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यात्रियों के लिए खुशखबरी! अब मुंबई-गांधीनगर वंदे भारत रुकेगी 8 जगह

मुंबई  भारतीय रेलवे ने देश की तीसरी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के शेड्यूल में अहम बदलाव किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 30 सितंबर 2022 को उद्घाटन की गई यह वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मुंबई सेंट्रल और गांधीनगर कैपिटल के बीच चलती है। यह ट्रेन पश्चिम रेलवे द्वारा संचालित की जाती है और इसे सप्ताह में छह दिन (बुधवार छोड़कर) चलाया जाता है। ट्रेन नंबर 20901/20902, मुंबई सेंट्रल और गांधीनगर कैपिटल के बीच 521 किलोमीटर की दूरी तय करने में 6 घंटे 30 मिनट का समय लेती है। अब आठ स्टेशनों पर रुकेगी वंदे भारत एक्सप्रेस रेलवे द्वारा किए गए बदलाव के बाद अब यह ट्रेन पहले के 7 की बजाय 8 स्टेशनों पर रुकेगी। नई सूची में गुजरात के नवसारी स्टेशन को भी जोड़ा गया है। संशोधित स्टॉपेज इस प्रकार हैं:   ट्रेन संचालन का समय गाड़ी संख्या 20901: मुंबई सेंट्रल से गांधीनगर कैपिटल के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस सुबह 6:00 बजे रवाना होगी और दोपहर 12:25 बजे गांधीनगर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 20902: वापसी यात्रा में यह ट्रेन गांधीनगर से दोपहर 2:05 बजे प्रस्थान करेगी और रात 8:30 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी। यह सेवा सप्ताह में हर दिन बुधवार को छोड़कर उपलब्ध रहेगी। वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया इस ट्रेन में कुल 20 डिब्बे होते हैं। एसी चेयर क्लास का किराया: ₹1285 एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया: ₹2465 मुंबई और गांधीनगर के बीच सफर करने वालों के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस अब और अधिक सुविधाजनक हो गई है, विशेष रूप से नवसारी स्टेशन को शामिल किए जाने से दक्षिण गुजरात के यात्रियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।  

टूरिस्ट बस हादसे में हाहाकार, 5 की जान गई, भारतीय नागरिक भी शामिल

न्यूयॉर्क सिटी  नियाग्रा फॉल्स से न्यूयॉर्क सिटी लौट रही एक टूरिस्ट बस के पलटने से उसमें सवार एक भारतीय समेत पांच लोगों की मौत हो गई है जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। बस में भारतीय और चीनी नागरिकों सहित कुल 54 यात्री सवार थे। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह हादसा ड्राइवर का ध्यान भटकने की वजह से हुआ है।   मृतकों की पहचान रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में बिहार के शंकर कुमार झा (65), न्यू जर्सी की पिंकी चांगरानी (60), चीन के झी होंगझुओ (22) और न्यू जर्सी के झांग शियाओलान (55) और जियान मिंगली (56) शामिल हैं।   हादसा कैसे हुआ? न्यूयॉर्क के पेमब्रोक इलाके में अंतरराज्यीय राजमार्ग-90 पर शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ। प्रांतीय पुलिस प्रमुख आंद्रे रे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि ड्राइवर का ध्यान भटक गया जिससे उसने बस पर से नियंत्रण खो दिया और बस पलट गई। रे ने बताया कि हादसा इतना भीषण था कि कई यात्री बस से बाहर गिर गए और मौके पर ही पांच वयस्क यात्रियों की मौत हो गई। कई यात्री बस के अंदर फंस गए थे जिन्हें बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला। घायलों को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि किसी भी अन्य यात्री को जानलेवा चोटें नहीं आई हैं और हादसे के कारणों की आगे जांच जारी है।  

US में पंजाबी ड्राइवरों की बड़ी परेशानी, भारतीय समुदाय ने सरकार से लगाई गुहार

वाशिंगटन  अमेरिका में हाल ही में हुए एक भीषण सड़क हादसे ने न केवल भारतीय समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि वहां काम कर रहे  1.5 लाख से अधिक पंजाबी मूल के ट्रक ड्राइवरों की रोज़ी-रोटी पर भी संकट खड़ा कर दिया है।   क्या है मामला ? 12 अगस्त को  फ्लोरिडा के फोर्ट पियर्स राजमार्ग पर पंजाबी मूल के ट्रक ड्राइवर हरजिंदर सिंह (28) ने अचानक ट्रक से गलत यू-टर्न ले लिया। उसी वक्त पीछे से आ रही एक मिनीवैन ट्रक से टकरा गई। इस टक्कर में  तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि हरजिंदर सिंह और उसके साथ ट्रक में मौजूद एक अन्य व्यक्ति सुरक्षित बच निकले। अमेरिका का कड़ा कदम  इस घटना के बाद अमेरिकी प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए विदेशी ट्रक ड्राइवरों (खासकर भारतीय और पंजाबी मूल के) को वर्क वीज़ा जारी करने पर रोक लगा दी। इस फैसले से अमेरिका में काम कर रहे हजारों पंजाबी परिवारों की  आर्थिक स्थिति पर संकट मंडरा गया है।  दशकों से पंजाबी ड्राइवर अमेरिकी सप्लाई चेन की रीढ़ बने हुए हैं। मंत्री संजीव अरोड़ा की अपील  इस मामले को लेकर पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री संजीव अरोड़ा ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर  को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।अरोड़ा ने कहा: “हम हादसे की गंभीरता को समझते हैं, लेकिन किसी एक व्यक्ति की गलती की सज़ा पूरे समुदाय को नहीं दी जानी चाहिए। ” “अमेरिका में रह रहे करीब 1.5 लाख पंजाबी ट्रक ड्राइवरों की रोज़ी-रोटी पर यह फैसला भारी पड़ रहा है।” “विदेश मंत्रालय को तुरंत  अमेरिकी अधिकारियों से उच्च-स्तरीय बातचीत कर वीज़ा रोक पर समाधान निकालना चाहिए।” परिवारों की चिंता और पंजाब से डॉलर फ्लो  अमेरिका में बसे पंजाबी ट्रक ड्राइवर न केवल वहां की सप्लाई चेन को संभाल रहे हैं, बल्कि पंजाब के गांवों में भी  डॉलर भेजकर हजारों परिवारों की आजीविका चला रहे हैं। वीज़ा रोक से ड्राइवरों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।  बच्चों की पढ़ाई, घर-परिवार की देखभाल और पंजाब की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ सकता है।

बचपन से अंतरिक्ष तक का सफर: शुभांशु शुक्ला ने शेयर किए अनमोल किस्से

नई दिल्ली  अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने रविवार को कहा कि वह बचपन में शर्मीले और संकोची थे। युवावस्था में उन्होंने कभी अंतरिक्ष में जाने का सपना नहीं देखा था। भारतीय वायुसेना के एक कार्यक्रम में शुक्ला ने कहा कि उन्होंने राकेश शर्मा की ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान की कहानियां सुनीं। लेकिन युवावस्था तक उन्होंने यह नहीं सोचा था कि वह अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। अंतरिक्ष यात्री ने हाल में संपन्न एक्सिओम 4 मिशन का हिस्सा बनने के अपने अनुभव को भी साझा किया। इस मिशन के जरिए वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्ला सहित गगनयान मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों को सम्मानित किया और कहा कि गगनयान मिशन आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में एक नए अध्याय का प्रतीक है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य चयनित गगनयात्रियों को रविवार को रत्न बताया। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में एक नए अध्याय का प्रतीक है। सिंह ने यहां सुब्रतो पार्क में भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में चार गगनयात्रियों को सम्मानित किया। यह समारोह एक्सिओम 4 मिशन की सफलता के बाद आयोजित किया गया है जिसमें शुक्ला भी शामिल थे। ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला चार चुने गए गगनयात्री हैं। इनके नामों का पहली बार खुलासा फरवरी 2024 में तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में किया गया था। मोदी ने गगनयान परियोजना की औपचारिक घोषणा 2018 में की थी। इस परियोजना का उद्देश्य तीन सदस्यीय चालक दल को 2027 में तीन दिवसीय मिशन के लिए 400 किलोमीटर की कक्षा में भेजना है।  

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की पहल, मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका के द्वारा हाल ही में भारत के खिलाफ टैरिफ को लेकर कार्रवाई की गई। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि भारत रूस से लगातार तेल खरीद रहा है इसके कारण यह युद्ध अनवरत जारी है। इन तमाम आरोप प्रत्यारोपों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की खबरें सामने आई। वहीं, अब भारत में यूक्रेन के राजदूत अलेक्जेंडर पोलिशचुक ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत यात्रा की बात कही है। इसके अलावा, यूक्रेन ने एक बार फिर रूस के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने में भारत की अधिक सक्रिय भूमिका की अपील की है। भारत में यूक्रेन के राजदूत अलेक्जेंडर पोलिशचुक ने शनिवार को एएनआई से बात करते हुए कहा कि रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को देखते हुए यूक्रेन भारत को संभावित शांति वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में देखता है। भारत-यूक्रेन के बीच बढ़ी बातचीत पोलिशचुक ने यूक्रेन के राष्ट्रीय ध्वज दिवस के अवसर पर बोलते हुए कहा कि 2023 से यूक्रेन और भारत के बीच बातचीत में वृद्धि हुई है, जिसका उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान की भी सराहना की कि भारत युद्ध में तटस्थ नहीं है, बल्कि दृढ़ता से शांति, कूटनीति और राजनीतिक संवाद का समर्थन करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सितंबर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र में दोनों देशों के बीच यह बातचीत जारी रहेगी। जेलेंस्की जल्द आएंगे भारत जेलेंस्की की भारत यात्रा के बारे में पूछे जाने वाले पर राजदूत ने कहा, 'दोनों देश यात्रा की तारीख और वार्ता के विषय को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जल्द ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा।' भारत-यूक्रेन के पुराने संबंध यूक्रेनी राजदूत ने 'द वीक' में एक लेख लिखकर भारत-यूक्रेन संबंधों के बारे में चर्चा की है। उन्होंने लिखा, ''यूक्रेन के तीन राष्ट्रपतियों ने भारत का आधिकारिक दौरा किया, जबकि भारत के दो राष्ट्रपतियों ने यूक्रेन का दौरा किया। 2021 तक यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण से पहले द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.4 अरब तक पहुंच गया था।'' भारत यात्रा के दौरान क्या होगी बात उन्होंने कहा, ''एक लंबे विराम के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री के बीच पहली बैठक नवंबर 2021 में ग्लासगो में जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। मई 2023 से ऐसी बैठकें और टेलीफोन वार्ता नियमित हो गई हैं। 23 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय खोला। इसने रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए दोनों लोकतंत्रों के नेताओं की आकांक्षा की पुष्टि की। आज, दोनों देशों के विदेश मंत्रालय और राजनयिक मिशन इस साझा उद्देश्य को लागू करने के लिए लगन से काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत की आगामी यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी के लिए एक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।'' राजदूत ने एएनआई से बातचीत में आगे कहा, “हम यूक्रेन में शांति-निर्माण प्रक्रिया में भारत की अधिक भागीदारी की उम्मीद करते हैं। मेरा मानना है कि हमारी सभी बैठकें इस बात पर चर्चा का हिस्सा होंगी कि भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस के साथ राजनीतिक बातचीत में कैसे शामिल हो सकता है। विशेष रूप से रूस और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को ध्यान में रखते हुए हमें इसकी उम्मीद है।”

सपा-टीएमसी के बाद AAP भी अलग, JPC में अब कांग्रेस की भूमिका अहम

पटना PM-CM हटाने वाला बिल (पीएम, सीएम और मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद पद से हटाने वाले विधेयक) की जांच के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी दूरी बनाने का फैसला कर लिया है। JPC टीम से पहले ही सपा (SP) और टाएमसी (TMC) ने दूरी बनाने का ऐलान किया था। अब आम आदमी पार्टी (आप) ने भी संयुक्त संसदीय समिति से किनारा कर लिया है। प्रमुख सहयोगियों के अलग होने से अब पूरा दारोमदार कांग्रेस के कंधे पर आ गया है। साथ ही विपक्षी एकजुटता बनाए रखने का दबाव और बढ़ गया है। बता दें कि संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को लेकर विपक्षी पार्टियां किनारा कर रही हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस ने इस समिति को ‘नौटंकी’ बताते हुए बहिष्कार किया। इसके बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी साफ कर दिया कि उनकी पार्टी JPC में शामिल नहीं होगी। अब आम आदमी पार्टी ने भी यही रुख अपनाया है। ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली टीएमसी और अखिलेष यादव की नेतृत्व वाली सपा के किनारा करने पर कांग्रेस पर विपक्षी एकजुटता के नाम पर अपनी लाइन बदलने का दबाव बढ़ गया है। दरअसल, कांग्रेस अब तक इस पैनल का हिस्सा बनने के पक्ष में दिखाई दे रही थी, लेकिन टीएमसी के बाद सपा और AAP के कदम ने कांग्रेस हाईकमान को भी असमंजस में डाल दिया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी का मानना है कि संसदीय समितियों की कार्यवाही अदालतों में महत्व रखती है और विवादित विधेयकों पर जनमत को प्रभावित करती है। हालांकि बायकॉट ने विपक्षी समीकरण बदल दिए हैं। अब कांग्रेस के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं कि क्या पार्टी नेतृत्व विपक्ष की एकता को प्राथमिकता देगा या फिर अपनी पुरानी लाइन पर टिका रहेगा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि वो इस मुद्दे पर ममता बनर्जी और टीएमसी के साथ खड़े हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खुद गृह मंत्री अमित शाह यह कह चुके हैं कि उन्हें कई मामलों में झूठा फंसाया गया था तो फिर यह बिल किस आधार पर लाया गया है? अखिलेश का तर्क है कि इस प्रावधान के जरिए किसी भी नेता को फर्जी मामलों में फंसाकर पद से हटाया जा सकता है। उन्होंने आजम खान, रामाकांत यादव और इरफान सोलंकी जैसे अपने नेताओं का उदाहरण भी दिया, जिन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा था। अखिलेश ने यह भी कहा कि यह कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है। टीएमसी ने कहा- सरकार की नौटंकी टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने इस JPC को पूरी तरह से ‘नौटंकी’ बताया है। उनका कहना है कि मोदी सरकार जानबूझकर ऐसे मुद्दों को हवा दे रही है ताकि असली सवालों से ध्यान भटकाया जा सके। ओ’ब्रायन ने कहा कि पहले JPC का गठन जनता के प्रति जवाबदेही तय करने के लिए किया जाता था, लेकिन 2014 के बाद से इन्हें सिर्फ राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। ओ’ब्रायन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि टीएमसी और सपा ने जेपीसी में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमैन मिलकर जेपीसी के अध्यक्ष का चयन करते हैं और सदस्यों का नामांकन पार्टी की संख्या के आधार पर होता है। इससे समिति का झुकाव सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में हो जाता है। विधेयक में क्या है? 20 अगस्त को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किए गए। इनका मकसद यह प्रावधान करना है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। इन विधेयकों की समीक्षा के लिए बनाई गई JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल हैं. समिति को शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश करनी है।

बारिश से बिगड़े हालात: जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन और बादल फटने का खतरा

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर में शनिवार रातभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक महत्वपूर्ण पुल क्षतिग्रस्त हो गया। राजधानी जम्मू में रविवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 190.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस महीने में एक सदी में दूसरी सबसे अधिक बारिश है। इससे पहले 5 अगस्त 1926 को अगस्त में 228.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। अधिकारियों ने चेतावनी जारी कर लोगों से जलस्रोतों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 27 अगस्त तक पहाड़ी इलाकों में मध्यम से भारी बारिश, बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा है। यातायात पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 250 किलोमीटर लंबा जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग और 434 किलोमीटर लंबा श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग भारी बारिश के बावजूद यातायात के लिए खुले हैं। भूस्खलन से आवाजाही बंद पुंछ और राजौरी (जम्मू) को दक्षिण कश्मीर के शोपियां से जोड़ने वाली मुगल रोड और जम्मू के किश्तवाड़ एवं डोडा जिलों को अनंतनाग (दक्षिण कश्मीर) से जोड़ने वाली सिंथन रोड पर भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर आवाजाही बंद कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि कठुआ जिले में सहर खड्ड नाले के उफान पर होने के कारण जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर लोगेट मोड़ के पास एक पुल बीच से टूट गया। इसके बाद यातायात को वैकल्पिक पुल के रास्ते से डायवर्ट किया जा रहा है। जम्मू शहर में भारी बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। नालों और नदियों का जलस्तर बढ़ने से सड़कें जलमग्न हो गईं और जानीपुर, रूप नगर, तालाब तिल्लो, ज्वेल चौक, न्यू प्लॉट और संजय नगर जैसे इलाकों में पानी घरों में घुस गया। कई घरों की चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई और करीब 12 वाहन अचानक आई बाढ़ में बह गए। पुलिस प्रशासन अलर्ट पर सांबा में बसंतर, कठुआ में उझ और रावी, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और जम्मू में चिनाब, तथा उधमपुर और जम्मू में तवी सहित प्रमुख नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते प्रशासन ने आपदा मोचन दलों और स्थानीय पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा है।अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी हताहत की सूचना नहीं है, लेकिन बारिश के कारण जम्मू क्षेत्र के राजौरी, पुंछ और उत्तरी कश्मीर के गुरेज में कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। जम्मू क्षेत्र के उधमपुर में सबसे अधिक 144.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, इसके बाद रियासी जिले में वैष्णो देवी मंदिर के आधार शिविर कटरा में 115 मिलीमीटर, सांबा में 109 मिलीमीटर और कठुआ में 90.2 मिलीमीटर बारिश हुई। श्रीनगर में 13.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सभी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग ( IMD ) ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने बादल छाए रहने, हल्की बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना भी जताई है। लेह स्थित क्षेत्रीय मौसम विभाग ने लद्दाख के अधिकांश क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और ज्यादातर जगहों पर बादल छाए रहने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर में बारिश की चेतावनी के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। सीएम कार्यालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कई आवासीय क्षेत्रों में जलभराव की सूचना मिली है, जबकि नदियां और नाले खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं। अब्दुल्ला ने बताया कि नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं और मुख्यमंत्री कार्यालय विभागों के संपर्क में है। प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी, जलापूर्ति और बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं की बहाली को प्राथमिकता दी जा रही है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।  

अनीश दयाल सिंह को मिली अहम जिम्मेदारी, अब बने अजित डोभाल की टीम का हिस्सा

नई दिल्ली सीआरपीएफ और आईटीबीपी के पूर्व महानिदेशक अनीश दयाल सिंह को डिप्टी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है। इन्हें आंतरिक मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मणिपुर कैडर के 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सिंह 31 दिसंबर 2024 को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक (DG) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस नियुक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की टीम को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यूपी के प्रयागराज के रहने वाले हैं अनीश दयाल सिंह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 1964 में जन्मे अनीश दयाल सिंह ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। इससे पहले वे इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। CRPF के DG के रूप में उनके कार्यकाल में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान दिया। इसके अलावा अगस्त 2024 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। मणिपुर कैडर के आईपीएस अधिकारी अनीश दयाल सिंह ने अपने करियर की शुरुआत मणिपुर कैडर के IPS अधिकारी के रूप में की थी। उन्होंने कई वर्षों तक केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) में विशेष निदेशक के रूप में काम किया, जहां उन्होंने कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण ऑपरेशनों का नेतृत्व किया। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए उनकी डिप्टी NSA के रूप में नियुक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भारत की रणनीति को और प्रभावी बनाने में सहायक होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के नेतृत्व में डिप्टी NSA के रूप में अनीश दयाल सिंह आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और आंतरिक खतरों जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण सलाह देंगे। उनकी नियुक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।  

तकनीक का करिश्मा, एआई ने लौटाई महिला की खोई हुई आवाज़

लंदन  आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई की मदद से कई कमाल हो चुके हैं। लेकिन 55 साल की सारा एजेकील के साथ जो हुआ वह तो वास्तव में चमत्कार ही है। एआई की मदद से सारा एजेकील ने 25 साल पहले खोई अपनी आवाज वापस पा ली। सारा एजेकील को 25 साल पहले मोटर न्यूरॉन रोग के बारे में पता चला था। इस बीमारी में इंसान के शरीर की नसें और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे बोलने, निगलने और चलने-फिरने में मुश्किल होती है। बाद में धीरे-धीरे आवाज भी चली जाती है। सारा के साथ भी ऐसा ही हुआ था। अब परिवार के पास से आठ सेकंड की पुरानी वीडियो क्लिप का इस्तेमाल करके सारा की आवाज वापस लाई गई है। ऐसे किया गया काम सारा की जो पुरानी क्लिप मिली है उसमें वह अपनी बेटी से बात कर रही थीं। वैज्ञानिकों ने इस क्लिप से सारा की आवाज का आठ सेकंड का ऑडियो सैंपल लिया। इस सैंपल का यूज करके एआई को ट्रेनिंग दी गई। इसके जरिए बताया गया कि सारा के आवाज की टोन, पिच और बोलने का तरीका कैसा था। इस ट्रेनिंग के आधार पर एआई मॉडल ने एक सिंथेटिव वॉयस डेवलप की। यह आवाज सुनने में बिल्कुल सारा एजेकील की आवाज की तरह लगती है। अब अपनी आंखों से बोलती हैं सारा अब बोलने के लिए सारा एक खास टेक्नीक का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए वह अपनी आखों से कंप्यूटर पर टाइप करती हैं। इसके बाद एआई सारा के लिखे को अपनी आवाज में बोल देती है। इस तरह से सारा अपने फैमिली मेंबर्स के साथ अपनी आवाज में बात कर सकती हैं। यह दिखाता है कि एआई के जरिए किस तरह से मेडिकल फील्ड में शानदार चीजों को अंजाम दिया जा सकता है।  

चीन-पाक की बढ़ी टेंशन! भारत लाने जा रहा है जर्मनी से पनडुब्बियां

नई दिल्ली थल और वायु के बाद भारत अब समुद्र में भी अपनी ताकत को बढ़ाने में जुट गया है। भारत ने प्रोजेक्ट-75 को मंजूरी दे दी है। प्रोजेक्ट- 75 इंडिया के तहत जर्मनी के साथ 70 हजार की डील को मंजूरी दी है। प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत भारत जर्मनी के सहयोग से छह एडवांस सबमरीन को देश में विकसित करेगी। इस प्रोग्राम में प्राइवेट सेक्टर भी शामिल है, जिसमें नौसेना के सबमरीन प्रोडक्शन सेंटर के सहयोग से लार्सन एंड टुब्रो ) की प्रमुख भूमिका होने की उम्मीद है। भारत दो परमाणु सबमरीन्स पर भी काम कर रहा है। इस कॉन्ट्रैक्ट के अगले छह महीने के अंदर पूरा होने की उम्मीद है। रक्षा अधिकारियों ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य न सिर्फ अपनी सबमरीन्स के फ्लीट में विस्तार करना है। साथ ही कंवेंसनल सबमरीन के निर्माण में भारत की स्वदेशी क्षमता को मजबूत करना है। एक रिपोर्ट के अनुसार, छह महीने से ज़्यादा समय तक रुके रहने के बाद, केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) को प्रोजेक्ट 75 इंडिया (पी-75आई) के तहत छह एडवांस सबमरीनंस के निर्माण के लिए जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करने की मंज़ूरी दे दी है। डिफेंस से जुड़े अधिकारियों ने एएनआई को बताया कि इस महीने के अंत तक बातचीत शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अब डिफेंस मिनिस्ट्री और एमडीएल को इस प्रोजेक्ट के लिए बातचीत शुरू करने की मंज़ूरी दे दी है और इस महीने के अंत तक यह प्रोसेस शुरू होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट 75आई का क्या है लक्ष्य? रक्षा मंत्रालय ने जनवरी में सरकारी स्वामित्व वाली एमडीएल को इस कार्यक्रम के लिए अपने रणनीतिक साझेदार के रूप में चुना था। इसके तहत जर्मनी के सहयोग से भारत में सबमरीनंस का निर्माण किया जाएगा। प्रोजेक्ट की विशेषताए     एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम वाली छह कंवेंशनल सबमरीनंस।     जर्मन AIP तकनीक सबमरीनंस को तीन हफ्ते तक पानी के अंदर रख सकती है।     इसे भारत की स्वदेशी सबमरीन निर्माण क्षमता बढ़ाने और इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।     रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना अंतिम सरकारी मंज़ूरी से पहले छह महीने की बातचीत का लक्ष्य बना रहे हैं। क्यों जरूरी है प्रोजेक्ट? भारत के रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के टॉप अधिकारियों ने जर्मन कंपनी के साथ छह एडवांस सबमरीन को भारत में ही निर्माण करने का यह फैसला भारतीय सबमरीन प्रोग्राम और उसकी भविष्य की आवश्यकताओं की समीक्षा और एक उच्च स्तरीय बैठक करने के बाद लिया है। प्रस्तावित सबमरीन्स को एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन (AIP) सिस्टम्स से भी लैस किया जाएगा, जिससे यह सबमरीन तीन हफ्ते तक पानी के अंदर बिना किसी समस्या के रह सकेंगी। इस एडवांस फीचर से भारतीय नौसेना की ताकत में और ज्यादा इजाफा होगा। न्यूक्लियर सबमरीन प्रोग्राम P-75I के साथ-साथ, भारत दो परमाणु सबमरीन्स पर भी काम कर रहा है। इस प्रोग्राम में प्राइवेट सेक्टर भी शामिल है, जिसमें नौसेना के सबमरीन प्रोडक्शन सेंटर के सहयोग से लार्सन एंड टुब्रो ) की प्रमुख भूमिका होने की उम्मीद है। सरकार इस सेक्टर में उनके महत्व को समझते हुए, परमाणु और कंवेंशनल दोनों सबमरीन प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है। टीकेएमएस के साथ बातचीत से भारत में नेक्स्ट जेन की कंवेंशनल सबमरीन प्रोडक्शन की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। रक्षा सूत्रों ने एएनआई को बताया कि सरकार न केवल इन नावों को हासिल करने की इच्छुक है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए स्वदेशी डिजाइन और निर्माण विशेषज्ञता भी विकसित करना चाहती है।  इस कॉन्ट्रैक्ट के अगले छह महीने के अंदर पूरा होने की उम्मीद है।