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सांसद भड़कीं: ब्रिटेन में सिख महिला के साथ रेप, नस्लभेदी टिप्पणी से मचा हंगामा

लंदन यूनाइटेड किंगडम के ओल्डबरी कस्बे में एक सिख महिला के साथ हुई हैवानियत ने स्थानीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। 20 साल की बताई जा रही इस महिला के साथ दो व्यक्तियों ने रेप किया और उससे नस्लभेद से जुड़े आपत्तिजनक शब्द भी कहे। हमला पिछले मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे टेम रोड के पास हुआ। पुलिस ने इस घटना को “नस्लीय रूप से गंभीर अपराध” करार दिया है और कहा है कि वे हमलावरों की तलाश में जुटे हुए हैं। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने उस पर नस्लीय टिप्पणी करते हुए कहा कि “अपने देश वापस जाओ।” पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी और फॉरेंसिक जांच की जा रही है। कौन हैं संदिग्ध? स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध दोनों श्वेत पुरुष हैं। एक का सिर मुंडा हुआ था और उसने गहरे रंग का स्वेटशर्ट पहना था, जबकि दूसरा ग्रे रंग की टी-शर्ट में था। सिख समुदाय में आक्रोश इस घटना ने स्थानीय सिख समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा किया है। इसे सीधे तौर पर “जानबूझकर किया गया हमला” माना जा रहा है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि समुदाय का गुस्सा “पूरी तरह जायज है” और उन्होंने आश्वासन दिया कि इलाके में पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी। सांसदों की प्रतिक्रिया बर्मिंघम एडगबास्टन की सांसद प्रीत कौर गिल ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा, “यह न सिर्फ अत्यधिक हिंसक अपराध है, बल्कि इसे नस्लीय रूप से भी अंजाम दिया गया है। हमलावरों ने कथित तौर पर पीड़िता से कहा कि वह यहां की नहीं है। सच्चाई यह है कि वह यहीं की है। हमारा सिख समुदाय और हर समुदाय सुरक्षित, सम्मानित और मूल्यवान महसूस करने का अधिकार रखता है। नस्लवाद और स्त्रीविरोध की ब्रिटेन में कोई जगह नहीं है।” इलफोर्ड साउथ से सांसद जस अठवाल ने इस हमले को “घृणित, नस्लवादी और स्त्री-विरोधी” करार दिया। उन्होंने कहा, “यह हमला हमारे देश में बढ़ते नस्लीय तनाव का नतीजा है। अब एक युवा महिला को जिंदगीभर के लिए मानसिक आघात झेलना पड़ेगा। इस मामले को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए।” हाल की दूसरी घटना यह घटना ऐसे समय हुई है जब महज एक महीने पहले वॉल्वरहैम्प्टन में रेलवे स्टेशन के बाहर तीन किशोरों ने दो बुजुर्ग सिख पुरुषों पर हमला किया था। उस दौरान हमलावरों ने उन्हें जमीन पर गिराकर लात-घूंसों से पीटा और उनका पगड़ी भी खुल गया था। वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी के पास इस घटना से जुड़ी जानकारी है तो तुरंत संपर्क करें ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।  

भारत में अमेरिका के राजदूत पद पर सर्जियो गोर की दावेदारी पर विवाद गहराया

नई दिल्ली अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का अगला राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया मामलों के लिए विशेष दूत नियुक्त करने के फैसले पर कड़ा सवाल उठाया है। बोल्टन ने साफ कहा कि वह गोर को इस जिम्मेदारी के लिए "योग्य नहीं" मानते। बोल्टन ने कहा, "मैं नहीं मानता कि सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के राजदूत बनने के योग्य हैं।" बोल्टन की यह टिप्पणी भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले दो दशकों के संभवतः सबसे खराब दौर की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें ट्रंप की टैरिफ नीति और उनके प्रशासन द्वारा भारत की लगातार आलोचना के कारण तनाव और बढ़ गया है। 38 वर्षीय सर्जियो गोर ट्रंप के करीबी सलाहकार हैं और वाइट हाउस में सीधे राष्ट्रपति तक पहुंच रखते हैं। हालांकि एएनआई को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने उनकी अंतरराष्ट्रीय अनुभव और जटिल वैश्विक मुद्दों की समझ पर चिंता जताई। पूर्व एनएसए ने कहा कि गोर की नियुक्ति ट्रंप की "व्यवहारिक" विदेश नीति का हिस्सा लगती है, जो रणनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत वफादारी पर आधारित है। ट्रंप ने अगस्त में ट्रूथ सोशल पर घोषणा की थी कि वे सर्जियो गोर को भारत के लिए अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत के पद पर पदोन्नत कर रहे हैं। ट्रंप ने गोर को "मेरा शानदार दोस्त" बताते हुए उनकी सराहना की थी। उन्होंने लिखा, "राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक के रूप में, सर्जियो और उनकी टीम ने रिकॉर्ड समय में लगभग 4,000 अमेरिका फर्स्ट पैट्रियट्स को केंद्र सरकार के हर विभाग में भर्ती किया है- हमारे विभाग और एजेंसियां 95 प्रतिशत से अधिक भरी हुई हैं! सर्जियो अपनी वर्तमान भूमिका में तब तक बने रहेंगे जब तक उनकी (संसद द्वारा) पुष्टि नहीं हो जाती।" रूसी तेल खरीद पर बोल्टन की टिप्पणी: प्रतिबंधों में 'असंगति' ट्रंप के पिछले कार्यकाल में एनएसए रहे बोल्टन ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कई देशों ने रूस से कच्चा तेल खरीदकर प्रतिबंधों की "कमजोरी" का फायदा उठाया। उनके अनुसार, प्रतिबंधों का मकसद रूस की आय को कम करना था ताकि उसका युद्ध तंत्र कमजोर हो सके, लेकिन तेल बिक्री को पूरी तरह रोकना नहीं था, क्योंकि ऐसा करने से यूरोप और अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ सकती थीं। बोल्टन ने कहा, “यहां तक कि तकनीकी रूप से कई देशों ने प्रतिबंधों का उल्लंघन भी नहीं किया, बल्कि रूस से कैप प्राइस से नीचे तेल खरीदकर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दाम पर बेचा। मूल उद्देश्य यही होना चाहिए कि रूस के युद्ध तंत्र को फंडिंग न मिले।” भारत को दी सलाह – "ट्रंप को वन-टाइम डील मानें" पूर्व NSA बोल्टन ने भारत को सलाह देते हुए कहा कि नई दिल्ली को ट्रंप को "एक बार की घटना" मानना चाहिए और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर फैसले करने चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत सरकार को चाहिए कि ट्रंप को एक ‘वन-टाइम प्रपोजिशन’ की तरह देखें और अपने हितों के अनुसार कदम उठाएं। ट्रंप की नीतियां अमेरिकी राजनीति के बड़े दृष्टिकोण को नहीं दर्शातीं।" ट्रंप की विदेश नीति शैली पर तीखी आलोचना बोल्टन ने ट्रंप की विदेश नीति को "अनिश्चित और लेन-देन आधारित" बताते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की बड़ी वजह ट्रंप का "अनियमित और अस्थिर" तरीका रहा है। ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाते हुए कुल दंडात्मक टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है। यह दबाव इसलिए बनाया गया ताकि भारत रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद बंद करे। इस कदम से दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापार वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ा है।  

मिजोरम और मणिपुर में PM मोदी का हमला: कहा- वोट बैंक की राजनीति ने पूर्वोत्तर की प्रगति रोकी

इंफाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नॉर्थईस्ट में मिजोरम और मणिपुर के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान सबसे पहले मिजोरम पहुंचे, जहां उन्होंने मिजोरम को को दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता से जोड़ने वाली तीन नयी एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। प्रधानमंत्री मोदी ने मिजोरम की राजधानी आइजोल को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली 8,070 करोड़ रुपये की बैराबी-सैरांग लाइन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हुए पीएम मोदी ने कहा कि चाहे स्वतंत्रता आंदोलन हो या राष्ट्र निर्माण, मिजोरम के लोगों ने काफी योगदान दिया है। मिजोरम के लिए ऐतिहासिक दिन, आइजोल अब रेल मानचित्र पर आ गया है। बैराबी-सैरांग रेल लाइन से मिजोरम की जनता के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से पूरे क्षेत्र में शैक्षिक, सांस्कृतिक, आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, रोजगार सृजित होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पीएम ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण पूर्वोत्तर को बहुत नुकसान हुआ। जो पहले उपेक्षित थे वे अब सबसे आगे हैं, जो पहले हाशिये पर थे वे आज मुख्यधारा में हैं। पीएम ने कहा कि केंद्र पिछले 11 वर्षों से पूर्वोत्तर के विकास के लिए काम कर रहा है, यह क्षेत्र अब भारत का विकास इंजन है। मिजोरम 'एक्ट ईस्ट' नीति में प्रमुख भूमिका निभाएगा; कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट परियोजना, रेल लाइन राज्य को दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर का भी दौरा करेंगे। मणिपुर में वह चूड़ाचांदपुर एवं इंफाल में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से बातचीत करेंगे। मणिपुर में दो वर्ष पहले जातीय हिंसा भड़कने के बाद मोदी का यह राज्य का पहला दौरा होगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री 8,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी करेंगे। मोदी के दौरे के मद्देनजर इंफाल और चूड़ाचांदपुर जिला मुख्यालय शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री के सभा स्थलों इंफाल में लगभग 237 एकड़ में फैले कांगला किले और चूड़ाचांदपुर के पीस ग्राउंड तथा उसके आसपास बड़ी संख्या में राज्य और केंद्रीय बलों के जवान तैनात किए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘मणिपुर के समावेशी, सतत और समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री चूड़ाचांदपुर में 7,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।'' इसमें कहा गया कि मोदी इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने प्रधानमंत्री के दौरे की शुक्रवार को पुष्टि की। राज्य का मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब विपक्षी दल कुकी और मेइती समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के बाद प्रधानमंत्री द्वारा मणिपुर का दौरा नहीं करने के लिए कई बार आलोचना कर चुके हैं। मई 2023 से हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए। गोयल ने प्रधानमंत्री के दौरे की जानकारी देते हुए बताया, ‘‘दोपहर करीब 12:15 बजे चूड़ाचांदपुर पहुंचने पर वह सबसे पहले जिले के आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) से बातचीत करेंगे। वह राज्य में शुरू की जाने वाली विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री चूड़ाचांदपुर के पीस ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।'' मुख्य सचिव ने कहा, ‘‘इसके बाद, वह अपराह्न लगभग 2:30 बजे कांगला पहुंचकर सबसे पहले आंतरिक रूप से विस्थापित कुछ लोगों से बातचीत करेंगे। वह विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री कांगला में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।'' परियोजनाओं में, प्रधानमंत्री इंफाल के मंत्रिपुखरी में 101 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए मणिपुर पुलिस मुख्यालय और उसी इलाके में 538 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित एक नागरिक सचिवालय का उद्घाटन करेंगे। चूड़ाचांदपुर से मोदी विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, जिनमें 3,647 करोड़ रुपये की जल निकासी और परिसंपत्ति प्रबंधन सुधार परियोजना और 550 करोड़ रुपये की मणिपुर इन्फोटेक डेवलपमेंट (एमआईएनडी) परियोजना शामिल है। यद्यपि मोदी के दौरे की आधिकारिक घोषणा शुक्रवार को ही की गई थी, लेकिन इसके बारे में लगभग दो सप्ताह से चर्चा जारी थी और मणिपुर सरकार ने बृहस्पतिवार शाम को एक बड़ा सूचना-पट्ट लगाया था। इसमें शनिवार को चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड और इंफाल के कांगला किले में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की घोषणा की गई थी।

मिजोरम पहुंचे पीएम मोदी, आइजोल-दिल्ली ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

 आइजोल नॉर्थईस्ट में मिजोरम और मणिपुर के लोगों के लिए शनिवार का दिन काफी बड़ा दिन है. इस दिन प्रधानमंत्री कई सारे प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने मिजोरम को हजारों करोड़ के प्रोजेक्‍ट की सौगात दी. मिजोरम की राजधानी आइजोल से उन्‍होंने तीन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई. अब नॉर्थईस्‍ट का यह महत्‍वपूर्ण राज्‍य नेशनल कैपिटल दिल्‍ली से सीधे जुड़ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिजोरम के बाद मणिपुर जाएंगे. बताया जा रहा है कि इंफाल में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. आइजोल से आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस मिजोरम के लिए वरदान से कम नहीं है. यह सप्ताह में एक दिन चलेगी और 2510 किलोमीटर का सफर 45 घंटे 30 मिनट में  पूरा करके दिल्ली पहुंचेगी. इस ट्रेन की एवरेज स्पीड 57.8 1 किलोमीटर प्रति घंटे होगी. दूसरी ट्रेन सैरंग से कोलकाता के बीच चलेगी. यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलेगी. कोलकाता से सैरंग के बीच की 1530 किलोमीटर की दूरी 31.15 घंटे में पूरी होगी. यह ट्रेन सप्ताह में शनिवार, मंगलवार और बुधवार को चलेगी. इस ट्रेन की एवरेज स्पीड 48.96 किलोमीटर प्रति घंटे होगी. पीएम मोदी ने 05609 बरबई से कोलकाता, 05610 सायरंग से गुवाहाटी ओर सायरंग से आनंद विहार टर्मिनल के बीच चलने वाली ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि बरबई से सायरंग के बीच बनी नई रेल लाइन पर्वतीय क्षेत्र होकर गुजरी है। इस क्षेत्र में रेल लाइन बनाना बड़ा दुष्कर कार्य था, लेकिन रेलवे के इंजीनियर्स और कर्मचारियों ने कठिन परिश्रम से यह कार्य पूरा कर दिखाया है। उन्होंने बताया कि इस लाइन पर 45 सुरंगे और 55 बड़े व 88 छोटे पुल हैं। 5 रोड ओवर ब्रिज और 6 रोड अंडर ब्रिज हैं। पीएम मोदी ने एक और ट्रेन का हरी झंडी दिखाई. यह ट्रेन सैरंग से गुवाहाटी के बीच चलेगी. यह ट्रेन सैरंग से दिन में 12:30 बजे प्र‍स्‍थान करेगी और आधी रात के बाद 2:30 बजे गुवाहाटी पहुंच जाएगी. इसके साथ ही एक मालगाड़ी भी सैरंग से निकलेगी जहां पर देश के दूसरे हिस्सों से जरूर की बुनियादी चीज सैरंग आएगी, जिससे कि आइजोल में कीमतें कम होगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सैरंग में सीमेंट, छड़ इत्यादि लेकर ट्रेन आएगी, जिससे कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (जो कुछ भी मिजोरम के आइजोल में चल रही है) में गति आएगी. इससे चीजों की कीमतें भी कम होंगी. बता दें कि पीएम मोदी 9:25 पर आइजोल एयरपोर्ट पहुंचेंगे और उसके बाद 10:10 पर असम राइफल्स के मैदान में पहुंचेंगे. यहां वह जनता को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी 11:10 पर असम राइफल ग्राउंड से निकलेंगे और 11:30 पर एयरपोर्ट पहुंचेंगे. पीएम मोदी 12:15 पर मणिपुर के चुरा चंद्रपुर पहुंच जाएंगे. कुतुब मीनार से भी अधिक ऊंचा पुल रिपोर्ट के मुताबिक, पुल संख्या 144 तो रेलवे पुलों में दूसरा सबसे ऊंचा पुल है। इसकी ऊंचाई दिल्ली की कुतुब मीनार से भी अधिक है। यह 114 मीटर ऊंचा यह पुल कुतुब मीनार से 42 मीटर ऊंचा है। बरबई से सायरंग के बीच की पूरी रेल लाइन हरे-भरे पहाड़ों और घाटियों के बीच होकर गुजरती है। कुमार ने बताया कि इस लाइन के बन जाने से आइजोल रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे यहां के लोगों को देश के अन्य स्थानों पर आने-जाने में बड़ी सहूलियत होगी। देश के अन्य भागों से यहां माल ढुलाई आसान हो जाएगी। यहां के उत्पाद दूसरी जगहों पर भी रेल मार्ग से भेजा जा सकेगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही यहां के लोगों की आय भी बढ़ेगी। आवागमन के साधन सुलभ हो जाने से यहां पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मणिपुर को हजारों करोड़ का प्रोजेक्‍ट प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे मणिपुर की राजधानी इंफाल सीधे नहीं जा रहे हैं. इसके बजाय वे पहले चुराचांदपुर जाएंगे, फिर इंफाल जाएंगे. चुराचांदपुर कुकी समुदाय का गढ़ है. यह वह जिला है जहां सबसे अधिक हिंसा हुई थी. हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए थे. हजारों लोग बेघर हो गए थे. प्रधानमंत्री मोदी चुराचांदपुर जाकर संदेश देना चाहते हैं. प्रधानमंत्री मोदी यहां विस्थापित लोगों से मिलेंगे. वे 7,300 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की नींव रखेंगे. चुराचांदपुर के बाद प्रधानमंत्री मोदी इंफाल जाएंगे. इंफाल मैतेई समुदाय का प्रमुख क्षेत्र है. वहां वे 1,200 करोड़ रुपये की योजनाओं का शुभारंभ करेंगे.  मिजोरम में मिलेंगे रोजगार के अवसर – पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि पहली बार मिजोरम का सैरांग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सीधे जुड़ेगा. यह सिर्फ एक रेलवे नहीं है, बल्कि परिवर्तन की जीवनरेखा है. यह मिजोरम के लोगों के जीवन और आजीविका में क्रांति लाएगी. मिजोरम के किसान और व्यवसाय देश भर के ज्यादा बाजारों तक पहुंच पाएंगे. लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बेहतर अवसर भी मिलेंगे. इस विकास से कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे. बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन एक हकीकत बन गई  मिजोरम में वर्चुअल तरीके से रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘आज से आइजोल भारत के रेलवे मैप पर होगा. कुछ साल पहले मुझे आइजोल रेलवे लाइन की आधारशिला रखने का अवसर मिला था और आज हम इसे देश के लोगों को समर्पित करते हैं. कठिन भूभाग सहित कई चुनौतियों को पार करते हुए यह बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन एक हकीकत बन गई है. हमारे इंजीनियरों के कौशल और हमारे श्रमिकों की भावना ने इसे संभव बनाया है. हमारे दिल हमेशा एक-दूसरे से सीधे जुड़े रहे हैं. पहली बार मिजोरम में सैरांग राजधानी एक्सप्रेस द्वारा दिल्ली से सीधे जुड़ेगा.’  मिज़ोरम भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा – पीएम मोदी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चाहे स्वतंत्रता आंदोलन हो या राष्ट्र निर्माण, मिज़ोरम के लोग हमेशा योगदान देने के लिए आगे आए हैं. त्याग और सेवा, साहस और करुणा, ये मूल्य मिज़ो समाज के केंद्र में हैं. आज मिज़ोरम भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. यह राष्ट्र के लिए विशेषकर मिज़ोरम के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है. आपके प्‍यार और स्‍नेह को महसूस कर रहा हूं- पीएम मोदी पीएम मोदी लाइव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं यहां … Read more

फिलिस्तीन की स्वतंत्रता के समर्थन में भारत की मजबूत आवाज, मिले स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा

न्यूयॉर्क  संयुक्त राष्ट्र महासभा में  ‘न्यूयॉर्क घोषणा’ पर ऐतिहासिक मतदान हुआ. भारत ने फिलिस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र की मांग के पक्ष में जोरदार समर्थन जताया. इस घोषणा के पक्ष में 142 देशों ने वोट दिया, जबकि 10 ने विरोध किया और 12 देशों ने मतदान से परहेज किया. भारत का यह रुख नया नहीं है. दशकों से भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है और हमेशा से फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र मान्यता दिलाने की कोशिशों के साथ खड़ा रहा है. इस बार भी भारत ने साफ संदेश दिया कि पश्चिम एशिया की स्थायी शांति तभी संभव है, जब फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिले. न्यूयॉर्क घोषणा क्या कहती है? ‘न्यूयॉर्क घोषणा ऑन द पीसफुल सेटलमेंट ऑफ द क्वेश्चन ऑफ फिलिस्तीन एंड द इंप्लीमेंटेशन ऑफ द टू-स्टेट सॉल्यूशन’ नामक इस प्रस्ताव को फ्रांस और सऊदी अरब ने पेश किया. इसमें कहा गया है कि गाजा युद्ध खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं और एक न्यायपूर्ण, स्थायी समाधान केवल दो-राष्ट्र फार्मूले से ही संभव है. घोषणा में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साफ शब्दों में 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों की निंदा की है. इसमें मांग की गई कि हमास सभी बंधकों को रिहा करे और गाजा से सत्ता छोड़कर अपने हथियार फिलिस्तीनी प्राधिकरण को सौंप दे. भारत का स्टैंड क्या है? भारत ने इस घोषणा का समर्थन कर फिर से स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ है और फिलिस्तीन के लिए न्यायपूर्ण समाधान चाहता है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत का मानना है कि हिंसा और चरमपंथ को किनारे रखकर ही क्षेत्र में शांति लाई जा सकती है. यूरोप और अरब देशों का दबाव इस घोषणा को अरब लीग पहले ही समर्थन दे चुकी है और फ्रांस ने ऐलान किया है कि 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में वह औपचारिक रूप से फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देगा. कई अन्य यूरोपीय नेताओं ने भी इसी तरह की घोषणा का संकेत दिया है. इसे इजरायल पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. इजरायल का तीखा विरोध इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को साफ कहा कि फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा कभी नहीं मिलेगा. वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को संभवतः न्यूयॉर्क सम्मेलन में वीजा नहीं दिया जाएगा.

नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव: सुशीला कार्की बनीं अंतरिम प्रधानमंत्री, कर्फ्यू और निषेधाज्ञा खत्म

 काठमांडू  हिंसा, उपद्रव और आगजनी के बाद अब नेपाल में शांति लौट रही है. राजधानी काठमांडू में सेना की ओर से लगाया गया कर्फ्यू और निषेधाज्ञा आज सुबह 5 बजे से हटा दिया गया है. अंतरिम सरकार बनने के बाद सुरक्षा बलों ने हालात को देखते हुए यह फैसला लिया. हालांकि सड़कों पर सेना की मौजूदगी अभी कुछ दिन और रहने की उम्मीद है. अंतरिम सरकार की कमान पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने संभाली है. उन्होंने कल प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राजधानी की सड़कों पर अब धीरे-धीरे सामान्य माहौल लौटता दिख रहा है. स्थानीय निवासी सुमन सिवाकोटी ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि सुशीला कार्की नेपाल के लिए एक नए युग की शुरुआत करेंगी. देश को और सुरक्षित रखने के साथ विकास को आगे बढ़ाना जरूरी है.' सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल के बीरगंज में भी लोगों को उम्मीद है कि एक भ्रष्टाचार मुक्त सरकार बनेगी और प्रधानमंत्री समेत तमाम मंत्री जो भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त हैं सब की संपत्ति की जांच होगी और नेपाल भ्रष्टाचार मुक्त होगा. होटल इंडस्ट्री को 25 अरब का घाटा पिछले दिनों हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में हिंसा के चलते हालात बिगड़ गए थे. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है. इसमें 21 प्रदर्शनकारी, 9 कैदी, 3 पुलिसकर्मी और 18 अन्य लोग शामिल हैं. हिंसा का सबसे ज्यादा असर नेपाल की होटल इंडस्ट्री पर पड़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब दो दर्जन होटलों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं से इस सेक्टर को 25 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. पुलिस मांग रही उपद्रवियों के वीडियो नेपाल पुलिस ने देशभर में हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं को लेकर जनता से सहयोग की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि जिनके पास भी इन घटनाओं से जुड़े वीडियो या सबूत हैं, वे उन्हें साझा करें ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके. इसके लिए पुलिस ने एक आधिकारिक ईमेल जारी कर ऐसे सभी वीडियो भेजने की अपील की है. हुआ क्या था? बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था. सैकड़ों प्रदर्शनकारी उनके दफ्तर में घुस गए थे और सोमवार के प्रदर्शन में हुई मौतों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे. सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध सोमवार रात को ही हटा लिया गया था. ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसा थमी नहीं और प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी दफ्तरों, राजनीतिक दलों के दफ्तरों और वरिष्ठ नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया. 1700 लोगों को आई चोटें शुक्रवार दोपहर कई मृतकों का अंतिम संस्कार काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर परिसर स्थित आर्यघाट पर बागमती नदी के किनारे किया गया. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान करीब 1,700 लोग घायल हुए. इनमें से लगभग 1,000 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक, काठमांडू घाटी में नेपाल पुलिस की गतिविधियां धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं और जिन थानों व पुलिस चौकियों को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा-फोड़ा या आग के हवाले कर दिया था, वे फिर से संचालन में आ रही हैं.

रूस में जोरदार भूकंप के झटके, सुनामी की आशंका को लेकर अमेरिका-चीन सतर्क

मॉस्को  रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया है. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 7.1 दर्ज की गई और यह समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में था. वहीं, यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भूकंप की तीव्रता 7.4 और गहराई 39.5 किलोमीटर बताई. आंकड़ों में अंतर के बावजूद, दोनों एजेंसियों ने इसे गहरा और शक्तिशाली भूकंप माना है. भूकंप के बाद पैसिफिक सुनामी वार्निंग सिस्टम ने संभावित सुनामी का अलर्ट जारी किया और कहा कि इस क्षेत्र में खतरा पैदा हो सकता है.  चीन के सुनामी वार्निंग सेंटर ने भी सुबह 10:37 बजे (बीजिंग समयानुसार) सूचना जारी करते हुए कहा कि भूकंप कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में दर्ज किया गया है. केंद्र ने भूकंप की तीव्रता 7.1 और गहराई 15 किलोमीटर बताई. स्थानीय स्तर पर सुनामी का खतरा है. जापान ब्रॉडकास्टर ने जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के हवाले से बताया कि जापान, जो कामचटका के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, ने किसी भी तरह का सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया है. सुनामी की चेतावनी पर लेटेस्ट अपडेट: पूर्वी कामचटका, रूस के पास आए भूकंप के बाद अब सुनामी का कोई खतरा नहीं है. अधिकारियों ने चेतावनी को रद्द कर दिया है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रहने के लिए सामान्य सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. भूकंप की तीव्रता और संभावित प्रभावों का अभी भी मूल्यांकन किया जा रहा है लेकिन फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है. जुलाई में 8.8 तीव्रता का दर्ज किया गया था झटका यह भूकंप उसी क्षेत्र में आया है जहां जुलाई में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली झटका महसूस किया गया था. उस समय जापान, अमेरिका और कई प्रशांत द्वीपीय देशों – जैसे हवाई, चिली और कोस्टा रिका – के लिए सुनामी चेतावनियां जारी की गई थीं. पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है कामचटका  कामचटका प्रायद्वीप भूवैज्ञानिक दृष्टि से बेहद सक्रिय क्षेत्र है और इसे पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा माना जाता है. यहां आए दिन भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं. इस इलाके में बड़े स्तर पर विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं. 1952 के भूकंप से मची थी भारी तबाही साल 1952 में कामचटका को 9.0 तीव्रता के एक भीषण भूकंप ने झकझोर दिया था. यह भूकंप अब तक दर्ज किए गए सबसे ताकतवर भूकंपों में से एक माना जाता है. उस समय भूकंप के झटकों ने भारी तबाही मचाई थी और बड़े स्तर पर सुनामी भी आई थी.

नई टेंशन अलर्ट: ब्रह्मोस मिसाइल से भारत ने चीन को दिया सशक्त संदेश

नई दिल्ली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की ताकत पूरी दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखी है। इन मिसाइलों की मदद से भारत ने पाकिस्तान को महज कुछ ही दिनों में घुटने पर ला दिया। अब चीन के एक पड़ोसी देश को भारत ब्रह्मोस मिसाइलों की तीसरी खेप देने जा रहा है। यह देश फिलीपींस है। भारत की ओर से फिलीपींस को कई ब्रह्मोस मिसाइलें मिलने की वजह से चीन की टेंशन बढ़ गई है। इससे पहले, पिछले साल की शुरुआत में भारत ने चीन को पहली और फिर इस साल मिसाइलों की दूसरी खेप भेजी थी। दोनों देशों के बीच साल 2022 में 375 मिलियन डॉलर का करार हुआ था, जिसके तहत भारत की ओर से फिलीपींस को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें दी जानी थीं। ब्रह्मोस एयरोस्पेस संयुक्त उद्यम के सीईओ और प्रबंध निदेशक जयतीर्थ जोशी ने इंडिया टुडे को बताया, "रॉकेट तैयार हैं। हम उन्हें समय पर डिलिवर कर देंगे।" फिलीपींस को ये मिसाइलें उस समय दी जा रही हैं, जब पिछले कुछ सालों से दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ा है। चीन इस सागर पर अपना हक जमाता है, जिसकी वजह से अमेरिका जैसे देशों से भी उसका विवाद हो चुका है। फिलीपींस इन मिसाइलों को किसी भी खतरे से बचने के लिए तटीय क्षेत्रों में ही तैनात किया जाएगा। ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से भी तेज उड़ती है। इससे दुश्मनों के रडार को इसे ट्रैक करने में काफी मुश्किल आती है और यह लक्ष्यों को भेदने में कामयाब रहती है। एक बार लॉन्च किए जाने के बाद मिसाइल को किसी इंसानों के इनपुट की जरूरत नहीं पड़ती है। इसकी रेंज की बात करें तो पहले यह 290 किलोमीटर तक की थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 450 से 800 किलोमीटर तक कर दिया गया है। इन्हीं मिसाइलों के जरिए ऑपरेशन सिंदूर में रावलपिंडी, सरगोधा, भोलारी और नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया था।  

जापान की नेवी ने रचा इतिहास! इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन 8000 KM की स्पीड से करती है वार

टोक्यो  जापान ने अपनी नेवी के जहाज से पहली बार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन फायरिंग का सफल टेस्ट कर इतिहास रच दिया है. समुद्र में तैनात टारगेट शिप पर दागे गए इस ‘शॉक वेपन’ ने साफ कर दिया कि परंपरागत तोप-गोलों का जमाना अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है. जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, तकनीक और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने खुलासा किया कि जून से जुलाई के बीच टेस्ट शिप JS Asuka से रेलगन के ट्रायल किए गए. चार तस्वीरें जारी करते हुए ATLA ने लिखा, ‘यह पहली बार है जब किसी वारशिप से रेलगन का टेस्ट किया गया और वह भी सीधे एक असली जहाज पर.’ क्या है रेलगन? रेलगन बारूद नहीं, बल्कि बिजली की ताकत से गोला दागती है. प्रोजेक्टाइल को इतनी गति मिलती है कि वह परंपरागत तोपों से कहीं अधिक दूरी और शक्ति के साथ टारगेट भेदता है. जापान की यह रेलगन करीब Mach 6.5 की स्पीड यानी आवाज की रफ्तार से साढ़े छह गुना (8,000 किलोमीटर प्रति घंटा) तक प्रोजेक्टाइल दाग सकती है. खास बात यह कि 120 लगातार फायरिंग के बाद भी बैरल की स्पीड में गिरावट दर्ज नहीं हुई. चीन और अमेरिका भी इस टेक पर लगे चीन भी इसी तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है और उसके पास सतत फायरिंग के सफल टेस्ट की खबरें आई हैं, लेकिन वह इसे अब तक तैनात नहीं कर पाया है. अमेरिका ने भी एक समय रेलगन प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन 2021 में तकनीकी चुनौतियों और लागत के चलते इसे बंद कर दिया. वहीं जापान अब इस हथियार को वास्तविक तैनाती की दिशा में सबसे आगे निकल आया है. क्यों इतनी खास है यह तकनीक? डिफेंस एक्सपर्ट मसाशी मुरानो ने जापान टाइम्स को बताया कि हाई-स्पीड एंटी-शिप मिसाइलों को परंपरागत मिसाइलों से इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है. रेलगन इस चुनौती का जवाब हो सकता है. इसके दागे प्रोजेक्टाइल न सिर्फ बेहद तेज होते हैं, बल्कि पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में सस्ते भी हैं. जहां एयर डिफेंस मिसाइल की एक शॉट की कीमत करोड़ों-करोड़ होती है, वहीं रेलगन अपेक्षाकृत किफायती है. इसके अलावा, रेलगन से एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए ‘एयरबर्स्ट म्युनिशन’ भी विकसित किए जा रहे हैं, जो हवा में ही फटकर घातक टुकड़े छोड़ते हैं. यह मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में बेहद कारगर हो सकता है. जापान रेलगन को सिर्फ नौसैनिक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहता. योजना है कि इसे जमीन पर भी तैनात किया जाए, ताकि दुश्मन के आर्टिलरी यूनिट्स को निशाना बनाया जा सके और तटीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके. ATLA अब प्रोजेक्टाइल की उड़ान स्थिरता, फायर-कंट्रोल सिस्टम और सतत फायरिंग क्षमता को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. हालांकि, अभी तक इसकी अधिकतम रेंज और रैपिड फायर की क्षमता उजागर नहीं की गई है.