यटन उद्योग को बुरी तरह चोट पहुंचाई. पर्यटन उद्योग ठप पड़ गया था, दुकानें बंद हो गई थीं और स्थानीय कारीगरों-दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था. लेकिन ठीक एक साल बाद पहलगाम के घाव भरने लगे हैं. इस वसंत में पर्यटकों की रौनक लौट आई है. हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट की दुकानों पर फिर भीड़ उमड़ रही है. पर्यटक कश्मीरी शॉल, कालीन, पशमीना, कढ़ाई वाले सूट, काठ की नक्काशीदार वस्तुएं और सेब की लकड़ी से बने सामान खरीद रहे हैं. स्थानीय दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और कमाई भी पहले जैसी होने लगी है।  पहलगाम के मुख्य बाजार लिद्दर बाजार, मलिक बाजार और चंदनवाड़ी रोड पर इन दिनों सुबह से शाम तक चहल-पहल है. दुकानों पर फिर से भीड़ दिखने लगी है. पर्यटक बसों और प्राइवेट गाड़ियों से उतरते ही दुकानों की ओर बढ़ रहे हैं. कई दुकानें सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खुली रह रही हैं।  हम साथ देने आए हैं… इंदौर के रहने वाले फखरुद्दीन अपने परिवार के साथ पहली बार पहलगाम घूमने आए है. वह यहां की सुंदरता और लोगों की मेहमाननवाजी को देखकर कहते हैं, ‘हमने जम्मू-कश्मीर के बारे में बहुत नकारात्मक बातें सुनी थीं, लेकिन यहां आकर हमारा अनुभव बिल्कुल उल्टा है. लोग बेहद मिलनसार हैं और यहां के हस्तशिल्प अद्भुत हैं. हम कश्मीरी शॉल, पशमीना और हाथों से बने सामान खरीद रहे हैं ताकि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट मिल सके।  फखरुद्दीन ने बताया कि उनकी पत्नी और बेटी ने कई पशमीना शॉल, सूट पीस और कालीन खरीदे. वह कहते हैं, ‘हमने सोचा था कि सुरक्षा की वजह से यहां घूमना मुश्किल होगा, लेकिन हर जगह सुरक्षा बल तैनात हैं और वातावरण पूरी तरह शांतिपूर्ण है।  बैसरन घाटी का वह काला दिन पिछले साल 22 अप्रैल को दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच बैसरन घाटी में हथियारबंद आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला बोल दिया. घनी देवदार के जंगलों से घिरी इस घाटी में पर्यटक घोड़े की सवारी या पैदल घूम रहे थे. आतंकियों ने M4 कार्बाइन और AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग की. उन्होंने पुरुषों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया. इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़ा चालक शहीद हुए।  हमले के बाद पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. कई पर्यटन स्थल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए. पहलगाम की हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट दुकानों पर ताला लग गया. कारीगर परिवार महीनों बिना कमाई के गुजारा करते रहे. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अप्रैल-मई में पर्यटकों की संख्या में 80 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई।  कश्मीर में लौट रही रौनक 2026 के वसंत में हालात अब बदल रहे हैं. मार्च के अंत से अप्रैल के पहले दो सप्ताह में पहलगाम में रोजाना 800 से 1200 पर्यटक पहुंच रहे हैं. बैसरन घाटी सहित आसपास के कई पर्यटन स्थल फिर से खुल रहे हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘Kashmir Travel Mart 2026’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें हस्तशिल्प को विशेष जगह दी गई है।  जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. पहलगाम में अतिरिक्त सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है. पर्यटक बसों और वाहनों की सुरक्षा के लिए स्पेशल एस्कॉर्ट व्यवस्था की गई है. साथ ही ‘एक्सपीरियंस कश्मीर’ अभियान के तहत सोशल मीडिया पर सकारात्मक रुख बढ़ाया जा रहा है।  पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल 2026 में अब तक पिछले साल की तुलना में 65 प्रतिशत ज्यादा पर्यटक कश्मीर घाटी आए हैं. पहलगाम के अलावा गुलमर्ग, सोनमर्ग, गांदेरबल और डल झील क्षेत्र भी पर्यटकों से गुलजार हैं।  पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जख्म अब भर रहा है. आतंकी हमले की यादें अभी भी ताजा हैं, लेकिन पर्यटकों की वापसी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान दी है. फखरुद्दीन जैसे परिवार दिखाते हैं कि पर्यटक अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट करने भी आ रहे हैं। 

नजाकत अहमद शाह को छत्तीसगढ़ में ग्रैंड वेलकम, आतिशबाजी और गुलदस्ते से स्वागत

रायपुर 6 महीने पहले 22 अप्रैल 2025, पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकियों ने 26 पर्यटकों की जान ली थी। आतंकी जब पर्यटकों पर गोलियां बरसा रहे थे, तब वहां छत्तीसगढ़ के बीजेपी कार्यकर्ता अरविंद अग्रवाल और उनके दोस्त भी अपनी-अपनी फैमिली के साथ मौजूद थे। वे सभी खूबसूरत वादियों में रील बना रहे थे। लोकल गाइड नजाकत अहमद शाह ने जब गोलियों की आवाज सुनी तो उसने सभी को नीचे बैठने को कहा। उसने अरविंद अग्रवाल के कुनबे के दो बच्चों को गले लगाकर सुरक्षित बचा लिया। बाद में वह पूरी टोली को खूनी मैदान से बाहर ले जाने में कामयाब हो गए। नजाकत शाह का ग्रैंड वेलकम पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में गुस्से की लहर दौड़ गई। फिर भारतीय सेना ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को ऑपरेशन सिंदूर से सबक सिखाया। पहलगाम हमले के पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शी आज भी उस घटना को याद कर सिहर उठते हैं। इस बुरे वक्त में दोस्ती के रिश्ते भी बने। सर्दियों में कंबल का कारोबार करने वाले नजाकत अहमद शाह हर साल की तरह गुरुवार को चिरमिरी पहुंचे। इस बार नजाकत अहमद के लिए यह यात्रा यादगार बन गई। चिरमिरी पहुंचते ही अरविंद अग्रवाल समेत इलाके लोग 50 लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे। सभी ने नजाकत को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने अग्रवाल परिवार के साथ लंच पर वक्त बिताया और अपनी यादें साझा कीं। अरविंद अग्रवाल की बचाई थी जान अरविंद अग्रवाल ने पहलगाम हमले को याद करते हुए बताया कि जब आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, तब नजाकत अहमद शाह ने उन्हें बचा लिया। उस समय उनकी पत्नी और चार साल की बेटी थोड़ी दूर थीं। नजाकत ने सबको नीचे बैठने को कहा, फिर मेरी बेटी और मेरे दोस्त के बेटे को गले लगा लिया, जिससे उनकी जान बच गई। नजाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गए और वापस मेरी पत्नी को बचाने के लिए दौड़े। हम कभी नजाकत के एहसान को नहीं भूल सकते हैं। नजाकत अहमद शाह ने बताया कि उनका परिवार सालों से छत्तीसगढ़ में कपड़े बेचने आता रहा है। मुझे बहुत खुशी हुई कि पहलगाम से लौटने के बाद भी अग्रवाल परिवार उनसे फोन पर संपर्क में रहा। अब उनसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ हमारे लिए घर जैसा है और हम हर साल तीन महीने व्यापार के लिए यहां आते हैं। आतिशबाजी से स्वागत नजाकत अहमद शाह जब अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचे तो उनका ग्रैंड वेलकम हुआ। अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचते ही बीजेपी नेता ने पहले गुलदस्ता देकर स्वागत किया। फिर आतिशबाजी की गई। इस स्वागत से नजाकत अहमद शाह भी गदगद थे।

छोटा सुराग, बड़ी कामयाबी: मोबाइल चार्जर से मिली पहलगाम हमले के साज़िशकर्ता तक पहुंच

श्रीनगर  कश्मीर घाटी के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे की साजिश धीरे-धीरे सामने आ रही है. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक ऐसे ओवरग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार किया है, जिसने आतंकियों से चार बार मुलाकात की थी. उनको रसद सहायता उपलब्ध कराई थी. उनको मोबाइल फोन चार्जर दिया था. 26 साल के इस आरोपी का नाम मोहम्मद यूसुफ कटारी है, जो कि पेशे से शिक्षक है. केंद्रीय जांच एजेंसियों के मुताबिक, मोहम्मद यूसुफ कटारी ने पूछताछ में कबूल किया है कि वो पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों सुलेमान उर्फ आसिफ, जिबरान और हमजा अफगानी से चार बार मिला था. यही नहीं उसने उन्हें एक एंड्रॉइड मोबाइल फोन चार्जर भी दिया था, जो बाद में जांच की सबसे अहम कड़ी साबित हुआ. उसी के जरिए पुलिस उस तक पहुंच पाई है. दरअसल, जुलाई में शुरू किए गए आतंकवाद-रोधी अभियान 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान श्रीनगर के बाहरी इलाके जबरवान पहाड़ियों की तलहटी में तीनों आतंकियों का खात्मा हुआ था. घटनास्थल से पुलिस को जो सामग्री मिली, उसमें एक आंशिक रूप से जला हुआ मोबाइल चार्जर भी था. यही मामूली सा सबूत पुलिस को उस नेटवर्क तक ले गया, जो पहलगाम हमले की साजिश का हिस्सा था. फोरेंसिक जांच में मोबाइल चार्जर के सीरियल नंबर और कनेक्टिविटी डेटा से पुलिस को अहम सुराग मिले. श्रीनगर पुलिस ने जब इसकी ट्रेसिंग की, तो चार्जर के असली मालिक का पता चल गया. उसने इसे एक डीलर को बेचा था. वहीं से कड़ी से दूसरी कड़ी जोड़ते हुए जांच टीम मोहम्मद यूसुफ कटारी तक पहुंच गई. उसको सितंबर के आखिरी हफ्ते में गिरफ्तार किया गया था.  एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी ऊंचे इलाकों में रहने वाले खानाबदोश छात्रों को पढ़ाने का काम करता था, लेकिन पर्दे के पीछे आतंकियों को गाइड करने और उनके लिए सामान जुटाने जैसी जिम्मेदारी निभाता था. बताया जा रहा है कि उसने न सिर्फ मोबाइल फोन चार्जर उपलब्ध कराया, बल्कि पहलगाम के हमलावरों को पहाड़ी रास्तों से गुजरने में मदद भी की थी. मोहम्मद यूसुफ कटारी सुलेमान उर्फ आसिफ, जिबरान और हमजा अफगानी जैसे बड़े आतंकियों के संपर्क में था. सुलेमान पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था. जिबरान अक्टूबर 2024 में सोनमर्ग सुरंग हमले में शामिल था. हमजा अफगानी कई छोटे आतंकी ऑपरेशनों में शामिल रहा था. तीनों को 29 जुलाई को 'ऑपरेशन महादेव' के तहत मुठभेड़ में मार गिराया गया था.

पहलगाम अटैक पर चौंकाने वाला खुलासा, 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद आतंकियों ने किया था एक और कांड

 पहलगाम  22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद लगातार एजेंसियां अपनी जांच में जुटी हुई हैं। आतंकी हमले के सबसे अहम चश्मदीद ने जांच करने वाली एजेंसियों के सामने चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने बताया कि उसने 22 अप्रैल को घास के मैदानों में 26 लोगों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को हवा में चार राउंड फायरिंग करते देखा था और वह जश्न मना रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टार प्रोटेक्टेड चश्मदीद गवाह को एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की मदद से ट्रैक किया था। इस गवाह का हमले के कुछ ही मिनटों के बाद बैसरन घाटी के मैदान में तीन पाकिस्तानी आतंकियों से सामना हुआ था। उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने इंडियन एक्प्रेस को बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया। उन्होंने जश्न मनाने के लिए गोलियां चलानी शुरू कर दीं। उसने हवा में चार राउंड गोलियां चलाई गईं।’  चश्मदीद ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उसने 22 अप्रैल को 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को ‘जश्न’ में हवा में चार राउंड गोलियां चलाते देखा था. यह पता चला है कि ‘स्टार प्रोटेक्टेड गवाह, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की मदद से ट्रैक किया था, हमले के कुछ मिनट बाद बैसरन घाटी में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों का सामना किया था. पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद को गिरफ्तार किया था. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन सशस्त्र आतंकवादियों की पहचान उजागर की और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एनआईए को एक स्थानीय व्यक्ति मिला. अब वह मुख्य गवाह है. उसने हमले के कुछ ही मिनटों बाद हुई घटनाओं की अहम जानकारी साझा की. बताया जा रहा है कि उसने जांचकर्ताओं को बताया कि नागरिकों की हत्या करने के बाद जब वे बैसरन से निकल रहे थे, तो बंदूकधारियों ने उसे रोक लिया. उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया. उन्होंने जश्न में गोलियां चलानी शुरू कर दीं. हवा में चार राउंड गोलियाँ चलाई गईं.’ उसके बयान के आधार पर जांच दल ने घटनास्थल से चार इस्तेमाल किए हुए कारतूस जब्त किए. बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि उसने आतंकियों के मददगार परवेज और बशीर को कथित तौर पर एक पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते देखा था, जिसे बंदूकधारियों ने आखिरकार उनसे ले लिया था. जांचकर्ताओं ने परवेज और बशीर से भी लंबी पूछताछ की है. उसके आधार पर अब उन्हें पता चला है कि हमले से पहले क्या हुआ था. एक केंद्रीय खुफिया एजेंसी के सूत्र ने बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले तीनों आतंकी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा. उनके पास हथियार थे. उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटक स्थलों, रास्तों और टाइम टेबल से जुड़े सवाल पूछते रहे.’ सूत्रों के मुताबिक, जाने से पहले आतंकियों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए. सूत्र ने बताया, ‘इसके बाद वे बशीर से मिले. उन्होंने उनसे (दोनों स्थानीय परवेज और बशीर) 22 अप्रैल को दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बैसरन पहुंचने को कहा. सूत्रों ने बताया कि हमलावरों में से एक सुलेमान शाह बताया जा रहा है, जो पिछले साल 20 अक्टूबर को श्रीनगर-सोनमर्ग राजमार्ग पर जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण कर रही एक कंपनी के सात कर्मचारियों की हत्या में शामिल था. घटनास्थल से चार कारतूस बरामद पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों को अरेस्ट किया था। एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन आतंकवादियों की पहचान का खुलासा किया और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी थे।’ इस मामले में गवाहों के बयान के बाद जांच कर रही टीम ने घटनास्थल से चार कारतूस भी जब्त किए हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांच करने वाली टीम को यह भी बताया था कि उसने परवेज और बशीर को कथित तौर पर पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते हुए देखा था। बशीर और परवेज से एजेंसी ने की पूछताछ एजेंसी ने परवेज और बशीर से भी काफी लंबी पूछताछ की है। एक सेंट्रल एजेंसी के सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले, तीनों हमलावर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा। उनके पास हथियार थे। उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सिक्योरिटी अरेंजमेंट, टूरिस्ट प्लेस, रूट और टाइम से जुड़े हुए सवाल पूछते रहे।’ हमलावरों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए।