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नए सभापति सीपी राधाकृष्णन: शपथ ग्रहण कर किया कार्यभार ग्रहण

नई दिल्ली सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीपी राधाकृष्णन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संभाला। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने शुक्रवार को औपचारिक रूप से राज्यसभा के सभापति का पदभार ग्रहण किया। साथ ही एक्स पर सीपी राधाकृष्णन के पदभार ग्रहण करते हुए तस्वीरें भी शेयर की गई हैं। इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की तथा राष्ट्रपिता और उनके सत्य एवं अहिंसा के शाश्वत आदर्शों का सम्मान किया। उन्होंने सदैव अटल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राधाकृष्णन ने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय के स्मारक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने किसान घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनको नमन किया। साथ ही उन्होंने संसद भवन स्थित प्रेरणा स्थल पर महान विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने संसद भवन परिसर में एक पौधा भी लगाया और देश की समृद्ध विरासत एवं एक सतत भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन ने जगदीप धनखड़ की जगह ली है। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत थे। सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद रहे।

सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक: प्रदूषण रोकने के लिए पूरे भारत में लागू हों सख्त नियम

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर शुक्रवार को कड़ी टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई ने कहा कि अगर दिल्ली-एनसीआर (एनसीआर) के लोगों को स्वच्छ हवा का अधिकार है, तो दूसरे शहरों के निवासियों को क्यों नहीं? उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियां सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रह सकतीं, बल्कि पैन-इंडिया स्तर पर लागू होनी चाहिए। बेंच की सुनवाई के दौरान, जिसमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे, सीजेआई बी.आर. गवई ने पटाखा निर्माताओं की उस याचिका पर विचार किया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूरे साल के लिए लगे प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी। बेंच ने कहा, "हम दिल्ली के लिए अलग नीति नहीं बना सकते, सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां देश का संभ्रांत वर्ग रहता है।" सीजेआई ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया, "मैं पिछले साल सर्दियों में अमृतसर गया था। वहां प्रदूषण की स्थिति दिल्ली से भी बदतर थी। अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो यह पूरे देश में लगना चाहिए।" कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब एमिकस क्यूरिए एडवोकेट अपराजिता सिंह ने दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की भयावह स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली एक लैंडलॉक्ड शहर है, जहां हवा में प्रदूषक फंस जाते हैं, जिससे स्थिति चोकिंग लेवल तक पहुंच जाती है। लेकिन, सिंह ने स्वीकार किया कि एलीट वर्ग प्रदूषण के चरम दिनों में शहर छोड़ देता है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या नीतियां सिर्फ अमीरों के लिए बनाई जा रही हैं? बेंच ने स्पष्ट किया कि सभी नागरिकों को स्वच्छ हवा का समान अधिकार है, चाहे वे किसी भी शहर में रहें। इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर एक्शन लिया, जिसमें पटाखों पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) को नोटिस जारी किया और दो हफ्तों में जवाब मांगा। यह नोटिस दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं के संदर्भ में भी जारी किया गया।

सोशल मीडिया से सड़कों तक: नेपाल में जेन-जेड की नई आंदोलनकारी ताकत

काठमांडू पिछले चार साल में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हुई उथल-पुथल के बीच सोशल मीडिया का मेगाफोन के रूप में उपयोग किया जाना चर्चा का विषय है। ये सामाजिक दरार को दर्शाता है, साथ ही जवाबदेही की मांग भी उठाता है। पुणे स्थित एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग एंड जर्नलिज्म के प्रभारी निदेशक डॉ. संबित पाल ने बताया, "जेनरेशन जेड 'डिजिटल नेटिव' हैं जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ पले-बढ़े हैं और इसलिए इस प्लेटफॉर्म की बारीकियों से वाकिफ हैं।" नेपाल में युवा प्रदर्शनकारियों ने जेन जी या जनरेशन जेड का इस्तेमाल किया। ये शब्द 1997 और 2012 के बीच पैदा हुए लोगों के लिए प्रयोग में लाया जाता है। उन्होंने आगे कहा, "सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने उन्हें मेनस्ट्रीम मीडिया को दरकिनार कर, अपने नैरेटिव सेट करने और शासन संबंधी मुद्दों पर मिलजुलकर राय व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया है।" अध्ययनों से पता चलता है कि सोशल मीडिया अभियान मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को बढ़ावा दे सकते हैं, और जब पारंपरिक मीडिया सीमित दायरे में काम करती है तो नागरिक संवाद को बनाए रख सकते हैं। मीडिया स्किल्स लैब के संस्थापक-निदेशक जॉयदीप दास गुप्ता ने कहा, "अरब विद्रोह से लेकर दक्षिण एशियाई देशों के आंदोलनों तक, प्रदर्शनकारियों ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया है, जो संचार का एक शक्तिशाली माध्यम है, जिसमें न्यूनतम खर्च में अधिकतम पहुंच है।" मीडिया स्किल्स लैब एक शैक्षिक-शोध संस्थान है जो मीडिया साक्षरता, फैक्ट-चैक, एआई साक्षरता, डेटा जर्नलिज्म और सोल्यूशन जर्नलिज्म पर केंद्रित है। फोर्ब्स कम्युनिकेशंस काउंसिल की एक पोस्ट के अनुसार, "सभी सोशल मीडिया चैनल एक जैसे नहीं बनाए जाते। प्रत्येक प्लेटफॉर्म के अपने विशिष्ट यूजर समूह होते हैं, जिनकी सामग्री के साथ बातचीत करने की अपनी विशिष्टताएं होती हैं।" लेख 13 प्रैक्टिस पर प्रकाश डालती है, जिनमें व्यवसाय की प्रकृति को पहचानना, कोर टारगेट ऑडियंस दर्शकों पर फोकस करना, ग्राहक जनसांख्यिकी, प्रतिस्पर्धियों पर शोध आदि शामिल हैं। ज्यादातर बातें चीनी रणनीतिकार और दार्शनिक सुन त्जु की शिक्षाओं जैसी लग सकती हैं, जिन्होंने अपने दुश्मन को जानने के महत्व पर जोर दिया था। दास गुप्ता ने बताया, "इंटरनेट के लोकतंत्रीकरण के साथ, पहुंच आसान हो गई है। संदेश का प्रसार तुरंत होता है और आंदोलन गति पकड़ लेता है।" जब विद्रोह का सामना करना पड़ता है, तो सरकारें आमतौर पर संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया हैंडल या इंटरनेट पर ही प्रतिबंध लगा देती हैं। 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान, श्रीलंका ने आपातकाल की घोषणा करके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर कर्फ्यू लगा दिया था। तत्कालीन बांग्लादेश सरकार ने भी लगभग इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी, जबकि नेपाल में, राजधानी काठमांडू की सड़कों पर हिंसा भड़कने के साथ प्रतिबंध हटा लिया गया था। हालांकि, जैसा कि घटनाओं से पता चलता है, अधिकारी आपातकालीन समय को छोड़कर वेब सामग्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते। ये प्लेटफॉर्म निजी स्वामित्व वाले हैं, और इंटरनेट पर पुलिस की निगरानी का सुझाव भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा डालने के आरोपों को जन्म देता है। लेकिन ऐसे हैंडल के एल्गोरिदम यह तय कर सकते हैं कि लोग क्या देखें और क्या नहीं। ऐसे एल्गोरिदम वाले कानूनों का इस्तेमाल करते हुए, बाल शोषण, हिंसा और झूठी कहानियों के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए एक 'स्टैच्यूरी बिल्डिंग कोड' बनाने की सिफारिश की गई है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए अनिवार्य सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी जरूरतें शामिल हैं। लेकिन विशेषज्ञों का ये भी मत है कि राजनीतिक और सामाजिक संदेशों को बाध्य नहीं किया जा सकता और न ही किया जाना चाहिए।

भारी बारिश से तबाही: हिमाचल में सैकड़ों सड़कें ठप, 215 लोगों की जान गई

शिमला हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर जारी है। राज्य के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को बताया कि भले ही कई सड़कों की बहाली पूरी कर ली गई है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में मार्ग क्षतिग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 583 लिंक रोड और 3 राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए बंद पड़े हैं। इसके साथ ही 806 डीटीआर मार्ग और 364 जल आपूर्ति योजनाएं (WSS) बाधित हैं। मंत्री नेगी ने बताया कि इस बार मानसून सीजन के दौरान 215 लोगों की जान गई है, जिनमें से 165 मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुई हैं।

देशभर में ताज़ा फल पहुंचाने को रेल मंत्रालय का बड़ा कदम, फेडरेशन ने जताया आभार

सोपोर  ट्रेडर्स फेडरेशन सोपोर के अध्यक्ष ने कश्मीर से दिल्ली तक ताजा फलों की ढुलाई के लिए दो विशेष रेलगाड़ियाँ शुरू करने के सरकारी फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक सही समय पर लिया गया फैसला बताया, जो फल उगाने वाले किसानों और व्यापारियों के लिए राहत की बात है। उन्होंने कहा कि इससे कश्मीर की अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा, जो मुख्य रूप से बागवानी (फल उत्पादन) और पर्यटन पर निर्भर है। मीडिया से बात करते हुए अध्यक्ष ने कहा, "हमारी पूरी अर्थव्यवस्था दो चीज़ों पर टिकी है – पर्यटन और फल उद्योग। हाल ही में कुछ इलाकों में बाढ़ आई और सड़कों का संपर्क टूट गया, जिससे श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर गाड़ियां फंस गईं। ऐसे में फल देर से मंडी तक पहुंचते हैं, जिससे किसानों को बहुत नुकसान होता है। ऐसे समय पर यह रेल सेवा एक बड़ी राहत है।" उन्होंने माननीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद करते हुए कहा क "कश्मीर से दिल्ली तक ताज़ा फलों की ढुलाई के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय सराहनीय है। इससे फल समय पर मंडी तक पहुंचेंगे और किसानों को फायदा मिलेगा। यह कश्मीर की पूरी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।" अध्यक्ष ने आगे कहा कि इस तरह के कदमों से व्यापारियों और किसानों का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह आगे भी व्यापारियों के हित में फैसले लेते रहे, ताकि किसानों की आमदनी सुरक्षित रहे और कश्मीर की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे।

स्टारलिंक को लेबनान में लाइसेंस, अब देशभर में चलेगा हाई-स्पीड इंटरनेट

लेबनान  लेबनान ने संकटग्रस्त देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए एलन मस्क की स्टारलिंक को लाइसेंस जारी किया है। सूचना मंत्री पॉल मोरकोस ने बृहस्पतिवार रात मंत्रिमंडल बैठक के बाद यह घोषणा की। मोरकोस ने कहा कि स्टारलिंक मस्क की एक अन्य कंपनी स्पेसएक्स की ओर से संचालित उपग्रहों के माध्यम से पूरे लेबनान में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराएगी। मस्क ने तीन महीने पहले लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से फोन पर बात की थी और देश के दूरसंचार तथा इंटरनेट क्षेत्रों में काम करने की दिलचस्पी जताई थी। मंत्रिमंडल बैठक के दौरान सरकार ने देश के बिजली और दूरसंचार क्षेत्रों के लिए नियामक प्राधिकरणों की स्थापना की घोषणा की। लेबनान में भ्रष्टाचार से ग्रस्त ऊर्जा क्षेत्र के लिए नियामक प्राधिकरण की स्थापना करना अंतरराष्ट्रीय संगठनों की एक प्रमुख मांग रही है। बिजली क्षेत्र के लिए नियामक प्राधिकरण की नियुक्ति लगभग 20 वर्ष पहले हो जानी चाहिए थी, लेकिन देश की प्राधिकृत संस्थाओं द्वारा बार‑-बार विलंब किया जाता रहा। इस कदम को लेबनान के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जो इस छोटे भूमध्यसागरीय देश में हर साल एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की बर्बादी करता है। सरकार द्वारा संचालित इलेक्ट्रिसिटी दु लिबान (ईडीएल) को लेबनान की सबसे अपव्ययी संस्थाओं में से एक माना जाता है, जो राजनीतिक हस्तक्षेप से भी बुरी तरह प्रभावित है। वर्ष 1975 से 1990 तक चले गृह युद्ध की समाप्ति के बाद से यह सरकारी खजाने को लगभग 40 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा चुकी है।  

डोनाल्ड ट्रंप की जानकारी में गिरफ्तारी: चार्ली किर्क को गोली मारने वाला आरोपी अब कानून के हाथों

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बताया है कि अमेरिका के दक्षिणपंथी कार्यकर्ता चार्ली किर्क का संदिग्ध हत्यारा पकड़ा गया है। ट्रंप ने कहा है कि बड़े पैमाने पर चलाए गए तलाशी अभियान के बाद हत्या के संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक लाइव स्टूडियो इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी कहा है कि संदिग्ध के किसी करीबी ने ही उसे पकड़वाया है। ट्रंप ने बताया, "ट्रंप ने बताया, “मुझे पूरा यकीन है कि वह हमारी हिरासत में है। उसके किसी बेहद करीबी ने ही उसे पकड़वाया है।” गौरतलब है कि बीते बुधवार को ट्रंप के करीबी सहयोगी और रूढ़िवादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की अमेरिका के यूटा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। किर्क यूटा वैली विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गोलीबारी से ठीक पहले चार्ली किर्क एक दर्शक द्वारा भीड़ पर गोलीबारी करने और हिंसा के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। तभी हमलावर ने परिसर की एक छत से गोली चला दी। फरार हो गया था हमलवार इससे पहले अधिकारियों ने बताया था कि गोली चलने से मची भगदड़ के बीच हमलवार फरार हो गया था। इसके बाद फेडरल, राज्य और स्थानीय अधिकारी हमलावर की तलाश में जुटे थे। जांच एजेंसी FBI ने बताया था कि जिस इलाके से किर्क पर हमले का संदिग्ध भागा था, वहां से एक अत्याधुनिक राइफल बरामद की गई है। अधिकारियों को अभी तक हत्या के मकसद का भी पता नहीं चल पाया है। हालांकि अब डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद इससे पर्दा उठ सकता है। चार्ली किर्क की मौत पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति? इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने 31 वर्षीय चार्ली किर्क की मौत पर दुख जताया था। उन्होंने किर्क की प्रशंसा करते हुए उन्हें महान व्यक्ति भी कहा था। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा था, ‘‘चार्ली से बेहतर अमेरिका के युवाओं को कोई नहीं समझता था और न ही उनसे दिल से जुड़ पाता था।’’ वहीं यूटा के गवर्नर स्पेंसर कॉक्स ने इस घटना को राजनीतिक हत्या करार दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे राज्य के लिए एक काला और देश के लिए एक दुखद दिन है। मैं इसे स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक हत्या ही कहूंगा।’’  

स्पाइसजेट विमान का पहिया अचानक गिरा, मुंबई की उड़ान पर सवार 75 यात्री डरे

मुंबई गुजरात के कांडला से मुंबई जा रहे स्पाइसजेट के विमान के साथ शुक्रवार को हादसा हो गया। विमान के उड़ान भरते ही एक पहिया टूटकर नीचे जमीन पर गिर गया। फ्लाइट में 75 लोग सवार थे। हालांकि, गनीमत यह रही कि विमान मुंबई में सुरक्षित लैंड कर गया। पहिए के नीचे गिरने की जानकारी कांडला एटीसी ने दी, जिसके बाद मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी घोषित कर दी गई। शाम तकरीबन चार बजे विमान की मुंबई में सुरक्षित लैंडिंग हो गई। पहिए के जमीन पर गिरते ही पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को मुंबई के रनवे पर लैंड कराया। शाम पांच बजे तक मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी की घोषणा की गई, ताकि विमान को किसी भी तरह सुरक्षित नीचे उतारा जा सके। स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने बताया, ''12 सितंबर को, कांडला से मुंबई जा रहे स्पाइसजेट Q400 विमान का एक बाहरी पहिया उड़ान भरने के बाद रनवे पर पाया गया।'' उन्होंने आगे कहा, ''विमान ने मुंबई की अपनी यात्रा जारी रखी और सुरक्षित रूप से उतर गया। सुचारू लैंडिंग के बाद, विमान टर्मिनल तक पहुंचा और सभी यात्री सामान्य रूप से उतर गए।'' वहीं, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने कहा, "कांडला एटीसी ने कुछ गिरता हुआ देखा। उड़ान के बाद, उन्होंने पायलट को इसकी जानकारी दी और एटीसी जीप को गिरी हुई चीज लाने के लिए भेजा गया।'' जब एटीसी की टीम वहां पहुंची तो मेटल के छल्ले और एक पहिया जमीन पर पाया गया। जमीन पर गिरे पहिए और एक मेटल के धातू की तस्वीर भी सामने आई है। विमान का पहिया एयरपोर्ट में हरी घास पर पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि मेटल के धातू को संभवत: एटीसी से जुड़े किसी शख्स ने हाथों से पकड़ा हुआ है। पिछले दिनों, सिंगापुर जाने वाले एअर इंडिया के एक विमान में तकनीकी समस्या आ गई थी। विमान में सवार 200 से अधिक यात्रियों को दिल्ली हवाई अड्डे पर परेशानी का सामना करना पड़ा था, जब केबिन में तापमान की समस्या के कारण पहले उन्हें विमान से नीचे उतार दिया गया और फिर करीब छह घंटे की देरी के बाद उड़ान भरी गई। बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर विमान से संचालित उड़ान संख्या एआई2380 को बुधवार रात लगभग 11 बजे दिल्ली हवाई अड्डे से उड़ान भरनी थी। एअर इंडिया ने अपने बयान में कहा था कि दिल्ली से सिंगापुर जाने वाली उड़ान संख्या एआई2380 में प्रस्थान से पहले केबिन कूलिंग संबंधी समस्या के कारण देरी हुई।  

बाढ़ से पाकिस्तान में हाहाकार, राहत-बचाव के हालात भी बदतर

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी है। देश के कई हिस्सों में बाढ़ का गंभीर संकट बना हुआ है। अब तक बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं में 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लाखों लोग बेघर हो चुके हैं और राहत कार्य लगातार जारी है। पंजाब प्रांत से 20 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि सिंध प्रांत में 1.5 लाख से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है। राहत एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। नदियां उफान पर, गांवों में तबाही भारी बारिश के कारण सतलुज, चिनाब और रावी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इसके अलावा, सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में खेत और घर बर्बाद हो चुके हैं, जिससे लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पाकिस्तान की करीब 40% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीती है। ऐसे में बाढ़ की मार ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। कई लोग अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए अब भी घरों में रुके हुए हैं और अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। रेस्क्यू के दौरान भी हादसे, 9 की मौत बचाव दल लगातार नावों के जरिए लोगों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। लेकिन तेज बहाव के चलते कई बार ये नावें पलट भी जाती हैं। मंगलवार को सिंधु नदी में एक नाव पलटने से 9 लोगों की मौत हो गई। कुछ दिन पहले जलालपुर पीरवाला में भी ऐसा ही हादसा हुआ था, जिसमें 5 लोगों की जान चली गई थी। पाकिस्तान की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के मुताबिक, पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत के तौर पर कंबल, टेंट और वॉटर फिल्टर जैसी जरूरी चीजें पहुंचाई गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दी ₹41.5 करोड़ की मदद पाकिस्तान की बिगड़ती हालत को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने इस हफ्ते 5 मिलियन डॉलर (करीब 41.5 करोड़ रुपये) की आपातकालीन सहायता दी है। पाकिस्तान का भौगोलिक ढांचा इसे बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनाता है। पिघलते ग्लेशियरों से बनी नई झीलों के फटने का भी खतरा बना हुआ है।

मॉनसून फेरे का अलर्ट: 15 सितंबर के आसपास आएगी बारिश की विदाई, जानिए अगले कुछ दिन का हाल

नई दिल्ली  भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी शुरू कर सकता है। मानसून आमतौर पर एक जून तक केरल में दस्तक देता है और आठ जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से लौट जाता है। आईएमडी ने एक बयान में कहा, ‘‘15 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं।'' इस वर्ष, मानसून आठ जुलाई की सामान्य तिथि से 9 दिन पहले ही पूरे देश में पहुंच गया था। 2020 के बाद से यह सबसे जल्दी आया मानसून था, जिसने पूरे देश को कवर किया था। उस साल यह 26 जून तक पूरे देश में पहुंच चुका था। यह 24 मई को केरल पहुंचा था, जो 2009 के बाद से भारत में इसका सबसे जल्दी आगमन था। 2009 में मानसून ने 23 मई को केरल में दस्तक दी थी। देश में अब तक मानसून के मौसम में 778.6 मिमी की सामान्य वर्षा के मुकाबले 836.2 मिमी वर्षा हुई है, जो 7 प्रतिशत अधिक है। मई में, आईएमडी ने अनुमान लगाया था कि भारत में जून-सितंबर मानसून के मौसम के दौरान 87 सेंटीमीटर की दीर्घकालिक औसत वर्षा की 106 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। इस 50-वर्षीय औसत के 96 और 104 प्रतिशत के बीच वर्षा को ‘सामान्य' माना जाता है। मानसून भारत में कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जो लगभग 42 प्रतिशत आबादी की आजीविका का समर्थन करता है और सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान देता है। यह पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक जलाशयों को पुनः भरने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।