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Petrol के बाद Diesel में बदलाव: Isobutanol ब्लेंडिंग से क्या होंगे फायदे?

नई दिल्ली  बीते कुछ हफ्तों से देश भर में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल (E20 Petrol) की खूब चर्चा हो रही है. पेट्रोल के आयात और उस पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल को मिक्स करना शुरू किया, जो इस समय देश के कई फ्यूल स्टेशन पर बिक्री के लिए उपलब्ध है. जिसके बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज और परफॉर्मेंस में कमी आने की शिकायत की. अब सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) मिलाने की तैयारी कर रही है.  हाल ही में पुणे में प्राज इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, "एथेनॉल हमारे लिए एक शुरुआत है, ये कोई अंत नहीं है. मैं विशेष रूप से प्राज इंडस्ट्री और ARAI को धन्यवाद दूंगा कि, उन्होनें एथेनॉल के बाद आइसोब्यूटेनॉल पर काम करना शुरू किया है. और अभी वो डीजल में 10% आइसोब्यूटेनॉल डालकर प्रयोग कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने किर्लोस्कर के साथ मिलकर 100% आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाला इंजन भी तैयार किया है. आइसोब्यूटेनॉल वैकल्पिक जैव ईंधन है."  नितिन गडकरी ने आगे कहा कि, "आइसोब्यूटेनॉल डीजल का एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है. हमारे देश में पेट्रोल के तुलना में डीजल का प्रयोग ढाई से तीन गुना ज्यादा होता है. प्रदूषण की मुख्य समस्या पेट्रोल और डीजल के कारण ज्यादा है. आने वाले समय में आइसोब्यूटेनॉल हमारे देश के लिए एक वरदान साबित हो सकता है. रिसर्च, ट्रायल और स्टैंडर्ड निश्चित होने के बाद जब इसका प्रस्ताव पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को जाएगा और मंत्रालय से इसको मान्यता मिलेगी तब इसका मार्केट और भी बढ़ेगा."  क्या है आइसोब्यूटेनॉल आइसोब्यूटेनॉल मूल रूप से एल्केनॉल (अल्कोहल) ग्रुप से आने वाला एक कलरलेस, फ्लेमेबल ऑर्गेनिक लिक्विड है. इसका केमिकल फार्मूला (C₄H₁₀O) है. ये व्यापक रूप से पेंट और कोटिंग्स के लिए सॉलवेंट यानी विलायक के रूप में काम में लिया जाता है. इसके अलावा अपने हाई एनर्जी डेंसिटी और ऑक्टेन रेटिंग के कारण फ्यूल ऐडिटिव्स के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है. इसे प्रोपिलीन कार्बोनिलीकरण के माध्यम से पेट्रोलियम या बायोमास जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है. डीज़ल में आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग फ्यूल ब्लेंडिंग: आइसोब्यूटेनॉल को डीज़ल के साथ मिक्स कर उपयोग किया जा सकता है. यह उत्सर्जन को कम करने और फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाने में मदद कर सकता है. क्लीन बर्निंग फ्यूल: इसमें सल्फर और अन्य हानिकारक तत्व कम होने के कारण डीज़ल इंजन में स्वच्छ दहन (Clean Combustion) होता है. ग्रीनहाउस गैस में कमी: आइसोब्यूटेनॉल फ्यूल से CO₂ और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है. इंजन कम्पैटिबिलिटी: शोध से पता चला है कि डीज़ल इंजनों में आइसोब्यूटेनॉल-डीज़ल मिश्रण बिना किसी बड़े बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है. बेहतर प्रदर्शन: इससे इंजन परफॉर्मेंस बनी रहती है और ईंधन की खपत भी थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि अभी डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिक्स्चर पर शोध जारी है. लेकिन माना जा रहा है कि, भविष्य में आने वाले नए डीजल इंजन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के ही सिद्धांत पर काम करेंगे. जो संभवतः पूरी तरह से आइसोब्यूटेनॉल पर चलने में सक्षम होंगे. क्या कहते हैं अब तक हुए शोध? सोसायटी ऑफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स (SAE) की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 4-स्ट्रोक सिंगल-सिलेंडर डीज़ल इंजन में 5% और 10% वॉल्यूम आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी (BTE) में वृद्धि देखी गई है. ब्रेक स्पेसिफिक फ्यूल कंजम्प्शन (BSFC) में सुधार हुआ है, यानी ईंधन की खपत प्रति यूनिट ऊर्जा कम हुई. कार्बन उत्सर्जन और धुएँ की तीव्रता (Smoke Opacity) में काफी कमी आई है, जबकि NOₓ उत्सर्जन में मामूली कमी देखने को मिली है. बहरहाल, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल को मिलाने को लेकर शोध अभी चल रही है. जैसा कि नितिन गडकरी ने भी बताया कि, इससे जुड़ी एजेंसियां इस पर प्रयोग कर रही हैं. यानी अभी इस डीजल ब्लेंडिंग पर अंतिम रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लगेगा. अभी इस बात की भी जानकारी नहीं मिली है कि, सरकार डीजल में इसका प्रयोग कब शुरू करेगी. अभी ये प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और रिसर्च/प्रयोग में सफलता मिलने के बाद इसका प्रस्ताव संबंधित मंत्रालय को भेजा जाएगा, जहां से इसे आखिरी मंजूरी मिलेगी.  भारत में डीजल की खपत पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार भारत की कुल कच्चे तेल की खपत में डीज़ल का योगदान लगभग 40% है. 2024-25 में डीज़ल की खपत 2% बढ़कर 91.4 मिलियन टन हो जाएगी. पीपीएसी ने 2025-26 के लिए डीज़ल के उपयोग में 3% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 94.1 मिलियन टन हो जाएगा.

HC ने कहा– पीएम मोदी की डिग्री की जानकारी नहीं होगी सार्वजनिक

नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्नातक की डिग्री से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत ने सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय की याचिका पर यह फैसला सुनाया। इसी अदालत ने 27 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि नीरज नामक के शख्स की ओर से दाखिल की गई आरटीआई आवेदन के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने 21 दिसंबर 2016 को 1978 में बीए परीक्षा पास करने वाले सभी छात्रों के अभिलेखों की जांच की अनुमति दी थी। इसी वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने भी यह परीक्षा पास की थी। मामला आने पर हाईकोर्ट ने 23 जनवरी 2017 को सीआईसी के आदेश पर रोक लगा दी थी। बीते बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की याचिका पर अपना फैसला टाल दिया था। याचिका में प्रधानमंत्री मोदी की स्नातक डिग्री के संबंध में सूचना का खुलासा करने के निर्देश देने वाले सीआईसी के आदेश को चुनौती दी गई थी। डीयू की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यह निजता के अधिकार से ऊपर है। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखी थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलील में कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग उक्त का आदेश रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय अदालत को अपना रिकॉर्ड दिखा सकता है। इसमें उसे कोई आपत्ति नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय का कहना था कि केवल जिज्ञासा के आधार पर किसी को भी आरटीआई कानून के जरिए निजी जानकारी मांगने का अधिकार नहीं है। वहीं आरटीआई आवेदकों की ओर से पेश हुए वकील ने अपनी दलील में कहा था कि सूचना का अधिकार यानी आरटीआई अधिनियम में व्यापक जनहित के तहत प्रधानमंत्री की डिग्री के बारे में खुलासा किए जाने का प्रावधान है।

भगवान चक्रधर स्वामी की जयंती पर श्रद्धा का माहौल, शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

मुंबई, महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक भगवान सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की जयंती के अवसर पर सोमवार को श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भगवान चक्रधर स्वामी को नमन किया। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मुंबई राजभवन में भगवान चक्रधर स्वामी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नर्णावरे, उप सचिव एस रामामूर्ति, राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी तथा राज्य पुलिस के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महाराष्ट्र राजभवन ने जानकारी देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक भगवान सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की जयंती के अवसर पर राजभवन, मुंबई में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, उप सचिव एस. राममूर्ति, राजभवन और राज्य पुलिस के कर्मचारी एवं अधिकारी उपस्थित थे।” वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी भगवान चक्रधर स्वामी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने सरकारी निवास ‘वर्षा’ में चक्रधर स्वामी की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें नमन किया। सीएमओ महाराष्ट्र ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “परब्रह्म कलियुग अवतारी, श्री चक्रधर नमो नमः। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास पर भगवान सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।” इससे पहले, सीएम फडणवीस ने एक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “महानुभाव पंथ के संस्थापक और प्रखर दार्शनिक भगवान श्री चक्रधर स्वामी को उनकी जयंती पर स्मरण! महानुभाव पंथचे संस्थापक, थोर तत्त्वज्ञ भगवान श्री चक्रधर स्वामी यन्ना जयंतीदिनी कोटि कोटि नमन!”  

हर साल 20,000 करोड़ गंवाने वाले 45 करोड़ भारतीय युवाओं को गेमिंग बिल से नई राह

नई दिल्ली   सरकार ने द प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 लाकर देश के युवाओं को नई दिशा देने का काम किया है। इससे एक तरफ रियल-मनी गेम पर रोक लग जाएगी, तो दूसरी तरफ ई-स्पोर्ट्स और एजुकेशन प्लेटफॉर्म को बढ़ावा मिलेगा।   सरकारी अनुमान के मुताबिक, रियल-मनी गेम में करीब 45 करोड़ भारतीय हर साल 20,000 करोड़ रुपए गवां रहे थे। यह कई सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहे थे। इनमें कर्ज के कारण आत्महत्या और बच्चों द्वारा अनजाने में माता-पिता की पूरी सेविंग्स ऑनलाइन गेम में दांव पर लगाना आदि शामिल था। सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग बिल सभी पक्षकारों की सहमति से मिलकर बनाया है। संपूर्ण दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए वित्त, खेल और आईटी मंत्रालयों के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), बैंकों, अभिभावक संगठनों और गेमिंग उद्योग से भी जानकारी ली गई। इस बिल से देश में ऑनलाइन गेम के भविष्य को सही दिशा मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में मौजूदा समय में 48.8 करोड़ लोग ऑनलाइन गेम खेलते हैं। इस आंकड़ा 2025 के अंत तक 50 करोड़ के पार जा सकता है। वहीं, ई-स्पोर्ट्स की व्यूअरशिप 2025 के अंत तक 64 करोड़ के पार जाने की उम्मीद है। 2024 में गेमिंग स्टार्टअप ने 3,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया था, जो कि 2025 में 5,000 करोड़ रुपए तक जाने की उम्मीद है। प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पर इंडस्ट्री लीडर्स और लीगल एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि इससे देश में ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा। एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह कानून न सिर्फ ई-स्पोर्ट्स को मान्यता देता है, बल्कि एडिक्शन, वित्तीय सुरक्षा, फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे सामाजिक मुद्दों को संबोधित करता है। अर्थशास्त्र लीगल के संस्थापक सदस्य गौरव सहाय ने कहा कि यह विधेयक व्यापक है क्योंकि यह सर्विस प्रोवाइडर्स और सुविधाएं देने वालों से लेकर ऐसे खेलों को बढ़ावा देने वालों तक, सभी पर लागू होता है। उन्होंने आगे कहा कि यह कानून सभी प्रकार के रियल-मनी खेलों पर प्रतिबंध लगाकर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। एस8यूएल के सह-संस्थापक और सीईओ अनिमेष अग्रवाल ने इस विधेयक को भारतीय ई-स्पोर्ट्स के लिए एक "ऐतिहासिक मोड़" बताया। उन्होंने कहा कि कौशल-आधारित गेमिंग और सट्टेबाजी के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचकर, यह कानून संरचित विकास के लिए जगह बनाते हुए इकोसिस्टम की अखंडता की रक्षा करता है।

तमिलनाडु दौरे पर सीपी राधाकृष्णन, उपराष्ट्रपति पद के लिए तेज हुई राजनीतिक हलचल

चेन्नई,  9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के साथ ही तमिलनाडु में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक दोनों ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं। एनडीए के उम्मीदवार सीपी. राधाकृष्णन मंगलवार को चेन्नई पहुंचेंगे, जबकि ‘इंडिया’ ब्लॉक के उम्मीदवार न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुदर्शन रेड्डी रविवार को समर्थन जुटाने के लिए शहर आए। भाजपा सूत्रों के अनुसार, राधाकृष्णन अपनी यात्रा के दौरान एनडीए के घटक दलों के नेताओं के साथ कई बैठकें करेंगे। पार्टी का समर्थन हासिल करने के लिए उनके 26 या 27 अगस्त को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी से मिलने की उम्मीद है। राधाकृष्णन तमिल मनीला कांग्रेस (टीएमसी) के अध्यक्ष जी.के. वासन और गठबंधन के अन्य नेताओं से भी मिलेंगे। अपने प्रवास के दौरान, उनके भाजपा के प्रदेश मुख्यालय कमलालायम जाने और वरिष्ठ पदाधिकारियों से बातचीत करने की संभावना है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया है कि प्रचार अभियान उनकी उम्मीदवारी के लिए एनडीए के सामूहिक समर्थन को मजबूत करने पर केंद्रित होगा। इस बीच, ‘इंडिया’ ब्लॉक द्वारा मैदान में उतारे गए सुदर्शन रेड्डी ने रविवार को चेन्नई में तमिलनाडु चुनाव प्रचार शुरू किया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और वरिष्ठ डीएमके नेताओं से भी मुलाकात की, जहां ‘इंडिया’ ब्लॉक के सांसद भी मौजूद थे। मुलाकात के दौरान, रेड्डी ने संविधान की रक्षा में दशकों की अपनी कानूनी सेवा के बारे में बताया और निर्वाचित होने पर इसके मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया। उन्होंने संघवाद और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में तमिलनाडु के नेतृत्व की प्रशंसा की, साथ ही राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति चेतावनी भी दी। उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले तमिलनाडु के महत्व को ये दोनों चुनावी कदम उजागर करते हैं। जहां एनडीए अन्नाद्रमुक और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ अपने गठबंधन पर निर्भर है, वहीं ‘इंडिया’ ब्लॉक रेड्डी को ‘राजनीतिक उथल-पुथल के समय संवैधानिक मूल्यों की रक्षा’ के लिए प्रतिबद्ध उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहा है। बता दें कि जैसे-जैसे 9 सितंबर का चुनाव नजदीक आ रहा है, दोनों उम्मीदवारों की यात्राएं मुकाबले को दिलचस्प बना दी हैं। वहीं, इसमें तमिलनाडु राष्ट्रीय चुनाव प्रचार अभियान में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में उभर रहा है।  

ED की छापेमारी में TMC विधायक जीबन गिरफ्तार, स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़ा मामला

 कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चर्चित स्कूल भर्ती घोटाले की जांच ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक जीबन कृष्ण साहा भागने की कोशिश में रंगे हाथों पकड़े गए. साहा ने घर की दीवार कूदकर फरार होने का प्रयास किया, लेकिन ED की टीम ने उनका पीछा कर खेतों से उन्हें पकड़ लिया. अधिकारियों के मुताबिक, वह खेतों के रास्ते भाग रहे थे और उन्हें कीचड़ से सना हुआ गिरफ्तार किया गया. छापेमारी और विधायक का भागने का प्रयास ईडी अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही साहा को रेड की जानकारी मिली, उन्होंने घर की बाउंड्री वॉल कूदकर फरार होने की कोशिश की. लेकिन ईडी टीम और केंद्रीय बलों ने पीछा कर उन्हें पास के कृषि क्षेत्र में धर दबोचा. मोबाइल फोन सबूत नष्ट करने की कोशिश अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि विधायक ने सबूत मिटाने के लिए अपना मोबाइल फोन घर के पास एक तालाब में फेंक दिया था. हालांकि, ईडी टीम ने तालाब से उनके दोनों मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं. इन्हें अब फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा. कई जगहों पर छापेमारी जानकारी के लिए बता दें कि ईडी की कार्रवाई केवल विधायक के घर तक सीमित नहीं रही. अधिकारियों ने साहा के ससुराल वालों के घर (रघुनाथगंज, मुर्शिदाबाद) और उनके पर्सनल असिस्टेंट के घर (बीरभूम) में भी तलाशी ली. घोटाले से जुड़े सुराग ईडी अधिकारी के मुताबिक, यह रेड बीरभूम जिले के एक शख्स से जुड़े लेन-देन की जानकारी मिलने के बाद की गई. वही व्यक्ति आज सुबह ईडी टीम के साथ साहा के घर भी गया. पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी गौरतलब है कि विधायक साहा को इसी भर्ती घोटाले के सिलसिले में CBI ने अप्रैल 2023 में गिरफ्तार किया था. हालांकि, उन्हें मई 2023 में जमानत पर रिहा कर दिया गया था. इस मामले में CBI अपराध और भर्ती की गड़बड़ियों की जांच कर रही है, जबकि ईडी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच में जुटी है.

रणवीर-रैना को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, कहा- दूसरों की कीमत पर मत कमाओ

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक लहजे में कहा है कि किसी को भी कमाई करने के मकसद से किसी का भी मजाक उड़ाने की आजादी नहीं दी सकती और उसे अभिव्यक्ति की आजादी के तहत संरक्षण नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले में तल्ख टिप्पणी की कि जब आप अपने भाषण का व्यवसायीकरण कर रहे हैं, तो आप इसके जरिए किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचा सकते। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही कॉमेडिन समय रैना और अन्य हास्य कलाकारों को विकलांग व्यक्तियों का मज़ाक उड़ाने वाले चुटकुलों के लिए कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ क्योर एसएमए फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से प्रभावित मरीजों और परिवारों की मदद करता है। याचिका में विकलांग व्यक्तियों का मज़ाक उड़ाने वाले चुटकुलों की ओर अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया गया था। अदालत ने जिन हास्य कलाकारों की आलोचना की है, उनमें समय रैना, विपुन गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन कॉमेडियन ने अपने शो में दिव्यांगों और दुर्लभ बीमारियों का मजाक उड़ाया है, जिससे पीड़ितों की भावनाएं आहत हुईं हैं। कोर्ट ने उन्हें दिव्यांगों (PwDs) और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों का मजाक उड़ाने वाले असंवेदनशील चुटकुले सुनाने के लिए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हर व्यक्ति की गरिमा की रक्षा की जानी चाहिए। सद्बुद्धि की जीत हुई इस याचिका को इंडियाज गॉट लेटेंट विवाद से जुड़े मामलों के साथ जोड़ दिया गया, जिसमें यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया पर आरोप लगाए गए थे। फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कहा कि "सद्बुद्धि की जीत हुई है" और सभी हास्य कलाकारों ने माफी मांग ली है। कोर्ट ने इन कलाकारों से कहा है कि वे अपने चैनल पर माफीनामा प्रसारित करें। केंद्र को गाइडलाइंस बनाने का निर्देश कोर्ट में सुनवाई के दौरान समय रैना समेत सभी कॉमेडियन मौजूद थे। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि सभी ने माफी मांग ली है।इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की, "मजाक जीवन का हिस्सा है और हम अपने ऊपर बने मजाक को स्वीकार कर सकते हैं लेकिन जब आप दूसरों का मजाक बनाना शुरू करते हैं, तो यह संवेदनशीलता का उल्लंघन है।" सुप्रीम कोर्ट ने उनसे यह भी पूछा है कि इस अमानवीय अपराध के लिए उन पर कितना जुर्माना लगाया जाना चाहिए? कोर्ट ने इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को गाइडलाइंस बनाने का भी निर्देश दिया।

स्कूल भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई, सत्तारूढ़ दल के विधायक की गिरफ्तारी

कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल के स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में छापेमारी के बाद सोमवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक जीवन कृष्ण साहा को गिरफ्तार कर लिया। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में उनके आवास पर छापेमारी के बाद उन्हें केंद्रीय जांच एजेंसी ने हिरासत में लिया। सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान विधायक ने दीवार कूदकर अपने घर से भागने की कोशिश की। उन्होंने अपने फोन भी घर के पीछे एक नाले में फेंक दिए, जो बरामद कर लिए गए हैं। छापेमारी के वीडियो और तस्वीरों में एक भीगे हुए विधायक को ईडी और सीआरपीएफ के अधिकारी उस जगह से ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जहां चारों ओर झाड़ियां और कचरा फैला हुआ था। सूत्रों ने बताया कि बुरवान विधानसभा क्षेत्र के विधायक को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एजेंसी के साथ सहयोग न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि छापेमारी में विधायक के कुछ रिश्तेदार और सहयोगी भी शामिल हैं। साहा को 2023 में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था साहा को 2023 में सीबीआई ने इस घोटाले से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया था और बाद में रिहा कर दिया गया था। ईडी का धन शोधन मामला सीबीआई की ओर से दर्ज एक प्राथमिकी से उपजा है, जिसे कलकत्ता हाईकोर्ट ने समूह 'ग' और 'घ' के कर्मचारियों, कक्षा 9 से 12 तक के सहायक शिक्षकों और प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच करने का निर्देश दिया था। माणिक भट्टाचार्य के अलावा कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था ईडी ने इससे पहले पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी कथित सहयोगी अर्पिता मुखर्जी, टीएमसी विधायक और पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य के अलावा कुछ अन्य लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी की ओर से गिरफ्तारी के बाद चटर्जी को टीएमसी ने निलंबित कर दिया था। ईडी ने इस मामले में अब तक कुल चार आरोपपत्र दाखिल किए हैं।

पीएम-सीएम हटाने वाले बिल पर अमित शाह ने जताई कड़ी नाराजगी, विपक्ष पर निशाना

नई दिल्ली संसद में पेश किए गए संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर जारी विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि विपक्ष इस बिल का विरोध करके लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है और जनता को बताना चाहिए कि क्या कोई मुख्यमंत्री (CM), प्रधानमंत्री (PM) या मंत्री जेल से सरकार चला सकता है. उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि उन्हें जेल से सरकार चलाने का विकल्प मिले. अमित शाह ने एक इंटरव्यू में कहा, "आज भी ये कोशिश कर रहे हैं कि अगर कभी जेल गए तो जेल से ही आसानी से सरकार बना लेंगे. जेल को ही CM हाउस, PM हाउस बना देंगे और DGP, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव या गृह सचिव जेल से ही आदेश लेंगे." गृह मंत्री ने साफ कहा कि इस बिल के प्रावधान लोकतंत्र की गरिमा के लिए आवश्यक हैं. उनके मुताबिक, अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होता है और 30 दिन के भीतर उसे जमानत नहीं मिलती, तो उसे पद छोड़ना होगा. उन्होंने पूछा, "अगर जमानत मिल जाती है तो वे वापस शपथ लेकर पद संभाल सकते हैं, लेकिन जेल से सरकार चलाना क्या लोकतंत्र के लिए उचित है?" 'पीएम मोदी ने PM के पद को शामिल करने पर दिया जोर' अमित शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस बिल में PM का पद शामिल करने पर जोर दिया. उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने 39वें संशोधन में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्पीकर को न्यायिक समीक्षा से बाहर रखा था, लेकिन मोदी सरकार इसके उलट कदम उठा रही है. विपक्ष द्वारा संसद में बिल पेश करने से रोकने पर शाह ने कहा, "क्या संसद केवल शोरगुल के लिए है या बहस के लिए? हमने भी अतीत में विरोध किया है लेकिन किसी बिल को पेश ही न होने देना अलोकतांत्रिक मानसिकता है. विपक्ष को इसका जवाब जनता को देना होगा." अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा कांग्रेस पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब मनमोहन सिंह सरकार ने लालू यादव को बचाने के लिए अध्यादेश लाया था, तब राहुल गांधी ने उसे सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था. उन्होंने पूछा, "अगर उस दिन नैतिकता थी, तो क्या आज नहीं है क्योंकि कांग्रेस लगातार तीन चुनाव हार चुकी है?" AAP नेता सत्येंद्र जैन और कांग्रेस द्वारा RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव को समर्थन देने का हवाला देते हुए शाह ने विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार के अध्यादेश को बकवास बताया और फाड़ दिया, लेकिन आज वही कांग्रेस, सरकार बनाने के लिए लालू यादव को गले लगा रही है." गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के 'ब्लैक बिल' कहकर विरोध करने पर कहा कि वे और बीजेपी पूरी तरह इस विचार को खारिज करते हैं कि देश को किसी एक व्यक्ति के बिना चलाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा, "एक सदस्य हटेगा तो पार्टी के अन्य सदस्य सरकार चलाएंगे. जब उन्हें जमानत मिलेगी, वे फिर से पद ग्रहण कर सकते हैं. इसमें आपत्ति क्या है?" उन्होंने उम्मीद जताई कि विधेयक पारित होगा और कांग्रेस और विपक्ष में भी कई लोग नैतिक आधार पर इसे समर्थन देंगे.

सर्जरी के बाद दर्दनाक अंत: पत्नी ने पति के लिए दिया लीवर, दोनों की गई जान

पुणे  महाराष्ट्र के पुणे से एक दुखद मामला सामने आया है। यहां पर एक पत्नी ने अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे लिवर दान देने का फैसला लिया। इसके बाद एक प्राइवेट हॉस्पिटल में सर्जरी करवाई गई। लेकिन सर्जरी के बाद ही पति की और फिर कुछ दिन बाद पत्नी की भी मौत हो गई। इससे लोगों ने प्राइवेट हॉस्पिटल को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना के सामने आने के बाद महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य सेवा की डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर नागनाथ येमपल्ले ने बताया कि सह्याद्री अस्पताल को इस घटना के संबंध में नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्हें इस ट्रांसप्लांट से जुड़ी सभी जानकारी सोमवार तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा, "हमने अस्पताल को एक नोटिस जारी किया है। इसमें पीड़ित की वीडियो रिकॉर्डिंग और उपचार की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। यह रिपोर्ट हमें सुबह 10 बजे तक मिल जाएगी। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतक बापू कोमकर को लिवर की समस्या थी, जिसे लेकर डॉक्टर ने उन्हें ट्रांसप्लांट की सलाह दी। उनकी पत्नी कामिनी ने पति की जान बचाने के लिए उन्हें अपना लिवर दान करने का फैसला लिया। इसके बाद 15 अगस्त को दोनों दी सह्याद्री अस्पताल में सर्जरी हुई। लेकिन सर्जरी के दो दिन बाद ही बापू कोमकर की हालत बिगड़ गई और 17 अगस्त को उनकी मौत हो गई। इसके बाद कामिनी को 21 अगस्त को इन्फेक्शन हो गया और उनकी भी मौत हो गई। दोनों लोगों की मौत हो जाने पर बापू और कामिनी के परिजनों ने अस्पताल के ऊपर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इतना ही नहीं उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच करने और अस्पताल पर कार्रवाई करने की मांग की। हालांकि अस्पताल की तरफ से अपना बचाव करते हुए कहा गया कि उन दोनों की सर्जरी मेडीकल प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालने करने के बाद ही की गई थी। अस्पताल की तरफ से केस के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि हम कोमकर परिवार के प्रति अपनी पूरी संवेदना रखते हैं। मरीज को लीवर और अन्य अंगों से जुड़ी कई परेशानियां थीं, यह एक हाई रिस्क केस था। हमने इस सर्जरी के जुड़ी जटिलताओं के बारे में पहले ही परिवार को बता दिया था। सर्जरी पूरी मानक प्रोटोकॉल के बाद ही हुई। दुर्भाग्य से सर्जरी के कुछ दिन बाद ही मरीज को कार्डियोजेनिक शॉक हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। जहां तक दानदाता की बात है तो शुरुआत में उन्होंने बेहतर परिणाम दिखाए और अच्छे से रिकवरी की। लेकिन बाद में उन्हें शॉक की वजह से मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी समस्या हो गई, जिसकी वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल ने स्वास्थ्य विभाग से नोटिस मिलने की सूचना की पुष्टि करते हुए कहा, “हम जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। इस मामले की जांच हो और अच्छी तरह से हो, इसके लिए हम आवश्यक जानकारी और सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”